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विनिर्दिष्ट गैर-वित्तीय आस्तियों (एसएनएफ़ए) पर विवेकपूर्ण मानदंड संबंधी निदेश

5 मई 2026

विनिर्दिष्ट गैर-वित्तीय आस्तियों (एसएनएफ़ए) पर विवेकपूर्ण मानदंड संबंधी निदेश

समान्यतः विनियमित संस्थाएं (आरई) अपने सामान्य ऋण परिचालन के बदले गैर-वित्तीय आस्तियों के अधिग्रहण की अपेक्षा नहीं करती हैं। हालांकि, अपवाद स्थितियों में, जहां एक्सपोजर अनर्जक हो जाते हैं और विधिक या संविदात्मक उपाय लागू किए जाते हैं, ऐसी स्थिति में आरई, वसूली कार्यनीति के अंतर्गत, संपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में प्रदान की गई अचल संपत्ति का स्वामित्व प्राप्त कर सकती हैं। ऐसी संपत्ति का, स्वतंत्र ('आर्म्स-लेंथ') आधार पर, नियंत्रित और समय पर निपटान करने से आरई अधिकाधिक निवल वसूली कर सकती है, और साथ ही वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता और विवेक भी सुनिश्चित किया जा सकता है।

2. ऐसी आस्तियों (जिन्हें इसके बाद ‘विनिर्दिष्ट गैर-वित्तीय आस्तियां’ (एसएनएफ़ए) कहा जाएगा) के विवेकपूर्ण उपचार पर स्पष्टता प्रदान करने के लिए, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने आज जन सामान्य से टिप्पणियों के लिए ‘विनिर्दिष्ट गैर-वित्तीय आस्तियों पर विवेकपूर्ण मानदंड संबंधी निदेश’ का मसौदा जारी किया है।

3. निदेशों के मसौदे में निम्नलिखित मुख्य विशेषताओं को शामिल किया गया है:

  1. केवल वही एक्सपोज़र, जिन्हें अनर्जक के रूप में वर्गीकृत किया गया है और जिनके संबंध में वसूली के अन्य विकल्पों का पता लगाया गया है, लेकिन उन्हें अव्यावहारिक पाया गया है, इन निदेशों के तहत निपटान किए जाने के लिए पात्र होंगे।

  2. आरई, उधारकर्ता के विरुद्ध अपने दावों के पूर्ण या आंशिक निपटारे के बदले एसएनएफ़ए प्राप्त कर सकते हैं।

  3. दावों के आंशिक रूप से निपटान किए जाने संबंधी मामलों में, शेष एक्सपोज़र को पुनर्गठित माना जाएगा और वह लागू विवेकपूर्ण आवश्यकताओं के अधीन होगा।

  4. एसएनएफ़ए को, निपटाए जा चुके एक्सपोज़र के निवल बही मूल्य (एनबीवी) या एसएनएफ़ए के विपत्तिकालीन बिक्री मूल्य, इन दोनों में से जो भी कम हो, उस पर रिकॉर्ड किया जाएगा और रखा जाएगा।

  5. यदि आरई की बही में यह एक्सपोज़र जारी होता तो, प्रत्येक अगली रिपोर्टिंग तारीख पर, एसएनएफ़ए को पिछली उपलब्ध विपत्तिकालीन बिक्री मूल्य या संशोधित एनबीवी, जो भी कम हो, पर रखा जाएगा; जोकि कल्पित प्रावधानों का निवल मूल्य होगा।

  6. ऐसे एसएनएफ़ए का समय पर निपटान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, अधिकतम सात वर्ष की धारण अवधि निर्धारित की गई है।

  7. नैतिक जोखिम को कम करने के लिए, आरई को एसएनएफ़ए को, वापस उधारकर्ता को, या उधारकर्ता के किसी भी संबंधित पक्ष को बेचने से प्रतिबंधित किया जाएगा।

  8. आरई को अपने तुलन-पत्र में अपने पास रखे एसएनएफ़ए के स्टॉक का प्रकटन करना आवश्यक होगा।

4. दिशानिर्देशों के मसौदे पर जन सामान्य / हितधारकों से 26 मई 2026 तक टिप्पणियाँ आमंत्रित की जाती हैं। टिप्पणियाँ / प्रतिक्रिया रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध ‘कनेक्ट2रेगुलेट’ खंड के अंतर्गत दिए गए लिंक के माध्यम से प्रस्तुत किए जा सकते हैं। वैकल्पिक रूप से, टिप्पणियाँ मुख्य महाप्रबंधक, ऋण जोखिम समूह, विनियमन विभाग, केंद्रीय कार्यालय, भारतीय रिज़र्व बैंक, 12वीं / 13वीं मंज़िल, शहीद भगत सिंह मार्ग, फ़ोर्ट, मुंबई – 400 001 को या ईमेल द्वारा भेजी जा सकती हैं।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/208


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