मास्टर निदेशों

मास्टर निदेश- धन अंतरण सेवा योजना (MTSS)

भा.रि.बैंक 2016-17/52
एफ़ईडी मास्टर निदेश सं. 1/2016-17

22 फरवरी 2017

सभी प्राधिकृत व्यक्ति जो धन अंतरण सेवा योजना के अंतर्गत भारतीय एजेंट हैं।

महोदया/महोदय

मास्टर निदेश- धन अंतरण सेवा योजना (MTSS)

धन अंतरण सेवा योजना (MTSS) भारत में निवास करने वाले हिताधिकारियों को विदेश से व्यक्तिगत विप्रेषणों के अंतरण का एक तेज एवं आसान तरीका है।

2. विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 की धारा 10(1) के अंतर्गत रिज़र्व बैंक के पास किसी भी व्यक्ति को धन अंतरण सेवा योजना के अंतर्गत भारतीय एजेंट के रूप में कार्य करने के लिए आवश्यक अनुमति (प्राधिकार) प्रदान करने की शक्तियाँ हैं।

3. धन अंतरण सेवा योजना से संबंधित अनुदेश संलग्न मास्टर निदेश के माध्यम से समेकित रूप में जारी किए जा रहे हैं। रिपोर्टिंग अपेक्षाओं से संबंधित अनुदेश रिपोर्टिंग पर जारी मास्टर निदेश में उपलब्ध हैं। यह नोट किया जाए की जहां आवश्यक है वहाँ नियमों, विनियमों, अधिसूचनाओं, निदेशों अथवा आदेशों अथवा प्राधिकृत व्यक्तियों द्वारा अपने ग्राहकों/ घटकों के साथ संबंधित लेनदेन के संचालन की पद्धति में किसी भी परिवर्तन के संबंध में रिज़र्व बैंक प्राधिकृत व्यक्ति, जो धन अंतरण सेवा योजना के अंतर्गत भारतीय एजेंट हैं, को ए. पी. (डीआईआर सिरीज़) परिपत्रों के माध्यम से निदेश जारी करेगा। इसके साथ जारी किए गए मास्टर निदेश में साथ-साथ पर्याप्त संशोधन भी किए जाएंगे।

भवदीय

(शेखर भटनागर)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक


धन अंतरण सेवा योजना पर मास्टर निदेश

1. प्रस्तावना

1.1 धन अंतरण सेवा योजना (MTSS) भारत में निवास करने वाले हिताधिकारियों को विदेश से व्यक्तिगत प्रेषणों के अंतरण का एक तेज एवं आसान तरीका है। भारत में केवल परिवार के भरण-पोषण के लिए भेजे गए विप्रेषण तथा भारत का दौरा करने वाले विदेशी पर्यटकों के पक्ष में भेजे गए विप्रेषणों जैसे आवक व्यक्तिगत प्रेषण अनुमत हैं। एम.टी.एस.एस. के अंतर्गत कोई भी जावक विप्रेषण अनुमत नहीं है। इस प्रणाली के अंतर्गत विदेशों में स्थित प्रख्यात धन-अंतरण कंपनियाँ जिन्हें समुद्रपारीय प्रिंसिपल्स कहा जाता है, तथा भारत में स्थित एजेंट जिन्हें भारतीय एजेंट कहा जाता है के बीच एक गठबंधन की परिकल्पना की गई है, जो भारत में स्थित हिताधिकारियों को चालू विनिमय दरों पर निधियों का वितरण करेंगे। भारतीय एजेंट अपने नेटवर्क को विस्तारित करने के लिए अपनी ओर से उप-एजेंट भी नियुक्त कर सकते हैं। भारतीय एजेंट को समुद्रपारीय प्रिंसिपल को कोई राशि विप्रेषित करने की अनुमति नहीं है। एम.टी.एस.एस. के अंतर्गत विप्रेषक तथा हिताधिकारी केवल व्यक्ति ही होंगे। इस दस्तावेज़ में इस योजना से जुडी एंटिटियों से संबंधित प्रवेश मानदंड, अधिप्रमाणन, नवीकरण तथा विभिन्न परिचालन अनुदेशों के ब्योरे शामिल हैं।

1.2 सांविधिक आधार

विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम(फेमा), 1999 की धारा 10(1) क्के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों के अनुसार भारतीय रिज़र्व बैंक किसी भी व्यक्ति को धन अंतरण सेवा योजना के अंतर्गत भारतीय एजेंट के रूप में कार्य करने के लिए आवश्यक अनुमति (अथोराइजेशन) प्रदान कर सकता है। कोई भी व्यक्ति किसी भी क्षमता में भारत में सीमा पार धन अंतरण का कारोबार तब तक नहीं कर सकता जब तक कि उसे ऐसा करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा विशिष्ट अनुमति न दी गई हो।

2. परिभाषाएँ

2.1 “प्राधिकृत व्यापारी”(एडी) का अर्थ है कोई व्यक्ति जिसे फेमा की धारा 10 की उप-धारा(10 के अनतर्गत प्राधिकृत व्यापारी के रूप में प्राधिकृत किया गया है।

2.2 “प्राधिकृत व्यापारी (एडी) श्रेणी II” का अर्थ है (i) अपग्रेड किए गए संपूर्ण मुद्रा परिवर्तक (एफ़एफ़एमसी); (ii) चुनिन्दा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी); (iii) चुनिन्दा शहरी सहकारी बैंक (यूसीबी); तथा (iv) अन्य कंपनियाँ।

2.3 “संपूर्ण मुद्रा परिवर्तक (एफ़एफ़एमसी)” एक प्राधिकृत मुद्रा परिवर्तक है जिसे भारत का दौरा करने वाले अनिवासियों तथा निवासियों से विदेशी मुद्रा खरीदने तथा केवल निजी तथा कारोबारी यात्रा के लिए विदेशी मुद्रा का विक्रय करने के लिए प्राधिकृत किया गया है।

2.4 “समुद्रपारीय प्रिंसिपल” विदेशों में स्थित विख्यात धन अंतरण कंपनियाँ हैं जो कि भारत में स्थित एजेंट जिन्हें भारतीय एजेंट कहा जाता है और जो कि चालू विनिमय दरों पर भारत में हिताधिकारियों को निधियाँ वितरित करेंगे, के साथ गठबंधन करती हैं।

3. भारतीय एजेंट के लिए दिशानिर्देश

3.1 प्रविष्टि मानदंड

(i) आवेदक को एजेंट बनने के लिए एक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी–I बैंक अथवा प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी–II अथवा संपूर्ण मुद्रा परिवर्तक (FFMC) अथवा एक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक अथवा डाक विभाग होना चाहिए।

(ii) आवेदक के पास न्यूनतम 50 लाख रुपये की निवल स्वाधिकृत निधि होनी चाहिए।

टिप्पणी :- (i) स्वाधिकृत निधि:- (प्रदत्त इक्विटि पूंजी + निर्बंध आरक्षित निधियाँ + लाभ-हानि खाता में जमा शेष) में से (हानी की संचित शेषराशि, आस्थगित राजस्व व्यय तथा अन्य अमूर्त आस्तियां) घटाकर।

(ii) निवल स्वाधिकृत निधि :- स्वाधिकृत निधियों में से कंपनी की अनुषंगी कंपनियों, उसी समूह की कंपनियों, सभी(अन्य) गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के शेयर्स में निवेश की राशि तथा डिबैंचर्स, बॉण्ड्स, कंपनी की अनुषंगी कंपनियों तथा उसी समूह की कंपनियों को दिए गए उसकी स्वाधिकृत निधियों के 10 प्रतिशत से अधिक बकाया ऋण तथा अग्रिम का बही मूल्य।

3.2 रिज़र्व बैंक को आवेदन करने की क्रियाविधि

भारतीय एजेंट के रूप में कार्य करने के लिए आवश्यक अनुमति प्राप्त करने के लिए आवेदक का रजिस्टर्ड कार्यालय भारतीय रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के जिस संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आता है उसको आवेदन किया जाए तथा आवेदन के साथ उसके प्रस्तावित समुद्रपारीय प्रिन्सिपल से संबंधित निम्नलिखित दस्तावेज़ होने चाहिए:

(ए) इस आशय का घोषणा पत्र कि आवेदक अथवा उसके निदेशकों के विरुद्ध प्रवर्तन निदेशालय(DoE)/ राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) अथवा किसी अन्य विधि प्रवर्तन प्राधिकारणों ने कोई कार्यवाही प्रारम्भ नहीं की / के पास लंबित नहीं है तथा यह कि आवेदक अथवा उसके निदेशकों के विरुद्ध किसी प्रकार के आपराधिक मामले प्रारंभित / लंबित नहीं हैं।

(बी) इस आशय का घोषणा पत्र कि रिज़र्व बैंक की अनुमति (ऑथोराइजेशन) प्राप्त करने के बाद तथा धन अंतरण परिचालन प्रारंभ करने से पूर्व भारतीय एजेंट तथा उनके उप-एजेंट पर यथालागू भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंकिंग विनियमन विभाग, केंद्रीय कार्यालय के अद्यतन मास्टर निदेश- अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी) निदेश, 2016 में संदर्भित किए गए दिशा-निर्देशों तथा इस संबंध में अब तक तथा भविष्य में समय-समय पर उचित परिवर्तनों सहित जारी अन्य अनुदेशों के अनुसार अपने ग्राहक को जानिए(केवाईसी) मानदंड/ धन शोधन मानक/ आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध संबंधी उचित नीतिगत ढांचा स्थापित है।

(सी) जिसके साथ मिलकर एम.टी.एस.एस. संचालित की जाएगी उस समुद्रपारीय प्रिन्सिपल का नाम तथा पता।

(डी) समुद्रपारीय प्रिन्सिपल द्वारा चलाई जाने वाली योजना के परिचालन के संपूर्ण ब्योरे।

(ई) भारत में स्थित उन शाखाओं की सूची तथा पते जहां से आवेदक द्वारा एम.टी.एस.एस. संचालित की जाएगी।

(एफ़) योजना के अंतर्गत कारोबार की अनुमानित प्रति माह / वर्ष मात्रा।

(जी) पिछले दो वित्तीय वर्षों के लिए आवेदक का लेखापरीक्षित तुलन पत्र तथा लाभ-हानि खाता, यदि उपलब्ध हो तो, अथवा आवेदन की तारीख की स्थिति के अनुसार निवल स्वाधिकृत निधियों की स्थिति के संबंध में सांविधिक लेखापरीक्षकों के प्रमाणपत्र के साथ अद्यतन लेखापरीक्षित खातों की प्रतिलिपि।

(एच) आवेदक की संस्था के बहिर्नियम तथा अंतर्नियम जिनमें या तो धन अंतरण कारोबार शुरू करने संबंधी प्रावधान किया गया है अथवा उनमें उचित संशोधन करने हेतु कंपनी लॉं बोर्ड को भेजा गया है।

(आई) आवेदक के कम-से-कम दो बैंकरों से सीलबंद लिफाफे में गोपनीय रिपोर्ट।

(जे) आवेदक की वित्तीय क्षेत्र में कार्यरत सहयोगी / संबद्ध संस्थाओं के ब्योरे।

(के) आवेदक द्वारा धन अंतरण कारोबार प्रारंभ करने के संबंध में बोर्ड के संकल्प की प्रमाणित प्रति।

(एल) समुद्रपारीय प्रिन्सिपल से इस आशय का पत्र कि वे आवेदक के साथ गठ बंधन करने तथा आवश्यक संपार्श्विक प्रदान करने के लिए भी सहमत हैं।

3.3 संपार्श्विक अपेक्षाएँ

समुद्रपारीय प्रिन्सिपल द्वारा भारत में किसी नामित बैंक में भारतीय एजेंट के पक्ष में 3 दिन के औसत आहरणों के समकक्ष अथवा 50,000 अमरीकी डॉलर, इनमें से जो भी उच्चतर हो, का सांपार्श्विक रखा जाए। 50,000 अमरीकी डॉलर की न्यूनतम राशि विदेशी मुद्रा जमाराशि के रूप में रखी जाए और शेष राशि को बैंक गारंटी के रूप में रखा जाए। भारतीय एजेंट द्वारा पिछले तीन महीने में प्राप्त प्रेषणों के आधार पर तिमाही अंतरालों पर संपार्श्विक की पर्याप्तता की समीक्षा की जानी चाहिए।

3.4 अन्य शर्तें

(ए) इस व्यवस्था के अंतर्गत केवल परिवार के भरण पोषण तथा भारत का दौरा करनेवाले विदेशी पर्यटकों के पक्ष में किए गए प्रेषणों जैसे सीमा-पारीय व्यक्तिगत प्रेषण की अनुमति दी जाएगी। इस व्यवस्था के अंतर्गत धर्मार्थ संस्थाओं/ न्यासों को दिए गए दान/ अंशदान, व्यापार संबंधी प्रेषण, संपत्ति खरीदने, निवेश, अथवा एनआरई खातों में जमा करने के लिए प्रेषण नहीं किए जाएंगे।

(बी) इस योजना के अंतर्गत व्यक्तिगत प्रेषणों पर 2500 अमरीकी डॉलर कि उच्चतम सीमा निर्धारित की गई है। भारत में स्थित हिताधिकारी को 50,000 हजार रुपे तक की राशि का नकद भुगतान किया जा सकता है। इस सीमा से अधिक कोई भी राशि का भुगतान अकाउंट पेयी चेक/ मांग ड्राफ्ट/ पेमेंट ऑर्डर, आदि के माध्यम से किया जाएगा अथवा सीधे हिताधिकारी के बैंक खाते में ही जमा की जाएगी। तथापि अपवादात्मक परिस्थितियों में जहां हिताधिकारी एक विदेशी पर्यटक है, उच्चतर राशियों का नकद विततारण किया जा सकता है। इस प्रकार के लेनदेन के संपूर्ण ब्योरे रिकार्ड में रखे जाए ताकि लेखा परीक्षक/ निरीक्षक उनकी संवीक्षा कर सकें।

(सी) कोई भी एकल व्यक्तिगत हिताधिकारी इस योजना के अंतर्गत एक कलेंडर वर्ष के दौरान केवल 30 प्रेषण प्राप्त कर सकता है।

3.5 भारतीय रिजर्व बैंक के निर्णयों के लिए मानदंड

(i) भारतीय एजेंट के पास एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धात्मक परिवेश में लाभदायी रूप में कार्य करने की ताकत तथा कारगरता होनी चाहिए। क्योंकि भारतीय एजेंट पहले से ही अधिक संख्या में कार्यरत हैं, इसलिए उपर्युक्त अपेक्षाओं को पूर्ण करने वाले, जिनके पास आवश्यक पहुँच है, तथा जो ग्राहक सेवा तथा करगरता के सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय तथा देशी मानकों को पूरा करते है को अत्यधिक चयनात्मक आधार पर अनुमति (ऑथोराइजेशन) जारी की जाएगी।

(ii) भारतीय एजेंट को अनुमति (ऑथोराइजेशन) जारी करने की तारीख से छ: महीने की अवधि के भीतर योजना के अंतर्गत अपने धन अंतरण परिचालन प्रारम्भ करने चाहिए तथा रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के संबंधित क्षेत्रीय कार्यकाय को इसकी सूचना देनी चाहिए।

4. समुद्रपारीय प्रिन्सिपल के लिए दिशानिर्देश

समुद्रपारीय प्रिन्सिपल के रूप में जाने जाने वाले समुद्रपारीय धन अंतरण ऑपरेटर्स के साथ किसी व्यवस्था में जुडने वाले भारतीय एजेंट नोट करें कि केवल कारोबार की पर्याप्त मात्रा, ट्रैक रिकार्ड तथा पहुँच वाले समुद्रपारीय प्रिन्सिपल को योजना के अंतर्गत विचार में लिया जाएगा। साथ ही चूंकि देश में प्रेषणों की प्राप्ति का एक सस्ता और अधिक कारगर माध्यम प्रदान करने के प्राथमिक उद्देश्य से धन अंतरण व्यवसाय के कारोबार को अनुमति दी गई है इसलिए देश में शाखा नेटवर्क के संदर्भ में सीमित पहुँच तथा देश के बाहर स्थानीय परिचालन वाले ऑपरेटर्स को ध्यान में नहीं लिया जाएगा।

आवेदक भारतीय एजेंट को अपने समुद्रपारीय प्रिन्सिपल के संबंध में निम्नलिखित दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे / निम्नलिखित अपेक्षाओं को पूर्ण करना होगा:

क) समुद्रपारीय प्रिन्सिपल को भुगतान प्रणाली प्रारम्भ/ परिचालित करने के लिए भुगतान तथा निपटान प्रणाली अधिनियम (PSS एक्ट) 2007 के प्रावधानों के अंतर्गत भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक से आवश्यक ऑथोराइजेशन प्राप्त करना होगा। इस प्रकार के ऑथोराइजेशन के पूर्व रिज़र्व बैंक भारत सरकार की सहायता से समुद्रपारीय प्रिन्सिपल की पृष्ठभूमि तथा पिछले इतिहास का सत्यापन करेगा।

ख) समुद्रपारीय प्रिन्सिपल एक रजिस्टर्ड एंटीटी होना चाहिए जिसे धन अंतरण का कार्य करने के लिए संबंधित देश के केंद्रीय बैंक/ सरकार अथवा वित्तीय विनियमन प्राधिकरण का लाइसेन्स प्राप्त है। समुद्रपारीय प्रिन्सिपल के रजिस्ट्रेशन का देश एएमएल मानदंडों को पूरा करने वाला होना चाहिए।

ग) समुद्रपारीय प्रिन्सिपल के अद्यतन लेखापरीक्षित तुलन पत्र के अनुसार उसकी न्यूनतम निवल मालियत कम-से-कम 1 मिलियन अमरीकी डॉलर होनी चाहिए तथा उसे हर समय बनाए रखना चाहिए। तथापी रिज़र्व बैंक FATF सदस्य देशों में निगमित तथा संबंधित केंद्रीय बैंक/ सरकार अथवा वित्तीय विनियामक प्राधिकरण द्वारा पर्यवेक्षित समुद्रपारीय प्रिन्सिपल के मामले में न्यूनतम निवल मालियत के मानदंड में छूट देने पर विचार कर सकता है

घ) समुद्रपारीय प्रिन्सिपल धन अंतरण व्यवसाय में सुस्थापित होना चाहिए तथा सुव्यवस्थित विनियमित बाज़ारों में परिचलनों का ट्रैक रिकार्ड होना चाहिए।

ङ) समुद्रपारीय प्रिन्सिपल के साथ की गई इस व्यवस्था के परिणामस्वरूप दोनों ओर पर औपचारिक धन अंतरण सुविधाओं तक पहुँच में काफी वृद्धि होनी चाहिए।

च) समुद्रपारीय प्रिन्सिपल को समुद्रपारीय व्यापारी/ औद्योगिक निकायों के साथ रजिस्टर होना चाहिए।

छ) समुद्रपारीय प्रिन्सिपल के पास किसी अंतर्राष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजन्सि से अच्छा रेटिंग प्राप्त होना चाहिए।

ज) समुद्रपारीय प्रिन्सिपल को कम-से-कम अपने दो बैंकरों से गोपनीय रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए।

झ) समुद्रपारीय प्रिन्सिपल को स्वदेश/ मेज़बान देश के धन शोधन निवारण मानदंडों का अनुपालन करने के लिए उठाए गए कदम के संबंध में स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए।

ञ) समुद्रपारीय प्रिन्सिपल भारत में अपने एजेंट तथा उप-एजेंट की गतिविधियों के लिए पूर्णतः जिम्मेदार होंगे।

ट) समुद्रपारीय प्रिन्सिपल को विप्रेषकों तथा भारत में सभी पे-आउट से संबंधित हिताधिकारियों के सही रिकार्ड बनाए रखने चाहिए। रिज़र्व बैंक अथवा भारत सरकार की अन्य एजेन्सियों जैसे वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय, एफ़आईयू-आईएनडी आदि द्वारा मांगे जाने पर सभी रिकार्ड उनको उपलब्ध किए जाएँ।

ठ) समुद्रपारीय प्रिन्सिपल को चाहिए कि मांगे जाने पर विप्रेषक तथा हिताधिकारियों के संपूर्ण ब्योरे प्रस्तुत करे।

5. भारतीय एजेंट द्वारा उप-एजेंट की नियुक्ति के लिए दिशा-निर्देश

5.1 योजना

इस योजना के अंतर्गत भारतीय एजेंट धन अंतरण का व्यवसाय शुरू करने के लिए कतिपय शर्तों को पूरा करने वाली एंटीटीज के साथ सब-एजन्सि करार कर सकते हैं।

5.2 उप-एजेंट

किसी उप-एजेंट के पास कारोबार का स्थान होना चाहिए तथा उसकी सदाशयता (बोनफाइड़) भारतीय एजेंट को स्वीकार्य होनि चाहिए। भारतीय एजेंट उप-एजेंट के साथ आपसी सहमति से व्यवस्था की अवधि तथा कमीशन अथवा शुल्क के संबंध में निर्णय ले सकते हैं। भारतीय एजेंट द्वारा उसके उप-एजेंट के परिसर तथा रिकार्डों की कम-से-कम क्रमशः महीने में एक बार तथा वर्ष में एक बार की लेखा परीक्षा तथा ऑन-साइट निरीक्षण किया जाना चाहिए।

5.3 भारतीय एजेंट द्वारा उप-एजेंट के संबंध में जानकारी प्रस्तुत करने की क्रियाविधि

भारतीय एजेंट को किसी तिमाही के दौरान नियुक्त किए गए अपने उप-एजेंट से संबंधित अपेक्षित जानकारी तिमाही की समाप्ती से 15 दिन के भीतर निर्धारित फ़ारमैट में तिमाही आधार पर सॉफ्ट कॉपी में रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के उस क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत करनी चाहिए, जिसके क्षेत्राधिकार के अंतर्गत भारतीय एजेंट का रेजिस्टर किया गया कार्यालय आता है। रिज़र्व बैंक उसे वित्त मंत्रालय (MoF), भारत सरकार के माध्यम से गृह मंत्रालय, भारत सरकार को प्रस्तुत करेगा। गृह मंत्रालय द्वारा किसी भी प्रकार की आपत्ति दर्शाई जाने पर उप-एजन्सि व्यवस्था तत्काल रद्द की जाए।

भारतीय एजेंट को इस आशय के प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत करने चाहिए कि उनके द्वारा नियुक्त किए गए उप-एजेंट पात्रता के मानदंडों को पूरा करते हैं तथा उन्होंने अपने उप-एजेंट के संबंध में जहां लागू है वहाँ समुचित सावधानी बरती है।

5.4 उप-एजेंट के संबंध में समुचित सावधानी

भारतीय एजेंट तथा समुद्रपारीय प्रिन्सिपल को AD श्रेणी I, AD श्रेणी II, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, संपूर्ण मुद्रा परिवर्तक तथा डाक विभाग को छोड़कर अन्य उप-एजेंट की समुचित सावधानी कार्रवाई करते समय कम-से-कम निम्नलिखित जांच करनी चाहिए:

  • उप एजेंट की मौजूदा व्यवसायिक गतिविधियां/ उक्त क्षेत्र में उसकी स्थिति

  • उप एजेंट के पक्ष में शॉप अँड एस्टैब्लिश्मन्ट/ अन्य यथालागू म्यूनिसिपल प्रमाणन

  • उप- एजेंट के स्थान के वास्तविक अस्तित्व का सत्यापन

  • स्थानीय पुलिस प्राधिकरण से उप एजेंट का आचरण प्रमाणपत्र (संस्था के बहिर्नियम तथा अंतर्नियम की तथा निगमित एंटीटीज़ के संबंध में निगमन प्रमाणपत्र की प्रमाणित प्रतिलिपि)

टिप्पणी : हालांकि स्थानीय पुलिस प्राधिकरण से उप एजेंट का आचरण प्रमाणपत्र प्राप्त करना भारतीय एजेंट के लिए अनिवार्य नहीं है, फिर भी भारतीय एजेंट को ऐसे व्यक्तियों/ एंटीटीज़ को उप एजेंट के रूप में नियुक्त करने से बचना चाहिए जिनके विरुद्ध किन्हीं विधि प्रवर्तन अजेंसियों द्वारा कोई मामले/ कार्यवाही प्रारंभ की गई है/ लंबित है।

  • उप एजेंट तथा/ अथवा उसके निदेशकों/ भागीदारों से संबंधित पिछले आपराधिक मामले, उनके विरुद्ध विधि प्रवर्तन अजेंसियों द्वारा चलाए गए/ लंबित मामले यदि हो, संबंधी घोषणा।

  • उप एजेंट तथा उसके निदेशकों/भागीदारों का पैन कार्ड

  • उप एजेंट के निदेशकों/ भागीदारों तथा मुख्य व्यक्तियों कि तसवीरें।

उपर्युक्त जांच नियमित आधार पर, वर्ष में कम-से-कम एक बार किए जाने चाहिए। भारतीय एजेंट द्वारा साइट का दौरा करने के साथ ही उप एजेंट से उसके स्थान की पुष्टि करने वाली दस्तावेजी साक्ष्य भी प्राप्त करनी चाहिए । इस परिपत्र की तारीख से तीन महीने के भीतर भारतीय एजेंट को उपर्युक्त निर्धारित मानदंडों को पूरा न करने वाले उप एजेंट के साथ किए गए करार को समाप्त करना चाहिए।

5.5 केन्द्रों का चयन

योजना का परिचालन करने हेतु केन्द्रों का चयन करने के लिए भारतीय एजेंट स्वतंत्र हैं। तथापी रिज़र्व बैंक को इसकी सूचना दी जाए।

5.6 प्रशिक्षण

भारतीय एजेंट से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उप एजेंट को परिचालन तथा अभिलेखों के रखरखाव के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान करें।

5.7 रिपोर्टिंग, लेखा परीक्षा तथा निरीक्षण

भारतीय एजेंट से यह अपेक्षित है कि वह एक ऐसी पर्याप्त व्यवस्था स्थापित करे जिससे उसके द्वारा निर्धारित आसान फ़ारमैट में उप एजेंट मासिक अन्तरलों पर भारतीय एजेंट को लेनदेन संबंधी रिपोर्टिंग (नियमित आधार पर) कर सके।

भारतीय एजेंट द्वारा कम-से-कम मासिक आधार पर उप एजेंट के सभी स्थानों की नियमित स्पॉट लेखापरीक्षा करनी चाहिए। इस प्रकार की लेखा परिक्षा एक समर्पित दल द्वारा की जानी चाहिए और उप एजेंट द्वारा किए जाने वाले अनुपालन की जांच करने के लिए “रहस्यमयी ग्राहक” (व्यक्तियों द्वारा यह जानने तथा अनुभव करने के लिए ग्राहक होने का नाटक करना कि व्यक्ति तथा प्रक्रिया किस सीमा तक उनसे अपेक्षित कार्यनिष्पादन करते हैं) की संकल्पना का प्रयोग करना। ऊपर उल्लेख किए गए अनुसार उप एजेंट की बहियों के निरीक्षण की प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए। इस प्रकार का निरीक्षण, जिसे वर्ष में कम-से-कम एक बार किया जाना चाहिए, इस बात को सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा कि उप एजेंट धन अंतरण का व्यवसाय करार की शर्तों/ भारतीय रिज़र्व बैंक के प्रचलित दिशानिर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है तथा उप एजेंट ने अपेक्षित रिकार्ड बनाए रखेँ हैं।

टिप्पणी: भारतीय एजेंट अपने उप एजेंट की गतिविधियों के लिए पूर्णतः जिम्मेदार हैं। जहां भारतीय एजेंट को स्व-विनियमित एंटीटी के रूप में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, वहाँ निर्धारित पद्धति के अनुरूप उप एजेंट की गतिविधियों का संचालन सुनिश्चित करने का दायित्व पूर्णतः संबंधित भारतीय एजेंट का होगा और उप एजेंट की गतिविधियों के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक को किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है। प्रत्येक भारतीय एजेंट को उप एजेंट को नियुक्त करने से पूर्व समुचित सावधानी की कार्रवाई करनी होगी तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाने पर भारतीय एजेंट की अनुमति आरडीडी हो सकती है।

6 मौजूदा भारतीय एजेंट की अनुमति (ऑथोराइजेशन) के नवीकरण के लिए दिशानिर्देश

(i) भारतीय एजेंट को आवश्यक अनुमति प्रारंभ में एक वर्ष की अवधि के लिए जारी की जाएगी, जिसका सभी शर्तों तथा रिज़र्व बैंक द्वारा समय -समय पर जारी किए जाने वाले अन्य निदेशों/ अनुदेशों को पूरा करने के आधार पर एक से तीन वर्ष के लिए नवीकरण किया जाएगा।

(ii) आवेदक को एक प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी –I बैंक अथवा प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी –II अथवा संपूर्ण मुद्रा परिवर्तक (FFMC) होना चाहिए।

(iii) भारतीय एजेंट के पास न्यूनतम 50 लाख रुपये की निवल स्वाधिकृत निधि होनी चाहिए।

(iv) अनुमति के नवीकरण के लिए भारतीय एजेंट का रजिस्टर्ड कार्यालय भारतीय रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के जिस संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आता है को उसके समुद्रपारीय प्रिन्सिपल से संबंधित उपरोल्लिखित दस्तावेजों तथा निम्नलिखित दस्तावेजों सहित आवेदन प्रस्तुत किया जाए:

क) इस आशय का घोषणा पत्र कि भारतीय एजेंट अथवा उसके निदेशकों के विरुद्ध प्रवर्तन निदेशालय(DoE)/ राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) अथवा किसी अन्य विधि प्रवर्तन प्राधिकारणों ने कोई कार्यवाही प्रारम्भ नहीं की / के पास लंबित नहीं है तथा यह कि भारतीय एजेंट अथवा उसके निदेशकों के विरुद्ध किसी प्रकार के आपराधिक मामले प्रारंभित / लंबित नहीं हैं।

ख) भारतीय एजेंट द्वारा स्थापित केवाईसी/ एएमएल/ सीएफ़टी, जोखिम प्रबंधन तथा आंतरिक नियंत्रण नीति ढांचे से संबंधित विवरण।

ग) पिछले दो वित्तीय वर्षों के लिए भारतीय एजेंट का लेखापरीक्षित तुलन पत्र तथा लाभ-हानि खाता, यदि उपलब्ध हो तो, अथवा आवेदन की तारीख की स्थिति के अनुसार निवल स्वाधिकृत निधियों की स्थिति के संबंध में सांविधिक लेखापरीक्षकों के प्रमाणपत्र के साथ अद्यतन लेखापरीक्षित खातों की प्रतिलिपि।

घ) भारतीय एजेंट के कम-से-कम दो बैंकरों से सीलबंद लिफाफे में गोपनीय रिपोर्ट।

ङ) भारतीय एजेंट की वित्तीय क्षेत्र में कार्यरत सहयोगी / संबद्ध संस्थाओं के ब्योरे।

च) अनुमति के नवीकरण के लिए बोर्ड के संकल्प की प्रमाणित प्रतिलिपि।

टिप्पणी: एम.टी.एस.एस. के अंतर्गत अनुमति के नवीकरण के लिए आवेदन अनुमति की समाप्ती से एक महीने की अवधि अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित कोई अन्य अवधि के भीतर किया जाना चाहिए। जहां कोई एंटीटी अपनी एम.टी.एस.एस. की अनुमति के नवीकरण के लिए आवेदन प्रस्तुत करती है तो अनुमति के नवीकरण किए जाने अथवा अनुमति के नवीकरण के लिए किए गए आवेदन को अस्वीकार करने की तारीख तक, जैसी स्थिति हो, वह अनुमति लागू होगी। अनुमति की समाप्ती के बाद एम.टी.एस.एस. अनुमति के नवीकरण के लिए कोई आवेदन नहीं किया जाएगा।

7 भारतीय एजेंट का निरीक्षण

भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा फेमा, 1999 की धारा 12(1) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय एजेंट का निरीक्षण किया जाए।

8 भारतीय एजेंट के लिए केवाईसी/ एएमएल/ सीएफ़टी दिशानिर्देश

(i) भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंकिंग विनियमन विभाग, केंद्रीय कार्यालय द्वारा अपने अद्यतन मास्टर निदेश-अपने ग्राहक को जानिए(केवाईसी) निदेश, 2016 में संदर्भित धनशोधन निवारण मानकों तथा आतंकवाद के वित्तपोषण के प्रतिरोध पर एफ़एटीएफ़(FATF) की सिफ़ारिशों के संबंध में जारी किए गए सीमा-पारीय आवक प्रेषण गतिविधियों के संबंध में एम.टी.एस.एस. के अंतर्गत भारतीय एजेंट के लिए अपने ग्राहक को जानिए(KYC) मानदंड/ धनशोधन निवारण (AML) मानक/ आतंकवाद के वित्तपोषण के प्रतिरोध (CFT) पर विस्तृत अनुदेश तथा भविष्य में इस संबंध में समय-समय पर जारी अन्य अनुदेश आवश्यक परिवर्तनों सहित उन सभी प्राधिकृत व्यक्तियों (APs)पर लागू होंगे जो कि एम.टी.एस.एस. के अंतर्गत भारतीय एजेंट हैं। ये अनुदेश उनके उप एजेंट पर भी लागू होंगे।

(ii) सीधे हिताधिकारी के बैंक खाते में ही विदेशी आवक प्रेषण की प्राप्ति को आसान बनाने के लिए एम.टी.एस.एस. के अंतर्गत प्राप्त विदेशी आवक प्रेषणों को एनईएफ़टी, आईएमपीएस जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से केवाईसी मानदंडों को पूरा करने वाले हिताधिकारी बैंक खाते में अंतरित किया जा सकता है। एम.टी.एस.एस. के अंतर्गत भारतीय एजेंट के रूप में कार्य करने वाले बैंक (जिसे पार्टनर बैंक कहा जाएगा) द्वारा प्राप्त विदेशी आवक प्रेषण भी निम्नलिखित शर्तों के अधीन इलेक्ट्रोनिक माध्यम से सीधे हिताधिकारी के भारतीय एजेंट बैंक के अलावा किसी अन्य बैंक (जिसे प्राप्तकर्ता (रेसिपीएंट) बैंक कहा जाएगा) में धारित खाते में जमा किए जा सकते हैं:

क) रेसिपिएंट बैंक केवल केवाईसी मानदंडों को पूरा करने वाले बैंक खातों में पार्टनर बैंक द्वारा अंतरित राशि जमा करेगा।

ख) केवाईसी मानदंडों को पूरा नहीं करने वाले बैंक खातों के संबंध में रेसिपीएंट बैंक ऐसे खाते मेँ प्रेषण जमा करने अथवा राशि का आहरण करने की अनुमति देने से पूर्व प्राप्तकर्ता के संबंध मेँ केवाईसी/ ग्राहक समुचित सावधानी प्रक्रिया पूर्ण करेगा।

ग) पार्टनर बैंक खाते में सीधे जमा (direct-to-account) किए गए प्रेषणों को उचित रूप से चिन्हित करेगा ताकि रेसिपीएंट बैंक को यह पता चले कि वह विदेशी आवक प्रेषण है।

घ) पार्टनर बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि रेसिपीएंट बैंक को निधि अंतरित करते समय भेजे गए इलेक्ट्रॉनिक संदेश में प्रवर्तक (ओरिजिनेटर) संबंधी सही जानकारी तथा हिताधिकारी संबंधी आवश्यक सूचना शामिल की गई है। यह जानकारी प्रेषण संदेश में संपूर्ण भुगतान शृंखला अर्थात समुद्रपारीय प्रिन्सिपल, पार्टनर बैंक तथा रेसिपीएंट बैंक को उपलब्ध होनी चाहिए। पार्टनर बैंक को इलेक्ट्रॉनिक संदेश में उचित सावधानी सूचना जोड़ देनी चाहिए जो यह निर्दिष्ट करे कि यह विदेशी आवक प्रेषण है और इसे KYC के मानदंडों को पूरा न करने वाले खाते अथवा एनआरई/ एनआरओ खातों में जमा नहीं किया जाना चाहिए।

ङ) धनशोधन निवारण (अभिलेखों का रखरखाव) नियमावली, 2005 के प्रावधानों के अनुसार प्राप्तकर्ता के पहचान संबंधी तथा अन्य दस्तावेज़ रेसिपीएंट बैंक द्वारा रखे जाएंगे। एम.टी.एस.एस. के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी किए गए KYC/ AML/ CFT दिशानिर्देशों के अंतर्गत सभी अन्य अपेक्षाओं का पार्टनर बैंक द्वारा अनुपालन किया जाएगा।

च) रेसिपीएंट बैंक पार्टनर बैंक से अतिरिक्त जानकारी मांग सकता है तथा जिस पार्टनर बैंक से प्रेषण प्राप्त हुए हैं उसके ब्योरों सहित FIU-IND को संदिग्ध लेनदेन के संबंध में रिपोर्ट करेगा।

9 सामान्य अनुदेश

सभी समुद्रपारीय प्रिन्सिपल को अपने सांविधिक लेखापरीक्षकों से निवल मालियत संबंधी प्रमाणपत्र सहित लेखापरीक्षित वार्षिक तुलन पत्र रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय तथा भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग को प्रस्तुत करना अपेक्षित है। इसी प्रकार सभी भारतीय एजेंट को निवल स्वाधिकृत निधि संबंधी प्रमाणपत्र सहित लेखापरीक्षित वार्षिक तुलन पत्र रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत करना अपेक्षित है। चूंकि समुद्रपारीय प्रिन्सिपल तथा भारतीय एजेंट से यह अपेक्षित है कि वे निरंतर आधार पर न्यूनतम निवल मालियत तथा निवल स्वाधिकृत निधि बनाए रखेंगे, इसलिए उनकी निवल मालियत/ निवल स्वाधिकृत निधि न्यूनतम स्तर से कम हो जाने पर उन्हें निवल मालियत/ निवल स्वाधिकृत निधि को पुनः न्यूनतम अपेक्षित स्तर तक लाने के लिए विस्तृत योजना के साथ यह बात रिज़र्व बैंक को तत्काल सूचित कर देनी चाहिए।

10 निर्वाचन के दौरान मानक परिचालन क्रियाविधि (SOP)

गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारियों के लिए “अनुबंध” रूप में दिए गए SOP का उन सभी गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारियों को पालन करना है जो एम.टी.एस.एस. के अंतर्गत भारतीय एजेंट हैं और उनको SOP की विषयवस्तु से अपने उप-एजेंट/ घटकों को अवगत करना है।


अनुबंध

गैर-बैंक मुद्रा परिवर्तकों के लिए निर्वाचन के दौरान मानक परिचालन क्रियाविधि (SOP)

विदेशी मुद्रा का संचलन प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी I (AD Cat. I), प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी II (AD Cat. II), संपूर्ण मुद्रा परिवर्तक (FFMC), उनके कार्यालय/ शाखाएँ, उनके ग्राहक तथा उनके फ्रेंचाईजियों के बीच होगा।

भारतीय निर्वाचन आयोग से अनुरोध प्राप्त होने पर निर्वाचन के दौरान नकदी(विदेशी मुद्रा) के संचलन के लिए मानक परिचालन क्रियाविधि (SOP) अधिसूचित की गई है:

ए. प्रत्यक्ष/भौतिक संचलन –

1. भारतीय मुद्रा अथवा विदेशी मुद्रा के सभी संचलन प्राधिकृत व्यक्ति(व्यक्तियों) द्वारा किए जाने चाहिए, तथा नकदी के संचलन के समय उनके पास समर्थनकारी दस्तावेज़ होने चाहिए। यह संचलन प्राप्तकर्ता द्वारा किए गए अनुरोध के आधार पर होना चाहिए और गंतव्य के पते पर किया जाए।

2. यदि नकदी को AP के कार्यालय/ शाखा से बाहर ले जा रहे हैं तो एपी के खाता बहियों में उसे रिकार्ड करने के बाद ही स्थान से बाहर लिया जाना चाहिए।

3. इसी प्रकार मुद्रा के संचार का गंतव्य स्थान यदि एपी का कार्यकाय/ शाखा है तो उसे एपी की खाता बहियों में उसी दिन अथवा प्राप्ति की तारीख को रिकार्ड किया जाए।

4. एक ही एपी की शाखाओं के बीच विदेशी मुद्रा के अंतरण को बिक्री के रूप में हिसाब में लेने के बजाय स्टॉक अंतरण के रूप में हिसाब में लिया जाए ताकि दोहरी गणना से बचा जा सके।

बी. FFMCs/ प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी II द्वारा अपने नियमित ग्राहकों को उनके आवास पर दी जानेवाली फोरेक्स सेवा के मामले में अन्य बातों के साथ-साथ लेनदेन का प्रसंस्करण तथा लेखांकन एपी के कार्यालय में होना चाहिए तथा लेनदेन का समर्थन करने वाले प्राप्त मूल्य से संबंधित आवश्यक दस्तावेज़ होने चाहिए। फोरेक्स की सुपुर्दगी केवल एपी के प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए।

सी. जहां तक संभाव हो भारतीय मुद्रा का संचलन केवल बैंकिंग माध्यम (अर्थात मांग ड्राफ्ट, NEFT, RTGS, IMPS आदि) से किया जाना चाहिए। प्राधिकृत व्यापारियों तथा FFMCs के बीच के लेनदेन का क्रॉस किए गए अकाउंट पेयी चेक/ मांग ड्राफ्ट के माध्यम से निपटान किया जाना चाहिए, और किसी भी परिस्थिति में भारतीय मुद्रा का निपटान नकदी में नहीं किया जाए। एपी अथवा उसके फ्रेंचाईजी द्वारा संग्रहीत नकदी(भारतीय रुपए) को उसी दिन या अगले दिन किसी बैंक की शाखा में जमा कर दिया जाए।

डी. नकदी के परिवहन के लिए किसी भी संचलन को रद्द किए जाने पर उसे सही ढंग से प्रलेखित किया जाए।

ई. नकदी का संचलन दस्तावेजों के अनुरूप/ समकालिक होना चाहिए।

एफ़. भारतीय रुपए में नकदी के संचलन की उच्चतम सीमा होगी रु. 10,00,000/- तथा एपी के कार्यालयों/ शाखाओं को भेजी जाने वाली आयात की गई विदेशी मुद्रा के लेनदेन को छोड़कर विदेशी मुद्रा में 1,00,000 अमरीकी डॉलर के सममूल्य राशि।


परिशिष्ट / Appendix

धन अंतरण सेवा योजना पर मास्टर निदेश में समेकित परिपत्रों/ अधिसूचनाओं की सूची

क्रम सं. परिपत्र तारीख
1. ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 25 06 मार्च 2006
2. ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 132 08 जून 2012
3. ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 89 12 मार्च 2013
4. ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 110 04 मार्च 2014
5. ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 08 18 जुलाई 2014
6. ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 49 16 दिसंबर 2014
7. ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 88 25 मार्च 2015

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