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बैंकिंग प्रणाली का विनियामक

बैंक राष्‍ट्रीय वित्‍तीय प्रणाली की नींव होते हैं। बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा एवं सुदृढता को सुनिश्चित करने और वित्‍तीय स्थिरता को बनाए रखने तथा इस प्रणाली के प्रति जनता में विश्‍वास जगाने में केंद्रीय बैंक महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

प्रेस प्रकाशनी


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आरबीआई ने पूंजी बाज़ार एक्सपोजर संबंधी संशोधन निदेशों के कार्यान्वयन को 1 जुलाई 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया

30 मार्च 2026

आरबीआई ने पूंजी बाज़ार एक्सपोजर संबंधी संशोधन निदेशों के कार्यान्वयन
को 1 जुलाई 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया

भारतीय रिज़र्व बैंक ने सार्वजनिक परामर्श के तहत प्राप्त प्रतिक्रिया पर उचित विचार करने के बाद, 13 फरवरी 2026 को 'पूंजी बाज़ार एक्सपोज़र' संबंधी संशोधन निदेशों को अंतिम रूप देकर जारी किए थे। इन संशोधन निदेशों का मुख्य उद्देश्य (i) बैंकों को भारतीय कॉर्पोरेट्स द्वारा अधिग्रहण के लिए वित्तपोषण हेतु एक सक्षम ढांचा प्रदान करना; (ii) शेयरों, REITs, InvITs आदि की यूनिटों के बदले व्यक्तियों को बैंकों द्वारा ऋण देने की सीमाओं को युक्तिसंगत बनाना; और (iii) पूंजी बाजार मध्यस्थों (सीएमआई) को ऋण देने के लिए अधिक सिद्धांत-आधारित ढांचा स्थापित करना था। ये संशोधन निदेश 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने थे।

इसके बाद, रिज़र्व बैंक को बैंकों, सीएमआई और विभिन्न उद्योग संघों से अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें प्रभावी तिथि को आगे बढ़ाने और स्पष्टीकरण के लिए कुछ परिचालन और व्याख्यात्मक मुद्दों का उल्लेख किया गया है। हितधारकों के साथ की गई चर्चाओं और समीक्षा के आधार पर, यह निर्णय लिया गया है कि उक्त संशोधन निदेशों की प्रभावी तिथि को तीन महीने बढ़ाकर 1 जुलाई 2026 तक कर दिया जाए।

इसके अलावा, संशोधन निदेशों में कुछ बदलाव किए गए हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य अधिग्रहण वित्त और पूंजी बाज़ार मध्यस्थों के प्रति एक्सपोजरों से संबंधित कुछ प्रावधानों को स्पष्ट करना है। मुख्य स्पष्टीकरण निम्नानुसार हैं:

क. अधिग्रहण वित्त संबंधी निदेशों पर स्पष्टीकरण

  • अधिग्रहण वित्त की परिभाषा में संशोधन किया गया है, ताकि इसमें विलय और समामेलन को भी शामिल किया जा सके।

  • अधिग्रहण वित्त केवल किसी गैर-वित्तीय लक्ष्य कंपनी पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए ही प्रदान किया जा सकता है।

  • यदि लक्ष्य कंपनी एक होल्डिंग कंपनी / मूल कंपनी है, जिसका अन्य सहायक कंपनियों पर नियंत्रण है, तो अधिग्रहण वित्तपोषण के लिए ‘संभावित सिनर्जी’ (potential synergy) के मानदंड सामूहिक रूप से पूरे होने चाहिए।

  • अधिग्रहण करने वाली कंपनी, किसी लक्ष्य कंपनी के अधिग्रहण के लिए, भारत या विदेश में निगमित अपनी किसी सहायक कंपनी को आगे ऋण देने के लिए अधिग्रहण वित्त ले सकती है।

  • अधिग्रहण वित्त का पुनर्वित्त केवल तभी हो सकता है जब अधिग्रहण वित्त सभी पहलुओं में संपन्न हो चुका हो और लक्ष्य कंपनी पर अधिग्रहण करने वाली कंपनी का नियंत्रण स्थापित हो गया हो। ऐसे पुनर्वित्त का उपयोग केवल अधिग्रहण वित्त ऋण को चुकाने के लिए किया जाना चाहिए।

  • अधिग्रहण करने वाली कंपनी की किसी सहायक कंपनी या एसपीवी को दिए गए अधिग्रहण वित्त के मामलों में, अधिग्रहण करने वाली कंपनी की ओर से एक कॉर्पोरेट गारंटी की आवश्यकता होगी।

ख. वित्तीय आस्तियों के बदले ऋण संबंधी अनुदेशों पर स्पष्टीकरण

  • पात्र प्रतिभूतियों के बदले व्यक्तियों को दिए जाने वाले ऋणों पर 1 करोड़ प्रति व्यक्ति की अधिकतम सीमा, साथ ही आईपीओ, एफ़पीओ, या ईएसओपी के तहत शेयर खरीदने के लिए 25 लाख प्रति व्यक्ति की अधिकतम सीमा, बैंकिंग प्रणाली के स्तर पर लागू होगी।

ग. सीएमआई को ऋण सुविधाओं से संबंधित निदेशों पर स्पष्टीकरण

  • सीएमआई को प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए 100% नकद या नकद समकक्षों की संपार्श्विक के बदले बैंक वित्तपोषण प्रदान कर सकते हैं।

  • उन प्रतिभूतियों के बदले बाज़ार निर्माता (मार्केट मेकर्स) को वित्त उपलब्ध कराने पर लगी रोक हटा दी गई है, जिनमें बाज़ार निर्माण का काम किया जाता है।

  • गैर-डेट एमएफ़ को दी जाने वाली इंट्राडे सुविधा, जो उसी दिन जी-सेक, खज़ाना बिलों, एसडीएल की परिपक्वता से प्राप्त होने वाली राशि, या ऐसे म्यूचुअल फंड के पास मौजूद जी-सेक और एसडीएल से मिलने वाले ब्याज, या सीसीआईएल से टीआरईपीएस की परिपक्वता से प्राप्त होने वाली राशि के रूप में मिलने वाली गारंटीकृत प्राप्ति से सुरक्षित हो, को सीएमई नहीं माना जाएगा।

तदनुसार, संशोधित संशोधन निदेश जारी किए गए हैं:

क. भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – ऋण सुविधाएँ) संशोधन निदेश, 2026 (संशोधित)

ख. भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – संकेंद्रण जोखिम प्रबंधन) संशोधन निदेश, 2026 (संशोधित)

ग. भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – पूंजी पर्याप्तता पर विवेकपूर्ण मानदंड) द्वितीय संशोधन निदेश, 2026 (संशोधित)

घ. भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – वित्तीय विवरण: प्रस्तुतीकरण और प्रकटीकरण) तीसरा संशोधन निदेश, 2026 – (संशोधित)

ङ. भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – वित्तीय सेवाएं प्रदान करना) – संशोधन निदेश, 2026 (संशोधित)

च. भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक – ऋण सुविधाएँ) संशोधन निदेश, 2026 (संशोधित)

छ. भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक – संकेंद्रण जोखिम प्रबंधन) संशोधन निदेश, 2026 (संशोधित)

ज. भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक – पूंजी पर्याप्तता पर विवेकपूर्ण मानदंड) द्वितीय संशोधन निदेश, 2026 (संशोधित)

झ. भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक – वित्तीय विवरण: प्रस्तुतीकरण और प्रकटीकरण) द्वितीय संशोधन निदेश, 2026 (संशोधित)

(ब्रिज राज)  
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/2360

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