20 फरवरी 2026
आरबीआई बुलेटिन – फरवरी 2026
आज रिज़र्व बैंक ने अपने मासिक बुलेटिन का फरवरी 2026 अंक जारी किया। इस बुलेटिन में द्विमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य (6 फरवरी 2026), एक भाषण, तीन आलेख और वर्तमान सांख्यिकी शामिल हैं।
ये तीन आलेख हैं: I. अर्थव्यवस्था की स्थिति; II. केंद्रीय बजट 2026-27: एक मूल्यांकन और III. भारत में खुदरा मुद्रास्फीति की अस्थिरता: स्रोत, निर्धारक तत्व और प्रभाव।
I. अर्थव्यवस्था की स्थिति
भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बढ़ने के बावजूद वैश्विक आर्थिक गतिविधि स्थिर बनी रही। समग्र-बिक्री-संवृद्धि में मजबूती दर्शाने वाली सूचीबद्ध निजी कंपनियों के तिमाही परिणामों के साथ घरेलू अर्थव्यवस्था आघात-सह बनी रही। औद्योगिक गतिविधि मजबूत बनी रही और सेवा क्षेत्र की संवृद्धि भी स्थिर बनी रही। केंद्रीय बजट 2026-27 ने, दीर्घावधि संवृद्धि के लक्ष्य को दरकिनार किए बिना, पूंजीगत व्यय के लिए आवंटन को बढ़ाकर राजकोषीय समेकन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की। संशोधित सीपीआई श्रृंखला के तहत प्राप्त प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार हेडलाइन मुद्रास्फीति नियंत्रित बनी हुई है। भारत-ईयू मुक्त व्यापार करार और अंतरिम भारत-अमेरिकी व्यापार समझौते के कारण निवेशकों के सकारात्मक रुख से विदेशी संविभाग निवेश और भारतीय रुपया फिर से मजबूत हुए।
II. केंद्रीय बजट 2026-27: एक मूल्यांकन
आकाश राज, हर्षिता यादव, एट्टेम अभिगानु यादव, आयुषी खंडेलवाल, अनूप के सुरेश और श्रोमोना गांगुली द्वारा
यह आलेख केंद्रीय बजट 2026-27 का मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में, अवसंरचना निवेश, प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता और मानव पूंजी विकास को केंद्रीय बजट में प्राथमिकता दी गई है। यह आघातसहनीयता, नवाचार और दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि को सुदृढ़ करते हुए वित्तीय-अनुशासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करता है।
मुख्य बातें:
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वर्ष 2026-27 में सकल राजकोषीय घाटा वर्ष 2025-26 की जीडीपी के 4.4 प्रतिशत से घटकर जीडीपी का 4.3 प्रतिशत होने का अनुमान है (संशोधित अनुमान, विनियमित संस्थाएं), जो वित्तीय वर्ष 2030-31 तक 50±1 प्रतिशत जीडीपी की तुलना में ऋण अनुपात प्राप्त करने के सरकार के मध्यावधि लक्ष्य के अनुक्रम में है।
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पिछले वित्तीय वर्षों में दिए गए वित्तीय-प्रोत्साहन को जारी रखते हुए, केंद्रीय बजट 2026-27 में पूंजीगत व्यय के लिए ₹12.2 लाख करोड़ (जीडीपी का 3.1 प्रतिशत) आबंटित किए गए हैं। प्रभावी पूंजी व्यय 2025-26(आरई) की जीडीपी के 3.9 प्रतिशत से बढ़कर 2026-27 में जीडीपी के 4.4 प्रतिशत होने का अनुमान किया गया है। वर्ष 2025-26(आरई) में जीडीपी के 10.8 प्रतिशत की तुलना में जीडीपी के 10.5 प्रतिशत पर राजस्व व्यय का बजट रखा गया है।
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प्राप्तियों के संदर्भ में, सकल कर राजस्व में 2025-26 (आरई) की तुलना में, 2026-27 में 8.0 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान किया गया है जो मुख्य रूप से आयकर और केंद्रीय उत्पाद शुल्क में अनुमानित तेज़ संवृद्धि के कारण है।
III. भारत में खुदरा मुद्रास्फीति की अस्थिरता: स्रोत, निर्धारक तत्व और प्रभाव
रंजीत मोहन, साकिब हसन, सुवेन्दु सरकार और जॉयस जॉन द्वारा
यह आलेख, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक-संयुक्त (आधार 2012=100) के आधार पर, भारत में हेडलाइन मुद्रास्फीति अस्थिरता के स्रोतों की जांच, अस्थिरता के स्पिलओवर का विश्लेषण और नीतिगत हस्तक्षेपों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करता है।
मुख्य बातें:
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हेडलाइन मुद्रास्फीति अस्थिरता का प्राथमिक स्रोत सब्जी की कीमतें - विशेष रूप से टमाटर, प्याज और आलू (टीओपी) की कीमतें, साथ ही गैर-टीओपी सब्जियों से उत्पन्न अस्थिरता स्पिलओवर है।
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आपूर्ति संबंधी आघातों की निरंतरता के बीच भी, एफ़आईटी-पूर्व अवधि के सापेक्ष लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (एफआईटी) ढांचे के तहत अस्थिरता कम हो गई है।
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2021-22 के बाद से मुद्रास्फीति-अस्थिरता में हुई गिरावट से पता चलता है कि मूल्य-आघात व्यापक रूप से मुद्रास्फीति बास्केट में प्रसारित नहीं होते हैं, जो कि स्थिर मुद्रास्फीति प्रत्याशाओं का संकेत देता है।
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वर्ष 2021 से, सरकार के सामयिक तथा लक्षित आपूर्ति-पक्षीय हस्तक्षेपों ने हेडलाइन मुद्रास्फीति और उसकी अस्थिरता पर पण्य-विशिष्ट मूल्य वृद्धि के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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भारत जैसी उभरती हुई बाजार अर्थव्यवस्था में मूल्य स्थिरता को बनाए रखने के लिए, मुद्रास्फीति प्रत्याशाओं को स्थिर रखने वाली मौद्रिक नीतिगत कार्रवाइयों के साथ-साथ कदाचित आपूर्ति संबंधी आघातों के दुष्प्रभावों को कम करने वाले वित्तीय हस्तक्षेपों का एक सुसंगत नीति मिश्रण आवश्यक है।
बुलेटिन के आलेखों में व्यक्त किए गए विचार लेखकों के निजी विचार हैं और ये भारतीय रिज़र्व बैंक के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/2146 |