(01 जुलाई 2026 को अद्यतन किया गया)
1. आरबी-आइओएस, 2026 क्या है?
रिज़र्व बैंक - एकीकृत ओम्बड्समैन योजना, 2026 (आरबी-आइओएस, 2026 / योजना) योजना के दायरे में आने वाली विनियमित संस्थाओं की सेवा में कमी से जुड़ी ग्राहक शिकायतों के समाधान के लिए एक निःशुल्क, त्वरित और गैर-विरोधात्मक वैकल्पिक शिकायत निवारण तंत्र है। यह 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी।
आरबी-आइओएस, 2026 रिज़र्व बैंक - एकीकृत ओम्बड्समैन योजना, 2021 को प्रतिस्थापित करती है। 1 जुलाई 2026 से पहले प्राप्त शिकायतें; आरबी-आइओएस, 2021 के तहत निर्णयों से उत्पन्न अपीलें; और इसके तहत जारी किए गए अधिनिर्णयों का निष्पादन आरबी-आइओएस, 2021 और आरबीआई के संबंधित निर्देशों के तहत ही जारी रहेगा।
2. आरबीआई वैकल्पिक शिकायत निवारण (एजीआर) ढांचा क्या है?
रिज़र्व बैंक के एजीआर ढांचे में आरबीआई ओम्बड्समैन के कार्यालय, केंद्रीकृत प्राप्ति और प्रसंस्करण केंद्र (सीआरपीसी), उपभोक्ता शिक्षण और संरक्षण कक्ष (सीईपीसी) और उपभोक्ता शिक्षण और संरक्षण विभाग (सीईपीडी) शामिल हैं। सीईपीडी अपीलीय प्राधिकरण (एए) को सहायता प्रदान करता है और अपील मामलों को संसाधित करता है।
3. क्या सभी विनियमित संस्थाएं आरबी-आइओएस, 2026 के तहत शामिल हैं?
नहीं। आरबी-आइओएस, 2026 केवल उन विनियमित संस्थाओं की श्रेणियों पर लागू होती है, जो विशेष रूप से इस योजना के अंतर्गत आती हैं। इसमें शामिल प्रमुख श्रेणियां हैं: बैंक, कुछ एनबीएफसी, गैर-बैंक पूर्वदत्त भुगतान लिखत जारीकर्ता और प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियां। विस्तृत जानकारी प्रश्न 13 में दी गई है।
4. आरबीआई ओम्बड्समैन कौन है?
आरबीआई ओम्बड्समैन रिज़र्व बैंक द्वारा नियुक्त एक अधिकारी होता है, जो विनियमित संस्थाओं के ग्राहकों की सेवा में कमी से संबंधित शिकायतों की जांच और उनका निपटान करता है।
5. "सेवा में कमी" का क्या अर्थ है?
आरबी-आइओएस, 2026 के तहत, "सेवा में कमी" का अर्थ विनियमित संस्था से वैधानिक रुप से या अन्यथा प्रदान करने के लिए अपेक्षित किसी भी सेवा में कमी या अपर्याप्तता से है, जिसके परिणामस्वरूप ग्राहक को वित्तीय नुकसान या क्षति हो सकती है या नहीं भी हो सकती है।
6. आरबीआई उप-ओम्बड्समैन कौन है?
आरबीआई उप-ओम्बड्समैन रिज़र्व बैंक द्वारा नियुक्त एक अधिकारी होता है, जिसे योजना के तहत कार्यों को पूरा करने में सहायता के लिए नियुक्त किया जाता है। आरबीआई उप-ओम्बड्समैन सेवा में कमी से संबंधित शिकायतों पर विचार कर सकते हैं और योजना के तहत अनुमत सीमा तक शिकायतों को बंद/अस्वीकार कर सकते हैं।
7. आरबी-आइओएस, 2026 / एजीआर फ्रेमवर्क के क्या फायदे/ लाभ हैं?
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योजना के तहत शामिल विनियमित संस्थाओं के ग्राहकों के लिए निःशुल्क शिकायत निवारण।
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ऑनलाइन शिकायतें दर्ज करने के लिए एक केंद्रीकृत शिकायत पोर्टल अर्थात https://cms.rbi.org.in और ईमेल और भौतिक शिकायतों के लिए सीआरपीसी।
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"एक राष्ट्र एक ओम्बड्समैन" दृष्टिकोण के तहत शिकायतों का क्षेत्राधिकार-तटस्थ निपटान।
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स्वीकार्यता/ ग्राह्यता संबंधी स्पष्ट आवश्यकताएं बताई गई हैं। सीएमएस पोर्टल के माध्यम से दर्ज की गई ऑनलाइन शिकायतों के लिए एक सीमित प्रणाली-आधारित प्रारंभिक सत्यापन है।
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सीएमएस के माध्यम से शिकायत की स्थिति की ऑनलाइन ट्रैकिंग सुविधा।
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संरचित निपटान प्रक्रिया।
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निर्धारित सीमा के भीतर मुआवजे सहित योग्य मामलों में अधिनिर्णय जारी करने की शक्ति।
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योजना के फ्रेमवर्क के भीतर अधिनिर्णय के विरूद्ध अपील का प्रावधान।
8. केंद्रीकृत प्राप्ति एवं प्रसंस्करण केंद्र (सीआरपीसी) क्या है?
योजना के तहत दर्ज की गई शिकायतों को प्राप्त करने और उनका प्रसंस्करण करने के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा केंद्रीकृत प्राप्ति एवं प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किया गया है। डाक और हाथ से सुपुर्द की गई शिकायतों सहित ई-मेल और भौतिक माध्यम से प्राप्त शिकायतें सीआरपीसी को संबोधित की जाती हैं। ऑनलाइन दर्ज की गई शिकायतें सीएमएस पोर्टल पर पंजीकृत की जाती हैं।
9. आरबीआई ओम्बड्समैन के समक्ष शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया क्या है?
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ऑनलाइन: https://cms.rbi.org.in पर सीएमएस पोर्टल के माध्यम से।
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ईमेल: crpc@rbi.org.in पर शिकायत भेजकर।
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भौतिक माध्यम: सहायक दस्तावेजों के साथ विधिवत हस्ताक्षरित शिकायत फॉर्म केंद्रीकृत प्राप्ति और प्रसंस्करण केंद्र, भारतीय रिज़र्व बैंक, सेंट्रल विस्टा, सेक्टर 17, चंडीगढ़ - 160017 को भेजकर।
10. आरबीआई का संपर्क केंद्र क्या है और शिकायतकर्ताओं द्वारा इसका उपयोग कैसे किया जा सकता है?
संपर्क केंद्र शिकायतकर्ताओं को भारतीय रिज़र्व बैंक के शिकायत निवारण तंत्र, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया और शिकायतों की स्थिति के संबंध में जानकारी प्राप्त करने में सहायता प्रदान करता है। टोल फ्री नंबर 14448 पर आइवीआरएस सुविधा 24x7 उपलब्ध है। अंग्रेजी, हिंदी और दस क्षेत्रीय भाषाओं (असमिया, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मराठी, मलयालम, ओडिया, पंजाबी, तेलुगु, तमिल) में संपर्क केंद्र कर्मियों से बात करने की सुविधा राष्ट्रीय अवकाश को छोड़कर सोमवार से शनिवार सुबह 8:00 बजे से रात 10:00 बजे तक उपलब्ध है।
11. क्या आरबी-आइओएस, 2026 के तहत शिकायतें संपर्क केंद्र के माध्यम से दर्ज की जा सकती हैं?
नहीं। शिकायतें सीधे संपर्क केंद्र के माध्यम से दर्ज नहीं की जा सकती हैं। संपर्क केंद्र सीएमएस ईमेल या भौतिक माध्यम से शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करके और शिकायतों की स्थिति के बारे में जानकारी प्रदान कर शिकायतकर्ताओं की सहायता कर सकता है।
12. ओम्बड्समैन कहां स्थित हैं? क्या किसी विशिष्ट ओम्बड्समैन कार्यालय से संपर्क करना आवश्यक है?
रिज़र्व बैंक द्वारा निर्दिष्ट स्थानों पर आरबीआई ओम्बड्समैन कार्यालय स्थित हैं। शिकायतकर्ता को किसी विशिष्ट ओम्बड्समैन कार्यालय से संपर्क करने की आवश्यकता नहीं है। सीएमएस पोर्टल के माध्यम से दर्ज या सीआरपीसी के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का प्रसंस्करण और आवंटन आरबीआई के आंतरिक आवंटन तंत्र के अनुसार किया जाता है।
13. आरबी-आइओएस, 2026 के तहत कौन सी विनियमित संस्थाएं शामिल हैं?
आरबीआई की निम्नलिखित विनियमित संस्थाएं(आरई) आरबी-आइओएस, 2026 के तहत शामिल हैं:
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बैंक: सभी वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, राज्य सहकारी बैंक, केंद्रीय सहकारी बैंक, अनुसूचित प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक और गैर-अनुसूचित प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक जिनकी जमा राशि पिछले वित्तीय वर्ष के लेखा-परीक्षित तुलन-पत्र की तिथि को 50 करोड़ रुपये और उससे अधिक है।
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एनबीएफसी: आवास वित्त कंपनियों, कोर इन्वेस्टमेंट कंपनियों, आइडीएफ-एनबीएफसी, एनबीएफसी-आइएफसी, एनओएफएचसी, प्राथमिक डीलर और मॉर्गेज गारंटी कंपनियों को छोड़कर, आरबीआई के साथ पंजीकृत सभी एनबीएफसी, जो या तो जमा स्वीकार करने हेतु प्राधिकृत हैं या जिनका पिछले वित्तीय वर्ष के लेखा-परीक्षित तुलन-पत्र की तिथि को ₹100 करोड़ और उससे अधिक की आस्ति आकार के साथ ग्राहक इंटरफ़ेस है;
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गैर-बैंक पूर्वदत्त भुगतान लिखत जारीकर्ता।
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प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनियां।
14. यदि शिकायत आरबीआई द्वारा विनियमित संस्था के विरुद्ध हो लेकिन वह संस्था आरबी-आईओएस, 2026 के तहत शामिल नहीं हो तो शिकायत का क्या होता है?
ऐसी शिकायतें आरबी-आइओएस, 2026 के तहत स्वीकार्य नहीं हैं। संस्था और शिकायत की प्रकृति के आधार पर, उन्हें आरबीआई की अन्य लागू शिकायत निवारण व्यवस्थाओं के तहत निपटाया जा सकता है, जिसमें उपभोक्ता शिक्षण और संरक्षण कक्ष भी शामिल है, जहां भी लागू हो। शिकायतकर्ता को शिकायत दर्ज करने के लिए उपयोग की गई प्रणाली/संचार चैनल के माध्यम से उचित रूप से सूचित किया जा सकता है।
15. आरबी-आइओएस, 2026 के तहत शिकायतों के आधार क्या हैं?
कोई भी ग्राहक जो किसी विनियमित संस्था के किसी कार्य या चूक से व्यथित है, जिसके परिणामस्वरूप सेवा में कमी होती है, वह योजना के खंड 10 के तहत स्वीकार्यता आवश्यकताओं के अधीन व्यक्तिगत रूप से या प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकता है।
16. आरबी-आइओएस, 2026 के तहत किस प्रकार की शिकायतें शामिल नहीं हैं / स्वीकार्य नहीं हैं?
निम्नलिखित प्रकार की शिकायतें रिज़र्व बैंक - एकीकृत ओम्बड्समैन योजना, 2026 के तहत स्वीकार्य नहीं हैं और शुरुआत में या जांच के किसी भी चरण में, जैसा भी लागू हो, अस्वीकार की जा सकती हैं:
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ऐसी शिकायतें जिन्हें सीधे आरबीआई ओम्बड्समैन को संबोधित नहीं किया जाता है, जिसमें वह संचार भी शामिल है जहां आरबीआई को केवल कॉपी में रखा गया है।
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शिकायतकर्ता द्वारा व्यक्तिगत रूप से या एक अधिवक्ता के अलावा प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से शिकायतें दर्ज नहीं की जाती हैं, जब तक कि अधिवक्ता स्वयं व्यथित व्यक्ति न हो।
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योजना के तहत अपेक्षित अपूर्ण विवरण वाली शिकायतें।
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शिकायतें जो अपमानजनक, तुच्छ या तंग करने वाली हों।
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ऐसी शिकायतें जहां शिकायतकर्ता ने ऐसी शिकायत के प्रमाण के साथ पहले संबंधित विनियमित संस्था से संपर्क नहीं किया है।
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30 दिन या आरबीआई, एनपीसीआइ या कार्ड नेटवर्क दिशानिर्देशों द्वारा निर्दिष्ट समय, यदि लागू हो, जो भी अधिक हो, की समाप्ति से पूर्व दर्ज की गई शिकायतें, जब तक कि शिकायतकर्ता को उत्तर/समाधान प्राप्त नहीं हुआ हो और उससे असंतुष्ट न हो।
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विनियमित संस्था से अंतिम संचार प्राप्त होने की तिथि या उपयुक्त समय सीमा समाप्त होने की तिथि से 90 दिन के बाद, जो भी बाद में हो, दर्ज की गई शिकायतें।
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उसी शिकायत से संबंधित शिकायतें जो आरबीआई ओम्बड्समैन के कार्यालय द्वारा लंबित, निपटाई गई या संचलित की गई हैं।
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उसी शिकायत से संबंधित शिकायतें जो किसी न्यायालय, अधिकरण या मध्यस्थ या अन्य न्यायिक/अर्ध-न्यायिक मंच के समक्ष लंबित हैं या उनके गुणागुण पर निपटाई गई हैं। अपराधिक मामले में न्यायालय, अधिकरण के समक्ष लंबित या निर्णित आपराधिक कार्यवाही या आपराधिक अपराध में शुरू की गई पुलिस जांच इस उद्देश्य के लिए समान शिकायत के रूप में नहीं मानी जाती हैं।
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ऐसी शिकायतें जहां शिकायतकर्ता ने परिसीमा अधिनियम, 1963 के अनुसार निर्धारित समयावधि के समाप्त होने के बाद विनियमित संस्था को शिकायत की है।
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विनियमित संस्था के वाणिज्यिक निर्णय से संबंधित मामले।
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विक्रेता और विनियमित संस्था के बीच विवाद।
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विनियमित संस्था के प्रबंधन या कार्यकारियों के विरूद्ध शिकायतें।
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न्यायिक/अर्ध-न्यायिक, सांविधिक या कानून प्रवर्तन प्राधिकरण के आदेशों के अनुपालन में विनियमित संस्था द्वारा की गई कार्रवाई से उत्पन्न शिकायतें।
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आरबीआई के विनियामक दायरे से बाहर की सेवाएं।
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विनियमित संस्थाओं के बीच विवाद।
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विनियमित संस्था के कर्मचारी-नियोक्ता संबंध से संबंधित विवाद।
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जिन शिकायतों के लिए प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 की धारा 18 में उपचार का प्रावधान किया गया है।
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योजना के तहत शामिल नहीं होने वाली विनियमित संस्था के ग्राहकों से संबंधित शिकायतें।
17. आरबीआई ओम्बड्समैन के समक्ष शिकायत कब दर्ज की जा सकती है?
शिकायतकर्ता को पहले संबंधित विनियमित संस्था से संपर्क करना चाहिए। यदि विनियमित संस्था द्वारा शिकायत प्राप्त करने के 30 दिन या आरबीआई, एनपीसीआइ या कार्ड नेटवर्क दिशानिर्देशों द्वारा निर्दिष्ट समय के भीतर, यदि कोई, जो भी अधिक हो, के भीतर शिकायतकर्ता को कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है; या यदि शिकायतकर्ता विनियमित संस्था द्वारा प्रदान किए गए उत्तर/समाधान से संतुष्ट नहीं है, तो वह आरबीआई ओम्बड्समैन के समक्ष शिकायत दर्ज कर सकता है।
शिकायतकर्ता द्वारा आरबीआई ओम्बड्समैन के समक्ष शिकायत उपर्युक्त समय सीमा समाप्त होने की तिथि या संबंधित विनियमित संस्था से अंतिम संचार की तिथि से 90 दिन के भीतर, जो भी बाद में हो, की जानी चाहिए। इसके अलावा, विनियमित संस्था को शिकायत परिसीमा अधिनियम, 1963 के तहत निर्धारित समय सीमा समाप्त होने से पहले की जानी चाहिए।
18. आरबीआई ओम्बड्समैन के समक्ष शिकायत दायर करने के लिए न्यूनतम आवश्यक विवरण क्या हैं?
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शिकायतकर्ता के मूल विवरण जैसे नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आइडी (यदि उपलब्ध हो) और पूरा डाक पता।
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जिस विनियमित संस्था के विरूद्ध शिकायत दर्ज की जा रही है, उसका विवरण, जिसमें संस्था का नाम, शाखा/स्थान और पता शामिल है, जैसा लागू हो।
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विनियमित संस्था की शिकायत संख्या/पावती संख्या और विनियमित संस्था को शिकायत करने की तिथि, साथ ही शिकायत की प्रति।
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शिकायत से संबंधित खाता / कार्ड / ऋण / लेनदेन का विवरण, जहां लागू हो।
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लेनदेन की तिथि, संदर्भ संख्या और लेनदेन का विवरण, यदि उपलब्ध हो।
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विनियमित संस्था से प्राप्त प्रतिक्रिया की प्रति, यदि कोई हो।
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शिकायत से जुड़े सभी तथ्य, हानि या असुविधा की प्रकृति और सीमा, और मांगी गई राहत।
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शिकायत का समर्थन करने वाले प्रासंगिक दस्तावेज।
19. क्या शिकायतकर्ता आरबी-आइओएस, 2026 के तहत दर्ज शिकायत की स्थिति को ट्रैक कर सकता है?
हां। शिकायत के सफल पंजीकरण के बाद, शिकायतकर्ता को एक शिकायत संख्या प्रदान की जाती है। शिकायत संख्या और मोबाइल नंबर का उपयोग करके सीएमएस पोर्टल के माध्यम से शिकायत की स्थिति को ट्रैक किया जा सकता है। स्थिति संबंधित सहायता के लिए शिकायतकर्ता टोल फ्री नंबर 14448 पर संपर्क केंद्र से संपर्क कर सकता है।
20. क्या आरबीआई ओम्बड्समैन के समक्ष प्रतिनिधि के माध्यम से शिकायत दर्ज की जा सकती है?
हां। शिकायतकर्ता के प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से शिकायत दर्ज की जा सकती है। हालांकि, प्राधिकृत प्रतिनिधि अधिवक्ता नहीं हो सकता, जब तक कि अधिवक्ता स्वयं व्यथित व्यक्ति न हो। आरबीआई ओम्बड्समैन के समक्ष शिकायतकर्ता का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रतिनिधि को विधिवत नियुक्त और लिखित रूप में प्राधिकृत किया जाना चाहिए।
21. क्या आरबीआई ओम्बड्समैन के समक्ष शिकायत दर्ज करने के लिए कोई प्रभार या शुल्क है?
नहीं। आरबी-आइओएस, 2026 के तहत शिकायत दर्ज करने या निपटान के लिए कोई प्रभार या शुल्क नहीं है। आरबीआई ओम्बड्समैन के पास शिकायत दर्ज करने के लिए शिकायतकर्ताओं को किसी तृतीय पक्ष एजेंसी से संपर्क करने या किसी भी शुल्क का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है।
22. क्या शिकायत में शामिल राशि या आरबीआई ओम्बड्समैन द्वारा प्रदान किए जाने वाले मुआवजे की कोई मौद्रिक सीमा है
किसी विवाद में शामिल राशि, जिसे आरबीआई ओम्बड्समैन के समक्ष समाधान या अधिनिर्णय जारी करने के लिए लाया जा सकता है, की कोई सीमा नहीं है। हालांकि, परिणाम स्वरूप शिकायतकर्ता को हुई किसी भी हानि के लिए आरबीआई ओम्बड्समैन के पास 30 लाख रुपये तक का मुआवजा प्रदान करने की शक्ति है। इसके अतिरिक्त आरबीआई ओम्बड्समैन शिकायतकर्ता के समय की हानि, किए गए व्यय, शिकायतकर्ता द्वारा सहन किए गए उत्पीड़न/ मानसिक पीड़ा, आदि के एवज में 3 लाख रुपये तक का मुआवजा प्रदान कर सकता है।
23. क्या मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए मुआवजा मांगा जा सकता है?
हां। आरबी-आइओएस, 2026 के तहत, आरबीआई ओम्बड्समैन शिकायतकर्ता के समय की हानि, किए गए व्यय, उत्पीड़न / मानसिक पीड़ा आदि, यदि कोई हो, के लिए 3 लाख रुपये तक का मुआवजा प्रदान कर सकता है।
24. आरबीआई ओम्बड्समैन द्वारा शिकायत प्राप्त होने के बाद क्या होता है? ओम्बड्समैन कार्यालय द्वारा शिकायतों को हल करने के विभिन्न तरीके क्या हैं?
शिकायत प्राप्त होने के बाद, पहले यह जांच की जाती है कि क्या यह योजना के तहत ली जा सकती है। यदि शिकायत को अस्वीकार्य पाया जाता है, तो शिकायतकर्ता को उपयुक्त रूप से सूचित करते हुए शिकायत बंद कर दी जाती है।
यदि शिकायत स्वीकार्य है, तो इसे संबंधित विनियमित संस्था को उसकी प्रतिक्रिया के लिए अग्रेषित किया जाता है। आरबीआई ओम्बड्समैन का कार्यालय शिकायत, विनियमित संस्था की प्रतिक्रिया, दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और लागू आरबीआई निर्देशों की जांच करता है।
शिकायत निम्नलिखित तरीकों से निपटाई जा सकती है:
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समाधान: आरबीआई ओम्बड्समैन या आरबीआई उप-ओम्बड्समैन शिकायतकर्ता और विनियमित संस्था को पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं। यह सुविधा, सलाह या सुलह के माध्यम से किया जा सकता है। यदि शिकायत का समाधान हो जाता है या शिकायतकर्ता समाधान स्वीकार कर लेता है, तो निपटान हुआ मानकर शिकायत बंद कर दी जाती है।
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अधिनिर्णय: यदि शिकायत का निपटान नहीं होता है और आरबीआई ओम्बड्समैन को सेवा में कमी मिलती है, तो विनियमित संस्था को विशिष्ट कार्रवाई करने और/या मुआवजे का भुगतान करने का निर्देश देते हुए, जहां लागू हो, अधिनिर्णय जारी किया जा सकता है।
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अस्वीकार: यदि सेवा में कोई कमी नहीं पाई जाती है, या यदि शिकायत योजना में दिए गए किसी भी अस्वीकृति आधार के अंतर्गत आती है, तो कारण बताकर शिकायत अस्वीकार की जा सकती है।
अंतिम परिणाम शिकायतकर्ता और विनियमित संस्था को सूचित किया जाता है।
25. क्या कोई व्यक्ति कहीं से भी सुलह बैठक में भाग ले सकता है?
हां। जब आवश्यक समझा जाता है, तो आरबीआई ओम्बड्समैन की उपस्थिति में एक सुलह बैठक आयोजित की जा सकती है, जिसमें दोनों पक्ष व्यक्तिगत रूप से या ऑनलाइन भाग ले सकते हैं। शिकायत की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ओम्बड्समैन कार्यालय द्वारा भाग लेने का तरीका तय किया जाएगा।
26. क्या आरबीआई ओम्बड्समैन किसी भी चरण में शिकायत को अस्वीकार कर सकता है?
हां। आरबी-आइओएस, 2026 के खंड 16 के अनुसार, आरबीआई ओम्बड्समैन किसी भी चरण में शिकायत अस्वीकार कर सकता है, यदि शिकायत:
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शिकायत एक वैध शिकायत नहीं है क्योंकि यह सेवा में किसी कमी को नहीं दर्शाती हैं और सुझाव, प्रश्न आदि की प्रकृति की है।
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जब योजना के अंतर्गत शिकायत की जांच की जा रही है, तभी उसी वाद हेतुक पर कोई मामला किसी न्यायालय, अधिकरण, मध्यस्थ या किसी अन्य न्यायिक/अर्ध-न्यायिक मंच के समक्ष दायर किया जाता है।
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आरबीआई ओम्बड्समैन की राय में, सेवा में कोई कमी नहीं है।
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परिणाम स्वरूपी हानि के लिए मांगा गया मुआवजा, खंड 8(3) में दर्शाए गए अनुसार मुआवजा प्रदान करने की आरबीआई ओम्बड्समैन की शक्ति से परे है।
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शिकायतकर्ता द्वारा उचित तत्परता के साथ आगे की कार्रवाई नहीं की है।
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शिकायत उचित कारण के बिना है।
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शिकायत में विस्तृत दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य पर विचार करने की आवश्यकता है और आरबीआई ओम्बड्समैन के समक्ष कार्यवाही ऐसी शिकायत के न्यायनिर्णयन के लिए उपयुक्त नहीं है।
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शिकायतकर्ता को कोई वित्तीय हानि या क्षति, या असुविधा नहीं हुई है।
27. क्या आरबीआई उप-ओम्बड्समैन किसी भी शिकायत को अस्वीकार कर सकता है?
हां। रिज़र्व बैंक - एकीकृत ओम्बड्समैन योजना, 2026 के तहत, आरबीआई उप-ओम्बड्समैन योजना के खंड 16(1) में निर्दिष्ट किसी भी आधार पर किसी भी चरण पर शिकायत अस्वीकार कर सकता है। इनमें ऐसे शामिल हैं मामले जहां:
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शिकायत योजना के खंड 10 के तहत अस्वीकार्य है;
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शिकायत में कोई सेवा में कमी नहीं दर्शाई गई है और यह सुझाव, प्रश्न, मार्गदर्शन या स्पष्टीकरण के लिए अनुरोध या इसी तरह की प्रकृति की है; या
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जब योजना के अंतर्गत शिकायत की जांच की जा रही है, तभी उसी वाद हेतुक पर कोई मामला किसी न्यायालय, अधिकरण, मध्यस्थ या किसी अन्य न्यायिक या अर्ध-न्यायिक मंच के समक्ष दायर किया जाता है।
28. यदि शिकायत का निपटान समझौते द्वारा नहीं होता तो क्या होता है?
यदि शिकायत समझौते के माध्यम से नहीं निपटाई जाती है और योजना के तहत अस्वीकार करने के लिए योग्य नहीं है, तो आरबीआई ओम्बड्समैन रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और सामग्री के आधार पर मामले की आगे जांच करता है।
जहां, शिकायत की जांच के बाद, आरबीआई ओम्बड्समैन को लगता है कि विनियमित संस्था की ओर से सेवा में कमी हुई है, तो ओम्बड्समैन अधिनिर्णय जारी कर सकता है जिसमें विनियमित संस्था को योजना के तहत उपयुक्त निवारक कार्रवाई करने और/या मुआवजा देने का निर्देश दिया जा सकता है। अधिनिर्णय जारी करने से पहले, शिकायतकर्ता और विनियमित संस्था दोनों को मौखिक या लिखित रूप से सुने जाने का उचित अवसर दिया जाता है।
29. यदि विनियमित संस्था आरबीआई ओम्बड्समैन के निर्णय / अधिनिर्णय का अनुपालन नहीं करती है, या अनुपालन में देरी होती है तो क्या होगा?
जहां अधिनिर्णय जारी किया जाता है, शिकायतकर्ता को अधिनिर्णय की प्रति प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर अधिनिर्णय को पूर्ण और अंतिम निपटान के रूप में स्वीकार करने का पत्र विनियमित संस्था को प्रस्तुत करना होगा, जब तक कि शिकायतकर्ता ने अपील न दायर की हो। शिकायतकर्ता का पत्र प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर विनियमित संस्था को अधिनिर्णय का अनुपालन करना चाहिए और आरबीआई ओम्बड्समैन को अनुपालन की सूचना देनी चाहिए या अनुमति होने पर अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील करनी चाहिए।
30. समान मामलों में अलग-अलग निर्णय होने पर क्या होगा?
जो मामले समान प्रतीत होते हैं, वे तथ्यों, दस्तावेजों, मांगी गई राहत, लागू विनियामक अनुदेशों और पक्षों के आचरण में भिन्न हो सकते हैं। योजना आरबीआई ओम्बड्समैन को बैंकिंग कानून और व्यवहार के सिद्धांतों, आरबीआई निर्देशों/अनुदेशों/दिशानिर्देशों/विनियमों और अन्य प्रासंगिक कारकों पर विचार करने में सक्षम बनाती है।
31. आरबीआई ओम्बड्समैन द्वारा असंतोषजनक निर्णय दिए जाने पर क्या कोई और उपाय उपलब्ध है?
रिज़र्व बैंक - एकीकृत ओम्बड्समैन योजना, 2026 के तहत, केवल आरबीआई ओम्बड्समैन द्वारा जारी अधिनिर्णय के विरूद्ध अपील उपलब्ध है।
शिकायतकर्ता जो अधिनिर्णय से व्यथित है, वह अधिनिर्णय प्राप्त करने की तिथि से 30 दिन के भीतर अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील दायर कर सकता है।
विनियमित संस्था भी आवश्यक पूर्व अनुमोदन के साथ, आरबीआई ओम्बड्समैन द्वारा जारी अधिनिर्णय के विरूद्ध अपील दायर कर सकती है। हालांकि, जानकारी या दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफलता के कारण जारी अधिनिर्णय के विरूद्ध विनियमित संस्था को अपील करने की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
32. क्या अपील दायर करने की कोई समय सीमा है?
हां। शिकायतकर्ता अधिनिर्णय प्राप्त करने की तिथि से 30 दिन के भीतर अपील दायर कर सकता है। यदि देरी का पर्याप्त कारण है, तो अपीलीय प्राधिकारी अतिरिक्त 30 दिन तक की अवधि की अनुमति दे सकता है।
विनियमित संस्था आवश्यक पूर्व अनुमोदन के अधीन शिकायतकर्ता का अधिनिर्णय स्वीकार करने का पत्र प्राप्त होने की तिथि के 30 दिन के भीतर अपील दायर कर सकती है। यदि देरी का पर्याप्त कारण दर्शाया जाता है, तो अपीलीय प्राधिकारी अतिरिक्त 30 दिन तक की अवधि की अनुमति दे सकता है।
33. अपील प्राधिकारी अपील का निपटान कैसे करता है?
अपीलीय प्राधिकारी, अपील और संबंधित दस्तावेजों की जांच करने के बाद, निम्नानुसार कार्य कर सकता है:
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अपील को खारिज कर सकता है।
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अपील की अनुमति देते हुए ओम्बड्समैन के अधिनिर्णय को रद्द कर सकता है
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उचित निदेशों के साथ मामले को नए सिरे से निपटान के लिए आरबीआई ओम्बड्समैन को सौंपना।
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अधिनिर्णय को संशोधित कर, ऐसे संशोधित आदेश या अधिनिर्णय को प्रभावी करने के लिए आवश्यक निदेश दे सकता है;
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अन्य कोई आदेश जो वह उचित समझे, पारित कर सकता है।
34. क्या मैं किसी भी चरण पर अपनी शिकायत वापस ले सकता हूं?
हां। यदि शिकायतकर्ता चाहता है तो स्वेच्छा से किसी भी चरण पर अपनी शिकायत को वापस ले सकता है। शिकायत वापस लेने के लिए, शिकायतकर्ता शिकायत प्रबंध प्रणाली पोर्टल (https://cms.rbi.org.in) पर लॉग इन कर सकता है और "शिकायत ट्रैक करें" टैब पर जा सकता है।
35. आरबी-आइओएस, 2026 का पूरा दस्तावेज/योजना कहाँ मिलेगी?
योजना निम्न लिंक पर उपलब्ध है- https://rbi.org.in/hindi1/Upload/content/PDFs/RBIOS2026_16012026HN.pdf
36. क्या शिकायतकर्ता आरबीआई ओम्बड्समैन द्वारा बंद शिकायत पर प्रतिक्रिया प्रदान कर सकते हैं?
हां। शिकायतकर्ता सीएमएस पोर्टल, जहां यह सुविधा उपलब्ध है, के माध्यम से प्रतिक्रिया प्रदान कर सकते हैं। ऐसी प्रतिक्रिया आरबीआई को शिकायत निवारण प्रक्रिया की समीक्षा करने और सुधार करने में सहायता करती है।
37. आरबी-आइओएस, 2026 के तहत शिकायत किन भाषाओं में दर्ज की जा सकती है?
सीएमएस पोर्टल हिंदी और अंग्रेजी में शिकायत दर्ज करने की सुविधा प्रदान करता है। शिकायत के तथ्य / विवरण को पोर्टल पर लागू वर्ण सीमा तक विवरण बॉक्स में किसी भी भाषा में टाइप, कॉपी या पेस्ट किया जा सकता है। भौतिक और ईमेल शिकायतें किसी भी भाषा में दर्ज की जा सकती हैं।
अस्वीकरण
ये अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न सूचना और सामान्य मार्गदर्शन के लिए हैं। इन्हें किसी भी कानूनी कार्यवाही में उद्धृत नहीं किया जा सकता है और ये कानूनी सलाह या कानूनी राय नहीं हैं। पाठकों को रिज़र्व बैंक - एकीकृत ओम्बड्समैन योजना, 2026 और रिज़र्व बैंक और सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए गए प्रासंगिक परिपत्रों / अधिसूचनाओं और निर्देशों से मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए। |