मास्टर निदेशों

पूर्वदत्त भुगतान लिखतों के निर्गमन एवं परिचालन से संबंधित मास्टर निदेश

आरबीआई/डीपीएसएस/2017-18/58
मास्टर निदेश भुनिप्रवि.केंका.पीडी.सं.1164/02.14.006/2017-18

11 अक्तूबर, 2017
(29 दिसंबर 2017 को यथा संशोधित)

समस्त पूर्वदत्त भुगतान लिखत निर्गतकर्ता, सिस्टम प्रदाता तथा सिस्टम सहभागीगण

महोदय/महोदया

पूर्वदत्त भुगतान लिखतों के निर्गमन एवं परिचालन से संबंधित मास्टर निदेश

कृपया भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा घोषित चौथे द्विमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य 2017-18 में पूर्वदत्त भुगतान लिखतों (पीपीआई) से संबंधित मास्टर निदेश के निर्गमन के संबंध में विकासात्मक एवं विनियामकीय नीतिवक्तव्य के पैराग्राफ 16 का संदर्भ लें।

2. भारतीय रिज़र्व बैंक ने पूर्वदत्त भुगतान लिखतों (पीपीआई) के निर्गमन एवं परिचालन के संबंध में समय-समय पर अनेक परिपत्र जारी किए हैं। इस क्षेत्र में हुई प्रगति, पीपीआई जारीकर्ताओं द्वारा की गई प्रगति, प्राप्त अनुभवों तथा इस क्षेत्र में नवोन्मेष एवं प्रतिस्पर्धा लाने, सुरक्षा एवं संरक्षा तथा ग्राहक का संरक्षण सुनिश्चित करने आदि की दृष्टि से यह निर्णय लिया गया था कि पीपीआई के निर्गमन एवं परिचालन के संबंध में अनुदेशों की समीक्षा की जाए।

3. पीपीआई से संबंधित मास्टर निदेश का प्रारूप 20 मार्च, 2017 को भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर जनसाधारण के फीडबैक के लिए डाला गया था। अंतिम निदेश तैयार करने में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समस्त हितधारकों से प्राप्त टिप्पणियों/अभिमतों का परीक्षण किया गया था।

4. भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10(2) के साथ पठित धारा 18 के अंतर्गत जारी मास्टर निदेश इस विषय पर आज की तारीख तक जारी अनुबंध-1 की सारणी-1 में सूचीबद्ध समस्त परिपत्रों को समग्र रूप से तथा अनुबंध-1 की सारणी-2 में उल्लिखित समस्त परिपत्रों को आंशिक रूप से प्रतिस्थापित करता है।

5. मास्टर निदेश आज की तारीख से प्रभावी होगा। वर्तमान पीपीआई इस निदेश में जिन मामलों में समय-सीमाएं निर्दिष्ट की गई हैं उन्हें छोड़कर, संशोधित अपेक्षाओं का 28 फरवरी, 2018 तक या उससे पूर्व अनुपालन सुनिश्चित करें।

भवदीया

(नन्दा एस. दवे)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक


पूर्वदत्त भुगतान लिखतों के निर्गमन एवं परिचालन से संबंधित मास्टर निदेश

1.प्रस्तावना

1.1 भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10(2) के साथ पठित धारा 18 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट होते हुए कि ऐसा करना लोकहित में आवश्यक एवं ज़रूरी है, एतद्द्वारा इन निदेशों को जारी करता है।

1.2 संक्षिप्त नाम और प्रारंभ

क) इन निदेशों को भारतीय रिज़र्व बैंक (पूर्वदत्त भुगतान लिखतों का निर्गमन एवं परिचालन) निदेश, 2017 (मास्टर निदेश) कहा जाएगा।

ख) ये निदेश 11 अक्तूबर, 2017 से प्रभावी होंगे।

ग) वर्तमान पूर्वदत्त भुगतान लिखत (पीपीआई) जारीकर्ता इस निदेश में जिन मामलों में समय-सीमाएं निर्दिष्ट की गई हैं उन्हें छोड़कर, संशोधित अपेक्षाओं का 28 फरवरी, 2018 तक या उससे पूर्व अनुपालन सुनिश्चित करें।

1.3 प्रयोजनीयता: इस मास्टर निदेश के प्रावधान समस्त पीपीआई निर्गमकर्ता, सिस्टम प्रदाता तथा सिस्टम सहभागियों पर लागू होंगे।

1.4 उद्देश्य :

क) उन संस्थाओं के लिए प्राधिकार दिए जाने, विनियमन एवं पर्यवेक्षण के लिए एक संरचना उपलब्ध कराना जो देश में पीपीआई के निर्गमन केलिए भुगतान प्रणाली का संचालन करती हैं।

ख) इस क्षेत्र में विवेकपूर्ण तरीके से प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना तथा नवोन्मेष को प्रोत्साहित करना, साथ ही लेनदेन की रक्षा एवं सुरक्षा एवं सिस्टम सहित ग्राहक की सुरक्षा एवं सुविधा का ध्यान रखना।

ग) पीपीआई को सुसंगत बनाना तथा पारस्परिकता प्रदान करना।

1.5 इन निदेशों के प्रयोजन के लिए, "संस्थाओं" शब्द का आशय बैंकों और गैर-बैंक संस्थाओं से है जिनके पास पीपीआई जारी करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से अनुमोदन/प्राधिकार प्राप्त है, साथ ही जो पीपीआई जारी करने का प्रस्ताव रखती हैं।

1.6 बैंक और गैर-बैंक संस्थाएं भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (पीएसएस एक्ट) के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक से आवश्यक अनुमोदन/प्राधिकार प्राप्त करने के बाद देश में पीपीआई जारी करती रही हैं। ये संस्थाएं इस संबंध में अप्रैल 2009 में जारी “पीपीआई का निर्गमन और परिचालन” संबंधी प्रारंभिक दिशानिर्देशों की संरचना के तहत तथा बाद में इस विषय पर जारी मास्टर निदेश, समय-समय पर यथासंशोधित, के अनुसार कार्य कर रही थीं। इस क्षेत्र की गतिविधियों तथा इसमें पीपीआई निर्गतकर्ताओं द्वारा की गई प्रगति को ध्यान रखते हुए आज की तारीख तक इस विषय पर जारी समस्त दिशानिर्देशों की समीक्षा की गई तथा उन्हें इस मास्टर निदेश में शामिल किया गया है।

1.7 यह मास्टर निदेश ऐसे भुगतान प्रणाली परिचालकों के लिए पात्रता मानदंड तथा कार्य-शर्तों का निर्धारण करता है जो देश में सेमी-क्लोज्ड एवं ओपन सिस्टम पीपीआई के निर्गम का कार्य कर रहे हैं। वे सभी संस्थाएं जो ऐसी भुगतान प्रणाली का संचालन कर रही हैं जिनके लिए वे अनुमोदित/प्राधिकृत हैं जिनमें पीपीआई का निर्गमन शामिल है, वे इन निदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करेंगी।

1.8 कोई भी संस्था भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुमोदन/प्राधिकार के बिना पीपीआई के निर्गमन केलिए भुगतान प्रणाली की स्थापना एवं परिचालन नहीं कर सकती है।

2. परिभाषाएं

मास्टर निदेश के प्रयोजनार्थ निम्नलिखित परिभाषाएं लागू होंगी:

2.1 निर्गमकर्ता: भुगतान प्रणाली का परिचालन करने वाली संस्थाएं जो व्यक्तियों/संगठनों को पीपीआई जारी करती हैं। इस प्रकार से संकलित धन का इन संस्थाओं द्वारा इस्तेमाल उब मर्चेंट को भुगतान करने के लिए किया जाता है जो स्वीकार्य व्यवस्था के अंग हैं तथा निधि अंतरण/विप्रेषण सुविधाओं को सुविधाजनक बना रहे हैं।

2.2 धारक : व्यक्ति/संगठन जो निर्गतकर्ता से पीपीआई प्राप्त करते/क्रय करते हैं और उनका इस्तेमाल वस्तुएं एवं सेवाएं खरीदने केलिए, साथ ही वित्तीय सेवाएं, विप्रेषण सेवाएं आदि के लिए करते हैं।

2.3 पूर्वदत्त भुगतान लिखत (पीपीआई) : पीपीआई ऐसे भुगतान लिखत हैं जिनमें भंडारित राशि से वस्तु एवं सेवाएं, साथ ही वित्तीय सेवाएं, विप्रेषण सुविधाएं आदि क्रय की जा सकती हैं। देश में जारी किए जा सकने वाले पीपीआई को तीन प्रकार में बांटा जा सकता है जैसे-(i) क्लोज्ड सिस्टम पीपीआई, (ii) सेमी-क्लोज्ड सिस्टम पीपीआई और (iii) ओपन सिस्टम पीपीआई।

2.4 क्लोज्ड सिस्टम पीपीआई : ये पीपीआई उन्हीं संस्थाओं द्वारा जारी किए जाते हैं जिनसे वस्तु एवं सेवाएं उन्हीं संस्थाओं से ही क्रय की जा सकती हैं और वे नकद आहरण की अनुमति नहीं देती हैं। चूंकि इन लिखतों से किसी तीसरे पक्षकार की सेवाओं केलिए भुगतान या निपटान का कार्य नहीं किया जा सकता, इसलिए ऐसे लिखतों को जारी करने एवं उनके परिचलान केलिए इस प्रकार के लिखतों को भुगतान प्रणाली के लिखत के रूप में नहीं किया जाता है जिनके लिए भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुमोदन/प्राधिकार की आवश्यकता नहीं होती है।

2.5 सेमी-क्लोज्ड सिस्टम पीपीआई: इन पीपीआई का इस्तेमाल वस्तु एवं सेवाएं, साथ ही वित्तीय सेवाएं, विप्रेषण सुविधाएं आदि की खरीद के लिए स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट मर्चेंट समूह के स्थान/स्थापित संस्थाओं में किया जाता है जिनके पास पीपीआई को भुगतान लिखत के रूप में स्वीकार करने (अथवा भुगतान समेकक/पेमेंट गेटवे के माध्यम से ठेका) का जारीकर्ता के साथ विशेष ठेका होता है । इन लिखतों में नकदी आहरण की अनुमति नहीं होती है, चाहे वे बैंक द्वारा या गैर-बैंक द्वारा जारी किए गए हों।

2.6 ओपन सिस्टम पीपीआई: ये पीपीआई केवल बैंकों द्वारा जारी किए जाते हैं और उनका इस्तेमाल वस्तु एवं सेवाएं, साथ ही वित्तीय सेवाएं, विप्रेषण सुविधाएं आदि की खरीद के लिए किसी भी मर्चेंट के पास किया जा सकता है। इस प्रकार के पीपीआई जारीकर्ता बैंक इनसे एटीएम/बिक्री स्थल(पीओएस)/कारोबार प्रतिनिधि (बीसी) से नकदी आहरित करने की सुविधा प्रदान करता है।

2.7 सीमा : मास्टर निदेश में उल्लिखित समस्त ‘सीमा’ इन लिखतों केलिए अधिकतम मूल्य सीमा होगी, जिनका मूल्यवर्ग रुपए में होगा, जिन्हें किसी भी धारक को, जबतक कि अन्यथा निर्दिष्ट न किया जाए, जारी किया जाएगा।

2.8 मर्चेंट: ये वे स्थापित संस्थाएं हैं जिनके पास पीपीआई जारीकर्ता से वस्तु एवं सेवाएं, साथ ही वित्तीय सेवाओं की बिक्री के लिए पीपीआई जारीकर्ता द्वारा जारी पीपीआई को स्वीकार करने (अथवा भुगतान समेकक/पेमेंट गेटवे के माध्यम से ठेका) का विशेष ठेका होता है।

2.9 निवल मालियत : निवल मालियत में शामिल होगा ‘ छुकता इक्विटी पूंजी, वरीयता शेयर जो अनिवार्य रूप से इक्विटी पूंजी में परिवर्तनीय हों, फ्री आरक्षित राशि, शेयर प्रीमियम खाते में शेषराशि तथा पूंजीगत आरक्षित राशि जो आस्तियों के बिक्री आगमों से उत्पन्न हुई हो न कि ऐसी आरक्षित राशि जो आस्तियों के पुनर्मूल्यांकन से सृजित की गई हो जिसे ‘संचित हानि राशियों, अमूर्त आस्तियों के बही मूल्य तथा स्थगित राजस्व व्यय, यदि कोई हो’ के लिए समायोजित किया गया हो।’ यह नोट किया जाए कि जहां अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय वरीयता शेयरों की गणना निवल मालियत के आकलन के लिए या तो गैर-संचयी या संचयी हो सकती है, इन्हें अनिवार्य रूप से इक्विटी शेयरों में परिवर्तनीय होना चाहिए तथा शेयरधारकों के करार में विशेष रूप से इस बात का निषेध हो कि इस प्रकार की वरीयता शेयर पूंजी को वापस नहीं लिया जा सकेगा।

3. सेमी-क्लोज्ड और ओपन सिस्टम पीपीआई के जारी करने की पात्रता

3.1 भारतीय रिजर्व बैंक के संबंधित नियामक विभाग द्वारा निर्धारित शर्तों सहित पात्रता मानदंडों का पालन करने वाले बैंकों को आरबीआई से अनुमोदन प्राप्त करने के बाद सेमी-क्लोज्ड और ओपन-सिस्टम पीपीआई जारी करने की अनुमति होगी।

3.2 भारतीय रिजर्व बैंक के संबंधित नियामक विभाग द्वारा निर्धारित विधियों सहित पात्रता मानदंडों का अनुपालन करने वाली गैर-बैंक संस्थाओं को आरबीआई से प्राधिकरण प्राप्त करने के बाद केवल सेमी-क्लोज्ड प्रणाली पीपीआई जारी करने की अनुमति होगी।

4. पूंजी और अन्य पात्रता अपेक्षाएं

4.1 किसी भी वित्तीय क्षेत्र के नियामकों द्वारा विनियमित ऐसी सभी संस्थाएं (बैंक और गैर-बैंक दोनों) जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक से पीएसएस अधिनियम के तहत अनुमोदन / प्राधिकरण की आवश्यकता है वे भुगतान और निपटान प्रणाली (डीपीएसएस), आरबीआई, केंद्रीय कार्यालय, मुंबई को अपने संबंधित नियामक से "अनापत्ति प्रमाणपत्र" के साथ, ऐसी मंजूरी प्राप्त करने के 45 दिनों के भीतर आवेदन करेंगे।

4.2 प्राधिकार के लिए आवेदन करने वाली गैर-बैंक संस्थाएं भारत में कंपनी के रूप में निगमित होनी चाहिए तथा कंपनी अधिनियम 1956/कंपनी अधिनियम 2013 के अंतर्गत पंजीकृत होना चाहिए।

4.3 गैर-बैंक संस्थाएं जिनके पास विदेशी प्रत्यक्ष निवेश(एफडीआई)/विदेशी संविभाग निवेश (एफपीआई)/विदेशी संस्थागत निवेश (एफआईआई) है वे भी पूंजी अपेक्षाओं को उसी प्रकार पूरा करेंगी जैसाकि भारत सरकार के वर्तमान समेकित एफडीआई नीति संबंधी दिशानिर्देशों के अंतर्गत लागू है।

4.4 आवेदक गैर-बैंक इकाई के ज्ञापन पत्र (एमओए) में पीपीआई जारीकर्ता के रूप में संचालन की प्रस्तावित गतिविधि को कवर किया जाएगा।

4.5 पीएसएस अधिनियम के तहत भारतीय रिजर्व बैंक से प्राधिकरण प्राप्त करने वाली सभी गैर-बैंक संस्थाओं की न्यूनतम सकारात्मक निवल मालियत आवेदन जमा करने के समय नवीनतम लेखापरीक्षित तुलनपत्र के अनुसार 5 करोड़ होगी । ये संस्थाएं प्राधिकार प्राप्त करने हेतु आवेदन प्रस्तुत करते समय लागू निवल मालियत की अपेक्षा के अनुपालन के साक्ष्य के रूप में अपने सनदी लेखाकार (सीए) से संलग्न फार्मेट (अनुबंध 2) में एक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेंगी। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा इन आवेदनों को इसी मालियत के आधार पर प्रोसेस किया जाएगा और यह मालियत हर समय बनाए रखी जाएगी। उसके बाद अंतिम प्राधिकार प्राप्त करने की तारीख से तीसरे वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर संस्था को न्यूनतम सकारात्मक निवल मालियत 15 करोड़ रुपए हासिल करनी होगी जिसे हर समय बनाए रखना होगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी संस्था को अंतिम प्राधिकार 1 मार्च, 2018 को जारी किया जाता है तो उस संस्था को न्यूनतम सकारात्मक निवल मालियत 15 करोड़ रुपए 31 मार्च, 2020 को समाप्त वित्तीय स्थिति के अनुसार हासिल करनी होगी। इसी प्रकार, यदि किसी संस्था को प्राधिकार 1 मई, 2018 को जारी किया जाता है तो उस संस्था को न्यूनतम सकारात्मक निवल मालियत 15 करोड़ रुपए 31 मार्च, 2021 को समाप्त वित्तीय स्थिति के अनुसार हासिल करनी होगी। उसके बाद, 31 मार्च को लेखापरीक्षित तुलनपत्र तथा निवल मालियत की स्थिति भारतीय रिज़र्व बैंक को वित्तीय वर्ष की समाप्ति के छह महीने के भीतर प्रस्तुत करनी होगी, अन्यथा उस संस्था को यह कारोबार आगे जारी रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

4.6 नई निगमित गैर-बैंक संस्थाएं जिनके पास लेखापरीक्षित वित्तीय विवरण उपलब्ध नहीं हैं वे संलग्न फार्मेट (अनुबंध 2) में अपने सनदी लेखाकार से एक प्रमाणपत्र उनकी वर्तमान निवल मालियत तथा अनंतिम तुलनपत्र के संबंध में प्रस्तुत करेंगी।

4.7 समस्त वर्तमान गैर-बैंक पीपीआई जारीकर्ता(मास्टर निदेश जारी करने के समय तक) 31 मार्च, 2020 (लेखापरीक्षित तुलनपत्र) की वित्तीय स्थिति के अनुसार 15 करोड़ रुपए की न्यूनतम सकारात्मक निवल मालियत हासिल कर लेने की अपेक्षा का पालन करेंगे। इसकी सूचना भारतीय रिज़र्व बैंक को संलग्न प्रोफार्मा (अनुबंध 2) में सनदी लेखाकार के प्रमाणपत्र के साथ तथा लेखापरीक्षित तुलनपत्र के साथ 30 सितंबर, 2020 तक दी जाए, अन्यथा संस्था को उस कारोबार को जारी रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उसके बाद, 15 करोड़ रुपए की न्यूनतम सकारात्मक निवल मालियत सभी समय बनाए रखी जाएगी। ऐसी स्थिति प्राप्त कर लेने तक, वर्तमान पीपीआई जारीकर्ता उन्हें प्राधिकार देते समय उनके लिए लागू पूंजी की अपेक्षाओं को बनाए रखेंगे।

4.8 सभी प्राधिकृत गैर-बैंक संस्थाएं वित्तीय वर्ष के पूरा होने के छह महीने के भीतर

संलग्न फार्मेट (अनुबंध 2) में उनके लेखापरीक्षित तुलनपत्र के अनुसार लागू निवल मालियत की अपेक्षा के अनुपालन के साक्ष्य के रूप में अपने सनदी लेखाकार से प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेंगे।

5. प्राधिकार प्रदान करने की प्रक्रिया

5.1 गैर-बैंक संस्था जिसे पीपीआई जारी करने के लिए भुगतान प्रणाली की स्थापना करनी है वह प्राधिकार प्राप्त करने केलिए भुगतान और निपटान प्रणाली विनियमावली, 2008 के विनियम 3(2) के अंतर्गत निर्धारित फार्म ए(भारिबैं की वेबसाइट पर उपलब्ध) आवेदन करना होगा।

5.2 आवेदन की प्रारंभ में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा स्क्रीनिंग की जाएगी ताकि प्रथमतया आवेदक की पात्रता सुनिश्चित की जा सके। आवेदक संस्था के निदेशक संलग्न फार्मेट(अनुबंध 3) में घोषणा प्रस्तुत करेंगे। भारतीय रिज़र्व बैंक भी आवेदक एवं प्रबंधन के ‘सही एवं उपयुक्त’ होने की जांच अन्य रेगुलेटर्स, सरकारी विभाग आदि से इनपुट प्राप्त करके करेगा, जैसाकि उचित हो। उन संस्थाओं के आवेदन जो पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं, या वे आवेदन जो अधूरे हैं/निर्धारित फार्मेट में पूरे ब्योरे सहित नहीं हैं, आवेदन का शुल्क वापस किए बिना लौटा दिए जाएंगे।

5.3 भारतीय रिज़र्व बैंक आवेदक को सैद्धांतिक रूप से अनुमोदन प्रदान करने से पूर्व लागू दिशानिर्देशों के अनुपालन के अतिरिक्त अन्य बातों के साथ-साथ कतिपय आवश्यक पहलुओं जैसे ग्राहक सेवा एवं क्षमता, तकनीकी एवं अन्य संबंधित अपेक्षाओं, रक्षा एवं सुरक्षा पहलुओं आदि की भी जांच करेगा।

5.4 भारतीय रिज़र्व बैंक, पात्रता मानदंडों को एवं अन्य शर्तों को पूरा कर लेने के अधीन ‘सैद्धांतिक रूप से’ अनुमोदन जारी करेगा जो छह महीने तक वैध रहेगा। संस्था इन छह महीने के भीतर भारतीय रिज़र्व बैंक को संतुष्टि सिस्टम लेखापरीक्षा रिपोर्ट(एसएआर) प्रस्तुत करेगी, अन्यथा ‘सैद्धांतिक रूप से’ दिया गया अनुमोदन स्वत: समाप्त हो जाएगा। एसएआर के साथ सनदी लेखाकर से इस शय का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा कि 5 करोड़ की न्यूनतम सकारात्मक निवल मालियत की अपेक्षा का पालन कर लिया गया है। कोई भी संस्था एसएआर प्रस्तुत करने केलिए एक बार छह महीने की अवधि बढ़ाने केलिए अग्रिम रूप से उचित कारण बताते हुए लिखित रूप में डीपीएसएस, केंद्रीय कार्यालय, भारतीय रिज़र्व बैंक, मुंबई को अनुरोध कर सकती है। भारतीय रिज़र्व बैंक के पास समय-विस्तार देने से मना करने का अधिकार सुरक्षित है।

5.5 सिद्धांतत: अनुमोदन दिए जाने के बाद संस्था/ प्रमोटर/ समूह अथवा कारोबार प्रथाओं आदि के संबंध में यदि कोई प्रतिकूल बातें ध्यान में आती हैं तो रिज़र्व बैंक चाहे तो अतिरिक्त शर्तें लगा सकता है और आवश्यकता होने पर दिए गए सिद्धांतत: अनुमोदन को वापस ले लिया जा सकता है।

5.6 संतोषजनक प्रणाली लेखा-परीक्षा रिपोर्ट (एसएआर) और निवल मालियत संबंधी प्रमाण-पत्र प्राप्त होने के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक प्राधिकरण संबंधी अंतिम प्रमाण-पत्र मंजूर करेगा। जिस संस्था को अंतिम प्राधिकरण मंजूर किया जाता है उसे प्राधिकरण प्रमाण-पत्र मंजूर किए जाने के छह महीने के अंदर कारोबार प्रारंभ करना होगा, अन्यथा प्राधिकरण स्वतः ही व्यपगत हो जाएगा। संबंधित संस्था डीपीएसएस, केंद्रीय कार्यालय, भारतीय रिज़र्व बैंक, मुंबई को समुचित कारण सहित लिखित अनुरोध करके अधिकतम छह महीने की अवधि के लिए एकबारगी विस्तार हेतु अग्रिम रूप में अनुरोध कर सकती है। विस्तार संबंधी ऐसे अनुरोध को अस्वीकार करने का अधिकार रिज़र्व बैंक के पास सुरक्षित रहेगा।

5.7 यदि अन्यथा निर्दिष्ट न किया गया हो तो प्राधिकरण प्रमाण-पत्र पांच वर्ष के लिए वैध होगा और इसकी समीक्षा की जा सकेगी जिसमें प्राधिकरण प्रमाण-पत्र का निरसन भी शामिल है।

5.8 जो संस्था प्राधिकरण का नवीकरण कराना चाहती है उसे प्राधिकरण प्रमाण-पत्र की अवधि समाप्त होने से तीन महीने पहले डीपीएसएस, भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय कार्यालय, मुंबई को लिखित आवेदन करना होगा, अन्यथा रिज़र्व बैंक के पास यह अधिकार होगा कि वह नवीकरण के अनुरोध को अस्वीकार कर दे।

5.9 किसी भी प्रस्तावित प्रमुख परिवर्तन, जैसे कि उत्पाद संबंधी विशिष्टताओं/ प्रक्रिया, ढांचा अथवा भुगतान प्रणाली के परिचालन आदि जैसे प्रमुख परिवर्तनों की सूचना मुख्य महाप्रबंधक, डीपीएसएस, भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय कार्यालय मुंबई को संबोधित पत्र के माध्यम से पूर्ण विवरण के साथ देनी होगी। उक्त पत्र डीपीएसएस, भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय कार्यालय मुंबई में प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर रिज़र्व बैंक उत्तर देने का प्रयास करेगा।

5.10 कोई भी टेकओवर अथवा नियंत्रण का अधिग्रहण अथवा गैर बैंक संस्था के प्रबंधन में हुए परिवर्तन की सूचना मुख्य महाप्रबंधक, डीपीएसएस, भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय कार्यालय मुंबई को 15 दिनों के भीतर प्रत्येक निदेशकों, यदि कोई हो, द्वारा 'घोषणा तथा वचन-पत्र' (अनुबंध-3) सहित पूर्ण विवरण के साथ देनी होगी। रिज़र्व बैंक प्रबंधन की 'उपयुक्‍त और समुचित' स्थिति की जांच करेगा और यदि आवश्यकता हो तो ऐसे परिवर्तनों पर आवश्यक प्रतिबंध लगाएगा।

6. धनशोधन संबंधी प्रावधानों (केवाईसी/ एएमएल/ सीएफटी) के संबंध में सुरक्षा

6.1 बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग(डीबीआर), भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी तथा समय समय पर संशोधित अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी)/ धन शोधन निवारण (एएमएल)/ आतंकवाद का वित्तपोषण प्रतिरोध (सीएफटी) संबंधी मास्टर निदेश आवश्यक संशोधनों के साथ पीपीआई जारीकर्ता संस्थाओं तथा उनके एजेंटों पर लागू होंगे।

6.2 चूंकि पीपीआई जारीकर्ता भुगतान प्रणाली का परिचालन करते हैं, अतः धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 तथा उसके अंतर्गत बनाई गई नियमावली, समय-समय पर यथा संशोधित सहित, भी पीपीआई जारीकर्ताओं पर लागू होती है। सभी संस्थाओं को चाहिए कि वे इन दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक प्रणालियां स्थापित करें।

6.3 पीपीआई जारीकर्ता पीपीआई का उपयोग करके किए गए सभी लेन-देनों का लॉग कम से कम दस वर्षों के लिए बनाए रखेंगे। ये आंकड़े भारतीय रिज़र्व बैंक अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा सूचित अन्य एजेंसी/ एजेंसियों द्वारा जांच हेतु उपलब्ध कराएं जाएंगे। पीपीआई जारीकर्ता वित्तीय आसूचना इकाई-भारत (एफआईयू-आईएनडी) को संदेहास्पद लेनदेन रिपोर्ट(एसटीआर) भी प्रस्तुत करेंगे।

7. पीपीआई की जारी, लोडिंग और रीलोडिंग

7.1 भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा पीपीआई जारी करने हेतु अनुमोदित/ प्राधिकृत सभी संस्थाओं को अनुमति है कि वे इस निदेश के पैराग्राफ 9 और 10 में किए गए निर्धारण के अनुसार अनुमति के प्रकार /श्रेणी के अनुसार रीलोडेबल अथवा गैर रीलोडेबल पीपीआई जारी कर सकते हैं।

7.2 पीपीआई जारीकर्ताओं के पास विभिन्न प्रकार/ श्रेणी की पीपीआई की जारी और उससे संबंधित अन्य कार्यकलाप के लिए उनके बोर्ड द्वारा विधिवत अनुमोदित सुस्पष्ट निर्धारित नीति होनी चाहिए।

7.3 पीपीआई जारीकर्ता यह सुनिश्चित करेगा कि जिस कंपनी ने पीपीआई की जारी एवं परिचालन हेतु अनुमोदन/ प्राधिकरण प्राप्त किया है उसका नाम पीपीआई ब्रांड नाम के साथ हर बार प्रदर्शित किया जाएगा। प्राधिकृत संस्था भारतीय रिज़र्व बैंक को अपने उत्पादों के लिए उनके द्वारा उपयोग किए गए/ उपयोग किए जाने वाले ब्रांड नाम की सूचना नियमित रूप से देती रहेगी।

7.4 पीपीआई जारीकर्ता यह सुनिश्चित करेंगे कि पीपीआई शेषों पर कोई ब्याज देय नहीं होगा।

7.5 पीपीआई को नकद रूप में, बैंक खाते में डेबिट करके, क्रेडिट और डेबिट कार्ड से तथा अन्य पीपीआई के जरिए (समय-समय पर यथा अनुमोदित) लोड अथवा रीलोड करवाने की अनुमति होगी। पीपीआई की लोडिंग और रीलोडिंग केवल भारत में विनियमित संस्थाओं द्वारा जारी किए गए भुगतान लिखतों के माध्यम से केवल भारतीय रुपए में होगी।

7.6 पीपीआई में नकदी लोडिंग की सीमा प्रतिमाह रु. 50000 होगी और यह पीपीआई की समग्र सीमा के अधीन होगी।

7.7 पीपीआई को कार्डों, वालेटों और किसी अन्य रूपों/ लिखतों में जारी किया जा सकेगा और इनका उपयोग इन्‍हें एक्सेस करने हेतु और उनमें उपलब्धि राशि के उपयोग हेतु किया जा सकेगा । इस मास्टर निदेश की जारी की तारीख से मील पेपर वाउचरों को छोड़कर, जिनके मामलों में अलग समय-सीमा निर्धारित की गई है, पीपीआई पेपर बाउचर के रूप में जारी नहीं की जाएगी।

7.8 बैंकों को अपनी शाखाओं, एटीएम तथा इस संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार नियुक्त किए गए अपने कारोबार प्रतिनिधियों के माध्यम से पीपीआई जारी और रीलोड करने की अनुमति होगी।

7.9 बैंकों तथा गैर बैंकों को अनुमति होगी कि वे ऐसे भुगतान लिखतों की जारी और रीलोड निम्नलिखित शर्तों के अधीन अपने प्राधिकृत आउटलेटों अथवा प्राधिकृत/ विनिर्दिष्ट एजेंटों के माध्यम से कर सकते हैं :

क) उनके पास बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति होनी चाहिए जिसमें पीपीआई की जारी तथा रीलोडिंग हेतु एजेंटों को नियोजित करने के लिए स्‍पष्‍ट और निर्दिष्‍ट फ्रेमवर्क हो।

ख) जारीकर्ता द्वारा स्वीकार्य श्रेणी के पीपीआई की जारी/ रीलोडिंग के लिए प्राधिकृत विनिर्दिष्ट एजेंटों के रूप में नियुक्त किए गए व्यक्तियों के संबंध में समुचित सावधानी (ड्यू डिलिजेंस) संबंधी अपेक्षा का पालन किया जाएगा ।

ग) जारीकर्ता प्राधिकृत/ विनिर्दिष्ट एजेंटों द्वारा जारी किए गए सभी पीपीआई के लिए जिम्मेदार होगा।

घ) जारीकर्ता, प्रिंसिपल के रूप में, अपने प्राधिकृत/ विनिर्दिष्ट एजेंटों द्वारा किए गए भूल-चूक के सभी कृत्यों के लिए जिम्मेदार होगा जिनमें सुरक्षा तथा अभिरक्षा संबंधी पक्ष भी शामिल हैं।

ङ) जारीकर्ता अपने तथा अपने प्राधिकृत/ विनिर्दिष्ट एजेंटों के पास स्थित ग्राहकों की जानकारी की गोपनीयता और तत्संबंधी रिकॉर्डों का परिरक्षण सुनिश्चित करेगा।

च) पीपीआई जारीकर्ता अपने प्राधिकृत/ विनिर्दिष्ट एजेंटों के कार्यकलापों की नियमित रूप से निगरानी करेगा और साथ ही उनके द्वारा नियोजित विभिन्न एजेंटों के कार्यकलापों की समीक्षा वर्ष में कम से कम एक बार करेगा।

छ) जारीकर्ता और उनके प्राधिकृत/ विनिर्दिष्ट एजेंट पैराग्राफ 6 में यथा विनिर्दिष्ट केवाईसी/ एएमएल/ सीएफटी संबंधी मानदंडों सहित देश के प्रयोज्य कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे।

7.10 पीपीआई जारीकर्ता यह सुनिश्चित करेगा कि उसके द्वारा किए गए किसी अन्य कार्यकलापों, जैसे कि बैंक/ बैंकों के कारोबार प्रतिनिधि (बीसी), पेमेंट एग्रीगेशन, पेमेंट गेटवे सुविधा आदि की मध्यवर्ती संस्था के रूप में प्राप्त राशि को आपस में नहीं मिलाएगा।

7.11 को-ब्रांडिंग व्यवस्था के अंतर्गत पीपीआई :

क) को-ब्रांडिंग व्‍यवस्‍था पीपीआई जारीकर्ता के बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार होगी। नीति में प्रतिष्ठा संबंधी जोखिम सहित ऐसी व्यवस्था से जुड़े विभिन्न जोखिमों से निपटने के लिए विशेष उपायों का उल्‍लेख होना चाहिए और पीपीआई जारीकर्ता को चाहिए कि वह जोखिम प्रशमन संबंधित समुचित व्यवस्थाएं स्थापित करें। नीति में को-ब्रांडिंग साझेदार की भूमिकाओं, उत्तरदायित्‍वों और बाध्यताओं को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाना चाहिए।

ख) को-ब्रांडिंग साझेदार कंपनी अधिनियम 1956/ कंपनी अधिनियम 2013 के अंतर्गत भारत में निगमित एक कंपनी होना चाहिए। यदि को-ब्रांडिंग साझेदार एक बैंक है तो वह रिज़र्व बैंक द्वारा लाइसेंस प्राप्त बैंक होना चाहिए।

ग) पीपीआई जारीकर्ता को ऐसी व्यवस्था से उत्पन्न होने वाले प्रतिष्ठा संबंधी जोखिम से बचाव के लिए को-ब्रांडिंग साझेदार के संबंध में समुचित सावधानी (ड्यू डिलिजेंस) संबंधी उपायों का पालन करना चाहिए। यदि ऐसी व्यवस्था किसी वित्तीय संस्था से हो रही हो तो उन्हें यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उस संबंधित संस्था को उसके विनियामक द्वारा इस प्रकार की व्यवस्था में शामिल होने के लिए अनुमति दी गई है।

घ) को-ब्रांडिंग व्यवस्था के अंतर्गत जारी किए गए पीपीआई के संबंध में भी केवाईसी/ एएमएल/ सीएफटी (पैराग्राफ 6 में यथा विनिर्दिष्‍ट) संबंधी अनुदेशों/ दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए।

ङ) को-ब्रांडिंग साझेदार द्वारा किए गए सभी कार्यों के लिए पीपीआई जारीकर्ता दायी होगा। जारीकर्ता, पीपीआई के ग्राहकों से संबंधित मामलों के लिए भी उत्तरदायी होगा।

च) पीपीआई जारीकर्ता को यह अनुमति होगी कि वे उस कंपनी के नाम/ लोगो के साथ लिखतों को को-ब्रांड कर सकते हैं जिनके ग्राहकों/ हिताधिकारियों को इस प्रकार को-ब्रांड किए गए लिखत जारी किए जाने हैं।

छ) भुगतान लिखत पर पीपीआई जारीकर्ता का नाम स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।

ज) गैर बैंक पीपीआई जारीकर्ताओं के मामले में, जहां दो गैर बैंक पीपीआई जारीकर्ताओं के बीच को-ब्रांडिंग व्यवस्था होती है, इस बात का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए कि ऐसी व्यवस्था में इनमें से कौन-सा भागीदार पीपीआई जारीकर्ता होगा।

झ) को-ब्रांड वाले पीपीआई जारी करने के इच्छुक सभी गैर बैंक पीपीआई जारीकर्ताओं को चाहिए कि वे डीपीएसएस, भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय कार्यालय से एकबारगी अनुमोदन प्राप्त कर लें। प्रत्येक को-ब्रांडिंग व्यवस्था के लिए अलग से अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है।

ञ) बैंक तथा गैर बैंक संस्थाओं के बीच को-ब्रांडिंग व्यवस्था के मामले में बैंक पीपीआई जारीकर्ता होगा। गैर बैंक संस्था की भूमिका पीपीआई की मार्केटिंग/ वितरण तक अथवा प्रदत्त सेवाओं तक पीपीआई धारकों की पहुंच उपलब्ध कराने तक सीमित होगी।

ट) दो बैंकों के बीच को-ब्रांडिंग व्यवस्था के मामले में पीपीआई जारीकर्ता बैंक उक्‍त अनुदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करेगा।

ठ) बैंक पीपीआई जारीकर्ता को समय-समय पर यथासंशोधित 12 दिसंबर 2012 के परिपत्र डीबीओडी. संख्या एफएसडी. बीसी. 67/24.01.019/2012-13 में निहित अनुदेशकों का पालन भी करना होगा।

7.12 ऐसे सभी पीपीआई जारीकर्ता, जो इस मास्टर निदेश की जारी से पहले ही को-ब्रांडिंग व्यवस्था से जुड़े हुए हैं, उन्हें अपनी वर्तमान व्यवस्थाओं की समीक्षा करनी चाहिए ताकि 31 दिसंबर 2017 को या उससे पहले उक्‍त अपेक्षाओं की पूर्ति की जा सके। सभी पीपीआई जारीकर्ताओं द्वारा मौजूदा सभी को-ब्रांडिंग व्यवस्थाओं संबंधी जानकारी डीपीएसएस, भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय कार्यालय, मुंबई को इस मास्टर निर्देश की जारी किए जाने से एक माह के भीतर संलग्‍न प्रारूप (अनुबंध - 4) में रिपोर्ट की जाए। इसके अतिरिक्त, किसी भी नई व्यवस्था को अंतिम रूप देने के बाद सात दिनों के भीतर भारतीय रिज़र्व बैंक को उसकी रिपोर्ट की जाएगी।

7.13 प्रीपेड मील लिखत- प्रीपेड मील लिखत के रूप में पीपीआई जारी करनेवाले बैंक और गैर बैंक इकाइयां यह सुनिश्चित करें कि वे लिखत केवल अर्ध बंद पीपीआई के रूप में जारी किए जा रहे हैं और केवल इलैक्ट्रॉनिक फॉर्म में और रिलोड करने योग्य हैं। इस लिखत से कोई भी नकद आहरण अथवा निधि अंतरण अनुमत नहीं है। ऐसे पीपीआई अलग श्रेणी के रूप में जारी करने की आवश्यकता नहीं है। कोई भी प्रीपेड लिखत 28 फरवरी, 2018 के बाद पेपर वाउचर के रूप में जारी नहीं किया जाएगा।

7.14 केवाईसी आवश्यकताओं के अनुपालन के बिना कोई भी विप्रेषण नहीं होगा। पीपीआई जारीकर्ता, उनके एजेंटों सहित अन्य पीपीआई/बैंक खातों के नकद आधारित विप्रेषणों की सुविधा के लिए हर बार कोई भी नया पीपीआई निर्माण नहीं करेगा। उसी व्यक्ति के पहले वाले विप्रेषण के लिए निर्माण किया गया पीपीआई ही इस्तेमाल किया जाएगा।

8. क्रॉस बॉर्डर लेनदेन

क्रॉस बॉर्डर लेनदेनों के लिए भारतीय रुपया मूल्यवर्गित पीपीआई का प्रयोग निम्नलिखित अपवादों को छोड़कर अनुमत नहीं होगा:

8.1 क्रॉस बॉर्डर आउटवर्ड (बाहरी) लेनदेनों के लिए पीपीआई

क. केवाईसी का अनुपालन करने वाले रिलोड करने योग्य अर्ध-बंद और खुली प्रणाली वाले पीपीआई जो एडी-I लाइसेंस प्राप्त बैंकों द्वारा जारी किए गए हों, को ही ऐसे लेनदेनों को अधिशासित करनेवाले वर्तमान मानदंडों के अधीन क्रॉस बॉर्डर बाहरी लेनदेन करने के लिए अनुमति होगी। (केवल फेमा के अंतर्गत अनुमत चालू खाता लेनदेनों के लिए- जैसे वस्तु एवं सेवा की खरीद)

ख. पीपीआई का किसी भी क्रॉस बॉर्डर बाहरी निधि अंतरण लेनदेन और/अथवा उदारीकृत विप्रेषण योजना के अंतर्गत विप्रेषण करने के लिए उपयोग न किया जाए।

ग. जारीकर्ता के लिए क्रॉस बॉर्डर बाहरी लेनदेन केवल तभी संभव होगा जब पीपीआई धारकों से स्पष्ट अनुरोध प्राप्त होगा और उनसे प्रति लेनदेन रु.10,000/- से अधिक सीमा का अनुरोध नहीं होगा और जबकि ऐसे क्रॉस बॉर्डर लेनदेन की प्रति माह सीमा रु.50,000/- से अधिक नहीं होगी।

घ. यदि यह सुविधा पीपीआई को कार्ड के रूप में जारी करके उपलब्ध कराई जाए तो यह पीपीआई ईएमवी चिप और पिन अनुपालन योग्य होगा।

ङ. ऐसे पीपीआई अलग श्रेणी के पीपीआई के रूप में जारी करने की आवश्यकता नहीं होगी।

8.2 क्रॉस बॉर्डर इनवर्ड (आंतरिक) विप्रेषण के लिए क्रेडिट के लिए पीपीआई

  1. बैंक और गैर बैंक पीपीआई जारीकर्ता, जिनको प्राधिकृत समुद्रपारीय मूल धन के लिए भारतीय एजेंट के रूप में नियुक्त किया गया है, को भारिबैं के मुद्रा अंतरण सेवा योजना (एमटीएसएस) के अंतर्गत आंतरिक विप्रेषण के लाभभोगियों को पीपीआई जारी करने की अनुमति दी जाएगी।

  2. प्राधिकृत गैर बैंक पीपीआई जारीकर्ताओं को इस समीक्षाधीन मास्टर निदेश की तारीख से तीन वर्षों की अवधि के लिए ऐसे पीपीआई जारी करने की अनुमति दी जाएगी।

  3. पीपीआई केवाईसी अनुपालन करनेवाले रिलोड करने योग्य और केवल इलैक्ट्रॉनिक फॉर्म में जिसमें कार्ड भी शामिल हैं, जारी किए जाएंगे।

  4. ऐसे पीपीआई विदेशी मुद्रा विभाग, भारिबैं द्वारा जारी एमटीएसएस मार्गदर्शी सिद्धांतों के अंतर्गत वर्तमान मानदंडों के अनुपालन में जारी किए जाएंगे।

  5. लाभभोगियों को जारी किए जानेवाले पीपीआई में लोड करने/रिलोड करने के लिए व्यक्तिगत आंतरिक एमटीएसएस विप्रेषण में केवल रु. 50,000/- तक की राशि की अनुमति दी जाएगी। रु. 50,000/- से अधिक राशि एमटीएसएस के अंतर्गत लाभभोगी के खाते में क्रेडिट की जाएगी। ऐसे लेनदेन के पूरे ब्योरे संवीक्षा के लिए रिकार्ड में रखे जाएं।

  6. पीपीआई संबंधित गतिविधियों के लिए पीपीआई जारीकर्ताओं की भूमिका और उत्तरदायित्व एमटीएसएस के अंतर्गत भारतीय एजेंटों के रूप में भूमिका और उत्तरदायित्व से भिन्न होंगे।

  7. ऐसे पीपीआई अलग श्रेणी के पीपीआई के रूप में जारी करने की आवश्यकता नहीं होगी।

8.3 विदेशी मुद्रा पीपीआई : विदेशी मुद्रा मूल्यवर्गित पीपीआई को जारी करने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (फेमा) के अंतर्गत प्राधिकृत इकाइयां इस मास्टर निदेश के दायरे से बाहर हैं।

9. पीपीआई के प्रकार

9.1 बैंक और गैर बैंक पीपीआई जारीकर्ताओं द्वारा अर्ध बंद पीपीआई

बैंकों और गैर बैंकों द्वारा जारी किए गए अर्ध बंद पीपीआई की मुख्य बातें, जब तक कि अन्यथा विनिर्दिष्ट न हों, उसी प्रकार होंगी।

(i) पीपीआई धारक के न्यूनतम विवरण स्वीकार करते हुए रु 10,000/- तक की पीपीआई

क. बैंक और गैर बैंक जारीकर्ताओं को पीपीआई धारक के न्यूनतम ब्योरे प्राप्त करने पर इन पीपीआई को जारी करने की अनुमति दी जाएगी।

ख. न्यूनतम ब्योरों में वन टाइम पिन (ओटीपी) से प्रमाणित मोबाइल नंबर और नाम और समय-समय पर संशोधित पीएमएल नियमावली, 2005 के नियम 2 (डी) के तहत परिभाषित ‘आधिकारिक रूप से वैध दस्तावेज’ में से कोई भी दस्तावेज का यूनिक आईडेंटिफिकेशन नंबर की स्वत: घोषणा शामिल है।

ग. ये पीपीआई रिलोड करने योग्य स्वरूप के होने चाहिए और इलैक्ट्रॉनिक फॉर्म में होने चाहिए जिसमें कार्ड भी शामिल होंगे।

घ. किसी भी माह में इनमें लोड की गई राशि रु.10,000/- से अधिक नहीं होनी चाहिए और वित्तीय वर्ष के दौरान लोड की गई कुल राशि रु.1,00,000/- से अधिक नहीं होनी चाहिए।

ङ. ऐसे पीपीआई में किसी भी समय बकाया राशि रु.10,000/- से अधिक नहीं होनी चाहिए।

च. ऐसे पीपीआई में से किसी भी दिए हुए माह में डेबिट की गई राशि रु.10,000/- से अधिक नहीं होनी चाहिए।

छ. ये पीपीआई केवल वस्तु और सेवा खरीदने के लिए उपयोग में लाए जाने चाहिए। ऐसे पीपीआई से बैंक खाते में निधि अंतरण और उसी/अन्य जारीकर्ता के पीपीआई में निधि अंतरण भी अनुमत नहीं है।

ज. पीपीआई इस्तेमाल करने पर वस्तु और सेवा की खरीद पर कोई अलग से सीमा नहीं है और पीपीआई जारीकर्ता समग्र पीपीआई सीमा के भीतर इन प्रयोजनों के लिए डेबिट सीमा तय करें।

झ. इन पीपीआई को पीपीआई जारी करने से 12 माह के भीतर केवाईसी अनुपालन करने वाले अर्ध बंद पीपीआई (जैसाकि पैरा 9.1 (ii) में परिभाषित किया गया है) में परिवर्तित किया जा सकता है अन्यथा ऐसे पीपीआई में आगे किसी भी क्रेडिट की अनुमति नहीं दी जाएगी। तथापि, पीपीआई धारक को पीपीआई में उपलब्ध शेष राशि का उपयोग करने के लिए अनुमति दी जाएगी।

ञ.पीपीआई जारीकर्ता यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में इस श्रेणी का पीपीआई वही मोबाइल नंबर और वही न्यूनतम ब्योरे उपयोग करने वाले उसी उपभोक्ता को जारी नहीं किया जाता ।

ट. पीपीआई जारीकर्ता किसी भी समय पीपीआई बंद करने का विकल्प दे सकता है और बंद करते समय बकाया राशि पीपीआई धारक के अनुरोध पर ‘पीपीआई धारक के स्वयं के बैंक खाते’ (जारीकर्ता द्वारा विधिवत प्रमाणित) में पीपीआई धारक की केवाईसी आवश्यकताओं का अनुपालन करने के बाद अंतरित किए जाएंगे। पीपीआई जारीकर्ता भी बंद करते समय ’बैक टू सोर्स’ (जहां से पीपीआई लोड किया गया था वह भुगतान स्रोत) में निधि अंतरित करने के लिए अनुमति प्रदान करें।

ठ. ऐसे पीपीआई की मुख्य बातें पीपीआई जारी करते समय/निधि पहली बार लोड करते समय पीपीआई धारक को एसएमएस/ईमेल/पोस्ट अथवा अन्य किसी साधन द्वारा स्पष्ट रूप से सूचित की जाएं।

(ii) पीपीआई धारक के केवाईसी पूरा करने के बाद रु.1,00,000/- तक के पीपीआई

  1. बैंक और गैर बैंक जारीकर्ताओं को पीपीआई धारक के केवाईसी पूरा करने के बाद (पैरा 6 में निर्दिष्ट किए गए अनुसार) ये पीपीआई जारी करने के लिए अनुमति दी जाएगी।

  2. ये पीपीआई रिलोड करने योग्य स्वरूप के होंगे और केवल इलैक्ट्रॉनिक स्वरूप में जारी किए जाएंगे, जिसमें कार्ड भी शामिल होंगे।

  3. बकाया राशि किसी भी समय रु.1,00,000/- से अधिक नहीं होनी चाहिए।

  4. निधि ’बैक टू सोर्स’ (भुगतान सोर्स जहां से पीपीआई लोड किया गया था वहां) अथवा ‘पीपीआई धारक के स्वयं के बैंक खाते’ (जारीकर्ता द्वारा विधिवत प्रमाणित) में अंतरित किए जा सकते हैं। तथापि, पीपीआई जारीकर्ता पीपीआई धारक के जोखिम प्रोफाइल, अन्य परिचालनगत जोखिम आदि ध्यान में रखते हुए सीमा तय कर सकते हैं।

  5. पीपीआई जारीकर्ता ‘पहले पंजीकृत लाभभोगियों की सुविधा प्रदान कर सकते हैं वहीं पीपीआई धारक लाभभोगियों को उनके बैंक खाते के ब्योरे, उसी जारीकर्ता (अथवा भिन्न जारीकर्ता जैसे और जब अनुमत हो) आदि द्वारा जारी पीपीआई के ब्योरे देकर उन्हें पंजीकृत कर सकते हैं) आदि।

  6. ऐसे पहले पंजीकृत लाभभोगियों के मामले में निधि अंतरण सीमा प्रति माह प्रति लाभभोगी रु.1,00,000/- से अधिक नहीं होनी चाहिए। पीपीआई जारीकर्ता पीपीआई धारक का जोखिम प्रोफाइल, अन्य परिचालनगत जोखिम आदि को ध्यान में लेते हुए सीमाओं को तय करे।

  7. अन्य सभी मामलों में निधि अंतरण सीमाएं प्रति माह रु.10,000/- तक प्रतिबंधित की जाएगी।

  8. पीपीआई इस्तेमाल करने वालों के लिए वस्तु और सेवाओं की खरीद पर कोई अलग सीमा नहीं है और पीपीआई जारीकर्ता समग्र पीपीआई सीमा के भीतर इन प्रयोजनों के लिए सीमा तय करें।

  9. पीपीआई जारीकर्ता पीपीआई धारकों को इन सीमाओं के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित करें और पीपीआई धारकों को अपनी स्वयं की निधि अंतरण सीमाएं तय करने के लिए आवश्यक विकल्प प्रदान करें।

  10. पीपीआई जारीकर्ता पीपीआई को बंद करने के लिए भी विकल्प प्रदान करें और इस प्रकार के पीपीआई के लिए स्वीकार्य सीमा के अनुसार बकाया राशि अंतरित करें। इस हेतु जारीकर्ता पीपीआई जारी करते समय धारक को पूर्व नामित बैंक खाते के ब्योरे अथवा उसी जारीकर्ता के अन्य पीपीआई (अथवा अन्य जारीकर्ता जैसे और जब अनुमति हों) जिसको पीपीआई में उपलब्ध बकाया राशि, ऐसे पीपीआई की वैध अवधि समाप्त होने पर पीपीआई बंद होने के मामले में अंतरित की जाएगी, के ब्योरे प्रस्तुत करने का एक विकल्प प्रदान करे।

  11. ऐसे पीपीआई की मुख्य बातें पीपीआई जारी करते समय/निधि पहली बार लोड करते समय पीपीआई धारक को एसएमएस/ईमेल/पोस्ट अथवा अन्य किसी साधन द्वारा स्पष्ट रूप से सूचित की जाए।

9.2 पीपीआई धारक के केवाईसी पूरा करने पर पीपीआई की खुली प्रणाली

  1. केवल बैंकों को ही पीपीआई धारक के केवाईसी पूरे करने पर (जैसे कि पैरा 6 में निर्दिष्ट किया गया है) पीपीआई की खुली प्रणाली जारी करने की अनुमति दी जाए।

  2. ये पीपीआई रिलोड करने योग्य स्वरूप के होंगे और केवल इलैक्ट्रॉनिक फॉर्म में जारी किए जाएंगे, जिसमें कार्ड भी शामिल हैं।

  3. बकाया राशि किसी भी समय रु.1,00,000/- से अधिक नहीं होनी चाहिए।

  4. निधि ’बैक टू सोर्स’ (भुगतान सोर्स जहां से पीपीआई लोड किया गया था वहां) अथवा ‘पीपीआई धारक के स्वयं के बैंक खाते’ में (जारीकर्ता द्वारा विधिवत प्रमाणित) अंतरित किए जा सकते हैं। तथापि, पीपीआई जारीकर्ता पीपीआई धारक के जोखिम प्रोफाइल, अन्य परिचालनगत जोखिम आदि ध्यान में रखते हुए सीमा तय कर सकते हैं।

  5. पीपीआई जारीकर्ता ‘पहले पंजीकृत लाभभोगियों’ की सुविधा प्रदान कर सकते हैं वहीं पीपीआई धारक लाभभोगियों को उनके बैंक खाते के ब्योरे, उसी जारीकर्ता (अथवा भिन्न जारीकर्ता जैसे और जब अनुमत हों) आदि द्वारा जारी पीपीआई के ब्योरे देकर उन्हें पंजीकृत कर सकते हैं।

  6. ऐसे पहले पंजीकृत लाभभोगियों के मामले में निधि अंतरण सीमा प्रति माह प्रति लाभभोगी रु.1,00,000/- से अधिक नहीं होनी चाहिए। पीपीआई जारीकर्ता पीपीआई धारक का जोखिम प्रोफाइल, अन्य परिचालनगत जोखिम आदि को ध्यान में लेते हुए सीमाओं को तय करें।

  7. अन्य सभी मामलों में निधि अंतरण सीमाएं प्रति माह रु.10,000/- तक प्रतिबंधित की जाएंगी।

  8. ऊपर दी गई सीमाओं के अनुसार ऐसे पीपीआई से पीपीआई के अन्य खुली प्रणाली, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड में निधि अंतरण के लिए भी अनुमति दी जाएंगी।

  9. पीपीआई इस्तेमाल करने वालों के लिए वस्तु और सेवाओं की खरीद पर कोई अलग सीमा नहीं है और पीपीआई जारीकर्ता समग्र पीपीआई सीमा के भीतर इन प्रयोजनों के लिए सीमा तय करें।

  10. पीपीआई जारीकर्ता पीपीआई धारकों को इन सीमाओं के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित करें और पीपीआई धारकों को अपनी स्वयं की निधि अंतरण सीमाएं तय करने के लिए आवश्यक विकल्प प्रदान करें।

  11. पीपीआई जारीकर्ता पीपीआई को बंद करने के लिए भी विकल्प प्रदान करें और इस प्रकार के पीपीआई के लिए स्वीकार्य सीमा के अनुसार बकाया राशि अंतरित करें। इस हेतु जारीकर्ता पीपीआई जारी करते समय धारक को पूर्व नामित बैंक खाते के ब्योरे अथवा उसी जारीकर्ता के अन्य पीपीआई (अथवा अन्य जारीकर्ता जैसे और जब अनुमति हों) जिसको पीपीआई में उपलब्ध बकाया राशि, ऐसे पीपीआई की वैध अवधि समाप्त होने पर पीपीआई बंद होने के मामले में अंतरित की जाएगी, के ब्योरे प्रस्तुत करने का एक विकल्प प्रदान करे।

  12. ऐसे पीपीआई की मुख्य बातें पीपीआई जारी करते समय/निधि पहली बार लोड करते समय पीपीआई धारक को एसएमएस/ईमेल/पोस्ट अथवा अन्य किसी साधन द्वारा स्पष्ट रूप से सूचित की जाए।

10. पीपीआई की विशेष श्रेणी

इस मास्टर निदेशों के जारी होने की तारीख से, पीपीआई जारीकर्ताओं को निम्नलिखित दो श्रेणियों को छोड़कर पहले अनुमत कोई अन्य श्रेणी के पीपीआई को जारी करना बंद करना होगा:

10.1 उपहार लिखत

बैंक और गैर बैंक इकाइयों को निम्नलिखित शर्तों के अधीन प्रीपेड उपहार लिखत के लिए अनुमति है:

  1. प्रत्येक प्रीपेड उपहार लिखत का अधिकतम मूल्य रु.10,000/- से अधिक नहीं होना चाहिए।

  2. ये लिखत रिलोड करने योग्य नहीं होंगे।

  3. ऐसे लिखतों के लिए कैश-आउट अथवा पुनर्निधि अथवा निधि अंतरण अनुमत नहीं होगा।

  4. ऐसे लिखतों के खरीददारों के केवाईसी ब्योरे पीपीआई जारीकर्ताओं द्वारा रखे जाएंगे। ऐसे ग्राहक जिनके भारत में बैंक खातों में डेबिट करके ऐसे लिखत जारी किए गए हैं उनके लिए अलग केवाईसी की आवश्यकता नहीं है।

  5. इकाइयों को चाहिए कि वे ऐसे लिखतों की संख्या, जो उनके ग्राहकों को जारी किए जा सकते हैं, लेनदेन सीमाएं आदि तय करने में एक जोखिम आधारित दृष्टिकोण अपनाएं जो उनके बोर्ड द्वारा विधिवत अनुमोदित किया गया हो।

  6. जारीकर्ता की बोर्ड अनुमोदित नीति के अनुसार उपहार लिखत का पुनर्वैधीकरण (जिसमें नई लिखतों का जारी करना शामिल है) किया जाए।

  7. वैधीकरण और प्रतिदान पर पैरा 13 के प्रावधानों का यथा लागू, अनुपालन किया जाए।

  8. ऐसे पीपीआई की मुख्य बातें पीपीआई जारी करते समय/निधि पहली बार लोड करते समय पीपीआई धारक को एसएमएस/ईमेल/पोस्ट अथवा अन्य किसी साधन द्वारा स्पष्ट रूप से सूचित की जानी चाहिए।

10.2 मास ट्रांजिट सिस्‍टम के लिए पूर्वदत्‍त भुगतान लिखत (पीपीआई-एमटीएस)

  1. पीपीएस अधिनियम के अंतर्गत इन पीपी लिखतों को जारी और संचालित करने का प्राधिकार प्राप्‍त हो जाने पर मास ट्रांजिट सिस्‍टम ऑपरेटर ऐसे सेमी क्‍लोज्‍़ड पीपीआई जारी कर सकते हैं।

  2. पीपीआई-एमटीएस को पीपीआई-एमटीएस योग्‍य बनने के लिए ट्रांजिट सर्विस संबंधी ऑटोमेटेड फेअर कलेक्‍शन एप्‍लीकेशन होना आवश्‍यक है।

  3. मास ट्रांजिट सिस्‍टम के अलावा ऐसे पीपीआई-एमटीएस का उपयोग केवल उन्‍हीं व्‍यापारियों के पास हो सकेगा जिनका कार्य ट्रांजिट सिस्‍टम से संबद्ध/संबंधित हो अथवा उसी परिसर में हो।

  4. पीपीआई जारी करने के लिए जारीकर्ता ग्राहक ब्‍योरे, यदि कोई हों, के संबंध में निर्णय ले सकते हैं।

  5. जारी किए गए पीपीआई-एमटीएस री-लोड करने योग्‍य होंगे और किसी एक समय पर पीपीआई का अधिकतम बकाया मूल्‍य 3000 रुपए की सीमा से अधिक नहीं होगा।

  6. इन पीपी लिखतों के माध्‍यम से कैश-आउट या रीफंड या फंड ट्रांसफर करने की अनुमति नहीं है।

  7. पीपीआई-एमटीएस के मामले में अन्‍य आवश्यकताएं, जैसे कि – एस्‍क्रो व्‍यवस्‍था, ग्राहक शिकायत निवारण व्‍यवस्‍था, एजंट संबंधी समुचित सावधानी, रिपोर्टिंग तथा एमआईएस आवश्‍यकताएं आदि भी लागू होंगी।

  8. जारीकर्ता की बोर्ड अनुमोदित नीति के अनुसार इन पीपी लिखतों का पुनर्वैधीकरण (जिसमें नए लिखतों को जारी करने का माध्‍यम भी शामिल है) किया जा सकता है।

  9. अनुच्‍छेद 13 में वैधता और रिडेम्‍पशन संबंधी दिए गए प्रावधानों का, जिस रूप में लागू हों, पालन किया जाए।

  10. पीपीआई धारक को पीपीआई जारी करते समय/पहली बार निधि जमा करने से पहले इन पीपी लिखतों की विशेषताओं के बारे में एसएमएस/ई-मेल/डाक या अन्‍य किसी माध्‍यम से स्‍पष्‍ट रूप से अवगत करा दिया जाए।

11. बैंकों और गैर-बैंकों द्वारा जारी किए गए वर्तमान पीपीआई लिखतों को परिवर्तित करना

  1. पीपीआई जारीकर्ता सभी पीपीआई धारकों को उन्‍हें जारी किए गए वर्तमान सेमी-क्‍लोज्‍ड और ओपन सिस्‍टम पीपी लिखतों (पूर्व में अनुमत विभिन्‍न प्रकारों/वर्गों के अनुसार) को अनुच्छेद 9 में दिए गए किसी भी प्रकार के पीपीआई में परिवर्तित करने का विकल्‍प दें। संबंधित प्रकार के पीपीआई के बारे में समुचित सावधानी बरतने के बाद इस प्रकार के परिवर्तन को 28 फरवरी, 2018 या उससे पहले पूरा कर लिया जाए। उदाहरणार्थ, यदि कोई वर्तमान पीपीआई केवाईसी अनुपालित सेमी-क्‍लोज्‍ड पीपीआई में परिवर्तित किया जाता है तो ऐसी स्थिति में यह प्रक्रिया पीपीआई धारक की केवाईसी करने के बाद ही की जाए (जैसा कि अनुच्‍छेद 6 में कहा गया है)।

  2. यदि कोई पीपीआई धारक ने उक्‍त (क) के अनुसार विकल्‍प न लिया हो तो उन्‍हें जारी किए गए पीपीआई को 01 मार्च 2018 को अनिवार्य रूप से अनुच्‍छेद 9.1(i) में किए गए उल्‍लेख के अनुसार न्‍यूनतम ब्‍योरे वाले पीपीआई में, उस पर लागू सभी विशेषताओं के साथ, परिवर्तित किया जाए।

  3. ऐसे पीपीआई पर तब तक अगले किसी ऋण/लोडिंग की अनुमति नहीं होगी जब तक कि (अनुच्‍छेद 9.1(i) में उल्लिखित) न्‍यूनतम ब्‍योरे प्राप्‍त नहीं कर लिए जाते। तथापि पीपीआई धारक को सामान और सेवाओं की खरीद के लिए वर्तमान में उपलब्‍ध शेष राशि का उपयोग करने की अनुमति दी जा सकती है।

  4. पीपीआई जारीकर्ता को चाहिए कि वे ग्राहकों को इन परिवर्तनों की जानकारी दें और वतर्मान के सभी ऐसे पीपीआई धारकों को पीपीआई में उपलब्‍ध बकाया राशि को, बिना किसी लेनदेन सीमा के, बैंक खाते में अंतरित करने का एकबारगी विकल्‍प दें। इस प्रकार के धन अंतरण के लिए पीपीआई जारीकर्ता द्वारा पीपीआई धारकों से कोई शुल्‍क न लिया जाए। इसे 28 फरवरी, 2018 तक पूरा कर लिया जाए।

  5. न्‍यूनतम ब्‍योरे वाले ऐसे वर्तमान सेमी-क्‍लोज्‍ड पीपीआई, जिनमें बकाया राशि 10,000/-रुपए से अधिक है, अगली लोडिंग की अनुमति तब तक न दी जाए जब तक कि बकाया राशि 10,000/-रुपए से कम न हो जाए। इसके बाद अनुच्‍छेद 9.1(i) में उल्लिखित सीमाएं लागू होंगी। मद 11(घ) के अनुसार एकबारगी बकाया अंतरण के विकल्‍प को छोड़कर, निधि अंतरण सुविधा इन निदेशों के जारी होने की तारीख से उपलब्‍ध नहीं होगी।

  6. पीपीआई जारीकर्ता को चाहिए कि वे वर्तमान पीपीआई के अंतरण से संबंधित आंकड़ों का अभिलेख रखें ताकि आवश्‍यकता पड़ने पर उसे भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रस्‍तुत किया जा सके।

12. संग्रहित धन का अभिनियोजन

12.1 समय पर निपटान सुनिश्चित करने की दृष्टि से गैर-बैंक पीपीआई जारीकर्ता को चाहिए कि वे पीपीआई जारी करने के बदले में प्राप्‍त संग्रहित राशि का यहां दिए गए प्रावधान के अनुसार निवेश करें।

12.2 बैंकों द्वारा संचालित योजनाओं के मामलों में बकाया राशि को रिज़र्व बनाए रखने की बाध्‍यता की दृष्टि से 'निवल मांग और मीयादी देयता' के भाग के रूप में माना जाएगा। इस स्थिति की गणना रिपोर्टिंग की तारीख पर बैंक की बहियों में पाए गए शेष के आधार पर की जाएगी।

12.3 गैर-बैंक पीपीआई जारीकर्ताओं को चाहिए कि वे अपना बकाया शेष किसी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक के एस्‍क्रो खाते में रखें। एस्‍क्रो खाता बनाए रखने के प्रयोजन से गैर-बैंक संस्‍थाओं द्वारा पीपीआई जारी करने के लिए संचालित की गई भुगतान प्रणाली को पीएसएस अधिनियम, 2007 की धारा 23ए के अंतर्गत 'निर्दिष्‍ट भुगतान प्रणाली' माना जाएगा। एस्‍क्रो शेष बनाए रखने के लिए निम्‍नलिखित शर्तें होंगी:-

(i) एस्‍क्रो शेष किसी भी एक समय में केवल एक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक में रखा जाएगा।

(ii) यदि एस्‍क्रो खाते को एक बैंक से दूसरे बैंक में अंतरित करना हो तो उसे समय-बद्ध ढंग से किया जाए ताकि व्‍यापारियों के भुगतान चक्र पर प्रतिकूल असर न पड़े। ऐसा अंतरण यथासंभव कम समय में पूरा किया जाए और इसके लिए भारतीय रिज़र्व बैंक की पूर्व अनुमति ली जाए।

(iii) एस्‍क्रो खाते का शेष, दिन समाप्ति पर, बकाया पीपीआई और व्‍यापारियों को देय भुगतान के मूल्‍य से कम नहीं होना चाहिए। पीपीआई जारीकर्ताओं को चाहिए कि जहां तक संभव हो सके पीपीआई जारी करने, पीपीआई धारकों के पीपीआई में लोड/रीलोड करने पर एस्‍क्रो खाते में राशि तुरंत जमा कर दें। किसी भी स्थिति में कारोबार दिन की समाप्ति (जिस दिन को पीपीआई जारी, लोड/रीलोड किया गया) के बाद एस्‍क्रो खाते में इस प्रकार की राशि जमा न की जाए। गैर-बैंक पीपीआई जारीकर्ता इस पर दैनिक आधार पर नज़र रखें। यदि कोई कमी है तो उसकी जानकारी भारतीय रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय के डीपीएसएस को तुरंत दी जाए।

(iv) एस्‍क्रो खाते से केवल निम्‍नलिखित नामे और जमा की अनुमति होगी:

जमा

    1. पीपीआई जारी करने, लोड/रीलोड करने के बाद प्राप्‍त भुगतान जिनमें एजंट के स्‍थान पर प्राप्‍त भुगतान भी शामिल हैं।

    2. विफल/विवादग्रस्‍त/वापसी/निरस्‍त लेनदेनों के कारण प्राप्‍त रीफंड।

    3. रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर अनुमत अंतरपरिचालन भुगतान प्रणाली में सहभागिता संबंधी अनिवार्य निपटान हेतु प्रायोजक बैंक से प्राप्‍त भुगतान।

नामे

    1. विभिन्‍न व्‍यापारियों/सेवा प्रदाताओं से प्राप्‍त दावों की प्रतिपूर्ति हेतु किए जाने वाले भुगतान।

    2. रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर दी गई अनुमति के अनुसार पीपीआई धारकों से प्राप्‍त निधि अंतरण संबंधी अनुदेशों के अनुसार कार्रवाई करने के लिए प्रायोजक बैंकों को किया जाने वाला भुगतान।

    3. रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर अनुमत अंतरपरिचालन भुगतान प्रणाली में सहभागिता संबंधी अनिवार्य निपटान हेतु प्रायोजक बैंक को किया जाने वाला भुगतान।

    4. सरकार को देय करों का भुगतान (पीपीआई बिक्री/रीलोड के साथ खरीददारों से प्राप्‍त राशि)।

    5. पीपीआई गलत ढंग से या धोखाधड़ी के माध्‍यम से (यह सिद्ध हो जाने पर कि अंतरण गलत ढंग या धोखाधड़ी से हुआ है)लोड/रीलोड किए जाने पर पीपीआई में हुए लेनदेनों को निरस्‍त हो जाने पर की जाने वाली धनवापसी। धन उसी स्रोत में वापस जमा किया जाना चाहिए जिसमें से वह प्राप्‍त हुआ था। मामले का निपटान होने तक ऐसी निधि जब्‍त न की जाए।

    6. पीपीआई कारोबार के सामान्‍य संचालन में पीपीआई जारीकर्ता का देय अन्‍य कोई भुगतान (जैसे कि, सेवा प्रभार, जब्‍त राशि, कमीशन, आदि)।

    7. विनियामक/न्‍यायालय/विधि प्रवर्तन एजन्सियों द्वारा निर्देशित अन्‍य कोई नामे राशि।

टिप्‍पणी: (1) सेवा प्रभारों, कमीशन और ज़ब्‍त की जाने वाली राशि के संबंध में भुगतान दरें पूर्व निर्धारित/निर्धारित अंतराल पर होनी चाहिए। ऐसे अंतरण पीपीआई जारीकर्ता के नामोद्दिष्ट बैंक खाते में ही किए जाएंगे जो कि उस बैंक के साथ किए गए करार में निर्दिष्ट हो जिसमें एस्क्रो खाता रखा गया है। (2) ये सभी प्रावधान पीपीआई जारीकर्ता और उस बैंक के बीच हस्‍ताक्षरित सर्विस लेवल करार का भाग होंगे जिसमें एस्‍क्रो खाता खोला गया हो।

(v) जारीकर्ता/ऑपरेटर और जिस बैंक में एस्‍क्रो खाता है उस बैंक के बीच किए गए करार में इस बात का अनिवार्य खंड होना चाहिए कि बैंक एस्‍क्रो खाते की राशि का उपयोग केवल व्‍यापारियों/पीपीआई धारकों को भुगतान के लिए कर सकेगा। ऐसे अंतरण पीपीआई जारीकर्ता के उसी बैंक खाते से होंगे जिसका उल्‍लेख उस बैंक के साथ किए गए करार में हो जहां एस्‍क्रो खाता खाता खोला गया है।

(vi) यदि पीपीआई जारीकर्ता कोई अन्‍य कारोबार कर रहे हों तो व्‍यापारियों की निधि का निपटान ऐसे कारोबार के साथ मिला कर न किया जाए।

(vii) निम्‍न अनुचछेद 12.4 में उल्लिखित राशियों को छोड़कर इस प्रकार की शेष राशियों पर बैंक द्वारा कोई ब्‍याज देय नहीं होगा।

(viii) पीपीआई जारीकर्ता को चाहिए कि वे उनके पास उपलब्‍ध व्‍यापारियों की सूची बैंक को प्रस्‍तुत करें और उसे समय-समय पर उसका अद्यतन करें। बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि भुगतान केवल पात्र व्‍यापारियों/प्रयोजनों के लिए किया जा रहा है। पीपीआई जारीकर्ता और एस्‍क्रो खाता खोले गए बैंक के बीच किए गए करार में इस बात का विशेष खंड होगा कि एस्‍क्रो खाते की शेष राशि को उपयोग केवल उक्‍त उल्लिखित प्रयोजनों के लिए किया जाएगा।

(ix) ई-कॉमर्स के साथ-साथ डिजिटल बाज़ारों के भुगतानों में पीपीआई की बढ़ती स्‍वीकार्यता के चलते भुगतान व्‍यवस्‍था के लिए पेमेंट एग्रीगेटर्स/पेमेंट गेटवेज़ का उपयोग आम बनता जा रहा है। इस परिदृश्‍य में यह प्रथा चल पड़ी है कि पीपीआई जारीकर्ता डिजिटल बाज़ार स्‍थान और/या पेमेंट एग्रीगेटर्स/पेमेंट गेटवेज़ के साथ आवश्‍यक करार कर लेता है जबकि यह करार उस व्‍यक्तिगत व्‍यापारियों के साथ होना चाहिए जो ऐसे पीपीआई स्‍वीकार कर रहे हैं जिन्‍हें जारीकर्ता द्वारा भुगतान लिखत के रूप के जारी किया गया है। ऐसी स्थिति में पीपीआई जारीकर्ता को चाहिए कि वे डिजिटल बाज़ार स्‍थान और/या पेमेंट एग्रीगेटर्स/पेमेंट गेटवेज़ से इस आशय का घोषणापत्र लें कि जारीकर्ता जो भुगतान कर रहे हैं उसका उपयोग संबंधित व्‍यापारियों को भुगतान करने के लिए किया जा रहा है। जारीकर्ता ऐसे घोषणापत्र एस्‍क्रो खाते वाले बैंक के को प्रस्‍तुत करेंगे।

(x) प्राधिकृत संस्‍थाएं तिमाही आधार पर डीपीएसएस, रिज़र्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय को लेखापरीक्षक/कों द्वारा हस्ताक्षरित एक प्रमाणपत्र (प्ररुप संलग्‍न – अनुलग्‍नक-5) प्रस्‍तुत करेंगे जिसमें यह प्रमाणित किया गया होगा कि जारी किए गए पीपीआई का बकाया मूल्‍य और व्‍यापारियों को देय भुगतान चुकता करने के लिए संस्‍था एस्‍क्रो खाते में पर्याप्‍त शेषराशि रखी जा रही है। यह प्रमाणपत्र संबंधित तिमाही समाप्‍त होने पर पंद्रह दिनों के भीतर जमा किया जाना चाहिए। संस्‍थाएं लेखापरीक्षक/कों द्वारा हस्‍ताक्षरित वार्षिक प्रमाणपत्र (अनुलग्‍नक-5) भी प्रस्‍तुत करेंगे। यह प्रमाणपत्र संस्‍था का रिज़र्व बैंक के साथ निर्धारित लेखा वर्ष के लिए होगा।

(xi) एस्‍क्रो खाते वाले बैंकों में रखी गई बकाया राशियों की तुलना में लिखतों और व्‍यापारियों को देय भुगतानों के मूल्‍य के संबंध में उचित अभिलेख भारतीय रिज़र्व बैंक या जहां खाता रखा गया हो वहां मांगे जाने पर उपलब्‍ध कराया जाए।

12.4 अनुच्‍छेद 12.3(vii) में एक अपवाद यह है कि गैर-बैंक जारीकर्ता एस्‍क्रो खाते वाले बैंक के साथ यह करार कर सकते हैं कि एस्‍क्रो खाते की राशि का 'मूल अंश' एक अलग खाते में अंतरित किया जाएगा जिस पर ब्‍याज देय होगा। इसके लिए निम्‍नलिखित शर्तें होंगी:-

  1. बैंक इस बात से संतुष्‍ट हो जाए कि जो राशि जमा की गई है वह राशि 'मूल अंश' है। इसके लिए आवश्‍यक दस्‍तावेज़ों का उचित रूप से सत्‍यापन कर लिया जाए।

  2. जिस खाते की राशि पर ब्‍याज देय है ऐसी राशि एस्‍क्रो खाते से जोड़ी जाए, अर्थात ऐसी राशि बैंक को उपलब्‍ध रहे ताकि एस्‍क्रो खाते में यदि कम राशि हो तो संस्‍था की भुगतान आवश्‍यकता को उसमें से पूरा किया जा सके।

  3. इस सुविधा की अनुमति उन संस्‍थाओं को रहेगी जो कम से कम एक वर्ष से कारोबार कर रही हैं (26 पखवाड़े) और जिनके लेखों को संपूर्ण वर्ष के लिए विधिवत् लेखा-परीक्षण किया गया हो।

  4. ऐसी जमाराशियों पर ऋण की अनुमति नहीं होगी। बैंक इस प्रकार की जमाराशियों पर न तो कोई जमा रसीद जारी करेंगे या न ही ऐसी राशियों पर कोई लियन चिह्नित करेंगे।

  5. निम्‍न प्रकार परिकलित मुख्‍य अंश एस्‍क्रो खाते से जुड़ा रहेगा। भारतीय रिज़र्व बैंक को तिमाही और वार्षिक आधार पर प्रस्‍तुत किए जाने वाले लेखापरीक्षकों के प्रमाणपत्रों में एस्‍क्रो खाते की शेष राशि और मुख्‍य अंश के संबंध में स्‍पष्‍ट उल्‍लेख में होना चाहिए।

टिप्‍पणी : इन निदेशों के प्रयोजन से 'मुख्‍य अंश' का निम्‍न प्रकार परिकलन किया जाए:-

चरण 1: पिछले महीने से एक वर्ष के लिए (26 पखवाड़े) पखवाड़ा आधार पर (एफएन) न्‍यूनतम दैनिक बकाया राशि (एलबी) परिकलित की जाए।

चरण 2: पखवाड़ा आधार पर न्‍यूनतम बकाया शेषराशियों का औसत निकाला जाए [(एफएन1 का एलबी1+ एफएन2 का एलबी2+ ....... एफएन26 का एलबी26) को 26 से भाग दें]।

चरण 3: इस प्रकार परिकलित औसत शेष 'मुख्‍य अंश' होगा जो ब्‍याज के लिए पात्र होगा।

13. वैधता और रिडेम्‍पशन

13.1 देश में जारी सभी पीपीआई की न्‍यूनतम वैधता अवधि उनके अंतिम लोडिंग/रीलोडिंग की तारीख से एक वर्ष की होगी। पीपीआई जारीकर्ता यदि चाहें तो इससे लंबी अवधि के पीपीआई जारी कर सकते हैं। यदि पीपीआई कार्ड के रूप में जारी किया गया हो तो (जिस पर वैधता अवधि का उल्‍लेख हो) तो ग्राहक को कार्ड बदलने की मांग का विकल्‍प होगा।

13.2 पीपीआई जारीकर्ताओं को चाहिए कि पीपीआई की वैधता अवधि समाप्‍त होने से पहले 45 दिनों की अवधि के दौरान वे पीपीआई धारकों को उचित अंतरालों पर चेतावनी दें। चेतावनी सूचना एसएमएस/ई-मेल/डाक या अन्‍य किसी माध्‍यम से दी जा सकती है। पीपीआई जारी करते समय धारक ने जिस भाषा को प्राथमिकता दी हो उस भाषा में सूचना भेजी जाए।

13.3 गैर बैंक पीपीआई जारीकर्ता पीपीआई की समाप्ति की तारीख से कम से कम तीन वर्षों तक बकाया शेष अपने लाभ और हानि लेखे में अंतरित नहीं कर सकते। पीपीआई की समाप्ति के बाद किसी भी समय यदि पीपीआई धारक पीपीआई जारीकर्ता के पास इस प्रकार की राशि के रीफंड की मांग करता तो ऐसी राशि का भुगतान पीपीआई धारक के खाते में कर दिया जाए।

13.4 पीपीआई जारी करने वाले बैंक बैंकिंग विनियमन विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक के द्वारा जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता निधि संबंधी जारी किए गए परिपत्र डीबीओडी. सं. डीईएएफ़ कक्ष. बीसी. 101/ 30.01.002/2013-14 दिनांक 21 मार्च 2014 और समय-समय पर यथा संशोधित अनुदेशों के द्वारा निर्देशित होंगे।

13.5 जारीकर्ता पीपीआई जारी करते समय ग्राहक को पीपीआई की समाप्ति अवधि को स्पष्ट तौर पर बताए। ऐसी जानकारी पीपीआई की बिक्री के लिए बनी शर्तों के अनुसार स्पष्ट रूप से बताया जाए। साथ ही जारीकर्ता इसे जहां कही लागू हो, वेबसाइट/मोबाइल एप्लिकेशन पर स्पष्ट तौर पर दर्शाया करें।

13.6 ऐसे पीपीआई जिसमें लगातार एक वर्ष तक कोई भी लेनदेन नहीं किया गाय हो उसे पीपीआई जारीकर्ता पीपीआई धारक/धारकों को सूचना देने के बाद असक्रिय कर देगा। इसे पुनः सक्रिय वैध और लागू समुचित उपाय करने के बाद ही कर सकता है। ऐसे पीपीआई/यों को भारतीय रिज़र्व बैंक को अलग से रिपोर्ट किया जाएगा।

13.7 पीपीआई धारकों को पीपीआई में बचे शेष को भुनाने की अनुमति होगी यदि किसी कारण से यह योजना बंद किया जा रहा हो या भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बंद करने के लिए निर्देशित किया गया हो।

14. लेनदेन की सीमाएं

14.1 धारक को पीपीआई के लिए लागू समग्र सीमा के भीतर इन प्रयोजनों के लिए पीपीआई का उपयोग करने की अनुमति होगी। पीपीआई जारीकर्ता धारकों के जोखिम समझ को ध्यान में रखते हुए अपने जोखिम प्रबंधन नीति के अनुसार ऐसी सीमाओं के निर्धारण पर निर्णय लेगा।

14.2 पीपीआई की प्रत्येक प्रकार/ श्रेणी के लिए दर्शाए गए सभी वित्तीय सीमाओं का कड़ाई से पालन करेगा।

14.3 वापसी प्रबंधन

क) लेनदेनों के फेल/वापसी/नामंजूर/निरस्त होने पर वापसी तत्काल संबन्धित पीपीआई को किया जाएगा भले ही निधियों के ऐसे अनुप्रयोग से यदि पीपीआई के प्रकार/श्रेणी के लिए निर्धारित सीमाओं से अधिक हो और यह उस सीमा तक किया जाएगा जब शुरुआत में पीपीआई को डेबिट करते हुए भुगतान किया गया था।

ख) तथापि, लेनदेनों के फेल/वापसी/नामंजूर/निरस्त होने पर वापसी किसी अन्य लिखत का उपयोग करते हुए पीपीआई में क्रेडिट नहीं किया जाएगा।

ग) पीपीआई जारीकर्ता से अपेक्षित है कि वह ऐसे विवरणों/वापसी आदि के पूरे ब्योरें का रखरखाव करें और जब कभी मांगा जाए तब यह उपलब्ध रहे।

घ) साथ ही, पीपीआई जारीकर्ता एक आवश्यक प्रणाली की व्यवस्था करें ताकि किसी विशिष्ट पीपीआई को ध्‍यान में रखते हुए वापसी के मामलों पर लगातार निगरानी की जा सके और लेखा परीक्षा/संवीक्षा प्रयोजनों के लिए साक्ष्य के रूप में प्रस्‍तुत/साबित किया जा सके।

14.4 ग्रामीण क्षेत्रों में पीपीआई के ओपन प्रणाली मामलों में बिक्री केन्द्रों (पीओएस) के टर्मिनलों से प्रति दिन 2000/- रुपये की सीमा तक और अन्य क्षेत्रों के लिए 1000/- रुपये की नकदी आहरण की अनुमति होगी और यह पहले की तरह डेबिट कार्ड (पीओएस पर नकदी आहरण) पर लागू शर्तों के अधीन होगी।

15. सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम और जोखिम प्रबंधन फ्रेमवर्क

15.1 पीपीआई जारीकर्ताओं के लिए एक मजबूत जोखिम प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकता है ताकि धोखाधड़ी की चुनौतियों से निपट सके और ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पीपीआई जारीकर्ता पर्याप्त सूचना और आंकड़ों की सुरक्षा की आधारिक संरचना और प्रणाली (धोखाधड़ी का पता लगाने और रोकथाम के लिए) की व्यवस्था करेगा।

15.2 सभी पीपीआई जारीकर्ता उनके द्वारा संचालित भुगतान प्रणाली की बचाव और सुरक्षा के लिए बोर्ड द्वारा अनुमोदित सुरक्षा नीति संबंधी जानकारी उपलब्ध कराएगा और पहचान किए गए जोखिम को कम करने के लिए इस नीति के अनुसार सुरक्षा उपायों को कार्यान्वित करेगा। पीपीआई जारीकर्ता सुरक्षा उपायों को (ए) अविरत आधार पर किन्तु कम से कम वर्ष में एक बार (बी) किसी सुरक्षा संबंधी घटना के बाद या उल्लंघन और (सी) उनके आधारिक संरचना या प्रक्रियाओं में पहले/बाद में कोई बड़ा बदलाव होता है तो उसकी समीक्षा करेगा।

15.3 पीपीआई जारीकर्ता यह सुनिश्चित करेगा कि जोखिम कम करने और धोखाधड़ी की रोकथाम करने के लिए बचाव और सुरक्षा संबंधी मामलों को निपटाने के लिए निम्नलिखित फ्रेमवर्क बनाएगा:

क) वालेट के मामले में पीपीआई जारीकर्ता यह सुनिश्चित करेगा कि पीपीआई जारीकर्ता द्वारा पीपीआई और अन्य सेवाओं के लिए यदि एक ही लॉगिन उपलब्ध कराया गया है तो उसे ग्राहकों को एसएमएस या ई मेल या डाक या किसी अन्य साधनों से स्पष्ट रूप में सूचित करेगा। वेब साइट/मोबाइल खाता से लॉग आउट करने का विकल्प प्रमुखता से उपलब्ध कराएगा।

ख) जारीकर्ता लॉगिन/पीपीआई, असक्रिय, टाइमआउट फीचर आदि के एक से अधिक अवैध प्रयासों को प्रतिबंधित करने के लिए उचित कार्यप्रणाली बनाएगा।

ग) जारीकर्ता ऐसी प्रणाली बनाएगा जहां वालेट में लेनदेनों के सभी सफल भुगतानों का ग्राहक से स्पष्ट सहमति ली गई है।

घ) कार्ड में (प्रत्यक्ष और आभासी) आवश्यक रूप में प्रमाणीकरण के अतिरिक्त कारक बनाना होगा जैसा कि डेबिट कार्ड के लिए अपेक्षित होता है और यदि पीपीआई पीपीआई-एमटीएस के अंतर्गत जारी किया गया हो तो उसे छोड़कर किया जाएगा।

ङ) जारीकर्ता लाभार्थी/लेनदेनों के विभिन्न प्रकार के लेनदेनों के मूल्य और लेनदेनों की संख्या संबंधी उच्चतम सीमा निर्धारित करने के लिए ग्राहक प्रेरित विकल्प उपलब्ध कराएगा। ग्राहकों को उच्चतम सीमा के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण और वैधता के साथ बदलने की अनुमति होगी।

च) जारीकर्ता प्रति पीपीआई एक दिन में लाभार्थी की संख्या जोड़ने की सीमा निर्धारित करेगा।

छ) जारीकर्ता, जब किसी लाभार्थी को जोड़ा जाता है तब उसके लिए चेतावनी(एलर्ट) की एक प्रणाली बनाएगा।

ज) पीपीआई जारीकर्ता पीपीआई को खोलने के बाद निधियों के अंतरण या लोडिंग /पीपीआई में निधियों के पुनः लोडिंग के लिए या लाभार्थी को जोड़ने के बाद उचित कुलिंग अवधि रखेगा ताकि पीपीआई के उपयोग में धोखाधड़ी को कम किया जा सके।

झ) जारीकर्ता एक ऐसी कार्यप्रणाली बनाएगा कि पीपीआई का उपयोग करते हुए जब लेनदेन किया जाता है तब एक चेतावनी भेजी जा सके। इसके अतिरिक्त राशियों के डेबिट या क्रेडिट की सूचना, उपर्युक्त लेनदेनों के पूर्ण होने के बाद पीपीआई में बकाया/उपलब्ध शेष को भी चेतावनी में दर्शाए।

ञ) जारीकर्ता प्रतिदिन/प्रति-लाभार्थी पीपीआई में हुए लेनदेनों की संख्या संबंधी गति / बारंबारता की जांच के लिए कार्यप्रणाली बनाएगा।

ट) जारीकर्ता पीपीआई में लोडिंग/निधियों का पुनः लोडिंग सहित हुए धोखाधड़ी लेनदेनों को रोकने, पता लगाने और प्रतिबंधित करने के लिए उपयुक्त कार्यप्रणाली बनाएगा।

ठ) जारीकर्ता संदेहास्पद परिचालन संबंधी मामले को आगे बढ़ाने के लिए उपयुक्त आंतरिक और बाह्य कार्यप्रणाली बनाने के साथ-साथ ऐसे लेनदेनों के लिए ग्राहकों को चेतावनी देने की सुविधा भी मुहैया कराएगा।

15.4 यहाँ निर्धारित की गई अपेक्षाएं न्यूनतम है और संस्थाए/कंपनियां यथोचित रूप से अतिरिक्त नियंत्रण और संतुलन लगा सकती है।

15.5 पीपीआई जारीकर्ता विभिन्न स्थानों पर निर्धारित सीमा से अधिक पीपीआई की एक से अधिक खरीद करने की तरकीब के रोकथाम के लिए केंद्रीकृत डाटाबेस/प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) यदि कोई हो, बनाएगा।

15.6 जहाँ उनके प्राधिकृत/नामित एजेंटों को प्रत्यक्ष इंटरफेस उपलब्ध करवाया गया है, पीपीआई जारीकर्ता यह सुनिश्चित करेगा कि इन प्रणालियों द्वारा विनियामक अपेक्षाओं का सख्ती से अनुपालन किया जा रहा है।

15.7 पीपीआई जारीकर्ता साइबर सुरक्षा की घटनाओं और साइबर सुरक्षा के उल्लंघनों की निगरानी, प्रबंधन और उसके अनुवर्तन के लिए कार्यप्रणाली स्थापित करेगा। साथ ही, उसकी रिपोर्ट डीपीएसएस, भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय कार्यालय, मुंबई को की जाएगी। सीईआरटी-इन द्वारा अधिसूचित किए गए ब्योरे के अनुसार सीईआरटी-इन में भी रिपोर्ट करेगा।

16. ग्राहक सुरक्षा और शिकायत निवारण फ्रेमवर्क

16.1 पीपीआई जारीकर्ता लिखत जारी करते समय धारक को सभी नियम और शर्तें को स्‍पष्‍ट और सामान्य भाषा (वरीय रूप में अंग्रेजी, हिंदी और स्थानीय भाषा) में बताएगा। इन डिस्क्‍लोजर में निम्नलिखित शामिल होगा:

क) लिखत के उपयोग के साथ जुड़ी सभी प्रभार और शुल्क।

ख) समाप्ति अवधि और लिखत की समाप्ति से संबन्धित नियम और शर्तें।

16.2 पीपीआई जारीकर्ता एक औपचारिक, सार्वजनिक रूप से प्रकट ग्राहक शिकायत निवारण फ्रेमवर्क बनाए जिसमें एक नोडल अधिकारी हो जो ग्राहक शिकायतों को संभालता हो और शिकायत के समाधान के लिए एसक्लेशन मैट्रिक्स और बदलाव का समय हो। यदि शिकायत सुविधा वेबसाइट/मोबाइल पर उपलब्‍ध है तो उसके लिए स्‍पष्‍ट और आसान पहुंच हो। फ्रेमवर्क में न्यूनतम बातें शामिल होंगी:

क) पीपीआई जारीकर्ता अपनी ग्राहक सुरक्षा और शिकायत निवारण नीति की जानकारी का प्रचार-प्रसार साधारण भाषा (वरीय रूप से अंग्रेजी, हिंदी और स्थानीय भाषा) में करेगा।

ख) पीपीआई जारीकर्ता वेबसाइट, मोबाइल वालेट एप, और कार्ड पर कस्टमर केयर संपर्क ब्योरा, शिकायत निवारण के लिए नोडल अधिकारी (टेलीफ़ोन नं., ईमेल पता, डाक पता आदि) के बारे में स्पष्ट रूप से दर्शाएगा।

ग) पीपीआई एजेंट पीपीआई जारीकर्ता का उचित साइनेज़ और ग्राहक केयर संपर्क ब्‍योरा उपर्युक्‍त (बी) के अनुसार प्रदर्शित करेगा।

घ) पीपीआई जारीकर्ता पंजीकृत की गई शिकायतों के लिए विशिष्ट शिकायत सं. के साथ ग्राहक द्वारा की गई शिकायत की स्थिति का पता लगाने की सुविधा उपलब्‍ध करवाएगा।

ङ) पीपीआई जारीकर्ता किसी ग्राहक के शिकायत का समाधान अविलम्ब किंतु 48 घंटों के भीतर प्रारंभ करेगा और समाधान ऐसे शिकायत की प्राप्ति की तिथि से 30 दिनों से अधिक नहीं होनी चाहिए।

च) पीपीआई जारीकर्ता अपने प्राधिकृत/नामित एजेंटों (नाम, एजेंट आईडी, पता, संपर्क ब्‍योरा आदि) की सूची का विस्तृत ब्‍योरा वेबसाइट/मोबाइल एप पर प्रदर्शित करेगा।

16.3 पीपीआई जारीकर्ता पर्याप्‍त जागरूकता पैदा करे और पीपीआई के सुरक्षित उपयोग के लिए ग्राहकों को शिक्षित करे साथ ही पासवर्ड गोपनीय रखने की आवश्यकता है, कार्ड के चोरी या खो जाने या डाटा का प्रमाणीकरण या यदि धोखाधड़ी/ दुरूपयोग आदि का पता चलने जैसे मामले में प्रकिया का पालन किया जाए।

16.4 पीपीआई जारीकर्ता अप्राधिकृत/पीपीआई में शामिल धोखाधड़ी के लेनदेनों के मामले में ग्राहक की जिम्मेदारी निर्धारण करने में प्रक्रिया और राशि को स्‍पष्‍ट रूप से निर्धारण करेगा। बैंक पीपीआई जारीकर्ता ग्राहरण सुरक्षा - अप्राधिकृत इलेक्‍ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेनों में ग्राहकों की सीमित दायित्‍व विषयक बैंकिंग विनियमन विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक के 6 जुलाई 2017 के परिपत्र डीबीआर.सं.एलईजी.बीसी.78/09.07.005/2017-18 से मार्गदर्शन प्राप्‍त कर सकते हैं।

16.5 पीपीपी जारीकर्ता पीपीआई धारकों को कम-से-कम पिछले छह माह का खाता विवरण जनरेट/ प्राप्‍त करने का विकल्‍प प्रदान करेंगे। खाते विवरण में कम-से-कम लेनदेन की तारीख, नामे डाली गई/ जमा की गई राशि, निवल शेष राशि और खाते का वर्णन होगा। इसके अलावा, पीपीआई जारीकर्ता कम-से-कम 10 लेनदेनों के लिए लेनदेन विवरण उपलब्‍ध कराएंगे।

16.6 बैंकों द्वारा जारी किए गए पीपीआई के मामले में ग्राहक शिकायत निवारण के लिए बैंकिंग लोकपाल योजना का सहारा ले सकेंगे।

16.7 गैर-बैंक पीपीआई जारीकर्ता शिकायतों की प्राप्ति और की गई कार्रवाई की स्थिति संबंधी रिपोर्ट संलग्‍न फार्मेट (अनुबंध-6) में संबंधित डीपीएसएस, आबीआई को परवर्ती माह 10 तारीख तक तिमाही आधार पर प्रस्‍तुत करेंगे। बैंक उक्‍त रिपोर्ट डीपीएसएस, मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय, आरबीआई को प्रस्‍तुत करेंगे।

16.8 पीपीआई जारीकर्ता कीमत निर्धारण में पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे तथा तत्‍संबंधी प्रभार की संरचना नीचे दी गई है :

क) एजेंट के स्‍तर पर प्रभारों में एकरूपता सुनिश्चित करना।

ख) अपनी वेबसाइट, मोबाइल ऐप, एजेंट के परिसरों आदि पर विभिन्‍न प्रकार के लेनदेनों के प्रभारों का प्रकटीकरण।

ग) एजेंटों को पीपीआई जारीकर्ताओं की ओर से उनके द्वारा दी गई सेवाओं के लिए ग्राहकों से कोई प्रभार लेने से रोकने हेतु विशिष्‍ट व्‍यवस्‍था।

घ) रिटेल आउटलेट/ उप एजेंटों के लिए अपेक्षित है कि वे पीपीआई जारीकर्ता के सेवाप्रदाता की हैसियत तथा उस आउटलेट पर दी जा रही सभी सेवाओं के शुल्‍क दर्शाते हुए सूचना फलक रखें।

ङ) पीपीआई जारीकर्ता की ओर से रसीद (मुद्रित या इलेक्‍ट्रॉनिक) जारी करके ग्राहक से वसूली गई राशि की पावती दी जाएगी।

16.9 पीपीआई जारीकर्ता उनके द्वारा और उनके एजेंटों द्वारा जारी किए गए सभी पीपीआई (सह-ब्रांड वाले पीपीआई सहित) से संबंधित सभी प्रकार के ग्राहक सेवा संबंधी पहलुओं को दूर करने के लिए उत्‍तरदायी होगा।

16.10 पीपीआई जारीकर्ता पीपीआई के संबंध में अक्‍सर पूछे जाने वाले प्रश्‍न (एफएक्‍यू) अपनी वेबसाइट/ मोबाइल ऐप पर भी प्रदर्शित करेंगे।

17. सूचना प्रणाली लेखापरीक्षा

17.1 प्राधिकृत गैर-बैंक संस्‍थाएं संबंधित वित्‍तीय वर्ष की समाप्ति से दो माह के भीतर प्रणाली लेखापरीक्षा रिपोर्ट, सीईआरटी-आईएन पैनल में शामिल लेखापरीक्षकों द्वारा की गई साइबर सुरक्षा लेखापरीक्षा सहित, डीपीएसएस, आरबीआई के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्‍तुत करेंगी।

17.2 बैंक साइबर सुरक्षा संरचना विषयक 02 जून 2016 के आरबीआई परिपत्र डीबीएस.सीओ/सीएसआईटीई/बीसी.11/33.01.001/2015-16 से मार्गदर्शन प्राप्‍त करें, जिसमें अन्‍य बातों के साथ-साथ मोबाइल आधारित ऐप्लिकेशनों की अपेक्षाएं शामिल की गई हैं।

17.3 लेखापरीक्षा के कार्यक्षेत्र में निम्‍नलिखित मदें शामिल होंगी :

क) सुरक्षा संबंधी नियंत्रणों का परीक्षण नियंत्रण डिजाइन (डिजाइन परीक्षण - टीओडी) की प्रभावशीलता और नियंत्रण परिचालनगत प्रभावशीलता (परिचालनगत प्रभावशीलता परीक्षण - टीओई) दोनों के परिप्रेक्ष्‍य में किया जाए।

ख) प्रौद्योगिकी का उपयोग करना ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्राधिकृत भुगतान प्रणाली संरक्षित, सुरक्षित, सुदृढ़ और कारग‍र ढंग से हो रहा है।

ग) हार्डवेयर ढांचे, ऑपरेटिंग सिस्‍टम और महत्‍वपूर्ण ऐप्लिकेशन, सुरक्षा और नियंत्रण व्‍यवस्‍था, जिसके अंतर्गत प्रमुख ऐप्लिकेशनों पर ऐक्‍सेस नियंत्रण शामिल हैं, आपदा पुनरुत्‍थान योजनाओं, कार्मिक प्रबंधन प्रणाली के प्रशिक्षण तथा ऐप्लिकेशन, प्रलेखन आदि का मूल्‍यांकन।

घ) ऐसी सूचना सुरक्षा गवर्नेंस और प्रक्रियाओं का मूल्‍यांकन करना, जो भुगतान प्रणालियों का समर्थन करती है।

ङ) सुरक्षा संबंधी उत्‍तम व्‍यवहार, खास तौर पर ऐप्लिकेशन सुरक्षा के जीवन चक्र और पैच/ संवेदनशीलता तथा प्राधिकृत सिस्‍टम से संबंधित प्रबंधन के पहलुओं में परिवर्तन तथा भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमोदित प्रक्रिया प्रवाह का अनुपालन।

च) प्राधिकार की प्राप्ति हेतु भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रस्‍तुत किए गए प्रक्रिया प्रवाह में उल्लिखित प्रक्रियाओं में पाए गए विचलनों, यदि कोई हों, पर टिप्‍पणी।

17.4 सभी पीपीआई जारीकर्ता कम-से-कम निम्‍नलिखित ढांचे की व्‍यवस्‍था कराएं :

क) ऐप्लिकेशन जीवन चक्र की सुरक्षा : सोर्स कोड ऑडिट व्यावसायिक दृष्टि से सक्षम कार्मिक/ सेवा प्रदाताओं द्वारा कराए जाएं या ऐप्लिकेशन प्रदाताओं/ ओईएम से इस आशय का आश्‍वासन प्राप्‍त किया जाए कि ऐप्लिकेशन एंबेडिड दुर्भावनापूर्ण/ कपटपूर्ण कोड से मुक्‍त है।

ख) सुरक्षा परिचालन केंद्र (एसओसी) : सुरक्षा संबंधी घटानों की केंद्रीकृत एवं समन्वित निगरानी और प्रबंधन हेतु सिस्‍टम स्‍तरीय (सर्वर), मोबाइल ऐप्लिकेशनों (पीपीआई) के ऐप्लिकेशन स्‍तरीय लॉगों का एसओसी के साथ एकीकरण।

ग) ऐंटी-फिशिंग : पीपीआई जारीकर्ता रोग मोबाइल ऐप/ फिशिंग हमलों की बढ़ती घटनाओं के परिप्रेक्ष्‍य में फिशिंग वेबसाइटों/ रोग ऐप्लिकेशनों की पहचान करने और उनका सामना करने की दृष्टि से बाह्य सेवा प्रदाताओं से ऐंटी-फिशिंग/ ऐंटी-रोग ऐप सेवाओं के लिए सब्स्क्राइब करें।

घ) जोखिम आधारित लेनदेन निगरानी : कपट जोखिम प्रबंधन प्रणाली के एक अंश के रूप में जोखिम आधारित लेनदेन निगरानी या चौकसी प्रक्रिया लागू करें।

ङ) वेंडर जोखिम प्रबंधन : (i) पीपीआई जारीकर्ता सेवा प्रदाता के साथ करार करे जिसमें अन्‍य बातों के साथ-साथ यह बात भी शामिल किया जाए कि देश के विनियामक द्वारा लेखापरीक्षा/ निरीक्षण का अधिकार का उपबंध हो; (ii) भारतीय रिज़र्व बैंक को पूछे जाने पर ऐसी सभी सूचना संसाधनों (ऑनलाइन/ व्‍यक्तिगत) का ऐक्‍सेस प्राप्‍त होगा, जिसका उपयोग पीपीआई प्रदाता द्वारा किया जाता है, चाहे बुनियादी संरचना/ प्रवर्तक संसाधन पीपीआई प्रदाता के परिसर में अवस्थित हो या न हो; (iii) पीपीआई जारीकर्ता बुनियादी संरचना की भौगोलिक अवस्थिति तथा सीमा के बाहर आंकड़ों के प्रसारण से संबंधित वि‍धिक व विनियामक अपेक्षाओं का पालन करें; (iv) पीपीआई जारीकर्ता सेवा प्रदाताओं द्वारा अपनाई जा रही सुरक्षा व नियंत्रण संबंधी प्रक्रियाओं की समीक्षा नियमित रूप से करें; (v) प्रदाता के साथ किए जाने वाले पीपीआई जारीकर्ताओं के सेवा करारों में सुरक्षा के संबंध में इस आशय का एक खंड हो कि जारीकर्ता की आईसीटी बुनियादी संरचना या प्रक्रिया से संबंधित ऐसी सुरक्षा का उल्‍लंघन का प्रकटीकरण किया जाए, जो कि सुरक्षा घटना प्रबंधन मानक आदि के अंश के रूप में सॉफ्टवेयर, ऐप्लिकेशन और आंकड़े तक नहीं सीमित है।

च) आपदा पुनरुत्‍थान : पीपीआई जारीकर्ता पीपीआई प्रणाली के लिए रिकवरी टाइम अब्‍जेक्टिव (आरटीओ)/ रिकवरी पॉइंट अब्‍जेक्टिव (आरपीओ) हेतु डीआर सुविधा की व्‍यवस्‍था करने पर विचार करे ताकि साइबर हमलों/ अन्‍य घटनाओं को त्‍वरित रूप से निपटाया जा सके तथा प्रक्रियाओं एवं आंकड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने के साथ-साथ आरटीओ के अनुरूप महत्‍वपूर्ण परिचालनों की बहाली की जा सके।

18. अंतर-परिचालनशीलता

इन सेवाओं के सभी प्रदाताओं द्वारा सामान्‍य मानकों का अंगीकरण इस प्रकार हो कि ग्राहक को अंतर-परिचालन योग्‍य बनाने की दृष्टि से ग्राहक को संबंधित खंड के अंतर्गत अन्‍य उपयोगकर्ताओं के साथ भुगतान लिखतों का निर्बाध उपयोग करने में समर्थ बनाया जा सके। तदनुसार निम्‍नानुसार यह निर्णय लिया गया है कि :

क) पीपीआई के मामले में अंतर-परिचालनशीलता प्रक्रिया चरणबद्ध हो।

ख) पहले चरण में पीपीआई जारीकर्ता (बैंक और गैर-बैंक संस्‍थाएं दोनों) सभी केवाईसी-अनुपालनकर्ता पीपीआई को इस निदेश के जारी करने की तारीख से छह माह के भीतर एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) के माध्‍यम से उनके बीच अंतर-परिचालन योग्‍य वॉलिटों के रूप में पीपीआई जारी करें।

ग) बाद के चरणों में यूपीआई के माध्‍यम से वॉलिटों और बैंक खातों के बीच अंतर-परिचालनशीलता की व्‍यवस्‍था करें।

घ) इसी प्रकार कॉर्डों के रूप में जारी किए गए पीपीआई की अंतर-परिचालनशीलता को भी यथासमय मूर्त रूप प्रदान किया जाए। तथापि, बैंक प्राधिकृत कॉर्ड नेटवर्कों के संयुक्‍त तत्‍वावधान में पीपीआई जारी करना पूर्ववत बरकरार रखें।

ङ) पीपीआई जारीकर्ता ऐसी अंतर-परिचालनशीलता, जिसके अंतर्गत सुरक्षा और संरक्षा, जोखिम न्‍यूनीकरण आदि शामिल हैं, से संबंधित तकनीकी और परिचालनगत अपेक्षाओं का अनुपालन सुनिश्चित करें।

च) परिचालन संबंधी दिशानिर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।

19. रिपोर्टिंग अपेक्षाएं

पीपीआई जारीकर्ता निम्‍नलिखित रिपोर्टें निर्धारित टेम्‍प्‍लेटों के मुताबिक इस मास्‍टर निदेश में उल्लिखित बारंबारता के अनुसार जारी करें :

  1. निवल मालियत प्रमाणपत्र (अनुबंध-2)

  2. निदेशक द्वारा घोषणा एवं वचनपत्र (अनुबंध-3)

  3. सह-ब्रैंडिंग भागीदारियों की सूची (अनुबंध-4)

  4. एस्‍क्रो खाते में शेष राशि रखने संबंधी लेखापरीक्षक प्रमाणपत्र (अनुबंध-5)

  5. पीपीआई ग्राहक शिकायत निवारण रिपोर्ट (अनुबंध-6)

  6. पीपीआई सांख्यिकी (अनुबंध-7)

20. निरसन और अन्‍य प्रावधान

क) इन निदेशों के जारी होने से अनुबंध-1 की सारणी-1 में विनिर्दिष्‍ट भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी अनुदेश/ दिशानिर्देश निरस्‍त हो गए हैं।

ख) अनुबंध-1 की सारणी-2 में विनिर्दिष्‍ट भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी अनुदेश/ दिशानिर्देश उस सीमा तक आंशिक रूप से निरस्‍त हो गए हैं, जिस सीमा तक वे पीपीआई के निर्गमन और परिचालनों के लिए लागू होते हैं।


अनुबंध -1

सारणी-1 : मास्टर निदेश में शामिल परिपत्रों की सूची

क्र. सं. परिपत्र सं दिनांक विषय
1 डीपीएसएस.सीओ.पीडी.सं. 1873/02.14.06/2008-09 27.04.2009 भारत में प्रीपेड भुगतान लिखतें जारी करने और परिचालन के लिए नीति संबंधी निर्गमन दिशानिर्देश
2 डीपीएसएस.सीओ.पीडी.सं. 344/02.14.06/2009-10 14.08.2009 भारत में पूर्व-दत्त भुगतान लिखतों को जारी करने के लिए और उसके परिचालन के लिए नीतिगत दिशा-निर्देश
3 डीपीएसएस.सीओ.सं. 1041/02.14.006/2010-11 04.11.2010 भारत में प्रीपेड भुगतान लिखित को जारी करने तथा परिचालन के नीतिगत (रिज़र्व बैंक) दिशा निर्देश – अतिरिक्त दिशा निर्देश
4 डीपीएसएस.सीओ.एडी सं. 780/02.27.004/2010-11 24.11.2010 प्रीपेड भुगतान लिखितों को जारी करना तथा परिचालन
5 डीपीएसएस.सीओ.ओएसडी सं. 1381/06.08.001/2010-11 27.12.2010 प्रीपेड भुगतान लिखितों पर सांख्यिकी का संग्रहण
6 डीपीएसएस.ओएसडी सं. 1445/06.12.001/2010-11 27.12.2010 भारत में प्रीपेड भुगतान लिखितों को जारी करने तथा उनका परिचालन-एस्क्रो खाते में शेष संबंधी लेखा परीक्षण प्रमाण-पत्र
7 डीपीएसएस.स. 2174/02.14.004/2010-11 23.03.2011 भारत में प्रीपेड भुगतान लिखत जारी करना और परिचालन- स्पष्टीकरण.
8 डीपीएसएस.सीओ. सं. 2501/02.14.06/2010-11 04.05.2011 भारत में प्रीपेड लिखत जारी करने और परिचालन के लिए नीतिगत दिशानिर्देश
9 डीपीएसएस.सीओ.पीडी.सं. 225/02.14.06/20011-12 04.08.2011 भारत में प्रीपेड लिखत जारी करने और परिचालन के लिए नीतिगत दिशानिर्देश
10 डीपीएसएस.सीओ.पीडी. सं. 2256/02.14.06/2011-12 14.06.2012 भारत में प्रीपेड लिखत जारी करने और परिचालन के लिए नीतिगत दिशानिर्देश
11 डीपीएसएस.सीओ.पीडी सं. 560/02.14.006/2012-13 01.10.2012 भारत में प्रीपेड लिखत जारी करने और परिचालन के लिए नीतिदच दिशानिर्देश -संशोधन
12 डीपीएसएस.सीओ.ओएसडी सं. 1604/06.06.005/2012-13 14.03.2013 ग्राहक शिकायतों के संबंध में सूचना एकत्र करना
13 डीपीएसएस.सीओ.पीडी. सं. 563/02.14.003/2013-14 05.09.2013 बिक्री केंद्र (पीओएस) पर नकदी का आहरण - बैंकों द्वारा जारी किए गए प्रीपेड भुगतान लिखत
14 डीपीएसएस.सीओ.पीडी. सं. 2074/02.14.006/2013-14 28.03.2014 भारत में प्रीपेड भुगतान लिखत को जारी करना और परिचालन - संशोधित समेकित नीतिगत दिशानिर्देश
15 डीपीएसएस.सीओ.पीडी. सं. 2366/02.14.006/2013-14 13.05.2014 भारत में प्रीपेड भुगतान लिखत को जारी करना और परिचालन - संशोधित समेकित नीतिगत दिशानिर्देश
16 डीपीएसएस.सीओ.पीडी.पीपी आई सं.3/02.14.006/2014-15 01.07.2014 भारत में प्रीपेड भुगतान लिखतों को जारी करने और उनके परिचालन संबंधी नीतिगत दिशानिर्देश – मास्टर परिपत्र
17 डीपीएसएस.सीओ.पीडी. सं. 980/02.14.006/2014-15 03.12.2014 भारत में प्री-पेड भुगतान लिखतों (पीपीआई) को जारी करना और उनका परिचालन करना - रियायतें
18 डीपीएसएस.सीओ.पीडी.पीपी आई सं.2/02.14.006/2015-16 01.07.2015 भारत में प्रीपेड भुगतान लिखतों को जारी करने और उनका परिचालन करने के संबंध में नीतिगत दिशानिर्देश – मास्टर परिपत्र
19 डीपीएसएस.सीओ.पीडी. सं. 58/02.14.006/2015-16 09.07.2015 प्रीपेड भुगतान लिखत (पीपीआई) दिशानिर्देश - मास ट्रांजिट सिस्टम (पीपीआई-एमटीएस) के लिए नई श्रेणी के प्रीपेड भुगतान लिखतों को लाना
20 डीपीएसएस.सीओ.पीडी. पीपी आई सं.1/02.14.006/2016-17 01.07.2016 मास्टर परिपत्र - भारत में प्रीपेड भुगतान लिखतों को जारी करने और उनका परिचालन करने के संबंध में नीतिगत दिशानिर्देश
21 डीपीएसएस.सीओ.पीडी. सं. 1288/02.14.006/2016-17 22.11.2016 इलेक्ट्रॉनिक भुगतानों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष उपाय - (i) भारत में प्रीपेड भुगतान लिखतों (पीपीआई) को जारी करने की सीमा में वृद्धि (ii) व्यापारियों (मर्चेंट) के लिए विशेष उपाय
22 डीपीएसएस.सीओ.पीडी. सं. 1610/02.14.006/2016-17 27.12.2016 प्रीपेड भुगतान लिखतों को जारी करने और उनका परिचालन करने के संबंध में मास्टर परिपत्र - पैरा 7.9 में संशोधन
23 डीपीएसएस.सीओ.पीडी. सं. 1669/02.14.006/2016-17 30.12.2016 इलेक्ट्रॉनिक भुगतानों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष उपाय - समय का विस्तार

सारणी 2: मास्टर दिशानिर्देशों के परिपत्रों में किए गए आंशिक संशोधन(पीपीआई के जारी करने तथा परिचालन के संबंध में कुछ सीमा तक लागू) की सूची

क्रं सं. परिपत्र सं दिनांक विषय
1 डीपीएसएस.एडी.सं. 1206/02.27.005/2009-2010 07.12.2009 पीएसएस अधिनियम, 2007 के अंतर्गत परिचालित भुगतान प्रणाली की प्रणाली लेखा परीक्षा
2 डीपीएसएस.सीओ.ओएसडी सं. 1444/06.11.001/2010-2011 27.12.2010 सीआईएसए के अर्द्ध-लेखा परीक्षकों से प्रणाली लेखा-परीक्षा संबंधी रिपोर्ट की प्रस्तुति के लिए निर्देश
3 डीपीएसएस.सीओ.ओएसडी सं. 2374/06.11.001/2010-11 15.04.2011 प्रणाली लेखा-परीक्षा रिपोर्ट की प्रस्तुति
4 डीपीएसएस.पी डी सीओ. सं. 622/02.27.019/2011-12 05.10.2011 घरेलू मुद्रा का अंतरण – छूट
5 डीपीएसएस.सीओ. एडी सं. 1204/02.27.005/2014-15 02.01.2015 प्राधिकृत संस्थाओं द्वारा दिए गए उत्पादों के नाम/ब्रांड- सूचना का प्रचार-प्रसार
6 डीपीएसएस.सीओ. एडी सं. 1344/02.27.005/2014-15 16.01.2015 निवल संपत्ति की गणना

Server 214
शीर्ष