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प्रेस प्रकाशनी

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गवर्नर का वक्तव्य: 6 फरवरी 2026

6 फरवरी 2026

गवर्नर का वक्तव्य: 6 फरवरी 2026

सुप्रभात। 2026 की पहली पॉलिसी में मैं आप सभी का स्वागत करता हूं। अभी हमने इस नए वर्ष का केवल दूसरा ही माह देखा है और इसमें ही हमने भू-राजनीतिक और व्यापार-टैरिफ मोर्चों पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखे हैं।

2. बढ़ी हुई भू-राजनीतिक तनाव और उच्च अनिश्चितता के बीच, भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत संवृद्धि और निम्न मुद्रास्फीति के कारण एक अच्छी स्थिति में है। मुद्रास्फीति सहन-सीमा बैंड से नीचे बनी हुई है और इससे संबंधित संभावना सौम्य बनी हुई है। उच्च आवृत्ति संकेतक 2025-26 की तीसरी तिमाही और उसके बाद मजबूत संवृद्धि की गति के जारी रहने का संकेत देते हैं। यूरोपीय संघ और अमेरिका व्यापार करार के साथ एक ऐतिहासिक व्यापार करार पर हस्ताक्षर करने से, संवृद्धि की गति लंबे समय तक बनी रहने की संभावना है।

3. प्रौद्योगिकी से संबंधित निवेशों, निभावकारी वित्तीय स्थितियों और बड़े पैमाने पर राजकोषीय प्रोत्साहन द्वारा समर्थित वैश्विक संवृद्धि, पहले लगाए गए अनुमान की तुलना में 2026 में थोड़ी और मजबूत होने की उम्मीद है। तथापि, बढ़ते भू-राजनीतिक द्वन्द्वों और बढ़ते व्यापार तनावों के समागम ने मौजूदा वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को स्पष्ट कर दिया है। मुद्रास्फीति के परिणाम अलग-अलग क्षेत्राधिकारों में भिन्न-भिन्न हैं, जोकि अधिकांश प्रमुख उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में लक्ष्य के ऊपर बने हुए है और यह स्थिति मौद्रिक नीतिगत कार्रवाईयों में विचलन का संकेत देते हैं क्योंकि केन्द्रीय बैंक वर्तमान सहजता चक्रों के अंतिम चरण में हैं। वैश्विक पृष्ठभूमि, जो और अधिक सतर्क हो गई है, के सापेक्ष बांड बाजार के मनोभाव में मंदी का रुख बना हुआ है, जोकि राजकोषीय स्थिरता से संबंधित समस्याओं को प्रतिबिंबित करता है। तथापि, तकनीकी से संबंधित स्टॉक द्वारा संचालित इक्विटी बाजार ऊर्ध्वगामी बने हुए हैं।

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का निर्णय

4. नीतिगत रेपो दर पर विचार-विमर्श करने और निर्णय लेने के लिए मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 4, 5 और 6 फरवरी को संपन्न हुई। उभरती समष्टि आर्थिक स्थिति और संभावना के विस्तृत मूल्यांकन के बाद एमपीसी ने नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत् रखने के लिए सर्वसम्मति से वोट किया; परिणामस्वरूप चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के अंतर्गत स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ) दर 5.00 प्रतिशत और सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर और बैंक दर 5.50 प्रतिशत पर बनी हुई है। एमपीसी ने तटस्थ रुख को जारी रखने का भी निर्णय लिया।

5. अब मैं एमपीसी के इस निर्णय के लिए दिए गए तर्क का संक्षेप में उल्लेख करूंगा।

6. एमपीसी ने इस बात पर ध्यान दिया कि पिछली पॉलिसी बैठक के बाद से बाहरी विपरीत परिस्थितियों में तेजी आई है, हालांकि व्यापार सौदे सफलतापूर्वक पूर्ण करना आर्थिक संभावना के लिए शुभ संकेत है। कुल मिलाकर, निकटवर्ती घरेलू मुद्रास्फीति और संवृद्धि की संभावना सकारात्मक बनी हुई है।

7. नवंबर-दिसंबर के दौरान हेडलाइन मुद्रास्फीति, मुद्रास्फीति के लक्ष्य की सहन-सीमा बैंड से नीचे बनी रही। 2026-27 की पहली तिमाही और दूसरी तिमाही के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति की संशोधित संभावना क्रमशः 4.0 प्रतिशत और 4.2 प्रतिशत है, जोकि सौम्य और मुद्रास्फीति लक्ष्य के पास बनी हुई है। मुद्रास्फीति संभावना में मामूली ऊर्ध्वगामी संशोधन मुख्य रूप से कीमती धातुओं, जो लगभग 60-70 आधार अंकों का योगदान करते हैं, की कीमतों में वृद्धि के कारण हुआ है।

8. संवृद्धि के स्तर पर, आर्थिक गतिविधि आघात-सह बनी हुई है। पहला अग्रिम अनुमान एक चुनौतीपूर्ण बाह्य वातावरण के बीच घरेलू कारकों द्वारा संचालित संवृद्धि की गति को जारी रखने का संकेत देता है। संवृद्धि की संभावना अनुकूल बनी हुई है।

9. घरेलू समष्टि आर्थिक परिस्थितियों तथा संभावना की व्यापक समीक्षा के आधार पर एमपीसी का विचार है कि वर्तमान नीतिगत दर उपयुक्त है। तदनुसार, एमपीसी ने मौजूदा नीतिगत दर को जारी रखने के लिए वोट किया। एमपीसी ने तटस्थ रुख बनाए रखने की भी सहमति दी। आगे चलकर, मौद्रिक नीति की भावी कार्रवाई के लिए प्राप्त आंकड़ों की नई शृंखला के आधार पर एमपीसी उभरती हुई समष्टि आर्थिक स्थिति और संभावना के अनुसार कार्रवाई करेगी।

संवृद्धि और मुद्रास्फीति का आकलन

संवृद्धि

10. भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार सुधार होता रहा है, वास्तविक जीडीपी, पिछले वर्ष की तुलना में 2025-26 में 7.4 प्रतिशत की काफी अधिक वृद्धि दर्ज करने के लिए तैयार है। वैश्विक विपरीत परिस्थितियों के बीच निजी खपत और स्थिर निवेश ने संवृद्धि को समर्थन दिया।1 तथापि, निवल बाह्य मांग में गिरावट बनी रही जिसमें निर्यात की तुलना में आयात अधिक रहा है। आपूर्ति पक्ष पर, सेवा क्षेत्र से मजबूत योगदान और विनिर्माण गतिविधि में पुनरुत्थान के कारण वास्तविक जीवीए में 2025-26 के दौरान 7.3 प्रतिशत संवृद्धि अनुमानित है।2

11. आगे चलकर, 2026-27 में आर्थिक गतिविधि अच्छी रहने की उम्मीद है। कृषि गतिविधि को जलाशय के बेहतर स्तर3, रबी की मजबूत बुआई4 और फसल सब्जियों में सुधार5 द्वारा समर्थन मिलेगा। कॉर्पोरेट क्षेत्र के कार्यनिष्पादन में सुधार6 और अनौपचारिक क्षेत्र की गति में सततता से, विनिर्माण गतिविधि को बढ़ावा मिलना चाहिए। निर्माण क्षेत्र की संवृद्धि दृढ़ रहने की उम्मीद है।7 घरेलू मांग में मजबूती के कारण सेवा क्षेत्र आघात-सह बने रहना चाहिए।8 आईटी फर्मों के शुरुआती परिणाम कारोबार गतिविधि में सुधार का संकेत देते हैं।9

12. मांग पक्ष पर, निजी खपत की गति 2026-27 में बनी रहने की उम्मीद है। कृषि गतिविधि और ग्रामीण श्रम बाजार की स्थिति में सुधार10 के कारण ग्रामीण मांग स्थिर बनी हुई है।11 जीएसटी युक्तिसंगतता और मौद्रिक सहजता से निरंतर समर्थन के साथ शहरी उपभोग में सुधार और मजबूत होनी चाहिए। उच्च क्षमता उपयोग,12 बैंक ऋण में तेजी,13 अनुकूल वित्तीय स्थिति और अवसंरचना पर सरकार का निरंतर जोर14 से निवेश गतिविधि को गति मिलनी चाहिए। इसके अलावा, केंद्रीय बजट में घोषित कई उपाय भी संवृद्धि के लिए अनुकूल होने चाहिए।15 हाल ही में संपन्न भारत-ईयू मुक्त व्यापार करार (एफटीए) और संभावित भारत-यूएसए व्यापार करार तथा अन्य कई व्यापार करारों से मध्यावधि में निर्यात को समर्थन मिलेगा। सेवा निर्यात आघात-सह होना चाहिए।16 भू-राजनीतिक तनावों, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और व्यापार के बदलते पैटर्न से उत्पन्न प्रभाव- विस्तार (स्पिलओवर), संभावना के लिए जोखिम उत्पन्न करते हैं।

13. इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, 2026-27 की पहली तिमाही और दूसरी तिमाही के लिए वास्तविक जीडीपी संवृद्धि संबंधी पूर्वानुमानों को क्रमशः 6.9 प्रतिशत और 7.0 प्रतिशत तक ऊर्ध्वगामी संशोधित किया गया है।17 जोखिम समान रूप से संतुलित हैं। हम पूरे वर्ष के लिए पूर्वानुमानों को अप्रैल नीति के लिए स्थगित कर रहे हैं क्योंकि नई जीडीपी शृखंला इस माह के दौरान बाद में जारी की जाएगी।

मुद्रास्फीति

14. नवंबर और दिसंबर में हेडलाइन सीपीआई मुद्रास्फीति कम रही क्योंकि इन दो महीनों में इसमें एक प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई। यह वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य समूह में अपस्फीति की कम दर से प्रेरित थी।18 स्वर्ण को छोड़कर, दिसंबर में मूल मुद्रास्फीति 2.6 प्रतिशत पर स्थिर रही।19

15. निकट अवधि की संभावना से यह पता चलता है कि खाद्य आपूर्ति की संभावनाएं खरीफ के बेहतर उत्पादन20, खाद्यान्नों के पर्याप्त बफर स्टॉक21, अनुकूल रबी बुआई और जलाशय के पर्याप्त स्तरों के कारण उज्ज्वल बनी हुई हैं। मूल मुद्रास्फीति, कीमती धातुओं की कीमतों के कारण संभावित अस्थिरता को छोड़कर, सीमाबद्ध रहने की उम्मीद है। ऊर्जा कीमतों और प्रतिकूल मौसम घटनाओं में अस्थिरता के साथ भू-राजनीतिक अनिश्चितता मुद्रास्फीति के प्रति अपसाइड जोखिम उत्पन्न करती है। मूल मुद्रास्फीति, कीमती धातुओं की कीमतों के कारण संभावित अस्थिरता को छोड़कर, सीमाबद्ध रहने की उम्मीद है। ऊर्जा कीमतों और प्रतिकूल मौसम घटनाओं में अस्थिरता के साथ भू-राजनीतिक अनिश्चितता मुद्रास्फीति के प्रति ऊर्ध्वगामी जोखिम उत्पन्न करती है।

16. हेडलाइन मुद्रास्फीति प्रक्षेपपथ के संदर्भ में प्रत्याशित गति मंद होने के बावजूद, 2024-25 की चौथी तिमाही के दौरान देखी गई कीमतों में भारी गिरावट से उत्पन्न प्रतिकूल आधार प्रभाव, 2025-26 की चौथी तिमाही में वर्ष-दर-वर्ष मुद्रास्फीति में वृद्धि का कारण बनेगा। इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, 2025-26 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति अब 2.1 प्रतिशत अनुमानित है, जोकि चौथी तिमाही में 3.2 प्रतिशत अनुमानित है। 2026-27 की पहली तिमाही और दूसरी तिमाही के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति क्रमशः 4.0 प्रतिशत और 4.2 प्रतिशत अनुमानित है। कीमती धातुओं को छोड़कर अन्तर्निहित मुद्रास्फीति दबाव मंद रहे। जोखिम समान रूप से संतुलित हैं।

17. 12 फरवरी 2026 को नई सीपीआई शृंखला (आधार 2024=100) के आगे जारी होने के मद्देनजर22, हम अप्रैल 2026 के नीतिगत वक्तव्य में 2026-27 के पूरे वर्ष के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का अनुमान प्रस्तुत करेंगे।

बाह्य क्षेत्र

18. उच्च अनिश्चितता के बावजूद वैश्विक व्यापार अपेक्षाकृत मजबूत बना रहा। व्यापार विविधीकरण प्रयासों द्वारा समर्थित भारत के वस्तु निर्यात में 2025-26 की तीसरी तिमाही में 1.9 प्रतिशत (वर्ष-दर-वर्ष) की वृद्धि हुई जबकि इसी अवधि के दौरान वस्तु आयात में 7.9 प्रतिशत (वर्ष-दर-वर्ष) की वृद्धि हुई जिसके परिणामस्वरूप व्यापार घाटे में वृद्धि हुई।23 सुदृढ़ सेवा निर्यात24 और बेहतर आवक विप्रेषण प्राप्तियाँ25 चालू वर्ष के लिए भारत के चालू खाते के घाटे को मध्यम और धारणीय बनाए रखेंगे। इसके अलावा प्रमुख व्यापारिक भागीदारों के साथ द्विपक्षीय और क्षेत्रीय व्यापार करार करने में भारत के सक्रिय प्रयासों से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलने, व्यापार भागीदारों को विविधता प्रदान करने और भारत को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में एकीकृत करने की उम्मीद है।26

19. बाह्य वित्तपोषण स्तर पर भारत में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान मजबूत गति से बढ़ा। जावक एफडीआई में वृद्धि के बावजूद प्रत्यावर्तन में गिरावट के कारण निवल एफडीआई में भी वृद्धि हुई।27 हरित क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए भारत एक आकर्षक विदेशी प्रत्यक्ष निवेश का गंतव्य बना रहा है।28 इस वर्ष (अप्रैल-फरवरी 3) अब तक भारत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई)29 ने 5.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवल बहिर्वाह दर्ज किया। 30 जनवरी 2026 की स्थिति के अनुसार, भारत की विदेशी मुद्रा आरक्षित निधि 723.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर रही, जो 11 महीने से अधिक के लिए मजबूत वस्तु आयात कवर प्रदान करता है। कुल मिलाकर, भारत का बाह्य क्षेत्र आघात-सह बना हुआ है।30 हमें विश्वास है कि हम अपनी बाह्य वित्तपोषण आवश्यकताओं को आराम से पूरा कर सकते हैं।

चलनिधि और वित्तीय बाजार की स्थिति

20. चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के अंतर्गत निवल स्थिति द्वारा मापी गई प्रणालीगत चलनिधि, दिसंबर 2025 में एमपीसी की पिछली बैठक के बाद की अवधि के दौरान औसतन 0.7 लाख करोड़ के अधिशेष पर थी।31 दिसंबर और जनवरी में टिकाऊ चलनिधि प्रदान करने के लिए रिज़र्व बैंक ने कई उपाय किए।32 प्रणालीगत चलनिधि और इसकी संभावना के आकलन के आधार पर, रिज़र्व बैंक ने जनवरी और फरवरी 2026 की दूसरी छमाही में टिकाऊ चलनिधि बढ़ाने के उपायों की घोषणा की और तत्संबंधी प्रयास शुरू किए।.33

21. नीतिगत रेपो दर में संचयी 125 बीपीएस कटौती के सापेक्ष, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की भारित औसत उधार दर (डब्ल्यूएएलआर) में फरवरी-दिसंबर 2025 के दौरान नए रुपया ऋणों के लिए 105 बीपीएस की कमी आई है (ब्याज दर का प्रभाव34 94 बीपीएस है)35। नई जमाराशियों पर भारित औसत घरेलू मीयादी जमा दर (डब्ल्यूएडीटीडीआर) में 95 बीपीएस की गिरावट आई है, जबकि इसी अवधि में बकाया जमाराशियों पर 41 बीपीएस की नरमी आई है।

22. जनवरी 2026 में मुद्रा बाजार दरें, विशेष रूप से वाणिज्यिक पत्रों (सीपी) और जमा प्रमाणपत्रों (सीडी) के संदर्भ में, कठोर हुई हैं, जो (i) अधिशेष चलनिधि में कमी; (ii) जनवरी में सीपी और सीडी में मोचन के गुच्छे (बंचिंग) से अतिरिक्त आपूर्ति; और (iii) वर्ष के अंत के मौसमी प्रभावों36 को दर्शाती हैं। वैश्विक रुझानों के अनुरूप, सरकारी प्रतिभूति (जी-सेक) प्रतिफल पिछले आठ महीनों37 से कई कारकों के कारण कठोर बनी हुई है।

23. आगे बढ़ते हुए, रिज़र्व बैंक चलनिधि प्रबंधन में सक्रिय रहेगा और अर्थव्यवस्था की उत्पादक आवश्यकताओं को पूरा करने और मौद्रिक नीति संचरण की सुविधा के लिए बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त चलनिधि सुनिश्चित करेगा। चलनिधि प्रबंधन सरकारी संतुलन में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव, परिचालन में मुद्रा में परिवर्तन, विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप आदि के लिए पर्याप्त भत्ता के साथ पूर्व-निर्धारित होगा।

वित्तीय स्थिरता

24. अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) के पूंजी पर्याप्तता, चलनिधि, आस्ति गुणवत्ता तथा लाभप्रदता से संबंधित प्रणाली-स्तरीय वित्तीय मापदंड अब भी मजबूत बने हुए हैं।38 इसी प्रकार, एनबीएफसी के प्रणाली-स्तरीय मापदंड भी मजबूत हैं, जिसमें पर्याप्त पूंजी स्थिति तथा बेहतर आस्ति गुणवत्ता शामिल हैं।39

25. नवीनतम उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एक वर्ष पूर्व के 11.6 प्रतिशत (वर्ष-दर-वर्ष) की तुलना में सभी स्रोतों से उपलब्ध ऋण बढ़कर 13.8 प्रतिशत (वर्ष-दर-वर्ष) हो गया40। हाल के महीनों में, बैंक ऋण संवृद्धि में भी वृद्धि दर्ज की गई।41 यह संवृद्धि42 सभी क्षेत्रों, विशेष रूप से खुदरा, सेवाओं और एमएसएमई को निरंतर रूप से दिए गए उधार द्वारा समर्थित है। बड़े उद्योगों में भी उच्चतर ऋण संवृद्धि दर्ज की गई।

अतिरिक्त उपाय

26. अब मैं कुछ ऐसे उपायों की घोषणा करूंगा जिनका लक्ष्य उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ाना, वित्तीय समावेशन को अग्रगति देना, ऋण प्रवाह बढ़ाना, शहरी सहकारी बैंकों को सुदृढ़ करना, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए कारोबार में आसानी को बढ़ावा देना और वित्तीय बाजारों का विस्तार करना है।

उपभोक्ताओं को सशक्त बनाना

27. उपभोक्ता संरक्षण के लिए, हम तीन मसौदा-दिशानिर्देश जारी करेंगे: पहला, अप-विक्रय; दूसरा, उधार की वसूली और वसूली एजेंटों की नियुक्ति; और तीसरा, अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में उपभोक्ता की देयता को सीमित करने से संबंधित होगा। यह भी प्रस्तावित है कि उपभोक्ताओं को छोटे मूल्य की धोखाधड़ी वाले लेनदेन में हुई हानि के लिए 25000/- तक की राशि की क्षतिपूर्ति हेतु एक ढांचा बनाया जाए।

28. डिजिटल भुगतानों की सुरक्षा को सुदृढ़ करने हेतु संभावित उपायों पर हम एक चर्चा पत्र भी प्रकाशित करेंगे। ऐसे उपायों में विलंबित-जमा और विशिष्ट वर्ग के प्रयोक्ताओं, यथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए, अतिरिक्त प्रमाणीकरण शामिल होंगे।

वित्तीय समावेशन और ऋण-प्रवाह को बढ़ाना

29. वित्तीय समावेशन क्षेत्र में, हमने अग्रणी बैंक योजना, किसान क्रेडिट कार्ड योजना और व्यवसाय प्रतिनिधि मॉडल की व्यापक समीक्षा की है। हम उनके संबंध में संशोधित मसौदा-दिशानिर्देश जारी करेंगे। एलबीएस डेटा के बेहतर प्रबंधन के लिए हमारे द्वारा एक एकीकृत रिपोर्टिंग पोर्टल भी शुरू किया जाएगा।

30. एमएसएमई को दिए जाने वाले संपार्श्विक मुक्त ऋणों की 10 लाख की सीमा को बढ़ाकर 20 लाख करने का प्रस्ताव है।

31. स्थावर संपदा क्षेत्र के वित्तपोषण को और बढ़ावा देने के लिए यह प्रस्ताव किया गया है कि बैंकों को कतिपय विवेकपूर्ण सुरक्षा उपायों के साथ आरईआईटी को उधार देने की अनुमति दी जाए।

यूसीबी को सुदृढ़ करना

32. हम यूसीबी से संबंधित चार उपाय प्रस्तुत करते हैं।

33. पहले दो उपाय, यूसीबी द्वारा असुरक्षित ऋणों और नामित सदस्यों को दिए जाने वाले ऋणों पर वित्तीय सीमाएं बढ़ाने से संबंधित हैं।

34. हम टियर III और टियर IV यूसीबी द्वारा दिए गए आवास ऋणों की अवधि और अधिस्थगन संबंधी अपेक्षाओं को भी हटाने का प्रस्ताव करते हैं।

35. यूसीबी की प्रबंधकीय और तकनीकी क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए हम मिशन-सक्षम (सहकारी बैंक क्षमता निर्माण) शुरू करेंगे। इस मिशन का उद्देश्य शहरी सहकारी बैंकों के 1.4 लाख से अधिक प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देना है।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों(एनबीएफ़सी) के लिए कारोबार करने में आसानी को बढ़ावा देना

36. ऐसी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को, जिनकी आस्ति का आकार 1000 करोड़ से अधिक नहीं है, पंजीकरण की आवश्यकता से छूट देने का प्रस्ताव है।

37. इसके अलावा, यह प्रस्ताव है कि कतिपय एनबीएफसी के लिए 1000 से अधिक शाखाओं को खोलने के लिए पूर्व अनुमोदन प्राप्त करने की आवश्यकता को समाप्त किया जाए।

वित्तीय बाजारों का विस्तार

38. वित्तीय बाजारों के विषय पर, हमने पूर्व में ईसीबी के लिए संशोधित मसौदा विनियमावली जारी की थी, जिसे अंतिम रूप दिया गया है और शीघ्र ही अधिसूचित किया जाएगा।

39. हम स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (वीआरआर) के अंतर्गत निवेश के लिए 2.5 लाख करोड़ की सीमा को हटाने का भी प्रस्ताव करते हैं। प्रत्येक श्रेणी की प्रतिभूतियों में वीआरआर के माध्यम से किया गया निवेश, सामान्य मार्ग के तहत संबंधित श्रेणी के लिए निर्धारित निवेश सीमा के अधीन होगा।

40. इसके अलावा, केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई घोषणा के अनुसरण में, हम कॉरपोरेट बॉन्ड सूचकांकों पर डेरिवेटिव और कॉर्पोरेट बॉन्ड पर कुल रिटर्न स्वैप के लिए विनियामकीय ढांचा जारी करने का प्रस्ताव करते हैं।

41. प्राधिकृत व्यापारी बैंकों और एकल प्राथमिक व्यापारियों (एसपीडी) के लिए संशोधित मसौदा-दिशानिर्देश जारी करने का भी प्रस्ताव है, जिससे उन्हें विदेशी मुद्रा लेनदेन करने में आसानी हो।

समापन टिप्पणी

42. समापन के पूर्व, मैं यह सूचित करना चाहूंगा कि रिज़र्व बैंक द्वारा वित्तीय शिक्षा के विशिष्ट विषयों पर प्रत्येक वर्ष वित्तीय साक्षरता सप्ताह (एफएलडब्ल्यू) मनाया जा रहा है। इस वर्ष इस अभियान को 9 फरवरी को प्रारंभ किया जाएगा। बैंक खातों के पुनः-केवाईसी संबंधी हमारे वर्तमान प्रयास को जारी रखते हुए, इस वर्ष का विषय 'केवाईसी - सुरक्षित बैंकिंग के लिए आपका पहला कदम' है। मैं सभी बैंकों से अनुरोध करता हूं कि वे इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें।

43. निष्कर्षतः, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से परिव्याप्त, चुनौतीपूर्ण बाह्य वातावरण के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में उच्च संवृद्धि जारी है। सौम्य मुद्रास्फीति, वित्तीय स्थिरता को बरकरार रखते हुए संवृद्धि-सहायक बने रहने का मार्ग प्रशस्त करती है। हम अर्थव्यवस्था की उत्पादक आवश्यकताओं को पूरा करने और संवृद्धि की गति को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

44. धन्यवाद। नमस्कार और जय हिंद।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/2054


1 पहले अग्रिम अनुमानों (एफ़एई) के अनुसार निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) पिछले वर्ष के 7.2 प्रतिशत की तुलना में 2025-26 में 7.0 प्रतिशत से बढ़ने का अनुमान है। सकल स्थायी पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) में पिछले वर्ष की 7.1 प्रतिशत वृद्धि की तुलना में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है।

2 वर्ष 2025-26 के एफएई के अनुसार सेवा क्षेत्र के जीवीए में 8.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई तथा विनिर्माण क्षेत्र के जीवीए में 7.0 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

3 अखिल भारतीय जलाशयों का स्तर एक वर्ष पहले के 61.4 प्रतिशत और 53.3 प्रतिशत का दशकीय औसत की तुलना में 5 फरवरी 2026 को कुल क्षमता का 66.6 प्रतिशत रहा।

4 30 जनवरी 2026 की स्थिति के अनुसार रबी की बुआई 2.4 प्रतिशत तक बढ़ गई।

5 इसरो द्वारा नियंत्रित उपग्रह-आधारित वनस्पति स्थिति सूचकांक (वीसीआई) में पिछले वर्ष की इसी अवधि के सापेक्ष जनवरी 2026 के दौरान उत्तर-पश्चिमी और पश्चिमी क्षेत्रों में बेहतर रबी फसल वनस्पति स्वास्थ्य दर्शाया गया है।

6 सूचीबद्ध निजी विनिर्माण कंपनियों के सीमित समूह के शुरुआती परिणाम यह संकेत देते हैं कि 2025-26 की तीसरी तिमाही में परिचालन लाभ में 8.3 प्रतिशत (2024-25 की तीसरी तिमाही में 2.7 प्रतिशत) की वृद्धि हुई है।

7 सीमेंट उत्पादन की वृद्धि 2025-26 की तीसरी तिमाही में 11.1 प्रतिशत तक बढ़ गई।

8 सेवाएँ पीएमआई दिसंबर में 58.0 पर एक मजबूत विस्तार क्षेत्र में बना रहा तथा जनवरी 2026 में और मजबूत होकर 58.5 हो गया।

9 आईटी कंपनियों के शुरुआती परिणाम, निष्पादन में सुधार का सुझाव देते हैं, जिसमें निवल बिक्री वृद्धि दर 2025-26 की दूसरी तिमाही में 6.7 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 की तीसरी तिमाही में 8.4 प्रतिशत हो गई है, तथा परिचालनगत लाभ संवृद्धि पिछले तिमाही में 7.2 प्रतिशत से बढ़कर 10.3 प्रतिशत हो गई है। तीसरी तिमाही (5.6 प्रतिशत से 6.5 प्रतिशत तक) में मजदूरी संवृद्धि भी तेज हो गई, जो आईटी कंपनियों की नाममात्र जीवीए में व्यापक वृद्धि दर्शाती है।

10 मासिक आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के अनुसार, अखिल भारतीय बेरोजगारी दर दिसंबर में 4.8 प्रतिशत पर कम रही। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनएनआरईजी) के अंतर्गत कार्य की मांग में दिसंबर में 29.0 प्रतिशत की गिरावट आई।

11 2025-26 की तीसरी तिमाही में दो-पहिया और ट्रैक्टर खुदरा बिक्री में क्रमशः 18.7 प्रतिशत और 28.8 प्रतिशत की दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।

12 भारतीय रिज़र्व बैंक के तिमाही आदेश बहियों, माल-सूचियों और क्षमता उपयोग (ओबीआईसीयूएस) सर्वेक्षण के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र के मौसमी रूप में समायोजित क्षमता उपयोग (सीयू) 2025-26 की दूसरी तिमाही में 74.8 प्रतिशत पर था, जो दीर्घावधि औसत 73.9 प्रतिशत से अधिक था।

13 वस्त्रों, रसायन, आधार धातुओं और इंजीनियरिंग वस्तुओं को प्रदत्त बैंक ऋण में दिसंबर 2025 के दौरान वर्ष-दर-वर्ष क्रमशः 11.8 प्रतिशत, 14.8 प्रतिशत, 14.2 प्रतिशत और 30.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

14 केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय में वर्ष 2026-27 में 11.5 प्रतिशत की वृद्धि का बजट किया गया है। प्रभावी पूंजी व्यय (पूंजीगत व्यय के लिए राज्य सरकारों को सहायता अनुदान सहित) में 22.1 प्रतिशत की वृद्धि का बजट किया गया है।

15 प्रमुख क्षेत्र के उपायों में (i) एमएसएमई विकास निधि की स्थापना, भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0, क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र, नए माल ढुलाई कॉरिडोर, अवसंरचना जोखिम गारंटी निधि, तीन समर्पित केमिकल पार्क और (ii) निर्माण और अवसंरचना उपकरण के संवर्धन के लिए योजना, कंटेनर विनिर्माण योजना और श्रम गहन वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम शामिल हैं।

16 सेवा निर्यात में नवंबर 2025 में 6.7 प्रतिशत की तुलना में दिसंबर में 13.0 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि हुई।

17 दिनांक 27 फरवरी और 12 फरवरी 2026 को जारी होने वाले क्रमशः नई जीडीपी और सीपीआई शृंखला (आधार 2024=100) को शामिल करने के बाद वर्ष 2026-27 के पूर्ण वर्ष के लिए अनुमानों को अप्रैल 2026 में घोषित किए जाने वाले मौद्रिक नीति वक्तव्य में निर्धारित किया जाएगा।

18 खाद्य समूह ने वर्ष-दर-वर्ष आधार पर दिसंबर 2025 में (-) 1.8 प्रतिशत की अपस्फीति दर्ज की, जो अक्टूबर और नवंबर में क्रमशः (-) 3.7 प्रतिशत और (-)2.8 प्रतिशत से संकुचित हुई। खाद्य समूह, सब्जियों, दालों और मसाले में क्रमशः (-) 18.5 प्रतिशत, (-) 15.1 प्रतिशत और (-) 2.2 प्रतिशत का अपस्फीति दर्ज की गई, हालांकि यह धीमी दर पर है।

19 स्वर्ण की कीमत में वृद्धि के कारण अक्टूबर-नवंबर के दौरान मूल मुद्रास्फीति 4.3 प्रतिशत से दिसंबर में 4.6 प्रतिशत हो गई। स्वर्ण मुद्रास्फीति (अक्तूबर 2025 से वर्ष-दर-वर्ष 50 प्रतिशत से अधिक) ने हेडलाइन और मूल संख्या में आनुपातिक योगदान दिया।

20 कृषि उत्पादन के पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार वर्ष 2025-26 में खरीफ खाद्यान्न 2024-25 के अंतिम अनुमान से 2.3 प्रतिशत अधिक होने का अनुमान है।

21 16 जनवरी 2026 की स्थिति के अनुसार, चावल और गेहूं का स्टॉक क्रमशः 731 लाख टन (बफर मानदंड का 9.6 गुना) और 269 लाख टन (बफर मानदंड का 1.9 गुना) रहा।

22 नई शृंखला में एचएसई 2023-24 के आधार पर पद्धतिगत परिवर्तन, बेहतर डेटा संग्रहण और संशोधित भार शामिल किए जाने की संभावना है।

23 चूंकि भारत के वस्तु निर्यात की तुलना में वस्तु आयात में तेजी आई है, व्यापार घाटा 2025-26 की दूसरी तिमाही में 88.0 बिलियन अमेरिकी डॉलर और 2024-25 की तीसरी तिमाही में 78.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2025-26 की तीसरी तिमाही में 91.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।

24 2025-26 की तीसरी तिमाही के दौरान 111.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का सेवा निर्यात वर्ष-दर-वर्ष 7.5 प्रतिशत बढ़ा जबकि 53.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर पर सेवा आयात में 2.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी अवधि के दौरान निवल सेवा निर्यात वर्ष-दर-वर्ष 12.3 प्रतिशत बढ़ा और 57.5 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा।

25 भारत के आवक विप्रेषण वर्ष-दर-वर्ष 10.7 प्रतिशत बढ़कर 2025-26 की दूसरी तिमाही में 39.0 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गए।

26 यूके तथा ओमान के साथ व्यापार संबंधी करार पर हस्ताक्षर किए गए हैं; यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ व्यापार करार 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हुआ; न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार संबंधी करार संपन्न हो गए हैं; और अमेरिका के साथ व्यापार संबंधी करार की घोषणा की गई है।

27 भारत में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह एक वर्ष पहले के 55.8 बिलियन अमरीकी डॉलर से अप्रैल-नवंबर 2025-26 में 16.1 प्रतिशत बढ़कर 64.7 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गया। अप्रैल-नवंबर 2025-26 के दौरान निवल एफडीआई अंतर्वाह एक वर्ष पहले के 0.8 बिलियन अमरीकी डॉलर से बढ़कर 5.6 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गया।

28 वर्ष 2025-26 (अप्रैल-नवंबर) के दौरान भारत के लिए हरित क्षेत्र परियोजना की घोषणाएं 56 बिलियन अमरीकी डॉलर रही जो एक वर्ष पहले 63 बिलियन अमरीकी डॉलर से मामूली रूप से कम थी। वर्ष के दौरान शीर्ष 5 एफडीआई की घोषणाएं अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एमयूएफजी बैंक और हाइफ़्रा द्वारा की गई हैं, जो आगे चलकर एफडीआई प्रवाह के लिए शुभ संकेत है।

29 वर्ष 2025-26 (अप्रैल-फरवरी 3) के दौरान भारत में एफपीआई ने इक्विटी खंड से 7.5 बिलियन अमरीकी डॉलर के निवल बहिर्वाह दर्ज किया, जबकि ऋण खंड में 1.7 बिलियन अमरीकी डॉलर का निवल अंतर्वाह दर्ज किया।

30 जीडीपी की तुलना में भारत का बाह्य ऋण अनुपात मार्च 2025 के अंत में 19.1 प्रतिशत से मामूली रूप से बढ़कर 2025 के अंत में 19.2 प्रतिशत हो गया, जबकि निवल अंतरराष्ट्रीय निवेश स्थिति (आईआईपी) मार्च 2025 के अंत में सकल घरेलू उत्पाद के 8.6 प्रतिशत से घटकर (-) सितंबर 2025 के अंत में सकल घरेलू उत्पाद के 7.2 प्रतिशत हो गई।

31 अक्टूबर और नवंबर के दौरान चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के अंतर्गत औसत दैनिक निवल अवशोषण क्रमशः 0.9 लाख करोड़ और 1.9 लाख करोड़ रहा। एलएएफ के अंतर्गत औसत दैनिक निवल अवशोषण दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में घटकर 0.8 लाख करोड़ हो गया। फरवरी 2026 में (4 फरवरी तक) चलनिधि समायोजन सुविधा के अंतर्गत औसत दैनिक शुद्ध अवशोषण 1.8 लाख करोड़ हो गया।

32 रिज़र्व बैंक ने दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में 15.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर की दीर्घावधि विदेशी मुद्रा खरीद/बिक्री स्वैप नीलामी तथा 3,50,000 करोड़ की राशि की खुला बाज़ार परिचालन खरीद नीलामी आयोजित की।

33 रिज़र्व बैंक ने 1,00,000 करोड़ की अतिरिक्त ओएमओ खरीद नीलामी, 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर की दीर्घावधि विदेशी-मुद्रा खरीद/बिक्री स्वैप, 25,000 करोड़ का 90-दिवसीय वीआरआर परिचालन और जनवरी और 2026 फरवरी के लिए 1,11,500 करोड़ के दूसरे 90-दिवसीय वीआरआर परिचालन का आयोजन किया।

34 भारित औसत उधार दर (डबल्यूएएलआर) के संचरण पर ब्याज दर प्रभाव की गणना भार को स्थिरांक रखकर की जाती है (जनवरी 2025 के अनुसार)।

35 बकाया रुपये ऋणों की भारित औसत उधार दर (डबल्यूएएलआर) में कमी 81 बीपीएस की सीमा तक हुई है। सभी क्षेत्रों में संचरण व्यापक रूप से हुआ है।

36 वर्तमान सुलभता चक्र में संचयी नीतिगत रेपो दर में 125 आधार अंकों (बीपीएस) की कटौती के सापेक्ष, डबल्यूएसीआर, 3-महीने की टी-बिल दर, एनबीएफसी द्वारा जारी 3-महीने की सीपी और 3-महीने की सीडी दर में दिसंबर 2025 के अंत तक क्रमशः 89 बीपीएस, 119 बीपीएस, 143 बीपीएस और 127 बीपीएस की गिरावट आई। तथापि, जनवरी की शुरुआत से 4 फरवरी 2026 तक, 3 महीने की टी-बिल दर, एनबीएफसी द्वारा जारी 3 महीने की सीपी और 3 महीने की सीडी दर में क्रमशः 6 बीपीएस, 73 बीपीएस और 84 बीपीएस की वृद्धि हुई है।

37 10-वर्षीय जी-सेक प्रतिफल 5 फरवरी 2026 को 4 दिसंबर 2025 की स्थिति के अनुसार 6.51 प्रतिशत से बढ़कर 6.65 प्रतिशत हो गया।

38 एससीबी मानदंड: दिसंबर 2024 और दिसंबर 2025 के बीच, बकाया ऋण और जमाराशियों में वर्ष-दर-वर्ष आधार पर क्रमशः 14.54 प्रतिशत और 12.68 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सितंबर 2025 में 17.24 प्रतिशत का प्रणाली-स्तरीय जोखिम भारित आस्तियों की तुलना में पूंजी अनुपात (सीआरएआर) विनियामकीय न्यूनतम स्तर से काफी ऊपर रहा। सितंबर 2025 में जीएनपीए और एनएनपीए अनुपात के, सितंबर 2024 के 2.05 प्रतिशत और 0.47 प्रतिशत की तुलना में, क्रमशः 2.05 प्रतिशत और 0.47 प्रतिशत होने से आस्ति गुणवत्ता में निरंतर सुधार हुआ। चलनिधि बफर, 2025 सितंबर के अंत में 131.68 प्रतिशत एलसीआर के साथ मजबूत थे। आस्तियों पर वार्षिक प्रतिलाभ (आरओए) और इक्विटी पर प्रतिलाभ (आरओई) सितंबर 2025 में क्रमशः 1.32 प्रतिशत और 13.06 प्रतिशत रहे। सितंबर 2025 के लिए निवल ब्याज मार्जिन 3.26 प्रतिशत था (सितंबर 2024 में 3.52 प्रतिशत)।

39 एनबीएफसी मानदंड: एनबीएफसी का कुल सीआरएआर 25.11 प्रतिशत था और टियर I सीआरएआर सितंबर 2025 में 23.27 प्रतिशत था, जो न्यूनतम विनियामक अपेक्षाओं से भी अधिक था। सितंबर 2024 में जीएनपीए अनुपात में 2.57 प्रतिशत की तुलना में सितंबर 2025 में 2.21 प्रतिशत तक सुधार हुआ है जबकि एनएनपीए अनुपात में भी सितंबर 2024 में 1.04 प्रतिशत से सितंबर 2025 में 0.99 प्रतिशत हो गया। इस क्षेत्र के लिए आरओए सितंबर 2024 में 3.25 प्रतिशत से घटकर सितंबर 2025 में 2.83 प्रतिशत हो गया। एनआईएम सितंबर 2024 में 5.51% से घटकर सितंबर 2025 में 4.24 प्रतिशत हो गया है।

40 बैंक और गैर-बैंक स्रोतों से वाणिज्यिक क्षेत्र में संसाधनों का कुल प्रवाह 2025-26 में अब तक पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि के 23.3 लाख करोड़ की तुलना में 29.6 लाख करोड़ रहा। गैर-खाद्य बैंक ऋण (5.04 लाख करोड़) और गैर-वित्तीय संस्थाओं (1.4 लाख करोड़) द्वारा कॉर्पोरेट बॉन्ड जारी करने से प्रवाह में बढ़ोत्तरी इस संवृद्धि के प्रमुख चालक रहे।

41 वर्ष-दर-वर्ष आधार पर बैंक ऋण में, एक वर्ष पहले के 11.5 प्रतिशत की तुलना में 15 जनवरी 2026 को 13.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि के दौरान, 10.6 प्रतिशत की जमा वृद्धि एक वर्ष पहले के 10.8 प्रतिशत से कम थी। वर्ष 2025-26 के दौरान (15 जनवरी 2026 तक) जमा केआरआर तुलना में वृद्धिशील ऋण (सी/डी) अनुपात 98.4 था।

42 क्षेत्रवार खाद्येतर ऋण आंकड़े, क्षेत्रवार और उद्योग-वार बैंक ऋण (एसआईबीसी) विवरणी पर आधारित होते हैं, जिसमें माह के अंतिम शुक्रवार से संबंधित सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा दिए गए कुल गैर-खाद्य ऋण का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा रखने वाले चुनिंदा बैंकों को शामिल किया गया है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़े उपलब्ध हैं। 31 दिसंबर 2025 से, बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम 2025 के तहत अंतिम रिपोर्टिंग पखवाड़े की परिभाषा को बदलकर महीने का अंतिम दिन कर दिया गया है। तदनुसार, दिसंबर 2025 से वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दरें वर्तमान वर्ष के लिए माह के अंत के आंकड़ों और पिछले वर्ष के तदनुरूपी माह के लिए अंतिम रिपोर्टिंग पखवाड़े (पुराने परिभाषा के अनुसार) के आंकड़े पर आधारित हैं।


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