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आरबीआई, एनबीएफसी-यूएल की पहचान हेतु पद्धति की समीक्षा तथा सरकारी स्वामित्व वाली एनबीएफसी को एनबीएफसी-यूएल में शामिल करने संबंधी संशोधन निदेशों के मसौदे पर जन सामान्य से टिप्पणियाँ आमंत्रित करता है

10 अप्रैल 2026

आरबीआई, एनबीएफसी-यूएल की पहचान हेतु पद्धति की समीक्षा तथा सरकारी स्वामित्व वाली एनबीएफसी को एनबीएफसी-यूएल में शामिल करने संबंधी संशोधन निदेशों के मसौदे पर जन सामान्य से टिप्पणियाँ आमंत्रित करता है

भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज उच्च-स्तर एनबीएफ़सी (एनबीएफसी-यूएल) की पहचान हेतु पद्धति की समीक्षा, सरकारी स्वामित्व वाली एनबीएफसी को एनबीएफसी-यूएल में शामिल करने तथा अन्य संबंधित पहलुओं पर निम्नलिखित संशोधन निदेशों का मसौदा जारी किया।

(i) भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ - पंजीकरण, छूट और स्केल आधारित विनियमन के लिए ढांचा) दूसरे संशोधन निदेश, 2026 का मसौदा; और

(ii) भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ – संकेन्द्रण जोखिम प्रबंधन) तीसरे संशोधन निदेश, 2026 का मसौदा।

2. उपर्युक्त संशोधन निदेशों के मसौदे पर एनबीएफ़सी, जन- सामान्य एवं अन्य महत्वपूर्ण हितधारकों से प्रतिक्रियाएँ/ टिप्पणियां 4 मई 2026 तक आमंत्रित की जाती है। भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध 'कनेक्ट 2 रेगुलेट' खंड के अंतर्गत लिंक के माध्यम से प्रतिक्रियाएँ/ टिप्पणियां प्रस्तुत की जा सकती हैं या वैकल्पिक रूप से निम्नलिखित पत्र पर:

प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक   
 विनियमन विभाग (एसआईजी-एनबीएफ़सी)
 भारतीय रिज़र्व बैंक
 12वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन
 शहीद भगत सिंह मार्ग, फोर्ट, मुंबई - 400 001
या
ईमेल द्वारा

प्रेषित की जा सकती है, जिसके विषय पंक्ति में  “एनबीएफसी-यूएल की पहचान हेतु पद्धति की समीक्षा तथा सरकारी स्वामित्व वाली एनबीएफसी को एनबीएफसी-यूएल में शामिल करने संबंधी संशोधन निदेशों के मसौदे पर प्रतिक्रिया’’ लिखी होनी चाहिए।

पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफ़सी) के लिए  मान(स्केल) आधारित विनियामकीय (एसबीआर) ढांचे में एनबीएफ़सी-यूएल की पहचान हेतु द्वि-आयामी कार्यप्रणाली निर्धारित की गई है, अर्थात आस्ति-आकार के आधार पर शीर्ष दस पात्र एनबीएफ़सी तथा पैरामीट्रिक अंक-निर्धारण पद्धति।  एनबीएफ़सी-यूएल की पहचान हेतु पारदर्शी, सरल एवं निरपेक्ष मानदंड अपनाने के उद्देश्य से, वर्तमान कार्यप्रणाली के स्थान पर आस्ति-आकार आधारित मानदंड अपनाने का प्रस्ताव है, जिसे वर्तमान में ₹1,00,000 करोड़ और उससे अधिक के आस्ति-आकार के रूप में प्रस्तावित किया गया है। इसके अतिरिक्त, एसबीआर ढांचा के अंतर्गत वर्तमान में सरकारी स्वामित्व वाली एनबीएफ़सी को उच्च-स्तर के स्थान पर आधार-स्तर या मध्यम-स्तर में रखा गया है। एनबीएफ़सी के लिए स्वामित्व के संबंध में तटस्थ विनियामकीय व्यवस्था के सिद्धांत के अनुपालन में, संशोधित मानदंडों के आधार पर पात्र सरकारी स्वामित्व वाली एनबीएफ़सी को भी एनबीएफ़सी-यूएल की सूची में शामिल करने पर विचार करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, यह भी प्रस्ताव है कि सभी एनबीएफ़सी-यूएल, राज्य सरकार की गारंटियों को ऋण जोखिम अंतरण साधन के रूप में, विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन, निर्बाध रूप से उपयोग करने की अनुमति दी जाए।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/65


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