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मास्टर निदेश - विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 के अंतर्गत अचल संपत्ति का अधिग्रहण तथा अंतरण

भा.रि.बैंक/विमुवि/2015-16/7
विमुवि मास्टर निदेश सं.12/2015-16

1 जनवरी 2016
(04 फरवरी 2016 तक अद्यतन)

सभी प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंक और प्राधिकृत बैंक

महोदया / महोदय

मास्टर निदेश - विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999
के अंतर्गत अचल संपत्ति का अधिग्रहण तथा अंतरण

भारत से बाहर के भारतीय निवासियों और भारत में अनिवासियों द्वारा अचल संपत्ति का अधिग्रहण और अंतरण 121 जनवरी 2016 की अधिसूचना सं. फेमा 7(आर)/2015-आरबी और 3 मई 2000 की अधिसूचना सं. फेमा 21/2015-आरबी के साथ पठित विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 की धारा 6 की उप-धारा (3), (4) और (5) के अनुसार विनियमित किया जाता है। इन विनियमों में विनियामक ढाँचे में हुए परिवर्तनों को अंतर्निहित करने के लिए समय-समय पर संशोधन किया जाता है और संशोधित अधिसूचनाओं के जरिए इन परिवर्तनों को प्रकाशित किया जाता है।

2. भारतीय रिज़र्व बैंक इन विनियमों की रूपरेखा के भीतर विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 की धारा-11 के अंतर्गत प्राधिकृत व्यक्तियों को निदेश भी जारी करता है। ये निदेश प्राधिकृत व्यक्तियों द्वारा विनियमों के कार्यान्वयन को ध्यान में रखते हुए अपने ग्राहकों/ घटकों के साथ किए जाने वाले विदेशी मुद्रा कारोबार के तौर-तरीके निर्धारित करते हैं।

3. इस मास्टर निदेश में अचल संपत्ति का अधिग्रहण तथा अंतरण विषय पर जारी अनुदेशों को समेकित किया गया है। इस मास्टर निदेश के आधार स्वरूप निहित परिपत्रों/ अधिसूचनाओं की सूची परिशिष्ट में दी गयी है। रिपोर्टिंग अनुदेश, रिपोर्टिंग पर मास्टर निदेश में पाये जा सकते हैं (1 जनवरी 2016 के मास्टर निदेश सं. 18)।

4. यह नोट किया जाए कि जब कभी आवश्यक हो, रिज़र्व बैंक विनियमों में अथवा प्राधिकृत व्यक्तियों द्वारा उनके ग्राहकों/ घटकों के साथ किए जाने वाले लेनदेनों के तरीके में किसी परिवर्तन के संबंध में ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्रों के जरिए प्राधिकृत व्यक्तियों को निदेश जारी करेगा। साथ ही इस विषय पर जारी मास्टर निदेश में भी साथ-साथ यथोचित संशोधन किया जाएगा।

भवदीय

(ए॰ के॰ पाण्डेय)
मुख्य महाप्रबंधक

*चूंकि इस मास्टर निदेश में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं, अत: परिवर्तन पाठकों की सुविधा के लिए ट्रैक मोड में दिखने से प्रतिस्थापित किए गए हैं। ये परिवर्तन मास्टर निदेश के अंत में सूचीबद्ध किए गए हैं।


2मास्टर निदेश 12/2015-16 - विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 के अंतर्गत अचल संपत्ति का अधिग्रहण तथा अंतरण

भाग – I भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा भारत से बाहर अचल संपत्ति का अधिग्रहण और अंतरण

1.प्रस्तावना

1.1 विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) रिज़र्व बैंक को भारत में निवासी व्यक्तियों द्वारा भारत से बाहर अचल संपत्ति के अधिग्रहण अथवा अंतरण को रोकने, प्रतिबंधित करने अथवा नियंत्रित करने के लिए विनियम तैयार करने का अधिकार देता है। भारत से बाहर अचल संपत्ति के अधिग्रहण और अंतरण को नियंत्रित करने वाले विनियम, समय-समय पर यथा संशोधित, 321 जनवरी 2016 की अधिसूचना सं. फेमा 7(आर)/2015-आरबी के तहत अधिसूचित किये गये हैं।

1.2 भारत में निवासी कोई व्यक्ति, यदि फेमा अथवा उसके तहत बनाए गए विनियमों के अंतर्गत अनुमति प्राप्त है, तो अथवा रिज़र्व बैंक की सामान्य अथवा विशेष अनुमति से भारत से बाहर संपत्ति अर्जित कर सकता है। तथापि, ये प्रतिबंध भारत में निवासी किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा धारित संपत्ति के लिए लागू नहीं हैं जो किसी विदेशी राज्य का राष्ट्रिक (नागरिक) है अथवा भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा 8 जुलाई 1947 को अथवा उससे पहले संपत्ति अधिग्रहीत की गई है और जिसे वह रिज़र्व बैंक की अनुमति से लगातार धारण किए रहा है। ये प्रतिबंध पाँच वर्षों से अनधिक लीज पर भारत में निवासी व्यक्ति द्वारा भारत से बाहर संपत्ति के अधिग्रहण पर लागू नहीं हैं।

2. परिभाषाएं

विनियमों की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नानुसार हैं:

2.1 किसी व्यक्ति के संबंध में “रिश्तेदार” का तात्पर्य उसके पति/ उसकी पत्नी, भाई, अथवा बहन अथवा रिश्ते के सीधे क्रम में पूर्ववर्ती अथवा उत्तरवर्ती वंशज/जों (lineal ascendant or descendant) से है।

2.2 ‘उदारीकृत विप्रेषण योजना (LRS)’ यह निवासी व्यक्तियों के लिए उदारीकृत विप्रेषण योजना पर मास्टर निदेश में उल्लिखित शर्तों के अनुसार भारत से बाहर विप्रेषण करने के लिए उपलब्ध सुविधा है।

3. किसी निवासी द्वारा भारत से बाहर संपत्ति अर्जन के तौर-तरीके

3.1 विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) की धारा 6(4) के अनुसार, भारत में निवासी कोई व्यक्ति भारत से बाहर स्थित अचल संपत्ति धारित कर सकता है, अपने स्वामित्व में रख सकता है, अंतरित कर सकता है अथवा परिसंपत्ति में निवेश कर सकता है, यदि इस प्रकार की संपत्ति जब वह भारत से बाहर निवास करता था/थी तब उसने प्राप्त की थी, धारित की थी, अथवा उसके स्वामित्व में थी अथवा भारत से बाहर निवासी किसी व्यक्ति से विरासत में प्राप्त हुई थी ।

3.2 निवासी व्यक्ति निम्नलिखित से उपहार के रूप में अथवा विरासत में भारत से बाहर अचल संपत्ति अर्जित कर सकता है :

(ए) उपर्युक्त 3.1 में उल्लिखित व्यक्ति; अथवा

(बी) भारत में निवासी किसी व्यक्ति जिसने 8 जुलाई 1947 को अथवा उससे पहले संपत्ति अधिग्रहीत की थी और जिसे वह रिज़र्व बैंक की अनुमति से लगातार धारण किए रहा है।

(सी) 4भारत में निवासी कोई व्यक्ति जिसने ऐसी संपत्ति उसके अर्जन के समय यथा लागू विदेशी मुद्रा प्रावधानों के अनुसार अधिग्रहीत की हो।

3.3 निवासी व्यक्ति अपनी निवासी विदेशी मुद्रा (RFC) खातेगत विदेशी मुद्रा से भारत से बाहर अचल संपत्ति अर्जित कर सकता है।

3.4 5निवासी किसी रिश्तेदार, जो भारत से बाहर का निवासी व्यक्ति हो, के साथ संयुक्त रूप में भारत से बाहर अचल संपत्ति अर्जित कर सकता है बशर्ते एतदर्थ भारत से बाहर निधियों प्रवाह/ विप्रेषण न हो।

6[**]

4. उदारीकृत विप्रेषण योजना (LRS) के अंतर्गत अधिग्रहण

निवासी व्यक्ति भारत से बाहर अचल संपत्ति की खरीद करने के लिए उदारीकृत विप्रेषण योजना के तहत विप्रेषण प्रेषित कर सकता है।

5. कंपनियाँ, जिनके समुद्रपारीय कार्यालय हैं

भारत में निगमित कोई कंपनी, जिसके समुद्रपारीय कार्यालय हों, वह अपने व्यवसाय और अपने स्टाफ के आवासीय प्रयोजनों के लिए भारत से बाहर अचल संपत्ति का अर्जन (अधिग्रहण) कर सकती है, बशर्ते तत्संबंध में किए जाने वाले विप्रेषण प्रारंभिक एवं आवर्ती खर्चों के लिए क्रमश: 7निम्नलिखित सीमाओं से अधिक नहीं होंगे:

ए) विगत दो वित्तीय वर्षों के दौरान भारतीय एंटिटी की औसत वार्षिक बिक्री/आय अथवा पण्यावर्त के 15% अथवा निवल मालियत के 25%, में से जो भी उच्चतर हो;

बी) विगत दो वित्तीय वर्षों के दौरान भारतीय एंटिटी की औसत वार्षिक बिक्री/ आय अथवा पण्यावर्त के 10%।

भाग II - भारत में अचल संपत्ति का अधिग्रहण और अंतरण

1. प्रस्तावना

1.1 विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) रिज़र्व बैंक को भारत से बाहर के निवासी व्यक्तियों द्वारा भारत में अचल संपत्ति के अधिग्रहण अथवा अंतरण को रोकने, प्रतिबंधित करने अथवा नियंत्रित करने के लिए विनियमों को बनाने का अधिकार देता है। भारत में अचल संपत्ति के अधिग्रहण और अंतरण को नियंत्रित करने वाले विनियम, समय-समय पर यथा संशोधित, 3 मई 2000 की अधिसूचना फेमा सं.21/2000-आरबी के तहत अधिसूचित किये गये हैं। ये प्रतिबंध पाँच वर्षों से अनधिक लीज पर भारत से बाहर के निवासी व्यक्ति द्वारा भारत में अचल संपत्ति के अधिग्रहण अथवा अंतरण पर लागू नहीं हैं।

1.2 विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) की धारा 6(5) के अनुसार, भारत से बाहर का निवासी व्यक्ति भारत में स्थित अचल संपत्ति धारित कर सकता है, स्वामित्व में रख सकता है, अंतरित कर सकता है अथवा किसी अचल संपत्ति में निवेश कर सकता है, यदि इस प्रकार की संपत्ति जब वह भारत का निवासी था तब उसने प्राप्त की थी, धारित की थी, अथवा उसके स्वामित्व में थी अथवा भारत के निवासी व्यक्ति से विरासत में प्राप्त हुई थी ।

2. परिभाषाएं

विनियमों की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नानुसार हैं:

‘अनिवासी भारतीय’ जो भारत से बाहर का निवासी और भारत का नागरिक है।

‘भारतीय मूल के व्यक्ति’ का तात्पर्य उस व्यक्ति से है (जो पाकिस्तान अथवा बांगलादेश अथवा श्रीलंका अथवा अफगानिस्तान अथवा चीन अथवा ईरान अथवा नेपाल अथवा भूटान का नागरिक न हो) जिसके पास किसी भी समय भारतीय पासपोर्ट रहा हो; अथवा कोई व्यक्ति अथवा उसके पिता अथवा माता में से कोई अथवा उसके दादा/नाना अथवा दादी/नानी (grandmother or grandfather) में से कोई भारत के संविधान अथवा नागरिकता अधिनियम, 1955 (1955 का 57) की हैसियत से भारत के नागरिक थे।

‘भारत के बाहर से प्रत्यावर्तन’ का अर्थ है कि भारत में किसी प्राधिकृत व्यापारी से विदेशी मुद्रा खरीदना अथवा आहरित करना तथा बैंकिंग चैनलों के जरिए उसे भारत से बाहर विप्रेषित करना अथवा किसी प्राधिकृत व्यापारी के पास रखे गए विदेशी मुद्रा में मूल्यवर्गीकृत खाते में अथवा भारतीय मुद्रा में खाते में जमा करना जिसमें से वह विदेशी मुद्रा में परिवर्तित की जा सके।

2.4 ‘अंतरण’ में बिक्री, खरीद, बंधक, विनिमय, गिरवी रखना, उपहार, ऋण, अथवा हस्तांतरण का कोई अन्य रूप, विलेख, कब्जा अथवा धारणाधिकार शामिल हैं।

3. अनिवासी भारतीय द्वारा अधिग्रहण/अंतरण

3.1 अचल संपत्ति की खरीद

अनिवासी भारतीय भारत में अचल संपत्ति (कृषि भूमि/बागवानी संपत्ति/फार्म हाउस को छोड़कर) को खरीद के मार्फत अर्जित कर सकता है।

3.2 अचल संपत्ति का अंतरण

(ए) अनिवासी भारतीय भारत में किसी निवासी व्यक्ति को अचल संपत्ति अंतरित कर सकता है;

(बी) अनिवासी भारतीय भारत से बाहर के किसी अनिवासी भारतीय नागरिक अथवा भारत से बाहर के निवासी भारतीय मूल के व्यक्ति को अचल संपत्ति (कृषि भूमि/ बागवानी संपत्ति/ फार्म-हाउस को छोड़कर) अंतरित कर सकता है।

3.3 अचल संपत्ति के अधिग्रहण के लिए भुगतान

(ए) अनिवासी भारतीय अचल संपत्ति (कृषि भूमि/ बागवानी संपत्ति/ फार्म-हाउस को छोड़कर) के अधिग्रहण के लिए भुगतान, भारत से बाहर के किसी स्थान से आवक विप्रेषण के रूप में सामान्य बैंकिंग चैनलों के जरिये भारत में प्राप्त निधियों से अथवा अपने अनिवासी विदेशी/ विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक)/ अनिवासी सामान्य खाते में डेबिट कर सकता है।

(बी) ऐसे भुगतान यात्री चेकों द्वारा अथवा विदेशी मुद्रा नोटों द्वारा अथवा उपर्युक्त में विशेष रूप से उल्लिखित को छोड़कर किसी अन्य तरीके से नहीं किये जा सकते हैं।

4. भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO) द्वारा अधिग्रहण/ अंतरण

4.1 अचल संपत्ति की खरीद

भारतीय मूल का व्यक्ति भारत में अचल संपत्ति (कृषि भूमि/ बागबानी संपत्ति/ फार्म-हाउस को छोड़कर) को खरीद के रूप में अर्जित कर सकता है।

4.2 अचल संपत्ति का उपहार/ विरासत में अर्जन

भारत से बाहर के भारतीय मूल का व्यक्ति

(ए) भारत में निवासी किसी व्यक्ति अथवा किसी अनिवासी भारतीय अथवा भारत से बाहर के भारतीय मूल के व्यक्ति से उपहार के रूप में भारत में अचल संपत्ति (कृषि भूमि / बागबानी संपत्ति / फार्म हाउस को छोड़कर) अर्जित कर सकता है।

(बी) भारतीय मूल का व्यक्ति भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति, जिसने उक्त संपत्ति, संपत्ति के अर्जन के समय प्रचलित विदेशी मुद्रा कानून अथवा विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियमगत विनियमावली के प्रावधानों के अनुसार खरीदी थी, से अथवा भारत में निवासी किसी व्यक्ति से विरासत के रूप में भारत में अचल संपत्ति अर्जित कर सकता है।

4.3 अचल संपत्ति का अंतरण

भारतीय मूल का व्यक्ति

(ए) भारत में कोई अचल संपत्ति (कृषि भूमि / फार्म हाउस /बागबानी संपत्ति को छोड़कर) भारत में निवासी किसी व्यक्ति को बिक्री के रूप में अंतरित कर सकता है।

(बी) वह भारत में कृषि भूमि / फार्म हाउस / बागबानी संपत्ति भारत में निवासी किसी व्यक्ति, जो भारत का नागरिक है, को उपहार अथवा बिक्री के रूप में अंतरित कर सकता है।

(सी) वह भारत में रिहायशी अथवा वाणिज्यिक संपत्ति भारत में निवासी किसी व्यक्ति को अथवा किसी अनिवासी भारतीय अथवा भारत से बाहर के निवासी भारतीय मूल के व्यक्ति को उपहार के रूप में अंतरित कर सकता है।

4.4 भारत में अचल संपत्ति के अधिग्रहण के लिए भुगतान

(ए) भारतीय मूल का व्यक्ति भारत में अचल संपत्ति (कृषि भूमि / फार्म हाउस/ बागबानी संपत्ति को छोड़कर) के अधिग्रहण के लिए भुगतान, सामान्य बैंकिंग चैनलों के जरिये आवक विप्रेषण द्वारा प्राप्त निधियों में से खरीद के रूप में अथवा उसके अनिवासी विदेशी/विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक)/अनिवासी सामान्य खाते में नामे डालते हुए कर सकता है।

(बी) ऐसे भुगतान यात्री चेकों द्वारा अथवा विदेशी मुद्रा नोटों द्वारा अथवा उपर्युक्त में विशेष रूप से उल्लिखित को छोड़कर किसी अन्य तरीके से नहीं किए जा सकते हैं।

5. विदेशी दूतावासों/ राजनयिकों/ महा वाणिज्यदूतावासों द्वारा अचल संपत्ति का अधिग्रहण

विदेशी दूतावास/ राजनयिक/ महा वाणिज्यदूतावास भारत में अचल संपत्ति (कृषि भूमि / बागबानी संपत्ति / फार्म हाउस को छोड़कर) की खरीद/ बिक्री कर सकते हैं बशर्ते-

(ए) इस प्रकार की खरीद/ बिक्री के लिए भारत सरकार, विदेश मंत्रालय से मंजूरी (क्लियरंस), तथा

(बी) भारत में अचल संपत्ति के अधिग्रहण के लिए भुगतान सामान्य बैंकिंग चैनलों के जरिये विदेश से विप्रेषित निधियों में से किया जाता है।

6. भारत से बाहर के निवासी व्यक्ति द्वारा अनुमत कार्यकलाप करने के लिए अचल संपत्ति का अधिग्रहण

6.1 भारत से बाहर के निवासी व्यक्ति जिसने भारत में किसी कार्यकलाप को करने के लिए संपर्क कार्यालय को छोड़कर किसी शाखा अथवा कार्यालय की स्थापना की है वह भारत में अचल संपत्ति अर्जित कर सकता है, जो शाखा अथवा कार्यालय द्वारा इस प्रकार के कार्यकलाप करने के लिए आवश्यक तथा प्रासंगिक है।

6.2 उस व्यक्ति को अधिग्रहण की तारीख से नब्बे दिनों के भीतर फॉर्म आईपीआई (रिपोर्टिंग पर मास्टर निदेश में दिए गए अनुसार) में रिज़र्व बैंक को एक घोषणा पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक है।

6.3 वह इस प्रकार अर्जित अचल संपत्ति किसी उधार के लिए प्रतिभूति के रूप में प्राधिकृत व्यापारी को बंधक के रूप में अंतरित कर सकता है।

6.4 तथापि, पाकिस्तान अथवा बांग्लादेश अथवा श्रीलंका अथवा अफगानिस्तान अथवा चीन अथवा ईरान अथवा हांगकांग अथवा मकाऊ अथवा नेपाल अथवा भूटान मूल/राष्ट्रीयता/स्वामित्व की एंटीटीज़ की शाखा, कार्यालय अथवा कारोबार के अन्य स्थान द्वारा भारत में अचल संपत्ति के अधिग्रहण के लिए रिज़र्व बैंक का पूर्वानुमोदन आवश्यक है।

7. अचल संपत्ति की बिक्रीगत आगम राशि का प्रत्यावर्तन

7.1 विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम की धारा 6 की उप-धारा (5) (भाग –II के संदर्भ पैरा 1.2) के अनुसार संपत्ति अर्जित करने वाला कोई व्यक्ति अथवा उसका उत्तराधिकारी रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन के बिना अचल संपत्ति की बिक्रीगत आगम राशि भारत से बाहर प्रत्यावर्तित नहीं कर सकता है। तथापि, यदि ऐसा व्यक्ति अनिवासी भारतीय अथवा भारत से बाहर का निवासी भारतीय मूल का व्यक्ति है तो वह विदेशी मुद्रा प्रबंध (परिसंपत्तियों का विप्रेषण) विनियमावली, 2000 के तहत उपलब्ध सुविधाओं के अंतर्गत विप्रेषण कर सकता है।

7.2 अनिवासी भारतीय अथवा भारत से बाहर के निवासी भारतीय मूल के व्यक्ति द्वारा भारत में कृषि भूमि/ फार्म हाउस/ बागबानी संपत्ति को छोड़कर अचल संपत्ति की बिक्री के मामले में, प्राधिकृत व्यापारी बिक्रीगत आगम राशि भारत से प्रत्यावर्तित करने के लिए अनुमति दे सकता है, बशर्ते निम्नलिखित शर्तों को पूर्ण किया जाता हो, अर्थात:

(ए) विक्रेता द्वारा अचल संपत्ति, अधिग्रहण के समय लागू विदेशी मुद्रा के प्रावधानों अथवा विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत में अचल संपत्ति का अधिग्रहण तथा अंतरण) विनियमावली, 2000 के प्रावधानों के अनुसार अर्जित की गयी थी;

(बी) प्रत्यावर्तित की जाने वाली राशि सामान्य बैंकिंग चैनलों के जरिए प्राप्त विदेशी मुद्रा में अचल संपत्ति के अधिग्रहण के लिए अदा की गयी राशि, अथवा विदेशी मुद्रा अनिवासी खाते में धारित निधियों से अथवा अनिवासी बाह्य खाते में धारित निधियों से अधिक नहीं होनी चाहिए।

यदि किसी अनिवासी भारतीय/भारतीय मूल के व्यक्ति द्वारा भारत में अचल संपत्ति की खरीद समय-समय पर यथा संशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (रुपयों में उधर लेना और देना) विनियमावली, 2000 के अनुसार लिए गए आवास ऋणों में से की गई है और ऐसे ऋणों की चुकौती बैंकिंग चैनलों के जरिए विदेश से प्राप्त विप्रेषणों में से की जाती है अथवा अनिवासी भारतीय के अनिवासी बाह्य खाते/ विदेशी मुद्रा अनिवासी खाते में नामे डालते हुए की जाती है तो ऐसी चुकौती प्राप्त विदेशी मुद्रा के समतुल्य समझी जा सकती है।

(सी) रिहायशी संपत्ति के मामले में, बिक्रीगत आगम राशि का प्रत्यावर्तन इस प्रकार की दो संपत्तियों तक सीमित है।

8. कतिपय देशों के नागरिकों द्वारा भारत में अचल संपत्ति के अधिग्रहण (अर्जन) अथवा अंतरण पर प्रतिबंध

ऐसा कोई व्यक्ति जो पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान, चीन, ईरान, नेपाल, भूटान, मकाऊ, अथवा हांगकांग का नागरिक है, रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन के बिना भारत में, पाँच वर्षों से कम अवधि के लिए अचल संपत्ति पट्टे पर लेने के सिवाय कोई अन्य अचल संपत्ति अर्जित अथवा अंतरित नहीं कर सकता है।

9. विविध

9.1 प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी –I बैंक भारत में निवासी किसी व्यक्ति की अचल संपत्ति पर निम्नलिखित शर्तों पर बाह्य वाणिज्यिक उधार (ECB) ऋणदाता अथवा सुरक्षा ट्रस्टी के पक्ष में प्रभार सृजित करने के लिए अनापत्ति सूचित कर सकते हैं:

(ए) ‘अनापत्ति’ किसी निवासी ECB उधारकर्ता को ही प्रदान की जाएगी;

(बी) अचल संपत्ति पर ऐसे प्रभार की अवधि अंतर्निहित ECB की परिपक्वता के साथ सह- टर्मिनस होनी चाहिए;

(सी) ऐसी ‘अनापत्ति’ समुद्रपारीय ऋणदाता / सुरक्षा ट्रस्टी द्वारा भारत में अचल संपत्ति अर्जित करने के लिए अनुमति के रूप में नहीं समझी जाएगी;

(डी) प्रभार के लागू करने/ प्रवर्तित करने संबंधी मामले में, अचल संपप्ति की बिक्री भारत में निवासी किसी व्यक्ति को ही करनी होगी और बिक्रीगत आगम राशि बकाया ECB के समापन के लिए प्रत्यावर्तित की जाएगी।

9.2 इन निदेशों के तहत न आनेवाले संपत्ति के किसी अंतरण के लिए रिज़र्व बैंक का पूर्वानुमोदन आवश्यक होगा।

9.3 भारत सरकार की 1 फरवरी 2009 की प्रेस प्रकाशनी (संलग्नक में दी गई) के अनुसार भारत में निवासी व्यक्ति के रूप में समझे जाने के लिए उस व्यक्ति को न केवल रहने की अवधि की शर्त (पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान 182 दिनों से अधिक होने के कारण) पूर्ण करनी है बल्कि उसके रहने का प्रयोजन साथ ही उसे प्रदान किया गया भारतीय वीज़ा का प्रकार तथा अनिश्चित अवधि के लिए भारत में रहने का उसका उद्देश्य स्पष्ट रूप से दर्शाना चाहिए। इस संबंध में रहने के उद्देश्य से पात्र बनने के लिए वीज़ा सहित समर्थनकारी दस्तावेज स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

10. करों का भुगतान – इन विनियमों के अंतर्गत अचल संपत्ति के अर्जन वाला लेनदेन भारत में लागू कर कानूनों के तहत आएगा।


परिशिष्ट

इस मास्टर परिपत्र में समेकित अधिसूचनाओं/ए.पी.(डीआइआर सीरीज़) परिपत्रों की सूची

अधिसूचना/ परिपत्र दिनांक
फेमा 21/2000–आरबी 3 मई 2000
फेमा 65/2002–आरबी 29 जून 2002
फेमा 93/2003–आरबी 9 जून 2003
फेमा 146/2006–आरबी 10 फरवरी 2006
फेमा 200/2009–आरबी 5 अक्तूबर 2009
फेमा 321/2014-आरबी 26 सितंबर 2014
फेमा 335/2015-आरबी 4 फरवरी 2015
8फेमा 7(आर)/2015-आरबी 21 जनवरी 2016
ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं.35 1 नवंबर 2002
ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं.19 23 सितंबर 2003
ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं.5 16 अगस्त 2006
ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं.1 11 जुलाई 2008
ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं.25 13 जनवरी 2010
ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 38 20 नवंबर 2014
ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 83 11 मार्च 2015
ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 43 4 फरवरी 2016

संलग्नक

भारत सरकार की प्रेस प्रकाशनी

वित्त मंत्रालय

1 फरवरी 2009

भारत के बाहर के निवासी व्यक्तियों द्वारा भूमि अर्जन करने के संबंध में सरकार का परामर्श

15:08 भारतीय मानक समयानुसार

भारत सरकार ने राज्य सरकारों को भारत के बाहर निवासी व्यक्तियों द्वारा भारत में अचल संपत्ति के अधिग्रहण तथा अंतरण के मामलों में अधिक सतर्क रहने के लिए तथा भारत में अचल संपत्ति की बिक्री अथवा खरीद के पंजीकरण से पहले फेमा के तहत पात्रता के संबंध में उनके संतुष्ट होने के लिए सूचित किया है। इच्छुक खरीददार तथा विक्रेता, दोनों पूछताछ में शामिल हैं। इस प्रकार की बिक्री/ खरीद के पंजीकरण से पूर्व संबंधित यात्रा दस्तावेज तथा वीज़ा के प्रकार का भी सत्यापन किया जाए। इसके अतिरिक्त, सरकार ने राज्य सरकारों के सभी संबंधित प्राधिकारियों को सूचित किया है कि जहाँ यथोचित समझें, प्राधिकारी विधिक अपेक्षाओं के साथ उनके अनुपालन निर्धारित करने के लिए पहले ही किये गये बिक्री/ खरीद के पंजीकरण की पुनरीक्षा करने पर विचार कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, अचल संपत्ति अर्जित करनेवाले व्यक्तियों को राज्य प्राधिकरणों द्वारा निर्धारित की गयी अपेक्षाओं, यदि कोई हो, को पूर्ण करना होगा।

किसी विदेशी कंपनी, जिसने विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत में शाखा अथवा कार्यालय अथवा कारोबार के अन्य स्थान की स्थापना) विनियमावली, 2000 (3 मई 2000 की अधिसूचना फेमा 22/2000-आरबी) के प्रावधानों के तहत भारत में शाखा कार्यालय अथवा अन्य कारोबारी स्थल की स्थापना की है, वे भारत में अचल संपत्ति अर्जित कर सकती है जो इस प्रकार के कार्यकलाप करने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत में अचल संपत्ति का अधिग्रहण तथा अंतरण) विनियमावली, 2000 के विनियम 5 में (3 मई 2000 की अधिसूचना सं. 21/2000-आरबी) निर्धारित शर्त के अधीन आवश्यक अथवा प्रासंगिक है।

उपर्युक्त के अतिरिक्त, कोई विदेशी राष्ट्रिक (नागरिक) जो नौकरी करने अथवा कारोबार/ व्यवसाय करने अथवा किसी अनिश्चित अवधि के लिए रहने के उसके उद्देश्य को दर्शाते हुए किसी अन्य प्रयोजन के लिए पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष की अवधि के दौरान 182 दिनों से अधिक अवधि के लिए भारत में रहता है, भारत में अचल संपत्ति अर्जित कर सकता है क्योंकि इससे वह फेमा, 1999 की धारा 2(v) के अनुसार 'भारत में निवासी व्यक्ति' होगा। फेमा के तहत भारत में निवासी व्यक्ति के रूप में समझे जाने के लिए उस व्यक्ति को न केवल रहने की अवधि की शर्त (पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान 182 दिनों से अधिक होने के कारण) पूर्ण करनी है बल्कि उसके रहने का प्रयोजन साथ ही उसे प्रदान किए गए भारतीय वीज़ा का प्रकार तथा अनिश्चित अवधि के लिए भारत में रहने का उसका उद्देश्य स्पष्ट रूप से दर्शाना चाहिए। इस संबंध में रहने के उद्देश्य से पात्र बनने के लिए वीज़ा सहित समर्थक दस्तावेज स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किए जाने चाहिए।

विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत में अचल संपत्ति का अधिग्रहण तथा अंतरण) विनियमावली, 2000 (3 मई 2000 की अधिसूचना सं. 21/2000-आरबी) में निहित प्रावधानों के अनुसार भारत के बाहर निवासी कोई भारतीय नागरिक और भारत के बाहर निवासी भारतीय मूल का व्यक्ति (PIO) भारत में कृषि भूमि, बागबानी अथवा फार्म-हाउस को छोड़कर अन्य अचल संपत्ति अर्जित कर सकता है।

केंद्र सरकार के ध्यान में यह बात आयी है कि विदेशी राष्ट्रिक (नागरिक) देश के कुछ भागों में, विशेषत: गोवा में अनधिकृत रूप से अचल संपत्ति की खरीद कर रहे हैं, जिससे गंभीर चिंता उत्पन्न हुई है। कई संगठनों तथा सामाजिक समूहों ने इस संबंध में उनकी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार को अभ्यावेदन भी किये हैं। यह भी देखा गया है कि भारत में आनेवाले विदेशी राष्ट्रिक (नागरिक) किसी निश्चित अवधि के लिए जारी पर्यटन अथवा अन्य विज़ा पर 182 दिनों से अधिक अवधि के लिए रहते हुए तथा फेमा के तहत प्रचलित नियमों और विनियमों का उल्लंघन करते हुए भारत में अनधिकृत रूप से अचल संपत्ति अर्जित कर रहे हैं।

बीएससी/बीवाई/जीएन-1/09


1 विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर अचल संपत्ति का अधिग्रहण और अंतरण) विनियमावली, 2000 निरसित की गई और उसके स्थान पर 21 जनवरी 2016 से विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर अचल संपत्ति का अधिग्रहण और अंतरण) विनियमावली, 2015 प्रतिस्थापित की गई।

2 4 फरवरी 2016 तक अद्यतन (4 फरवरी 2016 का ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.43 देखें। मूल मास्टर निदेश 1 जनवरी 2016 को जारी किए गए।

3 विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर अचल संपत्ति का अधिग्रहण और अंतरण) विनियमावली, 2000 निरसित की गई और उसके स्थान पर 21 जनवरी 2016 से विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर अचल संपत्ति का अधिग्रहण और अंतरण) विनियमावली, 2015 प्रतिस्थापित की गई।

4 21 जनवरी 2016 से विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर अचल संपत्ति का अधिग्रहण और अंतरण) विनियमावली, 2015 द्वारा अंतर्निहित।

5 21 जनवरी 2016 से विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर अचल संपत्ति का अधिग्रहण और अंतरण) विनियमावली, 2015 द्वारा अंतर्निहित।

6 21 जनवरी 2016 से विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर अचल संपत्ति का अधिग्रहण और अंतरण) विनियमावली, 2015 द्वारा हटाया गया।हटाए जाने से पहले खंड इस तरह पढ़ा जाता था “ यदि भारत में निवासी व्यक्ति उपर्युक्त में सूचीबद्ध 3.1 से 3.3 तक के प्रावधानों के अनुसार भारत से बाहर अचल संपत्ति अर्जित करता है तो वह उक्त संपत्ति अपने रिश्तेदार, जो भारत में निवासी व्यक्ति है, को उपहार के रूप में अंतरित कर सकता है ।

7 ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.43/2015-16[1/7(आर)] द्वारा अंतर्निहित।अंतर्निहित किए जाने से पहले इस प्रकार पढ़ा जाता था “रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी निदेशों के अनुसार”।

8 21 जनवरी 2016 के जी.एस.आर.95(ई) के जरिए भारत के गज़ट में जारी।


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