आरबीआई/2018-19/26
एफएमआरडी.डीआईआरडी.05/14.03.007/2018-19
जुलाई 25, 2018
केन्द्र सरकार की प्रतिभूतियों के बाजार में सभी सहभागी
महोदया/महोदय,
सरकारी प्रतिभूतियों में द्वितीयक बाजार के संव्यवहार – शॉर्ट विक्रय
भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा 6 जून 2018 को विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर जारी वक्तव्य में सरकारी प्रतिभूतियों में शॉर्ट विक्रय हेतु पात्र शॉर्ट विक्रय सहभागी आधार को उदार बनाने और संस्था-अनुसार तथा प्रतिभूति वर्गानुसार (नकदी/अन्य प्रतिभूतियों) सीमाओं को बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया था।
2. तद्नुसार, ‘शॉर्ट विक्रय’ संव्यवहार पर विद्यमान निदेशों/परिपत्रों की सम्यक समीक्षा की गई और संशोधित निदेश, यथा संलग्न, जारी किए गए। ये निदेश संलग्नक-I में दी गई सूची के अनुसार शॉर्ट विक्रय पर विद्यमान सभी विनियमों का अधिक्रमण करेंगे। परिणामस्वरूप संलग्नक-I में दिए गए सभी परिपत्र वापस लिए जाते हैं।
3. ये निदेश भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अध्याय-III डी की धारा 45 (डब्ल्यू) के तहत जारी किए जाते हैं।
4. ये निदेश 26, जुलाई 2018 से प्रभावी होंगे।
भवदीय,
(टी. रबीशंकर)
मुख्य महाप्रबंधक
भारतीय रिज़र्व बैंक
वित्तीय बाजार विनियमन विभाग
पहली मंजिल, केन्द्रीय कार्यालय, फोर्ट
मुम्बई – 400 001
एफएमआरडी.डीआईआरडी.06/सीजीएम(टीआरएस)-2018 दिनांक जुलाई 25, 2018
शॉर्ट विक्रय (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2018
भारतीय रिज़र्व बैंक (रिज़र्व बैंक) जनहित में आवश्यक समझते हुए और देश में सरकारी प्रतिभूति बाजार में चलनिधि को बढ़ावा देने और सहभागियों को ब्याज दर के बारे में द्विस्तरीय दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति का उपाय प्रदान करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनयम, 1934 (आरबीआई अधिनियम) की धारा 45 (डब्ल्यू) के माध्यम से इस संबंध में प्रदत्त सभी शक्तियों का प्रयोग करते हुए निम्नलिखित निदेश जारी करता है:
1. इन निदेशों का लघु शीर्षक, प्रवर्तन और अनुमेयता -
(ए) इन निदेशों को शॉर्ट विक्रय (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2018 कहा जाएगा और ये इस विषय पर जारी संलग्नक-I के तहत सूचीबद्ध सभी निदेशों/गाइडलाइन्स का अधिक्रमण करेंगे। ये निदेश 26 जुलाई 2018 से प्रभावी होंगे।
(बी) ये निदेश केन्द्र सरकार दिनांकित प्रतिभूतियों में ‘शॉर्ट विक्रय’ संव्यवहारों के लिए अनुमेय होंगे।
2. परिभाषाएँ
इन निदेशों में, जब तक कि संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित नहीं हो -
(ए) “अनुसूचित वाणिज्य बैंक” का मतलब है भारतीज रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की द्वितीय अनुसूची में शामिल बैंक।
(बी) “सरकारी प्रतिभूतियाँ” का वही मतलब होगा जो सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 2006 की धारा 2 (एफ) में निर्धारित किया गया है।
(सी) "शॉर्ट विक्रय" का मतलब है ऐसी प्रतिभूति का विक्रय जो विक्रेता के स्वामित्व में नहीं है। बैंकों द्वारा अपने निदेश पोर्टफोलियों में धारित किसी प्रतिभूति के विक्रय को शॉर्ट विक्रय माना जा सकता है और इन निदेशों में निर्धारित प्रक्रिया का अनुसरण किया जाए। इन संव्यवहारों को ‘नोशनल’ शॉर्ट विक्रय के तौर पर बताया जाएगा। इन दिशानिदेशों के प्रयोजन से शॉर्ट विक्रय में 'नोशनल' शॉर्ट विक्रय को शामिल किया जाएगा।
(डी) “चलनिधि प्रतिभूति” का मतलब वही रहेगा जो फिक्सड इनकम मनी मार्केट एन्ड डेरिवेटिव एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफआईएमएमडीए)/फिनान्शियल बेन्चमार्क इंडिया लिमिटेड (एफबीआईएल) में शॉर्ट विक्रय संव्यवहारों के प्रयोजन से ‘चलनिधि प्रतिभूति’ के रूप में अभिनिर्धारित और प्रकाशित किया है।
(ई) “अन्य प्रतिभूति” का मतलब होगा चलनिधि प्रतिभूति के अलावा शॉर्ट विक्रय संव्यवहार के लिए पात्र अन्य प्रतिभूति।
3. पात्र संस्थाएं
निम्नलिखित संस्थाएँ शॉर्ट विक्रय संव्यवहार के लिए पात्र हैं :
(ए) अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक,
(बी) प्राथमिक डीलर,
(सी) शहरी सहकारी बैंक, जैसा कि 4 सितम्बर 2013 के परिपत्र यूबीडी.बीपीडी (पीसीबी) सं. 9/09.29.000/2013-14 में अनुमति दी गई है।
(डी) कोई अन्य विनियमित संस्था जिसे संबंधित विनियामक का अनुमोदन प्राप्त है। इस पैराग्राफ के प्रयोजन से विनियामक का मतलब होगा – भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), बीमा नियंत्रक और विकास प्राधिकरण (इरडा), पेन्शन फंड विनियामक और विकास प्राधिकरण, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) और राष्ट्रीय आवास बैंक।
4. शॉर्ट विक्रय पर प्रतिभूति-स्तरीय सीमाएँ
शॉर्ट विक्रय की जा सकने वाली प्रतिभूतियों (अंकित मूल्य) की अधिकतम रकम निम्नानुसार रहेगी:
वर्ग |
प्रतिभूति स्तरीय सीमा |
चलनिधि प्रतिभूतियाँ |
प्रत्येक प्रतिभूति के बकाया कुल स्टॉक का 2% अथवा, रु. 500 करोड़, इनमें से जो भी अधिक हो। |
अन्य प्रतिभूतियाँ |
प्रत्येक प्रतिभूति के बकाया कुल स्टॉक का 1% अथवा रु. 250 करोड़, इनमें से जो भी अधिक हो। |
5. परिचालनगत अपेक्षाएँ
शॉर्ट विक्रय करने वाली संस्थाएँ निम्नलिखित विनिदेशों का अनुसरण करना होगा:
(ए) शॉर्ट विक्रय संव्यवहार और इससे संबद्ध कवर संव्यवहार करने वाली संस्थाएँ इन सभी संव्यवहारों को एनडीएस – ओएम पर समुचित रूप से टैग करेंगी। एनडीएस-ओएम में ‘शॉर्ट सेल’ टैग का प्रयोग उन प्रतिभूतियों के विक्रय संव्यवहार के लिए प्रयोग में नहीं लाया जाएगा जो संव्यवहार के समय संबंधित संस्था के तत्काल अधिकार में नहीं है (उदाहरण के लिए आंतर दिवसीय चलनिधि लेने के लिए प्रयुक्त प्रतिभूतियाँ, समाशोधन गृहों में मार्जिन के तौर पर रखी गई प्रतिभूतियाँ, आदि)।
(बी) संव्यवहार की तारीख (तारीख शामिल करते हुए) से तीन माह की अवधि के भीतर शॉर्ट विक्रय को कवर किया जाएगा।
(सी) बैंकों द्वारा नोशनल शॉर्ट विक्रयों सहित सभी शॉर्ट विक्रयों को उसी प्रतिभूति की समकक्ष रकम (अंकित मूल्य) की आउट राइट खरीद से कवर किया जाएगा, यह खरीद द्वितीयक बाजार अथवा प्राथमिक नीलामी से की जाए, इसमें यदा-निर्गत बाजार भी शामिल होंगे।
(डी) जिन प्रतिभूतियों का शॉर्ट विक्रय किया जाता है उनकी सुपुर्दगी निपटान की तारीख को अपरिहार्य रूप से करनी होगी। रेपो मार्केट से प्रतिभूतियाँ उधार लेकर अथवा आउटराइट खरीद के माध्यम से संस्थाएँ अपने सुपुर्दगी दायित्व को पूरा करेंगी। लेकिन भारतीय रिज़र्व बैंक की चल निधि समायोजन सुविधा अथवा किसी अन्य चलनिधि सुविधा के तहत अधिक्रीत प्रतिभूतियों का प्रयोग शॉर्ट विक्रय की सुपुर्दगी हेतु नहीं किया जाएगा।
(ई) ‘नोशनल’ शॉर्ट विक्रय करने वाले बैंक सुपुर्दगी दायित्वों को पूरा करने के लिए आमतौर पर रेपो मार्केट से प्रतिभूतियाँ उधार लेते हैं, लेकिन बाजार के दबाव (अर्थात् शॉर्ट विवशता) की अपवादात्मक स्थितियों में यह अपने निवेश पोर्टफोलियो से प्रतिभूतियों की सुपुर्दगी की जा सकती है। यदि प्रतिभूतियों की सुपुर्दगी बैंक के अपने पोर्टफोलियो से की जाती है तो इसका समुचित रूप से हिसाब अवश्य रखा जाए और ऐसे संव्यवहारों को आंतरिक रूप से उधार लिया गया दर्शाया जाए। यह सुनिश्चित करना होगा कि इस प्रकार से उधार ली गई प्रतिभूतियों को उसी पोर्टफोलियो में वापस लिया जाए और बही-मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया जाए।
(एफ) क्लीयरिंग कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लि. के प्रतिभूति निपटान खंड के सदस्य (इसके बाद ‘सदस्य’ के रूप में उल्लिखित) अपनी घटक संस्थाओं, अर्थात गिल्ट खाते या डीमैट खाते का रखरखाव करने वाली संस्थाओं, के कारोबारों के निपटान और रिपोर्टिंग के जिम्मेदार होंगे। तदनुसार पात्र घटक संस्थाएँ उसी सीमा तक शॉर्ट विक्रय संव्यवहार करेंगी जितनी उन सदस्यों ने अनुमति दी है, जिनके माध्यम से वे अपने प्रतिभूति संव्यवहारों का निपटान करती है, यह सीमा भी इन निदेशों के पैरा-4 में निर्धारित की गई है।
(जी) यदि शॉर्ट विक्रय के दौरान फिमडा द्वारा प्रकाशित चलनिधि प्रतिभूतियों की सूची से किसी प्रतिभूति को हटा दिया जाता है तो संस्था से यह अपेक्षित नहीं है कि उस प्रतिभूति में अपनी शॉर्ट पोजिशन को कम करे। कवर करने तक वह अपनी शॉर्ट पोजिशन को बनाए रख सकती है।
(एच) शॉर्ट विक्रयों को सेक्यूरिटीज शॉर्ट सोल्ड (एसएसएस) खाते में दर्शाया जाएगा, यह खाता इसी प्रयोजन के लिए खास तौर पर बनाया जाता है (उदाहरण, अनुलग्नक-II में)।
(आय) शॉर्ट विक्रयों और इन शॉर्ट विक्रयों को कवर करने के लिए क्रय-संव्यवहारों को ट्रेडिंग हेतु धारित (एचएफटी) वर्ग के हिसाब में लिया जाएगा। शॉर्ट विक्रय करने वाली संस्थाएँ शॉर्ट विक्रयों सहित अपने (सम्पूर्ण एचएफटी पोर्टफोलियो को दैनिक आधार पर मार्क टू मार्केट करेंगी) ध्यान दिया जाए कि ‘ट्रेडिंग हेतु धारित’ का मतलब वही होगी जो समय-समय पर यथा नवीकृत 1 जुलाई, 2015 के मास्टर परिपत्र – बैंकों द्वारा निवेश पोर्टफोलियो के वर्गीकरण, मूल्यांकन और परिचालन हेतु विवेकपूर्ण मानदंड (डीबीआर सं. बीपी.बीसी. 6/21.04.141/2015-16) में निर्धारित हैं।
6. बकाया स्टॉक और चलनिधि प्रतिभूतियों के बारे में जानकारी
भारत सरकार की प्रत्येक दिनांकित प्रतिभूति के बकाया स्टॉक से संबंधित जानकारी भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध है
(URL - https://www.rbi.org.in/scripts/financialmarketswatch.aspx)
चलनिधि प्रतिभूतियों की सूची समय-समय पर फिम्डा/FBIL द्वारा प्रसारित की जाएगी।
7. रिपोर्टिंग
ओटीसी मार्केट में निष्पादित शॉर्ट विक्रय स्थिति को सौदा करने के 15 मिनट के भीतर एनडीएस-ओएम प्लेटफार्म पर रिपोर्ट किया जाना चाहिए।
8. आंतरिक नियंत्रण
(ए) शॉर्ट विक्रय संव्यहार करने के पहले संस्थाओं द्वारा शॉर्ट विक्रय के सभी पहलुओं पर एक लिखित नीति का निर्धारण करें, इसमें बैंकों के मामले में नोशनल शॉर्ट विक्रय का अनुमोदन संबंधित निदेशक बोर्ड अथवा समकक्ष निकाय द्वारा किया जाना भी शामिल है। इस नीति में आंतरिक दिशानिदेश भी दिए जाएँ जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ शॉर्ट पोजिशन के बारे में जोखिम सीमाएँ, सभी पात्र प्रतिभूतियों की सकल सामान्य शॉर्ट विक्रय सीमा (अंकित मूल्य के अनुसार), स्टॉप लास सीमाएँ, आंतरिक नियंत्रण प्रणाली ताकि विनियामक और आंतरिक दिशानिदेशों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके, उल्लंघनों से निपटने की पद्धति, आदि का समावेश होना चाहिए। संस्थाओं को चाहिए कि उल्लंघनों को समयपूर्व पकड़ने की प्रणाली स्थापित करें।
(बी) शॉर्ट विक्रय के सभी संव्यवहारों की दैनिक आधार पर लेखा परीक्षा की जाए ताकि सभी विनियामक और आंतरिक अपेक्षाओं का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। यदि इस बारे में विनियामक दिशानिदेशों का कोई उल्लंघन ध्यान में आए तो उसकी रिपोर्ट तत्काल ही मुख्य महाप्रबंधक, वित्तीय बाजार विनियमन विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक, मुम्बई को की जाए।
(सी) शॉर्ट विक्रय करने वाली संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ये संव्यवहार उनकी उचित मार्केट परिपाटी के अनुरूप हैं और उनके क्रियाकलापों से बाजार में व्यवधान नहीं पड़ता है। संस्थाओं को मार्केट दुरुपयोग के संदेहास्पद मामलों की रिपोर्ट भारतीय रिज़र्व बैंक को करनी होगी, यह दुरुपयोग चाहे उनके अपने कर्मचारियों, ग्राहकों द्वारा हो अथवा बाजार के अन्य सहभागियों ने किया हो।
9. शार्ट विक्रय संव्यवहार में कोई भी चूक पर दंडात्मक उपायों को अपनाया जाएगा जैसा कि समय-समय पर यथा संबंधित भारतीय रिज़र्व बैंक परिपत्र आइडीएमडी.डीओडी.17/11.01.01(B)/2010-11 दिनांक 14 जुलाई, 2010 में निर्धारित किया गया है। विनियामक दिशनिदेशओं का उल्लंघन/चालबाजी करने पर भारतीय रिज़र्व बैंक अथवा भारतीज रिज़र्व बैंक का यह दृष्टिकोण हो कि सहभागी ने बाजार में जोड़ तोड़ की है, बाजार के दुरुपयोग में संलिप्त रहा है अथवा गलत, अपरिशुद्ध या अपूर्ण जानकारी प्रदान की है तो अतिरिक्त कार्रवाई भी कर सकता है जिनमें SGL खाता धारक को शॉर्ट विक्रय बाजार से अस्थायी अथवा स्थायी रूप से निषिद्ध करना भी शामिल है।
10. केन्द्र सरकार की दिनांकित प्रतिभूतियों में ‘शॉर्ट विक्रय’ संव्यवहार के बारे में निष्प्रभावी और वापस लिए गए पूर्ववर्ती परिपत्रों की सची अनुलग्नक- I में दी गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक के किसी अन्य परिपत्र /निदेश में वापस लिए गए परिपत्रों का कोई भी उल्लेख इन निदेशों के संगत वाक्यांशों के संदर्भ में ही पढ़ा जाएगा।
(टी. रबिशंकर)
मुख्य महाप्रबंधक
संलग्नक I
वापस लिए गए परिपत्रों की सूची
-
आईडीएमडी.सं.03/11.01.01 (B)/2005-06 दिनांक फरवरी 28, 2006
-
आईडीएमडी. सं/11.01.01(B)/2006-07 दिनांक जनवरी 31, 2007
-
आईडीएमडी.डीओडी.सं.3165/11.01.01(B)/2007-08 दिनांक जनवरी 1, 2008
-
आईडीएमडी.पीसीडी.14/14.03.07/2011-12 दिनांक दिसम्बर 28, 2011
-
आईडीएमडी.पीसीडी.21/14.03.07/2011-12 दिनांक जून 21, 2012
-
आईडीएमडी.पीसीडी.06/14.03.07/2014-15 दिनांक सितम्बर 30, 2014
-
एफएमआरडी.डीआईआरडी.02/14.03.007/2014-15 दिनांक दिसम्बर 24, 2014
-
एफएमआरडी.डीआईआरडी.5/14.03.007/2015-16 दिनांक अक्तूबर 29, 2015
-
एफएमआरडी.डीआईआरडी.04/14.03.007/2017-18 दिनांक नवम्बर 16, 2017
|