30 मार्च 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक ने नगर सहकारी बैंक लिमिटेड, इटावा, उत्तर प्रदेश
पर मौद्रिक दंड लगाया
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 23 मार्च 2026 के आदेश द्वारा, नगर सहकारी बैंक लिमिटेड, इटावा, उत्तर प्रदेश (बैंक) पर आरबीआई द्वारा जारी ‘निदेशकों, उनके संबंधियों और उन फर्मों/संस्थाओं, जिनमें उनका हित है, को ऋण और अग्रिम', 'आय निर्धारण, आस्ति वर्गीकरण, प्रावधानीकरण और अन्य संबंधित मामले – शहरी सहकारी बैंक', 'एक्स्पोज़र मानदंड और सांविधिक/अन्य प्रतिबंध - शहरी सहकारी बैंक' और 'अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी)’ संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए ₹3 लाख (तीन लाख रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46 (4)(i) और धारा 56 के साथ पठित धारा 47ए(1) (सी) के प्रावधानों के अंतर्गत आरबीआई को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।
31 मार्च 2025 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में आरबीआई द्वारा बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया गया था। आरबीआई के निदेशों के अननुपालन और तत्संबंधी पत्राचार के पर्यवेक्षी निष्कर्षों के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उससे यह पूछा गया कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के उत्तर पर विचार करने के बाद, आरबीआई बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिनके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है।
बैंक ने:
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निदेशक से संबंधित ऋण स्वीकृत किए;
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आय निर्धारण और आस्ति वर्गीकरण मानदंडों के अनुसार कुछ उधारकर्ताओं को दिए गए ऋणों को अनर्जक आस्तियों (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत करने में विफल रहा;
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एकल उधारकर्ता एक्स्पोज़र की निर्धारित विनियामकीय सीमा का उल्लंघन किया; और
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ग्राहकों के केवाईसी अभिलेखों को केंद्रीय केवाईसी अभिलेखागार (सीकेवाईसीआर) में अपलोड करने में विफल रहा।
यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/2352 |