617 भारतीय रिज़र्व बैंक - प्रेस प्रकाशनी

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

प्रेस प्रकाशनी

(549 kb )
मौद्रिक नीति समिति की 4 से 6 फरवरी 2026 के दौरान हुई बैठक का कार्यवृत्त

20 फरवरी 2026

मौद्रिक नीति समिति की 4 से 6 फरवरी 2026 के दौरान हुई बैठक का कार्यवृत्त
[भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45ज़ेडएल के अंतर्गत]

भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45ज़ेडबी के अंतर्गत गठित मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की उनसठवीं बैठक 4 से 6 फरवरी 2026 के दौरान आयोजित की गई थी।

2. बैठक की अध्यक्षता श्री संजय मल्होत्रा, गवर्नर ने की तथा सभी सदस्य – डॉ. नागेश कुमार, निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक, इंस्टिट्यूट फॉर स्टडीज इन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, नई दिल्ली; श्री सौगत भट्टाचार्य, अर्थशास्त्री, मुंबई; प्रोफेसर राम सिंह, निदेशक, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, दिल्ली; डॉ. पूनम गुप्ता, मौद्रिक नीति की प्रभारी उप गवर्नर और श्री इन्द्रनील भट्टाचार्य, कार्यपालक निदेशक (भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45ज़ेडबी(2)(सी) के अंतर्गत केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित रिज़र्व बैंक के अधिकारी) इसमें उपस्थित रहें।

3. भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45ज़ेडएल के अनुसार, रिज़र्व बैंक मौद्रिक नीति समिति की प्रत्येक बैठक के चौदहवें दिन इस बैठक की कार्यवाहियों का कार्यवृत्त प्रकाशित करेगा, जिसमें निम्नलिखित शामिल होगा:

ए) मौद्रिक नीति समिति की बैठक में अपनाया गया संकल्प;

बी) मौद्रिक नीति समिति के प्रत्येक सदस्य का वोट, जो उक्त बैठक में अपनाए गए संकल्प पर उस सदस्य द्वारा दिया जाएगा; और

सी) उक्त बैठक में अपनाए गए संकल्प पर धारा 45ज़ेडआई की उप-धारा (11) के अंतर्गत मौद्रिक नीति समिति के प्रत्येक सदस्य का वक्तव्य।

4. एमपीसी ने संभावनाओं के विभिन्न जोखिमों के इर्द-गिर्द स्टाफ के समष्टि आर्थिक अनुमानों और वैकल्पिक परिदृश्यों की विस्तृत रूप से समीक्षा की। एमपीसी ने भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा उपभोक्ता विश्वास, परिवारों की मुद्रास्फीति प्रत्याशा, कॉर्पोरेट क्षेत्र के कार्यनिष्पादन, ऋण की स्थिति, औद्योगिक, सेवाओं और अवसंरचना क्षेत्रों की संभावनाएं और पेशेवर पूर्वानुमानकर्ताओं के अनुमानों का आकलन करने के लिए किए गए सर्वेक्षणों की समीक्षा की। उक्त के मद्देनज़र और मौद्रिक नीति के रुख पर व्यापक चर्चा करने के बाद एमपीसी ने संकल्प अपनाया जिसे नीचे प्रस्तुत किया गया है।

संकल्प

5. मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की 59वीं बैठक 4 से 6 फरवरी 2026 तक श्री संजय मल्होत्रा, गवर्नर, भारतीय रिज़र्व बैंक ​​की अध्यक्षता में आयोजित की गई। एमपीसी के सदस्य डॉ. नागेश कुमार, श्री सौगत भट्टाचार्य, प्रो. राम सिंह, डॉ. पूनम गुप्ता और श्री इन्द्रनील भट्टाचार्य बैठक में शामिल हुए।

6. उभरते समष्टि आर्थिक और वित्तीय घटनाक्रमों तथा संभावना का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद, एमपीसी ने सर्वसम्मति से चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के अंतर्गत नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। परिणामस्वरूप, स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ) दर 5.00 प्रतिशत, तथा सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर और बैंक दर 5.50 प्रतिशत पर बनी रहेगी। एमपीसी ने तटस्थ रुख बनाए रखने का भी निर्णय लिया।

संवृद्धि और मुद्रास्फीति की संभावना

7. वैश्विक अर्थव्यवस्था ने 2025 में व्यापार की फ्रंट लोडिंग, प्रत्याशित प्रभाव से थोड़ा नरम टैरिफ, व्यापक राजकोषीय प्रोत्साहन और निभावकारी मौद्रिक नीति की सहायता और समर्थन के साथ उल्लेखनीय आघात-सहनीयता दिखाई। मुद्रास्फीति धीरे-धीरे गिरावट के रास्ते पर है, हालांकि यह कई उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। मजबूत आर्थिक आंकड़ों के आधार पर दरों में कटौती की उम्मीद कम होने के बीच अमेरिकी प्रतिफल में तेजी आ रही है। तकनीकी शेयरों में निरंतर निवेश से समर्थित इक्विटी में तेजी आई है, जबकि राजकोषीय तनाव, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और मौद्रिक नीति विचलन से वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी है।

8. घरेलू स्थिति के संबंध में, प्रथम अग्रिम अनुमानों के अनुसार वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2025-26 में 7.4 प्रतिशत (वाई-ओ-वाई) तक बढ़ने का अनुमान है। निजी उपभोग और निश्चित निवेश ने समग्र संवृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि, शुद्ध बाह्य मांग, एक रुकावट बनी रही, क्योंकि आयात, निर्यात से अधिक थे। आपूर्ति पक्ष के संबंध में 7.3 प्रतिशत की वास्तविक जीवीए संवृद्धि, तेजी से बढ़ता सेवा क्षेत्र, आघात-सह कृषि क्षेत्र और विनिर्माण गतिविधि में पुनरुद्धार से प्रेरित है।

9. आगे की ओर देखते हुए, सेवा क्षेत्र में निरंतर उछाल, जीएसटी युक्तिकरण, स्वस्थ रबी संभावनाओं, मौद्रिक सहजता और मुद्रास्फीति के अनुकूल माहौल को निजी खपत का समर्थन करना चाहिए। उच्च क्षमता उपयोग, अनुकूल वित्तीय स्थितियों, वित्तीय संस्थानों और कंपनियों के स्वस्थ तुलन-पत्र, मजबूत ऋण संवृद्धि और पूंजीगत व्यय पर सरकार के निरंतर जोर से समर्थित निवेश गतिविधि, अपनी गति बनाए रखने की उम्मीद है। इसके अलावा, मजबूत घरेलू मांग से निजी क्षेत्र द्वारा नए निवेश आकर्षित होने की संभावना है। जब कि सेवा निर्यात मजबूत रहने की उम्मीद है, अमेरिका के साथ संभावित व्यापार सौदे से वाणिज्यिक निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। न्यूजीलैंड और ओमान के साथ व्यापार सौदों के साथ यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक व्यापक व्यापार लेन-देन से निर्यात में विविधता लाने और बाहरी क्षेत्र को मजबूत करने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर भू-राजनीतिक तनाव, अनिश्चित वैश्विक व्यापार माहौल, वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय पण्य की कीमतों के कारण संभावना के लिए नकारात्मक जोखिम बने हुए हैं। इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, 2026-27 की पहली तिमाही और दूसरी तिमाही के लिए वास्तविक जीडीपी संवृद्धि पूर्वानुमान क्रमशः 6.9 प्रतिशत और 7.0 प्रतिशत (चार्ट 1)1 तक संशोधित किए गए हैं। जोखिम समान रूप से संतुलित हैं।

10. हेडलाइन सीपीआई मुद्रास्फीति नवंबर में 0.7 प्रतिशत और दिसंबर 2025 में 1.3 प्रतिशत रही। जबकि खाद्य समूह अपस्फीति में रहा, ईंधन समूह के भीतर मुद्रास्फीति नवंबर और दिसंबर में मामूली रही। मूल मुद्रास्फीति (खाद्य और ईंधन को छोड़कर सीपीआई) भी कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी के बावजूद सौम्य बनी रही। स्वर्ण को छोड़कर मूल मुद्रास्फीति दिसंबर में 2.6 प्रतिशत पर स्थिर रही।

11. निकट भविष्य की संभावना से पता चलता है कि स्वस्थ खरीफ उत्पादन, खाद्यान्न के पर्याप्त बफर स्टॉक और रबी की अनुकूल बुवाई के कारण खाद्य आपूर्ति की संभावनाएं उज्ज्वल बनी हुई हैं। कीमती धातुओं की कीमतों से उत्पन्न संभावित उतार-चढ़ाव को छोड़कर मूल मुद्रास्फीति के दायरे में आने की उम्मीद है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के साथ-साथ ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रतिकूल मौसम की घटनाओं के साथ मुद्रास्फीति के लिए अन्य संभावित जोखिम भी हैं। हेडलाइन मुद्रास्फीति प्रक्षेपपथ के संदर्भ में, 2024-25 की चौथी तिमाही में देखे गए मूल्यों में बड़ी गिरावट से उत्पन्न अनुकूल नहीं होने वाले आधार प्रभाव, 2025-26 की चौथी तिमाही में वर्ष-दस-वर्ष आधार पर मुद्रास्फीति में वृद्धि का कारण बनेंगे, भले ही अपेक्षित गति नियंत्रित रहे। इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, 2025-26 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति 2.1 प्रतिशत होने का अनुमान है, जबकि चौथी तिमाही में यह 3.2 प्रतिशत है। 2026-27 की पहली तिमाही और दूसरी तिमाही के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति क्रमशः 4.0 प्रतिशत और 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है (चार्ट 2)। कीमती धातुओं को छोड़कर अंतर्निहित मुद्रास्फीति का दबाव अभी भी कम बना हुआ है। जोखिम समान रूप से संतुलित हैं।

Chart 1 & Chart 2

मौद्रिक नीति संबंधी निर्णयों का औचित्य

12. एमपीसी ने कहा कि पिछली नीतिगत बैठक के बाद से बाहरी चुनौतियां तेज हो गई हैं, हालांकि व्यापार सौदों का सफल समापन आर्थिक संभावना के लिए अच्छा है। कुल मिलाकर, निकट अवधि की घरेलू मुद्रास्फीति और संवृद्धि संभावना सकारात्मक बनेबनी हुई है।

13. हेडलाइन मुद्रास्फीति, नवंबर-दिसंबर के दौरान मुद्रास्फीति लक्ष्य की सहिष्णुता सीमा से नीचे बनी रही। 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही में सीपीआई मुद्रास्फीति के लिए संभावना लगातार सौम्य और मुद्रास्फीति लक्ष्य के करीब है। मुद्रास्फीति संभावना में मामूली संशोधन, मुख्य रूप से बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण हुई है, जो लगभग 60-70 आधार अंकों का योगदान करते हैं। अंतर्निहित मुद्रास्फीति अभी भी कम बनी हुई है।

14. संवृद्धि के संबंध में, आर्थिक गतिविधियां आघात-सह बनी हुई हैं। प्रथम अग्रिम अनुमान, चुनौतीपूर्ण बाह्य वातावरण के बीच घरेलू कारकों द्वारा संचालित सतत संवृद्धि गति का सुझाव देते हैं। संवृद्धि की संभावना अनुकूल बनी हुई है।

15. घरेलू समष्टि आर्थिक स्थितियों तथा संभावना की व्यापक समीक्षा के आधार पर एमपीसी का विचार है कि वर्तमान नीतिगत दर उचित है। तदनुसार, एमपीसी ने मौजूदा नीतिगत दर को जारी रखने के लिए वोट किया। एमपीसी तटस्थ रुख को बनाए रखने के लिए भी सहमत हुई। हालांकि, प्रो. राम सिंह ने अपने विचार को बनाए रखा कि रुख को तटस्थ से निभावकारी में बदल दिया जाए। आगे बढ़ते हुए, एमपीसी को मौद्रिक नीति के भविष्य के मार्ग को तैयार करने में उभरती समष्टि आर्थिक परिस्थितियों और नई श्रृंखला के आंकड़ों के आधार पर संभावना द्वारा निर्देशित किया जाएगा।

16. एमपीसी की बैठक के कार्यवृत्त 20 फरवरी 2026 को प्रकाशित किए जाएंगे।

17. एमपीसी की अगली बैठक 6 से 8 अप्रैल 2026 के दौरान निर्धारित है।

नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने के संकल्प पर वोटिंग

सदस्य वोट
डॉ. नागेश कुमार हां
श्री सौगत भट्टाचार्य हां
प्रो. राम सिंह हां
श्री इन्द्रनील भट्टाचार्य हां
डॉ पूनम गुप्ता हां
श्री संजय मल्होत्रा हां

डॉ. नागेश कुमार का वक्तव्य

18. दिसंबर 2025 एमपीसी की बैठक के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आर्थिक संभावना काफी उज्ज्वल हो गई है। 27 जनवरी को, काफी समय से लंबित ईयू-इंडिया एफटीए वार्ताओं के समापन और इसी क्रम में अमेरिकी-भारत व्यापार लेन-देन की घोषणा ने, 2025 अगस्त से अमेरिका द्वारा भारत के निर्यात पर 50% टैरिफ लगाने से प्रभावित हुए संवृद्धि के रुझानों को बढ़ाया है। वर्ष 2025-26 के पहले अग्रिम अनुमान, सतत संवृद्धि की ओर संकेत करते हैं। केंद्रीय बजट 2026-27 में किए गए प्रस्तावों ने इस गति को और बढ़ावा दिया है, जिनमें विनिर्माण क्षेत्र, पर्यटन, सेवाएँ, डेटा केंद्रों संबंधी नई नीति को प्रोत्साहन और अवसंरचना पर उच्चस्तरीय पूंजीगत खर्च को बनाए रखना शामिल है। साथ ही, इन गतिविधियों ने भारत के आर्थिक परिदृश्य को उल्लेखनीय ढंग से बेहतर बनाया है।

19. विनिर्माण कार्यनिष्पादन में सुधार और वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में आईआईपी विनिर्माण में तेज संवृद्धि, एक सुदृढ़ अवसंरचना पाइपलाइन और बढ़ी हुई शहरी मांग के साथ ग्रामीण क्षेत्र में सतत रूप से हुई भारी खपत के कारण हाल की उपर्युक्त गतिविधियों के पूर्व ही आर्थिक परिदृश्य बेहतर होने लगा था। उक्त सुधार तब हुए जब उच्च अमरीकी टैरिफ ने भारत के छूट-रहित वस्तुओं, विशेष रूप से श्रम-गहन वस्तुओं के निर्यात को प्रभावित कर दिया था। तथापि, हम अपने निर्यात को वैकल्पिक बाजारों की ओर मोड़ने में सफल रहे। फलतः निर्यात आय की हानि कम हो गई। पिछली एमपीसी बैठक में उच्च टैरिफ के कारण अमेरिका में निर्यात संभावनाओं, विशेष रूप से कपड़ा एवं परिधान, चमड़े का सामान, रत्न एवं आभूषण तथा अन्य खाद्य उत्पादों में से श्रिम्प जैसी श्रम-गहन वस्तुओं के संभावित ह्रास के निहितार्थ पर अपनी चिंताएँ प्रकट करने के बाद, मैं हमारे निर्यातकों की इस क्षमता से बहुत प्रभावित हुआ हूं कि वे सरकारी सहायता से अन्य बाजारों में वैकल्पिक निर्यात करने में सफल रहे। निर्यात बाजारों का यह विविधीकरण अब समाप्त नहीं होना चाहिए क्योंकि व्यापार लेन-देन के साथ हमने अमेरिकी बाजार में पुनः अपनी पहुंच बना ली है।

20. नये व्यापार लेन-देन का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव यह है कि भारत, चीन + 1 आपूर्ति श्रृंखला पुनर्रचना के लिए सर्वाधिक आशाजनक गंतव्य के रूप से चर्चा में वापस आ रहा है, जिसके प्रमुख कारण उनके बड़े और तेजी से बढ़ते घरेलू बाजार, प्रचुर कौशल, एक मजबूत और स्थिर आर्थिक ढांचा, अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स में तेजी से सुधार, वास्तविक रूप से संपूर्ण यूरोपीय बाजार (ईएफटीए, यूके और ईयू लेन-देन को ध्यान में रखते हुए) और अन्य बाजारों में से ऑस्ट्रेलिया, यूएई, जापान, कोरिया में शून्य शुल्क अभिगम और 18% के टैरिफ पर अमेरिकी बाजार में पहुंच, जो अपने समकक्षों की तुलना में, यदि बेहतर नहीं तो, अधिक उपयुक्त है। यह एफडीआई अंतर्वाहों और विनिर्माण की संभवाना को बेहतर बनाता है।

21. दिसंबर 2025 में हेडलाइन सीपीआई के 1.3% पर कम रहने के साथ मुद्रास्फीति की संभावना अनुकूल बनी हुई है और मुद्रास्फीति संभावना के अत्यधिक तेजी से बढ़ने की उम्मीद नहीं है। भारत के लिए वेनेज़ुएला से तेल की आपूर्ति शुरू होने और ईरान लेन-देन की संभावनाओं के बढ़ने के साथ तेल-कीमतों के नियंत्रण में रहने की संभावना है। इन रुझानों का परिणाम, अर्थात् एक सतत रूप से अनुकूल मुद्रास्फीति की प्रवृत्ति के बीच बढ़ती हुई आर्थिक संवृद्धि संभावना, भारत को लंबे समय तक 'गोल्डीलॉक्स' क्षेत्र में बने रहने का अवसर प्रदान करता है।

22. इससे मौद्रिक नीति चर्चा के परिप्रेक्ष्य में संभावित परिवर्तन का पता चलता है। हाल के दिनों में मौद्रिक नीति कार्रवाईयों का संबंध मुद्रास्फीति के दबावों को रोकने या आर्थिक सुधार में सहायता करने से था। अब, सतत अनुकूल मुद्रास्फीति संभवाना के कारण कुछ नीतिगत स्थान खुल रहे हैं और संवृद्धि दरों को देखते हुए मौद्रिक नीति 7% से लगभग 8% तक आर्थिक संवृद्धि दरों में तेजी को समर्थन देने पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकती है, जो कि विकसित भारत विज़न के अनुरूप राजकोषीय नीति के पूरक हैं।

23. तथापि, इस समय, सीपीआई तथा संवृद्धि दरों पर नए डेटा श्रृंखला के आगमन तथा दिसंबर के नीतिगत ब्याज दर कटौती के प्रसार के जारी रहने के कारण, स्थिति को अपरिवर्तित रखना एक सतर्क कदम है। अतः, मैं रेपो दर तथा रुख दोनों पर स्थिति को अपरिवर्तित रखने के पक्ष में वोट करता हूँ।

श्री सौगत भट्टाचार्य का वक्तव्य

24. फरवरी 2026 की नीति समीक्षा के बाद आरबीआई गवर्नर के वक्तव्य में वर्तमान घरेलू एवं वैश्विक समष्टि आर्थिक स्थिति और संभावना का व्यापक एवं विस्तृत विवरण एवं विश्लेषण उपलब्ध है। यहां इसकी पुनरावृत्ति की आवश्यकता नहीं है। निम्नलिखित केवल कुछ विशिष्ट प्रवृत्तियों पर संक्षेप में बल देता है।

25. समग्र रूप से, उच्च आवृत्ति संकेतक आर्थिक गतिविधि में आघात सहनीयता का संकेत देते हैं। गैर-खुदरा क्षेत्रों को बैंक ऋण धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं, जो एक स्थिर विनिर्माण क्षमता उपयोग और वित्तीय प्रोत्साहन से उत्पन्न उपभोग मांग में वृद्धि के संकेतों के साथ, निजी क्षेत्र के पूंजी व्यय में धीरे-धीरे पुनरुत्थान का सूचक हो सकती है।

26. इसी समय, संकल्प में वित्त वर्ष 2027 की पहली अर्धवार्षिक अवधि में सीपीआई मुद्रास्फीति के लक्ष्य स्तर तक पहुँचने का अनुमान लगाया गया है। मेरे आकलन के अनुसार, न केवल उच्च मुद्रास्फीति, बल्कि अतिरिक्त मुद्रास्फीतिकारी दबावों के जमा होने के जोखिम भी बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद, अच्छी खबर यह है कि घरेलू मुद्रास्फीति की प्रत्याशाएं स्थिर बनी हुई हैं।

27. नए आधार वर्षों की आर्थिक संरचनाओं से प्राप्त नए जीडीपी, सीपीआई मुद्रास्फीति और आईआईपी श्रृंखलाएं अभी लंबित हैं। इनमें सुधारित पद्धतियों, वर्गीकरणों और डेटा स्रोतों को शामिल किया गया है, जो आर्थिक गतिविधि और मूल्य निर्माण को बेहतर ढंग से पकड़ने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। ये डेटा श्रृंखलाएं संवृद्धि-मुद्रास्फीति संतुलन पर एक स्पष्ट दृष्टिकोण प्रदान करेंगी।

28. समष्टि-वित्तीय परिवेश का आकलन करते हुए, नए आर्थिक डेटा श्रृंखला के आगमन की प्रतीक्षा में, मैं सोचता हूँ कि नीतिगत दर उपयुक्त है। अतः, मैं रेपो दर को 5.25% पर बनाए रखने के पक्ष में वोट देता हूँ। साथ ही, विभिन्न भू-आर्थिक आयामों पर बनी हुई अनिश्चितता को ध्यान में रखते हुए, तटस्थ रुख जारी रखना विवेकपूर्ण होगा।

प्रो. राम सिंह का वक्तव्य

29. वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (एफ़एई) में 2025-26 के दौरान 7.4 प्रतिशत की संवृद्धि का अनुमान है, जिसमें निजी खपत और स्थिर निवेश का संवृद्धि में उल्लेखनीय योगदान है। आपूर्ति पक्ष पर, उच्चतर सेवा क्षेत्र, सुदृढ़ कृषि क्षेत्र और विनिर्माण गतिविधि में पुनरुद्धार से 7.3 प्रतिशत की वास्तविक जीवीए संवृद्धि होने की उम्मीद है। आगे चलकर, वित्तीय वर्ष 27 की पहली तिमाही और वित्तीय वर्ष 27 की दूसरी तिमाही के लिए वास्तविक जीडीपी संवृद्धि क्रमशः 6.9 प्रतिशत और 7.0 प्रतिशत होने का अनुमान है।

30. 7 प्रतिशत से अधिक के संवृद्धि दर के बावजूद अर्थव्यवस्था में तेज़ी के कोई संकेत नहीं हैं। 2025-26 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति 2.1 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 3.2 प्रतिशत होने की उम्मीद है। वित्तीय वर्ष 27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति क्रमशः 4.0 प्रतिशत और 4.2 प्रतिशत तक थोड़ा अधिक होने का अनुमान है। कीमती धातुओं की कीमतों में वृद्धि (60-70 बीपीएस) के प्रभाव को फिल्टर करते हुए अंतर्निहित मुद्रास्फीति दबाव मंद रहने की उम्मीद है।

31. आगे चलकर, बेहतर क्षमता उपयोग के साथ मिलकर मजबूत घरेलू मांग से निजी क्षेत्र के नए निवेश की उम्मीद है। अनुकूल वित्तीय स्थिति, बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और कोरपोरेट्स के स्वस्थ तुलन-पत्र, ऋण संवृद्धि में तेजी और केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय में वृद्धि, संभावना को सुदृढ़ता प्रदान करते हैं। तथापि, भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार वातावरण से संबंधित अनिश्चितता और वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता, संवृद्धि की संभावना के लिए अधोगामी जोखिम उत्पन्न कर रही है।

32. कुल मिलाकर, संवृद्धि की गति स्थिर है और रेपो दर में 125 बीपीएस कटौती का संचरण अभी भी जारी है। अतः वर्तमान नीतिगत दर इस समय उपयुक्त प्रतीत होती है। तदनुसार, मैं रेपो दर को 5.25 प्रतिशत रखने के लिए वोट करता हूं।

33. एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है: इस बिंदु पर, क्या संवृद्धि में सहायक मौद्रिक नीति से, मुद्रास्फीति बढ़ने का जोखिम होगा? आगे रेपो दर में कटौती की सीमा और समय का निर्धारण मुख्य रूप से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा। तथापि, मुद्रास्फीति और संवृद्धि के मोर्चों पर कुछ प्रवृत्तियां भविष्योन्मुखी मौद्रिक नीति के लिए उल्लेखनीय हैं।

34. मूल्य के स्तर पर हेडलाइन सीपीआई और सीपीआई-मूल मुद्रास्फीति संबंधी आंकड़ों की समीक्षा से पता चलता है कि हाल के वर्षों में दोनों में काफी भिन्नता आई है। हाल की तिमाहियों में यह हेडलाइन सीपीआई है जो सीपीआई-मूल मुद्रास्फीति के आसपास रह रहा है; बाद वाली मध्यम और सीमाबद्ध रही है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 4.0% और दूसरी तिमाही में 4.2% तक सीपीआई में अपेक्षित वृद्धि पूरी तरह से घरेलू मांग-आधारित कारकों से नहीं है; बल्कि मूल्यवान धातुओं के मूल्यों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा, सीपीआई मूल (स्वर्ण को छोड़कर) पिछली 8-9 तिमाहियों में 4 प्रतिशत से कम रहा है, यद्यपि अर्थव्यवस्था में पिछले 5 तिमाहियों में 7.4% से अधिक की औसत वृद्धि दर्ज होने की उम्मीद है।

35. ऐसा प्रतीत होता है कि अर्थव्यवस्था एक संरचनात्मक चरण में प्रवेश कर रही है जहां 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर और मध्यम मुद्रास्फीति एक साथ रह सकते हैं। यदि कुछ हो तो उत्पादन अंतर अभी भी नकारात्मक हो सकता है। जैसा कि मैंने पहले तर्क दिया है, 7.5% से अधिक की संवृद्धि दर मूल्य दबाव के बिना यथार्थवादी प्रतीत होती है। ऐसा प्रतीत होता है कि पिछले कुछ वर्षों में बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकीय उन्नयन से उत्पादकता और दक्षता लाभ के समर्थन से संभावित संवृद्धि दर में वृद्धि हुई है। आगे चलकर, एआई का प्रभाव संवृद्धि तथा मुद्रास्फीति के स्तर पर सहायक होने की उम्मीद है।

36. ये आंकड़े और गतिविधियां उचित समय पर दर में और कटौती के लिए अवसर का संकेत देते हैं। पूर्वानुमान यह भी सुझाव देता है कि सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 7% वृद्धि के साथ निकट अवधि में सीपीआई मूल (स्वर्ण को छोड़कर) सौम्य बना रहेगा। विश्व बैंक के सीपीएफ ने 2026 में कुछ कीमती धातुओं को छोड़कर पण्य-वस्तुओं की कीमतों के सौम्य रहने का अनुमान लगाया है। यदि हम सीपीआई मूल (स्वर्ण और चांदी को छोड़कर) को संदर्भ बिंदु के रूप में उपयोग करते हैं, और अर्थव्यवस्था के मूलभूत सिद्धांत - बीओपी, विदेशी मुद्रा, राजकोषीय घाटा, जीडीपी की तुलना में ऋण अनुपात, कार्पोरेट और बैंक तुलन-पत्र, मुद्रास्फीति और संवृद्धि गतिशीलता सुदृढ़ हैं, तो इसे देखते हुए संवृद्धि-सहायक रुख का मुद्दा बनता है।

37. वित्तीय वर्ष 25-26 के लिए केंद्र का राजकोषीय घाटा वर्ष 2021-22 में दिए गए जीडीपी लक्ष्य के 4.5% को पूरा करने की राह पर है, जिसमें वित्तीय वर्ष 26-27 के बजट में दिए गए अनुसार 2030-31 तक ऋण स्तर को घटाकर 50 प्रतिशत (+/- 1%) करने की स्पष्ट रूपरेखा दी गई है। वित्तीय वर्ष 26 के लिए सीएडी, जीडीपी के 1.1% पर बने रहने की उम्मीद है जिसे उच्चतर सेवा निर्यात और सुदृढ़ निजी विप्रेषण द्वारा समर्थन प्राप्त है। ईयू और यूएस के साथ व्यापार संबंधी हाल की घोषणा से व्यापार और पूंजी लेखा में सुधार होने की उम्मीद है, जिससे आईएनआर को समर्थन मिलेगा।

38. अंतर्निहित हेडलाइन सीपीआई की कम अस्थिरता और सीपीआई मूल (स्वर्ण और चांदी को छोड़कर) की निष्क्रियता को देखते हुए, इस समय वर्तमान में जारी सहजता चक्र को समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, आंतरिक मूल्य स्थिरता, मजबूत आर्थिक मूलभूत तत्त्वों और व्यापार तथा निवेश के मोर्चों पर गतिविधियों के अभिसरण ने मौद्रिक नीति के लिए एक दुर्लभ विंडो तैयार की है, जिसमें "तटस्थ" रहना वर्तमान के लिए उपयुक्त नहीं है जो अर्थव्यवस्था के लिए एक सक्रिय संकेत की मांग करता है।

39. दर में आगे और कटौती की सटीक मात्रा और समय प्राप्त आंकड़ों पर निर्भर करेगा, लेकिन संवृद्धि-समर्थित रुख, स्थिर मुद्रास्फीति की संभावना के साथ बहुत सुसंगत है। इसके अलावा, स्थिर मुद्रास्फीति और राजकोषीय परिदृश्य को देखते हुए, रुख को "निभावकारी" में बदलने से बाजार दरों पर अधोगामी दबाव, सोवरेन और कॉर्पोरेट बांडों के लिए प्रतिफल और दोनों के बीच दर स्प्रेड को कम करके दर में कटौती के प्रसारण की सुविधा होगी।

40. इसलिए, मैं नीतिगत दर में यथास्थिति के लिए वोट करता हूं और मैं "निभावकारी" रुख के पक्ष में हूं।

श्री इंद्रनील भट्टाचार्य का वक्तव्य

41. ट्रांसएटलांटिक सहयोगियों के बीच तेजी से बढ़ते टैरिफ-संघर्ष के दौरान भू-राजनीतिक संघर्ष के बढ़ने के बावजूद वर्ष 2026 के वैश्विक संवृद्धि पूर्वानुमान बढ़ गए हैं। साथ ही, भारत में आर्थिक गतिविधि मजबूत बनी रही जहां विभिन्न उच्चावृति संकेतकों में वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में सतत आघात-सह अर्थव्यवस्था लक्षित हुई। तदनुसार, बाह्य विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उपभोग और निवेश द्वारा संचालित वर्ष 2025-26 की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद संवृद्धि, 7.4% की मजबूत स्थिति पर बने रहने का अनुमान है। यद्यपि घरेलू मांग में तेजी जारी है, हाल ही में प्रमुख व्यापारिक भागीदारों के साथ संपन्न व्यापार संबंधी लेनदेनों ने आगामी वर्ष की बाह्य संभावना में काफी सुधार किया है। व्यापार निर्यात को बढ़ावा देने और चालू खाता को मज़बूत करने के अलावा ये लेन-देन, भारत के श्रम-गहन क्षेत्रों का समर्थन करेंगे और साथ ही उच्च निवेश को आकर्षित करेंगे। हालांकि विभिन्न व्यापार लेन-देन की विषयवस्तु को अभी पूरी तरह से समझा जाना शेष है, फिर भी हमारा प्राथमिक आकलन यह कहता है कि वर्ष 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही में, प्रत्येक में 20 आधार अंकों की वृद्धि के साथ, क्रमशः 6.9 प्रतिशत और 7.0 प्रतिशत तक पहुँच सकती है।

42. पिछली एमपीसी बैठक के बाद से, कीमती धातुओं, अर्थात स्वर्ण और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि के अनुमान के अतिरिक्त, मुद्रास्फीति से जुड़ी गतिविधियां अधिकांशतः यथा-अनुमान बनी हुई हैं। सीपीआई हेडलाइन मुद्रास्फीति अपने ऐतिहासिक निम्न स्तरों से बढ़ने के बावजूद निम्न सहनशीलता सीमा से कम बनी हुई है। हेडलाइन मुद्रास्फीति, इसमें अंतर्निहित प्रवृत्तियों एवं इसके संभावित प्रक्षेपवक्र का आकलन करते समय, इसके प्रधान घटकों के मुख्य तत्वों को स्पष्ट करना होगा। खाद्य पदार्थों में आम तौर पर पिछले सात आंकड़ों में से छह में अपस्फीति दर्ज की गई लेकिन कीमती धातुओं की कीमतों के चलते दिसंबर में मूल मुद्रास्फीति में 4.6 प्रतिशत तक वृद्धि हुई। यदि कीमती धातुओं को हटा दें, तो मूल मुद्रास्फीति काफी कम, 2.3 प्रतिशत पर, बनी रही जो घटती हुई मांग का संकेत देती है। इसके बाद, आगामी महीनों में खाद्य मुद्रास्फीति के बढ़ने की उम्मीद है जबकि गैर-खाद्य मुद्रास्फीति( कीमती धातुओं को छोड़कर) स्थिर बनी रहेगी। धातुओं के अतिरिक्त, अंतर्राष्ट्रीय पण्य-वस्तुओं की कीमतों के स्थिर बने रहने से आपूर्ति पक्ष की गतिविधियां अनुकूल बनी रहीं, जबकि अधिकांश रबी फसलों की अधिक बुआई, कृषि उत्पादन के लिए अच्छा संकेत है। मुद्रास्फीति के आधार-पूर्वानुमान बताते हैं कि वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के दौरान हेडलाइन मुद्रास्फीति के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के आसपास बने रहने की संभावना है, अर्थात मुद्रास्फीति के लक्ष्य की सहनशीलता सीमा से बहुत कम रहने अथवा अत्यधिक बढ़ जाने का जोखिम नहीं है। उक्त मुद्रास्फीति बढ़ने संबंधी पूर्वानुमान संशोधन मुख्यतः कीमती धातुओं की बढ़ी हुई कीमतों के प्रभाव को दर्शाता है, और दिसंबर एमपीसी की बैठक में किए गए मेरे इस आकलन को नहीं बदलता है कि लंबे समय तक स्थिर मुद्रास्फीति संभावना बने रहने के आसार हैं। बहुप्रतीक्षित नई सीपीआई श्रृंखला के जारी होने से मुद्रास्फीति के घटनाक्रमों पर अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है क्योंकि नए सूचकांक का भारण आरेख अद्यतन खपत-बास्केट को दर्शाएगा।

43. हेडलाइन मुद्रास्फीति पूरे 2025-26 के दौरान लक्ष्य से काफी नीचे बनी रही है और 2026-27 की पहली छमाही में लक्ष्य के आसपास बना रहना अनुमानित है, वर्तमान नीति दर और रुख, मुद्रास्फीति को प्रभावित किए बिना संवृद्धि-सहायक बने रहने के अवसर प्रदान करता है। जब तक मुद्रास्फीति की अपेक्षाएं नियंत्रित बनी रहती हैं, लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्य (एफआईटी) ढांचा वर्तमान स्थिति को बनाए रखने का समर्थन करता है। मौद्रिक नीति संचरण की प्रभावकारिता नीतिगत संकेत की सततता और निरंतरता पर भी गंभीर रूप से निर्भर करती है।[2] अनुमानित मुद्रास्फीति में मामूली ऊर्ध्वगामी संशोधन, जब तक कि यह एफ़आईटी ढांचे के सहन-सीमा बैंड के भीतर नहीं रह जाता है और मुद्रास्फीति की प्रत्याशाओं को प्रभावित नहीं करता है, नीति दर में परिवर्तन की आवश्यकता नहीं होती है। यह देखते हुए कि बहुमूल्य धातुओं को छोड़कर मुद्रास्फीति निकट भविष्य के लिए सौम्य रहने की उम्मीद है, मैं वर्तमान स्तर पर वर्तमान नीतिगत दर को बरकरार रखने के लिए वोट करता हूं। मैं तटस्थ रुख को बरकरार रखने का भी समर्थन करता हूं क्योंकि यह उभरती स्थिति के लिए उचित प्रतिक्रिया देने की सहूलियत प्रदान करता है।

डॉ. पूनम गुप्ता का वक्तव्य

44. अर्थव्यवस्थाओं, वित्तीय बाजारों और पण्य बाजारों, जो विभिन्न स्तर की अस्थिरता और जोखिमों का सामना कर रहे हैं, के साथ वैश्विक वातावरण अनिश्चित है। तथापि, भारतीय परिप्रेक्ष्य से, अमेरिका के साथ व्यापार लेन-देन की घोषणा और ईयू के साथ प्रमुख निर्बाध व्यापार करार (एफटीए) पर हस्ताक्षर करने के परिणामस्वरूप बाह्य क्षेत्र की संभावना अधिक अनुकूल हुई है।

45. बाह्य अनिश्चितता कम होने के अलावा, घरेलू संवृद्धि- मुद्रास्फीति मिश्रण भारत के लिए अनुकूल बना हुआ है। सकल घरेलू उत्पाद संवृद्धि, 2025-26 के पहले अग्रिम अनुमानों के साथ 7.4 प्रतिशत पर काफी मजबूत हो रही है। सकल घरेलू उत्पाद की संवृद्धि निजी खपत और स्थायी निवेश दोनों द्वारा समर्थित है, जिसमें उनकी क्रमशः संवृद्धि दर 2025-26 में 7.0 प्रतिशत और 7.8 प्रतिशत अनुमानित है और 2026-27 में गति जारी रहने की संभावना है।

46. उच्च आवृत्ति संकेतकों और मॉडल-आधारित अनुमानों की निरंतर उत्तरोत्तर ऊर्ध्वगामीता के चलते, विभिन्न एजेंसियों द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए संवृद्धि के प्रारंभिक अनुमानों को ऊपर की ओर संशोधित किया गया है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने भी 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद संवृद्धि अनुमानों को थोड़ा बढ़ा दिया है, जो सकारात्मक निकट अवधि संभावना और व्यापार लेन-देन द्वारा निर्देशित है।

47. कम मुद्रास्फीति एक वरदान बनी हुई है। कीमती धातुओं को छोड़कर, 2025-26 के लिए 2.1 प्रतिशत पर पूर्ण वर्ष अनुमान के साथ, सीपीआई बास्केट के अधिकांश घटकों में मुद्रास्फीति कम रही है। महत्वपूर्ण रूप से, कीमती धातुओं (अक्सर मूल-मूल के रूप में जाना जाता है) को छोड़कर मूल मुद्रास्फीति 2.3 प्रतिशत (दिसंबर 2025 के लिए नवीनतम प्रिंट के अनुसार) बनी हुई है और अगली दो तिमाहियों (2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही) में सौम्य रहने का अनुमान है।

48. व्यावसायिक पूर्वानुमान और भारतीय रिज़र्व बैंक के अपने विश्लेषण से पता चलता है कि 2026-27 के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में मुद्रास्फीति सौम्य रहने की संभावना है। वर्तमान में, बाह्य स्रोतों (जैसे तेल की कीमतें, पण्य मूल्य, या विनिमय दर मूल्यह्रास से गुजरना) से मुद्रास्फीति के लिए जोखिम को भी सीमित माना जा रहा है। क्षमता उपयोग दर 74 प्रतिशत पर स्थिर होने से, ऐसा नहीं लगता कि तेज़ी से बढ़ती आर्थिक गतिविधि के कारण मुद्रास्फीति बढ़ने का कोई जोखिम है।

49. पिछली छह बैठकों में से चार बैठकों में एक संचयी 125 बीपीएस तक नीतिगत दर पहले से ही कम किया गया है; दिसंबर 2025 में घोषित पिछली दर में कटौती के संचरण के साथ जो अभी भी जारी है; और चूंकि नई श्रृंखला के आंकड़े जीडीपी और मुद्रास्फीति दोनों के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं, इसलिए इस समय दर में एक और कटौती की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती है।

50. अतः, मैं यथास्थिति अर्थात् नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने के लिए वोट करती हूं। मैं तटस्थ रुख को बनाए रखने का भी प्रस्ताव करती हूं अर्थात् नीतिगत कार्रवाई का भावी मार्ग डाटा निर्भर होना चाहिए।

श्री संजय मल्होत्रा का वक्तव्य

51. बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों और बढ़ते व्यापार घर्षणों के बावजूद जो विशाल चुनौतियाँ दे रहे हैं, वैश्विक संवृद्धि, प्रौद्योगिकी-संबंधित निवेश में उछाल, अनुकूल वित्तीय एवं मौद्रिक नीतियों और निभावकारी वित्तीय परिस्थितियों के समर्थन से, 2026 में सीमित रूप से अधिक होने की आशा है। मुद्रास्फीति के परिणाम विभिन्न देशों में भिन्न हो सकते हैं; तदनुसार, केंद्रीय बैंकों को अपने नरमी के चक्रों के अंत में पहुंचते समय असमान नीतिगत पथों को देखने की संभावना है। बड़े राजकोषीय प्रोत्साहन और भू-राजनीतिक अनिश्चितता की पृष्ठभूमि में, वैश्विक निवेशक भावनाएं कमजोर हैं और वित्तीय बाजार अस्थिर बने हुए हैं।

52. भारत में, आर्थिक गतिविधि, जो मुख्य रूप से घरेलू कारकों द्वारा संचालित होती है, 2024-25 में 6.5 प्रतिशत की तुलना में 2025-26 में 90 आधार अंक अधिक वास्तविक जीडीपी संवृद्धि के साथ आघात- सह बने रहने का अनुमान है। आगामी वर्ष के लिए संभावना भी मजबूत होने की उम्मीद है। संवृद्धि के घरेलू चालक मजबूत बने हुए हैं। केंद्रीय बजट में घोषित अनेक संवृद्धि- समर्थित उपायों से संवृद्धि और तेज होनी चाहिए। इसके अलावा, हमारे प्रमुख व्यापार सहभागी विशेष रूप से यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य के साथ हाल के व्यापार करार/लेन-देन ने बाह्य क्षेत्र की संभावना को भी काफी उज्ज्वल बना दिया है। तदनुसार, हमने अपनी वास्तविक जीडीपी संवृद्धि के अनुमान को 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही में प्रत्येक में 20 बीपीएस से बढ़ा दिया है। ये व्यापार लेन-देन न केवल निर्यात और चालू खाते को मजबूत करेंगे बल्कि उच्च निवेश भी लाएगी।

53. नवंबर और दिसंबर 2025 में मुद्रास्फीति कम तथा निम्न सहनशीलता सीमा से कम बनी रही। समग्र प्रक्षेपवक्र के अनुसार मुद्रास्फीति, जैसा कि पहले अनुमान किया गया था, सौम्य बने रहने की उम्मीद है। 2025-26 के लिए हेडलाइन मुद्रास्फीति 2.1 प्रतिशत अनुमानित है। मुद्रास्फीति के लिए संशोधित संभावना, 2026-27 की पहली तिमाही और दूसरी तिमाही में हेडलाइन सीपीआई मुद्रास्फीति, क्रमशः 4.0 प्रतिशत और 4.2 प्रतिशत के साथ, मुद्रास्फीति लक्ष्य के करीब है। मौद्रिक नीति के परिप्रेक्ष्य से यह उल्लेख करना स्वाभाविक है कि, जबकि हम हेडलाइन मुद्रास्फीति को लक्ष्य करते हैं, मुद्रास्फीति की संरचना भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मौद्रिक नीति का मुद्रास्फीति के विभिन्न घटकों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। कीमती धातुओं को छोड़कर मुद्रास्फीति की संभावना भी कम है। कीमती धातुएं मुद्रास्फीति में लगभग 60-70 आधार अंक का योगदान करती हैं। अंतर्निहित मुद्रास्फीति कम बनी हुई है।

54. कुल मिलाकर, बाह्य क्षेत्र सहित मध्यावधि की तुलना में भारत के समष्टि आर्थिक मूल सिद्धान्त स्वस्थ और मजबूत बने हुए हैं। मुद्रास्फीति-संवृद्धि गतिशीलता के संदर्भ में, हम पिछली नीति की तुलना में एक समान या थोड़ी बेहतर स्थिति में हैं। जबकि मुद्रास्फीति संभावना व्यापक रूप से अपरिवर्तित रही है, संवृद्धि की संभावनाएं बढ़ रही हैं। इसके अलावा, बाह्य मोर्चे पर हाल की अनेक गतिविधियों ने अधिक आशावाद का अवसर प्रदान किया है। अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और इसकी संभावना – उत्साहजनक संवृद्धि और सौम्य मुद्रास्फीति को देखते हुए, मुझे लगता है कि वर्तमान नीति दर उपयुक्त है। तदनुसार, मैं नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर जारी रखने और तटस्थ रुख बनाए रखने के लिए वोट करता हूं।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/2144


2026
2025
2024
2023
2022
2021
2020
2019
2018
2017
2016
2015
2014
2013
2012
पुरालेख
Server 214
शीर्ष