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प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंकों के लिए रिपोर्टिंग अनुदेश

आरबीआई/2026-27/38
एपी (डीआईआर शृंखला) परिपत्र सं.08

27 अप्रैल, 2026

सभी प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंक

महोदया/महोदय,

प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंकों के लिए रिपोर्टिंग अनुदेश

कृपया समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 5 जुलाई, 2016 का मास्टर निदेश - जोखिम प्रबंध और अंतर-बैंक लेन-देन देखें, जिसके अनुसार प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I (एडी कैट-I) बैंकों को उनके द्वारा सीधे या अपनी विदेशी संस्थाओं के माध्यम से की गई सभी ओवर द काउंटर (ओटीसी) विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदाओं और विदेशी मुद्रा ब्याज दर डेरिवेटिव संविदाओं की रिपोर्ट, क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सीसीआईएल) के ट्रेड रिपॉजिटरी (टीआर) को करना आवश्यक है। समय-समय पर यथासंशोधित मास्टर निदेश - भारतीय रिज़र्व बैंक (रुपया ब्याज दर डेरिवेटिव) निदेश, 2025 का भी संदर्भ आमंत्रित किया जाता है, जिसके अनुसार रुपया ब्याज दर डेरिवेटिव (आईआरडी) बाजार में बाजार निर्माताओं को उनके द्वारा सीधे या उनकी विदेशी संस्थाओं के माध्यम से किए गए सभी ओटीसी रुपया आईआरडी लेन-देन के साथ-साथ, उनके संबंधित पक्षों द्वारा वैश्विक स्तर पर किए गए सभी रुपया आईआरडी लेन-देन की रिपोर्ट सीसीआईएल के टीआर को करना आवश्यक है।

2. समीक्षा के बाद, यह निर्णय लिया गया है कि प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंक अपने संबंधित पक्षों द्वारा वैश्विक स्तर पर की गई भारतीय रुपये (आईएनआर) से जुड़ी सभी ओटीसी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदाओं की रिपोर्ट सीसीआईएल के टीआर को करेगा। ऐसी रिपोर्टिंग निम्नानुसार की जाएगी:

(i) प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंक अपने अपतटीय संबंधित पक्षों द्वारा की गई आईएनआर से जुड़ी ओटीसी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदाओं के आवश्यक विवरणों को सीसीआईएल के टीआर को रिपोर्ट करेगा। प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंक का संबंधित पक्ष भी अपने द्वारा किए गए ऐसे डेरिवेटिव के विवरण को सीसीआईएल के टीआर को स्वतंत्र रूप से रिपोर्ट कर सकता है।

(ii) भारत में प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंक के संबंधित पक्षों द्वारा वैश्विक स्तर पर की गई आईएनआर से जुड़ी सभी ओटीसी सुपुर्दगी-योग्य और गैर-सुपुर्दगी योग्य विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदाओं की रिपोर्ट की जाएगी।

(iii) परिचालनगत लचीलापन प्रदान करने की दृष्टि से, ऐसी रिपोर्टिंग निम्नलिखित आवश्यकताओं के अधीन होगी:

(ए) प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंक को, समय-समय पर यथासंशोधित 5 जुलाई, 2016 के मास्टर निदेश - जोखिम प्रबंध और अंतर-बैंक लेनदेन में यथापरिभाषित बैक-टू-बैक व्यवस्था के अनुसार किए गए लेन-देन, और भारत में अन्य प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंकों के साथ संबंधित पक्षों द्वारा किए गए लेनदेन की रिपोर्ट करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि ये लेनदेन मौजूदा निदेशों के अनुसार सीसीआईएल के टीआर को रिपोर्ट किए जा रहे हैं;

(बी) प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंक के पास उन लेनदेन की रिपोर्ट नहीं करने का विकल्प होगा, जहां संविदा का नोशनल 1 मिलियन अमरीकी डालर या समकक्ष से अधिक नहीं है;

(सी) प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि:

(1) 1 जुलाई, 2027 से, इसकी मूल इकाई (पैरेंट) की शाखाओं समेत मूल इकाई (पैरेंट) द्वारा की गई आईएनआर से जुड़ी सभी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदाओं की इसके द्वारा रिपोर्टिंग की जाएगी;

(2) 1 जुलाई, 2027 से, इसके द्वारा रिपोर्ट किए गए लेनदेन, इसकी मूल इकाई (पैरेंट) को छोड़कर इसके संबंधित पक्षों द्वारा की गई आईएनआर से जुड़ी सभी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदाओं के कल्पित मूल्य का कम से कम 70 प्रतिशत हैं;

(3) 1 जुलाई, 2028 से, इसके द्वारा रिपोर्ट किए गए लेनदेन, इसकी मूल इकाई (पैरेंट) को छोड़कर इसके संबंधित पक्षों द्वारा की गई आईएनआर से जुड़ी सभी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदाओं के कल्पित मूल्य का कम से कम 80 प्रतिशत हैं; और

(4) 1 जुलाई, 2028 से, इसकी मूल इकाई (पैरेंट) को छोड़कर इसके संबंधित पक्षों द्वारा की गई आईएनआर से जुड़ी सभी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव संविदाओं की इसके द्वारा रिपोर्टिंग की जाएगी; और

(डी) गणना के प्रयोजन से, उपरोक्त (सी)(2)-(सी)(4) का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए, उपरोक्त (ए), (बी) और (सी)(1) में इंगित लेनदेन को बाहर रखा जा सकता है।

(iv) प्राधिकृत डीलर श्रेणी-I बैंक, लेनदेन के सभी तत्वों की रिपोर्ट करेगा जो लेनदेन के बारे में सार्थक जानकारी प्रदान करने के लिए प्रासंगिक हैं। इसमें कल्पित मूल्य, प्रतिपक्ष का नाम, परिपक्वता तिथि, मुद्रा, लेनदेन पर यथालागू विनिर्देश आदि शामिल होंगे, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं होंगे। केंद्रीय प्रतिपक्ष को केवल उन मामलों में प्रतिपक्ष के रूप में रिपोर्ट किया जा सकता है, जहां कवर किया गया लेनदेन एक अनाम ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर किया जाता है और केंद्रीय प्रतिपक्ष द्वारा समाशोधित किया जाता है। रिपोर्टिंग रिज़र्व बैंक के पूर्व अनुमोदन से सीसीआईएल द्वारा दर्शाए गए प्रारूप अनुसार होंगे।

(v) लेन-देन की रिपोर्ट अधिमानतः लेनदेन की तारीख को, लेकिन किसी भी स्थिति में, लेनदेन की तारीख से दो कार्य दिवसों के भीतर, की जाएगी।

3. इन निदेशों के प्रयोजन से,

(i) शब्द "संबंधित पक्ष" का वही अर्थ होगा जो भारतीय लेखा मानक (इंड एएस) 24 - संबंधित पक्ष प्रकटीकरण या अंतर्राष्ट्रीय लेखा मानक (आईएएस) 24 - संबंधित पक्ष प्रकटीकरण या किसी भी अन्य समकक्ष लेखांकन मानक में निर्दिष्ट है। बशर्ते कि शब्द 'संबंधित पक्ष' सहयोगियों को बाहर रखेगा, जैसा कि इंड एएस 24 या आईएएस 24 अन्य समकक्ष लेखांकन मानक में निर्दिष्ट है।

(ii) ओटीसी डेरिवेटिव का अर्थ उन डेरिवेटिव के अलावा अन्य डेरिवेटिव होगा जिनका स्टॉक एक्सचेंजों पर कारोबार किया जाता है और इसमें इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म (ईटीपी) पर कारोबार किए गए डेरिवेटिव शामिल होंगे।

4. ये निदेश भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45डबल्यू और विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 10(4), 11(1) और 11(2) के तहत भारतीय रिज़र्व बैंक में निहित शक्तियों के तहत जारी किए गए हैं और किसी अन्य कानून के तहत अपेक्षित अनुमतियों/अनुमोदनों, यदि कोई हो, पर प्रतिकूल प्रभाव के बिना हैं।

भवदीया,

(डिम्पल भांडिया)
मुख्य महाप्रबंधक


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