भारतीय रिज़र्व बैंक
(विदेशी मुद्रा विभाग)
केंद्रीय कार्यालय
मुंबई-400 001
सं. फेमा 8(आर)/2026-आरबी
6 जनवरी 2026
विदेशी मुद्रा प्रबंध (गारंटी) विनियमावली, 2026
विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 6 की उप-धारा (2) और धारा 47 की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और दिनांक 3 मई 2000 की अधिसूचना सं. फेमा 8/2000-आरबी का अधिक्रमण करते हुए, इस तरह के अधिक्रमण से पहले की गई या की जाने वाली चीजों को छोड़कर, भारतीय रिज़र्व बैंक निम्नलिखित विनियमावली बनाता है, यथा:
1. संक्षिप्त शीर्षक और प्रारंभ.- (1) इन विनियमों को विदेशी मुद्रा प्रबंध (गारंटी) विनियमावली, 2026 कहा जाएगा।
(2) यह विनियमावली सरकारी राजपत्र में उसके प्रकाशन की तारीख से लागू होगी।
2. परिभाषाएँ.- (1) इस विनियमावली में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) “अधिनियम” का अर्थ है विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42);
(ख) "प्राधिकृत व्यापारी" का अर्थ है वह व्यक्ति जो अधिनियम की धारा 10 की उप-धारा (1) के अधीन प्राधिकृत व्यापारी के रूप में प्राधिकृत किया गया हो;
(ग) "लेनदार" का अर्थ है वह व्यक्ति जिसे गारंटी दी गई है;
(घ) “गारंटी”, जिसमें “प्रति-गारंटी” भी शामिल है, का अर्थ है ऐसा अनुबंध, चाहे उसे किसी भी नाम से बुलाया जाये, जो वादे को पूरा करने, या ऋण, दायित्व या अन्य देनदारी (ऋणों, दायित्वों या अन्य देनदारियों के पोर्टफोलियो सहित) को चुकाने के लिए हो, यदि मुख्य देनदार डिफ़ॉल्ट करता है;
(ङ) "अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र" या "आईएफएससी" का वही अर्थ होगा जो अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण, 2019 (2019 का 50) की धारा 3 के खंड (छ) में विनिर्दिष्ट है;
(च) "मुख्य देनदार" का अर्थ है वह व्यक्ति जिसके चूक के संबंध में गारंटी दी गई है;
(छ) "जमानतदार" का अर्थ है वह व्यक्ति जो गारंटी देता है।
(2) इस विनियमावली में प्रयुक्त किन्तु परिभाषित नहीं किए गए शब्दों और अभिव्यक्तियों के क्रमशः वही अर्थ होंगे जो उन्हें अधिनियम या उसके तहत बनाए गए नियमावली या विनियमावली में विनिर्दिष्ट है।
3. निषेध.- अधिनियम अथवा अधिनियम के तहत जारी नियमों या विनियमों या निदेशों या भारतीय रिज़र्व बैंक की सामान्य या विशेष अनुमति में अन्यथा उपबंधित को छोड़कर, भारत में निवासी कोई व्यक्ति, इस विनियमावली के अनुसार के अलावा, किसी गारंटी का पक्षकार (मुख्य देनदार, जमानतदार या लेनदार) नहीं होगा, जहां गारंटी का कोई अन्य पक्षकार भारत के बाहर का निवासी व्यक्ति हो।
4. छूट.- इस विनियमावली में निहित कोई भी प्रावधान निम्नलिखित पर लागू नहीं होगाः
(क) भारत के बाहर या आईएफएससी में किसी प्राधिकृत व्यापारी बैंक की शाखा द्वारा दी गई गारंटी जब तक कि गारंटी के अन्य पक्षों में से कोई भी व्यक्ति भारत का निवासी न हो।
(ख) एक अभिरक्षक बैंक की क्षमता में एक प्राधिकृत व्यापारी द्वारा जारी की गई एक अप्रतिसंहरणीय भुगतान प्रतिबद्धता (आईपीसी), जहां मुख्य देनदार एक पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक है और लेनदार भारत में एक प्राधिकृत केंद्रीय प्रतिपक्षकार है।
(ग) विदेशी मुद्रा प्रबंध (पारदेशीय निवेश) विनियमावली, 2022 के अनुसार दी गई गारंटी।
5. जमानतदार या मुख्य देनदार के रूप में कार्य करने की अनुमति.- भारत में निवासी कोई व्यक्ति, निम्नलिखित शर्तों के अधीन, किसी गारंटी के लिए जमानतदार या मुख्य देनदार के रूप में कार्य कर सकता है-
(क) अंतर्निहित लेन-देन जिसके लिए गारंटी दी जा रही है या गारंटी की व्यवस्था की जा रही है, अधिनियम या अधिनियम के तहत जारी नियमों या विनियमों या निदेशों के तहत निषिद्ध नहीं है; और
(ख) जमानतदार और मुख्य देनदार समय-समय पर यथा संशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (उधार लेना एवं उधार देना) विनियमावली, 2018 के तहत क्रमशः एक-दूसरे को उधार देने एवं उधार लेने के लिए पात्र हैं:
बशर्ते कि खंड (ख) उस गारंटी पर लागू नहीं होगा -
(i) जो प्राधिकृत व्यापारी बैंक द्वारा दी गई हो और भारत के बाहर निवासी व्यक्ति की प्रति-गारंटी द्वारा कवर हो या उससे प्राप्त 100% संपार्श्विक जमा के बदले जारी को गई हो; या
(ii) जो भारत के बाहर निगमित किसी शिपिंग या एयरलाइन कंपनी के भारत में एजेंट द्वारा कंपनी की ओर से भारत में किसी सांविधिक या सरकारी प्राधिकरण के प्रति उसके दायित्व या देनदारी के संबंध में दी गई हो; या
(iii) जहां जमानतदार और मुख्य देनदार दोनों भारत में निवासी व्यक्ति हैं।
6. लेनदार के रूप में गारंटी प्राप्त करने की अनुमति.- भारत में निवासी कोई व्यक्ति जो लेनदार है वह अपने पक्ष में गारंटी की व्यवस्था कर सकता है या प्राप्त कर सकता है, बशर्ते कि जहां मुख्य देनदार और जमानतदार दोनों भारत के बाहर निवासी व्यक्ति हैं, तो लेनदार यह सुनिश्चित करेगा कि अंतर्निहित लेन-देन अधिनियम, या अधिनियम के तहत जारी नियमों या विनियमों या निदेशों के तहत निषिद्ध नहीं है।
7. रिपोर्टिंग आवश्यकताएं.- (1) इस विनियमावली के तहत दी गई गारंटियों की रिपोर्टिंग की जाएगी-
(क) जमानतदार द्वारा यदि वह भारत का निवासी व्यक्ति है; या
(ख) मुख्य देनदार द्वारा जिसने गारंटी की व्यवस्था की है और जहां जमानतदार भारत के बाहर निवासी व्यक्ति है; या
(ग) लेनदार द्वारा जहां जमानतदार और मुख्य देनदार दोनों भारत के बाहर निवासी व्यक्ति हैं या जहां लेनदार ने गारंटी की व्यवस्था की है।
(2) गारंटी की रिपोर्ट करने का दायित्व रखने वाला व्यक्ति, (क) गारंटी जारी करने, (ख) गारंटी की शर्तों में बाद में किसी भी के परिवर्तन, यथा - गारंटी राशि, अवधि का विस्तार या पूर्व-समाप्ति, और (ग) गारंटी के आह्वान, यदि कोई हो, की रिपोर्ट इन विनियमावली के अनुबंध में दिए गए प्रारूप में करेगा।
(3) उप-विनियम (1) और (2) में दिए गए प्रावधान के अनुसार रिपोर्टिंग, तिमाही आधार पर, संबंधित तिमाही की समाप्ति से पंद्रह कैलेंडर दिनों के भीतर, प्राधिकृत व्यापारी बैंक को की जाएगी ताकि उसे भारतीय रिज़र्व बैंक को भेजा जा सके।
(4) प्राधिकृत व्यापारी बैंक इस विनियमावली के तहत प्राप्त विवरणियों को भारतीय रिज़र्व बैंक को इस प्रयोजन के लिए निर्धारित तरीके और प्रारूप में संबंधित तिमाही की समाप्ति से तीस कैलेंडर दिनों के भीतर प्रस्तुत करेगा।
8. विलंबित रिपोर्टिंग के लिए विलंब प्रस्तुतीकरण शुल्क.- (1) भारत में निवासी व्यक्ति जो विनियम 7 के उप-विनियम (3) के तहत विनिर्दिष्ट अपने रिपोर्टिंग दायित्वों को पूरा नहीं करता है, वह विलंब प्रस्तुतिकरण शुल्क के साथ ऐसी रिपोर्टिंग कर सकता है या विलंब प्रस्तुतिकरण शुल्क का भुगतान कर सकता है जहां ऐसी रिपोर्टिंग में देरी हुई है।
(2) विलंब प्रस्तुतिकरण शुल्क ₹7500 + 0.025% x A x n होगा, जिसे निकटतम सौ तक पूर्णांकित किया जाएगा, जहाँ,
(क) “n” प्रस्तुत करने में हुई देरी के वर्षों की संख्या है, जिसे निकटतम महीने तक पूर्णांकित किया गया है और 2 दशमलव अंक तक व्यक्त किया गया है; और
(ख) "A" विलंबित रिपोर्टिंग में शामिल राशि है, जो कि रुपये में है।
(डॉ. आदित्य गेहा)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक |