13 अप्रैल 2025
गैर-सरकारी गैर-वित्तीय निजी लिमिटेड कंपनियों का वित्त, 2024-25
आज, भारतीय रिज़र्व बैंक ने 2024-25 के दौरान गैर-सरकारी गैर-वित्तीय (एनजीएनएफ) निजी लिमिटेड कंपनियों के वित्तीय कार्य-निष्पादन से संबंधित आंकड़े (https://data.rbi.org.in/DBIE/#/dbie/reports/Statistics/Corporate%20Sector/Non-Government%20Non-Financial%20Private%20Limited%20Companies) जारी किए जो कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय, भारत सरकार, जो इन आंकड़ों का प्राथमिक स्रोत है, से प्राप्त 15,919 कंपनियों, जिनके द्वारा 2022-23 से 2024-25 तक तीन लेखांकन वर्षों के लिए भारतीय लेखा मानक (इंड-एएस) प्रारूप में रिपोर्ट किया गया, के लेखापरीक्षित वार्षिक खातों पर आधारित हैं।
मार्च 20251 में इन कंपनियों की कुल चुकता पूंजी (पीयूसी) ₹8,44,198 करोड़ थी, जो एनजीएनएफ प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों की कुल पीयूसी का 40.3 प्रतिशत थी।
मुख्य बातें
बिक्री
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एनजीएनएफ प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों की निवल बिक्री, पिछले वर्ष के 11.7 प्रतिशत की तुलना में, 2024-25 के दौरान 11.4 प्रतिशत बढ़ी (विवरण 1)।
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सेवा क्षेत्र ने 2024-25 के दौरान निवल बिक्री में 13.5 प्रतिशत की संवृद्धि दर्ज की, जो "व्यापार - थोक और खुदरा", "स्थावर संपदा" तथा "परिवहन और भंडारण सेवाओं" उप-क्षेत्रों के कारण हुई। विनिर्माण क्षेत्र में बिक्री की संवृद्धि, पिछले वर्ष के 9.4 प्रतिशत की तुलना में, वर्ष 2024-25 में मामूली रूप से घटकर 9.2 प्रतिशत रह गई (विवरण 7)।
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सकल अचल आस्तियों और कुल निवल आस्तियों दोनों की तुलना में निवल बिक्री का अनुपात 2024-25 के दौरान कम हुआ (विवरण 2)।
व्यय
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समग्र स्तर पर, विनिर्माण व्यय और कर्मचारियों के पारिश्रमिक के अनुरूप कुल परिचालन व्यय, पिछले वर्ष की तुलना में, 2024-25 के दौरान उच्च दर के साथ अपेक्षाकृत रूप से बढ़ गया (विवरण 1)।
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सेवा क्षेत्र में कर्मचारियों का पारिश्रमिक बढ़ा जबकि विनिर्माण क्षेत्र में यह कम हुआ (विवरण 7)
लाभ
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2024-25 के दौरान, पिछले वर्ष में हुई उच्च संवृद्धि के अनुक्रम में, परिचालन लाभ और कर के बाद लाभ में द्विअंकीय संवृद्धि जारी रही (विवरण 1)
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2024-25 के दौरान, सेवा क्षेत्र के अनुरूप, निवल लाभ मार्जिन और इक्विटी पर प्रतिलाभ (निवल मालियत की तुलना में कर के बाद लाभ) में वृद्धि हुई (विवरण 2 और 8)।
लीवरेज
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2024-25 के दौरान, समग्र स्तर पर एवं सभी मुख्य क्षेत्रों में, नमूना कंपनियों का लीवरेज (इक्विटी की तुलना में कर्ज का अनुपात के संदर्भ में) कम हुआ (विवरण 2 और 8)।
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ब्याज कवरेज अनुपात2 (आईसीआर) पिछले वर्ष के 3.0 से बढ़कर 2024-25 के दौरान 3.2 हो गया, जो कि वर्धित कर्ज-चुकौती क्षमता को दर्शाता है।
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उद्योग-वार, सेवा क्षेत्र के आईसीआर में वृद्धि हुई जबकि विनिर्माण क्षेत्र में यह मामूली रूप से कम हुआ था (विवरण 8)।
निधि के स्रोत एवं उपयोग
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2024-25 के दौरान, मुख्य रूप से चालू देयताओं के कारण कुल निधियों में बाह्य स्रोतों का हिस्सा, पिछले वर्ष के 52.3 प्रतिशत से बढ़कर, 53.6 प्रतिशत हो गया (विवरण 5ए)।
निवेश
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कुल निधि उपयोग में से सकल पूंजी निर्माण (जिसमें स्थायी आस्तियां तथा मालसूचियाँ शामिल हैं) का प्रतिशत 48.2 था, जो कि पिछले वर्ष के 45.3 प्रतिशत से अधिक था (विवरण 2)
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पिछले वर्ष की तुलना में 2024-25 के दौरान चालू आस्तियों में वर्तमान निवेश में वृद्धि हुई (विवरण 5बी)।
वक्तव्यों के स्पष्टीकरण नोट अनुलग्नक में दिए गए हैं।
अजीत प्रसाद
उप महाप्रबंधक (संचार)
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/80
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