अधिसूचनाएं

कोविड-19-संबंधी दबाव के लिए समाधान ढांचा

आरबीआई/2020-21/16
डीओआर.सं.बीपी.बीसी/3/21.04.048/2020-21

6 अगस्त 2020

सभी वाणिज्यिक बैंक (लघु वित्त बैंक, स्थानीय क्षेत्र बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सहित)
सभी प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक/ राज्य सहकारी बैंक/ जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक
सभी अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाएं
सभी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (हाउसिंग फाइनेंस कंपनी सहित)

महोदया/ महोदय

कोविड-19-संबंधी दबाव के लिए समाधान ढांचा

भारतीय रिज़र्व बैंक (दबावग्रस्त आस्तियों के समाधान के लिए विवेकपूर्ण ढांचा) निदेश 2019, दिनांक 7 जून 2019 ("विवेकपूर्ण ढांचा") सामान्य स्थितियों में उधारकर्ता की चूक का निपटान करने के लिए सिद्धांत-आधारित समाधान ढांचा प्रदान करता है। "विवेकपूर्ण ढांचे"1 के दिशानिर्देशों के तहत लागू की गई किसी भी समाधान योजना, जिसमें उधारकर्ता की वित्तीय कठिनाई के कारण रियायत दी जाती है, उसमें आस्ति वर्गीकरण में गिरावट शामिल होती है, सिवाय तब जब इसके साथ-साथ स्वामित्व में बदलाव हो, जिसके कारण निर्धारित शर्तों के अधीन आस्ति वर्गीकरण को मानक के रूप में बनाए रखने या उन्नत करने की अनुमति दी जाती है।

2. कोविड -19 महामारी के आर्थिक परिणामों से सभी प्रकार के उधारकर्ताओं पर काफी वित्तीय दबाव पड़ा है। इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न दबाव संभावित रूप से कई फर्मों, जिनका ट्रैक रिकॉर्ड मौजूदा प्रमोटरों के तहत अच्छा रहा हो, की दीर्घकालिक व्यवहार्यता को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि उनके ऋण का भार नकदी प्रवाह निर्माण की क्षमता की तुलना में अनुपातहीन हो रहा है। इस तरह का व्यापक प्रसार पूरी वसूली प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है और महत्वपूर्ण वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

3. उपर्युक्त को ध्यान में रखते हुए, वास्तविक क्षेत्र की गतिविधियों को पुनर्जीवित करने और उधारकर्ताओं पर प्रभाव को कम करने के लिए, विवेकपूर्ण ढांचे के तहत एक अवसर प्रदान करने का निर्णय लिया गया है ताकि उधारदाताओं को स्वामित्व में परिवर्तन किए बिना योग्य कॉरपोरेट एक्सपोज़र, और व्यक्तिगत ऋणों के लिए समाधान योजना लागू करने में सक्षम बनाया जा सके, जबकि ऐसे एक्सपोज़र निर्दिष्ट शर्तों के अधीन मानक के रूप में वर्गीकृत किए जाएंगे। इस सुविधा का विवरण अनुबंध में दिया गया है।

4. ऋणदाता संस्थाएं यह सुनिश्चित करेंगी कि इस सुविधा के तहत समाधान योजना केवल उन उधारकर्ताओं पर लागू की जाए जिनके ऊपर कोविड 19 के कारण दबाव है । इसके अलावा, ऋणदाता संस्थाओं को समाधान योजना की व्यवहार्यता का आकलन करने की आवश्यकता होगी, जो इस अनुबंध में निर्धारित विवेकपूर्ण सीमाओं के अधीन होंगी। इस उद्देश्य के लिए प्रत्येक ऋणदाता संस्था बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति बनाएगी, जिसमें ऐसे मूल्यांकन करने का विस्तृत तरीका और प्रत्येक मामले में समाधान योजना पर विचार करते समय लागू किए जाने वाले वस्तुनिष्ठ मानदंडों का विवरण होगा।

5. जो खाते इस ढांचे के तहत समाधान के लिए विचार किए जाने हेतु आवश्यक पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते हैं, उनके समाधान के लिए विवेकपूर्ण ढ़ांचे के तहत विचार किया जाना जारी रहेगा, या जहां विवेकपूर्ण ढ़ांचा लागू नहीं होता है, वहां ऋणदाता संस्थाओं की विशिष्ट श्रेणी पर लागू प्रासंगिक अनुदेश के तहत विचार किया जाएगा।

6. हालांकि विवेकपूर्ण ढ़ांचा इस परिपत्र में संबोधित ऋणदाता संस्थाओं की कुछ श्रेणियों पर अन्यथा लागू नहीं होता है, इस सुविधा के तहत इन ऋणदाता संस्थाओं के एक्सपोजर को भी समाधान योजना के लिए शामिल किया जाएगा। तदनुसार, इस सुविधा पर लागू विशिष्ट शर्तों के प्रति पूर्वाग्रह के बिना, विवेकपूर्ण ढ़ांचे में समाधान योजना के कार्यान्वयन हेतु लागू सभी मानदंड, जिसमें इंटर-क्रेडिटर समझौतों (आईसीए) की अनिवार्यता और विशिष्ट कार्यान्वयन की शर्तें शामिल हैं, इस सुविधा के तहत कार्यान्वित किसी भी समाधान योजना के लिए सभी ऋणदाता संस्थाओं पर लागू होंगे। इस परिपत्र में प्रयुक्त शर्तें, जो यहां परिभाषित नहीं किए गए है, का अर्थ वही होगा जो विवेकपूर्ण ढ़ांचे में दिया गया है।

भवदीय

(सौरभ सिन्हा)
मुख्य महाप्रबंधक


अनुबंध

कोविड-19-संबंधी दबाव के लिए समाधान ढ़ांचे की शर्तें

1. यह ढांचा योग्य उधारकर्ताओं पर- कॉर्पोरेट व्यक्तियों या अन्यथा - यहाँ निर्दिष्ट शर्तों के अधीन लागू होगा। इस अनुबंध का भाग क व्यक्तिगत ऋणों के समाधान के लिए विशिष्ट अपेक्षाओं से संबंधित है और भाग ख अन्य योग्य उधारकर्ताओं के समाधान से संबंधित है। भाग ग में उन एक्सपोज़र के विवेकपूर्ण ट्रीटमेंट का वर्णन है जिसके संबंध में इस सुविधा के तहत समाधान योजना कार्यान्वित की जाएगी, जबकि भाग घ में इस ढ़ांचे के तहत लागू समाधान योजनाओं के संबंध में ऋणदाता संस्थाओं के लिए प्रकटीकरण आवश्यकताओं को सूचीबद्ध किया गया है। इस प्रयोजन के लिए, ऋणदाता संस्था का अर्थ उन संस्थाओं से होगा जिन्हें कवरिंग परिपत्र में संबोधित किया गया है।

2. विवेकपूर्ण ढ़ांचे के पैराग्राफ 25-28 में निर्दिष्ट अपवादों के प्रति पूर्वाग्रह के बिना, उधारकर्ताओं/ क्रेडिट सुविधाओं की निम्नलिखित श्रेणियां इस ढ़ांचे के तहत समाधान योजना के लिए योग्य नहीं होंगी:

क. एमएसएमई उधारकर्ता, जिनका ऋणदाता संस्थाओं के प्रति कुल एक्सपोज़र, 1 मार्च 2020 की स्थिति के अनुसार, रू. 25 करोड़ या उससे कम है।

ख. 7 जुलाई 2016 के मास्टर निदेश एफआईडीडी.केंका.पीसीओ.1/04.09.01/2016-17 (अद्यतन) के पैराग्राफ 6.1 में सूचीबद्ध किए गए फार्म क्रेडिट या अन्य प्रासंगिक अनुदेश जो ऋणदाता संस्थाओं की विशिष्ट श्रेणी पर लागू होते हैं।

ग. कृषि के लिए आगे ऋण देने हेतु प्राथमिक कृषि साख समितियों (पीएसीएस), कृषक सेवा समितियों (एफएसएस) और बड़े आकार वाली आदिवासी बहुउद्देश्यीय समितियों (एलएएमपीएस) को ऋण।

घ. वित्तीय सेवा प्रदाताओं के प्रति ऋणदाता संस्थाओं का एक्सपोजर2

ञ. केंद्र और राज्य सरकारों; स्थानीय सरकारी निकाय (जैसे- नगर निगम); और संसद या राज्य विधानमंडल के अधिनियम द्वारा स्थापित निकाय के प्रति ऋणदाता संस्थाओं के एक्सपोजर।

च. हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के एक्सपोजर जहां खाते मास्टर परिपत्र - आवास वित्त कंपनी (एनएचबी) निदेश, 2010 के पैरा 2 (1) (जेडसी) (ii) के संदर्भ में 1 मार्च, 2020 के बाद पुनर्निर्धारित किए गए हैं , जब तक कि अन्य ऋणदाता संस्थाओं द्वारा इस ढांचे के तहत समाधान योजना आरंभ नही की गई है। हालाँकि, इस परिपत्र की तारीख से, कोविड -19 महामारी के आर्थिक परिणामों के कारण आवश्यक कोई भी समाधान केवल इस ढ़ांचे के तहत किया जाएगा।

3. ऋण देने वाली संस्थाएं इस ढांचे के तहत योग्य उधारकर्ताओं के लिए व्यवहार्य समाधान योजनाओं के कार्यान्वयन के संबंध में यह सुनिश्चित करते हुए बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीतियां बनाएंगी कि इस सुविधा के तहत केवल कोविड 19 के कारण दबावग्रस्त उधारकर्ताओं का समाधान किया जाएगा। बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति में, अन्य बातों के साथ, उन उधारकर्ताओं की पात्रता का विवरण दिया जाएगा, जिनके संबंध में ऋणदाता संस्थाएं समाधान योजना पर विचार कर सकती हैं; और संबंधित उधारकर्ता के लिए समाधान योजना कार्यान्वित करने की आवश्यकता सुनिश्चित करने के लिए ऋणदाता संस्थाओं द्वारा पालन किए जाने वाले उचित सावधानी संबंधी विचार होंगे।

4. समाधान के लिए मानी जा सकने वाली, ऋण की बकाया राशि की संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2020 होगी।

क . व्यक्तिगत ऋणों में दबाव का समाधान

5. यह भाग ऋणदाता संस्थाओं द्वारा वैयक्तिक उधारकर्ताओं3 को मंजूर किए गए वैयक्तिक ऋणों के समाधान पर लागू होगा। तथापि, उधारदाता संस्थाओं द्वारा अपने कार्मिक/स्टाफ को दी गई ऋण सुविधाएं, इस ढ़ांचे के तहत समाधान हेतु योग्य नहीं होंगे।

6. इस ढ़ांचे के तहत केवल उन उधारकर्ताओं के खाते योग्य होंगे जो मानक के रूप में वर्गीकृत थे, लेकिन 1 मार्च 2020 को ऋणदाता संस्था के पास 30 दिनों से अधिक अवधि के लिए चूक नहीं हुई है।

7. इस ढ़ांचे के तहत समाधान को सक्रिय किए जाने की तारीख (प्रारम्भ तिथि) तक योग्य उधारकर्ताओं के खातों को मानक के रूप में वर्गीकृत करना जारी रखा जाए। इस प्रयोजन के लिए, प्रारम्भ तिथि वह होगी जिसपर उधारकर्ता और ऋणदाता संस्था दोनों इस ढ़ांचे के तहत समाधान योजना पर आगे बढ़ने के लिए सहमत हुए हैं।

8. इस ढ़ांचे के तहत समाधान का निर्णय अधिकतम 31 दिसंबर, 2020 तक लिया जा सकता है और इसका क्रियान्वयन प्रारम्भ तिथि से 90 दिनों के भीतर किया जाना अनिवार्य होगा। तथापि, ऋणदाता संस्था इसे शीघ्र आरंभ करने का प्रयास करे।

9. समाधान योजनाओं में अन्य बिन्दुओं के साथ-साथ भुगतानों का पुनर्निर्धारण, संचित हो चुके या संचित होनेवाले ब्याज को किसी अन्य ऋण सुविधा में परिवर्तित करना, या उधारकर्ता की आय के माध्यमों के आकलन के आधार पर अधिकतम दो साल का ऋण स्थगन प्रदान करना शामिल होगा। परिणामस्वरूप, ऋण की समग्र समयावधि भी इसके अनुसार संशोधित की जाएगी। स्थगन अवधि, यदि प्रदान की गई हो तो, समाधान योजना के कार्यान्वयन के तुरंत बाद लागू हो जाएगी।

10. समाधान योजना को निम्न सभी शर्तों की पूर्ति के अधीन ही कार्यान्वित माना जाएगा :

  1. संबंधित ऋणदाता द्वारा ऋणदाता संस्थाओं और उधारकर्ता के बीच आवश्यक करारों के निष्पादन सहित सभी संबंधित प्रलेखीकरण और प्रदान किए गए संपार्श्विक, अगर कुछ है तो, लागू की जाने वाली समाधान योजना के अनुकूल पूरा किया गया हो;

  2. ऋणदाता संस्थाओं की बहियों में ऋणों की शर्तों में किए गए परिवर्तन विधिवत दर्शाए गए हों;

  3. संशोधित शर्तों के अनुसार उधारकर्ता उधारदाता संस्था के प्रति चूककर्ता नहीं है।

11. उपर्युक्त समय सीमा के उल्लंघन में लागू की गई कोई भी समाधान योजना पूर्ण रूप से विवेकपूर्ण ढ़ांचे द्वारा अधिशासित होगी, या जहां विवेकपूर्ण ढ़ांचा लागू नही होता वहां ऋणदाता संस्थाओं की विशिष्ट श्रेणी पर लागू संबंधित अनुदेश द्वारा।

ख. अन्य एक्सपोजर का समाधान

12. भाग 'क' में कवर नहीं किए गए ऋणदाता संस्थाओं के अन्य सभी योग्य एक्सपोजर पर यह भाग लागू होगा।

13. केवल वे उधारकर्ता खाते इसके तहत समाधान के लिए योग्य होंगे जिन्हें मानक के रूप में वर्गीकृत किया गया था, लेकिन वे 1 मार्च, 2020 तक किसी भी ऋणदाता संस्था के प्रति 30 दिनों से अधिक समय के लिए चूककर्ता नही हैं। साथ ही लागू करने की तारीख तक खाता मानक रहना चाहिए।

14. यदि उधारकर्ता का केवल एक ऋणदाता संस्था के प्रति एक्सपोजर है, तो उधारकर्ता द्वारा समाधान हेतु अनुरोध पर निर्णय ऋणदाता संस्था द्वारा बोर्ड की अनुमोदित नीति के अनुसार और इस ढ़ांचे की रूपरेखा के भीतर लिया जा सकता है। इस प्रयोजन के लिए, प्रारम्भ तिथि वह तारीख होगी जिसपर उधारकर्ता और ऋणदाता संस्था दोनों इस ढ़ांचे के तहत समाधान योजना के लिए सहमत हुए हैं।

15. यदि उधारकर्ता का एकाधिक ऋणदाता संस्थाओं के प्रति एक्सपोजर है तो किसी भी उधारकर्ता के संबंध में समाधान प्रक्रिया को सक्रिय किया गया माना जाएगा, यदि कुल बकाया ऋण सुविधाओं (निधि आधारित और गैर-निधि आधारित दोनों), के आधार पर ऋणदाता संस्थाओं में से मूल्य के आधार पर कम से कम 75 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्थाएं और संख्या के आधार पर कम से कम 60 प्रतिशत ऋणदाता संस्थाएं इसे आरंभ करने के लिए सहमत होती हैं।

16. इस ढ़ांचे के तहत समाधान का निर्णय अधिकतम 31 दिसम्बर 2020 तक लिया जा सकता है और इसका क्रियान्वयन प्रारम्भ- तिथि से 180 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा।

17. एकाधिक ऋणदाता संस्थाओं वाले सभी मामलों में, जहाँ समाधान प्रक्रिया को आरंभ किया गया है और इसके परिणामस्वरूप समाधान योजना लागू की जानी है, सभी ऋणदाता संस्थाओं द्वारा लागू करने की तारीख से 30 दिनों के भीतर आईसीए पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता होगी। आवास वित्त कंपनियों के मामले में यह उन खातो पर भी लागू होगा, जहां खातों का पुनर्निधारण मास्टर परिपत्र – आवास वित्त कंपनी (एनएचबी) निदेश, 2010 के पैरा 2 (1) (जेडसी) (ii) के अनुसार किया गया हो।

18. ऐसे मामलों में जहाँ समाधान प्रक्रिया को सक्रिय किया गया है लेकिन कुल बकाया ऋण सुविधाओं (निधि आधारित और गैर-निधि आधारित दोनों),के आधार पर ऋणदाता संस्थाओं में से मूल्य के आधार पर कम से कम 75 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करने वाली और संख्या के आधार पर कम से कम 60 प्रतिशत उधारदाता संस्थाओं ने प्रारम्भ- तिथि से 30 दिनों के भीतर आईसीए पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं तो कार्यान्वयन को व्यपगत माना जाएगा। ऐसे उधारकर्ताओं के संबंध में, इस ढ़ांचे के तहत समाधान प्रक्रिया को फिर से आरंभ नहीं किया जा सकता है।

19. इस परिपत्र के अनुसार ऋणदाता संस्थाओं के अलावा उधारकर्ता को उधार देने वाले यदि चाहें तो, आईसीए पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यदि ऐसे ऋणदाता आईसीए पर हस्ताक्षर करते हैं, तो वे पूरी तरह से आईसीए की शर्तों के अधीन होंगे।

20. आईसीए के हस्ताक्षरकर्ताओं के बीच समाधान प्रक्रिया संबंधी सभी विवादों, यदि कोई हो, को आईसीए के प्रावधानों के अनुसार निपटाया जाएगा और रिज़र्व बैंक ऐसे किसी भी विवाद की मध्यस्थता नहीं करेगा। ऋणदाता संस्थाएं यह सुनिश्चित करेंगी कि आईसीए में ऐसा विवाद निवारण तंत्र निहित हो, जिसमें स्पष्ट रूप से आईसीए के किसी हस्ताक्षरकर्ता, जो विवाद उठाना चाहता है, को उपलब्ध सहायता बताई गई हो।

21. चूंकि समाधान प्रक्रिया की अपेक्षाएं और कार्यान्वयन के बाद विवेकपूर्ण व्यवहार सभी ऋणदाताओं, जिसमें वे भी शामिल हैं जिनपर विवेकपूर्ण ढ़ांचा लागू नहीं है, पर सामूहिक रूप से लागू किया जाता है, समाधान योजना के कार्यान्वयन के दौरान और बाद में उधारदाता संस्थाओं के बीच सूचना साझा करने के लिए आईसीए में उपयुक्त तंत्र का प्रावधान होना चाहिए।

22. यदि किसी भी बिंदु पर उपर्युक्त समयसीमा का उल्लंघन किया जाता है, तो संबंधित उधारकर्ता के लिए समाधान प्रक्रिया लागू होना तुरंत समाप्त हो जाएगा। उपर्युक्त निर्धारित समयसीमा के उल्लंघन में कार्यान्वित किसी भी समाधान योजना को पूरी तरह से विवेकपूर्ण ढ़ांचे द्वारा अधिशासित किया जाएगा, या जहां विवेकपूर्ण ढ़ांचा लागू नहीं होता, वहां उन ऋणदाता संस्थाओं की विशिष्ट श्रेणी पर लागू प्रासंगिक अनुदेशों द्वारा; यह इस प्रकार होगा जैसे कि इस ढांचे के तहत समाधान प्रक्रिया कभी आरंभ नहीं की गई थी।

विशेषज्ञ समिति

23. रिजर्व बैंक एक समिति का गठन करेगा, जो वित्तीय मामलों की ऐसी सूची की सिफारिश करेगी, जो उनकी राय में प्रत्येक समाधान योजना में शामिल मान्यताओं और ऐसे मापदंडों के लिए क्षेत्र विशिष्ट बेंचमार्क श्रेणियों में ध्यान देने की आवश्यकता होगी। उक्त्त मानदंडों में लीवरेज, चलनिधि, डेट सर्विसेबिलिटी आदि से जुड़े पहलुओं को शामिल किया गया है। इस समिति को विशेषज्ञ समिति कहा जाएगा।

24. विशेषज्ञ समिति वित्तीय मापदंडों और ऐसे मापदंडों के लिए क्षेत्र-विशिष्ट वांछनीय श्रेणियों की ऐसी सूची रिजर्व बैंक को प्रस्तुत करेगी, जो 30 दिनों के भीतर आवश्यकतानुसार, यदि कोई हो तो संशोधनों के साथ अधिसूचित करेगा।

25. विशेषज्ञ समिति की यह भी जिम्मेदारी होगी कि ऐसे सभी खातों के संबंध में इस ढांचे के अंतर्गत लागू की जाने वाली समाधान योजनाओं का पुनरीक्षण करे, जहां समाधान प्रक्रिया के शुरू किए जाने के समय ऋण देने वाली संस्थाओं का कुल एक्सपोजर 1500 करोड़ रुपये और उससे अधिक है। समिति ऋणदाताओं द्वारा किए गए वाणिज्यिक निर्णयों में हस्तक्षेप किए बिना यह जांच करेगी और सत्यापित करेगी कि संबंधित पक्षों द्वारा सभी अपेक्षित प्रक्रियाओं का पालन किया गया है ।

26. विशेषज्ञ समिति का सचिवालय भारतीय बैंक संघ में होगा। समिति के सदस्यों को मुआवजा तथा समिति और उसके सचिवालय से संबंधित सभी खर्चे रिज़र्व बैंक द्वारा वहन किया जाएगा।

समाधान योजना की स्वीकृत विशेषताएँ

27. समाधान योजना में “विवेकपूर्ण ढांचे” के पैराग्राफ 13 में प्रदान की गई कोई भी कार्रवाई शामिल हो सकती है, सिवाय समझौता निपटानों को छोड़कर, जो विवेकपूर्ण ढांचे के प्रावधानों अथवा ऋण देने वाली संस्थाओं की ऐसी विशिष्ट श्रेणी के लिए, जिनपर विवेकपूर्ण ढांचा लागू नहीं होता है, को संबन्धित निर्देशों, यदि कोई हो, द्वारा ही संचालित किया जाता रहेगा। समाधान योजना में कोविड19 के कारण उधारकर्ता के वित्तीय तनाव को दूर करने के लिए अतिरिक्त ऋण सुविधाओं को मंजूरी देना भी शामिल हो सकता है, भले ही मौजूदा ऋण पर पुन: निगोशिएशन न हो।

28. ऋण देने वाली संस्थाएं ऋण की अवशिष्ट अवधि को भुगतान स्थगन सहित अथवा इसके बिना अधिकतम दो वर्ष की अवधि तक आगे बढ़ाने की अनुमति दे सकती हैं। स्थगन अवधि, यदि दी जाती है, तो समाधान योजना के कार्यान्वयन पर तुरंत लागू हो जाएगी।

29. योजना में शामिल संशोधित मान्यताएं, कम से कम, विशेषज्ञ समिति द्वारा तय किए गए वित्तीय मापदंडों और रिज़र्व बैंक द्वारा ऐसे मापदंडों के लिए अधिसूचित श्रेणियां पर आधारित होंगी ।

अन्य प्रतिभूतियों में रूपांतरण और मूल्यांकन

30. समाधान योजना में ऋण के एक हिस्से को इक्विटी या अन्य विपणन योग्य, उधारकर्ता द्वारा जारी गैर-परिवर्तनीय ऋण प्रतिभूतियों में बदलना संभव है, बशर्ते कि समाधान योजना के कार्यान्वयन के बाद परिशोधन समयावधि और ऐसे ऋण प्रतिभूतियों के कूपन, ऋण संस्थानों की खाता पुस्तिकाओं में धारित ऋण की शर्तों के अनुरूप हों। संबंधित ऋण संस्थाओं द्वारा ऐसे लिखतों का धारण उन पर लागू निवेश संबंधी मौजूदा अनुदेशों के अधीन होगा।

31. जारी किए गए इक्विटी लिखतों का मूल्यांकन, यदि कोई हो, विवेकपूर्ण ढांचे के लिए अनुलग्नक के पैराग्राफ 19 (सी) और 19 (डी) के प्रावधानों द्वारा किया जाएगा जबकि ऋण प्रतिभूतियों को 1 जुलाई 2015 को रिज़र्व बैंक द्वारा जारी मास्टर परिपत्र- निवेश पोर्टफोलियो के वर्गीकरण, मूल्यांकन और परिचालन के लिए विवेकपूर्ण मानदंड (समय-समय पर यथासंशोधित) के पैराग्राफ 3.7.1 पर संकलित निदेशों या ऋण देने वाली संस्थाओं की विशिष्ट श्रेणी पर लागू अन्य प्रासंगिक निदेशों के अनुसार मूल्यांकित किया जाएगा ।

32. यदि ऋण देने वाली संस्थाएं ऋण के किसी भी हिस्से को किसी अन्य प्रतिभूति में परिवर्तित कर देती हैं, तो इसे सामूहिक रूप से 1 रुपए पर मूल्य निर्धारित माना जाएगा।

अन्य विशेषताएँ

33. ऐसे खातों के संबंध में, समाधान योजनाएं, जहां समाधान प्रक्रिया शुरू होने के समय ऋण देने वाली संस्थाओं का कुल एक्सपोजर 100 करोड़ रुपये और उससे अधिक है, विवेकपूर्ण ढांचे के अंतर्गत रिज़र्व बैंक द्वारा प्राधिकृत किसी एक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (सीआरए) द्वारा स्वतंत्र ऋण मूल्यांकन (आईसीई) की आवश्यकता होगी।

34. समाधान योजना में यह भी प्रावधान किया जाएगा कि कंसोर्टियम या अनेक बैंकिंग व्यवस्थाओं से जुड़े खातों के लिए, योजना के कार्यान्वयन होने के बाद, उधारकर्ता द्वारा सभी प्राप्तियों, ऋण देने वाली संस्थाओं को उधारकर्ता द्वारा सभी भुगतान, साथ ही समाधान योजना के भाग के रूप में ऋण देने वाली संस्थाओं द्वारा उधारकर्ता को प्रदत्त सभी अतिरिक्त संवितरण, यदि कोई हो, को ऋण देने वाली संस्थाओं में से किसी एक के साथ बनाए गए एस्क्रो खाते के माध्यम से संपादित किया जाएगा ।

35. उपरोक्त परिचालन को सुचारू रूप से किया जाना सुनिश्चित करने के लिए ऋण देने वाली संस्थाएं, एस्क्रो प्रबंधक तथा ऋण देने वाली संस्थाओं के कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों के साथ-साथ एस्क्रो प्रबंधक को अनुबंधित रूप से उपलब्ध प्रवर्तन तंत्र का ब्यौरा देते हुए एस्क्रो प्रबंधक के साथ एक औपचारिक समझौता करेंगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऋण देने वाली संस्थाएं समय पर अपने संवितरण दायित्वों को निभा रहे हैं।

ग. आस्ति वर्गीकरण और प्रावधान

36. उधारकर्ता की अंतरिम चलनिधि आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए योजना के कार्यान्वयन से पहले उधारकर्ता को अतिरिक्त वित्तपोषण करके यदि समाधान योजना लागू की गई है, तो अंतरिम रूप से प्रदत्त ऐसी सुविधाओं के संबंध में उधारकर्ता के वास्तविक प्रदर्शन से परे योजना के कार्यान्वयन तक उन्हें ‘मानक आस्तियों’ के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।

37. तथापि, यदि समाधान योजना को निर्धारित समयसीमा के भीतर लागू नहीं किया जाता है, तो स्वीकृत अतिरिक्त वित्त का आस्ति वर्गीकरण अतिरिक्त वित्त या शेष ऋण सुविधाओं के संबंध में उधारकर्ता के वास्तविक प्रदर्शन के अनुसार, जो भी बदतर है, होगा।

38. यदि इस सुविधा के प्रावधानों के पालन में समाधान योजना लागू की जाती है, तो मानक आस्ति के रूप में वर्गीकृत उधारकर्ताओं के खातों के आस्ति वर्गीकरण को कार्यान्वयन पर यथावत बनाए रखा जा सकता है, जबकि उधारकर्ताओं के खातों को जो योजना क आरंभ और कार्यान्वयन के बीच एनपीए में परिणत हो सकता है, को योजना के कार्यान्वयन की तिथि को मानक के रूप में अपग्रेड किया जा सकता है ।

39. व्यक्तिगत ऋणों के संबंध में जहां इस सुविधा के अंतर्गत समाधान योजना लागू की जाती है, ऋण देने वाली संस्थाएं कार्यान्वयन की तिथि से इस हेतु प्रावधान रखेंगी, जो कार्यान्वयन से तुरंत पहले मौजूदा आईआरएसी मानदंडों के अनुसार किए गए प्रावधानों या कार्यान्वयन के बाद ऋण देने वाली संस्था के पुन: नेगोशिएट किए ऋण जोखिम (अवशिष्ट ऋण) का 10 प्रतिशत में से अधिक के तुल्य होगी ।

40. अन्य मामलों में जहां इस सुविधा के अंतर्गत समाधान योजना लागू की जाती है, ऋण देने वाली संस्थाएं, जिन्होंने योजना आरंभ होने के 30 दिनों के भीतर आईसीए पर हस्ताक्षर किए थे, कार्यान्वयन की तिथि से प्रावधान रखेंगे, जो कि कार्यान्वयन से तुरंत पहले मौजूदा आईआरएसी मानदंडों के अनुसार किए गए प्रावधानों या कुल ऋण का 10 प्रतिशत, जिसमें योजना के कार्यान्वयन (अवशिष्ट ऋण) के बाद आईसीए हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा संपन्न खंड 30 की शर्तों पर जारी ऋण प्रतिभूतियों को शामिल किया है, में से अधिक के तुल्य होगी ।

41. तथापि, जिन ऋण संस्थाओं ने योजना आरंभ होने के 30 दिनों के भीतर आईसीए पर हस्ताक्षर नहीं किए थे, 30 दिनों की समाप्ति पर तत्काल, उन्हें इस तारीख को अपनी खाता पुस्तकों पर दर्ज (धारित ऋण) ऋण के 20 प्रतिशत या वर्तमान आईआरएसी मानदंडों के अनुसार आवश्यक प्रावधानों में से जो भी अधिक हो, उतना प्रावधान करना होगा। यहां तक कि ऐसे मामलों में जहां आईसीए हस्ताक्षर नहीं होने के कारण योजना आरंभ नहीं किया जा रहा है, खंड 18 की शर्तों के अंतर्गत, ऐसी ऋण संस्थाएं जो पहले योजना आरंभ करने के लिए सहमत थीं, लेकिन जिन्होने आईसीए पर हस्ताक्षर नहीं किया था, उन्हें अपने धारित ऋण पर 20 प्रतिशत प्रावधान करने की भी आवश्यकता होगी ।

42. ऐसे उधारकर्ताओं के संबंध में 17 अप्रैल, 2020 को जारी परिपत्र संख्या विवि.बीपी.बीसी.63/21.048/2019-2019-20, की शर्तों के अनुसार ऋण देने वाली संस्थाओं द्वारा यदि, उस सीमा तक जिसे पहले ही पलट नहीं दिया गया हो, कोई अतिरिक्त प्रावधान किए गए हैं; तो इस सुविधा के अंतर्गत सभी मामलों में इसे प्रावधान संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

43. विवेकपूर्ण ढांचे के पैराग्राफ 17 के शर्तों के अधीन किए गए किसी भी अतिरिक्त प्रावधान, जहां भी लागू हो, को इस सुविधा के अंतर्गत समाधान योजना के आरंभ होने के समय पलटा जा सकता है। तथापि, यदि योजना को आरंभ होने से 180 दिनों के भीतर लागू नहीं किया जाता है, तो विवेकपूर्ण ढांचा के अनुसार उसी प्रकार प्रावधानों को बनाए रखने की आवश्यकता होगी, जैसे कि इस विंडो के अंतर्गत कभी भी समाधान प्रक्रिया लागू की ही नहीं गई थी।

प्रावधानों को वापस लिया जाना

44. इस सुविधा के तहत समाधान किए व्यक्तिगत ऋणों के मामले में, उपरोक्त प्रावधानों में से आधे को उधारकर्ता को योजना के कार्यान्वयन के बाद एनपीए में जाने दिए बगैर अवशिष्ट ऋण के कम से कम 20 प्रतिशत का भुगतान करने पर वापिस किया जा सकता है, और शेष आधे को एनपीए में जाने दिए बगैर अवशिष्ट ऋण के 10 प्रतिशत पुनर्भुगतान करते हुए उधारकर्ता पर वापिस किया जा सकता है।

45. अन्य एक्स्पोज़रों के समाधान के मामले में, आईसीए हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा रखे गए प्रावधानों को खंड 44 में दिए गए अनुसार वापस किए जा सकते हैं। हालांकि, गैर-आईसीए हस्ताक्षरकर्ताओं के संबंध में, आधे प्रावधानों का वहन 20 प्रतिशत चुकाने पर किया जा सकता है,जबकि शेष आधे को आवश्यक आईआरएसी प्रावधानों को बनाए रखने के अधीन, मौजूदा ऋण के शेष 10 प्रतिशत के पुनर्भुगतान पर वापस किया जा सकता है।

कार्यान्वयन बाद निष्पादन

46. व्यक्तिगत ऋणों के लिए, इस सुविधा के संदर्भ में समाधान योजना के कार्यान्वयन के बाद, आस्ति वर्गीकरण 1 जुलाई 2015 को जारी मास्टर परिपत्र - अग्रिमों के संबंध में आय निर्धारण, आस्ति वर्गीकरण तथा प्रावधान करने से संबंधित विवेकपूर्ण मानदंड या अन्य प्रासंगिक अनुदेश जोकि विशिष्ट श्रेणी के ऋणदाता संस्थानों पर लागू होते हैं, के द्वारा अभिशासित किया जाएगा।

47. वैयक्तिक ऋणों के अलावा अन्य एक्स्पोज़रों के संबंध में, निगरानी अवधि के दौरान आईसीएए के किसी भी हस्ताक्षरकर्ता के साथ उधारकर्ता द्वारा कोई भी चूक 30 दिनों की समीक्षा अवधि को उत्प्रेरित करेगा।

इस प्रयोजन के लिए निगरानी अवधि, को समाधान योजना के कार्यान्वयन की उस तारीख से शुरू होने वाली अवधि के रूप में परिभाषित किया गया है जहां, ब्याज के पहले भुगतान के शुरू होने से कम से कम एक वर्ष या अधिस्थगन की सबसे लंबी अवधि के साथ क्रेडिट सुविधा पर मूलधन के अधीन जब तक कि उधारकर्ता अवशिष्ट ऋण का 10 प्रतिशत (जो भी बाद में है) का भुगतान नहीं करता है,

48. अगर उधारकर्ता समीक्षा अवधि के अंत तक आईसीए के किसी भी हस्ताक्षरकर्ता के साथ चूक की स्थिति में है, तो आईसीए में हस्ताक्षर नहीं करने वालों सहित सभी ऋण दाता संस्थाओं के उधारकर्ता के आस्ति वर्गीकरण को समाधान योजना के कार्यान्वयन की तारीख या उस तारीख से जिस पर योजना के कार्यान्वयन से पहले उधारकर्ता को एनपीए के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जो भी पहले हो के अनुसार एनपीए में परिवर्तित कर दिया जाएगा।

49. सभी मामलों में, आगे के परिवर्तन विवेकपूर्ण ढाँचे के तहत एक नए पुनरसंरचना के कार्यान्वयन के अधीन होंगे, या जहां विवेकपूर्ण ढांचा लागू नहीं है वहां ऋण दाता संस्थानों की विशिष्ट श्रेणी के लिए लागू प्रासंगिक अनुदेशों के अधीन होंगे।

50. एनपीए के रूप में वर्गीकृत किए बिना निगरानी की अवधि पूरी होने पर, आस्ति वर्गीकरण मानदंड 1 जुलाई 2015 को जारी मास्टर परिपत्र - अग्रिमों के संबंध में आय निर्धारण, आस्ति वर्गीकरण तथा प्रावधान करने से संबंधित विवेकपूर्ण मानदंड या अन्य प्रासंगिक अनुदेशों जोकि विशिष्ट श्रेणी के ऋणदाता संस्थानों पर लागू होते हैं, के मानदंडों के अनुरूप समायोजित होगा।

51. इस उपाय के तहत बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रावधान, पहले से ही वापस नहीं की गई सीमा के लिए: (i) प्रावधान आवश्यकताएं जब किसी भी खाते, जहां एक समाधान योजना लागू की गई थी, किंतु बाद में उसे एनपीए के रूप में वर्गीकृत किया गया है; साथ ही, (ii) विवेकपूर्ण ढांचे के पैरा 17 को देखते हुए, किसी खाता विशेष के मामले में जब और जहां विवेकपूर्ण ढाँचा लागू होता है, अतिरिक्त प्रावधान की आवश्यकताएं, उपलब्ध होंगे।

घ. प्रकटीकरण और क्रेडिट रिपोर्टिंग

52. तिमाही विवरण प्रकाशित करने वाली संस्थाएँ, कम से कम 31 मार्च, 2021, 30 जून, 2021 और 30 सितंबर, 2021 को समाप्त होने वाले तिमाहियों के लिए अपने वित्तीय वक्तव्यों में प्रारूप-क में निर्धारित प्रारूप के अनुसार प्रकटीकरण करेंगी। ऐसी ऋण प्रदान करने वाली संस्थाएं प्रारूप ख में निर्धारित प्रारूप में हर छमाही अर्थात 30 सितंबर और 31 मार्च के वित्तीय विवरणों में, 30 सितंबर 2021 को समाप्त होने वाले छमाही से शुरू होकर तब तक जब सभी एक्सपोजर, जिस पर समाधान योजना लागू किया गया था, भले ही या तो वे पूरी तरह से समाप्त हो गए हों या पूरी तरह से एनपीए हो गया हो, इनमें जो भी पहले हो में प्रकटीकरण करें।

53. केवल वार्षिक वित्तीय विवरणों को प्रकाशित करने की आवश्यकता वाले ऋण दाता संस्थानों को अन्य निर्धारित प्रकटीकरण के साथ, अपने वार्षिक वित्तीय विवरणों में आवश्यक प्रकटीकरण करने होंगे।

54. ऋणदाता संस्थानों द्वारा उधारकर्ताओं के संबंध में क्रेडिट रिपोर्टिंग जहां समाधान योजना इस सुविधा के तहत कार्यान्वित की जाती है, उस खाते की "पुनसंरचितत" स्थिति को दर्शाएगी, यदि समाधान योजना में पुन:समझौते शामिल है तो इसे विवेकपूर्ण ढाँचे के तहत पुनसंरचित के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। तदनुसार उधारकर्ताओं का क्रेडिट इतिहास साख सूचना कंपनियों की संबंधित नीतियों द्वारा अभिशासित किया जाएगा जो पुनसंरचित खातों पर लागू होते हैं।


प्रारूप -क

31 मार्च, 2021, 30 जून, 2021 और 30 सितंबर, 2021 को समाप्त होने वाले तिमाही में होने वाले प्रकटीकरण का प्रारूप

उधारकर्ता का प्रकार (क)
इस अवसर के तहत जहां समाधान योजना लागू किए गए हैं, उन खातों की संख्या
(ख)
योजना के कार्यान्वयन से पहले (क) में वर्णित खातों के लिए एक्स्पोज़र
(ग)
(ख) में से, ऋण की कुल राशि जो अन्य प्रतिभूतियों में परिवर्तित हो गई थी
(घ)
योजना के प्रारंभ और कार्यान्वयन के बीच अतिरिक्त स्वीकृत धनराशि, यदि कोई हो,
(ड.)
समाधान योजना के कार्यान्वयन के प्रावधानों में वृद्धि
व्यक्तिगत ऋण          
कॉर्पोरेट ऋण*          
उसमें से एमएसएमई          
अन्य          
कुल          
*जैसा कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 की धारा 3 (7) में परिभाषित किया गया है।

प्रारूप-ख

30 सितंबर, 2021 से शुरू होने वाले छमाही के प्रकटीकरण के लिए प्रारूप

उधारकर्ता का प्रकार समाधान योजना के कार्यान्वयन के लिए मानक परिणाम के रूप में वर्गीकृत खातों का एक्सपोज़र - पिछले छमाही के अंत में स्थिति (क) (क) में से, कुल ऋण जो छमाही के दौरान एनपीए में बदल गया (क) में से छमाही के दौरान बट्टे खाते डाली गई राशि (क) में से छमाही के दौरान उधारकर्ताओं द्वारा भुगतान की गई राशि समाधान योजना के कार्यान्वयन के लिए मानक परिणाम के रूप में वर्गीकृत खातों के लिए एक्सपोज़र - इस छमाही के अंत की स्थिति
व्यक्तिगत ऋण          
कॉरपोरेट ऋण*          
उसमें से एमएसएमई          
अन्य          
कुल          
*जैसा कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 की धारा 3 (7) में परिभाषित किया गया है।

1 "विवेक्पूर्ण ढांचा"शब्द का इस परिपत्र में जहां भी उपयोग किया गया है, उसका अर्थ है "दबावग्रस्त आस्तियों के समाधान के लिए विवेकपूर्ण ढांचा" निदेश 2019, दिनांक 7 जून, 2019”।

2 वित्तीय सेवा प्रदाता का वही अर्थ होगा जो दिवाला और शोधन अक्षमता अधिनियम, 2016 की धारा 3 की उप-धारा 17 में दिया गया है।

3 इस परिपत्र के प्रयोजन से ‘वैयक्तिक ऋण’ का वही अर्थ होगा जो “एक्सबीआरएल विवरणी- बैंकिंग सांख्यिकी को सुसंगत बनाना” पर दिनांक 4 जनवरी 2018 के परिपत्र बैंविवि.सं.बीपी.बीसी.99/08.13.100/2017-18 में पारिभाषित है।


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