10 फरवरी 2026
यूसीबी के लिए उधार मानदंडों की समीक्षा
6 फरवरी 2026 को जारी विकासात्मक एवं विनियामक नीतियों संबंधी वक्तव्य में की गई घोषणा के अनुसरण में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज जन सामान्य अभिमत के लिए निम्नलिखित मसौदा संशोधन निदेश जारी किए हैं, जो आरबीआई के विनियामक विभाग द्वारा जारी मौजूदा निदेशों में संशोधन का प्रस्ताव रखते हैं:
(i) भारतीय रिज़र्व बैंक (शहरी सहकारी बैंक – सकेंद्रण जोखिम प्रबंधन) – संशोधन निदेश, 2026
(ii) भारतीय रिज़र्व बैंक (शहरी सहकारी बैंक – ऋण सुविधाएँ) – संशोधन निदेश, 2026
(iii) भारतीय रिज़र्व बैंक (शहरी सहकारी बैंक – वित्तीय विवरण: प्रस्तुति एवं प्रकटीकरण) – द्वितीय संशोधन निदेश, 2026
2. उपरोक्त मसौदा संशोधन निदेश में, गैर- जमानती ऋणों की परिभाषा को तर्कसंगत बनाने, ऐसे अग्रिमों के लिए व्यक्तिगत ऋण सीमाओं में वृद्धि करने तथा यूसीबी द्वारा ऐसे अग्रिमों की समग्र सीमा को कुल आस्तियों के 10% की वर्तमान सीमा से कुल अग्रिमों के 20% तक संशोधित करने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं की खरीद के लिए नाममात्र सदस्यों को उधार प्रदान करने की सीमा को भी प्रति उधारकर्ता ₹2.5 लाख तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। साथ ही, टीयर 3 और टीयर 4 के यूसीबी के लिए आवास ऋणों की अवधि एवं अधिस्थगन आवश्यकताओं को अविनियमित करने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, यूसीबी के लिए कतिपय प्रकटीकरण आवश्यकताओं का भी प्रस्ताव है।
3. विनियमित संस्थाओं तथा अन्य हितधारकों/जनसामान्य सदस्यों द्वारा संशोधन निदेश के मसौदे पर अभिमत/ प्रतिक्रियाएँ 4 मार्च 2026 तक निम्नलिखित माध्यमों से प्रस्तुत की जा सकती हैं:
(i) वेबसाइट पर ‘कनेक्ट 2 रेगुलेट’ खंड में, उन पृष्ठों पर प्रत्येक दस्तावेज के सामने दिए गए संबंधित हाइपरलिंक का अनुसरण करके; या
(ii) ईमेल द्वारा (‘कनेक्ट 2 रेगुलेट’ खंड में निर्दिष्ट अनुसार), विषय पंक्ति ‘(मसौदा संशोधन निदेश का पूर्ण नाम) पर प्रतिक्रिया’ के साथ।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/2082
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