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बैंकिंग प्रणाली का विनियामक

बैंक राष्‍ट्रीय वित्‍तीय प्रणाली की नींव होते हैं। बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा एवं सुदृढता को सुनिश्चित करने और वित्‍तीय स्थिरता को बनाए रखने तथा इस प्रणाली के प्रति जनता में विश्‍वास जगाने में केंद्रीय बैंक महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

प्रेस प्रकाशनी


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निर्यातकों के लिए व्यापार राहत उपाय

31 मार्च 2026

निर्यातकों के लिए व्यापार राहत उपाय

भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं एवं लॉजिस्टिक-संबंधी व्यवधानों के चलते, भारतीय रिज़र्व बैंक को विभिन्न हितधारकों से निर्यात-मूल्य प्राप्ति की समय-सीमा के पालन में आ रही चुनौतियों के संबंध में अभ्यावेदन प्राप्त हो रहे हैं।

इस संबंध में, रिज़र्व बैंक ने दिनांक 14 नवंबर 2025 की अपनी प्रेस प्रकाशनी सं. 2025-2026/1510 के माध्यम से यह सूचित किया था कि भारत से निर्यातित वस्तुओं/सॉफ्टवेयर/सेवाओं के पूर्ण निर्यात-मूल्य प्राप्ति एवं प्रत्यावर्तन की समय-सीमा को निर्यात की तिथि से नौ माह से बढ़ाकर पंद्रह माह किया गया है। यह स्पष्ट किया जाता है कि उपर्युक्त राहत उपाय यथावत् प्रभावी रहेंगे। निर्यातक, निर्धारित शर्तों के अनुसार, उक्त सुविधा का लाभ लेना जारी रख सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, उपर्युक्त उपायों के अंतर्गत, पोत-लदानपूर्व एवं पोत-लदानोत्तर, दोनों के लिए, निर्यात ऋण प्राप्ति की अवधि को 450 दिनों तक बढ़ाया गया था, जो कि 31 मार्च 2026 तक किए गए संवितरणों पर लागू था। पश्चिम एशिया संकट के कारण जारी लॉजिस्टिक -संबंधी व्यवधानों को ध्यान में रखते हुए, यह निर्णय लिया गया है कि 450 दिनों की यह विस्तारित अवधि 30 जून 2026 तक किए गए सभी संवितरणों पर लागू रहेगी। इस संबंध में, भारतीय रिज़र्व बैंक (व्यापार राहत उपाय) निदेश, 2026 आज जारी किए जा रहे हैं।

रिज़र्व बैंक स्थिति की सतत निगरानी करता रहेगा तथा आवश्यकतानुसार उपयुक्त हस्तक्षेप करेगा।

(ब्रिज राज)  
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/2362

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