617 भारतीय रिज़र्व बैंक - अधिसूचनाएं

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अधिसूचनाएं

विदेशी मुद्रा प्रबंध (प्राधिकृत व्यक्ति) विनियमावली, 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक
(विदेशी मुद्रा विभाग)
केंद्रीय कार्यालय
मुंबई 400 001

अधिसूचना सं. फेमा 401/2026-आरबी

30 अप्रैल 2026

विदेशी मुद्रा प्रबंध (प्राधिकृत व्यक्ति) विनियमावली, 2026

विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 47 की उप-धारा (2) के खंड (एच) के साथ पठित धारा 10 द्वारा प्रदत्त शक्तियों तथा इस संबंध में सक्षम बनाने वाली अन्य सभी शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक, एतद्द्वारा निम्नलिखित विनियमावली बनाता है, अर्थात-

अध्याय I - प्रारंभिक

1. संक्षिप्त शीर्षक और प्रारंभ - (1) इन विनियमों को विदेशी मुद्रा प्रबंध (प्राधिकृत व्यक्ति) विनियमावली, 2026 कहा जाएगा।

(2) यह विनियमावली सरकारी राजपत्र में उसके प्रकाशन की तारीख से लागू होगी।

2. परिभाषा - (1) इस विनियमावली में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, यहां परिभाषित शब्दों के नीचे दिए गए अर्थ होंगे, तथा उनके सजातीय अभिव्यक्तियों का तदनुसार अर्थ लगाया जाएगा, -

(क) “अधिनियम” का अर्थ है विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42);

(ख) "वार्षिक विदेशी मुद्रा कारोबार" का अर्थ है किसी प्राधिकृत व्यक्ति या विदेशी मुद्रा प्रति‍नि‍धि द्वारा जनता से/को सीधे और अपने एजेंटों/फ्रेंचाइजी/ विदेशी मुद्रा प्रति‍नि‍धि के माध्यम से वित्तीय वर्ष के दौरान खरीदी और बेची गई कुल विदेशी मुद्रा से है, पर इसमें संसाधित आवक प्रेषण का मूल्य शामिल नहीं है।

(ग) "प्राधिकृत व्यापारी (एडी)" का अर्थ है वह व्यक्ति जो अधिनियम की धारा 10 की उप-धारा (1) के अधीन प्राधिकृत व्यापारी के रूप में प्राधिकृत किया गया हो;

(घ) "कंपनी" का अर्थ है कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) के अंतर्गत निगमित कंपनी;

(ङ) “नियंत्रण” का अर्थ वही होगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 की उपधारा (27) के तहत इसे दिया गया है;

(च) “निदेशक” का अर्थ वही होगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 की उपधारा (34) के तहत इसे दिया गया है;

(छ) “विदेशी मुद्रा प्रतिनिधि (एफएक्ससी)” का अर्थ है रिज़र्व बैंक द्वारा जारी विदेशी मुद्रा प्रतिनिधि योजना (एफसीएस) के अनुसार नियुक्त प्राधिकृत व्यापारी का एजेंट;

(ज) "संपूर्ण मुद्रा परिवर्तक (एफएफएमसी)" का अर्थ है अधिनियम की धारा 10 की उप-धारा (1) के अंतर्गत प्राधिकृत मुद्रा परिवर्तक;

(झ) "मुख्य प्रबंधकीय कार्मिक (केएमपी)" का अर्थ वही होगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 की उपधारा (51) के तहत इसे दिया गया है;

(ञ) "निवल मालियत" का अर्थ वही होगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 की उप-धारा (57) के तहत इसे दिया गया है;

(ट) “प्रमोटर” का अर्थ वही होगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 की उप-धारा (69) के तहत इसे दिया गया है;

(ठ) "महत्वपूर्ण प्रभाव" का अर्थ वही होगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 की उप-धारा (6) के स्पष्टीकरण (ए) के तहत इसे दिया गया है।

(2) इस विनियमावली में प्रयुक्त किन्तु परिभाषित न किए गए शब्दों और अभिव्यक्तियों के अर्थ वही होंगे जो उन्हें अधिनियम में दिए गए हैं।

अध्याय II – प्राधिकार प्रदान करना

3. प्राधिकार - (1) रिज़र्व बैंक से प्राधिकार लिए बिना कोई भी व्यक्ति प्राधिकृत व्यक्ति के रूप में कार्य नहीं करेगा।

(2) इस विनियमावली के लागू होने की तिथि को प्राधिकृत व्यक्ति, जारी किए गए प्राधिकार की शर्तों के साथ-साथ इस विनियमावली और समय-समय पर रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किए गए निदेशों के अनुसार, अपने मौजूदा प्राधिकार की समाप्ति तक प्राधिकृत व्यक्ति के रूप में कार्य करना जारी रख सकता है।

(3) प्राधिकृत व्यक्ति के रूप में प्राधिकार प्राप्त करने का इच्छुक व्यक्ति, रिज़र्व बैंक को ‘प्रवाह’ (PRAVAAH) पोर्टल (https://pravaah.rbi.org.in) के माध्यम से रिज़र्व बैंक के उस संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को आवेदन करेगा जिसके क्षेत्राधिकार में आवेदनकर्ता का पंजीकृत कार्यालय स्थित है।

(4) रिज़र्व बैंक नए प्राधिकार के लिए तीन श्रेणियों के तहत ही आवेदन पर विचार करेगा, यथा प्राधिकृत व्यापारी (एडी) श्रेणी-I, प्राधिकृत व्यापारी (एडी) श्रेणी-II और प्राधिकृत व्यापारी (एडी) श्रेणी-III, और ऐसे आवेदनों को इस विनियमावली के अनुसार संसाधित किया जाएगा। पात्रता शर्तें और अनुमत गतिविधियाँ क्रमशः नीचे विनियम 4 और 7 में विनिर्दिष्ट हैं।

(5) उप-विनियम (4) में उल्लिखित आवेदन को संसाधित करने के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा अपेक्षित अतिरिक्त सूचना और/या दस्तावेज आवेदक द्वारा रिज़र्व बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट समय के भीतर प्रस्तुत किया जाए।

(6) रिज़र्व बैंक द्वारा एफएफएमसी के रूप में नए प्राधिकार के लिए आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा, सिवाय उन आवेदनों के जो इस विनियमावली के लागू होने की तिथि तक प्रक्रियाधीन हैं। जहां कहीं भी रिज़र्व बैंक द्वारा ऐसे आवेदनों को संसाधित करने के लिए अतिरिक्त सूचना और/या दस्तावेज मांगे गए है, उन्हें इस विनियमावली के लागू होने की तिथि से तीस दिनों के भीतर प्रस्तुत किया जाए; अन्यथा आवेदन अस्वीकृत माना जाएगा। ऐसे आवेदनों को अनुबंध में सूचीबद्ध पात्रता शर्तों, दस्तावेजों और प्रक्रिया के अनुसार संसाधित किया जाएगा।

4. पात्रता मानदंड - (1) आवेदक कंपनी अधिनियम 2013 के तहत पंजीकृत कंपनी हो।

(2) आवेदक के संस्था के बहि‍र्नि‍यम (एमओए) में विदेशी मुद्रा संबंधित वह गतिविधि शामिल हो जिसके लिए प्राधिकार मांगा जा रहा है।

(3) आवेदन करते समय आवेदक को निम्नलिखित मानदंड पूरा करने होंगे:

प्राधिकृत व्यक्ति की श्रेणी पात्र संस्थाएं
एडी श्रेणी-I रिज़र्व बैंक द्वारा लाइसेंस प्राप्त बैंक।
एडी श्रेणी-II i. रिज़र्व बैंक द्वारा लाइसेंस प्राप्त बैंक या रिज़र्व बैंक के साथ पंजीकृत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी)।

ii. संपूर्ण मुद्रा परिवर्तक या विदेशी मुद्रा प्रतिनिधि जो कम से कम दो वर्षों से कार्यरत हैं और जिनका पिछले दो वित्तीय वर्षों के दौरान औसत वार्षिक विदेशी मुद्रा कारोबार 50 करोड़ का रहा है।
एडी श्रेणी-III एक संस्था:

i. जिसे अपने द्वारा की जाने वाली गतिविधियों के लिए विदेशी मुद्रा में लेन-देन करना आवश्यक है; या

ii. जो ऐसे नवीन उत्पाद और सेवाएं प्रदान करने का इरादा रखते हैं जिनमें विदेशी मुद्रा में लेन-देन शामिल है।

(4) आवेदक, प्राधिकृत व्यक्ति के रूप में व्यवसाय की शुरुआत के समय (अपने नवीनतम अंकेक्षित तुलन-पत्र के आधार पर) निम्नलिखित न्यूनतम निवल मालियत रखता हो और अपने सांविधिक लेखापरीक्षकों से इस आशय का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करे:

प्राधिकृत व्यक्ति की श्रेणी न्यूनतम निवल मालियत
एडी श्रेणी-II 10 करोड़
एडी श्रेणी-III 2 करोड़

(5) आवेदक, उसके प्रमोटर, निदेशक और मुख्य प्रबंधकीय कार्मिक (केएमपी) निम्नलिखित पहलुओं पर 'उपयुक्त एवं उचित' हों:

(क) वित्तीय सेवा उद्योग में योग्यता और अनुभव।

(ख) ईमानदारी, प्रतिष्ठा और चरित्र।

(ग) किसी न्यायालय से दोषसिद्धि या प्रतिबंध आदेश, कंपनी अधिनियम, 2013 या अन्य लागू कॉरपोरेट कानून के तहत अयोग्यता, किसी नियामक संस्था द्वारा लगाए गए प्रतिबंध, या किसी पेशेवर संस्था से निष्कासन का न होना:

बशर्ते कि कम से कम 50% निदेशक और केएमपी के पास वित्तीय सेवा उद्योग में योग्यता और अनुभव हो।

(6) यदि कोई आवेदक या उसका कोई प्रमोटर, निदेशक या केएमपी या इसकी मूल संस्था प्रवर्तन निदेशालय (डीओई) द्वारा जांच के अधीन है, तो आवेदक को आवेदन के साथ डीओई से प्राप्त अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्रस्तुत करना होगा, जिसकी तिथि ऐसे आवेदन की तिथि से तीस दिन पूर्व की न हो:

बशर्ते कि यदि अनुरोध प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर डीओई से कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है, तो आवेदक द्वारा इस संबंध में की गई घोषणा के आधार पर डीओई से एनओसी प्राप्त किए बिना ही आवेदन पर कार्रवाई की जाएगी। डीओई को ऐसा अनुरोध रिज़र्व बैंक को किए गए आवेदन की तिथि से नब्बे दिन पहले नहीं किया गया हो।

(7) छूट - इस विनियम के उप-विनियम (1), (4) और (5) उन संस्थाओं पर लागू नहीं होंगे जो अन्य अधिनियमों के प्रावधानों के तहत रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित हैं।

5. मौजूदा प्राधिकृत व्यक्तियों के प्राधिकार का नवीनीकरण – इस विनियमावली के लागू होने की तिथि पर प्राधिकृत व्यक्ति के रूप में गतिविधियाँ संचालित करने वाली कोई संस्था, इस विनियमावली के अंतर्गत अपने मौजूदा प्राधिकरण के नवीनीकरण के लिए आवेदन कर सकती है, यदि उसकी न्यूनतम निवल मालियत –

(क) एकल शाखा एफएफएमसी के मामले में 25 लाख है;

(ख) बहु शाखा एफएफएमसी के मामले में 50 लाख है;

(ग) एडी श्रेणी-II के मामले में 10 करोड़ है;

(घ) एडी श्रेणी-III के मामले में 2 करोड़ है:

और वह विनियम 4 के उप-विनियम (5) और (6) के प्रावधानों का पालन करती है।

(2) मौजूदा प्राधिकार के नवीनीकरण के लिए आवेदन मौजूदा प्राधिकार की समाप्ति से कम से कम दो महीने पहले किया जाए। ऐसे मामले में, मौजूदा प्राधिकार तब तक लागू रहेगा जब तक कि इस विनियमावली के तहत नवीनीकरण प्रदान न किया जाए या आवेदन अस्वीकृत न हो जाए, जैसी स्थिति हो।

6. आवेदन पर विचार - (1) रिज़र्व बैंक, आवेदन पर विचार करते समय, सभी पहलुओं की जांच करेगा जिन्हें वह प्रासंगिक मानता है, जिसमें इस विनियमावली में उल्लिखित, पर केवल इन्हीं तक सीमित नहीं, विनिर्दिष्ट पात्रता शर्तें शामिल होंगी और रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित संस्थाओं के मामले में, रिज़र्व बैंक के संबंधित विनियामक और पर्यवेक्षी विभागों से प्राप्त जानकारी भी शामिल होगी।

(2) प्राधिकार प्रदान करने या नवीनीकरण के लिए कोई भी आवेदन–

(क) जो गलत, झूठा या भ्रामक प्रकृति का हो; या

(ख) जहाँ आवेदक इस विनियमावली के तहत निर्धारित योग्यता आवश्यकताओं का पालन नहीं कर रहा है; या

(ग) जहाँ आवेदक या उसके किसी प्रमोटर, निदेशक या केएमपी को इस विनियमावली के विनियम 4(5) में वर्णित पात्रता आवश्यकताओं के पालन में 'उपयुक्त एवं उचित' नहीं माना जाता हो; या

(घ) जो लोक हित में नहीं है;

रिज़र्व बैंक द्वारा अस्वीकार किया जा सकता है।

(3) किसी संस्था–

(क) जिसका प्राधिकार किसी भी कारण से वापस ले लिया गया है; या

(ख) जिसने किसी भी कारण से अपना प्राधिकार स्वेच्छा से समर्पित कर दिया है; या

(ग) जिसका प्राधिकार प्राप्त करने या नवीनीकरण का आवेदन निवल मालियत पूरा करने मे असमर्थता के अलावा रिज़र्व बैंक द्वारा किसी भी कारण से अस्वीकृत किया गया हो; या

(घ) जहाँ एक या अधिक प्रमोटर या निदेशक या केएमपी का इस उप-विनियम के खंड (क), (ख) और (ग) में सूचीबद्ध किसी भी इकाई पर महत्वपूर्ण प्रभाव हो;

उसके द्वारा प्राधिकार प्रदान करने या नवीनीकरण के लिए प्रस्तुत आवेदन पर, प्राधिकार के निरस्तीकरण या स्वैच्छिक परित्याग या आवेदन की अस्वीकृति की तारीख से एक वर्ष की अवधि तक रिज़र्व बैंक द्वारा विचार नहीं किया जाएगा।

अध्याय III – अनुमत गतिविधियां

7. अनुमत गतिविधियां – जब तक कि रिज़र्व बैंक द्वारा विशेष रूप से अनुमति न दी गई हो या प्रतिबंधित न किया गया हो प्राधिकृत व्यक्ति को नीचे सूचीबद्ध गतिविधियों की सुविधा प्रदान करने की अनुमति होगी:

श्रेणी अनुमत गतिविधियां
एडी श्रेणी-I अधिनियम के तहत अनुमत कोई भी चालू खाता और पूंजी खाता लेनदेन।
एडी श्रेणी-II i. उपहार और दान को छोड़कर अधिनियम के तहत अनुमत कोई भी गैर-व्यापारिक चालू खाता लेनदेन।

ii. प्रति लेनदेन 25 लाख तक विदेशी व्यापार लेनदेन।
एडी श्रेणी-III जैसा रिज़र्व बैंक द्वारा जारी प्राधिकार में उल्लेख किया गया हो।
संपूर्ण मुद्रा परिवर्तक (एफएफएमसी) i. विदेशी मुद्रा नोट और यात्री चेक की खरीद;

ii. विदेश यात्रा के उद्देश्यों के लिए विदेशी मुद्रा नोटो और यात्री चेको की बिक्री; और

iii. मुद्रा अंतरण सेवा योजना (एमटीएसएस) के दिशानिर्देशों के अनुसार एमटीएसएस एजेंट के रूप में कार्य।

अध्याय IV – प्राधिकार की शर्तें

8. प्राधिकार की शर्तें - (1) इस विनियमावली के अंतर्गत दिया गया प्राधिकार तब तक वैध रहेगा जब तक रद्द या परित्याग नहीं कर दिया जाता:

बशर्ते कि किसी बैंक या एनबीएफसी को दिया गया प्राधिकार क्रमश: उसके बैंकिंग लाइसेंस या पंजीकरण प्रमाण पत्र के समापन के साथ समाप्त हो जाएगा।

(2) रिज़र्व बैंक द्वारा प्रदान किया गया प्राधिकार उसमें दी गई शर्तों के अधीन होगा। रिज़र्व बैंक किसी भी समय प्राधिकार की किसी भी मौजूदा शर्त को परिवर्तित या रद्द कर सकता है या नई शर्तें लागू कर सकता है।

(3) बैंक या एनबीएफसी के अलावा प्राधिकृत व्यक्ति को, इस विनियमावली के लागू होने की तिथि या विदेशी मुद्रा व्यापार के प्रारंभ करने के दो वर्ष के भीतर, जो भी बाद में हो, निम्नलिखित न्यूनतम वार्षिक विदेशी मुद्रा कारोबार करना होगा, और उसके बाद निरंतर आधार पर न्यूनतम वार्षिक विदेशी मुद्रा कारोबार को बनाए रखना होगा:

प्राधिकृत व्यक्ति की श्रेणी न्यूनतम वार्षिक विदेशी मुद्रा कारोबार
एडी श्रेणी-II 50 करोड़
एफएफएमसी 10 करोड़

(4) इस विनियमावली के अंतर्गत, या रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट, न्यूनतम निवल मालियत, टर्नओवर और ‘उपयुक्त एवं उचित’ स्थिति सहित सभी आवश्यकताओं को निरंतर आधार पर पूरा किया जाए तथा किसी भी विचलन को रिज़र्व बैंक के ध्यान में तुरंत लाया जाए।

(5) यदि प्राधिकृत व्यक्ति की निवल मालियत इस विनियमावली के तहत विनिर्दिष्ट न्यूनतम से कम हो जाती है, तो प्राधिकृत व्यक्ति को छह महीने की अवधि के भीतर या रिज़र्व बैंक द्वारा दी गई अतिरिक्त अवधि के भीतर निवल मालियत को अपेक्षित न्यूनतम स्तर पर बहाल करना होगा। ऐसा न करने पर प्राधिकार रद्द किया जा सकता है।

(6) बैंक के अलावा कोई प्राधिकृत व्यक्ति:

(क) प्राधिकार जारी होने की तारीख से छह महीने की अवधि के भीतर अपना परिचालन शुरू कर देगा और भारतीय रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को सूचित करेगा;

(ख) प्रबंधन या नियंत्रण या 50% से अधिक स्वामित्व में किसी भी परिवर्तन से पहले रिज़र्व बैंक से स्वीकृति प्राप्त करेगा;

(ग) वित्तीय वर्ष के दौरान निदेशक या केएमपी में किसी भी परिवर्तन, तथा मौजूदा प्रमोटर या निदेशक या केएमपी की ‘उपयुक्त एवं उचित’ स्थिति को प्रभावित करने वाली घटनाओं/सूचनाओं की रिपोर्ट वर्ष की समाप्ति से 30 दिनों के भीतर रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत करेगा;

(घ) प्रवर्तन निदेशालय (डीओई) द्वारा उसके विरुद्ध शुरू की गई जांच का विवरण, जांच के बारे में जानकारी प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत करेगा।

(7) प्राधिकृत व्यक्ति इस विनियमावली के अंतर्गत अनुमत गतिविधियों को किसी भी व्यवसाय स्थल से संचालित कर सकता है। बैंक के अलावा प्राधिकृत व्यक्ति:

(क) किसी नए स्थान पर व्यवसाय शुरू करने (जिसमें अस्थायी काउंटर खोलना भी शामिल है) की सूचना उस नए स्थान से व्यवसाय शुरू करने के सात कैलेंडर दिनों के भीतर;

(ख) किसी व्यवसाय स्थल को बंद करने की सूचना, जिसमें अस्थायी काउंटर भी शामिल है, बंद करने के सात कैलेंडर दिनों के भीतर; और

(ग) पंजीकृत कार्यालय, जो व्यवसाय का स्थान न हो, के स्थानांतरण की सूचना, स्थानांतरण के सात कैलेंडर दिनों के भीतर;

APConnect1 एप्लीकेशन (https://apconnect.rbi.org.in/) के माध्यम से रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत करेगा।

(8) प्राधिकृत व्यक्ति विदेशी मुद्रा में लेन-देन करते समय (प्रत्यक्ष रूप से या किसी विदेशी मुद्रा प्रतिनिधि या फ्रेंचाइजी के माध्यम से) अधिनियम की धारा 10 की उपधारा (5) का अनुपालन सुनिश्चित करेगा।

(9) रिज़र्व बैंक द्वारा, प्राधिकार को किसी भी समय रद्द किया जा सकता है, यदि वह संतुष्ट हो जाए कि:

(क) ऐसा करना लोक हित में है; या

(ख) प्राधिकृत व्यक्ति प्राधिकार की शर्त का अनुपालन करने में असफल रहा है या उसने अधिनियम के किसी भी प्रावधान या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम, विनियम, अधिसूचना, निदेश या आदेश के किसी प्रावधान का उल्लंघन किया है।

अध्याय V – अपील प्रक्रिया

9. अपील - (1) जिस आवेदक का प्राधिकार हेतु किया गया आवेदन रिज़र्व बैंक द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया है, या प्राधिकृत व्यक्ति जिसका प्राधिकार रद्द कर दिया गया है, वह आवेदन की अस्वीकृति या रद्द करने के विरुद्ध अपील प्राधिकारी अर्थात् विदेशी मुद्रा विभाग, केंद्रीय कार्यालय, भारतीय रिज़र्व बैंक, मुंबई के प्रभारी कार्यपालक निदेशक को अपील कर सकता है।

(2) उप-विनियम (1) के अंतर्गत अपील आवेदन की अस्वीकृति या प्राधिकार के निरसन की सूचना देने वाले पत्र की प्राप्ति की तारीख के पैंतालीस कैलेंडर दिनों के भीतर दायर की जा सकती है।

(3) अपील प्राप्त होने पर, अपील प्राधिकारी आवेदक को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात्, अपील प्राप्त होने की तिथि से साठ कैलेंडर दिनों के भीतर युक्तिसंगत आदेश पारित कर सकता है।

अध्याय VI – विदेशी मुद्रा प्रतिनिधि योजना (एफसीएस)

10. विदेशी मुद्रा प्रतिनिधि - (1) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I या प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II, 'प्रिंसिपल-एजेंट' मॉडल के तहत मुद्रा विनिमय व्यवसाय संचालित करने के लिए संस्था या संस्थाओं को जिन्हें विदेशी मुद्रा प्रतिनिधि (एफएक्ससी) के रूप में एजेंट के तौर पर नियुक्त कर सकते हैं।

(2) इस अध्याय में दी गई विदेशी मुद्रा प्रतिनिधि योजना के अनुरूप एफएक्सी को अपने किसी भी ग्राहक या अन्य संस्थाओं के साथ विदेशी मुद्रा में लेन-देन करने की अनुमति है।

11. अनुमत गतिविधियां - एफएक्ससी को निम्नलिखित गतिविधियां करने की अनुमति है:

(क) विदेशी मुद्रा नोटो/सिक्के और यात्री चेको की खरीद;

(ख) विदेश यात्रा के लिए विदेशी मुद्रा नोटो/सिक्के और यात्री चेको की बिक्री; और

(ग) मुद्रा अंतरण सेवा योजना (एमटीएसएस) के दिशानिर्देशों के अनुसार एमटीएसएस उप-एजेंट के रूप में कार्य।

12. अभिशासन - प्रिंसिपल अपने बोर्ड की स्वीकृति से विदेशी मुद्रा प्रतिनिधियो को नियुक्त करने के लिए आंतरिक नीति तैयार करेगा। इस नीति में, अन्य बातों के साथ-साथ, उन संस्थाओं के प्रकार, जिन्हें वह एफएक्ससी के रूप में नियुक्त करना चाहता है, ऐसी संस्थाओं के लिए 'उपयुक्त एवं उचित' मानदंड, एफएक्ससी के माध्यम से वह कौन सी गतिविधियां संचालित करना चाहता है, निवल मालियत, समुचित सावधानी, प्रणालियाँ और नियंत्रण, लेनदेन रिपोर्टिंग, एफएक्ससी द्वारा लगाए जा सकने वाले प्रभार, ग्राहक सेवा और शिकायत निवारण तंत्र से संबंधित अपेक्षाएं शामिल होंगी।

13. एफएक्ससी की कार्यप्रणाली - (1) इस योजना के तहत एफएक्ससी द्वारा किए गए सभी लेन-देन संबंधित प्रिंसिपल के बही-खातों में दर्ज किए जाएंगे।

(2) एक एफएक्ससी एक से अधिक प्राधिकृत व्यापारियों के एजेंट के रूप में कार्य कर सकता है।

(3) एक एफएक्ससी, अपने प्रिंसिपल की स्वीकृति से, किसी अन्य एफएक्ससी या किसी प्राधिकृत व्यक्ति, जो उसका प्रिंसिपल नहीं है, के साथ विदेशी मुद्रा में लेन-देन कर सकता है।

14. प्रिंसिपल के दायित्व – प्रिंसिपल:

(क) एफएक्ससी के प्रत्येक आउटलेट को आवश्यक अनुमति जारी करेगा और ऐसी अनुमति की एक प्रति संबंधित आउटलेट पर प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाना सुनिश्चित करेगा;

(ख) अपने द्वारा नियुक्त किए गए सभी एफएक्ससी के विवरण, उनके कारोबार के स्थान/ स्थानों के साथ, APConnect एप्लीकेशन के माध्यम से, रिज़र्व बैंक को प्रत्येक कैलेंडर तिमाही की समाप्ति के 15 दिनों के अंदर प्रस्तुत करेगा;

(ग) अपने एफएक्ससी की अभिरक्षा या स्वामित्व में रखी ग्राहक सूचना का परिरक्षण, संरक्षण, सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करेगा;

(घ) यह सुनिश्चित करेगा कि एफएक्ससी, अधिनियम के तहत विदेशी मुद्रा लेन-देन संबंधी नियमों, विनियमों, और निदेशों, जो कि उसके प्रिंसिपल पर लागू होते हैं, का पालन करें।

15. आउटसोर्सिंग जोखिमों का प्रबंधन – गैर-बैंक प्राधिकृत व्यापारी, जो प्रिंसिपल के रूप में कार्य कर रहा है, चाहे वह एनबीएफसी हो या नहीं, “भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां - आउटसोर्सिंग पर जोखिमों का प्रबंधन) निदेश, 2025" में निहित दिशानिर्देशों का पालन करेगा।

अध्याय VII - प्राधिकृत व्यक्तियों के फ्रेंचाइजी

16. फ्रेंचाइजी – (1) प्राधिकृत व्यक्ति, समय-समय पर यथा संशोधित 'मास्टर निदेश - मुद्रा परिवर्तन संबंधी गतिविधियां’ के खंड III में निहित 'एडी श्रेणी-I, एडी श्रेणी-II और एफएफएमसी द्वारा एजेंटों/फ्रेंचाइजी की नियुक्ति के लिए दिशानिर्देश' के अंतर्गत कोई भी नया फ्रेंचाइजी करार नहीं करेगा।

(2) इस विनियमावली के लागू होने की तिथि तक वैध फ्रेंचाइजी करार विनियमावली के लागू होने की तिथि से दो वर्ष के भीतर समाप्त करने होंगे। इसके पश्चात, फ्रेंचाइजी को एफसीएस के अंतर्गत दी गई शर्तों के अधीन, एफएक्ससी के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।

(एन सेंथिल कुमार)
मुख्य महाप्रबंधक


अनुबंध
[कृपया विनियम 3(6) देखें]

1. आवेदक, कंपनी अधिनियम, 1956/ कंपनी अधिनियम 2013/ कंपनी पंजीकरण (सिक्किम) अधिनियम, 1961 के तहत पंजीकृत कंपनी होनी चाहिए।

2. एफएफएमसी के रूप में विचार किए जाने के लिए आवश्यक न्यूनतम नि‍वल स्वामित्व नि‍धि (एनओएफ) निम्नलिखित हैं:

श्रेणी न्यूनतम एनओएफ
एकल शाखा एफएफएमसी 25 लाख
बहु शाखा एफएफएमसी 50 लाख
नोट: बैंकों से भिन्न आवेदकों के लिए न्यूनतम निवल स्वामित्व निधि की गणना निम्ननानुसार की जाएगी।

(क) स्वामित्व वाली निधि: (प्रदत्त पूंजी + निर्बाध आरक्षित निधियां + लाभ एवं हानि खाते में क्रेडिट शेष) में से घटाएं (उपचित हानि शेष, आस्थगित राजस्व व्यय एवं अन्य अमूर्त आस्तियां)

(ख) निवल स्वामित्व निधि: स्वामित्व वाली निधियों में से घटाई गई वह राशियाँ जिसमें इसकी सहायक कंपनियों के शेयरों में निवेश की राशि शामिल है, इसके अलावा एक ही समूह की कंपनियों, सभी (अन्य) गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों तथा डिबेंचरों, बांडों, बकाया ऋण एवं अग्रिम, जो उनकी सहायक कंपनियों और उसी समूह के कंपनियों में स्वामित्व निधि के 10% से अधिक जमा किए गए हो, शामिल है।

3. आवेदक के लिए ‘उपयुक्त एवं उचित’ मानदंड: यदि डीओई/डीआरआई या किसी अन्य विधि प्रवर्तन प्राधिकरण द्वारा किसी कंपनी/उसके निदेशकों के खिलाफ कोई मामला शुरू किया गया है/लंबित है, तो कंपनी को ‘उपयुक्त एवं उचित’ नहीं माना जाएगा और एफएफएमसी के रूप में लाइसेंस के लिए उसके आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।

4. निदेशकों के लिए ‘उपयुक्त एवं उचित’ मानदंड:

(क) आवेदक के बोर्ड को योग्यता, विशेषज्ञता, कार्य अनुभव, सत्यनिष्ठा और अन्य ‘उपयुक्त एवं उचित’ मानदंडों के आधार पर, बोर्ड में निदेशक के रूप में नियुक्ति/नियुक्ति जारी रखने के लिए व्यक्ति की उपयुक्तता निर्धारित करने हेतु उचित जांच प्रक्रिया अपनानी चाहिए। ईमानदारी और उपयुक्तता का आकलन करने के लिए, आपराधिक रिकॉर्ड (यदि कोई हो), वित्तीय स्थिति, व्यक्तिगत ऋणों की वसूली के लिए शुरू की गई सिविल कार्रवाई, पेशेवर निकायों में प्रवेश से इनकार या निष्कासन, नियामकों या इसी तरह के निकायों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध, पिछली संदिग्ध व्यावसायिक प्रथाएं आदि जैसे कारकों पर विचार किया जाना चाहिए। निदेशक बोर्ड को स्व-घोषणा, बाजार से सत्यापन रिपोर्ट आदि के माध्यम से जानकारी मंगवाकर ‘उपयुक्त एवं उचित’ स्थिति का आकलन करना चाहिए। आवेदक को इस उद्देश्य के लिए, प्रस्तावित / मौजूदा निदेशकों से ‘रिपोर्टिंग पर मास्टर निदेश के अनुसार’ आवश्यक जानकारी और घोषणा प्राप्त करनी चाहिए।

(ख) नियुक्ति/नियुक्ति के नवीनीकरण के समय उचित जांच-पड़ताल की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

(ग) आवेदक के बोर्ड को घोषणाओं की जांच करने के लिए नामांकन समिति का गठन करना चाहिए।

(घ) हस्ताक्षरित घोषणा में दी गई जानकारी के आधार पर, नामांकन समिति को स्वीकृति या अस्वीकृति का निर्णय लेना चाहिए और जहां आवश्यक समझा जाए, वहां संबंधित प्राधिकारी/व्यक्तियों को निदेश भेजकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे विनिर्दिष्ट आवश्यकताओं का अनुपालन कर रहे हैं।

(ङ) उम्मीदवार की आयु के संबंध में कंपनी अधिनियम 2013 के प्रावधान लागू होंगे। इसके अलावा, उम्मीदवार संसद सदस्य/विधानसभा सदस्य/विधान परिषद का सदस्य नहीं होना चाहिए।

5. रिज़र्व बैंक द्वारा लाइसेंस प्राप्त/प्राधिकृत आवेदक या उसकी मूल संस्था के संचालन पर रिज़र्व बैंक के संबंधित विभागों से टिप्पणियां प्राप्त की जाएंगी।

6. दस्तावेजीकरण: निर्धारित प्रपत्र में आवेदन पत्र निम्नलिखित दस्तावेजों के साथ जमा किया जाना चाहिए:

(क) निगमन प्रमाण पत्र की प्रति।

(ख) संस्था के अंतर्नियम एवं बहिर्नियम की प्रतिलिपि, जिसमें मुद्रा परिवर्तक कारोबार करने संबंधी प्रावधान हो या कंपनी लॉ-बोर्ड में इस आशय से संबंधित समुचित संशोधन के लिए आवेदन किया गया हो।

(ग) नवीनतम लेखापरीक्षित खातों की प्रतिलिपियाँ, जिसके साथ आवेदन की तारीख पर निवल स्वामित्व निधि के बारे मे सांविधिक लेखाकार का प्रमाणपत्र हो। जहां लागू हो, वहां कंपनी के पिछले तीन वर्षों के लेखापरीक्षित तुलन-पत्र एवं लाभ तथा हानि लेखा की प्रतियां।

(घ) सीलबंद लिफाफे में आवेदक के बैंकर की गोपनीय रिपोर्ट।

(ङ) इस आशय की घोषणा कि प्रवर्तन निदेशालय (डीओई) / राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) या किसी अन्य विधि प्रवर्तन प्राधिकरण द्वारा आवेदक कंपनी या उसके निदेशकों के विरुद्ध कोई कार्यवाही शुरू नहीं की गई है / लंबित नहीं है और आवेदक कंपनी या उसके निदेशकों के विरुद्ध कोई आपराधिक मामला शुरू नहीं किया गया है / लंबित नहीं है।

(च) इस आशय की घोषणा कि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी किए गए केवाईसी दिशानिर्देशों के अनुसार उचित नीतिगत ढांचा, रिज़र्व बैंक की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद और परिचालन शुरू करने से पहले लागू किया जाएगा।

(छ) वित्तीय क्षेत्र में कार्यरत सहयोगी/संबद्ध संस्थाओं, जैसे एनबीएफ़सी आदि का विवरण।

(ज) मुद्रा परिवर्तन व्यवसाय शुरू करने के लिए बोर्ड के प्रस्ताव की प्रमाणित प्रति।

7. अधिकारप्राप्त समिति द्वारा अनुमति (क्लीयरेंस): एफएफएमसी लाइसेंस जारी करने के अनुरोध पर भारतीय रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा इसके लिए गठित अधिकार प्राप्त समिति की अनुमति के आधार पर विचार किया जाएगा।

8. अनुमोदन प्रदान करने या न करने के संबंध में रिज़र्व बैंक का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होगा।


1 APConnect से तात्पर्य रिज़र्व बैंक द्वारा इस उद्देश्य के लिए विनिर्दिष्ट किसी अन्य प्रणाली से भी होगा।


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