वित्तीय समावेशन और विकास

यह कार्य वित्तीय समावेशन, वित्तीय शिक्षण को बढ़ावा देने और ग्रामीण तथा एमएसएमई क्षेत्र सहित अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों के लिए ऋण उपलब्ध कराने पर नवीकृत राष्ट्रीय ध्यानकेंद्रण का सार संक्षेप में प्रस्तुत करता है।

विहंगावलोकन

  • प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों के लिए ऋण प्रवाह: प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों के लिए ऋण प्रवाह को मजबूती प्रदान करने के लिए समष्टि नीति का निर्माण। यह सुनिश्चित करना कि समाज के वित्तीय रूप से वंचित वर्गों के बीच नए कारोबार अवसर सृजित करने के लिए बैंकों हेतु प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र उधार एक साधन बन गया है।
  • वित्तीय समावेशन और वित्तीय साक्षरता: प्रधान मंत्री जन धन योजना के विस्तार में सहायता देना जिससे इसे एक संधारणीय और बड़ी वित्तीय समावेशन पहल बनाया जा सके।
  • एमएसएमई क्षेत्र के लिए ऋण प्रवाह: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र के लिए ऋण प्रवाह को बढ़ाना और समय पर ऋण सहायता के माध्यम से रुग्ण इकाइयों का पुनर्वास।
  • संस्थाएं: उपर्युक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए राज्य स्तरीय बैंकर समितियों (एसएलबीसी), अग्रणी बैंक योजना आदि जैसी संस्थागत व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाना।

हमारा दृष्टिकोण

आगे


प्राथमिकता-प्राप्‍त क्षेत्र उधार संबंधी दिशानिर्देश को मूर्त रूप दिए जाने के बाद भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में बदलाव आया। इन दिशानिर्देशों को संवृद्धि और समावेशन एजेंडा के अनुरूप तैयार करना ज़रूरी है। अत: रिज़र्व बैंक ने प्राथमिकता-प्राप्‍त क्षेत्र उधार संबंधी मौजूदा दिशानिर्देशों पर विचार करने तथा राष्‍ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ-साथ देश के वित्‍तीय समावेशन के लक्ष्‍यों के अनुरूप इन दिशानिर्देशों में संशोधन के लिए सुझाव देने के उद्देश्‍य से एक आंतरिक कार्य समूह का गठन किया। इस उद्देश्‍य के अंतर्गत प्राथमिकता-प्राप्‍त क्षेत्र से संबंधित लक्ष्‍यों की कारगर ढंग से हासिल करने तथा प्राथिमकता-प्राप्‍त क्षेत्र से संबंधित लक्ष्‍यों को पूरी तरह हासिल नहीं करने के मामले में आवश्‍यक उपायों के संबंध में सुझाव देना शामिल है।

उक्‍त कार्य समूह ने ऐसे खंडों को दिए जाने वाले उधार को सरणीबद्ध करने पर ध्‍यान केंद्रित किया है जिनके संबंध में कोई निर्धारित लक्ष्‍य न होने के कारण क्राउड आउट की स्थिति पैदा हो जाती है। इनके अंतर्गत छोटे एवं सीमांत किसान, सूक्ष्‍म उद्यम एवं कमज़ोर वर्ग शामिल हैं। साथ ही इसके दायरे को बढ़ाकर राष्‍ट्रीय प्राथिमकता की दृष्टि से अल्‍प सेवा-प्राप्‍त कई वर्गों को शामिल किया गया है, जैसे- कृषि की बुनियादी संरचना, सामाजिक बुनियादी संरचना, नवीकरणीय ऊर्जा, निर्यात और मध्‍यम आकार के उद्यम।

इस रिपोर्ट पर फिलहाल रिज़र्व बैंक सोच विचार कर रहा है।

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