4 मई 2026
आरबीआई ने ऋण माफी का वादा करने वाले अनधिकृत और भ्रामक अभियानों के प्रति
सावधानी को दोहराया
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) दिनांक 11 दिसंबर 2023 की प्रेस प्रकाशनी की ओर जन-सामान्य का ध्यान आकर्षित करता है, जिसके माध्यम से ऋण माफी का वादा करने वाले झूठे और भ्रामक अभियानों के विषय में जन-सामान्य को सावधान किया गया था। कतिपय व्यक्तियों और संस्थाओं द्वारा विभिन्न मीडिया चैनलों तथा प्रत्यक्ष पहुंच के माध्यम से चलाए जा रहे इस तरह के निरंतर अभियानों को आरबीआई एक गंभीर समस्या के रूप में देखता है। इस तरह के अभियान न केवल आम जनता को गुमराह करते हैं, बल्कि देश की ऋण प्रणाली के व्यवस्थित कामकाज में भी हस्तक्षेप करते हैं।
2. इन अभियानों में, अन्य बातों के साथ-साथ, (i) बैंकों/गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के बकाया देय की माफी के झूठे वादे; (ii) 'ऋण माफी प्रमाण पत्र' या इसी तरह के दस्तावेजों को जारी करना; और (iii) अनभिज्ञ जनता से सेवा या कानूनी शुल्क सहित अलग-अलग तरीकों से शुल्क का संग्रह शामिल हैं। यह दोहराया जाता है कि ऐसी सेवाएं प्रदान करने वाले व्यक्तियों/संस्थाओं द्वारा किए गए सभी दावे झूठे, भ्रामक हैं तथा लागू कानूनों के अंतर्गत इन पर उचित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस बात पर भी जोर दिया जाता है कि ऐसी गतिविधियाँ वित्तीय संस्थानों की स्थिरता को कमजोर करती हैं, जमाकर्ताओं के हितों को प्रभावित करती हैं और ऐसे व्यक्तियों/संस्थाओं से संबंध रखने/नियोजन के परिणामस्वरूप प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान हो सकता है।
3. अतः जन-सामान्य से अनुरोध है कि वे ऐसे व्यक्तियों/संस्थाओं के साथ जुड़ने या उनसे सेवाएँ लेने से बचें और इसके बजाय अपने ऋण से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए सीधे अपने ऋण देने वाले संस्थानों से संपर्क करें। इसके अलावा, यह सूचित किया जाता है कि ऐसे किसी भी भ्रामक अभियान की सूचना तुरंत उचित विधि प्रवर्तन एजेंसियों को दी जाए।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/199 |