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अस्थायी दर बचत बॉण्ड, 2020 (कर योग्य)- एफ़आरएसबी 2020 (टी) - परिचालन दिशानिर्देश

आरबीआई/2026-27/6
आंऋप्रवि.रिटेल.सं.S23/13.01.300/2026-27

02 अप्रैल 2026

सभी प्राप्तकर्ता कार्यालय (संलग्न सूची के अनुसार)

महोदया/महोदय,

अस्थायी दर बचत बॉण्ड, 2020 (कर योग्य)- एफ़आरएसबी 2020 (टी) - परिचालन दिशानिर्देश

भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अस्थायी दर बचत बॉण्ड, 2020 (कर योग्य)- एफ़आरएसबी 2020 (टी) से संबंधित परिचालन दिशानिर्देशों पर जारी 30 जून 2020 के परिपत्र IDMD.CDD.No.3155/13.01.299/2019-20 (27 जून, 2022 को अद्यतित) का संदर्भ दिया जाता है।

2. सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 2006 के खंड 29 (2) के तहत प्रदत्त अधिकारों तथा इस संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक को प्राप्त सभी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, उपर्युक्त परिपत्र में निहित परिचालन दिशानिर्देशों की समीक्षा की गई है। संशोधित परिचालन दिशानिर्देश इसके साथ जारी किए जा रहे हैं और ये इस परिपत्र की तिथि से लागू होंगे।

3. इस परिपत्र में निहित दिशानिर्देश 30 जून 2020 को एफआरएसबी 2020 (टी) पर जारी किए गए परिचालन दिशानिर्देशों का स्थान लेते हैं।

भवदीय,

(राकेश त्रिपाठी)
मुख्य महाप्रबंधक

संलग्नक: अस्थायी दर बचत बॉण्ड, 2020 (कर योग्य) के लिए परिचालन दिशानिर्देश


अस्थायी दर बचत बॉण्ड, 2020 के लिए परिचालन दिशानिर्देश (कर योग्य)

विषयसूची
I. परिचय
II. परिभाषाएँ
III. बॉण्ड जारी करने और इनकी सर्विसिंग करने की प्रक्रिया
1. बॉण्ड के प्रबंधन में शामिल अधिकारियों की जानकारी साझा करना
2. आवेदनों की प्राप्ति
3. आरओ द्वारा राशियों की रिपोर्टिंग और प्रेषण
4. नामांकन
5. ब्याज भुगतान
6. समयपूर्व नकदीकरण
7. परिपक्वता पर चुकौती
8. निवेशक की मृत्यु के मामले में दावे को मान्यता
9. भुगतान किए गए ब्याज/चुकाये गये मूलधन की प्रतिपूर्ति के लिए दावा
10. अदत्त/अदावाकृत ब्याज/मोचन भुगतान का प्रबंधन
11. सीमा अवधि से परे ब्याज के भुगतान के दावे की प्रक्रिया
IV. सामान्य निर्देश
12. लेखापरीक्षा एवं अनुपालन
13. समाशोधन एवं रिपोर्टिंग
14. ब्रोकर/उप-ब्रोकर की नियुक्ति और ब्रोकरेज का भुगतान
15. निवेशक सेवाएँ एवं शिकायत निवारण प्रक्रिया
16. पारिश्रमिक का दावा
17. जुर्माना
18. अभिलेखों की परिरक्षण अवधि

I. परिचय

अस्थायी दर बचत बॉण्ड (कर योग्य), जिन्हें आगे “बॉण्ड” कहा गया है, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा अधिकृत प्राप्तकर्ता कार्यालयों के माध्यम से भारत सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं। बॉण्ड जारी करने के लिए अधिकृत प्राप्तकर्ता कार्यालयों की सूची परिशिष्ट I में दी गई है। पात्रता मानदंड और अन्य नियम एवं शर्तें समय-समय पर संशोधित भारत सरकार के 26 जून 2020 की अधिसूचना F.No.4(10)-B(W&M)/2020 (जिसे आगे “अधिसूचना” कहा गया है) में विनिर्दिष्ट हैं।

II. परिभाषाएँ

इन दिशा निर्देशों में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,

  • बॉण्ड लेजर खाता (बीएलए) का अर्थ है, प्राप्तकर्ता कार्यालय के पास धारक के खाते में इलेक्ट्रॉनिक रूप में जमा बॉण्ड।

  • कें.ले.अ. का अर्थ है, आरबीआई का नागपुर स्थित केंद्रीय लेखा अनुभाग।

  • धारि‍ता प्रमाणपत्र (सीओएच) का अर्थ है, प्राप्तकर्ता कार्यालय द्वारा निवेशक को निर्दिष्ट प्रारूप में जारी सब्स्क्रिप्शन का प्रमाणपत्र।

  • योग्य निवेशक का अर्थ है, अधिसूचना के अनुच्छेद 2 में दिये गये निर्देशों के अनुसार बॉण्ड धारण करने के लिए अधिकृत व्यक्ति।

  • ई-कुबेर का अर्थ है, आरबीआई का कोर बैंकिंग सोल्यूशन।

  • लो.ऋ.का. का अर्थ है, आरबीआई का लोक ऋण कार्यालय।

  • प्राप्तकर्ता कार्यालय (आरओ) का अर्थ है, चयनित वाणिज्यिक बैंक या आरबीआई द्वारा बॉण्ड जारी करने और इनकी सर्वि‍सिंग करने के लिए अधिकृत कोई अन्य संस्था।

  • लिंक सेल का अर्थ है, आरओ द्वारा नामित नोडल कार्यालय/शाखा जो इन दिशानिर्देशों में दिये गये निर्देशों के अनुपालन के लिए अन्य शाखाओं, कें.ले.अ. और लो.ऋ.का. के साथ समन्वय करने के लिए उत्तरदायी है।

III. बॉण्ड जारी करने और इनकी सर्विसिंग करने की प्रक्रिया

1. बॉण्ड के प्रबंधन में शामिल अधिकारियों की जानकारी साझा करना

1.1 बॉण्ड जारी करने/इनकी सर्विसिंग करने के लिए उत्तरदायी आरओ के दारा नोडल अधिकारी को नियुक्त किया जाना है। नोडल अधिकारी और एक वरिष्ठ अधिकारी, जो महाप्रबंधक/संचालन प्रमुख के पद से निम्न न हो, के संपर्क विवरण ईमेल के माध्यम से आरबीआई को सूचित किए जाने हैं। आरओ द्वारा मौजूदा नोडल अधिकारी/वरिष्ठ अधिकारी में किसी भी परिवर्तन की सूचना आरबीआई को दी जानी है।

2. आवेदनों की प्राप्ति

2.1 आरओ को उनकी शाखाओं अथवा उनके ब्रोकर के माध्यम से योग्य निवेशकों से आवेदन फॉर्म प्राप्त करने के लिए अधिकृत किया जाता है। आवेदन फॉर्म आवश्यक विवरण के साथ, Form 'B' (अधिसूचना के Annexure 2) में प्राप्त किया जाना है। आवेदन जमा करते समय, आवेदकों को शीघ्र निवेशक सेवा सुनिश्चित करने हेतु अपनी ई-मेल आईडी, संपर्क विवरण और पता जमा करने के लिए बढ़ावा दिया जाना है। आवेदन राशि नकद (केवल 20,000/- तक) या डिमांड ड्राफ्ट/चेक के रूप में अथवा आरओ को स्वीकार्य किसी भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्राप्त की जानी है। डिमांड ड्राफ्ट/चेक आरओ के पक्ष में तैयार किया जाना है। आरओ द्वारा निवेशकों को आवेदन फॉर्म भरते समय उनके निवेश के संबंध में नामांकन दर्ज करने हेतु बढ़ावा दिया जाना है।

2.2 आरओ को यह सुनिश्चित करना है कि आवेदन फॉर्म सभी शाखाओं में उपलब्ध हों। इसके अतिरिक्त यह सुनिश्चित करना है कि पूर्ण आवेदन फॉर्म स्वीकार करने और सब्स्क्रिप्शन राशि के संग्रह की सुविधा बैंक आरओ के मामले में सरकारी कारोबार को देखने वाले सभी शाखाओं में और गैर-बैंक आरओ के मामले में सीसीआईएल को छोड़कर सभी शाखाओं में 30 सितंबर 2026 को या उससे पूर्व उपलब्ध हो। आरओ द्वारा अनुच्छेद 18 में दिये गए निर्देशों के अनुसार पूर्ण आवेदन फॉर्म संरक्षित रखा जाना है एवं परिचालन सुविधा हेतु आवेदन फॉर्म की स्कैन की गई प्रति उनके पास रखी जानी है।

2.3 आरओ द्वारा बॉण्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा करने की सुविधा भी प्रदान की जानी है। यह सुनिश्चित करना है कि अधिसूचना में दिए गए आवेदन फॉर्म के अनुसार सभी प्रासंगिक विवरण आवेदक से प्राप्त किए गए हैं। जिन आरओ ने अभी तक ऑनलाइन सुविधा की शुरुआत नहीं की है, उन्हें यह सुनिश्चित करना है कि यह सुविधा 30 सितंबर 2026 को या उससे पूर्व सभी योग्य आवेदकों को उपलब्ध कराई जाए।

2.4 निवेशक द्वारा जमा किए गए आवेदनों के साथ आयकर विभाग द्वारा उन्हें जारी स्थायी खाता क्रमांक (PAN) भी शामिल होनी चाहिए। यदि आवेदक के पास PAN नहीं है, तो वह समय-समय पर संशोधित आयकर नियम, 2026 के नियम 159 में निर्दिष्ट प्रपत्र संख्या 97 में एक घोषणा प्रस्तुत कर सकता है। यदि निवेशक एक नाबालिग है जिसके पास आयकर के लिए कोई आय प्रभार्य नहीं है और उसके पास PAN नहीं है, तो उसे माता-पिता/अभिभावक में से किसी एक का PAN उद्धृत करना है, जैसा भी लागू हो। यदि निवेशक एक नाबालिग है जो उपार्जन कर रहा है लेकिन उसके पास PAN नहीं है, तो उसे ऊपर निर्दिष्ट प्रपत्र संख्या 97 में एक घोषणा प्रस्तुत करना है।

2.5 भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित, आरओ द्वारा, खोले गए बीएलए के संबंध में समय-समय पर संशोधित Reserve Bank of India (Commercial Banks – Know Your Customer) Directions, 2025 पर दिशानिर्देशों का पालन किया जाना है। अन्य आरओ को अपने संबंधित नियामकों द्वारा जारी केवाईसी पर प्रासंगिक दिशानिर्देशों का पालन करना है।

2.6 आरओ द्वारा आवेदक से ऑनलाइन/ऑफलाइन फॉर्म में आवेदन जमा करते समय, Form 'B' (अधिसूचना के Annexure 2) में निर्दिष्ट घोषणा के अलावा बॉण्ड के सब्स्क्रिप्शन के लिए अपनी योग्यता की पुष्टि करते हुए एक घोषणा प्राप्त की जानी है।

2.7 आरओ को यह सुनिश्चित करना है कि जमा किए गए आवेदन सभी प्रकार से पूर्ण हों। अधिसूचना के Annexure 2 में निर्दिष्ट Acknowledgement of Application Form के अनुसार आवेदक को एक पावती जारी की जानी है जिसमें सीओएच इलेक्ट्रॉनिक रूप में जारी करने की तिथि को निर्दिष्ट किया जाना है।

2.8 आरओ द्वारा प्रत्येक निवेशक के लिए विशिष्ट खाता क्रमांक के साथ एक अलग बीएलए खोला जाना है। प्रत्येक खाते को, बैंक और उसके शाखा कोड को दर्शाने वाले अल्फा उपसर्ग के साथ, छह अंकों का कोड आवंटित किया जाना है (उदाहरण के लिए, एसबीआईपीएनबीएलए 000001 - भारतीय स्टेट बैंक, पुणे बॉण्ड लेजर खाता 000001)। शाखा के बंद होने/विलय होने/स्थानांतरित होने की स्थिति में, निवेशक को आवंटित बीएलए नंबर यथावत रहेगा।

2.9 बॉण्ड इलेक्ट्रॉनिक रूप में जारी किए जाने हैं और नकद के टेंडर की तिथि या ड्राफ्ट/चेक/राशि की प्राप्ति की तिथि पर निवेशक के बीएलए में जमा किए जाने हैं। भुगतान की प्राप्ति की तिथि को 'निर्गम की तिथि' के रूप में मानना है और सीओएच में निवेश की तिथि के रूप में उल्लेख किया जाना है। बॉण्ड की अवधि जारी होने की तिथि से गणना की जानी है।

2.10 आरओ द्वारा Form A (अधिसूचना के Annexure 1) में राशि की प्राप्ति की तिथि से तीन कार्य दिवसों के भीतर निवेशक को सीओएच जारी किया जाना है। सीओएच, सभी निवेशकों के ईमेल पते पर उनके आवेदन फॉर्म में दिए गए विवरण के अनुसार भी भेजा जा सकता है। सीओएच खो जाने के मामले में निवेशक के अनुरोध पर उसे इसकी एक अनुलि‍पि जारी की जा सकती है।

2.11 एक निवेशक के नाम पर आरओ द्वारा नए या एक से अधिक बीएलए नहीं खोले जाने अथवा बनाए नहीं रखे जाने हैं। बाद में उसके द्वारा किए गए निवेश, यदि कोई हो, को मौजूदा बीएलए के तहत शामिल किया जाना है। निवेशक द्वारा किए गए प्रत्येक निवेश के उपरांत उन्हें एक अद्यतित सीओएच जारी की जानी है, जिसमें बीएलए के तहत अब तक किए गए सभी निवेशों का विवरण हो।

2.12 आरओ की शाखाओं द्वारा परिशिष्ट II में दिए गए प्रोफार्मा के अनुसार "Register of Bond Ledger Accounts - All holders" भी रखी जानी है। प्रत्येक आरओ द्वारा अपने कार्यालयों/शाखाओं में से एक को अपने लिंक सेल के रूप में नामित किया जाना है जो व्यक्तिगत बीएलए धारकों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक रूप में किए गए सभी निवेशों के लिए केंद्रीकृत रिकॉर्ड बनाए रखेगा।

2.13 आरओ आवेदकों को अपनी सब्स्क्रिप्शन वापस लेने की अनुमति दे सकते हैं यदि कें.ले.अ. को सब्स्क्रिप्शन राशि भेजने से पहले निकासी का अनुरोध किया गया है। निवेश के आंशिक निकासी की अनुमति नहीं है। इसके अलावा आरओ द्वारा कें.ले.अ. को सब्स्क्रिप्शन राशि भेजने के उपरांत निवेश की निकासी के लिए किसी भी अनुरोध पर विचार नहीं की जानी है।

2.14 यदि आवेदक की कोई गलती न होने के बावजूद उसे सीओएच जारी किए बिना सब्स्क्रिप्शन राशि वापस कर दी जाती है, तो आरओ धन की प्राप्ति की तिथि से सब्स्क्रिप्शन राशि की वापसी की तिथि तक की अवधि, जिसके दौरान आवेदक के पास धनराशि नहीं थी, के लिए लागू कूपन दर पर आवेदक को मुआवजे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा। यदि आवेदक के कारण आवेदन अस्वीकृत/विलंबित हो जाता है, तो कोई मुआवजा देय नहीं है।

3. आरओ द्वारा राशियों की रिपोर्टिंग और प्रेषण

3.1 आरओ द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना है कि उनके लिंक सेल के माध्यम से चेक/ड्राफ्ट/राशि की प्राप्ति की तिथि से दो कार्य दिवसों के भीतर कें.ले.अ. को सब्स्क्रिप्शन राशि भेज दी जाए। कें.ले.अ. को सब्स्क्रिप्शन के प्रेषण/रिपोर्टिंग में, राशियों की प्राप्ति की तिथि से दो कार्य दिवसों से अधिक विलंब की स्थिति में, सरकार द्वारा निवेशक को विलंब की अवधि के लिए भुगतान किए गए/देय ब्याज आरओ से वसूल किया जाना है। इसके अलावा कें.ले.अ. को सब्स्क्रिप्शन के प्रेषण/रिपोर्टिंग में विलंब के ऐसे मामले बार-बार पाये जाने पर, आरओ पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

3.2 विभिन्न बीएलए संख्या, सब्स्क्रिप्शन राशि, बॉन्ड जारी करने की तिथि और अन्य विवरणों को दर्शाने वाली दैनिक सूचना, लिंक सेल द्वारा ई-कुबेर में अपलोड करने के लिए निर्दिष्ट फाइल प्रारूप के साथ हार्ड कॉपी में कें.ले.अ. को अग्रेषित किया जाना है।

3.3 यदि आरओ द्वारा गलत रिपोर्टिंग किए जाने पर कें.ले.अ. को पूर्व में भेजी गई सब्स्क्रिप्शन राशि में परिवर्तन होता है जिससे पहले भेजी गई राशि में कमी आती है तो इसे उस अवधि, जिसके दौरान सरकार के पास राशि की कमी थी, के लिए विलंब/गैर-रिपोर्टिंग का मामला माना जाएगा। इस अवस्था में अनुच्छेद 3.1 में दिए गए निर्देश लागू होंगे। इसके अलावा कें.ले.अ. को सब्स्क्रिप्शन की ऐसी गलत रिपोर्टिंग के मामले, जहां रिपोर्टिंग के कारण अधिक राशि भेजने के मामले भी शामिल हैं, बार-बार पाए जाने पर, आरओ पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

3.4 आरओ द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना है कि किसी निवेशक द्वारा अलग-अलग आवेदनों के तहत एक दिन में किए गए विभिन्न निवेशों को कें.ले.अ. को भेजी गई सब्स्क्रिप्शन फाइलों में स्पष्ट रूप से सूचित किया जाए। निवेशक द्वारा प्रत्येक आवेदन के तहत किए गए निवेश का विवरण सीओएच के अंतर्गत दिया जाना चाहिए।

3.5 आरओ द्वारा, निवेशक/निवेशकों द्वारा बॉण्ड में किए गए निवेश का विवरण (पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान कुल दस लाख रुपये या उससे अधिक) लो.ऋ.का. मुंबई को वित्तीय लेनदेन का विवरण (SFT) फ़ाइल करने के लिए 15 अप्रैल को या उससे पूर्व प्रस्तुत किया जाना है। विवरण में पायी गई ऐसी विसंगति, जिसके परिणामस्वरूप निवेशक मुआवजे के लिए शिकायत/दावा कर सकता है, के लिए आरओ उत्तरदायी होगा।

4. नामांकन

a) नामांकन का पंजीकरण

4.1 नामांकन एवं ‘मौजूदा नामांकन को रद्द करना’ सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 2006 और इसके अंतर्गत जारी सरकारी प्रतिभूति वि‍नि‍यमावली, 2007 के प्रावधानों द्वारा शासित होगी। आरओ द्वारा आवेदकों/निवेशकों द्वारा किए गए नामांकन को निर्धारित Form C (अधिसूचना के Annexure 4) में पंजीकृत किया जाना है। इस प्रयोजन के लिए, परिशिष्ट III में दिए गए प्रोफार्मा के अनुसार आरओ द्वारा एक "Register of Nomination" रखा जाना है।

4.2 नामांकन फॉर्म स्वीकार करते समय, आरओ द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना है कि:

  1. नामांकन एकमात्र धारक/ नाबालिग को छोड़कर सभी संयुक्त धारकों द्वारा किया गया है।

  2. उसमें बीएलए के ब्यौरे का सही उल्लेख किया गया है।

  3. फॉर्म में नामितियों के विस्तृत आद्याक्षर सहित नाम और बैंक खाता विवरण सहित पूरा पता शामिल किए गए हैं।

  4. यदि नामि‍ती नाबालिग है तो उसकी जन्म तिथि और बॉण्ड धारक की मृत्यु की स्थिति में नामिती के अल्पवयस्क होने के दौरान उसकी ओर से राशि प्राप्त करने के लिए नियुक्त व्यक्ति का नाम और पता प्रस्तुत किया गया है।

  5. यदि हस्ताक्षर अंगूठे के निशान के माध्यम से किए गए हैं, तो इसे मजिस्ट्रेट/नोटरी पब्लिक/ट्रेजरी अधिकारी/बैंक अधिकारी द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए।

  6. आवेदक/निवेशक के पास सभी निवेशों के लिए एक ही नामि‍ती या प्रत्येक निवेश के लिए अलग नामिती दर्शाने का विकल्प है।

  7. आवेदक/निवेशक द्वारा केवल एक निवासी/अनिवासी भारतीय (एनआरआई) को नामित किया जाना है। भारत के विदेशी नागरिक (ओसीआई) को बॉण्ड के लिए नामित होने की अनुमति नहीं है।

  8. नामांकन Register of Nomination में दर्ज किया जाना है और आवेदक/निवेशक को Form C में दिये गए प्रोफॉर्मा के अनुसार नामि‍ती के विवरण सहित पंजीकरण क्रमांक को दर्शाते हुए एक पावती जारी की जानी है।

  9. नामांकन फॉर्म को उचित अभिरक्षा में रखा जाना है।

4.3 यदि आवेदक/निवेशक ने एक से अधिक नामि‍ती दर्शाए हैं, तो आरओ द्वारा उनसे नामितियों के बीच निवेश राशि के हस्तांतरण के लिए राशिवार आवंटन प्राप्त किया जाना है, ताकि प्रत्येक नामि‍ती को निवेशक की मृत्यु की स्थिति में न्यूनतम राशि 1,000/- (अंकित मूल्य) और उसके बाद 1,000/- के गुणकों में राशि प्राप्त हो। यदि निवेशक ने न्यूनतम राशि 1,000/- (अंकित मूल्य) का निवेश किया है, तो उसे केवल एक व्यक्ति को नामित करने की अनुमति दी जा सकती है। एक से अधिक नामितियों को राशिवार आवंटन की सुविधा सभी नए निवेशों के लिए 30 सितंबर 2026 को या उससे पूर्व उपलब्ध कराई जानी है। यह सुविधा मौजूदा निवेशों के लिए 31 दिसंबर 2026 को या उससे पूर्व प्रदान की जानी है।

b) नामांकन रद्द करना

4.4 आरओ द्वारा निवेशकों से नामांकन रद्द करने के लिए आवेदन निर्धारित Form D (अधिसूचना के Annexure 5) में स्वीकार किए जाने हैं।

4.5 यदि निवेशक मौजूदा नामांकन को रद्द करने के लिए आवेदन करता है, तो आरओ द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना है कि:

  1. बीएलए का विवरण Form D में सही प्रकार से बताया गया है।

  2. फॉर्म में नामि‍ती के नाम का सही उल्लेख किया गया है।

4.6 यदि फॉर्म सभी प्रकार से पूर्ण हो, तो नामांकन रद्द करने का विवरण Register of Nomination (परिशिष्ट III) में उपयुक्त कॉलम में दिया जाना है और इसे नामांकन के मूल फॉर्म (Form C) में दर्ज किया जाना है।

4.7 निवेशक को Form D में दिये गये प्रोफॉर्मा के अनुसार पावती जारी की जानी है।

4.8 नामांकन रद्द करने से संबंधित सभी फॉर्म मूल नामांकन फॉर्म के साथ फ़ाइल किए जाएंगे।

c) मौजूदा नामांकन में परिवर्तन

4.9 Form C (अधिसूचना के Annexure 4) में नया नामांकन जमा करने पर मौजूदा नामांकन को बदला जा सकता है। इसे मूल नामांकन की तरह मानते हुए जांच की जानी है। Register of Nomination (परिशिष्ट III) में उपयुक्त प्रविष्टि की जानी है और बॉण्डधारक को नए नामांकन के पंजीकरण क्रमांक दर्शाते हुए एक पावती जारी की जानी है। मौजूदा नामांकन में परिवर्तन पंजीकरण की तिथि से प्रभावी होंगे। नामांकन में परिवर्तन के लिए अनुरोध करने वाले सभी फॉर्म मूल नामांकन फॉर्म के साथ भरे जाने हैं।

4.10 निवेशक द्वारा उसके नामि‍ती की नागरिकता स्थिति की ओसीआई में परिवर्तन के बारे में आरओ को सूचित किए जाने पर, आरओ द्वारा निवेशक को यह निर्देशित किया जाना है कि वह अपना नामांकन बदलकर किसी निवासी/एनआरआई व्यक्ति को नामित करे।

5. ब्याज भुगतान

5.1 बॉण्ड जारी होने की तिथि से उसपर ब्याज अर्जित होगा और ब्याज का भुगतान आरंभ में बॉण्ड जारी करने की तिथि से 30 जून/31 दिसंबर, जो भी पहले हो, तक किया जाना है और उसके बाद 31 दिसंबर/30 जून को समाप्त होने वाली प्रत्येक छमाही अवधि के लिए किया जाना है।

5.2 बॉण्ड पर ब्याज दर को राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी) के मौजूदा दर पर (+) 35 बीपीएस के स्प्रेड के साथ जोड़ा गया है। ब्याज दर हर छह महीने में अर्थात 1 जनवरी और 1 जुलाई को पुनर्निर्धारित की जाएगी।

5.3 ब्याज का आवधिक भुगतान क्रमशः 1 जुलाई और 1 जनवरी को किया जाना है। यदि ब्याज भुगतान की तिथि किसी गैर-कार्य दिवस अर्थात शनिवार, रविवार या किसी अन्य अवकाश के दिन पड़ती है, तो ब्याज का भुगतान अगले कार्य दिवस पर किया जाना है। बॉण्ड पर ब्याज भुगतान के लिए प्रयुक्त दिन गणना पद्धति 30/360 होगी। परिपक्वता पर, शेष अवधि/अंतिम छमाही का ब्याज मूलधन के साथ भुगतान किया जाना है।

5.4 जब तक निवेशक प्रासंगिक फॉर्म/प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं करता है, जिसमें कहा गया है कि समय-समय पर संशोधित आयकर अधिनियम, 2025 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत छूट प्राप्त की गई है, तब तक ब्याज का भुगतान होने पर स्रोत पर कर की कटौती की जानी है।

5.5 समय-समय पर संशोधित आयकर अधिनियम, 2025 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आरओ द्वारा निवेशक को भुगतान किए गए ब्याज पर कटौती के लिए टीडीएस प्रमाणपत्र प्रदान किया जाना है।

5.6 निष्क्रिय PAN वाले निवेशकों के लिए कर कटौती के समय केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा जारी नवीनतम निर्देशों का पालन आरओ द्वारा किया जाना है।

5.7 आरओ द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना है कि निवेशकों को ब्याज का भुगतान देय तिथि पर प्राप्त हो। निवेशकों को समय पर ब्याज का भुगतान, आरओ के आंतरिक/समवर्ती लेखा परीक्षा के अंतर्गत सम्मिलित किया जाना चाहिए। आरओ द्वारा निवेशकों के अनुरोध पर पिछले वित्तीय वर्ष के लिए ब्याज भुगतान का विवरण प्रदान किया जाना है।

5.8 निवेशक की गलती न होने के बावजूद यदि ब्याज का भुगतान विलंब से होता है तो आरओ द्वारा विलंब की अवधि के लिए लागू कूपन दर पर निवेशक को मुआवजा प्रदान किया जाना है।

6. समयपूर्व नकदीकरण

6.1 बॉण्ड के समयपूर्व नकदीकरण की सुविधा अधिसूचना में दिये गये अनुदेशों के अनुसार होगी।

6.2 वैयक्ति‍क निवेशकों के द्वारा, उनकी आयु की पुष्टि के लिए जन्मतिथि से संबंधित दस्तावेज आरओ की संतुष्टि के अनुरूप प्रस्तुत किए जाने पर, आरओ उन्हें बॉण्ड के समयपूर्व नकदीकरण की अनुमति दे सकते हैं।

6.3 आयु-मानदंड समयपूर्व नकदीकरण की तिथि के अनुसार लागू होगा। संयुक्त होल्डिंग के मामले में, निवेशकों में से कम से कम एक को समयपूर्व नकदीकरण की तिथि पर आयु मानदंडों को पूरा करना चाहिए।

6.4 मूल निवेशक की मृत्यु के मामले में, समयपूर्व मोचन के लिए लॉक-इन अवधि कानूनी उत्तराधिकारी की उम्र के आधार पर निर्धारित की जाएगी, न कि नामि‍ती की।

6.5 एक आवेदन के माध्यम से निवेश की गई राशि के आंशिक नकदीकरण की अनुमति नहीं है। यदि किसी निवेशक द्वारा एक बीएलए के अंतर्गत एक से अधिक निवेश हैं, तो ऐसे निवेश जिनकी जारी करने की तिथि से न्यूनतम लॉक-इन अवधि पूर्ण हो चुकी है, के समयपूर्व नकदीकरण के लिए वह अनुरोध कर सकता है।

7. परिपक्वता पर चुकौती

7.1 बॉण्ड जारी होने की तिथि से सात वर्ष की समाप्ति पर चुकाए जाने हैं। बॉण्ड की परिपक्वता के बाद कोई ब्याज देय नहीं है।

7.2 आरओ द्वारा निवेशक को, स्टॉपेज से मुक्त निवेशों के मोचन की तिथि से कम से कम एक माह पूर्व, परिपक्वता के संबंध में सूचित किया जाना है। सूचना में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया जाना है कि परिपक्वता के बाद निवेश पर कोई ब्याज देय नहीं है। सूचना में यह भी बताया जाना है कि परिपक्वता राशि निवेशक के पंजीकृत बैंक खाते में जमा की जाएगी और बैंक खाते में किसी भी परिवर्तन की स्थिति में, निवेशक परिपक्वता तिथि से कम से कम 15 दिन पहले, अपने बैंक खाते को अद्यतित कर सकता है।

7.3 निवेशक को मोचन राशि का भुगतान, आरओ के पास उपलब्ध, उसके अद्यतित बैंक खाते में क्रेडिट द्वारा किया जाएगा।

7.4 संयुक्त धारकों के नाम पर किए गए निवेश की मोचन राशि उनके द्वारा प्रस्तुत विवरण के अनुसार बैंक खाते में जमा की जाएगी।

7.5 आरओ द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना है कि निवेशकों को मोचन राशि देय तिथि पर प्राप्त हो। निवेशकों को समय पर मोचन राशि का भुगतान, आरओ के आंतरिक/समवर्ती लेखा परीक्षा के अंतर्गत सम्मिलित किया जाना है।

7.6 यदि मोचन राशि के भुगतान की तिथि किसी गैर-कार्य दिवस अर्थात शनिवार, रविवार या किसी अन्य अवकाश के दिन पड़ती है, तो भुगतान पिछले कार्य दिवस पर किया जाना है।

7.7 यदि एक बीएलए के अंतर्गत एक से अधिक निवेश किए जाते हैं, तो प्रत्येक निवेश का मोचन उसमें परिलक्षित होगा और निवेशक को निर्धारित प्रारूप में एक नया सीओएच जारी किया जाना है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बीएलए एवं सीओएच में दर्शायी गयी बकाया राशि समान है।

7.8 निवेशक की गलती न होने के बावजूद यदि मोचन राशि के भुगतान में विलंब होता है, तो आरओ द्वारा निवेशक को विलंब की अवधि के लिए लागू कूपन दर पर मुआवजा दिया जाना है।

8. निवेशक की मृत्यु के मामले में दावे की मान्यता

A. जहां नामांकन मौजूद है

8.1 एकमात्र धारक या सभी संयुक्त धारकों की मृत्यु की स्थिति में, नामि‍ती सरकारी प्रतिभूति अधिनियम 2006 की धारा 9 और सरकारी प्रतिभूति वि‍नि‍यमावली 2007 के संबंधित प्रावधानों के अनुसार बॉण्ड के हकदार होंगे।

8.2 यदि बॉण्ड परिपक्व नहीं हुआ है, तो इसे अनुच्छेद 4.3 में दिये गये निर्देशों के अनुसार निवेशक द्वारा उसके नामांकन फॉर्म में दर्शाये गए राशिवार वितरण के अनुसार नामि‍ती को हस्तांतरित किया जाना है। यदि नामि‍ती का आरओ के साथ बीएलए खाता नहीं है, तो उसे आरओ के साथ एक बीएलए खाता खोलना है। बॉण्ड नामि‍ती को हस्तांतरित किए जाने पर उन्हें हस्तांतरण के विवरण के साथ एक नया सीओएच जारी किया जाना है।

8.3 यदि बीएलए में रखा गया बॉण्ड पहले ही परिपक्व हो चुका है, तो मृतक निवेशक द्वारा नामांकन फॉर्म में दर्शाये गए राशिवार वितरण के अनुसार नामि‍ती से उचित डिस्चार्ज प्राप्त करने के बाद चुकौती की जानी है। नामि‍ती के डिस्चार्ज को मजिस्ट्रेट/उनके बैंकरों द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए।

8.4 आरओ द्वारा नामि‍ती को हस्तांतरित निवेश के विवरण की रिपोर्ट अगले कार्य दिवस के भीतर विनिर्दिष्ट प्रारूप में कें.ले.अ. को दिया जाना है।

8.5 यदि नामि‍ती एनआरआई है, तो यह सुनिश्चित करने के बाद कि उसकी नवीनतम आवासीय स्थिति निवासी/ एनआरआई है, बॉण्ड नामांकित व्यक्ति को हस्तांतरित किया जाना है। बॉण्ड के हस्तांतरण के बाद, एनआरआई नामि‍ती द्वारा परिपक्वता तक बॉण्ड को रखा जाना है और ब्याज/मोचन राशि का प्रत्यावर्तन मौजूदा FEMA दिशानिर्देशों के अधीन होगा। यदि नामि‍ती आवासीय स्थिति में परिवर्तन के कारण, अधिसूचना के अनुसार बॉण्ड रखने के लिए अयोग्य है, तो ऐसे दावों की सूचना लो.ऋ.का. नागपुर को ई-मेल के माध्यम से शीघ्र दी जानी है।

B. जहां कोई नामांकन मौजूद नहीं है

8.6 एकमात्र धारक या संयुक्त धारकों की मृत्यु होने पर बॉण्ड के हकदार और संयुक्त धारकों या कई भुगतानकर्ताओं के उत्तरजीवी के अधिकारों की पहचान, सरकारी प्रतिभूति अधिनियम 2006 की धारा 7 एवं 8 और सरकारी प्रतिभूति वि‍नि‍यमावली 2007 के साथ संबंधित प्रावधानों के तहत की जानी है।

8.7 दावा प्राप्त होने के उपरांत, आरओ द्वारा सरकारी प्रतिभूति अधिनियम 2006 की धारा 7 और सरकारी प्रतिभूति वि‍नि‍यमावली 2007 के संदर्भ में दावे को मान्यता दी जानी है, जो वैधता, प्रामाणिकता और उसकी अंतिमता के संबंध में उनकी संतुष्टि के अनुरूप है, बशर्ते कि इस तरह के बॉण्ड के संबंध में और दावे को प्रमाणित करने के लिए आवश्यक सभी दस्तावेजों के प्रस्तुत करने पर कोई अन्य दावा न हो। इस प्रयोजन के लिए, आरओ किसी भी सहायक दस्तावेज या घोषणा को मंगवा सकता है, और आवश्यकतानुसार दावेदार को दावे की राशि के लिए क्षतिपूर्ति का बांड प्रस्तुत करने का निर्देश दे सकता है जैसा कि आरओ उचित समझे। बॉण्ड के स्वामित्व की मान्यता मिलने पर, आरओ द्वारा बॉन्ड को हस्तांतरित किया जाना है और अगले कार्य दिवस के भीतर निर्दिष्ट प्रारूप में कें.ले.अ. को इसे रिपोर्ट किया जाना है।

8.8 यदि निवेशक की मृत्यु के उपरांत बॉण्ड प्राप्त करने का हकदार व्यक्ति, अधिसूचना के अनुसार बॉण्ड रखने के लिए अयोग्य है, तो ऐसे दावों की सूचना आरओ द्वारा लो.ऋ.का. नागपुर को ई-मेल के माध्यम से शीघ्र दी जानी है।

9. भुगतान किए गए ब्याज/ चुकाये गए मूलधन की प्रतिपूर्ति के लिए दावा

9.1 ब्याज का भुगतान/मूलधन की चुकौती करने वाले आरओ द्वारा उनके लिंक सेल के माध्यम से बीएलए-वार ब्यौरा [बीएलए क्रमांक, निवेश की तिथि, निवेश की राशि, भुगतान का प्रकार (ब्याज या मूलधन), भुगतान की तिथि, भुगतान किए गए ब्याज/ चुकाए गए मूलधन की राशि] देते हुए कें.ले.अ. से प्रतिपूर्ति का दावा किया जाना है।

9.2 ब्याज/मूलधन भुगतान के स्क्रॉल आरओ की शाखाओं द्वारा (परिशिष्ट IV और परिशिष्ट V के अनुसार) तैयार किए जाने हैं। लिंक सेल द्वारा विभिन्न शाखाओं से प्राप्त स्क्रॉल संग्रहित कर, शाखावार समेकित स्क्रॉल तैयार किया जाना है। ब्याज/मूलधन की प्रतिपूर्ति हेतु, निर्दिष्ट प्रारूप के अनुसार, समेकित दावे की सॉफ्ट कॉपी, लिंक सेल द्वारा ब्याज/मूलधन के भुगतान की तिथि से एक महीने के भीतर कें.ले.अ. को अग्रेषित की जानी है।

9.3 कें.ले.अ. को प्रस्तुत किए गए दावों को, आरओ द्वारा उनके समवर्ती लेखा परीक्षकों से एक प्रमाण पत्र के माध्यम से विधिवत समर्थन दिया जाना चाहिए कि ब्याज/मूलधन भुगतान के आंकड़ों का सत्यापन किया गया है और दावा की गयी राशि का भुगतान निवेशकों को पहले ही किया जा चुका है। इसके अलावा, लेखा परीक्षकों को यह भी पुष्टि करनी चाहिए कि आरओ द्वारा पहले राशि का दावा नहीं किया गया है, और भुगतान में विलंब के मामलों में, दिशानिर्देशों के अनुच्छेद 5.8/ अनुच्छेद 7.8 में दिये गए निर्देशों के अनुसार, निवेशकों को उचित मुआवजा दिया गया है।

9.4 शाखाओं से प्राप्त स्क्रॉल की प्रतियों सहित समेकित स्क्रॉल को लिंक सेल द्वारा लेखा नियंत्रक, आर्थिक मामलों के विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली को हार्ड कॉपी और ईमेल दोनों के माध्यम से अग्रेषित की जानी है। इसकी प्रति ईमेल के माध्यम से आरबीआई को भी भेजी जानी है। समेकित स्क्रॉल और शाखा स्क्रॉल की प्रतियां लिंक सेल द्वारा उनके रिकॉर्ड के लिए रखी जानी है।

9.5 ब्याज और मूलधन भुगतान का हिसाब अलग-अलग रखा जाना है। तदनुसार संबंधित स्क्रॉल तैयार किए जाने हैं और ऑडिट/सत्यापन के लिए रिकॉर्ड पर रखे जाने हैं।

10. अदत्त/अदावाकृत ब्याज/मोचन भुगतान का प्रबंधन

10.1 भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार आरओ द्वारा निवेशक के अदत्त/अदावाकृत ब्याज/मोचन भुगतान के प्रबंधन हेतु प्रक्रिया अपनायी जानी है। आरओ द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना है कि निवेशक के अदत्त/अदावाकृत ब्याज/मोचन भुगतान के प्रबंधन के लिए एसओपी में दिये गए निर्देशों का सख्ती से पालन हो।

10.2 पुनः प्रारम्भ (रि-इनिशियेट) किए गए भुगतानों की प्रतिपूर्ति का दावा प्रस्तुत करने के लिए आरओ द्वारा अनुच्छेद 9 में दिये गये निर्देशों के अनुसार प्रक्रिया अपनायी जानी है। पुनः प्रारम्भ किए गए दावे, जिनका भुगतान महीने के दौरान किए गए हैं, को समेकित कर, आरओ द्वारा उनके समवर्ती लेखा परीक्षक के प्रमाण पत्र के साथ अगले महीने की 15 तिथि को या उससे अग्रेषित किया जाना है।

10.3 आरओ द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना है कि पुनः प्रारम्भ किए गए ब्याज/मोचन राशि की प्रतिपूर्ति के लिए दावे नियमित ब्याज/मोचन राशि के भुगतान की प्रतिपूर्ति के लिए किए गए दावों से अलग से प्रस्तुत किए जाएं।

11. सीमा की अवधि से परे ब्याज के भुगतान के दावे की प्रक्रिया

11.1 ब्याज के भुगतान की देय तिथि से छह वर्ष की समाप्ति के बाद दावा प्राप्त होने पर, विलंब के लिए दिए गए कारणों सहित आरओ द्वारा ऐसे दावों को सत्यापित कर कें.ले.अ. को अग्रेषित किया जाना है। आरओ द्वारा ऐसे दावों को समेकित कर प्रवाह पोर्टल (https://pravaah.rbi.org.in) के माध्यम से ब्याज के भुगतान के लिए अनुरोध प्रस्तुत किया जाना है।

11.2 भारतीय रिज़र्व बैंक ऐसे दावों को अस्वीकृत करने का अधिकार सुरक्षित रखता है जिसमें आरओ ने बिना भा.रि.बै. के पूर्व अनुमोदन के दावाकर्ता को ब्याज का भुगतान किया है।

भाग-IV सामान्य निर्देश

12. लेखा परीक्षा और अनुपालन

12.1 आरओ द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना है कि बॉण्ड जारी करने, सर्विसिंग और चुकौती से संबंधित कार्यों की नियमित आंतरिक लेखा परीक्षा की जाए। अधिसूचना और इन दिशानिर्देशों में दिये गए निर्देशों के आधार पर आरओ द्वारा एक चेकलिस्ट तैयार की जानी है।

12.2 आंतरिक/समवर्ती लेखा परीक्षकों द्वारा दर्ज की गई लेखापरीक्षा टिप्पणियों और अनुपालन स्थिति का विवरण आरओ द्वारा वार्षिक आधार पर लो.ऋ.का., नागपुर को प्रस्तुत किया जाना है। इसके अलावा लिंक सेल द्वारा लो.ऋ.का., नागपुर को एक प्रमाण पत्र के माध्यम से यह पुष्टि की जानी है कि सभी लेखापरीक्षा टिप्पणियों का अनुपालन किया गया है और परिचालन दिशानिर्देशों में दिये सभी निर्देशों का सख्ती से पालन किया जा रहा है।

12.3 आरओ द्वारा बॉण्ड जारी करने के समय आवेदकों/निवेशकों से प्राप्त व्यक्तिगत डेटा और बॉण्ड की सर्विसिंग के संबंध में, समय-समय पर संशोधित डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023 और इसके अंतर्गत अधिसूचित डीपीडीपी नियम, 2025 के प्रावधानों का पालन किया जाना है।

13. समाशोधन एवं रिपोर्टिंग

13.1 आरओ के लिंक सेल द्वारा परिशिष्ट VI में दिए गए प्रोफार्मा के अनुसार महीने के दौरान जारी किए गए बॉन्ड एवं चुकाए गए मूलधन और महीने के अंत में बकाया राशि को दर्शाते हुए एक मासिक विवरण तैयार किया जाना है। परिशिष्ट IV और परिशिष्ट V के अनुसार ब्याज के भुगतान और मूलधन की चुकौती से संबंधित समेकित भुगतान स्क्रॉल भी विवरण के साथ संलग्न किए जाने हैं। आरओ द्वारा उनके लिंक सेल के माध्यम से भारतीय रिज़र्व बैंक को ई-मेल द्वारा और लेखा नियंत्रक, आर्थिक मामलों के विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली को हार्ड कॉपी और ई-मेल द्वारा अपने विवरण की सॉफ्ट कॉपी प्रस्तुत की जानी है।

13.2 निवेशक की मृत्यु पर हस्तांतरित किए गए बॉण्ड का विवरण समाशोधन हेतु मासिक आधार पर लो.ऋ.का. नागपुर को प्रस्तुत किया जाना है।

14. ब्रोकर/उप-ब्रोकर की नियुक्ति और ब्रोकरेज का भुगतान

14.1 आरओ अपने बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार एफआरएसबी 2020 (टी) के आवेदन स्वीकार करने के लिए ब्रोकर/उप-ब्रोकर नियुक्त कर सकते हैं। आरओ द्वारा नियुक्त ब्रोकरों की एक अद्यतित सूची भी उनके वेबसाइट पर प्रकाशित की जानी है।

14.2 आरओ द्वारा उनके प्रत्येक ब्रोकर को एक विशिष्ट कोड आवंटित किया जाना है। ब्रोकरों द्वारा ब्रोकरेज का दावा करने के लिए उनके माध्यम से स्वीकृत सभी आवेदनों पर विशिष्ट कोड उद्धृत किया जाना चाहिए।

14.3 आरओ अपने ब्रोकरों की गतिविधियों के लिए उत्तरदायी होंगे। यह सुनिश्चित किया जाना है कि ऐसे ब्रोकरों द्वारा प्रचार के लिए आरबीआई के नाम का उपयोग न हो।

14.4 संग्रहित राशि के 0.5 प्रतिशत की दर से ब्रोकरेज का भुगतान आरओ को किया जाएगा। आरओ को भुगतान किए गए ब्रोकरेज का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा उनके द्वारा पंजीकृत ब्रोकरों/उप-ब्रोकरों के साथ साझा किया जाना है, बशर्तें कि ब्रोकरों/उप-ब्रोकरों के द्वारा उनके ग्राहकों की ओर से प्रस्तुत आवेदनों पर ब्रोकरों/उप-ब्रोकरों की मुहर लगी हो।

14.5 यदि ब्रोकर निवेशकों/आवेदकों में से एक है तो कोई ब्रोकरेज देय नहीं है।

15. निवेशक सेवाएं और शिकायत निवारण प्रक्रिया

15.1 निवेशक को अपने बीएलए होल्डिंग्स देखने, नामिती बदलने, समयपूर्व मोचन के लिए अनुरोध प्रस्तुत करने और सीओएच/ब्याज/मोचन भुगतान विवरण/टीडीएस प्रमाणपत्र डाउनलोड करने के लिए एक ऑनलाइन सुविधा प्रदान की जानी है। आरओ द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना है कि ये सुविधाएं 31 दिसंबर 2026 को या उससे पूर्व निवेशक के लिए उपलब्ध हों।

15.2 निवेशकों से प्राप्त सभी सेवा अनुरोधों को, प्राप्ति की तिथि से पांच कार्यदिवसों के भीतर निपटाने के लिए आरओ द्वारा एक प्रणाली स्थापित किया जाना है। निवेशकों से बॉण्ड जारी करने और सर्विसिंग के लिए प्राप्त अनुरोधों के ऊपर कार्यवाही को आरओ के नागरिक चार्टर में शामिल किया जाना है।

15.3 आरओ द्वारा सभी शाखाओं में और उनके वेबसाइट पर बॉण्ड से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए उत्तरदायी नोडल अधिकारी के नाम एवं संपर्क विवरण सहित, नोडल अधिकारी द्वारा दिए गए निवारण से संतुष्ट न होने की स्थिति में शिकायत निवारण मैट्रिक्स भी प्रदर्शित किया जाना है। इसके अलावा इस प्रदर्शन में यह जानकारी भी शामिल की जानी है कि निवेशक को शिकायत दर्ज करने के एक माह के भीतर आरओ से कोई उत्तर न मिलने पर या उक्त शिकायत निवारण मैट्रिक्स का उपयोग करने के बावजूद आरओ के जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर वह आरबीआई से ईमेल पर संपर्क कर सकता है।

15.4 आरओ द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना है कि उनके लिंक सेल के अधिकारी निवेशक सेवाओं से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए लो.ऋ.का. नागपुर द्वारा आयोजित अर्ध-वार्षिक ग्राहक सेवा बैठकों में भाग लें।

16. पारिश्रमिक का दावा

16.1 आरओ द्वारा बॉण्ड जारी करने/इनकी सर्विसिंग के लिए नीचे दिए गए प्रभारों/आवधिकता की सूची के अनुसार उन्हें पारिश्रमिक दिया जाएगा:

भुगतान की प्रकृति दर कें.ले.अ. से दावा के लिए आवधिकता दावा फॉर्म बिल जमा करने की समय-सीमा
ब्रोकरेज* संग्रहित सब्स्क्रिप्शन शुल्क के प्रति 100 के लिए 50 पैसे मासिक आधार परिशिष्ट VII इन्वाइस सब्स्क्रिप्शन शुल्क प्राप्त होने वाले महीने के बाद वाले महीने की 7 तिथि तक जमा किया जाना है।
हैंडलिंग प्रभार संगृहीत सब्स्क्रिप्शन राशि के एक प्रतिशत का 1/16 वां भाग
टर्नओवर कमीशन बीएलए के अंतर्गत खाते के संबंध में चुकौती किए गए मूलधन राशि, भुगतान किए गए ब्याज के प्रति 100 के लिए 7 पैसे तिमाही आधार परिशिष्ट VIII इन्वाइस संबंधित तिमाही के अंतिम दिन से दो महीने के भीतर जमा किया जाना है।
सेवा प्रभार प्रत्येक नए बीएलए के लिए 25 और मौजूदा बीएलए के लिए 20 वार्षिक आधार (वर्ष अप्रैल-मार्च) परिशिष्ट IX आगामी वित्तीय वर्ष की 31 मई तक इन्वाइस जमा किया जाना है।
* माह के कारोबार की समाप्ति पर कें.ले.अ. को प्रेषित/रिपोर्ट की गई धनराशि के आधार पर, आरओ को देय ब्रोकरेज के 90 प्रतिशत का भुगतान अगले महीने के तीसरे कार्य दिवस को किया जाएगा। शेष 10 प्रतिशत ब्रोकरेज राशि और हैंडलिंग कमीशन का दावा आरओ द्वारा फॉर्म परिशिष्ट VII में किया जाना है।

16.2 ब्याज/मूलधन की चुकौती के लिए असफल भुगतान/लेनदेन के संबंध में आरओ द्वारा कें.ले.अ. से प्रतिपूर्ति का दावा नहीं किया जाना है। टर्नओवर कमीशन के दावे निवेशक को किए गए सफल भुगतान के लिए कें.ले.अ. को प्रस्तुत किए जाने हैं। आरओ द्वारा उनके समवर्ती लेखा परीक्षकों के माध्यम से एक प्रमाण पत्र द्वारा यह पुष्टि की जानी है कि टर्नओवर कमीशन के लिए दावा केवल सफल भुगतानों के संबंध में किया गया है और यह पहले प्रस्तुत नहीं किया गया था।

16.3 आरओ द्वारा बॉण्ड के लिए सब्स्क्रिप्शन संग्रहित करने से संबन्धित ब्रोकरेज और हैंडिलिंग कमीशन के लिए अलग-अलग बिल प्रस्तुत किया जाना है।

16.4 जिन शुल्कों पर जीएसटी लागू है, उनके लिए लिंक सेल द्वारा राज्य-वार टैक्स इन्वाइस (एक इन्वाइस प्रति राज्य) प्रस्तुत किया जाना है। प्रत्येक राज्य से आपूर्ति की जाने वाली सेवाओं के लिए टैक्स इन्वाइस में जीएसटी पंजीकरण क्रमांक के साथ एक अलग इन्वाइस संख्या होनी चाहिए (जैसा लागू हो)।

17. जुर्माना

17.1 इन दिशानिर्देशों का पालन न किए जाने पर जीएस अधिनियम, 2006 की धारा 30 के तहत दंडात्मक प्रावधान लागू होंगे।

17.2 इन दिशानिर्देशों का पालन न किए जाने पर, निवेशक को वित्तीय नुकसान की स्थिति में, लागू कूपन दर पर आरओ द्वारा निवेशक को मुआवजा देय होगा।

18. अभिलेखों की परिरक्षण अवधि

18.1 बॉण्ड के संबंध में अभिलेखों की परिरक्षण अवधि निम्नानुसार होगी:

क्र.सं. अभिलेखों का विवरण संरक्षण अवधि
1. बॉण्ड के लिए आवेदन बॉण्ड के चुकौती की वास्तविक तिथि से 3 वर्ष
2. सरेंडर की गई काउंटर रसीदें सीओएच की डिलीवरी के बाद 3 माह
3 बीएलए के रजिस्टर स्थायी
4 Register of nominations, नामांकन पंजीकरण की स्वीकृति/रद्दीकरण संबंधी सूचना of nomination, etc. फॉर्म द्वारा कवर किए गए बॉण्ड के चुकौती की वास्तविक तिथि से 3 वर्ष
5 नामांकन/रद्द करने के फॉर्म फॉर्म द्वारा कवर किए गए बॉण्ड के चुकौती की वास्तविक तिथि से 3 वर्ष
6 स्वामित्व की पहचान के मामले में प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़ फॉर्म द्वारा कवर किए गए बॉण्ड के चुकौती की वास्तविक तिथि से 3 वर्ष
7 कें.ले.अ. और लो.ऋ.का., नागपुर तथा लेखा नियंत्रक, वित्त मंत्रालय, नई दिल्ली को प्रस्तुत किए गए स्क्रॉल लेन-देन वाले माह की अंतिम तिथि से 3 वर्ष
8 कें.ले.अ. को प्रस्तुत किए गए विवरण 5 वर्ष या बॉण्ड की चुकौती, जो भी पहले हो

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