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रिज़र्व बैंक ने आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45 डब्ल्यू के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-केंद्रीय रूप से समाशोधित ओटीसी डेरिवेटिव के लिए मार्जिन) निदेश, 2022 का ड्राफ्ट जारी किया

16 जून 2022

रिज़र्व बैंक ने आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45 डब्ल्यू के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-केंद्रीय
रूप से समाशोधित ओटीसी डेरिवेटिव के लिए मार्जिन) निदेश, 2022 का ड्राफ्ट जारी किया

भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज अपनी वेबसाइट पर भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-केंद्रीय रूप से समाशोधित ओटीसी डेरिवेटिव के लिए मार्जिन) निदेश, 2022 का ड्राफ्ट जारी किया। ड्राफ्ट निदेश पर बैंकों, बाजार सहभागियों और अन्य इच्छुक पार्टियों से 29 जुलाई 2022 तक फीडबैक आमंत्रित की गईं हैं।

ड्राफ्ट निदेश पर फीडबैक निम्नलिखित को प्रेषित किया जा सकता है:

मुख्य महाप्रबंधक, भारतीय रिज़र्व बैंक
वित्तीय बाजार विनियमन विभाग
9 वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन
शहीद भगत सिंह मार्ग, फोर्ट
मुंबई – 400 001

या ईमेल द्वारा जिसका विषय "ड्राफ्ट भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-केंद्रीय रूप से समाशोधित ओटीसी डेरिवेटिव के लिए मार्जिन) निदेश, 2022 पर फीडबैक" हो।

पृष्ठभूमि

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 6 फरवरी 2020 के विकासात्मक और विनियामक नीति वक्तव्य में घोषणा की थी कि आरबीआई, ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) डेरिवेटिव के निपटान की सुरक्षा में सुधार करने के लिए, जिसे केंद्रीय स्तर पर समाशोधित नहीं किया गया है, जी-20 की सिफारिशों के बाद, गैर-केंद्रीय रूप से समाशोधित ओटीसी डेरिवेटिव के लिए भिन्नता मार्जिन और प्रारंभिक मार्जिन के आदान-प्रदान के संबंध में निदेश जारी करेगा। तदनुसार, मास्टर निदेश - भारतीय रिज़र्व बैंक (भिन्नता मार्जिन) निदेश, 2022, 01 जून 2022 को जारी किया गया था। एनसीसीडी के लिए प्रारंभिक मार्जिन के आदान-प्रदान के लिए दिशानिर्देश निर्धारित करने वाले ड्राफ्ट निदेश अब फीडबैक के लिए जारी किए जा रहे हैं। ड्राफ्ट में भिन्नता और प्रारंभिक मार्जिन दोनों के लिए समेकित प्रावधान शामिल हैं। प्रारंभिक मार्जिन से संबंधित विनियमन, जिस पर फीडबैक मांगा जा रहा है, को विशिष्ट रूप से दर्शाया गया है।

(योगेश दयाल) 
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2022-2023/377


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