आर.बी.आई/एफईडी/2015-16/17
एफईडी मास्टर निदेश नं.03/2015-16
01 जनवरी 2016
(06 मई 2026 को अद्यतन)
(02 अप्रैल 2026 को अद्यतन)
(28 नवम्बर 2025 को अद्यतन)
(29 मई 2024 को अद्यतन)
(29 फरवरी 2024 को अद्यतन)
(04 मार्च 2022 को अद्यतन)
(29 मार्च 2019 को अद्यतन)*
विदेशी मुद्रा विनिमय के सभी प्राधिकृत व्यापारी
महोदया/ महोदय
मास्टर निदेश - मुद्रा परिवर्तन संबंधी गतिविधियाँ
विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 की धारा 10(1) के अनुसार रिज़र्व बैंक, आवेदन प्राप्त होने पर किसी व्यक्ति को ऐसे प्राधिकृत व्यक्ति के रूप में जो विदेशी मुद्रा कारोबारी, मुद्रा परिवर्तक या अपतटीय बैंकिंग यूनिट के रूप में अथवा ऐसे किसी अन्य रूप में जो उसे उचित लगे, कार्य करने के लिए प्राधिकृत व्यापारी के रूप में पहचाने जाने हेतु प्राधिकृत कर सकता है।
2. [लोपित]1
3. मुद्रा परिवर्तन गतिविधियों और विदेशी मुद्रा लेनदेन से संबंधित निदेशों को समेकित करते हुए विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 10(4) तथा धारा 11(1) के तहत इसके साथ संलग्न मास्टर निदेश के रूप में जारी किया जा रहा है और यह किसी अन्य कानून के अंतर्गत अपेक्षित अनुमतियों/ अनुमोदनों, यदि कोई हों, पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बगैर जारी किया जा रहा है।2
4. जिन अंतर्निहित अधिसूचनाओं/ परिपत्रों के आधार पर यह मास्टर निदेश तैयार किया गया है, उनकी सूची परिशिष्ट में दी गई है। रिपोर्टिंग संबंधी अनुदेश समय-समय पर संशोधित 1 जनवरी 2016 के ”मास्टर निदेश- विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम,1999 के अंतर्गत रिपोर्टिंग” में उपलब्ध हैं। आवश्यकता होने पर प्राधिकृत व्यक्ति विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित परिपत्र/ अधिसूचना का संदर्भ ले सकते हैं।
5. यह नोट किया जाए कि आवश्यकता पड़ने पर, रिज़र्व बैंक नियमों, विनियमों, अधिसूचनाओं, निदेशों या आदेशों अथवा अपने ग्राहकों/ घटकों के साथ प्राधिकृत व्यक्तियों द्वारा किए जाने वाले लेनदेन के तरीकों में होने वाले किसी भी परिवर्तन के बारे में प्राधिकृत व्यक्तियों को ए.पी. (डीआईआर सीरीज़) के माध्यम से निदेश जारी करेगा। साथ-साथ इसके साथ जारी किए जा रहे मास्टर निदेश में भी संशोधन किया जाएगा।
भवदीय
(एन सेंथिल कुमार)
मुख्य महाप्रबंधक
* चूंकि इस मास्टर निदेश में कई संशोधन किए गए हैं, इसलिए पाठक की सुविधा के लिए परिवर्तनों को ट्रैक मोड में दर्शाने के बजाय इसे प्रतिस्थापित कर दिया गया है। पिछला मास्टर निदेश - मुद्रा परिवर्तन संबंधी गतिविधियाँ दिनांक 1 जनवरी 2016 (8 दिसंबर 2017 को अद्यतन)
अनुक्रमणिका
मास्टर निदेश- मुद्रा परिवर्तन गतिविधियां
खंड-I
1. परिचय
विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 की धारा-10 के तहत रिज़र्व बैंक द्वारा प्राधिकृत की गयी संस्थाओं द्वारा ही मुद्रा परिवर्तन का कार्य किया जा सकता है तथा वैध लाइसेंस के बिना मुद्रा परिवर्तन का कारोबार करने वाला व्यक्ति इस अधिनियम के तहत दंड का पात्र होगा।
इस दस्तावेज़ में संपूर्ण मुद्रा परिवर्तक (एफ़एफ़एमसी), गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II एवं प्राधिकृत व्यक्तियों के कामकाज सहित मुद्रा परिवर्तन गतिविधियों के विषय से संबंधित विभिन्न अनुदेशों के साथ-साथ अपने ग्राहकों/ घटकों के साथ विदेशी मुद्रा लेनदेन से संबधित अनुदेश भी शामिल किए गए हैं।3
2. [लोपित]4
3. [लोपित]5
खंड-II
[लोपित]6
खंड-III
प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक, प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II एवं एफएफएमसी द्वारा एजेंटों/ फ्रेचाइजियों की नियुक्ति हेतु दिशानिर्देश
1. इस योजना के तहत रिज़र्व बैंक ने प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक, प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II एवं एफएफएमसी को अपने विकल्प पर सीमित मुद्रा परिवर्तन कारोबार अर्थात विदेशी मुद्रा नोट, सिक्कों अथवा यात्री चेक का भारतीय रुपए में परिवर्तन करने के लिए करार करने की अनुमति दिया था। तथापि, पाकिस्तान एवं बांग्लादेश की सीमा से 10 किमी के अंदर प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक/ प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II / एफएफएमसी सीमावर्ती देशों की मुद्रा भारतीय रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय की पूर्वानुमति से बेच सकते हैं। प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक/ प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II/ एफएफएमसी के अन्य फ्रेंचाइजी विदेशी मुद्रा नहीं बेच सकते हैं। इन निदेशों में किसी भी बात के होते हुए भी, कोई भी प्राधिकृत व्यक्ति अब से कोई भी नया फ्रैंचाइज़ी करार नहीं करेगा, और मौजूदा फ्रैंचाइज़ी करारों को धीरे-धीरे, लेकिन दिनांक 06 मई 2026 से दो साल के भीतर, समाप्त करेगा ।7
2. कोई भी ऐसी संस्था जिसके पास कारोबार का स्थान हो एवं रु. 10 लाख की न्यूनतम निवल मालियत हो वह फ्रेंचाइजी हो सकती है। फ्रेंचाइजी केवल सीमित मुद्रा परिवर्तन कारोबार कर सकते हैं।
3. फ्रेंचाइजी करार
फ्रेंचाइज़र्स के रूप में प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक/ प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II/ एफएफएमसी करार की अवधि और साथ ही कमीशन या शुल्क के बारे में भी फ्रेंचाइजी के साथ आपसी सहमति के साथ करार करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
एजेंसी/ फ्रेंचाइजी किए जाने वाले करार के निम्नलिखित महत्वपूर्ण विशेषताएं शामिल होनी चाहिए:-
(ए) फ्रेंचाइजी को अपने फ्रेंचाइजर का नाम, विनिमय दर के साथ-साथ अपने कार्यालय में यह तथ्य स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना चाहिए कि वह केवल विदेशी मुद्रा खरीदने के लिए अधिकृत है। विदेशी मुद्रा की रुपए में विनिमय दर प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक/ प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II / एफएफएमसी की शाखाओं की दैनिक विनिमय दर के समान हो या उसके आस-पास ही हो।
(बी) फ्रेंचाइजी द्वारा खरीदी गई विदेशी मुद्रा इसे अपने फ्रेंचाइजर के पास खरीद की तारीख से 7 कार्य दिवसों के भीतर जमा कर देनी चाहिए।
(सी) फ्रेंचाइजी द्वारा लेनदेन का समुचित रिकॉर्ड रखना चाहिए।
(डी) फ्रेंचाइजर द्वारा फ्रेंचाइजी का वर्ष में कम-से-कम एक बार ऑन-साइट निरीक्षण किया जाना चाहिए।
4. [लोपित]8
5. फ्रेंचाइजी के संबंध में बरती जाने वाली सावधानी
प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक/ प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II/ एफएफएमसी फ्रेंचाइजी के संबंध में सावधानी बरतते हुए निम्नवत न्यूनतम जांच अवश्य करें:-
i. फ्रेंचाइजी के वर्तमान कारोबार की गतिविधियां/ इस क्षेत्र में उसकी स्थिति।
ii. फ्रेंचाइजी की न्यूनतम निवल स्वामित्व वाली निधि।
iii. फ्रेंचाइजी के पक्ष में शॉप्स एंड एस्टाब्लिशमेंट/ नगरपालिका के अन्य लागू प्रमाणपत्र।
iv. जिस स्थान पर फ्रेंचाइजी सीमित मुद्रा परिवर्तन का कार्य करेगी उस स्थान के अस्तित्व का भौतिक सत्यापन।
v. स्थानीय पुलिस प्राधिकारियों से फ्रेंचाइजी का आचरण प्रमाणपत्र (निगमित संस्थाओं के संबंध में संस्था के बहिर्नियम एवं निगमन प्रमाणपत्र की सत्यापित प्रतिलिपि)।
नोट:- स्थानीय पुलिस प्राधिकारियों से फ्रेंचाइजी का आचरण प्रमाणपत्र हासिल करना फ्रेंचाइजर के लिए वैकल्पिक होगा। तथापि, फ्रेंचाइजर के रूप में व्यक्तियों/ संस्थाओं को नियुक्त करते समय फ्रेंचाइजर इस बारे में समुचित सावधानी बरतें कि इनके विरुद्ध किसी भी विधि प्रवर्तक एजेंसी द्वारा कोई मामला न हो/ कार्यवाही शुरू न की हो/ मामला लंबित न हो।
vi. फ्रेंचाइजी या इसके निदेशकों/ साझेदारों के विरुद्ध किसी भी विधि प्रवर्तक एजेंसी द्वारा कोई पिछला आपराधिक मामला हो, शुरू किए गए मामले/ लंबित मामलों की घोषणा।
vii. फ्रेंचाइजी एवं इसके निदेशकों/ साझीदारों के पैन कार्ड।
viii. फ्रेंचाइजी के निदेशकों/ साझीदारों एवं मुख्य व्यक्तियों के फोटोग्राफ।
ये जांच नियमित आधार पर किन्तु वर्ष में कम-से-कम एक बार की जाए। प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक/ प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II/ एफएफएमसी साइट का व्यक्तिगत तौर पर दौरा करने के अलावा फ्रेंचाइजी के स्थान की पुष्टि के लिए समुचित दस्तावेजी सबूत भी हासिल करें। प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक/ प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II/ एफएफएमसी सनदी लेखाकार से इस आशय का प्रमाणपत्र भी हासिल करे कि फ्रेंचाइजी के निवल स्वामित्व में अनवरत आधार पर रु. 10 लाख की निधियां रहती हैं।
6. केंद्रों का चयन
(i) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक/ प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II/ एफएफएमसी अपनी संबंधित नियंत्रक शाखाओं से 100 किमी के दायरे में फ्रेंचाइजी नियुक्त कर सकते हैं।
(ii) तथापि, फ्रेंचाइजी के रूप में नियुक्त मान्यताप्राप्त समूहों/ होटलों की श्रृंखलाओं के मामले में दूरी के मानक में छूट है बशर्ते समूह/ होटल की श्रृंखला का मुख्यालय संबंधित प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक/ प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II/ एफएफएमसी (फ्रेंचाइजर) के 100 किमी के दायरे में हो।
(iii) इसके अलावा, ऐसे क्षेत्र जो पहाड़ी क्षेत्र के रूप में घोषित (संबंधित राज्य सरकार/ संघशासित प्रदेश द्वारा यथा परिभाषित) हो एवं उत्तर-पूर्वी राज्यों पर उक्त मद संख्या (i) में दूरी से संबंधित प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
7. प्रशिक्षण
फ्रेंचाइजरों से अपेक्षित है कि वे अपनी फ्रेंचाइजी को परिचालनों एवं रिकॉर्ड के रखरखाव का प्रशिक्षण दें।
8. रिपोर्टिंग, लेखा-परीक्षा एवं निरीक्षण
प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक/ प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II/ एफएफएमसी से अपेक्षित है कि वे ऐसी व्यवस्था करें कि फ्रेंचाइजियों द्वारा किए जा रहे लेनदेनों की नियमित आधार (कम-से-कम मासिक रूप में) रिपोर्टिंग फ्रेंचाइजरों की जाए। प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक/ प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II/ एफएफएमसी फ्रेंचाइजियों के सभी स्थानों पर औचक लेखा-परीक्षा छह महीने में कम-से-कम एक बार की जाए। ऐसी लेखा-परीक्षाएं एक समर्पित दल द्वारा की जाएं एवं फ्रेंचाइजियों द्वारा अनुपालन के स्तर की जांच करने के लिए "अज्ञात" दौरे भी किए जाएं। फ्रेचाइजियों के लेखा के वार्षिक निरीक्षण की व्यवस्था भी होनी चाहिए। इन निरीक्षणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फ्रेंचाइजी मुद्रा परिवर्तन का कार्य करार की शर्तों एवं रिज़र्व बैंक के वर्तमान दिशानिर्देशों के अनुरूप कर रहें हैं एवं फ्रेंचाइजी आवश्यक रिकॉर्ड भी रख रही हैं।
9. धन शोधन निवारण (एएमएल)/ अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी)/ आतंकवाद वित्तपोषण का मुकाबला करने (सीएफटी) संबंधी दिशानिर्देश
फ्रेंचाइजियों को प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक/ प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II/ एफएफएमसी के लिए लागू एएमएल/ केवाईसी/ सीएफटी दिशानिर्देशों का पूर्णत: पालन करना चाहिए।9
खंड IV
[लोपित]10
खंड V
परिचालनात्मक अनुदेश
1. विदेशी मुद्रा लाना एवं बाहर ले जाना
i. भारत में विदेशी मुद्रा किसी भी रूप में एवं बिना किसी सीमा के मुक्त रूप में लाई जा सकती है बशर्ते आगमन पर सीमा-शुल्क प्राधिकारियों के समक्ष मुद्रा घोषणा फॉर्म (सीडीएफ) में इसकी घोषणा करनी चाहिए। लाई गई विदेशी मुद्रा यदि करेंसी नोटों के रूप में में हो या ट्रेवलर चेक के रूप में और इसकी राशि 10,000/- अमेरिकी डॉलर या इसके समतुल्य हो और/ या 5,000 अमेरिकी डॉलर या इसके समतुल्य विदेशी करेंसी नोट होने पर सीडीएफ में घोषणा की आवश्यकता नहीं है।11
ii. उस स्थिति को छोड़कर जब विदेशी मुद्रा किसी प्राधिकृत व्यापारी या मुद्रा परिवर्तक से ली गई हो, भारत से बाहर विदेशी मुद्रा ले जाना प्रतिबंधित है सिवाय उस स्थिति के जब इसके लिए रिज़र्व बैंक की आम या विशेष अनुमति मिली हो। तथापि, अनिवासियों को उतनी राशि बाहर ले जाने की आम अनुमति है जितनी वे अंदर लाए थे बशर्ते उक्त उप-पैरा (i) के प्रावधानों का अनुपालन किया गया हो।
2. जनता से विदेशी मुद्रा की खरीद
i. प्राधिकृत व्यक्ति और उनके फ्रेंचाइजी निवासी व्यक्तियों के साथ-साथ अनिवासियों से भी मुक्त रूप से विदेशी करेंसी नोट, सिक्के एवं ट्रेवलर चेक खरीद सकते हैं। यदि विदेशी मुद्रा फॉर्म सीडीएफ में घोषित करके लाई गई है तो मुद्रा प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति प्राधिकृत व्यक्ति और उसके फ्रेंचाइजी को सीडीएफ प्रस्तुत करे।12
ii. निवासी ग्राहकों से विदेशी मुद्रा नोटों तथा/ अथवा यात्री चेक की खरीद करने पर उन्हें भारतीय रुपये में नकद भुगतान करने संबंधी अनुरोधों को प्रति लेनदेन केवल 1000 अमरीकी डॉलर अथवा उसके समतुल्य राशि की सीमा तक स्वीकार किया जाए।
iii. विदेशी आगंतुकों/ अनिवासी भारतियों द्वारा नकद भुगतान के लिए किए गए अनुरोधों पर प्रति लेनदेन केवल 3000 अमरीकी डॉलर अथवा उसके समतुल्य राशि की सीमा तक स्वीकार किया जाए।
iv. एएमसी विदेशी पर्यटकों/ दौरे पर आने वालों को अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड/ डेबिट कार्ड के समक्ष विदेशी मुद्रा बेच सकते हैं एवं सामान्य बैंकिंग चैनल के माध्यम से इसकी प्रतिपूर्ति प्राप्त करने के लिए त्वरित रूप से कदम उठाएं।
निवासी ग्राहकों से विदेशी मुद्रा नोटों तथा/ अथवा यात्री चेक की खरीद पर भारतीय रुपये में भुगतान करते समय निर्धारित सीमाओं के अनुसार नकद/ अकाउंट पेयी चेक के माध्यम से/ डिमांड ड्राफ्ट/ भारतीय रुपया डेबिट कार्ड में लोड कर के/ बैंकिंग चैनल के माध्यम से ईलेक्ट्रोनिक रूप से निधि अंतरण द्वारा भुगतान किया जा सकता है।
3. नकदीकरण प्रमाणपत्र
i. जब निवासियों एवं अनिवासियों से विदेशी करेंसी नोटों, सिक्कों एवं ट्रेवलर चेक की खरीद की जाए तो मांगे जाने पर प्राधिकृत व्यक्ति नकदीकरण प्रमाणपत्र जारी करें। इन प्रमाणपत्रों पर प्राधिकृत हस्ताक्षरी के हस्ताक्षर हों एवं इन्हें मुद्रा परिवर्तक के पत्र शीर्ष पर जारी किया जाए तथा इनका समुचित रिकॉर्ड रखा जाए।
ii. जिन मामलों में नकदीकरण प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाए इनमें ग्राहकों का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया जाए कि अनिवासियों के पास व्यय न की गई स्थानीय करेंसी को वैध नकदीकरण प्रमाणपत्र की प्रस्तुति पर ही विदेशी मुद्रा में बदला जाएगा।
4. किसी अन्य एफएफएमसी से एवं प्राधिकृत व्यापारी (एडी) से क्रय
एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II अन्य एफ़एफ़एमसी एवं एडी से सामान्य कारोबार में प्रस्तुत किए गए कोई भी विदेशी करेंसी नोट, सिक्के एवं नकदीकृत ट्रेवलर चेक खरीद सकता है। क्रय की गई विदेशी मुद्रा के समतुल्य रुपए का भुगतान केवल रेखांकित आदाता चेक/ मांग ड्राफ्ट/ बैंकर चेक/ भुगतान आदेश/ बैंकिंग चैनल के माध्यम से ईलेक्ट्रोनिक रूप से निधि अंतरण के माध्यम से ही किया जाए।
5. विदेशी मुद्रा का विक्रय
(i) निजी दौरा
प्राधिकृत व्यक्ति विदेश (नेपाल एवं भूटान के अलावा) की एक या अधिक बार के निजी दौरे के लिए भारत के निवासी व्यक्तियों को वित्त वर्ष में विदेशी मुद्रा प्रबंध (चालू खाता लेनदेन) नियम, 2000 की अनुसूची-III में निर्दिष्ट निर्धारित सीमा तक विदेशी मुद्रा बेच सकता है। वित्त वर्ष में विदेशी मुद्रा की राशि के संबंध में यात्री की स्व-घोषणा के आधार पर निजी दौरे के लिए विदेशी मुद्रा उपलब्ध होगी। भारत के स्थाई निवासी विदेशी राष्ट्रिक निजी दौरे के लिए इस कोटा को पाने के पात्र होंगे बशर्ते वर्तमान विनियमों के अनुसार वे अपने वेतन, बचत आदि को विदेश में विप्रेषित करने की सुविधा का लाभ न ले रहे हों।
(ii) कारोबारी दौरा
प्राधिकृत व्यक्ति भारत के निवासियों को कारोबारी यात्रा या सम्मेलन में भाग लेने या विशेषज्ञता वाला प्रशिक्षण हासिल करने या विदेश में चिकित्सा या चिकित्सीय जांच के लिए जा रहे मरीज के रखखाव के खर्च के लिए या चिकित्सा/ चिकित्सीय जांच के लिए विदेश जा रहे मरीज के सहायक को विदेशी मुद्रा प्रबंध (चालू खाता लेनदेन) नियम, 2000 की अनुसूची-III में निर्दिष्ट निर्धारित सीमा तक विदेशी मुद्रा बेच सकता है।
(iii) फोरेक्स (विदेशी मुद्रा) प्री-पेड कार्ड
प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II केवाईसी/ एएमएल/ सीएफटी अपेक्षाओं के अधीन निजी/ कारोबारी दौरे पर विदेश जाने वाले निवासियों को फोरेक्स प्री-पेड कार्ड जारी कर सकते हैं। तथापि, फोरेक्स प्री-पेड कार्डों का समायोजन प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी – I के माध्यम से ही किया जाये ।13
इस संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है कि प्री-पेड विदेशी करेंसी कार्ड बिल्कुल विदेशी करेंसी नोट या ट्रेवलर चेक के समान ही विदेशी करेंसी हैं। अत: यात्रा उद्देश्य के लिए प्री-पेड विदेशी करेंसी कार्ड बेचने वाले प्राधिकृत व्यापारियों/ एफएफएमसी को उसी तरह की कठोर मानकों वाली समुचित सावधानी बरतनी चाहिए एवं केवाईसी मानकों का अनुपालन करना चाहिए जैसा कि वे विदेशी करेंसी नोट/ ट्रेवलर चेक बेचते समय अपने ग्राहकों के साथ करते हैं।
शर्तें
i. विदेशी मुद्रा जारी करते समय एएमसी को जिन दस्तावेजों का सत्यापन करना होता है उनका निर्धारण आम तौर पर रिज़र्व बैंक नहीं करता है। इस संबंध में एएमसी का ध्यान विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 की धारा 10 की उप-धारा (5) की ओर आकृष्ट किया जाता है।
ii. यात्री चेक के मामले में यात्री प्राधिकृत अधिकारी की उपस्थिति में चेक पर हस्ताक्षर करे एवं ट्रेवलर चेक की पावती का रिकॉर्ड रखे।
iii. वित्त वर्ष में ली गई विदेशी मुद्रा की राशि के संबंध में यात्री की स्व-घोषणा के आधार पर यात्रा के लिए प्राधिकृत व्यक्ति विदेशी मुद्रा जारी कर सकता है।
iv. विदेश यात्रा (निजी दौरे या किसी अन्य उद्देश्य से) के लिए विदेशी मुद्रा की बिक्री के प्रतिलिपि प्राधिकृत व्यक्ति रु. 50,000/- (रु. पचास हजार मात्र) से कम की नकदी का भुगतान स्वीकार कर सकता है। जिन मामलों में विदेशी मुद्रा की बिक्री की राशि रु. 50,000/- के समतुल्य या इससे अधिक हो, फिर चाहे इसमें एकल यात्रा के लिए एक बार का आहरण शामिल हो या बहु-आहरण हो, तो भुगतान केवल आवेदक के खाते पर आहरित रेखांकित आदाता के खाते के चेक या आवेदक के दौरे को प्रायोजित करने की फर्म/ कंपनी के बैंक खाते पर आहरित रेखांकित आदाता के खाते के चेक या आवेदक अथवा प्रायोजक कंपनी द्वारा बैंकिंग चैनल के माध्यम से इलेक्ट्रोनिक निधि अंतरण या बैंकर चेक/ भुगतान आदेश/ मांग ड्राफ्ट से ही स्वीकार किया जाए। रुपया/ रेखांकित चेक/ बैंकर चेक/ भुगतान आदेश/ मांग ड्राफ्ट के माध्यम से भुगतान के अलावा, प्राधिकृत व्यक्ति विदेश यात्रा (निजी दौरे या अन्य किसी उद्देश्य से) के लिए यात्री द्वारा डेबिट कार्ड/ क्रेडिट कार्ड/ प्रीपेड कार्ड से किए गए भुगतान को भी स्वीकार करें बशर्ते:- (i) केवाईसी/ एएमएल/ सीएफटी दिशानिर्देशा का अनुपालन किया गया हो, (ii) विदेशी मुद्रा की बिक्री/ विदेशी मद्रा में ट्रेवलर चेक बैंक द्वारा निर्धारित सीमा (क्रेडिट/ प्रीपेड कार्ड) सीमा के अंदर हो (iii) विदेशी मुद्रा/ विदेशी मुद्रा ट्रेवलर चेक का खरीदार एवं क्रेडिट/ डेबिट/ प्रीपेड कार्ड धारक एक ही व्यक्ति हो।
v. यात्री जिस देश का दौरा कर रहा है उसके लिए समय-समय पर रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित सीमा तक ही विदेशी करेंसी नोटों एवं सिक्कों की बिक्री विदेशी मुद्रा की समग्र सीमा तक प्रतिबंधित रखी जाए।
टिप्पणी: 1 जनवरी 2016 के मास्टर निदेश-उदारीकृत विप्रेषण योजना(एलआरएस) (समय-समय पर अद्यतन किए गए) के यथा लागू अनुदेश लागू होंगे।
6. भारतीय मुद्रा के पुन: परिवर्तन के प्रति बिक्री
अनिवासियों के भारत से जाते समय उनके पास बची हुई भारतीय मुद्रा को प्राधिकृत व्यक्ति विदेशी मुद्रा में परिवर्तित कर सकते हैं बशर्ते वैध नकदीकरण प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया जाए।
नोट (1):- अनिवासियों के पास यदि रु. 10,000/- तक की बची हुई भारतीय करेंसी है एवं इसके वास्तविक कारण हैं एवं व्यक्ति नकदीकरण प्रमाणपत्र दिखाने में असमर्थ है तो यह सुनिश्चित करने के बाद कि अगले सात दिन में व्यक्ति का प्रस्थान तय है, प्राधिकृत व्यक्ति अपने विवेक पर यह परिवर्तन कर सकता है।
नोट (2):- प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I, प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II तथा एफएफएमसी निम्नलिखित दस्तावेजों के आधार पर एटीएम पावतियों के प्रतिलिपि विदेशी पर्यटकों (अनिवासी भारतीय नहीं) को रु. 50,000/- तक भारतीय रुपए के परिवर्तन हेतु सुविधा प्रदान कर सकता है:-
• वैध पारपत्र एवं वीज़ा।
• 7 दिन के अंदर प्रस्थान की कन्फर्म टिकट।
• एटीएम की मूल स्लिप (मूल डेबिट/ क्रेडिट कार्ड के साथ सत्यापित की जाए)।
7. कैश मेमो
जिन यात्रियों को प्राधिकृत व्यक्ति विदेशी मुद्रा बेचते हैं तो उनके मांग करने पर वे उन्हें अपने आधिकारिक पत्र शीर्ष पर कैश मेमो जारी कर सकते हैं। ये कैश मेमो देश छोड़ते समय प्रवासन अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना पड़ सकता है।
8. विनिमय दर
प्राधिकृत व्यक्ति विदेशी मुद्रा से संबंधित लेनदेन बाजार द्वारा निर्धारित विनिमय दर के अनुसार करें।14
9. विनिमय दर चार्ट का प्रदर्शन
प्राधिकृत व्यक्ति एक विशिष्ट स्थान पर अथवा पब्लिक काउंटर के पास एक चार्ट प्रदर्शित करें जिसमें पूर्वाह्न 10.30 बजे तक सभी प्रमुख करेंसियों की उस दिन की अद्यतन की गई कार्ड दर, विदेशी करेंसी नोटों एवं ट्रेवलर चेक की खरीद/बिक्री के लिए प्रदर्शित की जाए।
10. विदेशी मुद्रा परिवर्तन संबंधी लाइसेन्स प्रदर्शित करना
एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी–II को अपने प्रत्येक कारोबार के स्थान पर, एक विशिष्ट स्थान पर अथवा पब्लिक काउंटर के पास भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किए गए मुद्रा परिवर्तक के लाइसेन्स की प्रतिलिपि प्रदर्शित करनी चाहिए।
11. विदेशी मुद्रा शेष
(i) प्राधिकृत व्यक्ति उचित स्तर तक विदेशी करेंसी का शेष रखें एवं करेंसी उतार-चढ़ाव पर अटकलबाजी के दृष्टिकोण से उपयोग न की गई जमा-शेष के संग्रह से बचें।
(ii) खरीदे गए विदेशी करेंसी नोटों, सिक्कों एवं ट्रेवलर चेकों को फ्रेंचाइजी सात दिन के अंदर केवल अपने फ्रेंचाइजर को ही अभ्यर्पित करें।
(iii) प्राधिकृत व्यापारियों एवं एफएफएमसी के बीच लेनदेन रेखांकित आदाता खाता चेकों/ मांग ड्राफ्ट/ बैंकिंग चैनल के माध्यम से एलेक्ट्रोनिक निधि अंतरण के माध्यम से समायोजित किए जाएं। किसी भी परिस्थिति में नकदी में समायोजन न किए जाएं।
12. विदेशी करेंसी शेष को पुन: भरना
(i) अपने सामान्य कारोबार संबंधी अपेक्षाओं के लिए एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी–II भारत के दूसरे एफ़एफ़एमसी/ प्राधिकृत व्यापारियों से विदेशी मुद्रा ले सकते हैं, जिसके लिए उन्हें रुपए में रेखांकित आदाता खाता चेकों/ मांग ड्राफ्ट/ बैंकिंग चैनल के माध्यम से इलेक्ट्रोनिक निधि अंतरण के माध्यम से भुगतान करना होगा।15 1 जुलाई 2024 से तिमाही आधार पर एफएफएमसी/ गैर-बैंक एडी श्रेणी-II द्वारा जनता को अनुमत उद्देश्यों के लिए विदेशी मुद्रा नोटों की बिक्री का मूल्य अन्य एफएफएमसी/ एडी से खरीदे गए विदेशी मुद्रा नोटों के मूल्य के 75% से कम न हो। इस प्रकार की बिक्री और खरीद का डेटा रखा जाए और लेखापरीक्षा/ निरीक्षण के समय इसे उपलब्ध कराया जाए। विदेशी मुद्रा बेचने वाले एफएफएमसी/ एडी खरीदार एफएफएमसी/ गैर-बैंक एडी श्रेणी II से प्रासंगिक आंकड़े प्राप्त करते हुए यह सुनिश्चित करें कि 'जनता को बिक्री' वाली अपेक्षा का पालन किया जा रहा है।
(ii) यदि एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी–II उक्त तरीके से अपना भंडार भरने में असमर्थ हों, तो वे भारत में विदेशी मुद्रा आयात करने के लिए प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I के माध्यम से भारतीय रिज़र्व बैंक के संबनधित क्षेत्रीय कार्यालय को आवेदन करें। यह आयात उसी नामित प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I के माध्यम से किया जाए जिसके माध्यम से आवेदन किया गया था।
13. बेशी विदेशी मुद्रा नोटों/ ट्रेवलर चेकों का निर्यात/ निपटान
एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी–II अपनी अधिशेष विदेशी मुद्रा नोटों/ ट्रेवलर चेकों को विदेशी मुद्रा में नामित प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I के माध्यम से समुद्रपारीय बैंक को निर्यात कर सकते हैं, जिसके लिए उन्हें इसके मूल्य की प्राप्ति नामित प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I के माध्यम से होगी। एफएफएमसी अपनी अधिशेष विदेशी मुद्रा विदेशी निजी मुद्रा परिवर्तकों को भी निर्यात कर सकते हैं, बशर्ते या तो प्राप्य मूल्य किसी नामित प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक के नोस्ट्रो खाते में अग्रिम जमा किया जाए या ख्याति प्राप्त अंतरराष्ट्रीय बैंक से एक गारंटी जारी की जाए जिसमें निर्यात किए जाने वाले विदेशी करेंसी नोटों/ सिक्कों का पूरा मूल्य शामिल किया गया हो।
14. विदेशी करेंसी नोटों को बट्टे-खाते में डालना
खरीदे गए विदेशी मुद्रा नोट यदि बाद में नकली/ जाली पाए जाने पर अपने शीर्ष प्रबंध तंत्र के अनुमोदन के उपरांत एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी–II, प्रति वर्ष 2000 अमेरिकी डॉलर तक की राशि को बट्टे खाते में ड़ाल सकते हैं, ऐसा तब किया जाए जब इस राशि को वसूलने के सभी उपलब्ध विकल्प समाप्त हो जाएं। किसी भी कारणवश जिसमें विदेशी मुद्रा नोटों को जाली अथवा नकली पाया जाना शामिल है लेकिन यह उस तक सीमित नहीं है, उक्त राशि से अधिक की राशि को बट्टे खाते में ड़ालने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय का अनुमोदन आवश्यक होगा।16 आवेदन एपी कनैक्ट एप्लिकेशन के माध्यम से किया जाना चाहिए।
15. मुद्रा परिवर्तन कारोबार के रजिस्टर एवं लेखा बहियां
(i) एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी – II को मुद्रा परिवर्तन कारोबार के लिए निम्नलिखित रजिस्टर रखने चाहिए:-
(ए) फॉर्म एफएलएम 1 में दैनिक सार एवं शेष बही (विदेशी करेंसी नोट/ सिक्के)।
(बी) फॉर्म एफएलएम 2 में दैनिक सार एवं शेष बही (ट्रेवलर चेक)।
(सी) फॉर्म एफएलएम 3 में जनता से विदेशी करेंसी की खरीद का रजिस्टर।
(डी) फॉर्म एफएलएम 4 में प्राधिकृत व्यापारियों एवं प्राधिकृत मुद्रा परिवर्तकों से विदेशी करेंसी नोट/ सिक्कों की खरीद का रजिस्टर।
(ई) फॉर्म एफएलएम 5 में जनता से विदेशी करेंसी नोट/ सिक्कों एवं विदेशी करेंसी ट्रेवलर चेक की बिक्री का रजिस्टर।
(एफ़) फॉर्म एफएलएम 6 में प्राधिकृत व्यापारियों/ संपूर्ण मुद्रा परिवर्तकों/ समुद्रपारीय बैंकों को विदेशी करेंसी नोट/ सिक्कों की बिक्री का रजिस्टर।
(जी) फॉर्म में प्राधिकृत व्यापारियों/ प्राधिकृत मुद्रा परिवर्तकों/ निर्यात को अभ्यर्पित ट्रेवलर चेकों का रजिस्टर।
(ii) सभी रजिस्टरों एवं लेखा बहियों को अद्यतन रखा जाए, हर तरह से जांच (क्रॉस-चेक) की जाए एवं शेष राशियों का दैनिक सत्यापन हो।
(iii) एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II के जो लेनदेन मुद्रा परिवर्तन कारोबार से संबंधित न हों उन्हें मुद्रा परिवर्तन लेनदेनों में न मिलाया जाए। अन्य शब्दों में, रजिस्टरों एवं लेखा बहियों में मुद्रा परिवर्तन के कारोबार से संबंधित लेनदेनों की श्रृंखला स्पष्ट रूप से दर्शाई जानी चाहिए।
(iv) यदि एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II के एक से अधिक कारोबार स्थल हों तो सबके लिए अलग रजिस्टर रखे जाएं।
नोट:- विदेशी करेंसियों का अंतर-शाखा अंतरण स्टॉक अंतरण के रूप में लिया जाए न कि बिक्री के रूप में।
16. रिज़र्व बैंक को विवरण प्रस्तुत करना
(i) एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II के सभी कार्यलयों में विदेशी करेंसी नोटों की बिक्री एवं खरीद का मासिक समेकित विवरण एफएलएम 8 में भारतीय रिज़र्व बैंक के उस कार्यालय को17 एपी कनैक्ट एप्लिकेशन के माध्यम से प्रस्तुत करना चाहिए, जहां से इसे लाइसेंस मिला हो। यह विवरण अगले महीने की 10 तारीख तक पहुंच जाना चाहिए।
(ii) 18 [***]
(iii) एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II को अपने नाम से प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II के पास रखे विदेशी करेंसी खाता/ खातों के बारे में निर्धारित फॉर्मेट में तिमाही विवरण भारतीय रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत करना चाहिए।
(iv) सभी एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II को भारतीय रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के उस क्षेत्रीय कार्यालय को वित्त वर्ष समाप्त होने के एक महीने के अंदर निर्धारित फॉर्मेट में एक वार्षिक विवरण प्रस्तुत करना चाहिए जिसने लाइसेंस दिया हो, इसमें वित्त वर्ष में बट्टे खाते में ड़ाली गई राशि के ब्योरे दिए जाएं।
(v) एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी – II को प्रवर्तन निदेशालय (डीओई)/ राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) या अन्य किसी विधि प्रवर्तक प्राधिकारियों द्वारा एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II या इसके निदेशकों के विरुद्ध शुरू की गई कोई कार्रवाई के संबंध में इस प्रकार की कार्रवाई के एक महीने के भीतर आवेदक का पंजीकृत कार्यालय रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के जिस संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आता है उसे रिपोर्ट का देना चाहिए।
17. लेनदेन का निरीक्षण
विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 की धारा 12(1) भारतीय रिज़र्व बैंक के किसी भी अधिकारी को यह शक्ति प्रदान करती है कि वह इसकी तरफ से प्राधिकृत व्यक्ति के बही खातों एवं लेखा तथा अन्य दस्तावेजों का निरीक्षण कर सकता है। प्राधिकृत व्यक्ति को निरीक्षण अधिकारी को अपना निरीक्षण करने में सभी तरह की सहायता एवं सहयोग प्रदान करना चाहिए। निरीक्षण अधिकारी को किसी भी लेखा बही या अन्य किसी दस्तावेज को प्रस्तुत करने में या विवरण या सूचना प्रदान करने में या मुद्रा परिवर्तन लेनदेन से संबंधित किसी प्रश्न का उत्तर देने में असफल रहने को इस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा।
18. समवर्ती लेखापरीक्षा
(i) एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II को उनके द्वारा किए गए लेनदेनों के लिए समवर्ती लेखा परीक्षा प्रणाली स्थापित करनी चाहिए।
(ii) प्रतिलिपि माह 1,00,000 अमेरिकी डॉलर या इसके समतुल्य से अधिक की राशि के टर्नओवर वाले सभी एकल शाखा एफ़एफ़एमसी को मासिक लेखापरीक्षा की प्रणाली स्थापित करनी चाहिए। 100,000 अमेरिकी डॉलर या इसके समतुल्य से कम की राशि के टर्नओवर वाले सभी एकल शाखा एफ़एफ़एमसी को तिमाही लेखा परीक्षा की प्रणाली स्थापित करनी चाहिए। बहु शाखा वाले एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II समवर्ती लेखा परीक्षा की ऐसी प्रणाली स्थापित करें जिसमें मासिक लेखा परीक्षा प्रणाली के तहत मूल्य-वार 80 प्रतिशत लेनदेन कवर किए जाएं एवं शेष 20 प्रतिशत मूल्य-वार लेनदेन तिमाही लेखा परीक्षा के अंतर्गत कवर किए जाएं।
(iii) समवर्ती लेखा परीक्षकों की नियुक्ति/ चयन का कार्य एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II के विवेक पर छोड़ दिया जाए। समवर्ती लेखा परीक्षक एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II द्वारा किए जाने वाले सभी लेनदेनों की जांच करे एवं यह सुनिश्चित करे कि रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी सभी अनुदेशों का पालन किया जा रहा है। समवर्ती लेखापरीक्षा के दायरे में अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित बातें शामिल होनी चाहिए:
· केवाईसी/ एएमएल/ सीएफ़टी से संबंधित क्षेत्र;
· विवरणों की समय पर प्रस्तुति;
· इस बात का सत्यापन कि सभी निर्धारित रजिस्टर बनाए रखे गए हैं।
· इस बात का सत्यापन कि सभी मुद्रा परिवर्तन लेनदेन को संबंधित बहियों तथा रजिस्टरों में अभिलेखित किया गया है।
· इस बात का सत्यापन कि नकद राशि को 50000 भारतीय रुपये की सीमा के भीतर स्वीकार किया गया है जिनमें ऐसे मामले भी शामिल हैं जिनमें लेनदेन को 50000 भारतीय रुपये से कम के नकद लेनदेन की शृंखला में संरचित किया गया है।
· इस बात का सत्यापन कि ग्राहकों से नकद से इतर माध्यम से प्राप्त भुगतान एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II के बैंक खाता विवरणों में प्रतिबिम्बित होते हैं।
(iv) विधिक लेखा परीक्षक से अपेक्षित है कि वे प्रमाणित करें कि समवर्ती लेखा परीक्षक एवं आंतरिक नियंत्रण प्रणाली संतोषजनक ढ़ंग से काम कर रहे हैं।
19. [लोपित]19
20. विदेशी मुद्रा खाते खोलना
विदेशी मुद्रा विभाग के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय के अनुमोदन से एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II को निम्नलिखित शर्तों के अधीन भारत में विदेशी करेंसी खाता खोलने की अनुमति दी जा सकती है:-
i. केंद्र विशेष पर प्रति मुद्रा केवल एक खाते के खोलने की अनुमति है।
ii. इस खाते में केवल निर्दिष्ट बैंक के माध्यम से निर्यात किए गए विदेशी करेंसी नोट/ ट्रेवलर चेक के नकदीकरण का मूल्य एवं प्राप्य को जमा किया जा सकता है।
iii. खाते की शेष राशि का उपयोग निम्नलिखित के कारण उत्पन्न देयताओं के निपटान के लिए किया जा सकता है:-
(ए) एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II द्वारा बेचे गए ट्रेवलर चेक एवं
(बी) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी - I बैंकों से एफएफएमसी/ गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी – II द्वारा अधिग्रहीत विदेशी करेंसी नोट।
iv. इस खाते में कोई भी अप्रयुक्त जमा राशि नहीं रखी जानी चाहिए।
20विदेशी मुद्रा खाते खोलने के लिए आवेदन एपी कनैक्ट एप्लिकेशन के माध्यम से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
21. प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी - II द्वारा नोस्ट्रो खाता खोलना
रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय से एक बारगी अनुमोदन लेने के पश्चात प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II निम्नलिखित शर्तों के अधीन नोस्ट्रो खाता खोल सकते हैं:-
i. प्रत्येक करेंसी के लिए केवल एक नोस्ट्रो खाता खोला जा सकता है;
ii. इस खाते की शेष राशि का उपयोग केवल अनुमत प्रयोजनों के लिए भेजे गए विप्रेषण के निपटान के लिए किया जाए एवं फोरेक्स प्रीपेड कार्डों के निपटान के लिए इसका उपयोग न किया जाए;
iii. इस खाते में कोई भी अप्रयुक्त जमा राशि नहीं रखी जानी चाहिए; तथा
iv. ये समय-समय पर निर्धरित रिपोर्टिंग अपेक्षाओं के अधीन होंगे।
21गैर-बैंक एडी श्रेणी-II एपी कनैक्ट एप्लिकेशन के माध्यम से नोस्ट्रो खाता खोलने के लिए आवेदन प्रस्तुत करें।
22. तुलन पत्र एवं निवल मालियत एवं वार्षिक विदेशी मुद्रा कारोबार का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना22
एफएफएमसी/गैर-बैंक एडी श्रेणी II को प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर तक रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को अंकेक्षित तुलन पत्र की प्रति तथा तुलन पत्र की तारीख के अनुसार निवल मालियत के संबंध में सांविधिक लेखापरीक्षकों का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा, तथा प्रत्येक वर्ष 30 अप्रैल तक वित्तीय वर्ष के दौरान वार्षिक विदेशी मुद्रा लेनदेन के संबंध में सांविधिक लेखापरीक्षकों का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा।
23. करेंसी फ्यूचर एवं एक्सचेंज ट्रेडिड करेंसी ऑप्शन मार्केट में सहभागिता
न्यूनतम निवल मालियत रु. 5 करोड़ वाले एफएफएएमसी एवं प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II [जो कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी),स्थानीय क्षेत्र बैंक (एलएबी), शहरी सहकारी बैंक (यूसीबी) तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) नहीं है।] केवल अपने अंतर्निहित (अंडर लाइंग) विदेशी मुद्रा एक्सपोजर की प्रतिरक्षा के लिए ग्राहक के रूप में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा मान्यता प्राप्त एक्सचेंजों में नामित करेंसी फ्यूचर एवं करेंसी ऑप्शन में सहभागिता कर सकते हैं। एफएफएएमसी एवं प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II [जो कि आरआरबी, एलएबी, यूसीबी तथा एनबीएफसी हैं] इस संबंध में रिज़र्व बैंक के संबंधित विनियामक विभाग द्वारा जारी दिशानिर्देशों से मार्गदर्शन लें।
24.23 भारत में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर विदेशी मुद्रा काउंटर (संपूर्ण मुद्रा विनिमय शाखाएं/ विस्तार काउंटर) खोलने के लिए प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I/ प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II/ एफएफएमसी को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी:-
(ए) भारत में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर विदेशी मुद्रा काउंटर आगमन हॉल में कस्टम डेस्क (ग्रीन चैनल/ रेड चैनल) के बाद होने चाहिए। तथापि, भारत में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर विदेशी मुद्रा विनिमय काउंटर इमिग्रेशन डेस्क एवं कस्टम डेस्क के बीच भी स्थापित किए जा सकते हैं, बशर्ते ये काउंटर केवल विदेशी मुद्रा खरीदें एवं भारतीय मुद्रा (रुपया) बेचें तथा मुद्रा परिवर्तक द्वारा ग्राहकों को अनिवार्य रूप से "नकदीकरण (एनकैशमेंट) प्रमाणपत्र" जारी किया जाए।
(बी) भारत में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर विदेशी मुद्रा काउंटर प्रस्थान हॉल में कस्टम डेस्क या इमिग्रेशन डेस्क (इनमें से जो भी पहले आए) से पहले स्थापित किया जाए।24 हालांकि, ड्यूटी-फ्री क्षेत्र या सुरक्षा होल्ड क्षेत्र में स्थापित विदेशी मुद्रा काउंटर पर, जो इमिग्रेशन या कस्टम्स डेस्क के परे हों, निवासियों को (अनिवासियों के साथ) भारतीय रुपये के नोटों को परिवर्तित करने की सुविधा प्रदान करेंगे। निवासियों और अनिवासियों द्वारा भारतीय रुपये ले जाने की सीमाएं नीचे पैरा (सी) और (डी) के अनुसार होंगी।
(सी) निवासी भारतीयों के साथ-साथ ऐसे अनिवासियों को जो कि - (i) पाकिस्तान या बांग्लादेश के नागरिक नहीं है एवं (ii) पाकिस्तान या बांग्लादेश नहीं जा रहे हैं, उन्हें हवाई अड्डे से देश छोड़ते समय अधिकतम रु. 25,000/ की राशि ले जाने की अनुमति है।
(डी) पाकिस्तान तथा बांग्लादेश के नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर हवाई मार्ग से देश छोड़ते समय बोर्डिंग प्वाइंट तक, इससे आगे नहीं, अधिकतम रु. 10,000/- की राशि ले जाने की अनुमति है।
खंड VI
केवाईसी/ एएमएल/ सीएफटी दिशानिर्देश25
(i) प्राधिकृत व्यक्ति, जो विनियमन विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित हैं, संबंधित अपने ग्राहक को जानिए निदेशों द्वारा शासित होंगे, जैसा कि उन पर लागू होता है।
(ii) भारतीय रिज़र्व बैंक के विनियमन विभाग द्वारा विनियमित व्यक्तियों के अलावा अन्य प्राधिकृत व्यक्ति भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ – अपने ग्राहक को जानिए) निदेश, 2025 द्वारा शासित होंगे।
(iii) प्राधिकृत व्यक्ति अपने एजेंटों/उप-एजेंटों/फ्रेंचाइजी द्वारा उन पर लागू होने वाले निदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करें।
खंड VII
[लोपित]26
खंड VIII
[लोपित]27
अनुबंध28
चुनाव (निर्वाचन) के दौरान गैर- बैंक मुद्रा परिवर्तकों के लिए मानक परिचालन क्रियाविधि (एसओपी)
विदेशी मुद्रा का संचरण प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I (एडी श्रेणी-I), प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II (एडी श्रेणी-II), संपूर्ण मुद्रा परिवर्तक (एफ़एफ़एमसी), उनके कार्यालय/ शाखाएँ, उनके ग्राहक तथा उनके फ़्रांचायजियों के बीच हो सकता है।
भारत निर्वाचन आयोग से अनुरोध प्राप्त होने पर चुनाव के दौरान नकद (विदेशी मुद्रा) के संचरण के लिए मानक परिचालन क्रियाविधि (एसओपी) नीचे अधिसूचित की जा रही है:
ए. भौतिक रूप में मुद्रा (चलन) को लाना-ले-जाना
1. भारतीय मुद्रा अथवा विदेशी मुद्रा को लाने-ले-जाने संबंधी सभी गतिविधियां प्राधिकृत व्यक्ति (व्यक्तियों) द्वारा की जानी चाहिए, और उनके पास नकद राशि को ले जाते समय समर्थक दस्तावेज़ साथ रखे होने चाहिए। इस प्रकार का चलन प्राप्तकर्ता द्वारा की गई मांग के आधार पर होना चाहिए तथा गंतव्य के पते पर किया जाना चाहिए।
2. यदि नकदी को प्राधिकृत व्यक्ति (एपी) के कार्यालय/ शाखा से ले जाया जा रहा है, तो उसे प्राधिकृत व्यक्ति की खाता बहियों में रिकार्ड किए जाने के बाद ही स्थान के बाहर लेकर जाएँ।
3. इसी प्रकार मुद्रा को लाने-ले-जाने का गंतव्य प्राधिकृत व्यक्ति का कार्यालय/ शाखा है तो उसे उसी दिन अथवा प्राप्ति की तारीख को एपी की खाता बहियों में रिकार्ड किया जाए।
4. एक ही प्राधिकृत व्यक्ति की शाखाओं के बीच विदेशी मुद्रा के अंतरण को बिक्री के रूप में अकाउंट करने के बजाय स्टॉक अंतरण के रूप में अकाउंट किया जाए ताकि दोहरी गिनती से बचा जा सके।
बी. एफ़एफ़एमसी/ प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II द्वारा अपने नियमित ग्राहकों को दी जाने वाली द्वारस्थ (डोर स्टेप) फॉरेक्स सेवा के मामले में लेनदेन का संसाधन तथा लेखांकन प्राधिकृत व्यक्ति के कार्यालय में किया जाना चाहिए तथा लेनदेन को प्राप्त मूल्य संबंधी आवश्यक दस्तावेजों द्वारा समर्थित किया जाना चाहिए। फॉरेक्स की सुपुर्दगी एपी के प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा ही की जानी चाहिए।
सी. जहां तक संभाव हो भारतीय मुद्रा का चलन बैंकिंग माध्यम (अर्थात चेक, मांग ड्राफ्ट, एनईएफ़टी, आरटीजीएस, आईएमपीएस आदि ) से किया जाए। प्राधिकृत व्यापारियों तथा एफ़एफ़एमसी के बीच के लेनदेन का निपटान रेखांकित आदाता खाता चेकों/ मांग ड्राफ्ट/ बैंकिंग चैनल के माध्यम से इलेक्ट्रोनिक निधि अंतरण के माध्यम से किया जाए और किसी भी परिस्थिति में भारतीय मुद्रा का निपटान नकद में नहीं किया जाएगा। एपी अथवा उसके फ्रेंचाइज़ी द्वारा संगृहीत नकद राशि (भारतीय मुद्रा) को उसी दिन या दूसरे दिन बैंक शाखा में जमा किया जाना चाहिए।
डी. नकद राशि के परिवहन की किसी भी कार्यवाही को रद्द करने पर उसे उचित ढंग से प्रलेखित करना चाहिए।
ई. नकद राशि को लाना-ले-जाना उसके दस्तावेजों के अनुरूप होना चाहिए।
एफ़. भारतीय रुपये में नकद राशि को लाने-ले-जाने की उच्चतम सीमा रु. 10,00,000/- होगी तथा विदेशी मुद्रा में प्राधिकृत व्यक्ति के कार्यालयों/ शाखाओं को भेजी जाने वाली आयात की गई विदेशी मुद्रा संबंधी लेनदेन को छोड़कर 1,00,000 अमरीकी डॉलर की समकक्ष राशि।
परिशिष्ट
ए. पी. (डीआईआर सीरीज़) परिपत्रों की सूची, जिन्हें मुद्रा परिवर्तन गतिविधियों के मास्टर निदेश में समेकित किया गया है
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