मास्टर निदेशों

मास्टर निदेश - गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां लेखा परीक्षक की रिपोर्ट (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016

आरबीआई/डीएनबीएस/2016-17/48
मास्टर निदेश डीएनबीएस पीपीडी.03/66.15.001/2016-17

29 सितंबर, 2016

मास्टर निदेश - गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां लेखा परीक्षक की रिपोर्ट (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016

भारतीय रिज़र्व बैंक, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 45-एमए की उपधारा (1ए) द्वारा प्रदत्त शक्तियों एवं इस संबंध में उसे समर्थ बनाने वाली सभी शक्तियों का प्रयोग करते और "गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी लेखापरीक्षकों की रिपोर्ट (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2008" को अधिक्रमित करते हुए एतद्द्वारा प्रत्येक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के प्रत्येक लेखापरीक्षक को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां लेखा परीक्षक की रिपोर्ट (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 जारी करता है।


सूची
अध्याय I - प्रारंभिक
अध्याय II - लेखा परीक्षक द्वारा निदेशक मंडल को अतिरिक्त रिपोर्ट प्रस्तुत करना
अध्याय III - लेखा परीक्षक द्वारा बैंक को अपवाद रिपोर्ट प्रस्तुत करना
अध्याय IV – निरसन प्रावधान

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त शीर्षक और प्रारंभ

ए) इन निदेशों को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां लेखापरीक्षक की रिपोर्ट (रिज़र्व बैंक) दिशा निर्देश, 2016 कहा जाएगा।

बी) ये निदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।

2. प्रयोज्यता

ये निदेश भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की 45 आई (एफ) में यथा परिभाषित गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी जिसे इसके बाद गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी कहा गया है,के प्रत्येक लेखापरीक्षक पर लागू होंगे।

अध्याय-II

लेखापरीक्षक अतिरिक्त रिपोर्ट निदेशक बोर्ड को प्रस्तुत करें

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 143 अथवा कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 227 के अंतर्गत लेखापरीक्षक किसी भी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के लेखे की जांच करके, इन निदेशों के लागू होने के दिन से या उसके बाद के किसी भी वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर, रिपोर्ट देने के अलावा वे निम्नलिखित पैराग्राफ 3 एवं 4 में विनिर्दिष्ट मामलों पर कंपनी के निदेशक बोर्ड को अलग से रिपोर्ट देंगे।

3. सामग्री जिन्हें लेखापरीक्षक अपनी रिपोर्ट में शामिल करेंगे

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के लेखाओं पर अपनी रिपोर्ट में लेखापरीक्षक निम्नलिखित मामलों पर विवरण शामिल करेंगे अर्थात-

(ए) सभी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के संबंध में

।. बैंक द्वारा प्रदत्त पंजीकरण के वैध प्रमाण पत्र (सीओआर) के बिना गैर-बैंकिंग वित्तीय गतिविधि का संचालन भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अध्याय V के तहत एक अपराध है । इसलिए, अगर कंपनी भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-आई (ए) में परिभाषित गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान के व्यवसाय में जुड़ी हुई है और बैंक के प्रेस रिलीज़ दिनांक 8 अप्रैल, 1999 डीएनबीआर द्वारा जारी किया निदेश के माध्यम से निर्धारित प्रमुख व्यापार मानदंड (वित्तीय संपत्ति / आय पैटर्न) को पूरा करता है, तो लेखा परीक्षक यह जांच करेगा कि क्या कंपनी ने बैंक से पंजीकरण का प्रमाण पत्र (सीओआर) प्राप्त किया है।

II यदि कंपनी के पास बैंक द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र है तो क्या लागू वित्तीय वर्ष के 31 मार्च को परिसंपत्ति/आय पैटर्न के अनुसार वह उसे रखने की पात्र है।

III क्या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी मास्टर निदेश गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी – प्रणालीगत रूप से गैर महत्वपूर्ण गैर-जमा स्वीकारक कंपनी (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 तथा गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी –प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण गैर जमा स्वीकारक कंपनी और जमा स्वीकारक कंपनी (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 में निर्दिष्ट आवश्यक निवल स्वाधिकृत निधि की आवश्यकता को पूरा कर रही है या नहीं ।

नोट: प्रत्येक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी अपने सांविधिक लेखा परीक्षक से एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेगी कि वह गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्था के कारोबार में लगी हुई है जिसके लिए इसे भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-आईए के तहत पंजीकरण प्रमाण पत्र रखने की आवश्यकता और धारण करने की पात्रता है। इस संबंध में सांविधिक लेखापरीक्षक से 31 मार्च को समाप्त वित्तीय वर्ष के अंत में कंपनी की स्थिति के संदर्भ में प्रमाणपत्र बैलेंस शीट के अंतिम रूप देने की तारीख से एक माह के भीतर और किसी भी मामले में उस वर्ष की 30 दिसंबर गैर-बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय जिसके अधिकार क्षेत्र में गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी में पंजीकृत है, को प्रस्तुत किया जाना है । एनबीएफसी द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले सांविधिक लेखापरीक्षक प्रमाणपत्र (एसएसी) का प्रारूप डीएनबीएस. पीपीडी.02/66.15.001/2016-17 मास्टर निदेश - गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी विवरणियाँ (रिजर्व बैंक) निदेश, 2016 द्वारा जारी किया गया है।

(बी) जनता की जमाराशियां स्वीकार करनेवाली/ रखनेवाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के मामले में

ऊपर (ए) में उल्लिखित मामलों के अलावा लेखापरीक्षक निम्नलिखित मामलों पर अलग से एक विवरण शामिल करेगा, यथा -

(i) क्या कंपनी द्वारा स्वीकार की गई जनता की जमाराशियाँ नीचे दर्शाए गए अन्य उधारों के साथ हैं, अर्थात्

(ए) जनता से प्रतिभूति-रहित अपरिवर्तनीय डिबेंचरों/बांडों के निर्गम द्वारा;

(बी) (किसी पब्लिक लिमिटेड कंपनी द्वारा) अपने शेयर धारकों से और

(सी) अन्य प्रकार की कोई जमाराशि जिसे गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी जनता से जमाराशि स्वीकरण (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 में दी गई 'जनता की जमाराशि' की परिभाषा से बाहर नहीं रखा गया है । गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी जनता से जमाराशि स्वीकरण (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 में दिए गए उपबंधों के अनुसार कंपनी के लिए स्वीकार्य सीमाओं के भीतर हैं;

(ii) क्या कंपनी द्वारा रखी गई जनता की जमाराशियां गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी जनता की जमाराशि स्वीकरण (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 के उपबंधों के अंतर्गत अनुमत मात्रा से अधिक होने पर उन्हें इन निदेशों में बताए गए तरीके से नियमित किया गया है;

(iii) क्या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी जनता से जमाराशि स्वीकरण (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 किसी निवेश कंपनी या ऋण कंपनी किसी अनुमोदित रेटिंग एजेंसी से न्यूनतम रेटिंग प्राप्त किए बिना जनता से जमाराशियाँ स्वीकार कर रही है;

(iv) क्या भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत की गयी विवरणी में यथाघोषित पूंजी पर्याप्तता अनुपात, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी –प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण गैर जमा स्वीकारक कंपनी और जमा स्वीकारक कंपनी (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 के अनुसार, सही निर्धारित किया गया है और क्या यह अनुपात उसमें निर्धारित जोखिम भारित परिसंपत्तियों की तुलना में न्यूनतम पूंजी के अनुपात का अनुपालन करता है;

(v) उल्लिखित खंड (iii) में संदर्भित गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों

(ए) जिसकी प्रत्येक सावधि योजना जिसे गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी जनता से जमाराशि स्वीकरण (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 में सूचीबद्ध क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों में से किसी एक से रेटिंग मिली है - प्रभावी है; और

(बी) क्या वर्ष के दौरान किसी भी समय बकाया जमाराशियों का सकल योग ऐसी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा विनिर्दिष्ट सीमा से अधिक था;

(vi) क्या कंपनी ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां सार्वजनिक जमा का स्वीकृति (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 के अंतर्गत सार्वजनिक जमा की स्वीकृति पर किसी भी प्रतिबंध का उल्लंघन किया है।

(vii) क्या कंपनी द्वारा अपने जमाकर्ताओं की जमाराशियों पर ब्याज और/ अथवा मूलधन देय होने के बाद ब्याज और/अथवा मूलधन की राशि के भुगतान में चूक हुई;

(viii) क्या कंपनी ने मास्टर निदेश – गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी –प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण गैर जमा स्वीकारक कंपनी और जमा स्वीकारक कंपनी (रिज़र्वबैंक) निदेश, 2016 के अनुसार भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निदेशों में निर्दिष्ट किए गए अनुसार आय निर्धारण, लेखा मानकों, परिसंपत्ति वर्गीकरण, अशोध्य और संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधानीकरण और ऋण/निवेशों के संकेंद्रण से संबंधित विवेकपूर्ण मानदंडों का अनुपालन किया है;

(ix) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम की धारा 45-आईबी के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बैंक द्वारा निर्धारित तरल आस्ति अपेक्षाओं का क्या कंपनी ने अनुपालन किया है और किसी नामित बैंक में अनुमोदित प्रतिभूतियों को रखने की सूचना बैंक के संबंधित कार्यालय को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी विवरणियाँ (रिज़र्व बैंक) निदेश 2016 के अनुसार अपेक्षित एनबीएस-3 में दी है ।

(x) क्या कंपनी ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी विवरणियाँ (रिज़र्व बैंक) निदेश 2016 के अनुसार अपेक्षित एनबीएस-1 में विनिर्दिष्ट जमाराशियों से संबंधित विवरणी नियत अवधि के भीतर रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत की है;

(xi) क्या कंपनी ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी विवरणियाँ (रिज़र्व बैंक) निदेश 2016 में विनिर्दिष्ट विवेकपूर्ण मानदंडों पर नियत अवधि के भीतर भारतीय रिज़र्व बैंक को तिमाही विवरणी प्रस्तुत की है;

(xii) क्या कंपनी ने जमाराशियों की वसूली के लिए नई शाखाएं अथवा नए कार्यालय खोले जाने या मौजूदा शाखाएं/कार्यालय बंद किए जाने या एजेंट की नियुक्ति के मामले में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी जनता की जमाराशि स्वीकरण (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 में अंतर्विष्ट अपेक्षाओं का अनुपालन किया है।

(सी) जनता की जमाराशियां स्वीकार न करने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी के मामले में

ऊपर (ए) में गिनाये गये पहलुओं के अलावा, लेखापरीक्षक निम्नलिखित विषयों पर एक विवरण शामिल करेगा, यथाः

(i) क्या निदेशक मंडल ने जनता की जमाराशि स्वीकार नहीं करने के लिए कोई संकल्प पारित किया है।

(ii) क्या कंपनी ने संबंधित अवधि/वर्ष के दौरान जनता की कोई जमाराशि स्वीकार की है; और

(iii) क्या कंपनी ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी –प्रणालीगत रूप से गैर-महत्वपूर्ण गैर जमा स्वीकारक कंपनी (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी –प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण गैर-जमा स्वीकारक कंपनी और जमा स्वीकारक कंपनी (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 के अनुसार आय निर्धारण, लेखा मानकों, परिसंपत्ति वर्गीकरण और अशोध्य तथा संदिग्ध ऋणों हेतु प्रावधान करने संबंधी विवेकपूर्ण मानदंडों का अनुपालन किया है, जो कि उस पर लागू होते हैं।

(iv) गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी –प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण गैर-जमा स्वीकारक कंपनी और जमा स्वीकारक कंपनी (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 में यथापरिभाषित संपूर्ण प्रणाली की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण जमाराशियाँ न स्वीकार करने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के संबंध में –

(ए) क्या एनबीएस-7 में बैंक को प्रस्तुत की गई विवरणी में प्रकट किया गया पूंजी पर्याप्तता अनुपात सही आकलित किया गया है और क्या यह अनुपात बैंक द्वारा जोखिम भारित परिसंपत्तियों की तुलना में न्यूनतम पूंजी अनुपात के विनिर्देशन का अनुपालन करता है;

(बी) क्या कंपनी ने पूंजी निधियों, जोखिम परिसपंत्तियों/जोखिमों तथा जोखिम परिसंपत्ति अनुपात (एनबीएस 7) का वार्षिक विवरण बैंक को विनिर्दिष्ट अवधि में प्रस्तुत किया है।

(v) क्या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी- गैर-प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण गैर-जमा स्वीकारक कंपनी (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी - प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण गैर -जमा स्वीकारक और जमा स्वीकारक कंपनी (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 में परिभाषित किए अनुसार एनबीएफसी माइक्रो फाइनेंस संस्थान (एमएफआई) के रूप में सही रूप से वर्गीकृत किया गया है।

(डी) गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्था के कारोबार में लगी किन्तु कतिपय शर्तों के अंतर्गत जिन्हें पंजीकरण प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है ऐसी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के मामले में

ऊपर (ए)(I) में दिए गये पहलुओं (मामलों) के अलावा जहाँ कंपनी ने बैंक से खास सूचना प्राप्त की है कि उसे बैंक से पंजीकरण प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है, लेखापरीक्षक इस आशय का विवरण शामिल करेगा कि कंपनी बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट शर्तों का अनुपालन कर रही हैः

4. प्रतिकूल या सशर्त विवरणों के लिए कारण बताए जाएं

जहाँ लेखापरीक्षक की रिपोर्ट में पैराग्राफ 3 की किसी मद के संबंध में प्रतिकूल या सशर्त विवरण हो, वहाँ रिपोर्ट में प्रतिकूल या सशर्त विवरण, जैसा भी मामला हो, के कारणों का भी उल्लेख होना चाहिए। जहाँ लेखापरीक्षक पैराग्राफ 3 की किसी मद के संबंध में अपनी राय देने में असमर्थ हो, वहाँ उसे ऐसे तथ्य, कारणों सहित रिपोर्ट में देने चाहिए।

अध्याय- III

लेखा परीक्षकों बैंक को अपवाद रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे

5. रिज़र्व बैंक को अपवादात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का लेखापरीक्षक का दायित्व

I. जहाँ किसी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के मामले में उल्लिखित पैराग्राफ 3 की मदों के बारे में प्रतिकूल या अपवादात्मक विवरण हो या लेखापरीक्षक की राय में कंपनी ने निम्नलिखित के संबंध में अनुपालन न किया हो:

(ए) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अध्याय III के उपबंध; या

(बी) गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी जनता की जमाराशि स्वीकरण (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016; या

(सी) गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी –प्रणालीगत रूप से गैर-महत्वपूर्ण गैर-जमा स्वीकारक कंपनी (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी –प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण गैर-जमा स्वीकारक कंपनी और जमा स्वीकारक कंपनी (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 लेखापरीक्षक का यह दायित्व होगा कि वह ऐसी कंपनी के संबंध में, जैसा भी मामला हो, प्रतिकूल या सशर्त विवरण और/ या अननुपालन के बारे में गैर-बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग के उस क्षेत्रीय कार्यालय को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा जिसके अधिकार-क्षेत्र में कंपनी का पंजीकृत कार्यालय, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी जनता की जमाराशि स्वीकरण (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 की प्रथम अनुसूची के अनुसार, आता हो।

II. उल्लिखित उप पैराग्राफ (I) के अंतर्गत लेखापरीक्षक का कर्तव्य होगा कि वह उक्त उप पैराग्राफ (I) में अंकित भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के उपबंधों, तथा निदेशों, मार्गदर्शी सिद्धांतों, अनुदेशों के उल्लंघनों के बारे में ही रिपोर्ट करे एवं उनमें से किए गए अनुपालनों का उल्लेख ऐसी रिपोर्ट में न करे।

अध्याय IV

निरसन प्रावधान

6. इन निर्देशों के जारी करने पर, बैंक के द्वारा जारी किए गए परिशिष्ट में उल्लिखित परिपत्र में निहित अनुदेश/दिशानिर्देश निरस्त हो जाते हैं।

7. उक्त उल्लिखित परिपत्र के तहत दिए गए सभी अनुमोदन / स्वीकरण, इन निदेशों के अनुसार दिए गए माने जाएंगे।

8. इसके बादे उल्लिखित निरस्त परिपत्र के बारे में यह जाना जाएगा कि इन निदेशों के प्रभाव में आने से पहले प्रभाव में थे।


परिशिष्ट

मास्टर निदेश के जारी करने के साथ निरस्त परिपत्र या उसके हिस्से की सूची

क्रमांक परिपत्र सं। और दिनांक विषय
1 डीएनबीएस (पीडी) 201 / डीजी (वीएल) / 2008 दिनांक 18 सितंबर 2008 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां लेखा परीक्षक की रिपोर्ट (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2008

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