617 भारतीय रिज़र्व बैंक

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मास्‍टर निदेश – भारतीय रिज़र्व बैंक (क्रेडिट डेरिवेटिव) निदेश, 2022 - मसौदा

भारतीय रिज़र्व बैंक
वित्तीय बाजार विनियमन विभाग
9वीं मंज़िल, केंद्रीय कार्यालय, फोर्ट
मुंबई - 400 001

अधिसूचना सं. एफएमआरडी.डीआईआरडी.11/14.03.004/2021-22, दिनांक 10 फरवरी 2022

मास्‍टर निदेश – भारतीय रिज़र्व बैंक (क्रेडिट डेरिवेटिव) निदेश, 2022
(xx फरवरी 2026 को अद्यतित) - मसौदा

भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 02) (इसके बाद अधिनियम के रूप में उल्लिखित) की धारा 45यू के साथ पठित धारा 45डबल्यू के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और परिपत्र सं.आईडीएमडी.पीसीडी.सं.14.03.04/10/2012-13, दिनांक 07 जनवरी 2013 को निष्‍क्रमित करते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक (इसके बाद रिज़र्व बैंक के रूप में उल्लिखित) एतदद्वारा निम्नलिखित निदेश जारी करता है।

इस संबंध में विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42), विदेशी मुद्रा प्रबंध (ऋण लिखत) विनियमावली, 2019 (अधिसूचना सं.फेमा.396/2019-आरबी, दिनांक 17 अक्‍तूबर 2019) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा क्रेडिट डिफाल्‍ट स्‍वैप (सीडीएस) में लेनदेन – परिचालनगत अनुदेशों के संबंध में जारी ए.पी. (डीआईआर शृंखला) परिपत्र सं.23, दिनांक 10 फरवरी 2022 का संदर्भ भी आकृष्ट किया जाता है।

1. लघु शीर्षक, व्‍याप्ति और प्रवर्तन

(i) इन निदेशों को मास्‍टर निदेश – भारतीय रिज़र्व बैंक (क्रेडिट डेरिवेटिव) निदेश, 2022 कहा जाएगा।

(ii) ये निदेश भारत में ओवर-द-काउन्‍टर (ओटीसी) बाजार और मान्‍यता-प्राप्‍त स्‍टॉक एक्‍सचेंजों में किए गए क्रेडिट डेरिवेटिव संव्‍यवहारों के लिए अनुमेय होंगे।

(iii) ये निदेश 09 मई 2022 से लागू होंगे।

2. परिभाषाएं

(i) इन परिभाषाओं में यदि संदर्भ से अन्‍यथा अपेक्षित नहीं हो तो:

(ए) सीडीएस के ‘नीलामी निपटान’ का आशय ऐसी निपटान प्रक्रिया से है जिसमें संदर्भ/प्रदेय दायित्‍वों की कीमत जिसपर निपटान किया जाएगा, उसका निर्धारण नीलामी पद्धति के माध्‍यम से किया जाता है।

(बी) सीडीएस के ‘नकद निपटान’ का आशय ऐसी निपटान प्रक्रिया से है जिसमें संरक्षण क्रेता को संरक्षण विक्रेता द्वारा संदर्भगत दायित्‍वों के प्रत्‍याशित वसूली मूल्‍य को घटाते हुए सीडीएस संविदा की नोशनल रकम का भुगतान किया जाता है।

(सी) ‘केन्‍द्रीय प्रतिपक्ष’ का आशय ऐसे प्रतिष्‍ठान से है जो स्‍वयं को एक या एकाधिक वित्तीय बाजारों में सौदाकृत संविदाओं के प्रतिपक्षों के बीच अंत:स्‍थापित करता है और इस प्रकार प्रत्‍येक विक्रेता के लिए क्रेता और प्रत्‍येक क्रेता के लिए विक्रेता बन जाता है और इस प्रकार खुली संविदाओं के निष्‍पादन को सुनिश्चित करता है।

(डी) ‘कंपनी’ का वही आशय होगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2(20) में निर्धारित किया गया है।

(ई) ‘कार्पोरेट बॉन्‍डों और डिबेंचरों’ का अर्थ अपरिवर्तनीय ऋण प्रतिभूतियां है जो ऋणग्रस्‍तता का सृजन अथवा अभिस्‍वीकृति करती हैं और इनमें विधान के प्रभाव से गठित किसी निगमित निकाय या किसी न्‍यास या किसी सांविधिक निकाय द्वारा निगमित डिबेंचर, बॉन्‍ड और इसी प्रकार की अन्‍य प्रतिभूतियां शामिल हैं, चाहे ये निर्गमकर्ता की आस्तियों पर कोई प्रभार सृजित करती हों या नहीं, लेकिन इनमें केन्‍द्र सरकार या किसी राज्‍य सरकार द्वारा या भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा यथानिर्दिष्‍ट किसी अन्‍य व्‍यक्ति द्वारा निर्गमित मुद्रा बाजार ऋण लिखतें, प्रतिभूति रसीदें, प्रतिभूतिकृत ऋण लिखतें और बॉन्‍ड शामिल नहीं हैं।

(एफ) ‘क्रेडिट चूक स्‍वैप (सीडीएस)’ का अर्थ ऐसा क्रेडिट डेरिवेटिव है जिसमें एक पक्ष (संरक्षण विक्रेता) दूसरे पक्ष (संरक्षण क्रेता) को संदर्भगत प्रतिष्‍ठान के संबंध में क्रेडिट इवेंट के मामले में भुगतान करने का वचन देता है, और इसके बदले में संरक्षण-क्रेता द्वारा संरक्षण विक्रेता को आवधिक भुगतान (प्रीमियम) तब तक किए जाते हैं जब तक कि संविदा का समापन या क्रेडिट इवेंट, दोनों में से जो भी पहले हो, नहीं हो जाए।

(जी) ‘क्रेडिट डेरिवेटिव’ का अर्थ ऐसी डेरिवेटिव संविदा है जिसके मूल्‍य का निर्धारण अंतनिर्हित ऋण लिखत के क्रेडिट जोखिम से या अंतनिर्हित ऋण लिखतों के सूचकांक से किया जाता है।

(एच) ‘क्रेडिट इवेंट’ का आशय है किसी क्रेडिट डेरिवेटिव संविदा में पूर्व-परिभाषित घटना, जो इस संविदा के तहत निपटान को उत्‍प्रेरित करती है।

(आई) ‘प्रदेय दायित्‍व’ का आशय है संदर्भगत प्रतिष्‍ठान द्वारा निर्गमित ऐसा ऋण लिखत जो क्रेडिट इवेंट की स्थिति होने पर संरक्षण क्रेता द्वारा संरक्षण विक्रेता को भौतिक रूप से निपटाई गई सीडीएस संविदा के रूप में दिया जा सकता है।

(जे) ‘इलेक्‍ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्‍लेटफार्म (ईटीपी)’ का वही आशय रहेगा जो दिनांक 16 जून, 2025 के समय-समय पर यथासंशोधित मास्टर निदेश - भारतीय रिज़र्व बैंक (इलेक्‍ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्‍लेटफार्म) निदेश, 2025 के पैराग्राफ 2(1)(iii) में निर्धारित किया गया है।

(के) ‘एक्‍सचेंज’ का अर्थ ‘मान्यता-प्राप्‍त स्‍टॉक एक्‍सचेन्‍ज’ है और इसका वही अर्थ रहेगा जो प्रतिभूति संविदा विनियमन अधिनियम, 1956 (1956 का 42) की धारा 2(एफ) में निर्धारित किया गया है।

(एल) 'क्रेडिट सूचकांकों पर वायदा' का अर्थ एक मानकीकृत डेरिवेटिव संविदा है, जिसे संविदा के समय निर्धारित मूल्य पर एक भविष्य की निर्दिष्ट तारीख में अंतर्निहित ऋण लिखतों के सूचकांक को खरीदने या बेचने के लिए, एक मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार किया जाता है।

(एम) ‘सरकार-संबद्ध प्रतिष्‍ठान’ का वही अर्थ रहेगा जो भारतीय लेखांकन मानक (इन्‍ड एएस) 24: संबद्ध पक्ष प्रकटीकरण के अनुच्‍छेद 9 में निर्धारित किया गया है।

(एन) ‘हेजिंग’ का आशय है किसी विशेष ऋण लिखत या किसी ऋण लिखत के पोर्टफोलियो के क्रेडिट जोखिम को कम करने के लिए क्रेडिट डेरिवेटिव लेनदेन करने के क्रियाकलाप।

(ओ) ‘अवसंरचना कंपनी’ का अर्थ ऐसी कंपनी है जो आर्थिक कार्य विभाग, वित्‍त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 08 अप्रैल 2016 को अधिसूचित राजपत्र अधिसूचना सं.एफ.सं.13/6/2009-आईएनएफ, समय-समय पर यथासंशोधित अवसंरचना उप-क्षेत्रों की सुमेलित मास्‍टर सूची में निर्दिष्‍ट विश्ष्टि अवसंरचना उप-क्षेत्रों से संबंधित क्रियाकलापों में प्रमुख रूप से कार्यरत हो।

(पी) ‘मार्केट मेकर’ का अर्थ ऐसा प्रतिष्‍ठान है जो अन्‍य मार्केट मेकर्स और प्रयोक्‍ताओं को कीमतें प्रदान करता है।

(क्यू) ‘मुद्रा बाजार ऋण लिखत’ का अर्थ है- एक वर्ष तक की मूल या आरंभिक परिपक्‍वता वाले वाणिज्‍य पत्र और अपरिवर्तनीय डिबेंचर, जैसा कि 03 जनवरी 2024 की अधिसूचना सं.एफएमआरडी.डीआईआरडी.09/14.02.001/2023-24 के माध्‍यम से जारी तथा समय-समय पर यथासंशोधित मास्टर निदेश – भारतीय रिज़र्व बैंक (एक वर्ष तक की मूल या आरंभिक परिपक्‍वता वाले वाणिज्‍य पत्र और अपरिवर्तनीय डिबेंचर) निदेश, 2024 में परिभाषित है, और जमा प्रमाणपत्र, जैसा कि 04 जून 2021 की अधिसूचना सं.एफएमआरडी.डीआईआरडी.03/14.01.003/2021-22 के माध्‍यम से जारी तथा समय-समय पर यथासंशोधित मास्‍टर निदेश – भारतीय रिज़र्व बैंक (जमा प्रमाणपत्र) निदेश, 2021 में परिभाषित है।

(आर) ‘निवल मालियत’ का वही अर्थ रहेगा जो कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2(57) में निर्धारित है।

(एस) ‘ओवर-दि-काउन्‍टर (ओटीसी) बाजार’ का अर्थ है ऐसे बाजार जहां एक्‍सचेंजों के अलावा किसी भी अन्‍य प्रकार से संव्‍यवहार किए जाते हैं और इसमें इलेक्‍ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्‍लेटफार्म (ईटीपी) भी शामिल रहेंगे।

(टी) ‘अनिवासी’ का अर्थ होगा ‘भारत से बाहर का निवासी व्‍यक्ति’ और इसका वही अर्थ रहेगा जैसा विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 2(डबल्यू) में निर्धारित किया गया है।

(यू) सीडीएस के ‘भौतिक निपटान’ का अर्थ है ऐसी निपटान प्रकिया जिसमें संरक्षण क्रेता किसी भी पात्र प्रदेय दायित्‍वों की डिलीवरी संरक्षण विक्रेता को सीडीएस संविदा की नोशनल रकम की प्राप्ति के बदले में करता है।

(वी) ‘संदर्भ आस्ति’ का अर्थ है संदर्भ प्रतिष्ठान द्वारा निर्गम किया गया ऋण लिखत या कुल रिटर्न स्वैप संविदा में विनिर्दिष्ट अंतर्निहित ऋण लिखतों का सूचकांक।

(डबल्यू) ‘संदर्भ प्रतिष्‍ठान’ का अर्थ है ऐसा प्रतिष्‍ठान जिसके क्रेडिट जोखिम के बदले में क्रेडिट डेरिवेटिव संविदा की जाती है।

(एक्स) ‘संदर्भ दायित्‍व’ का अर्थ है ऐसा ऋण लिखत जो संदर्भ प्रतिष्‍ठान द्वारा निर्गमित किया जाता है और संविदा के मूल्‍यांकन और नकद निपटान मूल्‍य के निर्धारण या क्रेडिट इवेंट होने की स्थिति में प्रदेय दायित्‍व के निर्धारण हेतु सीडीएस संविदा में विनिर्दिष्‍ट किया जाता है।

(वाई) ‘संबंद्ध पक्ष’ का वही अर्थ रहेगा जो भारतीय लेखांकन मानक (इन्‍ड एएस) 24: संबद्ध पक्ष प्रकटीकरण के अनुच्‍छेद 9 में निर्धारित किया गया है।

(ज़ेड) ‘निवासी’ का अर्थ होगा ‘भारत में निवासी व्‍यक्ति’ और इसका वही अर्थ रहेगा जो विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 2(वी) में निर्धारित है।

(एए) ‘एकल-नाम सीडीएस’ का अर्थ है ऐसी सीडीएस संविदा जिसमें अंतर्निहित एक एकल संदर्भ प्रतिष्‍ठान है।

(बीबी) ‘प्रतिस्‍थापन घटना’ का अर्थ है ऐसी कोई घटना जिसके परिणामस्‍वरूप संदर्भ दायित्‍व को संदर्भ प्रतिष्‍ठान द्वारा निर्गमित किसी अन्‍य दायित्‍व से प्रतिस्‍थापित किया जाता है।

(सीसी) ‘उत्तराधिकार घटना’ का अर्थ है ऐसी कोई घटना जिसके परिणामस्‍वरूप कोई संदर्भ प्रतिष्‍ठान संदर्भगत दायित्‍व के लिए प्रमुख दायित्‍वधारक नहीं रह जाता है।

(डीडी) ‘टोटल रिटर्न स्वैप’ का अर्थ ऐसी क्रेडिट डेरिवेटिव संविदा है जिसमें एक पक्षकार (टोटल रिटर्न भुगतानकर्ता) दूसरे पक्षकार (टोटल रिटर्न प्राप्तकर्ता) को संदर्भ आस्ति का सम्पूर्ण आर्थिक प्रदर्शन अंतरित करने को प्रतिबद्ध होता है, और बदले में, बेंचमार्क से संबद्ध पूर्व-निर्धारित नियत या अस्थिर दर प्राप्त करता है।

(ईई) ‘प्रयोक्‍ता’ का अर्थ है ऐसा व्‍यक्ति जो मार्केट मेकर के अलावा, डेरिवेटिव संव्‍यवहार करता है।

(ii) इन निदेशों में प्रयुक्‍त किन्‍तु परिभाषित नहीं किए गए शब्‍दों और अभिव्‍यक्तियों का वही अर्थ रहेगा जो इस अधिनियम में निर्धारित किया गया है।

3. पात्र सहभागी

(i) निम्‍नलिखित व्‍यक्ति क्रेडिट डेरिवेटिव बाजार में सहभागिता करने के पात्र होंगे:

(ए) निवासी; और

(बी) भारत के बाहर के निवासी, जो दिनांक 17 अक्तूबर 2019 की समय-समय पर यथासंशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (ऋण लिखत) विनियमावाली, 2019 के तहत कॉरपोरेट बॉन्डों और डिबेंचरों में निवेश करने के पात्र हैं।

4. ओटीसी बाजार में क्रेडिट डेरिवेटिव संबंधी निदेश

4.1 अनुमत उत्‍पाद

मार्केट मेकर और प्रयोक्‍ता सीडीएस और टीआरएस संविदाओं में संव्‍यवहार कर सकते हैं, जो इसके पश्चात विनिर्दिष्ट निदेशों के अधीन होंगे।

4.2 मार्केट मेकर्स और प्रयोक्‍ता

4.2.1 मार्केट मेकर

(i) निम्‍नलिखित प्रतिष्‍ठान क्रेडिट डेरिवेटिव में मार्केट मेकर के रूप में कार्य करने के पात्र होंगे:

(ए) लघु वित्‍त बैंकों, भुगतान बैंकों, स्‍थानीय क्षेत्र बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोडकर अनुसूचित वाणिज्‍य बैंक;

(बी) एकल प्राइमरी डीलर (एसपीडी) और आवासन वित्‍त कंपनी (एचएफसी) सहित गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी), विगत वित्तीय वर्ष की 31 मार्च के लेखापरीक्षित तुलनपत्र के अनुसार जिनकी न्‍यूनतम निवल स्‍वत्‍वाधीन निधियां रु.500 करोड़ हैं, बशर्ते भारतीय रिज़र्व बैंक के विनियमन विभाग ने विशिष्‍ट अनुमोदन दिया हो; और

(सी) भारतीय निर्यात आयात बैंक, राष्‍ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, राष्‍ट्रीय आवास बैंक और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक और राष्ट्रीय वित्तीय अवसंरचना और विकास बैंक।

(ii) मार्केट मेकर के रूप में कार्य करने का अनुमोदन प्राप्‍त हाने के बाद यदि कोई एनबीएफसी, कोई एसपीडी या कोई एचएफसी पात्रता मानदंडों को पूरा करने में विफल रहती है तो वह मार्केट मेकर के तौर पर कार्य नहीं करेगी। एनबीएफसी, एसपीडी या एचएफसी ऐसी संविदाओं की परिपक्‍वता/परिसमापन तक विद्यमान संविदाओं के तहत अपने दायित्‍वों को पूरा करना जारी रखेंगी।

(iii) क्रेडिट डेरिवेटिव संव्‍यवहार के पक्षकारों में से कम-से-कम एक पक्ष को इस प्रयोजन हेतु रिज़र्व बैंक द्वारा प्राधिकृत मार्केट मेकर या केन्‍द्रीय प्रतिपक्ष रहना होगा।

4.2.2 प्रयोक्‍ता वर्गीकरण फ्रेमवर्क

(i) क्रेडिट डेरिवेटिव संविदओं का प्रस्‍ताव करने के प्रयोजन से प्रयोक्‍ताओं को मार्केट मेकर द्वारा या तो रिटेल अथवा गैर-रिटेल के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।

(ii) गैर-रिटेल प्रयोक्‍ताओं के रूप में वर्गीकृत किए जाने के लिए निम्‍नलिखित प्रयोक्‍ता पात्र होंगे:

(ए) मार्केट मेकर के अलावा, एसपीडी और एचएफसी सहित एनबीएफसी;

(बी) भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडाई) द्वारा विनियमित बीमा कंपनियां;

(सी) पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा विनियमित पेंशन निधियां;

(डी) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा विनियमित म्‍यूचुअल फन्‍ड;

(ई) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा विनियमित वैकल्पिक निवेश निधियां;

(एफ) नवीनतम लेखापरीक्षित तुलनपत्र के अनुसार (ए) न्‍यूनतम रु.500 करोड़ की निवल मालियत (बी) न्‍यूनतम रु.1000 करोड़ की टर्नओवर वाली निवासी कंपनियां;

(जी) सेबी में पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक; और

(एच) इन निदेशों के पैरा 4.2.1 के अनुसार मार्केट मेकर होने की अन्यथा पात्र कोई प्रतिष्ठान।

(iii) कोई प्रयोक्‍ता जो गैर-रिटेल प्रयोक्‍ता के रूप में वर्गीकृत किए जाने का पात्र नहीं है, उसे रिटेल प्रयोक्‍ता के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।

(iv) कोई प्रयोक्‍ता जो गैर-रिटेल प्रयोक्‍ता के रूप में वर्गीकृत किए जाने का अन्‍यथा पात्र है, उसके पास रिटेल प्रयोक्‍ता के रूप में वर्गीकृत किए जाने का विकल्‍प रहेगा।

4.3 ओटीसी बाजार में क्रेडिट डेरिवेटिव के सहभागी

4.3.1 क्रेडिट चूक स्‍वैप हेतु संरक्षण क्रेता और विक्रेता

(i) रिटेल प्रयोक्‍ताओं को केवल हेजिंग के प्रयोजन हेतु संरक्षण का क्रय करने की अनुमति दी जाएगी।

(ii) गैर-रिटेल प्रयोक्‍ताओं को किसी प्रतिबंध के बिना प्रयोजन हेतु संरक्षण क्रय की अनुमति दी जाएगी।

(iii) निम्‍नलिखित गैर-रिटेल प्रयोक्‍ता संरक्षण विक्रेता के रूप में कार्य करने के पात्र होंगे:

(ए) इरडाई द्वारा विनियमित बीमा कंपनियां;

(बी) पीएफ़आरडीए द्वारा विनियमित पेंशन निधियां;

(सी) सेबी द्वारा विनियमित म्‍यूचुअल फन्‍ड;

(डी) सेबी द्वारा विनियमित वैकल्पिक निवेश निधियां; और

(ई) सेबी में पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक।

(iv) पैरा 4.3.1(iii) के तहत उल्लिखित बीमा कंपनियों, पेंशन निधियों, म्‍यूचुअल फन्‍डों और वैकल्पिक निवेश निधियों को संरक्षण विक्रेताओं के रूप में कार्य करने की अनुमति होगी, जो उनके संबन्धित विनियामकों से अनुमोदन के अधीन होगी।

(v) विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की सहभागिता, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा क्रेडिट चूक स्‍वैप में संव्‍यवहार – परिचालनगत अनुदेश के संबंध में 10 फरवरी 2022 के ए.पी.(डीआईआर शृंखला) परिपत्र सं.23 के प्रावधानों के अधीन होगी।

4.3.2 टोटल रिटर्न स्वैप में सहभागी

(i) एक मार्केट मेकर, व्यक्ति को छोड़कर किसी निवासी को, प्रयोजन के अनुसार किसी प्रतिबंध के बिना टीआरएस का प्रस्ताव कर सकता है। मार्केट मेकर किसी व्यक्ति को टीआरएस का प्रस्ताव नहीं करेगा।

(ii) एक मार्केट मेकर, भारत के बाहर के निवासी को, केवल हेजिंग के प्रयोजन हेतु टीआरएस का प्रस्ताव करेगा।

4.4 संदर्भ प्रतिष्‍ठान, दायित्व और आस्तियाँ

(i) क्रेडिट डेरिवेटिव संविदा में संदर्भ प्रतिष्‍ठान एक निवासी प्रतिष्‍ठान होगा जो पैरा 4.4 (ii) के तहत उल्लिखित किसी भी ऋण लिखत का निर्गम करने का पात्र है।

(ii) भारत में निर्गमित निम्‍नलिखित ऋण लिखत सीडीएस संविदा में संदर्भ दायित्‍व या टीआरएस संविदा में संदर्भ आस्ति बनने का पात्र होंगे:

(ए) मुद्रा बाजार ऋण लिखतें;

(बी) दरांकित आईएनआर कॉर्पोरेट बॉन्‍ड और डिबेंचर; और

(सी) अवसंरचना कंपनियों द्वारा स्‍थापित विशेष प्रयोजन साधनों द्वारा निर्गमित अदरांकित आईएनआर कॉर्पोरेट बॉन्‍ड और डिबेंचर।

(iii) मांग/पुट आप्‍शन वाले बॉन्‍ड संदर्भ दायित्‍व/संदर्भ आस्ति का पात्र होंगे।

(iv) आस्ति-समर्थित प्रतिभूतियां/बंधक-समर्थित प्रतिभूतियां और क्रेडिट वर्धित/गारंटीकृत बॉन्‍ड, परिवर्तनीय बॉन्‍ड, आदि जैसे संरचनागत दायित्‍वों को संदर्भ दायित्‍वों/संदर्भ आस्तियों के रूप में अनुमति नहीं दी जाएगी।

(v) संदर्भ दायित्‍व/प्रदेय दायित्‍व/संदर्भ आस्ति को अभौतिक रूप में रखना होगा।

(vi) सीडीएस के लिए अंतर्निहित संदर्भ दायित्व या टीआरएस के लिए संदर्भ आस्ति, एक सूचकांक हो सकता है जिसमें इन निर्देशों के पैरा 4.4 (ii) में निर्धारित केवल पात्र ऋण लिखत शामिल होंगे, जो इस शर्त के अधीन होगा कि सूचकांक एक ऐसे वित्तीय बेंचमार्क प्रशासक द्वारा प्रकाशित किया जाता है जिसे दिनांक 28 दिसंबर, 2023 के समय-समय पर यथासंशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक (वित्तीय बेंचमार्क प्रशासक) निदेश के तहत रिज़र्व बैंक द्वारा विधिवत प्राधिकृत किया गया है, या दिनांक 8 मार्च, 2024 की समय-समय पर यथासंशोधित भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सूचकांक प्रदाता) विनियमावली के तहत सेबी द्वारा विधिवत प्राधिकृत किया गया है।

नोट: सूचकांक जो पूरी तरह से या आंशिक रूप से मुद्रा बाजार ऋण लिखतों पर आधारित है, को वित्तीय बेंचमार्क प्रशासक द्वारा प्रकाशित किया जाएगा, जिसे दिनांक 28 दिसंबर, 2023 के समय-समय पर यथासंशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक (वित्तीय बेंचमार्क प्रशासक) निदेश, 2023 के तहत रिज़र्व बैंक द्वारा विधिवत प्राधिकृत किया गया है।

4.5 क्रेडिट डेरिवेटिव हेतु अन्य परिचालनगत निदेश

4.5.1 क्रय, अवमोचन और निपटान

(i) यदि संदर्भ प्रतिष्‍ठान किसी प्रतिपक्षकार का संबंद्ध पक्ष है तो बाजार सहभागी सीडीएस या टीआरएस संव्‍यवहार में प्रवेश नहीं करेंगे। हालांकि, दो (या अधिक) सरकार-संबद्ध प्रतिष्‍ठानों को इन निेदेशों के प्रयोजन से संबद्ध पक्ष नहीं माना जाएगा। मार्केट मेकर समुचित नियंत्रण स्‍थापित करेंगे ताकि यह सुनिश्‍चित हो सके कि संबंधित पक्षों के साथ संव्‍यवहारों को स्वतंत्र आधार पर पूरा कर लिया जाता है।

(ii) बाजार सहभागी, संदर्भ प्रतिष्‍ठानों/संदर्भ दायित्वों/संदर्भ आस्तियों से जुड़े क्रेडिट डेरिवेटिव लेनदेन नहीं करेंगे, यदि यथाअनुमेय आधार पर, नकदी बाजार में इसी प्रकार के जोखिमों या किसी अन्‍य विनियामक निषेध का उल्‍लंघन के कारण ऐसे सहभागियों पर विनियामक निषेध हैं।

(iii) मूल प्रतिपक्ष के साथ संविदा का अवमोचन करके या नवस्‍थापन (नोवेशन)1 के माध्‍यम से किसी अन्‍य पात्र बाजार सहभागी को संविदा का प्रत्‍यार्पण करके, बाजार सहभागी अपनी सीडीएस संविदा से बाहर हो सकते हैं, जो अधिसूचना सं.डीबीओडी.सं.बीपी.बीसी.76/21.04.157/2013-14 के माध्‍यम से 9 दिसम्‍बर 2013 को जारी ओटीसी डेरिवेटिव संविदा संबंधी परिपत्र के प्रावधानों की शर्तों के अधीन होंगी। हालांकि, उक्‍त परिपत्र के पैरा 2, पैरा 5.1 और पैरा 5.2 के तहत प्रावधान इन निदेशों के अनुसार किए गए सीडीएस संव्‍यवहारों के लिए अनुमेय नहीं होंगे।

(iv) बाजार सहभागी सीडीएस संविदाओं को द्विपक्षीय रूप से या रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमोदित किसी अन्‍य क्‍लीयरिंग और निपटान व्‍यवस्‍था के माध्‍यम से निपटाएंगे।

(v) सीडीएस संविदाएं नकद निपटान, भौतिक निपटान या किसी नीलामी के माध्‍यम से निपटाई जा सकती हैं। नकद निपटान और नीलामी से निपटान की पद्धति का निर्धारण इन निदेशों के पैरा 5 के तहत निर्दिष्‍ट किए अनुसार क्रेडिट डेरिवेटिव निर्धारण समिति द्वारा निर्धारित किया जाएगा।

(vi) टीआरएस में उपयोग की जाने वाली कोई भी फ्लोटिंग ब्याज दर किसी वित्तीय बेंचमार्क प्रशासक द्वारा प्रकाशित एक बेंचमार्क होगी, जिसे दिनांक 28 दिसंबर, 2023 के समय-समय पर यथासंशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक (वित्तीय बेंचमार्क प्रशासक) निदेश, 2023 के तहत भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विधिवत प्राधिकृत किया गया है।

4.5.2 हेजिंग के प्रयोजन से प्रयोक्‍ता के साथ क्रेडिट डेरिवेटिव संव्‍यवहार

(i) हेजिंग के प्रयोजन से क्रेडिट डेरिवेटिव संविदा करते समय, मार्केट मेकर यह सुनिश्‍चित करेंगे कि प्रयोक्‍ता को:

(ए) किसी भी पात्र संदर्भ दायित्‍व/ कोई भी पात्र संदर्भ दायित्व का एक्‍सपोजर होगा;

(बी) अपने द्वारा धारित संदर्भ दायित्‍व/संदर्भ आस्ति के अंकित मूल्‍य से उच्‍चतर नोशनल रकम वाले सीडीएस संविदा(ओं) का क्रय नहीं करेगा; और

(सी) अपने द्वारा धारित संदर्भ दायित्‍व/संदर्भ आस्ति की परिपक्‍वता से बाद की समयावधि वाले सीडीएस या संदर्भ दायित्‍व की परिपक्‍वता के तत्‍काल बाद की परिपक्‍वता तारीख वाले मानक सीडीएस/टीआरएस का क्रय नहीं करेगा।

(ii) उक्‍त के अनुपालन को सुनिश्‍चित करने के लिए मार्केट मेकर रिटेल प्रयोक्‍ता से कोई भी सुसंगत जानकारी/प्रलेख मांग सकते हैं, बदले में ऐसी जानकारी प्रदान करना उनका दायित्‍व होगा।

(iii) हेजिंग के प्रयोजन से क्रेडिट डेरिवेटिव संविदा करने वाले रिटेल प्रयोक्‍ता, जिस तारीख को अंतनिर्हित एक्‍सपोजर नहीं रह जाएगा, उस तारीख से एक माह के भीतर अपनी सीडीएस पोजिशन से निकल जाएंगे।

(iii) रिटेल प्रयोक्‍ता जिस सीडीएस संविदा में शामिल हों, उन संविदाओं का अनिवार्यतया भौतिक निपटान करना होगा।

4.5.3 मानकीकरण

(i) क्रेडिट डेरिवेटिव संविदाओं के लिए निपटान आधार और बाजार परम्पराओं को फिक्‍स्‍ड इन्‍कम मनी मार्केट एन्‍ड डेरिवेटिव एसोसिएशन ऑफ इन्डिया (फिमडा) द्वारा बाजार सहभागियों के परामर्श से और अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम पद्धतियों के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। फिमडा क्रेडिट डेरिवेटिव लेनदेन के लिए मानक प्रलेखन प्रक्रियाएं भी निर्धारित कर सकता है। बाजार सहभागी, वैकल्पिक रूप से, क्रेडिट डेरिवेटिव संविदाओं के लिए एक मानक मास्टर समझौते का उपयोग कर सकते हैं।

(ii) बाजार सहभागियों को सुनिश्चित करना होगा कि सीडीएस संविदा में संरक्षण विक्रेता का प्रत्‍यक्ष दावे का निरूपण हो। संविदा में ऐसा कोई वाक्‍यांश नहीं होगा जो:

(ए) संरक्षण विक्रेता को संविदा को एकपक्षीय रूप से निरस्‍त करने की सहूलियत देता हो, संविदा के निबंधनों के तहत संरक्षण क्रेता द्वारा चूक करने के मामले को छोड़कर;

(बी) क्रेडिट इवेंट होने के बाद और संविदा के निबंधनों के तहत आवश्‍यक शर्तों और अपेक्षाओं को पूरा करने के बाद, क्रेडिट इवेंट भुगतान को समयबद्ध तरीके से करने में संरक्षण विक्रेता को प्रतिबंधित करते हों; या

(सी) क्रेडिट इवेंट हानियों के लिए संरक्षण क्रेता के प्रति संरक्षण विक्रेता को किसी प्रकार का उपाय प्रदान करते हों।

4.5.4 ग्राहक संरक्षण

(i) ओटीसी बाजार में मार्केट मेकर, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा 16 सितम्‍बर 2021 के परिपत्र सं.एफएमआरडी.एफएमडी.07/02.03.247/2021-22 के माध्‍यम से जारी और समय-समय पर यथासंशोधित मास्‍टर निदेश – भारतीय रिज़र्व बैंक (ओटीसी बाजार में मार्केट मेकर्स) निदेश, 2021 और 15 मार्च 2019 को जारी तथा समय-समय पर यथासंशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक परिपत्र सं.एफएमआरडी.एफएमएसडी.11/11.01.012/2018-19 के माध्‍यम से जारी भारतीय रिज़र्व बैंक (बाजार दुरुपयोग से बचाव) निदेश, 2019 का अनुपालन करेंगे।

4.5.5 रिपोर्टिंग

(i) मार्केट मेकर सभी ओटीसी सीडीएस संव्‍यवहारों को संव्‍यवहार होने के 30 मिनट के भीतर ही क्‍लीयरिंग कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लि.(सीसीआईएल) की ट्रेड रिपॉजिटरी में रिपोर्ट करेंगे।

(ii) मार्केट मेकर सभी अवमोचन, नवस्‍थापन, निपटान संव्‍यवहारों और किसी भी क्रेडिट, प्रतिस्‍थापन या अनुक्रमण घटना की रिपोर्ट सीसीआईएल की ट्रेड रिपॉजिटरी में रिपोर्ट करेंगे।

(iii) रिपोर्टिंग प्रारूप सीसीआईएल द्वारा रिज़र्व बैंक की पूर्वानुमति से प्रदान किया जाएगा।

5. क्रेडिट डेरिवेटिव निर्धारण समिति

(i) फिमडा द्वारा क्रेडिट डेरिवेटिव निर्धारण समिति का गठन किया जाएगा जिसमें मार्केट मेकर और क्रेडिट डेरिवेटिव में प्रयोक्‍ताओं को मतदाता सदस्‍यों के तौर पर शामिल किया जाएगा। फिमडा यह सुनिश्चित करेगी कि प्रयोक्‍ताओं को समिति में पर्याप्‍त रूप से प्रतिनिधित्‍व मिलता है। इस समति में अवलोकनकर्ता सदस्‍यों के रूप में केन्‍द्रीय प्रतिपक्षकार और परामर्शदाता सदस्‍यों के रूप में विधिक/लेखापरीक्षा/परामर्शदाता फर्मों को भी शामिल किया जाएगा।

(ii) फिमडा द्वारा क्रेडिट डेरिवेटिव निर्धारक समिति के क्रियाकलापों को नियंत्रित करने हेतु अंतरराष्‍ट्रीय सर्वोत्‍तम व्‍यवहारों के अनुरूप नियमों का गठन किया जाएगा।

(iii) जब भी बाजार सहभागी संपर्क करेंगे तो क्रेडिट डेरिवेटिव निर्धारक समिति क्रेडिट डेरिवेटिव संविदाओं के महत्त्वपूर्ण प्रावधानों के यथातथ्‍य निर्धारकों को तैयार करेगी, जिसमें क्रेडिट इवेंट की घटनाएं, प्रतिस्‍थापन घटनाएं, अनुक्रमण घटनाएं, क्रमानुयायी संदर्भ प्रतिष्‍ठान की पहचान का निर्धारण, आदि शामिल होंगे, लेकिन यह इतने तक ही सीमित नहीं रहेगा।

(iv) क्रेडिट डेरिवेटिव निर्धारक समिति बाजार सहभागियों के परामर्श से सीडीएस संविदाओं के नकद निपटान हेतु मानक पद्धति का विकास करेगी।

(v) जब भी बाजार सहभागी संपर्क करेंगे तो क्रेडिट डेरिवेटिव निर्धारक समिति सीडीएस संविदाओं के निपटान हेतु संदर्भ कीमत निर्धारित करने के लिए नीलामी का अयोजन करे। नीलामी आयोजित करने के मामले में क्रेडिट डेरिवेटिव निर्धारक समिति कार्यपद्धतियां/रक्षोपाय स्थापित करेगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि संदर्भ कीमत का निर्धारण उचित और पारदर्शी तरीके से किया जाए।

(vi) क्रेडिट डेरिवेटिव निर्धारक समिति के निर्णय बाजार सहभागियों के लिए बाध्‍यकारी होंगे।

6. एक्‍सचेंज ट्रेडेड क्रेडिट डेरिवेटिव के लिए निदेश

6.1 क्रेडिट डिफाल्ट स्वैप

(i) एक्‍सचेंज, गारंटीकृत निपटान सहित मानकीकृत एकल-नाम सीडीएस संविदाओं और क्रेडिट सूचकांकों पर सीडीएस संविदाओं का प्रस्‍ताव कर सकते हैं।

(ii) उत्‍पाद के डिजाइन, उत्‍पाद डिजाइन में परिवर्तनों, पात्र सहभागियों और सीडीएस संविदाओं के अन्‍य विवरणों के लिए एक्‍सचेंजों को रिज़र्व बैंक से पूर्वानुमोदन प्राप्‍त करना होगा। स्टॉक एक्स्चेंज पर ट्रेड के निष्पादन और निपटान की प्रक्रिया संबंधी परिचालनगत दिशा-निर्देश सेबी द्वारा निर्दिष्ट किए जाएंगे।

(iii) संदर्भ प्रतिष्‍ठानों और एक्‍सचेंज-ट्रेडेड सीडीएस के लिए संदर्भ दायित्‍व इन निदेशों के पैरा 4.4 के तहत निर्दिष्‍ट किए अनुसार होंगे।

(iv) एक्सचेंज-ट्रेडेड सीडीएस संविदा के लिए क्रेडिट इंडेक्स एक सूचकांक होगा जिसमें इन निदेशों के पैरा 4.4 (ii) में निर्धारित केवल पात्र ऋण लिखतों का समावेश होगा, बशर्ते कि यह सूचकांक एक वित्तीय बेंचमार्क प्रशासक द्वारा प्रकाशित किया जाता है जिसे दिनांक 28 दिसंबर, 2023 के समय-समय पर यथासंशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक (वित्तीय बेंचमार्क प्रशासक) निदेशों के तहत रिज़र्व बैंक द्वारा विधिवत प्राधिकृत किया गया है, या दिनांक 8 मार्च, 2024 की समय-समय पर यथासंशोधित भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सूचकांक प्रदाता) विनियमावली के तहत सेबी द्वारा विधिवत प्राधिकृत किया गया है।

नोट: एक सूचकांक जो पूरी तरह से या आंशिक रूप से मुद्रा बाजार ऋण लिखतों पर आधारित है, को एक वित्तीय बेंचमार्क प्रशासक द्वारा प्रकाशित किया जाएगा, जिसे दिनांक 28 दिसंबर, 2023 के समय-समय पर यथासंशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक (वित्तीय बेंचमार्क प्रशासक) निदेशों के तहत रिज़र्व बैंक द्वारा विधिवत प्राधिकृत किया गया है।

(v) ऐसे सहभागी जो इन निदेशों के पैरा 4.2.2 के तहत परिभाषा के अनुसार रिटेल प्रयोक्‍ता हैं वे एक्‍सचेन्‍ज-ट्रेडेड सीडीएस में केवल हेजिंग के लिए संव्‍यवहार करेंगे और ऐसा प्रयोक्‍ता:

(ए) को किसी भी पात्र संदर्भ दायित्‍व का एक्‍सपोजर होगा;

(बी) अपने द्वारा धारित संदर्भ दायित्‍व के अंकित मूल्‍य से उच्‍चतर नोशनल रकम वाले सीडीएस संविदा(दाओं) का क्रय नहीं करेगा; और

(सी) अपने द्वारा धारित संदर्भ दायित्‍व की परिपक्‍वता से बाद की समयावधि वाले सीडीएस या संदर्भ दायित्‍व की परिपक्‍वता के तत्‍काल बाद की परिपक्‍वता तारीख वाले मानक सीडीएस का क्रय नहीं करेगा।

(vi) क्रेडिट डेरिवेटिव निर्धारक समिति द्वारा किए गए निर्धारण एक्‍सचेन्‍ज-ट्रेडेड सीडीएस संविदाओं के लिए अनुमेय होंगे।

(vii) विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) संरक्षण विक्रेता और/या संरक्षा क्रेता के रूप में एक्‍सचेन्‍ज-ट्रेडेड सीडीएस में लेनदेन कर सकते हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की सहभागिता विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा क्रेडिट चूक स्‍वैप (सीडीएस) में संव्‍यवहार – परिचालनगत अनुदेश के बारे में 10 फरवरी 2022 को जारी ए.पी.(डीआईआर शृंखला) परिपत्र सं.23 के प्रावधानों के अनुसार होगी। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा विक्रय किए गए संरक्षणों की सकल नोशनल रकम की रिपोर्ट एक्‍चेन्‍जों द्वारा सीसीआईएल को दैनिक आधार पर दिवस के अंत में की जाएगी या यदि रिज़र्व बैंक द्वारा अपेक्षित हो तो अंतरा-दिवस आधार पर की जाएगी।

6.2 क्रेडिट सूचकांकों पर वायदे

(i) एक्सचेंज, गारंटीकृत निपटान के साथ क्रेडिट सूचकांकों पर वायदा संविदाओं की पेशकश कर सकते हैं, बशर्ते कि:

(ए) वायदा संविदाओं के लिए अंतर्निहित के रूप में उपयोग किया जाने वाला क्रेडिट सूचकांक केवल पात्र ऋण लिखतों से बना होगा जैसा कि इन निदेशों के पैरा 4.4 (ii) में निर्धारित किया गया है; तथा

(बी) सूचकांक की संरचना/प्रशासन सेबी द्वारा जारी निदेशों के अनुसार होगा।

नोट: एक क्रेडिट सूचकांक जो पूरी तरह से या आंशिक रूप से मुद्रा बाजार ऋण लिखतों पर आधारित है, एक वित्तीय बेंचमार्क प्रशासक द्वारा प्रकाशित किया जाएगा, जिसे दिनांक 28 दिसंबर, 2023 के समय-समय पर यथासंशोधित भारतीय रिजर्व बैंक (वित्तीय बेंचमार्क प्रशासक) निदेश, 2023 के तहत रिज़र्व बैंक द्वारा विधिवत प्राधिकृत किया गया है।

एक्सचेंजों को उत्पाद डिजाइन, उत्पाद डिजाइन में परिवर्तन, पात्र सहभागियों और वायदा संविदाओं के अन्य विवरणों के लिए रिज़र्व बैंक का पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना होगा। स्टॉक एक्सचेंजों पर ट्रेडों के निष्पादन और निपटान की प्रक्रिया संबंधी परिचालन दिशा-निर्देश सेबी द्वारा निर्धारित किए जाएंगे।

(ii) क्रेडिट सूचकांकों पर वायदा में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की भागीदारी निम्नलिखित के अधीन होगी:

(ए) क्रेडिट सूचकांकों पर वायदा संविदाओं में एफपीआई द्वारा ग्रहण की गई समग्र अधिक्रय स्थिति को कॉर्पोरेट ऋण प्रतिभूतियों के लिए निवेश सीमा के तहत माना जाएगा, जैसा कि दिनांक 07 जनवरी, 2025 के समय-समय पर यथासंशोधित मास्टर निदेश - भारतीय रिजर्व बैंक (ऋण लिखतों में अनिवासी निवेश) निदेश, 2025 में निर्दिष्ट है;

(बी) किसी भी एफपीआई की कुल सकल अधिविक्रय (बेची गई) स्थिति, किसी भी समय कॉर्पोरेट बॉन्ड और डिबेंचर और क्रेडिट सूचकांकों पर वायदा संविदाओं में अपनी समेकित अधिक्रय स्थिति से अधिक नहीं होगी; तथा

(सी) एफपीआई, उन क्रेडिट सूचकांकों पर वायदा संविदाओं में भाग नहीं लेंगे जहां अंतर्निहित क्रेडिट सूचकांक में मुद्रा बाजार ऋण लिखत शामिल हैं।

6.3 अन्य निदेश

(i) एक्सचेंजों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक्सचेंजों पर सहभागियों को क्रेडिट डेरिवेटिव संविदाओं से जुड़े जोखिमों के बारे में पर्याप्त रूप से जागरूक किया जाए।

(ii) सहभागी, संदर्भ प्रतिष्ठानों से जुड़े क्रेडिट डेरिवेटिव लेनदेन नहीं करेंगे, यदि नकद बाजार में समान एक्सपोजर मानने पर नियामक प्रतिबंध हैं या किसी अन्य नियामक प्रतिबंध का उल्लंघन है, जैसा भी लागू हो।

(iii) एक्सचेंज, क्रेडिट डेरिवेटिव लेन-देन से संबंधित कोई भी सूचना रिज़र्व बैंक या किसी अन्य एजेंसी को उसी रीति और प्रारूप में प्रस्तुत करेंगे, जैसा रिज़र्व बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, और रिज़र्व बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट समय-सीमा के भीतर प्रस्तुत किया जाए।

7. मूल्यांकन पद्धति

मार्केट मेकर को मार्किंग टू मार्केट क्रेडिट डेरिवेटिव संविदा के लिए सुदृढ़ पद्धति अपनानी होगी।। अपनाई गई मूल्यांकन पद्धति को समान रूप से लागू किया जाएगा और उचित रूप से प्रलेखित और प्रकटित किया जाएगा।

8. विवेकपूर्ण मानदंड, लेखांकन और पूंजी संबंधी अपेक्षाएं

(i) बाजार सहभागियों द्वारा क्रेडिट डेरिवेटिव के लिए अपने-अपने विनियामकों द्वारा जारी अनुमेय विवेकपूर्ण मानदंडों और पूंजी पर्याप्‍तता संबंधी अपेक्षाओं का अनुपालन किया जाएगा।

(ii) बाजार सहभागियों द्वारा क्रेडिट डेरिवेटिव संविदाओं का लेखांकन संबंधित विनियामकों द्वारा जारी विनियामक दिशानिदेशों/अनुदेशों के साथ पठित और अधिसूचित अनुमेय लेखांकन मानकों के अनुसार किया जाएगा। यदि अधिसूचित अनुमेय लेखांकन मानक या संबंधित विनियामक ने क्रेडिट डेरिवेटिव संविदओं के लिए लेखांकन व्‍यवहार अधिसूचित नहीं किए हैं तो इस बारे में यदि इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउन्‍टेन्‍टस ऑफ इंडिया द्वारा यदि कोई दिशानिदेश हों तो उनका अनुपालन किया जाएगा।

9. रिज़र्व बैंक द्वारा मांगी गई जानकारी प्रदान करने का दायित्‍व

पात्र सहभागियों सहित क्रेडिट डेरिवेटिव संविदओं का कारोबार करने वाले व्‍यक्तियों या एजेन्सियों से, रिज़र्व बैंक द्वारा यथानिर्धारित प्रारूप और तरीके से यथानिर्धारित समय-सीमा में, रिज़र्व बैंक ऐसी कोई भी जानकारी या विवरण या कोई स्‍पष्‍टीकरण मांग सकता है, जो रिज़र्व बैंक के अभिमत से सुसंगत हो, और ऐसे व्‍यक्ति, एजेन्सियां और सहभागी इस प्रकार की जानकारी, विवरण या स्‍पष्‍टीकरण रिज़र्व बैंक द्वारा यथानिर्धारित तरीके और प्रारूप में यथानिर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रस्‍तुत करेंगे।

10. डाटा का प्रकीर्णन

रिज़र्व बैंक या रिज़र्व बैंक द्वारा प्राधिकृत कोई भी व्‍यक्ति या एजेंसी, क्रेडिट डेरिवेटिव बाजार में संव्‍यवहारों से संबंधित किसी भी अनामकृत डाटा को लोकहित में प्रकाशित कर सकता है।

11. निदेशों का उल्‍लंघन

किसी व्‍यक्ति या किसी एजेंसी द्वारा इन निदेशों के किसी भी प्रावधान या किसी भी अन्‍य अनुमेय कानून के प्रावधानों का उल्‍लंघन किए जाने की स्थिति में, उस व्‍यक्ति या एजेंसी को अपने कृत्य का बचाव करने का पर्याप्‍त अवसर देने के बाद, रिज़र्व बैंक द्वारा कानून के अनुसार कोई भी दंडात्‍मक या विनियामक कार्रवाई करने के साथ-साथ, उस व्‍यक्ति या एजेंसी को क्रेडिट डेरिवेटिव बाजार में कारोबार करने के लिए एक-बार में एक माह तक की अवधि के लिए वर्जित कर दिया जाएगा, और इस प्रकार की कार्रवाई को सार्वजनिक किया जाएगा।

12. ये निदेश जिस तारीख से प्रभावी हुए हैं, उस तारीख से किए गए सभी क्रेडिट डेरिवेटिव संव्‍यवहारों के लिए अनुमेय होंगे। विद्यमान निदेश उन क्रेडिट डेरिवेटिव संव्‍यवहारों के लिए इन संविदाओं के कालातीत होने तक अनुमेय बने रहेंगे जो संबंधित निदेश के अनुसार निष्‍पादित किए गए हैं।


1 नवस्‍थापन (नोवेशन) शेष बचे पक्ष और किसी तृतीय पक्ष (अंतरिती) के बीच नई संविदा करते हुए किसी ओटीसी डेरिवेटिव संव्‍यवहार (वह अंतिरिती जो विद्यमान संविदा से बाहर होता है, और शेष बचे पक्ष) के दो प्रतिपक्षकारों के बीच संविदा के प्रतिस्‍थापन को कहा जाता है। अंतरिती शेष पक्ष के लिए नवीन प्रतिपक्षकार बन जाता है।


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