22 अप्रैल 2026
विदेशी प्रत्यक्ष निवेश कंपनियों का वित्त, 2024-25
आज, भारतीय रिज़र्व बैंक ने 3,100 कंपनियों, जिन्होंने 2022-23 से 2024-25 तक तीन लेखा वर्षों के लिए भारतीय लेखा मानक (इंड-एएस) प्रारूप में रिपोर्ट किया, के लेखापरीक्षित वार्षिक लेखा के आधार पर वर्ष 2024-25 के दौरान भारत में गैर-सरकारी गैर-वित्तीय (एनजीएनएफ) विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) कंपनियों के वित्तीय कार्यनिष्पादन से संबंधित आंकड़े1 (https://data.rbi.org.in/#/dbie/reports/Statistics/Corporate%20Sector/Finances%20of%20FDI%20Companies) जारी किए। उनका आर्थिक क्षेत्र वर्गीकरण, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के एमजीटी-7 फॉर्म में रिपोर्ट की गई प्रमुख कारोबारी गतिविधि पर आधारित है, जो इन आंकड़ों का प्राथमिक स्रोत है।
इन कंपनियों की चुकता पूंजी (पीयूसी) ₹5,96,425 करोड़ थी, जो भारतीय प्रत्यक्ष निवेश कंपनियों की विदेशी देयताओं और आस्तियों संबंधी भारतीय रिज़र्व बैंक की वार्षिक गणना के 2024-25 दौर में रिपोर्ट की गई एफडीआई कंपनियों के कुल पीयूसी का 51.9 प्रतिशत था।
मुख्य बातें
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लगभग आधी नमूना कंपनियों को सिंगापुर, मॉरीशस और अमेरिका से प्रत्यक्ष निवेश प्राप्त हुआ, जबकि जापान, नीदरलैंड और यूनाइटेड किंगडम अन्य प्रमुख देश थे जिन्होंने भारत में प्रत्यक्ष निवेश किया। नमूना कंपनियों का एक बड़ा हिस्सा विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों से संबंधित था, सेवा क्षेत्र के भीतर आने वाली लगभग एक तिहाई कंपनियां सूचना और संचार उद्योग से संबंधित थीं (विवरण 1)।
बिक्री
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चुनिंदा एफडीआई कंपनियों की निवल बिक्री में वृद्धि पिछले वर्ष में देखी गई 9.4 प्रतिशत की वृद्धि वर्ष 2024-25 के दौरान 8.7 प्रतिशत तक कम हो गई (विवरण 2)।
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उद्योगवार, सेवा क्षेत्र की निवल बिक्री वृद्धि पिछले वर्ष के 12.2 प्रतिशत से मामूली रूप से बढ़कर 12.7 प्रतिशत हो गई जबकि विनिर्माण क्षेत्र में यह पिछले वर्ष के 6.8 प्रतिशत से घटकर 5.1 प्रतिशत हो गई (विवरण 8)।
व्यय
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विनिर्माण व्यय और कर्मचारियों के पारिश्रमिक में वृद्धि के साथ, परिचालन व्यय पिछले वर्ष के 7.7 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2024-25 के दौरान 9.1 प्रतिशत हो गया (विवरण 2)।
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वर्ष 2024-25 के दौरान सेवा क्षेत्र में कर्मचारियों के पारिश्रमिक में वृद्धि हुई जबकि विनिर्माण क्षेत्र में उक्त पारिश्रमिक में कमी आई।
लाभ
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बिक्री में कम वृद्धि और व्यय में वृद्धि के बावजूद, परिचालन लाभ पिछले वर्ष के 22.1 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2024-25 के दौरान 10.7 प्रतिशत हो गया (विवरण 2)।
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निजी लिमिटेड एफडीआई कंपनियों ने सार्वजनिक लिमिटेड एफडीआई कंपनियों की तुलना में उच्च लाभ वृद्धि दर्ज की (विवरण 10)।
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वर्ष 2024-25 के दौरान, उच्चतर गैर-परिचालन आय और कम ब्याज व्यय के कारण कर पश्चात लाभ में 22.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई; उद्योग-वार, सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने विनिर्माण क्षेत्र (12.6 प्रतिशत) की तुलना में कर पश्चात लाभ में अधिक वृद्धि (29.2 प्रतिशत) दर्ज की (विवरण 2 और 8)।
लीवरेज
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नमूना एफडीआई कंपनियों का लीवरेज (इक्विटी की तुलना में ऋण अनुपात के संदर्भ में मापा जाता है) वर्ष 2024-25 के दौरान 25.0 प्रतिशत रहा; प्रमुख क्षेत्रों में; वर्ष 2024-25 के दौरान विनिर्माण क्षेत्र का लीवरेज कम होकर 16.3 प्रतिशत हो गया, जबकि सेवा क्षेत्र के लिए यह बढ़कर 23.6 प्रतिशत हो गया (विवरण 3 और 11)।
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ब्याज व्याप्ति अनुपात (आईसीआर)2, ऋण चुकौती क्षमता का मापक, में सुधार जारी रहा और यह 2024-25 के दौरान 5.8 रहा; विनिर्माण और सेवा कंपनियों का आईसीआर वर्ष 2024-25 के दौरान क्रमशः 6.9 और 6.6 रहा (विवरण 3 और 11)।
निधि के स्रोत एवं उपयोग
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बैंकों द्वारा दिए जाने वाले मीयादी ऋणों में कमी के परिणामस्वरूप, वर्ष 2024-25 के दौरान निधियों के बाह्य स्रोतों की हिस्सेदारी पिछले वर्ष के 45.5 प्रतिशत से घटकर 42.6 प्रतिशत हो गई (विवरण 6ए)।
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कुल निधि स्रोतों के उपयोग की तुलना में सकल पूंजी निर्माण का अनुपात, पिछले वर्ष के 41.9 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2024-25 के दौरान बढ़कर 45.3 प्रतिशत हो गया (विवरण 3)।
विवरणों के व्याख्यात्मक नोट अनुलग्नक में दिए गए हैं।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/123
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