आरबीआई/2025-26/205
ए.पी. (डीआईआर शृंखला) परिपत्र सं. 21
06 फरवरी 2026
सभी प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक
महोदया/महोदय
स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग - पूर्वानुमेयता प्रदान करना और व्यवसाय सुगमता बढ़ाना
कृपया ऋण लिखतों में एफपीआई निवेश के लिए स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (वीआरआर) पर दिनांक 06 फरवरी, 2026 के 2025-26 के लिए द्वि-मासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य के एक भाग के रूप में घोषित विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य के पैराग्राफ 15 का संदर्भ लें। इस संबंध में प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंकों का ध्यान समय-समय पर यथासंशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंधन (ऋण लिखत) विनियमावली, 2019 (अधिसूचना सं फेमा.396/2019-आरबी दिनांक 17 अक्टूबर, 2019) की अनुसूची-1 एवं मास्टर निदेश-भारतीय रिज़र्व बैंक (ऋण लिखतों में अनिवासी निवेश) निदेश, 2025 (एफएमआरडी. एफएमडी.सं.10/14.01.006/2024-25 दिनांक 07 जनवरी 2025) की ओर आकृष्ट किया जाता है।
2. समीक्षा के बाद, वीआरआर के तहत निवेश को नियंत्रित करने वाले विनियामक ढांचे में निम्नलिखित संशोधन करने का निर्णय लिया गया है:
ए) वीआरआर के तहत निवेश सीमा को सामान्य मार्ग के तहत एफपीआई निवेशों के लिए निवेश सीमा में समाविष्ट किया जाएगा। तदनुसार, केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों (ट्रेजरी बिल सहित), राज्य सरकार की प्रतिभूतियों और कॉर्पोरेट ऋण प्रतिभूतियों में वीआरआर के माध्यम से निवेश की गणना सामान्य मार्ग के तहत संबंधित प्रतिभूतियों के लिए निर्धारित निवेश सीमा के अंतर्गत की जाएगी।
बी) जिन विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने मास्टर निदेश में निर्धारित न्यूनतम प्रतिधारण अवधि से अधिक प्रतिधारण अवधि का लाभ उठाया है, उनके पास न्यूनतम प्रतिधारण अवधि की समाप्ति के पश्चात् अपने पोर्टफोलियो को पूर्णतः या आंशिक रूप से परिसमापन करने व वीआरआर से निकास का विकल्प होगा।
3. ये निदेश 01 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। वीआरआर के तहत सभी मौजूदा निवेशों को सामान्य मार्ग के तहत संबंधित निवेश सीमाओं में 01 अप्रैल 2026 को स्थानांतरित किया जाएगा। मास्टर निदेश में किए जा रहे संशोधनों को इसके साथ अनुबंध में रखा गया है।
4. प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक इस परिपत्र की विषय-वस्तु को अपने घटकों और संबंधित ग्राहकों के ध्यान में लाएँ।
5. इस परिपत्र में निहित निदेश विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 10(4) और 11(1) के तहत जारी किए गए हैं और किसी अन्य कानून के तहत आवश्यक अनुमति/अनुमोदन, यदि कोई हो, पर प्रतिकूल प्रभाव के बिना हैं।
भवदीया,
(डिंपल भांडिया)
मुख्य महाप्रबंधक
अनुबंध
| क्र. सं. |
मौजूदा निदेश |
संशोधित/अतिरिक्त निदेश |
| भाग - 2 के पैराग्राफ 4.2 में, खंड 'नोट' के तहत, मौजूदा खंड (डी) के बाद, एक नया खंड (ई) डाला जाएगा। |
| (i) |
- |
(ई) स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग के माध्यम से केन्द्र सरकार की प्रतिभूतियों (ट्रेजरी बिल सहित), राज्य सरकार की प्रतिभूतियों और कारपोरेट ऋण प्रतिभूतियों में निवेश की गणना सामान्य मार्ग के अंतर्गत क्रमश: केन्द्र सरकार की प्रतिभूतियों (ट्रेजरी बिल सहित), राज्य सरकार की प्रतिभूतियों और कारपोरेट ऋण प्रतिभूतियों के लिए निवेश सीमा के अंतर्गत की जाएगी। |
| भाग - 3 के पैराग्राफ 5.3 में, मौजूदा शब्दों को निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाएगा, और इसके मौजूदा फुटनोट सं. 5 को हटा दिया जाएगा। |
| (ii) |
₹2,50,000 करोड़5 या उससे अधिक, जैसा कि रिज़र्व बैंक द्वारा अधिसूचित किया जाए। निवेश सीमा एक या अधिक किस्तों में जारी की जा सकती है। फुटनोट: 501 मार्च, 2019 के एपी (डीआईआर शृंखला) परिपत्र सं.21 के तहत जारी निदेशों के अनुसार वीआरआर-सरकार या वीआरआर-कॉर्प के तहत आवंटित किसी भी निवेश सीमा को निदेशों के पैरा 5.3 के अनुसार समग्र सीमा के तहत निवेश सीमा के रूप में माना जाएगा। |
वीआरआर के तहत किया गया निवेश सामान्य मार्ग के तहत एफपीआई निवेश के लिए निर्धारित निवेश सीमा के अधीन होगा, जैसा कि पैराग्राफ 4.2 में निर्दिष्ट किया गया है। |
| भाग – 3 में, पैराग्राफ 5.5 में मौजूदा खंड (ii) के बाद, निम्नलिखित नया खंड (iii) डाला जाएगा, अर्थात्: - |
| (iii) |
- |
(iii) जिन एफपीआई ने पैराग्राफ 5.3 (ii) के अनुसार निर्धारित न्यूनतम प्रतिधारण अवधि से अधिक प्रतिधारण अवधि के लिए निवेश सीमा का लाभ उठाया है, वे न्यूनतम प्रतिधारण अवधि की समाप्ति के पश्चात् अपने पोर्टफोलियो को पूर्णतः या आंशिक रूप से परिसमापन करने व वीआरआर से निकास का विकल्प चुन सकते हैं। |
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