भा.रि.बैंक/2015-16/351
ए.पी. (डीआईआर सीरीज़) परिपत्र सं॰ 57
31 मार्च 2016
सभी प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक
महोदया/ महोदय,
कच्चे, कटे हुए और पॉलिश किए हुए हीरों का आयात
प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंकों का ध्यान 07 जुलाई 2014 के ए.पी.(डीआईआर सीरीज़) परिपत्र सं॰ 2 तथा वस्तु और सेवाओं के आयात विषय पर जारी 01 जनवरी 2016 के मास्टर निदेश सं.17 के पैराग्राफ सं॰सी॰ 12.1 (ए) की ओर आकृष्ट किया जाता है, जिसके अनुसार, प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंकों को कच्चे, कटे हुए और पॉलिश किए हुए हीरों के आयात के लिए क्लीन क्रेडिट, अर्थात विदेशी आपूर्तिकर्ता द्वारा उनके भारतीय ग्राहक/ खरीदार को किसी साखपत्र (आपूर्तिकर्ता से ऋण) / वचनपत्र (क्रेता की साख पर उधार) / किसी भारतीय वित्तीय संस्था से सावधि जमा के बिना पोतलदान की तारीख से 180 दिनों से अनधिक अवधि के लिए क्रेडिट अनुमोदित करने की अनुमति दी गयी थी।
2. आयातकों की परिचालनगत कठिनाइयाँ दूर करने के लिए भारत सरकार के परामर्श से यह निर्णय लिया गया है कि प्राधिकृत व्यापारी बैंकों को पोतलदान की तारीख से 180 दिनों से अधिक अवधि के लिए क्लीन क्रेडिट की अनुमति हेतु निम्नलिखित शर्तों के अधीन शक्तियाँ प्रत्यायोजित की जाएँ:
-
प्राधिकृत व्यापारी बैंकों को ऋण के कारण की यथार्थता और लेनदेन की सदाशयता के बारे में संतुष्टि करनी चाहिए और यह भी देखा जाए कि अतिरिक्त अवधि के लिए लेनदेन में किसी प्रकार के ब्याज भुगतान शामिल न हो ।
-
सामान्य आयातों (जिनके लिए प्राधिकृत व्यापारी बैंकों को लंबित भुगतानों के लिए समय विस्तार के अधिकार पहले ही दिये गये हैं) की तरह ऐसे समय विस्तार वित्तीय कठिनाइयों और /अथवा गुणात्मक विवादों के कारण होने चाहिए।
-
ऐसे समय विस्तार का अनुरोध करने वाला आयातक जांच-पड़ताल के अधीन नहीं है / आयातक के विरूद्ध कोई जांच-पड़ताल की कार्रवाई लंबित नहीं है।
-
समय विस्तार की मांग करने वाला आयातक नियमित उल्लंघनकर्ता न हो। चूंकि यह संभव है कि आयातक एक से अधिक प्राधिकृत व्यापारी बैंकों के साथ लेनदेन करता हो, अतः समय विस्तार की अनुमति देने वाले प्राधिकृत व्यापारी बैंकों को अपने वाणिज्यिक-निर्णय के आधार पर ऐसे मामलों को सुनिश्चित करने के लिए क्रियाविधि विकसित करनी चाहिए।
-
प्राधिकृत व्यापारी बैंक निर्धारित अवधि/तारीख के बाद अधिकतम 180 दिनों तक के समय विस्तार की अनुमति दे सकते हैं, जिसके बाद ऐसे मामले भारतीय रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को संदर्भ हेतु प्रेषित जाएँ।
3. प्राधिकृत व्यापारी बैंक इस तरह दिये गये समय विस्तार की ग्राहक-वार छमाही रिपोर्ट रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत करें।
4॰ संशोधित निदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
5. प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी I – बैंक सुनिश्चित करें कि इन मामलों में यथोचित तत्परता बरती जाए और आयात लेनदेनों से पूर्व रिज़र्व बैंक द्वारा जारी अपने ग्राहक को जानने (केवाईसी) एवं धन शोधन निवारण संबंधी मानदंडों का यथोचित अनुपालन किया गया है। साथ ही, कारोबार की मात्रा में कोई बड़ी या असामान्य वृद्धि दिखाई दें तो उसकी बारीकी से जांच-पड़ताल की जानी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लेनदेन सदाशयी है। कच्चे, कटे हुए और पॉलिश किए हुए हीरों के आयात से संबन्धित अन्य सभी अनुदेश जारी रहेंगे।
6. प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी I बैंक इस परिपत्र की विषयवस्तु से अपने संबन्धित घटकों (Constituents) और ग्राहकों को अवगत कराएं।
7. इस परिपत्र में निहित निर्देश, विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999 (1999 का 42) की धारा 10(4) और 11(1) के अंतर्गत और किसी अन्य विधि के अंतर्गत अपेक्षित किसी अनुमति/ अनुमोदन, यदि कोई हो, पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जारी किए गये हैं।
भवदीय
(ए॰के॰ पाण्डेय)
मुख्य महाप्रबंधक |