617 भारतीय रिज़र्व बैंक - अधिसूचनाएं
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अधिसूचनाएं

विदेशी मुद्रा प्रबंध (माल और सेवाओं का निर्यात तथा आयात) विनियमावली, 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक
(विदेशी मुद्रा विभाग)
केंद्रीय कार्यालय
मुंबई - 400 001

अधिसूचना सं. फेमा. 23(आर)/2026-आरबी

13 जनवरी 2026

विदेशी मुद्रा प्रबंध (माल और सेवाओं का निर्यात तथा आयात) विनियमावली, 2026

विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 7, धारा 8, धारा 10 की उप-धारा (6) तथा  धारा 47 की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और विदेशी मुद्रा प्रबंध (माल और सेवाओं का निर्यात) विनियमावली, 2015 (12 जनवरी 2016 की अधिसूचना सं. फेमा 23(आर)/2015-आरबी) को अधिक्रमित करते हुए, ऐसे अधिक्रमण से पूर्व किए गये अथवा छोड़े गये कार्यों के अलावा, भारतीय रिज़र्व बैंक, निम्नलिखित विनियम बनाता है, यथा:-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.- (1) इन विनियमों को विदेशी मुद्रा प्रबंध (माल और सेवाओं का निर्यात तथा आयात) विनियमावली, 2026 कहा जाएगा।

(2) यह विनियमावली 1 अक्तूबर 2026 से लागू होगी।

2. परिभाषाएं.- (1) इस विनियमावली में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो –

(ए) “अधिनियम” का अर्थ है विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42);

(बी) “प्राधिकृत व्यापारी” का अर्थ है अधिनियम की धारा 10 की उप-धारा (1) के अंतर्गत प्राधिकृत व्यापारी के रूप में प्राधिकृत व्यक्ति;

(सी) “निर्यात घोषणा फॉर्म” (ईडीएफ़) का अर्थ है अनुबंध में दिया गया फॉर्म;

(डी) “परियोजना निर्यात” का अर्थ वही होगा जैसा कि विदेश व्यापार नीति में परिभाषित किया गया है;

(ई) “सॉफ्टवेयर” का अर्थ है कोई कंप्यूटर प्रोग्राम, डेटाबेस, रेखांकन, डिज़ाइन, श्रव्य/दृश्य संकेतक या कोई अन्य सूचना, चाहे उसे किसी भी नाम से अभिहित किया जाता हो, भौतिक माध्यम से भिन्न किसी अन्य माध्यम से;

(एफ) ”विनिर्दिष्ट प्राधिकारी” का अर्थ है:

(i) माल के लिए, घरेलू टैरिफ क्षेत्र (डीटीए) में सीमा शुल्क आयुक्त तथा विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईज़ेड) में एसईज़ेड के विकास आयुक्त;

(ii) सेवाओं, सॉफ्टवेयर के अतिरिक्त, के लिए डीटीए में प्राधिकृत व्यापारी तथा विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईज़ेड)  में एसईज़ेड के विकास आयुक्त; तथा

(iii) सॉफ्टवेयर के लिए डीटीए में सॉफ्टवेयर टेक्नालजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) या प्राधिकृत व्यापारी तथा विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईज़ेड) में एसईज़ेड के विकास आयुक्त।

स्पष्टीकरण.- इस विनियमावली के प्रयोजन के लिए, 'सेवाओं' में 'सॉफ्टवेयर' भी शामिल होगा।

(2) इस विनियमावली में प्रयुक्त किंतु परिभाषित न किए गए शब्दों और अभिव्यक्तियों का वही अर्थ होगा जो अधिनियम अथवा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों या विनियमों में उनके लिए दिया गया है।

3. निर्यात की घोषणा.- (1) माल का निर्यातक, निर्यात करते समय विनिर्दिष्ट प्राधिकारी को निर्यात घोषणा फॉर्म(ईडीएफ़) में माल के पूर्ण निर्यात मूल्य को दर्शानेवाली राशि को विनिर्दिष्ट करते हुए घोषणा प्रस्तुत करेगा:

बशर्ते यह मान लिया जाएगा कि ईडीएफ़, एलेक्ट्रोनिक डाटा इंटरचेंज (ईडीआई) पोर्ट के माध्यम से निर्यात किए गए माल के लिए शिपिंग बिल के एक भाग के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है;

बशर्ते यह भी कि कोई यात्री जो भारत से अपना निजी सामान (चाहे वे उनके साथ हो या अलग से भेजे गए हों) भेज रहा हो उसे इन विनियमों के प्रयोजन से निर्यातक नहीं माना जाएगा।

(2) सेवाओं का निर्यातक, जिस माह में सेवाओं के लिए इन्वाइस जारी किया गया हो उस माह की समाप्ती से 30 दिन के भीतर विनिर्दिष्ट प्राधिकारी को ईडीएफ़ में सेवाओं के पूर्ण निर्यात मूल्य को दर्शानेवाली राशि को विनिर्दिष्ट करते हुए घोषणा प्रस्तुत करेगा, बशर्ते यह कि:

(ए) सेवाओं के जिस निर्यातक ने माह में एक या उससे अधिक प्राप्तकर्ताओं को सेवाओं का निर्यात किया है, वह इन सभी निर्यातों के लिए एक ही ईडीएफ़ प्रस्तुत कर सकता है;

(बी) सॉफ्टवेयर के अलावा अन्य सेवाओं का निर्यातक, भुगतान प्राप्त होने की तारीख को या उससे पहले ईडीएफ प्रस्तुत कर सकता है;

(सी) प्राधिकृत व्यापारी, निर्यातकर्ता द्वारा विलंब का कारण देते हुए किए गए अनुरोध पर, अनुरोध के औचित्य के बारे में अपना समाधान करने के पश्चात ईडीएफ़ प्रस्तुत करने की अवधि में विस्तार दे सकता है।

(3) माल के निर्यात के लिए गैर-ईडीआई पोर्ट के मामले में; या जहाँ सेवाओं के निर्यात के लिए विनिर्दिष्ट प्राधिकारी, प्राधिकृत व्यापारी से कोई अन्य है, वहाँ विधिवत रूप से अधिप्रमाणित ईडीएफ़, विनिर्दिष्ट प्राधिकारी द्वारा संबंधित प्राधिकृत व्यापारी को प्रेषित किया जाएगा।

4. प्राप्ति और भुगतान का तरीका.-  (1)  माल और सेवाओं के निर्यात तथा आयात के लिए प्राप्ति एवं भुगतान समय-समय पर यथा संशोधित, विदेशी मुद्रा प्रबंध (प्राप्ति और भुगतान का तरीका) विनियमावली, 2023 में यथा विनिर्दिष्ट रीति से किया जाएगा।

(2) प्राधिकृत व्यापारी निर्यात की प्राप्ति अथवा आयात के भुगतान के लिए किसी निर्यातक अथवा आयातक के खाते में क्रेडिट अथवा डेबिट केवल तब ही करेगा जब वह लेनदेन की यथार्थता से संतुष्ट हो और उसके साथ ही निर्यात डेटा संसाधन और निगरानी प्रणाली या आयात डेटा संसाधन और निगरानी प्रणाली (ईडीपीएमएस या आईडीपीएमएस)1 में संबंधित प्रविष्टि को बंद या अद्यतन करेगा:

बशर्ते कि निर्यात के मामले में जहां शिपिंग बिल (माल के लिए) अथवा इन्वाइस (सेवाओं के लिए) ₹10 लाख (या विदेशी मुद्रा में उसके समतुल्य) तक है वहाँ ईडीपीएमएस में की गई प्रविष्टि को निर्यातक से इस आशय की घोषणा के आधार पर बंद किया जा सकता है कि शिपिंग बिल/ इन्वाइस के समक्ष भुगतान पूर्णतः अथवा अन्यतः प्राप्त हुआ है। वैकल्पिक रूप से इस प्रकार की घोषणा ईडीपीएमएस में प्रविष्टियों को थोक आधार पर बंद करने के लिए निर्यातक द्वारा तिमाही आधार पर प्राधिकृत व्यापारी को प्रस्तुत की जा सकती है;

बशर्ते यह भी कि आयात के मामले में जहां प्रवेश बिल (माल के लिए) अथवा इन्वाइस (सेवाओं के लिए) ₹10 लाख (या विदेशी मुद्रा में उसके समतुल्य) तक है वहाँ आईडीपीएमएस में की गई प्रविष्टि को आयातक से इस आशय की घोषणा के आधार पर बंद किया जा सकता है कि आयात के लिए भुगतान पूर्णतः अथवा अन्यतः किया गया है। वैकल्पिक रूप से इस प्रकार की घोषणा आईडीपीएमएस में प्रविष्टियों को थोक आधार पर बंद करने के लिए आयातक द्वारा तिमाही आधार पर प्राधिकृत व्यापारी को प्रस्तुत की जा सकती है।

5. निर्यातों की वसूली के लिए समयावधि.- (1) निर्यातक द्वारा माल तथा सेवाओं के पूर्ण निर्यात मूल्य (अथवा इस विनियमावली के विनियम 6 के अनुसार कम किए गए निर्यात मूल्य) को दर्शाने वाली राशि वसूल कर (इस विनियमावली के विनियम 7 के अनुसार सेट ऑफ की गई राशि को शामिल करते हुए) नीचे विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर प्रत्यावर्तित की जाएगी:

(ए) माल (भारत के बाहर स्थित किसी गोदाम में निर्यात किए गए माल को छोड़कर) के मामले में शिपमेंट की तारीख से तथा सेवाओं के मामले में इन्वाइस की तारीख से पंद्रह महीने;

(बी) भारत के बाहर स्थित किसी गोदाम में निर्यात किए गए माल के मामले में गोदाम से माल की बिक्री की तारीख से पंद्रह महीने;

(सी) परियोजना निर्यातों के मामले में संविदा की भुगतान शर्तों के अनुसार:

बशर्ते यह कि जहां माल तथा सेवाओं का निर्यात भारतीय रुपये में इन्वाइस या/ तथा निपटान किया गया हो, वहाँ पूर्ण निर्यात मूल्य की वसूली तथा प्रत्यावर्तन की अवधि, माल (भारत के बाहर स्थित किसी गोदाम में निर्यात किए गए माल को छोड़कर) के मामले में शिपमेंट की तारीख से, सेवाओं के मामले में इन्वाइस की तारीख से, और भारत के बाहर स्थित किसी गोदाम में निर्यात किए गए माल के मामले में गोदाम से माल की बिक्री की तारीख से, अठारह महीने होगी;

बशर्ते यह भी कि प्राधिकृत व्यापारी निर्यातक द्वारा विलंब का कारण देते हुए किए गए अनुरोध पर, दिये गए कारणों से संतुष्ट होने पर, निर्यात से प्राप्त होने वाली राशि की वसूली के लिए विनिर्दिष्ट अवधि में समय विस्तार की अनुमती दे सकता है।

(2) प्राधिकृत व्यापारी उपर्युक्त विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर निर्यात की राशि की वसूली के लिए निर्यातक की निगरानी तथा अनुवर्ती कार्रवाई के लिए प्रणालियाँ तथा प्रक्रिया स्थापित करेगा।

6. निर्यात वसूली में कमी.- प्राधिकृत व्यापारी निर्यातक द्वारा निर्यात के पूर्ण मूल्य से कम-वसूली अथवा वसूली न होने का कारण देते हुए किए गए अनुरोध पर निर्यात मूल्य की वसूली में कमी के लिए अनुमती दे सकता है बशर्ते प्राधिकृत व्यापारी दिये गए कारणों से संतुष्ट है:

बशर्ते कि उस मामले में जहां निर्यात मूल्य प्रति शिपिंग बिल (माल के लिए) अथवा इन्वाइस (सेवाओं के लिए) ₹10 लाख (या विदेशी मुद्रा में उसके समतुल्य) तक है, वहाँ निर्यात मूल्य में कमी (पूर्ण निर्यात मूल्य की वसूली न होने सहित) के लिए निर्यातक की घोषणा के आधार पर अनुमति दी जा सकती है।

7. निर्यात से प्राप्य राशियों का आयात से देय राशियों से सेट ऑफ.- प्राधिकृत व्यापारी निर्यात से प्राप्य राशियों की, निर्यात राशि की वसूली के लिए निर्धारित अवधि अथवा प्राधिकृत व्यापारी द्वारा अनुमत विस्तारित अवधि, यदि कोई हो, के भीतर उसी पारदेशीय खरीदार या आपूर्तिकर्ता अथवा उनके पारदेशीय समूह या सहयोगी कंपनियों से/ को आयात संबंधी देयताओं के समक्ष सेट ऑफ करने की अनुमति दे सकता है।

8. तृतीय पक्ष प्राप्तियाँ तथा भुगतान.- प्राधिकृत व्यापारी निर्यात तथा आयात संबंधी लेनदेन के लिए तृतीय पक्ष (निर्यात तथा आयात करने वाली पार्टियों को छोड़कर) से प्राप्तियाँ तथा भुगतान की अनुमति दे सकता है बशर्ते प्राधिकृत व्यापारी लेनदेन की यथार्थता से संतुष्ट है।

9. आयात के भुगतान के लिए समयावधि.- प्राधिकृत व्यापारी अपनी आईडीपीएमएस प्रविष्टियों की निगरानी करेगा तथा संबंधित आयातक के साथ अंतर्निहित संविदा में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर आयातों के लिए भुगतान करने हेतु अनुवर्ती कार्यवाही करेगा:

बशर्ते यह कि प्राधिकृत व्यापारी आयातक द्वारा विलंब का कारण देते हुए किए गए अनुरोध पर, दिये गए कारणों से संतुष्ट होने पर, भुगतान करने के लिए संविदा में विनिर्दिष्ट अवधि से समय विस्तार की अनुमती दे सकता है।

10. निर्यात तथा आयात के लिए अग्रिम भुगतान तथा आयात के लिए विलंबित भुगतान.- (1) निर्यात के लिए अग्रिम प्राप्ति के मामले में निर्यातक अग्रिम राशि और निर्यात से प्राप्य राशियों की वसूली, यदि कोई हो, एक ही प्राधिकृत व्यापारी के माध्यम से करेगा। तथापि निर्यातक किसी अन्य प्राधिकृत व्यापारी के माध्यम से लेनदेन कर सकता है बशर्ते निर्यातक ने दोनों प्राधिकृत व्यापारियों को परिवर्तन के बारे में सूचित कर दिया हो।

(2) आयातों के लिए अग्रिम भुगतान के मामले में आयातक अग्रिम भुगतान और उसके बाद के भुगतान, यदि कोई हो, एक ही प्राधिकृत व्यापारी के माध्यम से करेगा। तथापि आयातक किसी अन्य प्राधिकृत व्यापारी के माध्यम से लेनदेन कर सकता है बशर्ते आयातक ने दोनों प्राधिकृत व्यापारियों को परिवर्तन के बारे में सूचित कर दिया हो।

(3) प्राधिकृत व्यापारी आयात के लिए अग्रिम प्रेषण के लिए अनुमति तब दे सकता है जब वह अग्रिम प्रेषण की आवश्यकता की यथार्थता से संतुष्ट हो। प्राधिकृत व्यापारी अग्रिम भुगतान के लिए ऐसी सीमाएं निर्धारित करने पर विचार कर सकता है जिनसे अधिक भुगतान करने के लिए आपाती साख पत्र या गारंटी की आवश्यकता हो।

(4) निर्यातक या आयातक, जैसा भी मामला हो, यह सुनिश्चित करेगा कि निर्यात के लिए प्राप्त अग्रिम भुगतान अथवा आयात के लिए किए गए विलंबित भुगतान पर देय ब्याज, यदि कोई हो, समय-समय पर संशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (उधार लेना तथा उधार देना) विनियमावली 2018 के अनुसार व्यापार ऋण की समग्र लागत सीमा से अधिक नहीं है।

11. स्वर्ण तथा चाँदी का आयात.- अधिनियम तथा उसके अंतर्गत बनाई गई नियमावली, विनियमावली अथवा निदेशों में अन्यथा किए गए प्रावधानों को छोड़कर तथा इस विनियमावली के प्रावधानों के होते हुए, कोई प्राधिकृत व्यापारी स्वर्ण तथा चाँदी के आयात हेतु अग्रिम प्रेषण के लिए अनुमति नहीं देगा।

12. साकार नहीं हुए आयात.- (1) जहां कोई आयातक संविदा की अवधि या विस्तारित अवधि के भीतर आयात नहीं कर पाता है, वहाँ आयातक किए गए अग्रिम भुगतान यदि कोई हो, को प्रत्यावर्तित करेगा।

(2) संविदा की अवधि अथवा प्राधिकृत व्यापारी द्वारा अनुमत विस्तारित अवधि, यदि कोई हो, के भीतर आयातक द्वारा अग्रिम भुगतान को प्रत्यावर्तित नहीं किए जाने के मामले में अथवा जहां आईडीपीएमएस में की गई प्रविष्टि को विनियम 18 (1)(जे) के अनुसार मार्क-ऑफ नहीं किया गया हो, वहाँ आयातक द्वारा आयात के लिए भावी अग्रिम भुगतान हेतु किसी भी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बैंक से शर्तरहित अप्रतिसंहरणीय आपाती साख पत्र या गारंटी, या भारत में किसी प्राधिकृत व्यापारी की गारंटी जिसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बैंक की प्रति गारंटी के समक्ष जारी किया गया है, आवश्यक होगी।

13. वसूल न हुए निर्यात.- यदि निर्यातक की निर्यात से प्राप्त होने वाली राशि, वसूली की नियत तारीख अथवा प्राधिकृत व्यापारी द्वारा अनुमत विस्तारित अवधि, यदि कोई हो, से एक वर्ष से अधिक अवधि तक अप्राप्त रहती है, तो निर्यातक, बाद के निर्यात केवल पूर्ण अग्रिम राशि की प्राप्ति अथवा अप्रतिसंहरणीय साख पत्र के समक्ष करेगा।

14. स्टेट क्रेडिट की चुकौती के समक्ष वस्तुओं तथा सेवाओं का निर्यात.- अंतर बैंकिंग व्यवस्था के प्रावधानों के कार्यान्वयन के लिए प्राधिकृत व्यापारी पूर्व सोवियत संघ द्वारा प्रदान किए गए स्टेट क्रेडिट की चुकौती के समक्ष वस्तुओं तथा सेवाओं के निर्यात पर रिज़र्व बैंक द्वारा समय समय पर जारी अनुदेशों तथा निदेशों का पालन करेंगे।

15. परियोजना निर्यात.- (1) प्राधिकृत व्यापारी, परियोजना की यथार्थता से संतुष्ट होने के बाद, परियोजना निर्यात की अंतर्निहित संविदा के अनुसार प्राप्तियों/ भुगतान की अनुमति दे सकता है।

(2) परियोजना निर्यातक, इस प्रकार के निर्यातों से भारत के बाहर जनित अस्थायी नकद अधिशेष राशियों का, प्राधिकृत व्यापारी की निगरानी के अधीन, भारत के बाहर अल्पावधि लिखतों (एक वर्ष या उससे कम अवधि की मूल या अवशिष्ट परिपक्वता वाले) राजकोषीय बिल सहित, में निवेश तथा बैंकों में जमा के लिए उपयोग कर सकता है।

16. मर्चंटिंग व्यापार लेनदेन (एमटीटी).- (1) विदेश व्यापार नीति के अनुसार मर्चंटिंग व्यापार करने वाला व्यक्ति यह सुनिश्चित करेगा कि:

(ए) जावक प्रेषण तथा आवक प्रेषण के बीच अथवा इसके विपरीत की अवधि, छः महीने से अधिक नहीं हो:

बशर्ते यह कि प्राधिकृत व्यापारी, विलंब का कारण देते हुए किए गए अनुरोध पर, दिये गए कारणों से संतुष्ट होने पर समय विस्तार की अनुमति दे सकता है।

(बी) जावक प्रेषण केवल पारदेशीय विक्रेता को भेजे गए हैं तथा आवक प्रेषण केवल पारदेशीय क्रेता से प्राप्त हुए हैं:

बशर्ते यह कि प्राधिकृत व्यापारी, ग्राहक द्वारा तीसरे पक्ष से प्राप्ति तथा/ अथवा को भुगतान करने के लिए अनुरोध करने पर, दिये गए कारणों से संतुष्ट होने पर, अनुमति दे सकता है।

(सी) प्राधिकृत व्यापारी को लेनदेन की यथार्थता स्थापित करने हेतु एमटीटी की साक्ष्य देनेवाले दस्तावेज़ प्रदान किए गए हैं। 

(2) प्राधिकृत व्यापारी:

(ए) सीमा-पार लेनदेन की यथार्थता से संतुष्ट होने के बाद एमटीटी से संबंधित किसी भी लेनदेन के लिए अपने ग्राहक के खाते में क्रेडिट या डेबिट करेगा तथा साथ ही ईडीपीएमएस और/या आईडीपीएमएस में संबंधित प्रविष्टि को बंद या अद्यतन करेगा।

(बी) यह सुनिश्चित करने के लिए कि लेन-देन के दोनों चरण इन विनियमों में विनिर्दिष्ट किए गए तरीके से और अवधि के भीतर पूर्ण किए गए हैं, निगरानी और व्यापार करने वाले व्यक्ति के साथ अनुवर्ती कार्रवाई करेगा।

17. अंतरराष्ट्रीय व्यापार का भारतीय रुपये (INR) में इन्वाइसिंग और निपटान.- प्राधिकृत व्यापारी व्यापक ढांचे पर मौजूदा दिशानिर्देशों के साथ-साथ इस संबंध में रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी किए गए अनुदेशों से मार्गदर्शित हो सकता है। 

18. रिपोर्टिंग.- (1) ईडीपीएमएस (निर्यात डेटा संसाधन और निगरानी प्रणाली) तथा आईडीपीएमएस (आयात डेटा संसाधन और निगरानी प्रणाली) -

प्राधिकृत व्यापारी:

(ए) गैर-ईडीआई (इलेक्ट्रॉनिक डेटा इंटरचेंज) पोर्ट से प्राप्त ईडीएफ (अपने ग्राहकों के) का विवरण, ईडीएफ की प्राप्ति के पांच कार्य दिवसों के भीतर ईडीपीएमएस में दर्ज करेगा।

(बी) सेवा के ईडीएफ (अपने ग्राहकों के) का विवरण निर्यातक से ईडीएफ प्राप्त होने के पांच कार्य दिवसों के भीतर ईडीपीएमएस में दर्ज करेगा।

(सी) गैर-ईडीआई पोर्ट  से प्राप्त आयात (अपने ग्राहकों के) का ब्यौरा दस्तावेजों की प्राप्ति के पांच कार्य दिवसों के भीतर आईडीपीएमएस में दर्ज करेगा।

(डी) आयातक द्वारा घोषित और प्रस्तुत सेवा के आयात का ब्यौरा, दस्तावेजों की प्राप्ति के पांच कार्य दिवसों के भीतर आईडीपीएमएस में दर्ज करेगा।

(ई) निर्यातों, आयातों और मर्चंटिंग व्यापार लेनदेन (एमटीटी) के लिए सभी आवक और जावक प्रेषण का विवरण ईडीपीएमएस तथा / या आईडीपीएमएस में दर्ज करेगा।

(एफ) बकाया प्रविष्टियों को बंद करने के लिए ईडीपीएमएस और आईडीपीएमएस में सभी लेनदेन की निगरानी करेगा और इसके लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने हेतु निर्यातक, आयातक और एमटीटी करने वाले व्यक्ति के साथ अनुवर्ती कार्रवाई करेगा।

प्रविष्टियों को मार्क-ऑफ/ बंद करना:

(जी) निर्यात के मामले में, निर्यात मूल्य प्राप्त हो गया है यह सुनिश्चित करने के बाद ईडीपीएमएस में प्रविष्टि को मार्क-ऑफ करेगा।

(एच) आयात के मामले में, आयात के लिए भुगतान किया गया है यह सुनिश्चित करने के बाद आईडीपीएमएस में प्रविष्टि को मार्क-ऑफ करेगा।

(आई) ईडीपीएमएस में निर्यात अग्रिम से संबंधित प्रविष्टि को, जहां निर्यात नहीं किया गया है और जहां ऐसे अग्रिम की वापसी संभव नहीं है, वहाँ निर्यातक द्वारा कारण देते हुए किए गए अनुरोध पर, दिये गए कारणों की यथार्थता से संतुष्ट होने के बाद, बंद कर सकता है।

(जे) आईडीपीएमएस में आयात अग्रिम से संबंधित प्रविष्टि को, जहां आयात नहीं हुआ है और जहां ऐसे अग्रिम का प्रत्यावर्तन संभव नहीं है वहाँ आयातक द्वारा कारण देते हुए किए गए अनुरोध पर, दिये गए कारणों की यथार्थता से संतुष्ट होने के बाद, बंद कर सकता है।

(के) जहां आयात लेनदेन को कम मूल्य पर निपटाया गया है वहाँ आयातक के अनुरोध पर, दिये गए कारणों की यथार्थता से संतुष्ट होने के बाद, आईडीपीएमएस में प्रविष्टि को बंद कर सकता है।

(एल) एमटीटी के मामले में, एमटीटी के दोनों चरणों के लिए प्राप्ति और भुगतान करने के बाद ईडीपीएमएस और आईडीपीएमएस में संबंधित प्रविष्टि को बंद या अद्यतन करेगा।

(2) प्राधिकृत व्यापारी रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी किए गए दिशानिर्देशों के अनुसार विदेशी मुद्रा लेनदेन इलेक्ट्रॉनिक रिपोर्टिंग सिस्टम (एफईटीईआरएस) में सभी विदेशी व्यापार लेनदेन की रिपोर्टिंग करेगा।

19. लेन-देन करने के लिए आंतरिक नीति और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी).- (1) प्राधिकृत व्यापारी अधिनियम तथा उसके तहत जारी की गई नियमावली, विनयमावली और निदेशों के अनुसार, वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात तथा आयात के साथ-साथ एमटीटी से संबंधित लेनदेन (उसकी रिपोर्टिंग सहित) करने के लिए एक अलग, व्यापक, सुप्रलेखित आंतरिक नीति और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) स्थापित करेगा। नीति में कम से कम निम्नलिखित शामिल होने चाहिए:

(ए) प्रत्येक प्रक्रिया और अनुमोदन के लिए दस्तावेजों की सूची, समय-सीमा और प्रभार।

(बी) निर्यात प्राप्ति और प्रत्यावर्तन/आयात भुगतान के लिए समय-अवधि का विस्तार।

(सी) वसूल की जाने वाली और प्रत्यावर्तित की जानेवाली निर्यात राशियों का समायोजन (कम, अधिक और वसूली न होने वाली)।

(डी) निर्यातों के लिए अग्रिम प्राप्तियां और आयातों के लिए अग्रिम भुगतान।

(ई) प्रत्येक प्रक्रिया हेतु आंतरिक अनुमोदन के लिए शक्तियों का प्रत्यायोजन।

(एफ) निर्यात आढ़त(फैक्टरिंग) और आयात आढ़त(फैक्टरिंग)।  

(2) आंतरिक नीति और एसओपी निर्धारित करते समय, प्राधिकृत व्यापारी यह सुनिश्चित करेगा कि लेन-देन को मंजूरी देने का दायित्व आंतरिक स्तरों पर स्पष्ट रूप से प्रत्यायोजित किया गया है। नीति और एसओपी में ग्राहकों की शिकायतों से निपटने के लिए वृद्धि प्रक्रिया और अपील तंत्र भी होगा, जिसमें अपील पर उच्च आंतरिक स्तर पर कार्रवाई की जाती हो। उच्च आंतरिक स्तर को ग्राहक द्वारा की गई प्रस्तुतियों की यथार्थता के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए।

(3) प्राधिकृत व्यापारी यह सुनिश्चित करेगा कि लेन-देन और संबन्धित प्रक्रियाओं के लिए लगाए गए प्रभार, प्रदान की गई सेवाओं के लिए उचित और आनुपातिक हैं। प्राधिकृत व्यापारी अपने घटक (निर्यातक या आयातक या मर्चंटिंग व्यापारी) पर, घटक द्वारा किसी प्रकार के विनियामक विलंब/ उल्लंघन के लिए कोई प्रभार या दंड नहीं लगाएगा।

(4) प्राधिकृत व्यापारी अपनी वेबसाइट पर एसओपी की मुख्य विशेषताओं और नीति का प्रकटीकरण करेगा।

(एन. सेंथिल कुमार)
मुख्य महाप्रबंधक

भारत के सरकारी राजपत्र, असाधारण, भाग III, खंड-4 में दिनांक 15 जनवरी 2026 को प्रकाशित


1 ईडीपीएमएस तथा आईडीपीएमएस इस प्रयोजन के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट किसी अन्य प्रणाली को भी संदर्भित करेंगे।


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