मास्टर निदेशों

मास्टर निदेश – अनिवासी विनिमय गृहों के रुपया / विदेशी मुद्रा वास्ट्रो (Vostro) खाते खोलना और उन्हें बनाए रखना

भा.रि.बैंक/विमुवि/2015-16/16
विमुवि मास्टर निदेश सं.02/2015-16

1 जनवरी 2016
(28 अप्रैल 2016 एवं
20 अक्तूबर 2016 तक अद्यतन)

सभी प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंक और प्राधिकृत बैंक

महोदया / महोदय

मास्टर निदेश – अनिवासी विनिमय गृहों के रुपया / विदेशी मुद्रा
वास्ट्रो (Vostro) खाते खोलना और उन्हें बनाए रखना

समुद्रपारीय अधिकार क्षेत्र से सीमा-पार आवक विप्रेषणों को प्राप्त करने के लिए रुपया आहरण व्यवस्था (RDA) एक चैनल है। इस व्यवस्था के तहत, प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंक अनिवासी विनिमय गृहों के पास अपने वास्ट्रो खाते खोलने और उन्हें बनाए रखने के लिए गठजोड़ करते हैं।

2. भारतीय रिज़र्व बैंक विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 की धारा-11 के अंतर्गत, विदेशी मुद्रा कारोबार करने के संबंध में इस अधिनियम के प्रावधानों और उसके तहत बनाए गए नियमों, विनियमों, निर्देशों अथवा आदेशों के अनुपालन में व्यापारी श्रेणी-। बैंकों सहित प्राधिकृत व्यक्तियों को निदेश जारी करता है।

3. भारत में अनिवासी विनिमय गृहों के रुपया / विदेशी मुद्रा वास्ट्रो खाते खोलने और उन्हें बनाए रखने से संबंधित निदेश इसके साथ संलग्न मास्टर निदेश के जरिए समेकित रूप में जारी किए जा रहे हैं। रिपोर्टिंग अनुदेश, रिपोर्टिंग पर स्वतंत्र रूप से जारी मास्टर निदेश में पाये जा सकते हैं । यह नोट किया जाए कि जब भी आवश्यक हो, रिज़र्व बैंक विनियमों में अथवा प्राधिकृत व्यक्तियों द्वारा उनके ग्राहकों/ घटकों के साथ किए जाने वाले लेनदेनों के तौर-तरीके में किसी परिवर्तन के संबंध में ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्रों के जरिए प्राधिकृत व्यक्तियों को निदेश जारी करेगा। इसके साथ जारी मास्टर निदेश में साथ-साथ यथोचित रूप से संशोधन किया जाएगा।

भवदीय

(शेखर भटनागर)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक


मास्टर निदेश - अनिवासी विनिमय गृहों के रुपया/ विदेशी मुद्रा वास्ट्रो खाते खोलना और उन्हें बनाए रखना

1. प्रस्तावना

रुपया आहरण व्यवस्था के तहत खाड़ी देशों, हॉंगकॉंग, सिंगापुर, मलेशिया (मलेशिया के लिए केवल स्पीड विप्रेषण प्रक्रिया के तहत) और एफएटीएफ अनुपालक सभी अन्य देशों (एफएटीएफ अनुपालक सभी अन्य देशों के लिए केवल स्पीड विप्रेषण प्रक्रिया के तहत) में स्थित विनिमय गृहों के रुपया वास्ट्रो खाते के माध्यम से सीमापार से आवक विप्रेषण प्राप्त किए जाते हैं।

इस मास्टर निदेश में, इस मार्ग के तहत सामान्य अनुदेश, अनुमत लेनदेन तथा व्यवस्थाओं के विभिन्न प्रकार दिए गए हैं। विदेशी मुद्रा आहरण व्यवस्था के लिए दिशानिर्देश और अन्य विविध प्रावधान भी इस दस्तावेज़ के अगले भाग में शामिल किए गए हैं।

2. सामान्य अनुदेश

प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंकों को अनिवासी विनिमय गृहों के भारत में रुपया वास्ट्रो खाते खोलने और उन्हें बनाए रखने के लिए खाड़ी देशों, हाँगकाँग, सिंगापुर, मलेशिया और एफएटीएफ अनुपालक सभी अन्य देशों के अनिवासी विनिमय गृहों के साथ पहली बार रुपया आहरण व्यवस्था करते समय आवश्यक दस्तावेज़ों के साथ विनिर्दिष्ट फार्म में रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को आवेदन करना चाहिए। उसके उपरांत वे रुपया आहरण व्यवस्था के अंतर्गत विनिर्दिष्ट दिशानिर्देशों के अनुसार यह व्यवस्था कर सकते हैं और रिज़र्व बैंक को तुरंत सूचित कर सकते हैं। हाँलाकि, एक बार रुपया आहरण व्यवस्थाओं की कुल संख्या बीस हो जाने पर प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंक यह सुनिश्चित करने के लिए कि उक्त व्यवस्था संतोषजनक रूप से कार्य कर रही है, अपनी अंतर्प्रणाली की विस्तृत बाह्य लेखा परीक्षा कराएं। रिपोर्ट संतोषजनक होने के आधार पर प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंकों के बोर्ड ऐसी और व्यवस्थाओं का अनुमोदन कर सकते हैं। इस संबंध में बोर्ड के संकल्प (Resolution) सहित बोर्ड के नोट की प्रतिलिपि रिज़र्व बैंक के पास फाइल की जाए और रिज़र्व बैंक को नई व्यवस्था के संबंध में तुरंत सूचित किया जाए। भारत में अनिवासी विनिमय गृहों के रुपया / विदेशी मुद्रा वास्ट्रो खाते खोलने और उन्हें बनाए रखने के लिए विस्तृत दिशा-निदेश नीचे दिये गये हैं:

(ए) भारत में खाता खोलने के लिए किसी विनिमय गृह के अनुरोध पर विचार करते समय संबंधित प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक सामान्य बैंकिंग प्रथा के अनुसार विनिमय गृहों के वित्तीय आधार के बारे में आवश्यक जांच -पड़ताल करें और सभी प्रकार से खुद को पूरी तरह संतुष्ट करें। प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक यह भी सुनिश्चित करें कि विनिमय गृहों के पास संबंधित स्थानीय मौद्रिक/ पर्यवेक्षी प्राधिकरण द्वारा जारी किये गये वैध लाइसेंस हैं और मुद्रा विनिमय /मुद्रा अंतरण कारोबार के लिए आवश्यक प्राधिकार एवं लाइसेंस हैं।

(बी) रुपया आहरण व्यवस्था/ विदेशी मुद्रा आहरण व्यवस्था के तहत प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंकों तथा विनिमय गृहों के बीच करार के पंजीकरण की आवश्यकता वैकल्पिक है। तथापि, किसी विनिमयगृह के साथ की गई व्यवस्था व्यापक कानूनी प्रलेखीकरण की शर्त पर हो और प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक इस संबंध में सभी आवश्यक कानूनी अपेक्षाओं पर ध्यान दें। इसके अतिरिक्त, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि विनिमय गृह के सभी साझेदार संयुक्त और अलग-अलग रूप से करार के तहत विनिमय गृहों पर आए दायित्वों को पूरा करने के लिए बाध्य होते हैं।

(सी) पावर ऑफ एटर्नी के पंजीकरण/विनिमयगृह के हस्ताक्षरकर्ता पदाधिकारियों के नमूना हस्ताक्षर लेने जैसी सामान्य बैंकिंग अपेक्षाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।

3. रुपया वास्ट्रो खाते में परिचालन के संबंध में अनुदेश

(ए) खातों का उपयोग मुख्यत: भारत को निजी खातों में सीमापार से आवक विप्रेषण पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। विप्रेषक और लाभार्थी कुछ अपवादों को छोड़कर अलग-अलग व्यक्ति होने चाहिए। व्यापार लेनदेनों के वित्तपोषण के लिए विनिमय गृहों के माध्यम से प्रति लेनदेन रु. 15,00,000 (पंद्रह लाख रुपए मात्र) के विप्रेषण की अनुमति है। खातों का उपयोग भारत से सीमापार जावक विप्रेषणों के लिए न किया जाए।

(बी) खातों का परिचालन जमा आधार पर किया जाए। खाताधारकों को कोई ओवरड्राफ्ट सुविधा प्रदान नहीं की जानी चाहिए। तथापि, नामित डिपाजिटरी एजेंसी (डीडीए) प्रक्रिया के मामले में, आवश्यकता हो तो, डीडीए खाते में जमा निधियों को हिसाब में लिया जाए। प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक निधियों की पर्याप्तता की जांच और गुप्त ओवरड्राफ्ट का पता लगाने के लिए अदाकर्ता बैंक शाखाओं में जब कोई भुगतान किया जाता है तो तत्काल आधार पर, जहां रुपया वास्ट्रो खाते को ऑनलाईन डेबिट करना संभव नहीं होता है, तो बैंक राशि की उपलब्धता की तारीख (वैल्यू डेटिंग) को अपनाएं। तथापि, ऐसे मामलों में, यह सुनिश्चित किया जाए कि अदाकर्ता शाखाओं के साथ यथाशीघ्र नेटवर्किग की जाती है।

(सी) प्रत्येक व्यवस्था के लिए पृथक रुपया वास्ट्रो खाता रखा जाएगा। प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक, जिसके पास खाता है, को अनुमत विदेशी मुद्रा की बिक्री द्वारा खाते का निधीयन किया जाएगा। अन्य प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक अथवा अन्य वास्ट्रो खाते से अंतरित रुपया निधियां खाते में जमा के लिए पात्र नहीं होंगी।

(डी) आवक विप्रेषणों के अनुमत प्रकार के नामे [उपर्युक्त मद 4(ए) देखें] को मुक्त रूप में अनुमति दी जाए और उसे वही स्थित बहाल की जाए जो भारत में किसी अनुमोदित तरीके के विदेशी मुद्रा के विप्रेषण को बहाल की जाती है। इस प्रकार, ऐसे भुगतान अनिवासी भारतीयों द्वारा रखे गए अनिवासी (बाह्य) रुपया खाते में जमा करने अथवा प्राथमिकता प्राप्त आबंटन आदि योजना के तहत स्वीकार किए जाने के लिए पात्र होंगे। ऐसे खातों के माध्यम से विप्रेषण प्राप्त कर रहे पर्यटकों को (चाहे वह भारतीय हो या नहीं) जहां कहीं आवश्यक हो, निधियों के बाह्य स्त्रोतों (भारत में विदेश यात्रा के भुगतान अथवा उपयोग न की गई शेष राशि के पुन: परिवर्तन के लिए) को साबित करने के लिए मदद करने हेतु प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक उसी रूप में प्रमाणपत्र जारी करें जैसा कि विदेशी बैंकों के रुपया खाते के माध्यम से प्राप्त आवक विप्रेषणों के लिए करते हैं।

(ई) ऐसे खातों की निधियां न तो परिवर्तनीय होंगी न ही अन्य प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक अथवा उसी प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक में रखे गये अन्य अनिवासी खाते में अंतरणीय होंगी।

(एफ) इस प्रकार के खाते में जमाराशि पर ब्याज का भुगतान नहीं किया जाएगा।

(जी) विनिमय गृहों के रुपया वास्ट्रो खाता रखने वाले प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक तब तक विनिमय गृहों द्वारा खरीदे गए रुपए को खाते में जमा नहीं कर सकते जब तक उन्हें इस आशय की पुष्टि प्राप्त नहीं हो जाती है कि प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक के नास्ट्रो खाते में विदेशी मुद्रा में प्रति-मूल्य (काउंटर-वैल्यू के साथ) जमा किया गया है (देखें विदेशी मुद्रा कारोबार पर आंतरिक नियंत्रण के लिए दिशा-निदेश, फरवरी 2011 का पैराग्राफ 3.3.1)।

(एच) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक, जमा और परिचालनगत जोखिमों का ध्यान रखने की व्यवस्था के तरीके के आधार पर किसी परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में नकदी जमा अथवा अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के किसी बैंक की गारंटी के रूप में उपयुक्त और पर्याप्त संपार्श्विक (कोलेटेरल) प्राप्त कर सकते हैं। वे इस संबंध में अपनी निजी नीति तैयार करें।1

(आई) रिज़र्व बैंक द्वारा विवेकपूर्ण उपाय के रूप में आहरणकर्ता शाखाओं की सीमा 300 निर्धारित की गई है। तथापि, प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक किसी विनिमय गृह के साथ गठ-जोड़ के लिए रिज़र्व बैंक के अनुमोदन की शर्तों पर तथा रिज़र्व बैंक द्वारा समय- समय पर जारी रुपया आहरण व्यवस्था से संबंधित अनुदेशों के अधीन 300 से ऊपर आहरणकर्ता शाखाओं को पदनामित कर सकते हैं बशर्ते ऐसी शाखाएं कोर बैंकिंग सोल्यूशन के अंतर्गत आती हों जहाँ वास्ट्रो खाते में गुप्त ओवरड्राफ्ट से बचने के लिए निधियों की स्थिति की ऑन–लाईन मॉनिटरिंग की जाती है। प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक को 300 से ऊपर अदाकर्ता शाखाओं की संख्या में वृद्धि करने से पहले बोर्ड का आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करना चाहिए तथा स्थिति से रिज़र्व बैंक को अविलंब अवगत कराना चाहिए।

4. अनुमत लेनदेन

(ए) विनिमय गृहों के साथ आहरण व्यवस्था को मुख्यत: सीमापार-आवक व्यक्तिगत विप्रेषणों का माध्यम बनाने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। किसी भी परिस्थिति में विनिमयगृहों के माध्यम से चैरिटेबल संस्थाओं को दान / चंदा नहीं भेजना चाहिए।

2. विनिमय गृहों के साथ आहरण व्यवस्था के तहत अनुमत लेनदेनों की सूची निम्नलिखित है:

(i) अनिवासी भारतीयों द्वारा भारतीय रुपए में रखे गए अनिवासी (बाह्य) रुपया खाते में जमा।

(ii) अनिवासी भारतीयों के परिवारों को भुगतान।

(iii) प्रीमियम/निवेश के लिए बीमा कंपनियों, म्युचुअल फंडों तथा पोस्ट मास्टर के पक्ष में भुगतान।

(iv) शेयरों, डिबेंचरों में निवेश के लिए बैंकरों के पक्ष में भुगतान।

(v) अनिवासी भारतीय व्यक्ति द्वारा व्यक्तिगत नाम में भारत में आवासीय फ्लैट के अधिग्रहण के लिए को-ऑपरेटिव हाऊसिंग सोसाइटियों, सरकारी आवास योजनाओं अथवा इस्टेट डेवेलपर्स को भुगतान बशर्ते उसके बाबत विनियमों का अनुपालन किया जाता है।

(vi) स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थाओं को ट्यूशन/बोर्डिंग, परीक्षा फीस आदि का भुगतान।

(vii) अनिवासी भारतीयों/उनके आश्रितों तथा एफएटीएफ अनुपालक सभी अन्य देशों के नागरिकों को चिकित्सा उपचार के लिए भारत में चिकित्सा संस्थाओं और अस्पतालों को भुगतान।

(viii) एफएटीएफ अनुपालक सभी देशों के नागरिकों (राष्ट्रिकों)/अनिवासी भारतीयों द्वारा अपने ठहरने के लिए होटलों को भुगतान।

(ix) अनिवासी भारतीयों तथा भारत में निवास करने वाले उनके परिवारों की (विदेश यात्रा हेतु) भारत में घरेलू एयरलाईन/रेल, आदि द्वारा बुकिंग के लिए ट्रेवेल एजेंटों को भुगतान।

(x) प्रति लेनदेन 15,00,000.00 रुपए (केवल पंद्रह लाख रुपए) तक के व्यापार-लेनदेन।2

(xi) भारत में यूटिलिटि सेवा प्रदाताओं की सेवाओं, अर्थात पानी की आपूर्ति, बिजली की आपूर्ति, टेलीफोन (मोबाइल टॉप-अप, आदि को छोड़कर), इंटरनेट, टेलीविज़न आदि के लिए भुगतान।

(xii) भारत में करों का भुगतान ।

(xiii) ऋणों की चुकौती के लिए भारत में बैंकों एवं गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) को ईएमआई के भुगतान।

(xiv) प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत निधि में राशि का विप्रेषण बशर्ते बैंकों द्वारा विप्रेषण सीधे उक्त निधि में जमा (क्रेडिट) किए जाएं और विप्रेषकों के पूरे ब्योरे रखे जाएं।

टिप्पणी : रुपया / विदेशी मुद्रा आहरण व्यवस्था के तहत प्राप्त विप्रेषण के नकद वितरण की अनुमति नहीं है।

(सी) अनिवासी विनिमय गृहों के साथ रुपया आहरण व्यवस्था रखने वाले प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक ('पार्टनर बैंक' के नाम से अभिहित) द्वारा प्राप्त विदेशी आवक विप्रेषण स्वयं से भिन्न बैंक ('प्राप्तकर्ता बैंक' के नाम से अभिहित) के पास लाभार्थी के रखे गए बैंक खाते में NEFT, IMPS, आदि जैसे इलेक्ट्रानिक रूप से निम्नलिखित शर्तों के तहत, सीधे जमा (क्रेडिट) किए जा सकते हैं:

i. 'पार्टनर बैंक' द्वारा अंतरित राशि 'प्राप्तकर्ता बैंक' केवल केवाईसी अनुपालित बैंक खाते में जमा (क्रेडिट) करेगा।

ii. केवाईसी (KYC) अननुपालित बैंक खातों के संबंध, में 'प्राप्तकर्ता बैंक' ऐसे खाते/तों में राशि क्रेडिट करने अथवा उनसे आहरण की अनुमति देने से पूर्व (विप्रेषण) प्राप्तकर्ता के बैंक खाते के बारे में केवाईसी/सीडीडी की प्रक्रिया पूरी करेगा।

iii. 'पार्टनर बैंक' (अर्थात अनिवासी विनिमय गृहों से रुपया आहरण व्यवस्था के तहत विदेशी आवक विप्रेषण प्राप्त करने वाला प्रा. व्या. श्रेणी I बैंक) खाते में सीधे क्रेडिट होने वाले ऐसे विप्रेषणों को उचित रूप में मार्क करेंगे ताकि 'प्राप्तकर्ता बैंक' को ज्ञात रहे कि संदर्भित विप्रेषण 'विदेशी आवक विप्रेषण' है।

iv. 'प्राप्तकर्ता बैंक' को निधियां अंतरित करते समय 'पार्टनर बैंक' विप्रेषण के प्रारंभ-कर्ता (originator) और लाभार्थी संबंधी सही और आवश्यक जानकारी इलेक्ट्रानिक संदेश में शामिल करना सुनिश्चित करेगा। यह सूचना अर्थात अनिवासी विनियम गृह, 'पार्टनर बैंक' और 'प्राप्तकर्ता बैंक' संबंधी जानकारी भुगतान श्रृंखला (payment chain) में हर स्तर पर विप्रेषण संदेश में उपलब्ध रहनी चाहिए। 'पार्टनर बैंक' इलेक्ट्रानिक संदेश में एक उचित एलर्ट जोड़ेगा जिससे यह इंगित होता रहे कि यह एक 'विदेशी आवक विप्रेषण' है एवं उसे केवल केवाईसी अनुपालित बैंक खाते में क्रेडिट किया जाए।

v. धन शोधन निवारण (आभिलेखों का रख-रखाव) नियमावली, 2005 के उपबंधों के अनुसार प्राप्तकर्ता की पहचान और अन्य दस्तावेज़ 'प्राप्तकर्ता बैंक' द्वारा अनुरक्षित किए जाएंगे। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी केवाईसी/एएमएल/सीएफटी संबंधी सभी अन्य अपेक्षाओं का पालन पार्टनर बैंक द्वारा किया जाएगा।

vi. 'प्राप्तकर्ता बैंक' पार्टनर बैंक से अतिरिक्त सूचनाएं मांग सकता है और संदिग्ध लेनदेन के संबंध में विप्रेषण जिस पार्टनर बैंक से मिला हो उसके नाम का उल्लेख करते हुए एफआईयू-आईएनडी को संदिग्ध रिपोर्ट भेज सकेगा।

5. रुपया आहरण व्यवस्था और संपार्श्विक (कोलेटेरल) रक्षा (कवर) के प्रकार

पदनामित निक्षेपागार एजेंसी (डीडीए), गैर-पदनामित निक्षेपागार एजेंसी (नान-डीडीए) और तेज (स्पीड) विप्रेषण प्रक्रियाओं के तहत रुपया आहरण व्यवस्था का संचालन किया जा सकता है।

(ए) नामित निक्षेपागार एजेंसी (डीडीए) प्रक्रिया

(ए) विनिमय गृह को रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन से अदाकर्ता बैंक को स्वीकार्य किसी अंतर्राष्ट्रीय बैंक (डीडीए) के साथ परस्पर सहमत केंद्र पर अथवा तदनुरूपी रुपया वास्ट्रो खाता रखने वाली शाखा में स्वयं अदाकर्ता बैंक के साथ अदाकर्ता बैंक (खाता-विनिमय गृह) के नाम में परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में (डीडीए के रूप में जाना जाता है) एक बैंक खाता खोलना आवश्यक होगा।

(बी) विनिमय गृह, प्रत्येक दिन की समाप्ति पर उस दिन के लिए भारतीय रुपए में कुल आहरण का योग करेगा और उसे विदेशी मुद्रा में परिवर्तित करेगा जिसे अगले कार्य दिवस को अपराह्न से पहले अदाकर्ता बैंक (खाता-विनिमय गृह) (उपर्युक्त 1(ए) में बताए गए अनुसार डीडीए खाते के रूप में जाना जाता है) के खाते में जमा किया जाएगा।

(सी) विनिमय गृह, आहरित ड्राफ्टों की कुल संख्या और सकल मूल्य तथा डीडीए खाते में दैनिक जमा के बारे में जानकारी अदाकर्ता बैंक को भेजेगा। डीडीए खाते से अंतरण यथासंभव लगातार तथा नीचे 1 (ई) में निर्धारित शर्त पर होगा।

(डी) डीडीए खाता, अदाकर्ता बैंक को धारणाधिकार (लियन) के तहत, निधियों को अपने पास रखेगा। डीडीए खाते से केवल (i) जहां डीडीए खाता अदाकर्ता बैंक को छोड़कर अन्य बैंक के पास रखा जाता है, वहां अदाकर्ता बैंक के नास्त्रो खाते में अंतरण के कारण, (ii) जहां डीडीए खाता अदाकर्ता बैंक के पास रखा जाता है, वहां अदाकर्ता बैंक को अनुमत विदेशी मुद्रा की बिक्री करके विनिमय गृह के रुपया वास्ट्रो खाते में जमा के लिए नामे डालने की अनुमति होगी।

(ई) किसी विशेष दिन को जमा की गई राशि के डीडीए में अंतरण की व्यवस्था करना विनिमय गृह की जिम्मेदारी होगी। डीडीए खाते के साथ निधियों की अस्थायी अवधि का निर्धारण अधिकतम पाँच दिनों के अधीन विनिमय गृह के परामर्श से अदाकर्ता बैंक तय करेगा।

(एफ) उपर्युक्त 1(बी) के लिए किए गए प्रावधान के अनुसार अदाकर्ता बैंक के नास्रो खाते में अंतरण की तारीख तक डीडीए के पास स्थित विनिमय गृह द्वारा जमा की गई राशि पर अर्जित ब्याज विनिमय गृह को प्राप्त होगा।

(जी) उपर्युक्त के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए भारत में स्थित अदाकर्ता बैंक डीडीए के पास रखे गए खाते में दैनिक आहरण और जमा, साथ ही अदाकर्ता बैंक के नास्ट्रो खाते में अंतरण की जांच करने हेतु संबंधित देश में कार्य कर रहे सनदी लेखाकार / लेखा परीक्षकों की फर्म को नियुक्त करेगा। इस प्रयोजन के लिए विनिमय गृह लेखापरीक्षकों को विनिमय गृह की बहियों, पे इन वाऊचर्स आदि की जाँच करने की उस सीमा तक अनुमति देगा जहां तक वे रुपया आहरण व्यवस्था से संबंधित हैं। लेखापरीक्षक ऐसी जाँच प्रत्येक सप्ताह में कम से कम एक या दो बार करेंगे।

(एच) उपर्युक्त पैराग्राफ 1(जी) में बताए गए अनुसार लेखापरीक्षकों की नियुक्ति के विकल्प के रूप में, प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक ऐसे कार्य करने के लिए विनिमय गृहों में अपने प्रतिनिधि के रूप में उपयुक्त अधिकारी को प्रतिनियुक्त करें ताकि प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक के हितों की रक्षा हो सके।

(आई) लेखापरीक्षक/प्रतिनिधि तत्काल निष्कर्षों की सूचना अदाकर्ता बैंक को देंगे। विनिमय गृहों की ओर से चूक होने पर अदाकर्ता बैंक करार की शर्तों के अनुसार विनिमय गृह को नोटिस देते हुए एजेंसी करार को समाप्त करेगा। करार समाप्ति की सूचना भी रिज़र्व बैंक को तत्काल दी जाएगी।

(जे) जब तक विनिमय गृह दिशा-निर्देशों का अनुपालन करता है, अदाकर्ता बैंक सुनिश्चित करेगा कि जारी किए गए ड्राफ्ट परस्पर सहमत शाखाओं में स्वीकार किए जाते हैं।

(के) लेखापरीक्षकों को देय पारिश्रमिक अदाकर्ता बैंक देगा।

(एल) विनिमय गृहों द्वारा आहरित ड्राफ्टों की वैधता उनके जारी होने की तारीख से मात्र तीन महीने के लिए होगी।

(एम) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक स्वयं को आश्वस्त करें कि विनिमय गृहों की खाता बहियों की स्थानीय पर्यवेक्षण प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित लेखापरीक्षकों द्वारा नियमित रूप से लेखापरीक्षा की जाती है।

(एन) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक, विनिमय गृहों की आवधिक क्रेडिट रिपोर्ट, लेखापरीक्षित तुलनपत्र और लाभ-हानि लेखा तथा अन्य संबंधित सूचनाएं मंगाएं ताकि अपनी बहियों में लेखे को बनाए रखने के संबंध में निर्णय ले सकें।

(ओ) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक सभी लाइसेंसों की वैध प्रतियां भी अपने रिकार्ड में रखें।

(पी) चूंकि विनिमय गृहों के बही खातों का निरीक्षण नहीं किया जा सकता है, अत: प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक, विनिमय गृहों का दौरा करके आवधिक समीक्षा और / अथवा मूल्यांकन (ओपीनियन) रिपोर्ट की आवधिक रूप से समीक्षा करें। प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक की ओर से पर्याप्त वरिष्ठ स्तर के अधिकारी, जो विनिमय गृह के अनिवासी रुपया खाते के संचालन से भलीभांति परिचित हों, दौरे करें।

(क्यू) डीडीए के लिए संपार्श्विक रक्षा (कोलेटेरल कवर): विनिमय गृह, जिन्होंने परिचालन के तीन वर्ष पूरे नहीं किए हैं, वे किसी परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में नकदी जमा के रूप में कोलेटेरल कवर अथवा 7 दिनों के अनुमानित आहरण के समकक्ष, अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त बैंक की गारंटी प्राप्त करें। विनिमय गृह, जिन्होंने सफल परिचालन के तीन वर्ष पूरे किए हैं, उनके लिए कोई कोलेटेरल कवर निर्धारित नहीं है। तथापि, प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक पर्याप्त कोलेटेरल कवर मांगकर अपनी स्थिति सुरक्षित करें। उपर्युक्त 1 (जी) के अनुसार, जहां लेखापरीक्षक नियुक्त करना संभव न हो, वहां परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में नकदी जमा के रूप में कोलेटेरल कवर अथवा 15 दिनों के अनुमानित आहरण के समतुल्य अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त बैंक की गारंटी प्राप्त की जाए। जमाराशि, उस पर बाजार सम्बद्ध दर ब्याज के साथ, प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक के नाम में हो और जमाराशि रखने वाले विनिमय गृह को देय हो। जमा और गारंटी की राशि की समीक्षा और उचित निगरानी आवधिक आधार पर प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक द्वारा की जानी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आहरणों के लिए पर्याप्त कोलेटेरल कवर है।

(बी) नॉन - डीडीए प्रक्रिया

(ए) उपर्युक्त के अनुसार डीडीए खाता रखने और लेखापरीक्षक की नियुक्ति के विकल्प के रूप में, प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक नॉन-डीडीए प्रक्रिया अपनाएं।

(बी) नॉन-डीडीए प्रक्रिया के तहत, विनिमय गृह आवधिक अंतराल पर उनके द्वारा जारी कुल ड्राफ्टों के लिए अमरीकी डालर से प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक से रुपए की खरीद करते हुए प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक के पास रखे गए अपने वास्ट्रो खाते का निधीयन करते हैं और प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक को आहरण और निधीयन संबंधी साप्ताहिक विवरण भेजते हैं।

(सी) नॉन डीडीए के लिए कोलेटेरल कवर : विनिमय गृह, जिन्होंने परिचालन के तीन वर्ष पूरे नहीं किए हैं, वे किसी परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में नकदी जमा में कोलेटेरल कवर अथवा 7 दिनों के अनुमानित आहरण के समकक्ष अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त बैंक से गारंटी प्राप्त करें। विनिमय गृह, जिन्होंने सफल परिचालन के तीन वर्ष पूरे किए हैं, उनके लिए कोई कोलेटेरल कवर निर्धारित नहीं है। इसके अलावा, नॉन डीडीए व्यवस्था के तहत विनिमय गृहों से किसी भी परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में नकदी जमा में कोलेटेरल कवर अथवा 10 दिनों के अनुमानित आहरण के समकक्ष अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त बैंक से गारंटी प्राप्त की जाए। उपर्युक्त के अतिरिक्त, यदि विनिमय गृह की बहियों की जांच के लिए बैंक के अपने स्टाफ को प्रतिनियुक्त करने के बैंक के अधिकार पर रोक हो, जैसा कि कुवैत में विनिमय गृहों के मामले में है, तो किसी परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में अतिरिक्त नकदी जमा /15 दिनों के अनुमानित आहरण के समकक्ष अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त बैंक से गारंटी प्राप्त की जाए। जमाराशि, उस पर बाजार सम्बद्ध दर ब्याज के साथ, प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक के नाम में हो और जमाराशि रखनेवाले विनिमय गृह को देय हो। जमा और गारंटी की राशि की समीक्षा और उचित निगरानी आवधिक आधार पर प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक द्वारा की जानी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आहरणों के लिए पर्याप्त कोलेटेरल कवर है और उसे मूल्यांकित प्रक्रियाधीन नामे के लिए हिसाब में लिया गया है।

सी. शीघ्र (स्पीड) विप्रेषण प्रक्रिया

(ए) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक को शीघ्र विप्रेषण प्रक्रिया के तहत आरडीए में सम्मिलित होने की अनुमति है, जहां-

(i) विनिमय गृह स्विफ्ट अथवा इंटरनेट के माध्यम से नाम, पता, आदि के पूरे ब्योरे सहित भुगतान अनुदेश भेजता है।

3(ii) सामान्यत: विनिमय गृह को भुगतान अनुदेश जारी करने के काफी समय पहले ही प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक के नास्ट्रो खाते के माध्यम से रुपया खाते का निधीयन करना चाहिए तथा विनिमय गृह के आंकड़े और वास्ट्रो खाते में जमाशेष की उपलब्ता के सत्यापन पर प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक, हिताधिकारी के पक्ष में ड्राफ्ट जारी करेगा अथवा हिताधिकारी के खाते में राशि जमा करेगा।

4(iii) जहां वर्तमान रुपया आहरण व्यवस्था को शीघ्र विप्रेषण की सुविधा दी जाती है, वहां विनिमय गृह, रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन से एक अलग रुपया खाता खोलेगा । तथापि, जहां डीडीए/नॉन-डीडीए प्रक्रिया के तहत वर्तमान रुपया आहरण व्यवस्था में परिचालन संतोषजनक है, प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक, सामान्य शर्तों के तहत और विनिमय गृहों से सभी आवश्यक दस्तावेज़ प्राप्त करने के बाद रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन के बिना उसी विनिमय गृह को शीघ्र विप्रेषण की सुविधा दे सकता है। तथापि, रिज़र्व बैंक को इस विषय में तत्काल सूचित किया जाना चाहिए।

5(बी) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक क्या विप्रेषणों के लिए पूर्व में निधीयन किया गया हैं, विनिमय गृह का ट्रैक रिकार्ड, क्या विप्रेषण सकल अथवा निवल आधार पर लागू किए जाते हैं, आदि जैसे घटकों के आधार पर संपार्श्विक की आवश्यकता, यदि कोई हो, निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र हैं तथा वे इस संबंध में अपनी निजी नीति तैयार करें।

6. विदेशी मुद्रा आहरण व्यवस्था

प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक उन विनिमय गृहों, जिनके साथ उसकी रुपया आहरण व्यवस्था है, के साथ डीडीए अथवा नॉन-डीडीए प्रक्रिया के तहत विदेशी मुद्रा आहरण व्यवस्था रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन के साथ तथा निम्नलिखित शर्तों पर शुरू कर सकता है। विदेशी मुद्रा आहरण व्यवस्था के तहत किसी प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक की विनिमय गृह के साथ प्रत्येक गठजोड़ की व्यवस्था के लिए रिज़र्व बैंक से अनुमोदन लेना अपेक्षित है।

(ए) विनिमय गृह, प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक की "ए" अथवा "बी" श्रेणी की शाखाओं पर किसी भी परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में ड्राफ्ट आहरित कर सकता है। इस व्यवस्था में किसी भी "सी" श्रेणी की शाखा को भाग लेने की अनुमति नहीं है।

(बी) विदेशी मुद्रा आहरण व्यवस्था को रुपया आहरण व्यवस्था से अलग रखा जायेगा।

(सी) विनिमय गृह का खाता रखने वाली शाखा में उसका एक अलग विदेशी मुद्रा वास्ट्रो खाता खोला जाएगा। ऐसे ड्राफ्टों का भुगतान विनिमय गृह द्वारा रखे गए इस खाते के नामे डाल कर किया जाएगा, न कि प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक के नास्ट्रो खाते में नामे करके।

(डी) किसी भी दिन विनिमय गृह द्वारा विदेशी मुद्रा में आहरित ड्राफ्ट की सकल राशि अदाकर्ता बैंक के नास्त्रो खाते में अगले कार्य दिवस में कारोबार-समाप्ति तक अवश्य जमा की जाए।

(ई) अदाकर्ता प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक की खाता रखने वाली शाखा उनके नास्ट्रो खाते में जमा के संबंध में पुष्टि प्राप्त हो जाने के बाद विनिमय गृह के विदेशी मुद्रा वास्ट्रो खाते में क्रेडिट करना चाहिए।

(एफ) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विदेशी मुद्रा खाते का हमेशा निधीयन किया जाता है।

(जी) यदि व्यवस्था नॉन-डीडीए प्रक्रिया के तहत की गई है तो विनिमय गृह विदेशी मुद्रा में आहरित ड्राफ्ट की संख्या और सकल राशि की सूचना अगले कार्य दिवस के कारोबार की समाप्ति के पहले किसी इलेक्ट्रानिक माध्यम से खाता रखने वाली शाखा को दे। डीडीए प्रक्रिया के तहत, ऐसी सूचना कम से कम पखवाड़े के आधार पर लगातार प्राप्त की जाए।

(एच) कोलैटेरल कवर: विनिमय गृह, अदाकर्ता प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक के पास कम से कम 50,000 अमरीकी डालर की जमा राशि रखें। इस व्यवस्था के तहत परिचालन के आधार पर बैंक के पास रखी गई जमाराशि की मात्रा की पर्याप्तता की समीक्षा प्रत्येक छ: माह पर की जानी चाहिए और यदि आवश्यक हो तो, विनिमय गृह जमाराशि की प्रमात्रा को बढ़ाए। प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक उचित दर पर इस राशि पर ब्याज दें।

(आई) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंकों को भारत में विदेशी मुद्रा ड्राफ्ट आहरण व्यवस्था और रुपया आहरण व्यवस्था की नॉन-डीडीए प्रक्रिया के तहत रखे जाने के लिए अपेक्षित जमा की राशि खाता रखने वाली शाखा के पास रखने की अनुमति है।

7. विविध प्रावधान

(ए) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक रुपया/विदेशी मुद्रा आहरण व्यवस्था के तहत कोई भी लेनदेन करते समय, रिज़र्व बैंक द्वारा जारी, यथालागू अपने ग्राहकों को जानिए(केवाइसी)/धन शोधन निवारण(एएमएल)/आतंकवाद के वित्तपोषण के प्रतिरोध (सीएफटी) संबंधी दिशा-निर्देशों का अनुपालन करें।

(बी) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक अपनी संगामी लेखापरीक्षा में रुपया/विदेशी मुद्रा आहरण व्यवस्था को शामिल करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विनिमय गृह के वास्ट्रो खाते में निधियां हिताधिकारियों को भुगतान करने के पहले जमा की जाती हैं।

(सी) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक रुपया/विदेशी मुद्रा आहरण व्यवस्था के माध्यम से प्राप्त विप्रेषणों के संबंध में ‘समुचित सावधानी’ बरतें, ताकि धन शोधन से संबंधित विनियमों का अनुपालन ईमानदारी से किया जा सके। प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक, विनिमय गृहों से एक वार्षिक अनुपालन रिपोर्ट मंगाएं जिसमें उनके लेखापरीक्षकों द्वारा विधिवत यह प्रमाणित किया गया हो कि वे (विनिमय गृह) अपने ग्राहकों को जानिए(केवाइसी)/धन शोधन निवारण (एएमएएल)/आतंकवाद के वित्तपोषण के प्रतिरोध (सीएफटी) से संबंधित उस देश के विनियमों का अनुपालन करते हैं।

(डी) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक इस संबंध में सतत चौकसी रखते हुए रुपया/विदेशी मुद्रा आहरण व्यवस्था के परिचालनों में असामान्य लक्षणों की सूचना रिज़र्व बैंक को देते रहें।

(ई) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि विनिमय गृहों के लाइसेंस, जिनकी अवधि समाप्त हो चुकी है, का नवीकरण किया जाता है और अधिप्रमाणित अंग्रेजी पाठ की प्रतियां उनके रिकार्ड के लिए उनके पास रखी जाती हैं।

(एफ) विनिमय गृह भारत में अपने बैक ऑफिस परिचालनों जैसे कि उनकी ओर से आहरण सूचना और भुगतान पर रोक के अनुदेश के लिए सेवा प्रदाता के साथ कोई करार न करें तथा प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक ऐसे सेवा प्रदाताओं के अनुदेशों पर कोई कार्य न करें। तथापि, रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन से विनिमय गृह भारत में संपर्क कार्यालय स्थापित कर सकता है तथा भारत में बैक आफिस परिचालन कर सकता है और भारत में संपर्क कार्यालय द्वारा ड्राफ्टों की प्रिंटिंग, आहरण सूचनाओं को जारी करना और भुगतान रोकने के अनुदेश जैसे परिचालन कर सकता है।

(जी) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक ऐसे विनिमय गृहों, जिनके नाम और संगठन में परिवर्तन होते रहते हैं, के खातों के रखरखाव के लिए रिज़र्व बैंक से अनुमोदन प्राप्त करना चाहिए।

8. खातों का आंतरिक नियंत्रण और निगरानी

(ए) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक वर्तमान अनुदेशों के अनुसार खातों के आंतरिक नियंत्रण और निगरानी प्रणाली को पर्याप्त संगत बनाए। विनिमय गृहों के साथ व्यवहार सभी समयों पर सख्ती से क्रेडिट के आधार पर ही किया जाए तथा खाता-धारकों को ओवरड्राफ्ट की सुविधा न दी जाए।

(बी) विनिमय गृहों के वास्ट्रो खाते का स्वत: निरीक्षण: प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंकों को चाहिए कि वे अनुभवी अधिकारियों के माध्यम से छमाही आधार पर विनिमय गृहों के वास्ट्रो खाते के निरीक्षण करें। प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक के सक्षम अधिकारी निरीक्षण रिपोर्ट का सावधानीपूर्वक अध्ययन करें ताकि तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई शुरू की जा सके। उसके संबंध में की गई टिप्पणियों को बोर्ड को प्रस्तुत किए जाने वाले खातों की वार्षिक समीक्षा में शामिल किया जाएगा।


परिशिष्ट

इस मास्टर निदेश में अनिवासी विनिमय गृहों के रुपया/ विदेशी मुद्रा वास्ट्रो खाता खोलने और उसे
बनाए रखने से संबंधित समेकित ए.पी.(डीआइआर सिरीज)परिपत्रों की सूची

क्रम सं. अधिसूचना/परिपत्र दिनांक
1. ए.पी.(डीआईआर सीरीज)परिपत्र सं.28
(ए.पी.(एफएल/आरएल सीरीज) परिपत्र सं.2
6 फरवरी 2008
2. ए.पी.(डीआईआर सीरीज)परिपत्र सं.11
(ए.पी.(एफएल/आरएल सीरीज) परिपत्र सं.01
22 अगस्त 2008
3. ए.पी.(डीआईआर सीरीज)परिपत्र सं.37
(ए.पी.(एफएल/आरएल सीरीज) परिपत्र सं.02
2 दिसंबर 2008
4. ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.16
(ए.पी.(एफएल/आरएल सीरीज) परिपत्र सं.3
27 नवंबर 2009
5. ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.09
(ए.पी.(एफएल/आरएल सीरीज) परिपत्र सं.01)
29 अगस्त 2011
6. ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.72 30 जनवरी 2012
7. ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.81 24 जनवरी 2013
8. ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.85 28 फरवरी 2013
9. ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.88 9 जनवरी 2014
10. ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 111 13 मार्च 2014
11. ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.120 10 अप्रैल 2014
12. ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.7 18 जुलाई 2014
13. ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 35 9 अक्तूबर 2014
14. ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 50 16 दिसंबर 2014
15. ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 102 21 मई 2015
16. ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 66 28 अप्रैल 2016
17. ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 9 20 अक्तूबर 2016

1 28 अप्रैल 2016 के ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.66 के जरिए अंतर्निहित।

2 20 अक्तूबर 2016 के ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.09 के जरिए हटाया गया ।

3 28 अप्रैल 2016 के ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.66 के जरिए प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन के पहले इस प्रकार पढ़ा जाता था: “विनिमय गृह, भुगतान अनुदेश जारी करने के काफी समय पहले ही प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक के नास्ट्रो खाते के माध्यम से रुपया खाते का निधीयन करता है।प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक, आंकड़े और विनिमय गृह के वास्ट्रो खाते में जमाशेष की उपलब्ता के सत्यापन पर हिताधिकारी के पक्ष में ड्राफ्ट जारी करेगा अथवा हिताधिकारी के खाते में राशि जमा करेगा।“

4 28 अप्रैल 2016 के ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.66 के जरिए प्रतिस्थापित।प्रतिस्थापन के पहले इस प्रकार पढ़ा जाता था: “जहां वर्तमान रुपया आहरण व्यवस्था को शीघ्र विप्रेषण की सुविधा दी जाती है, वहां विनिमय गृह, रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन से एक अलग रुपया खाता खोलेगा और जब तक इस खाते में स्पष्ट निधियां जमा नहीं हो जाती हैं, तब तक कोई भी भुगतान अनुदेश निष्पादित नहीं किया जाएगा। तथापि, जहां डीडीए/नॉन-डीडीए प्रक्रिया के तहत वर्तमान रुपया आहरण व्यवस्था में परिचालन संतोषजनक है, प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक, सामान्य शर्तों के तहत और विनिमय गृहों से सभी आवश्यक दस्तावेज़ प्राप्त करने के बाद रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन के बिना उसी विनिमय गृह को शीघ्र विप्रेषण की सुविधा दे सकता है। तथापि, रिज़र्व बैंक को इस विषय में तत्काल सूचित किया जाना चाहिए।“

5 28 अप्रैल 2016 के ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.66 के जरिए प्रतिस्थापित।प्रतिस्थापन के पहले इस प्रकार पढ़ा जाता था: “शीघ्र विप्रेषण सुविधा के लिए कोलेटेरल कवर: विनिमय गृह, जिन्होंने परिचालन के तीन वर्ष पूरे नहीं किए हैं, वे किसी परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में नकदी जमा में कोलेटेरल कवर अथवा 7 दिनों के अनुमानित आहरण के समकक्ष अंतर्राष्टीय ख्यातिप्राप्त बैंक से गारंटी प्राप्त करें। विनिमय गृह, जिन्होंने सफल परिचालन के तीन वर्ष पूरे किए हैं, उनके लिए कोई कोलेटेरल कवर निर्धारित नहीं है। इसके अतिरिक्त, विनिमय गृह प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक के पास किसी परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में अतिरिक्त नकद जमा अथवा 1 दिन के अनुमानित आहरण के समकक्ष अंतर्राष्ट्रीय ख्याति-प्राप्त बैंक से गारंटी रखेगा। जमाराशि, उस पर बाजार सम्बद्ध दर ब्याज के साथ, प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक के नाम में हो और जमाराशि रखनेवाले विनिमय गृह को देय हो। जमा और गारंटी की राशि की समीक्षा और उचित निगरानी आवधिक आधार पर प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक द्वारा की जानी चाहिए।“


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