मास्टर निदेशों

निजी बैंकों में शेयरों अथवा मताधिकारों के अधिग्रहण के लिए पूर्वानुमोदन : निदेश, 2015

आरबीआई/2015-16/240
मास्टर निदेश सं.डीबीआर.पीएसबीडी.सं.56/16.13.100/2015-16

19 नवंबर 2015

निजी बैंकों में शेयरों अथवा मताधिकारों के
अधिग्रहण के लिए पूर्वानुमोदन : निदेश, 2015

बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 21 तथा 35 क के अधीन प्रदत्त शक्तिर्यों का प्रयोग करते हुए तथा बैंककारी संशोधन अधिनियम, 2012 द्वारा यथासंशोधित बैंककारी अधिनियम, 1949 की धारा 12 ख के अनुसरण में भारतीय रिज़र्व बैंक, इस बात से आश्वस्त होने पर कि ऐसा करना लोकहित में आवश्यक और लाभकारक है, एतद्वारा इसमें इसके बाद विनिर्दिष्ट निदेश जारी करता है।

अध्याय – I
प्रस्तावना

1. लघु शीर्षक और आरंभ

(a) इन निदेशों को भारतीय रिज़र्व बैंक (निजी बैंकों में शेयरों अथवा मताधिकारों के अधिग्रहण के लिए पूर्वानुमोदन) निदेश, 2015 कहा जाएगा।

(b) ये निदेश उस दिन से लागू होंगे, जिस दिन इन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर रखा जाएगा।

2. प्रयोज्यता

इन निदेशों के प्रावधान निजी क्षेत्र के बैंकों के विद्यमान और प्रस्तावित “प्रमुख शेयरधारकों” तथा स्थानीय क्षेत्र बैंकों सहित निजी क्षेत्र के सभी बैंकों पर लागू होंगे, जिन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा भारत में परिचालन करने का लाइसेंस प्रदान किया गया है।

3. परिभाषाएं

(i) इन निदेशों में, जब तक कि संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो, इसमें शब्दों का अर्थ वही होगा, जो उन्हें नीचे प्रदान किया गया है –

(a) “निजी क्षेत्र के बैंक” का आशय है, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 के अधीन भारत में परिचालन के लिए लाइसेंस प्राप्त बैंक, जो शहरी सहकारी बैंक, विदेशी बैंक और विनिर्दिष्ट संविधियों के अधीन लाइसेंसीकृत बैंकों से इतर हैं।

(b) “अधिग्रहण” का आशय है

  • शेयरों, या

  • अनिवार्यतः परिवर्तनीय अधिमानी शेयरों / डिबेंचरों / बाँडों या

  • मताधिकारों के अधिग्रहण का कार्य, या

वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय अधिमानी शेयरों / डिबेंचरों/ बॉन्डों अथवा उक्त के मिश्रण का प्राइवेट बैंक में क्रय या अंतरण द्वारा संपरिवर्तन करना।

(c) “संबंधित बैंक” का अर्थ है, वह बैंक, जिसमें “अधिग्रहण” किया जा रहा है।

(d) “आवेदक” का अर्थ है बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 12 ख के अधीन आवेदन करने वाला व्यक्ति।

(e) “सकल धारिता” का अर्थ है आवेदक, उसके रिश्तेदार, सहयोगी उद्यम या व्यक्ति जो संबंधित बैंक में उसके साथ मिल कर काम करते हैं, के द्वारा “अधिग्रहण” के माध्यम से की गई धारिताओं सहित कुल धारिताएं तथा शेयर या अनिवार्यतः परिवर्तनीय डिबेंचर/ बॉन्ड या मताधिकार। सकल धारिताओं में वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय अधिमानी शेयर / डिबेंचर / बॉन्ड भी शामिल होंगे, यदि परिवर्तन के विकल्प के प्रयोग का प्रस्ताव किया गया हो।

  • अनिवार्यतः परिवर्तनीय अधिमानी शेयर / डिबेंचर / बॉन्ड के मामले में इस संबंध में धारिता की गणना इस प्रकार की जाएगी, मानों परिवर्तन की घटना घटित हो गई है, और इसलिए इन लिखतों की मात्रा को बैंक की “सकल धारिताओं” तथा चुकता शेयर पूंजी में शामिल किया जाएगा।

  • वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय अधिमानी शेयर / डिबेंचर / बॉन्ड के मामले में भी धारिता की गणना उसी प्रकार की जाएगी, जैसा कि अनिवार्यतः परिवर्तनीय अधिमानी शेयर / डिबेंचर / बॉन्ड के लिए बताया गया है, यदि परिवर्तन के विकल्प के प्रयोग का प्रस्ताव किया जाए।

(f) “रिश्तेदार” का अर्थ वही होगा, जैसा कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 (77) और उसके अधीन बनाए गए नियमों में परिभाषित किया गया है।

(g) “सहयोगी उद्यम” का अर्थ वही होगा, जैसा कि बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 12 ख के स्पष्टीकरण 1 (क) में दिया गया है।

(h) “सहमति से कार्य करने वाले व्यक्तियों” का अर्थ वही होगा, जैसा कि बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 12 ख के स्पष्टीकरण 1 (ग) में दिया गया है।

(i) “प्रमुख शेयरधारक” का अर्थ है एक शेयरधारक, जिसके पास बैंक की चुकता शेयर पूंजी के 5 प्रतिशत की सीमा तक या उससे अधिक “सकल धारिता” है/होने की संभावना है या संबंधित बैंक के मताधिकारों का 5 प्रतिशत या उससे अधिक है / होने की संभावना है।

(j) “प्रमुख शेयरधारिता” का अर्थ है “सकल धारिता” जिसका परिणाम यह होगा / हो सकता है कि आवेदक के पास संबंधित बैंक की चुकता शेयर पूंजी के 5 प्रतिशत या उससे अधिक होंगे या वह संबंधित बैंक के कुल मताधिकारों में से 5 प्रतिशत या उससे अधिक का प्रयोग कर सकता है।

(ii) यदि अन्यथा परिभाषित न किया गया हो, तो अन्य सभी अभिव्यक्तियों के अर्थ वही होंगे, जो बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 या भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 या अन्य किसी सांविधिक संशोधन या पुनर्अधिनियमन, यथास्थिति, में दिए गए हों, अथवा जैसा वाणिज्यिक वार्तालाप में प्रयुक्त होता हो।

अध्याय - II
पूर्वानुमोदन पर निदेश

4. प्रत्येक व्यक्ति जो कोई अधिग्रहण करने का इरादा रखता है / अधिग्रहण करने के लिए करार करता है, जिससे ऐसे व्यक्ति की सकल धारिताओं के साथ ही उस व्यक्ति, उसके रिश्तेदार, सहयोगी उद्यम तथा उसके साथ कार्य करने वाले व्यक्तियों द्वारा धारित शेयर / मताधिकार / अनिवार्यतः संपरिवर्तनीय डिबेंचर / बॉन्ड संबंधित बैंक की चुकता शेयर पूंजी के 5 प्रतिशत से अधिक हो जाएं / होने की संभावना हो, अथवा उसे संबंधित बैंक के कुल मताधिकारों के 5 प्रतिशत या उससे अधिक का प्रयोग करने का हकदार बनाता है, को इन निदेशों के अध्याय III और IV में विनिर्दिष्ट तरीके से भारतीय रिज़र्व बैंक से पूर्वानुमोदन लेना होगा।

अध्याय - III
आवेदन की प्रक्रिया

5. आवेदन की प्रक्रिया

5.1 अध्याय II में उल्लिखित प्रत्येक व्यक्ति इन निदेशों की अनुसूची में विनिर्दिष्ट फॉर्म ए में घोषणापत्र के साथ भारतीय रिज़र्व बैंक को आवेदन करेगा।

5.2 आवेदक से आवेदन और घोषणापत्र प्राप्त होने पर रिज़र्व बैंक संबंधित बैंक से अधिग्रहण पर सिफारिशें प्राप्त करेगा।

5.3 रिज़र्व बैंक से संदर्भ प्राप्त होने पर संबंधित बैंक का बोर्ड सभी संबंधित पहलुओं पर विचार करने के बाद संबंधित बोर्ड के संकल्प की प्रतिलिपि के साथ अपनी सिफारिशें तथा अनुसूची में विनिर्दिष्ट फॉर्म सी में जानकारी भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत करेगा। विचारणीय पहलुओं की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव न डालते हुए संबंधित बैंक का बोर्ड आवेदन, आवेदक द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी, तथा उसकी अपनी जांच के आधार पर प्रस्तावित अधिग्रहण पर विचार करेगा तथा प्रस्तावित प्रमुख शेयरधारक की विश्वसनीयता का मूल्यांकन करेगा।

5.4 रिज़र्व बैंक आवेदक की “उचित और उपयुक्त” स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए समुचित सावधानी बरतेगा। रिज़र्व बैंक चाहे तो आवेदक/ संबंधित बैंक से शेयरधारक करार सहित, किन्तु उसी तक सीमित नहीं आतिरिक्त जानकारी / दस्तावेज़ मांग सकता है, तथा उचित समझे जाने पर विनियामक/कों, राजस्व प्राधिकारियों, जांच एजेंसियों, क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से पूछताछ कर सकता है।

5.5 अनुमति देने या मना कर देने अथवा जितने के लिए आवेदन किया गया है उससे कम मात्रा में अधिग्रहण देने संबंधी भारतीय रिज़र्व बैंक के निर्णय से आवेदक और संबंधित बैंक को अवगत कराया जाएगा तथा यह निर्णय आवेदक और संबंधित बैंक के लिए बाध्यकारी होगा। यदि निर्णय अनुमोदन प्रदान करने का हो, तो संबंधित बैंक आवेदक के नाम पर अंतरण/ खरीद, जैसा भी मामला हो, का पंजीकरण करेगा। यदि निर्णय आवेदन का अस्वीकार करने का हो, तो संबंधित बैंक ऐसे अधिग्रहण को लागू नहीं करेगा, अथवा शेयरों पर मताधिकारों के प्रयोग की अनुमति नहीं देगा। रिज़र्व बैंक द्वारा कम मात्रा में अधिग्रहण की अनुमति देने की स्थिति में संबंधित बैंक ऐसे कम मात्रा के शेयरों के अंतरण/ खरीद या अनिवार्यतः संपरिवर्तनीय डिबेंचरों/ बाँडों की कम मात्रा या मताधिकारों की कम प्रतिशतता का पंजीकरण करेगा।

अध्याय – IV

शेयरधारिता में परवर्ती बढ़ोतरी
के मामले में पूर्वानुमोदन

6.1 किसी विद्यमान प्रमुख शेयरधारक, जिसने ऐसे नए अधिग्रहण से पहले ही बैंक में प्रमुख शेयरधारिता के लिए रिज़र्व बैंक से पूर्वानुमोदन लिया है, द्वारा नए अधिग्रहण निम्नलिखित धारा 6.2 और 6.3, जैसा भी मामला हो, के प्रावधानों के अधीन होंगे।

6.2 जहां धारा 6.1 में उल्लिखित अधिग्रहण के परिणामस्वरूप प्रमुख शेयरधारक की सकल शेयरधारिता संबंधित बैंक के शेयरों या मताधिकारों के 10 प्रतिशत तक होती है, वहाँ रिज़र्व बैंक का पूर्वानुमोदन लेना आवश्यक नहीं है,

बशर्ते कि प्रमुख शेयरधारक ऐसे अधिग्रहण से पूर्व संबंधित बैंक को ऐसे वृद्धिशील अधिग्रहण के लिए निधियों के स्रोत का ब्योरा प्रस्तुत करे तथा ऐसे वृद्धिशील अधिग्रहण से पहले संबंधित बैंक से “अनापत्ति” प्राप्त करे।

बशर्ते यह भी कि इन निदेशों की धारा 8.1 में बताए गए अनुसार संबंधित बैंक अपने प्रमुख शेयरधारकों की “उचित और उपयुक्त” स्थिति के बने रहने के संबंध में रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत किए जाने वाले अपने वार्षिक प्रमाणपत्रों में प्रमुख शेयरधारकों द्वारा वृद्धिशील अधिग्रहणों को रिपोर्ट करे।

6.3 जहां धारा 6.1 में उल्लिखित अधिग्रहणों के परिणामस्वरूप प्रमुख शेयरधारकों की सकल धारिताएं संबंधित बैंक के शेयरों या मताधिकारों के 10 प्रतिशत से अधिक होने वाले हों, तो वह फॉर्म ‘ए’ में विनिर्दिष्ट अतिरिक्त जानकारी के साथ ही इन निदेशों की धारा 5 में विनिर्दिष्ट विधि से प्रस्तावित सकल धारिताओं के लिए रिज़र्व बैंक से नया पूर्वानुमोदन लेगा। रिज़र्व बैंक द्वारा ऐसे अधिग्रहणों के लिए अनुमोदन प्रदान करने या अस्वीकार करने का निर्धारण करने वाले कारकों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना निम्नलिखित मामलों में 10 प्रतिशत से ज्यादा शेयरों या मताधिकारों के अधिग्रहण के लिए अनुमोदन देने पर रिज़र्व बैंक के विवेकानुसार विचार किया जाएगा:

(क) बैंक के प्रवर्तक / प्रवर्तक समूह; या
(ख) ऐसी वित्तीय संस्थाएं जो सुनियमित, वैविध्यपूर्ण और सूचीबद्ध हैं; या
(ग) सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम; या
(घ) अपवादात्मक परिस्थितियों में; या
(ड) बैंकिंग क्षेत्र में समेकन के हित में; आदि

अध्याय – V
“उचित और उपयुक्त” स्थिति का निर्धारण

7. आवेदकों की “उचित और उपयुक्त” स्थिति के निर्धारण के व्याख्यात्मक मानदंड

क्या आवेदक प्रमुख शेयरधारक बनने के लिए ‘उचित और उपयुक्त’ है, इसका निर्धारण करने के लिए रिज़र्व बैंक निम्नलिखित को शामिल करते हुए, किंतु इन तक ही सीमित न रहते हुए सभी संबंधित कारकों को विचार में लेगा :

(i) बैंक में 5 प्रतिशत या उससे अधिक तथा 10 प्रतिशत तक अधिग्रहण के लिए

  1. आवेदक की सत्यनिष्ठा, प्रतिष्ठा और वित्तीय मामलों का पिछला रिकॉर्ड तथा कर कानूनों का अनुपालन,

  2. क्या आवेदक पर किसी गंभीर अनुशासनिक या आपराधिक स्वरूप की कार्यवाही की गई है, अथवा उसकी पहचान ऐसी किसी आसन्न कार्यवाही अथवा किसी जांच के लिए की गई है, जिससे ऐसी कार्यवाही की जा सके,

  3. क्या आवेदक के पिछले कारोबारी व्यवहार और कार्यकलापों का ऐसा कोई अभिलेख या साक्ष्य है, जहां बेईमानी, अयोग्यता या दुराचार के कारण जनता को होने वाली वित्तीय हानि से बचाने के लिए बनाए गए विधान के अंतर्गत आवेदक को अपराधी माना गया हो,

  4. क्या आवेदक ने संबंधित विनियामक, राजस्व प्राधिकारियों, जांच एजेंसियों तथा क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों आदि के साथ किए गए उचित सतर्कता व्यवहार के कारण उपयुक्त माने जाने वाले संतोषजनक परिणाम प्राप्त किए हैं,

  5. क्या आवेदक का किसी गंभीर वित्तीय कदाचार, अशोध्य ऋण का रिकॉर्ड है, अथवा उसे न्यायनिर्णीत दिवालिया करार दिया जा चुका है,

  6. अधिग्रहण के लिए निधियों के स्रोत,

  7. जहां आवेदक एक निगमित निकाय है, निगमित निकाय के साथ जुड़े हुए ऊपर गिनाए गए व्यक्तियों और अन्य संस्थाओं के मूल्यांकन के अतिरिक्त अच्छे कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मानकों के अनुरूप परिचालन करने का उनका ट्रैक रिकॉर्ड अथवा प्रतिष्ठा, वित्तीय मजबूती और सत्यनिष्ठा।

ii) बैंक में 10 प्रतिशत से अधिक के अधिग्रहण के लिए

  1. इन निदेशों की धारा 7(i) में निर्धारित सभी पहलू

  2. यदि आवेदक का ताल्लुक किसी संगुट समूह से है, तो संगुट के संबंध में ब्योरा।

  3. अधिग्रहण के लिए निधियों का स्रोत और स्थिरता तथा बैंक के लिए लगातार वित्तीय संबल के स्रोत के रूप में वित्तीय बाज़ारों तक पहुँच की क्षमता।

  4. कारोबार के अधिग्रहण के किसी अनुभव सहित आवेदक का व्यावसायिक रिकॉर्ड और अनुभव।

  5. आवेदक का कॉर्पोरेट ढांचा किस सीमा तक बैंक के प्रभावी पर्यवेक्षण और विनियमन के अनुरूप होगा।

  6. क्या आवेदक एक वित्तीय संस्था है, और क्या आवेदक बहुत से लोगों द्वारा धारित संस्था है, सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध सुप्रतिष्ठित विनियमित वित्तीय संस्था है, जिसकी वित्तीय समुदाय में अच्छी स्थिति / प्रतिष्ठा है।

  7. क्या शेयरधारिता किसी सरकार या सरकारी क्षेत्र के उपक्रम के द्वारा है।

  8. अधिग्रहण जनहित में है।

  9. बैंकों द्वारा विविधतापूर्ण स्वामित्व की वांछनीयता।

  10. बैंक के भावी कारोबार के व्यवहार और विकास के लिए आवेदक की योजनाओं की सक्षमता और व्यहार्यता।

  11. शेयरधारक करार तथा बैंक के नियंत्रण और प्रबंधन पर उनका प्रभाव।

अध्याय – VI
निरंतर निगरानी की व्यवहार्यता

8. मौजूदा प्रमुख शेयरधारकों के मामले में समुचित सावधानी के लिए निरंतर निगरानी की व्यवस्था

8.1 यह सुनिश्चित करना संबंधित बैंक की ज़िम्मेदारी है कि उसके सभी प्रमुख शेयरधारक उचित और उपयुक्त हैं, और इस प्रयोजन से प्रत्येक बैंक

a) वित्तीय वर्ष की समाप्ति से एक माह के भीतर अपने सभी प्रमुख शेयरधारकों से इन निदेशों की अनुसूची में फॉर्म बी में विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार एक वार्षिक घोषणापत्र प्राप्त करेगा और

b) अपने बोर्ड की बैठकों में प्रमुख शेयरधारकों से प्राप्त किए गए घोषणापत्रों पर विचार-विमर्श करेगा, तथा घोषणापत्रों के माध्यम से उपलब्ध कराई गई जानकारी के प्रकाश में तथा उसकी स्वयं की जांच के आधार पर ऐसे शेयरधारकों की “उचित और उपयुक्त” स्थिति के बारे में मूल्यांकन करेगा; तथा

c) प्रतिवर्ष सितंबर माह के अंत में अपने सभी प्रमुख शेयरधारकों की “उचित और उपयुक्त” स्थिति बने रहने के संबंध में रिज़र्व बैंक को एक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेगा। यदि कोई प्रमुख शेयरधारक मूल्यांकन में ‘उचित और उपयुक्त नहीं’ पाया जाता है, तो संबंधित बैंक इन निदेशों की अनुसूची में विनिर्दिष्ट फॉर्म डी में उसकी सूचना तत्काल मुख्य महाप्रबंधक, निजी क्षेत्र बैंक प्रभाग, बैंकिंग विनियमन विभाग, 13वीं मंजिल, केन्द्रीय कार्यालय, भारतीय रिज़र्व बैंक, मुंबई को देंगे।

8.2 ऊपर धारा 8.1 में यथाविनिर्दिष्ट वार्षिक समीक्षा के अलावा, प्रत्येक बैंक अपने प्रमुख शेयरधारकों के संबंध में किसी भी चिंता/ सूचना, जो उसके ध्यान में आएगी, की जांच करेगा, जिसमें ऐसे व्यक्ति/यों को ऐसे शेयर धारण करने अथवा मताधिकारों के लिए ‘उचित और उपयुक्त नहीं' बना देती है, तथा बैंक इस पर एक रिपोर्ट तत्काल रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत करेगा।

अध्याय – VII
निजी क्षेत्र के बैंकों में हित का नियंत्रण

9. निजी क्षेत्र के बैंक में नियंत्रक हित प्राप्त करने के उद्देश्य से शेयरों / मताधिकारों का अधिग्रहण

तथापि, इन निदेशों में दिए जाने के बावजूद, जब भी प्रस्तावित अधिग्रहण / सकल धारिता 5 प्रतिशत से कम हो, तब भी यदि संबंधित बैंक को यह शक हो कि व्यक्तियों / समूहों द्वारा बैंक में नियंत्रक हित प्राप्त करने की दृष्टि से शेयरों या मताधिकारों के एकाधिकारात्मक क्रय के वास्तविक उद्देश्य को छिपा कर 5 प्रतिशत की अधिकतम सीमा से उबरने के लिए संदेहास्पद तरीके अपनाए गए हैं, तो संबंधित बैंक को यह मामला रिज़र्व बैंक को संदर्भित करना चाहिए। ऐसे मामलों में रिज़र्व बैंक के लिए यह उचित होगा कि वह ऐसे शेयरधारकों से इन निदेशों के अध्याय III में उल्लिखित प्रक्रिया का अनुपालन करने की अपेक्षा करे।

अध्याय VIII
अन्य विनियमावलियों तथा मताधिकारों का अनुपालन

10. निजी क्षेत्र के बैंक में प्रमुख शेयरधारिता के लिए रिज़र्व बैंक का पूर्वानुमोदन आवेदक द्वारा फेमा 1999 तथा अन्य लागू नियमों और विनियमों का अनुपालन किए जाने के अधीन होगा।

11. समय-समय पर यथा-संशोधित बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 के मताधिकार प्रावधान तथा अन्य संबंधित प्रावधान लागू रहेंगे। बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 12ख के अधीन प्रमुख शेयरधारिता के अधिग्रहण के लिए दी गई अनुमति के प्रभाव से मताधिकारों में अपने आप वृद्धि नहीं होगी, जब तक कि रिज़र्व बैंक द्वारा अन्यथा विनिर्दिष्ट नहीं किया जाता।

अध्याय – IX
निरसन तथा अन्य प्रावधान

12. इन निदेशों को जारी करने के साथ ही रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निम्नलिखित परिपत्रों में निहित अनुदेश / दिशानिर्देश निरस्त किए जाते हैं:

  1. शेयरों के अंतरण पर भारतीय निजी क्षेत्र के सभी वाणिज्यिक बैंकों को संबोधित दिनांक 23 मई 1991 का बैंपविवि.सं.एफओएल.बीसी.129/सी.249-91

  2. नियंत्रक हित प्राप्त करने के लिए बैंकों के शेयरों का अधिग्रहण पर भारतीय निजी क्षेत्र के सभी वाणिज्यिक बैंकों को संबोधित दिनांक 16 अप्रैल 1994 का बैंपविवि.सं.44/16.13.100/94

  3. शेयरों का अंतरण पर भारतीय निजी क्षेत्र के सभी वाणिज्यिक बैंकों को संबोधित दिनांक 21 सितम्बर 1999 का बैंपविवि.सं. पीएसबीएस.बीसी.349/16.13.100/99-2000

  4. शेयरों का अंतरण पर भारतीय निजी क्षेत्र के सभी बैंकों को संबोधित दिनांक 31 मई 2000 का बैंपविवि.सं.पीएसबीएस.बीसी.182/16.13.100/99-2000

  5. शेयरों का अंतरण पर भारतीय निजी क्षेत्र के सभी वाणिज्यिक बैंकों को संबोधित दिनांक 18 जुलाई 2000 का बैंपविवि.सं. पीएसबीएस.बीसी.05/16.13.100/2000-2001

  6. शेयरों का अंतरण पर आरबीआई की पूर्व-स्वीकृति पर भारतीय निजी क्षेत्र के सभी वाणिज्यिक बैंकों को संबोधित दिनांक 7 नवम्बर 2002 का बैंपविवि.सं. पीएसबीएस. बीसी.41/16.13.100/2002-2003

  7. निजी क्षेत्र के बैंकों में शेयरों के अंतरण की अभिस्वीकृति / आबंटन पर भारतीय निजी क्षेत्र के सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को संबोधित दिनांक 3 फरवरी 2004 का बैंपविवि.सं. पीएसबीएस.बीसी.64/16.13.100/2003-04

  8. बैंकों के शेयरों के अंतरण पर निजी क्षेत्र के सभी बैंकों को संबोधित भारतीय रिज़र्व बैंक का दिनांक 13 अगस्त 2005 का पत्र बैंपविवि.सं. पीएसबीडी.बीसी.155/16.13.100/2004-05 और दिनांक 26 अक्तूबर 2005 का बैंविवि.सं. पीएसबीडी.435/16.13.100/2005-06

12.1. उपर्युक्त परिपत्रों के अधीन दिए गए सभी अनुमोदन/ अभिस्वीकृतियों को इन निदेशों के अंतर्गत दिया गया माना जाएगा।


अनुसूची
फॉर्म

फॉर्म ए

निजी क्षेत्र के किसी बैंक में प्रमुख शेयरधारिता अधिग्रहित करने का
इरादा रखे वाले आवेदकों द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला घोषणापत्र

निजी क्षेत्र बैंक का नाम, जिसमें अधिग्रहण चाहते हैं :

क्रम सं पहलू टिप्पणी
आवेदक द्वारा बैंक के 5% या उससे अधिक तथा 10% तक शेयरों या अनिवार्यत: परिवर्तनीय डिबेंचरों/बान्डों या मताधिकारों के अधिग्रहण के लिए प्रस्तुत की जाने वाली जानकारी
1. आवेदक का नाम (पूर्व नाम, यदि कोई हो, सहित)  
2. आवेदक के पिता का नाम /आवेदक के समर्थन में मुख्य वैयक्तिक प्रवर्तक  
3. आवेदक का वर्तमान पता  
4. आवेदक का स्थायी पता  
5. यदि आवेदक एक व्यक्ति हो, तो नागरिकता और आवासीय स्थिति/ यदि आवेदक संस्था हो (फेमा के अनुसार) तो स्वामित्व और नियंत्रण स्थिति  
6. आवेदक का व्यवसाय / संस्था के कारोबार का स्वरूप  
7. यदि आवेदक संस्था हो, तो शेयरधारिता का स्वरूप  
8. आवेदक द्वारा “अधिग्रहण” तथा बैंक में "सकल धारिता" का ब्योरा (नाम, रुपये में शेयरधारिता और प्रतिशत)  
9. क) आवेदक के “रिश्तेदारों की सूची”
ख) आवेदक के “साथ मिल कर कार्य करने वाले व्यक्तियों” की सूची
ग) “सहयोगी उपक्रमों” की सूची
इन सूचियों में, नाम निवल मालियत, कुल आस्तियां, क्रेडिट रेटिंग, बैंक में रुपये में शेयरधारिता (यदि कोई हो) और प्रतिशत का ब्योरा होना चाहिए।
 
10. बैंक में शेयर/ अनिवार्यतः परिवर्तनीय डिबेंचर/ बॉन्ड/ मताधिकारों के अधिग्रहण के लिए निधियों के स्रोत (सनदी लेखाकार द्वारा विधिवत् प्रमाणित)  
11. पिछले 5 वर्षों में आवेदक की निवल मालियत, लाभप्रदता तथा औसत आय (सनदी लेखाकार द्वारा विधिवत् प्रमाणित)  
12. मताधिकारों के अधिग्रहण के मामले में करार/सहमति का संक्षिप्त ब्योरा तथा ऐसे करार/सहमति के लिए अदा किया गया मूल्य, यदि कोई हो।  
13. क्या आवेदक या ऊपर 9 में सूचीबद्ध संस्थाओं में से कोई भी किसी भी समय दिवालिया न्यायनिर्णीत हुआ है।  
14. यदि आवेदक या ऊपर 9 में सूचीबद्ध संस्थाओं में से कोई किसी व्यावसायिक संघ/निकाय का सदस्य है, के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई लंबित या शुरू की गई, या जिसके परिणामस्वरूप विगत समय में उन्हें दोषी ठहराया गया है/या क्या उन्हें किसी भी समय किसी व्यवसाय / कारोबार में प्रवेश से प्रतिबंधित किया गया है, यदि कोई हो, का ब्योरा।  
15. क्या आवेदक या ऊपर 9 में सूचीबद्ध संस्थाओं में से किसी की सरकारी विभाग या एजेंसी की ओर से जांच की गई है?  
16. आर्थिक कानूनों, कर कानूनों और विनियमों के उल्लंघन के लिए आवेदक या ऊपर 9 में सूचीबद्ध संस्थाओं में से किसी के विरुद्ध विगत समय में फ़ौजदारी का मुकदमा, यदि कोई हो, लंबित या शुरू किया गया या जिसके परिणामस्वरूप उन्हें दोषी ठहराया गया है, का ब्योरा।  
17. आवेदक या ऊपर 9 में सूचीबद्ध संस्थाओं में से किसी के विरुद्ध विगत समय में गंभीर अनुशासनिक मामला लंबित या शुरू किया गया या जिसके परिणामस्वरूप उन्हें दोषी ठहराया गया है, यदि कोई हो, का ब्योरा।  
18. क्या आवेदक या ऊपर 9 में सूचीबद्ध संस्थाओं में से कोई किसी भी समय सीमा-शुल्क/ उत्पाद-शुल्क/ आयकर/विदेशी मुद्रा/ अन्य राजस्व प्राधिकारियों द्वारा अपेक्षित नियमों/विनियमों/वैधानिक अपेक्षाओं के उल्लंघन का दोषी पाया गया है? यदि हाँ, तो ब्योरा दें।  
19. क्या आवेदक या ऊपर 9 में सूचीबद्ध संस्थाओं में से कोई किसी भी समय किसी विनियामक /राजस्व प्राधिकारी / जांच एजेंसी के द्वारा कारण बताओं नोटिस सहित प्रतिकूल रूप से ध्यान में आया है? (हालांकि यहाँ किसी व्यक्ति के लिए विनियामकों के ऐसे आदेशों या निष्कर्षों के बारे में उल्लेख करना आवश्यक नहीं है, जहां बाद में उसे बदला गया/ पूरी तरह खारिज किया गया, किंतु यदि यह बदलाव / खारिज करना तकनीकी कारणों, जैसे सीमाएं या अधिकार क्षेत्र की कमी आदि के कारण हो, न कि गुणवत्ता के आधार पर, तो उसका उल्लेख किया जाना आवश्यक है। यदि विनियामक के आदेश पर अस्थायी रूप से स्थगन हो तथा अपील/न्यायालयीन कार्यावाही लंबित हो, तो उसका भी उल्लेख किया जाना चाहिए।  
20. क्या बेईमानी, अक्षमता या दुराचार के कारण होने वाली वित्तीय हानि से जनता की रक्षा करने के लिए बनाए गए किसी विधान के अंतर्गत आवेदक या ऊपर 9 में सूचीबद्ध संस्थाओं को अपराध के लिए दोषी करार किया गया है।  
21. क्या प्रस्तावित अधिग्रहण (यदि लागू हो) में किसी अन्य व्यक्ति का लाभकारी हित है।  
22. आवेदक का किसी अन्य बैंक या वित्तीय क्षेत्र की अन्य संस्था में शेयरधारिता/ मताधिकार/ अनिवार्यतः परिवर्तनीय डिबेंचर/ बॉन्ड का ब्योरा  
23. यदि आवेदक एक विनियमित संस्था है, तो भारत और विदेश में आवेदक के विनियामकों के नाम और पते।  
24. आवेदक और ऊपर 9 में उल्लिखित व्यक्तियों / संस्थाओं के संबंध में जन्म / निगमन की तारीख, पंजीकृत कार्यालय का पता, कारोबारी क्रियाकलापों का स्वरूप, पैन सं., टैन सं., सीआईएन/ डीआईएन.सं., आयकर सर्किल, विनियामक का नाम, सेबी में पंजीकरण का प्रकार, बैंक, शाखा और खाता संख्या (ऋण सुविधाओं और गैर-निधि आधारित सुविधाओं सहित), निवल मालियत, कुल आस्तियों का ब्योरा (अलग अनुबंध में दें)।  
25. आवेदक की पिछले तीन वर्ष की आयकर विवरणियाँ तथा वित्तीय विवरण।  
26. उपर्युक्त मदों के संबंध में कोई अन्य स्पष्टीकरण/ जानकारी जो आवेदक तथा ऊपर 9 में सूचीबद्ध संस्थाओं की “उचित और उपयुक्त” स्थिति का निर्णय करने के लिए प्रासंगिक हो।  
बैंक में 10% से अधिक शेयर या अनिवार्यतः परिवर्तनीय डिबेंचर/ बॉन्ड या मताधिकार का अधिग्रहण करने का इरादा रखने वाले आवेदकों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली अतिरिक्त जानकारी।
27. क्या आवेदक एक वित्तीय क्षेत्र की संस्था है अथवा सरकारी/ सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम  
28. यदि आवेदक किसी संगुट समूह से संबद्ध है, तो जिस समूह से संबद्ध है उसका नाम और ब्योरा  
29. क्या आवेदक सूचीबद्ध है, यदि हाँ तो किस स्टॉक एक्सचेंज में, तथा पब्लिक शेयरधारिता की सीमा  
30. आवेदक द्वारा पिछले 5 वर्ष के दौरान जुटाई गई पूंजी का ब्योरा  
31.

सूचियां :
क) आवेदक की चुकता शेयर पूंजी में 10% या उससे अधिक धारिता वाली संस्थाओं की सूची

ख) हिन्दू अविभक्त परिवारों (एचयूएफ) की सूची, आवेदक या उसके परिवार के सदस्य जिसके सदस्य/ कर्ता हैं।

ग) संस्थाओं की सूची, जहां ऊपर (ख) का एचयूएफ उस संस्था में 10% या उससे अधिक चुकता पूंजी धारण करता है।

घ) संस्थाओं की सूची, जिनमें आवेदक ऐसी संस्थाओं की चुकता शेयर पूंजी का 10% या उससे अधिक धारण करता है।

ड़) संस्थाएं, जिनमें आवेदक की रुचि / हित है, ऐसा माना जाता है, यदि हों, (देखें कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 184)

च) ऐसी संस्थाएं, जहां आवेदक के सामान्य शेयरधारक हैं, जो समूहिक रूप से आवेदक तथा उन संस्थाओं की चुकता शेयर पूंजी का 20% या उससे अधिक धारण करते हैं।

छ) आवेदक के सहयोगी

ज) आवेदक की संबंधित पार्टियां

झ) संस्थाएं, जिनमें आवेदक तथा 9 में और ऊपर (क) से (ज) तक व्यक्ति/संस्थाओं द्वारा सामूहिक रूप से शेयरधारिता उस संस्था की चुकता शेयर पूंजी का 10% या उससे अधिक है।

संस्थाओं की सूची, जिनमें पिछले 5 वर्षों में 9 तथा ऊपर (क) से (झ) तक उल्लिखित व्यक्ति / संस्थाओं ने व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से अपनी शेयर – धारिताओं का विनिवेश किया है।

 
32. ऊपर 9 और 31 में उल्लिखित व्यक्तियों/ संस्थाओं द्वारा “अधिग्रहण और सकल धारिता” (नाम, रुपये में शेयरधारिता तथा % का ब्योरा)  
33. क्या आवेदक या ऊपर 31 में सूचीबद्ध संस्थाओं को किसी भी समय दिवालिया न्यायनिर्णीत किया गया है।  
34. यदि ऊपर 31 में सूचीबद्ध संस्थाओं में से कोई भी किसी व्यावसायिक संघ / निकाय का सदस्य हो, तो उनके विरुद्ध लंबित या शुरू की गई या जिसके परिणामस्वरूप विगत समय में उन्हें दोषी ठहराया गया है, ऐसी अनुशासनिक कार्रवाई, यदि हो, का ब्योरा / क्या उन्हें किसी भी समय किसी व्यवसाय / कारोबार में प्रवेश से प्रतिबंधित किया गया है।  
35. क्या ऊपर 31 में सूचीबद्ध संस्थाओं में से किसी की सरकारी विभाग या एजेंसियों द्वारा जांच की गई है।  
36. यदि ऊपर 31 में सूचीबद्ध संस्थाओं में से किसी पर विगत समय में आर्थिक कानूनों और विनियमनों का उल्लंघन करने के लिए फौजदारी मुकदमा /अभियोग लंबित या शुरू किया गया और उसके परिणामस्वरूप उन्हें दोषी करार किया गया हो तो उसका ब्योरा।  
37. क्या ऊपर 31 में सूचीबद्ध संस्थाओं में से किसी को किसी भी समय सीमा-शुल्क / उत्पाद शुल्क / आय कर / विदेशी मुद्रा / अन्य राजस्व प्राधिकारियों द्वारा बनाए गए नियमों/ विनियमों/ वैधानिक अपेक्षाओं के उल्लंघन का दोषी पाया गया, यदि हाँ, तो ब्योरा दें।  
38. क्या ऊपर 31 में सूचीबद्ध संस्थाओं में से कोई भी किसी भी समय किसी विनियामक /राजस्व प्राधिकारी / जांच एजेंसी के द्वारा कारण बताओ नोटिस सहित प्रतिकूल रूप से ध्यान में आया है? (हालांकि यहाँ किसी व्यक्ति के लिए विनियामकों के ऐसे आदेशों या निष्कर्षों के बारे में उल्लेख करना आवश्यक नहीं है, जहां बाद में उसे बदला गया/ पूरी तरह खारिज किया गया, किंतु यदि यह बदलाव / खारिज करना तकनीकी कारणों, जैसे सीमाएं या अधिकार क्षेत्र की कमी आदि के कारण हो, न कि गुणवत्ता के आधार पर, तो उसका उल्लेख किया जाना आवश्यक है। यदि विनियामक के आदेश पर अस्थायी रूप से स्थगन हो तथा अपील/न्यायालयीन कार्यवाही लंबित हो, तो उसका भी उल्लेख किया जाना चाहिए।)  
39. क्या आवेदक या ऊपर 31 में सूचीबद्ध संस्थाओं को बेईमानी, अक्षमता या दुराचार के कारण होने वाली वित्तीय हानि से जनता की रक्षा करने के लिए बनाए गए किसी विधान के अंतर्गत अपराध के लिए दोषी करार किया गया है।  
40. क्या ऊपर 31 में सूचीबद्ध संस्थाओं अथवा आवेदक में से किसी के विरुद्ध विगत समय में गंभीर अनुशासनिक अथवा आपराधिक दोष, यदि कोई हो, का मामला लंबित या शुरू किया गया, का ब्योरा।  
41. क्या आवेदक बैंक के बोर्ड में प्रतिनिधित्व करने का इरादा रखता है।  
42. आवेदक के किसी अन्य बैंक या वित्तीय क्षेत्र की किसी अन्य संस्था के बोर्ड में प्रतिनिधित्व का ब्योरा  
43. यदि आवेदक किसी समूह से संबद्ध है, तो उस समूह की कुल आस्तियों तथा समूह की इकाइयों की शेयरधारिता की पद्धति (समूह के व्यक्तिगत शेयरधारकों से शुरू करते हुए) बताते हुए समूह की कॉर्पोरेट संरचना का ब्योरा  
44. ऊपर 31 में सूचीबद्ध कपनियों के संबंध में निगमन की तारीख, पंजीकृत कार्यालय का पता, कारोबारी क्रियाकलापों का स्वरूप, पैन / टैन सं., सीआईएन सं., डीआईएन.सं., आयकर सर्कल, विनियामक का नाम, सेबी में पंजीकरण का प्रकार, यदि कोई हो, बैंक, शाखा और खाता संख्या (ऋण सुविधाओं और गैर-निधि आधारित सुविधाओं सहित), निवल मालियत, कुल आस्तियों का ब्योरा (अलग अनुबंध में दें)।

 

45. समूह की ऊपर 9 और 31 में प्रमुख संस्थाओं (जो समूह की कुल आस्तियों का 50% कवर करते हैं) के पिछले तीन वर्ष के तुलन पत्र।

 

46. कंपनियों / कारोबार के अधिग्रहण का अनुभव, यदि हो, शामिल करते हुए आवेदक का व्यावसायिक अभिलेख और अनुभव  
47. शेयरधारक करारों का संक्षिप्त विवरण  
48. बैंक में स्टेक या मताधिकार का अधिग्रहण करने के लिए कारण  
49. उपर्युक्त मदों के संबंध में कोई अन्य स्पष्टीकरण / जानकारी जो आवेदक तथा ऊपर 31 में सूचीबद्ध संस्थाओं की “उचित और उपयुक्त” स्थिति का निर्णय करने के लिए प्रासंगिक हो।  

वचनपत्र

मैं पुष्टि करता/ती हूँ कि ऊपर दी गई सूचना मेरी जानकारी और विश्वास के अनुसार सत्य और पूर्ण है। मैं वचन देता/ती हूँ कि इस घोषणापत्र की प्रस्तुति के बाद ऊपर दी गई जानकारी से प्रासंगिक जो भी घटनाएँ होंगी उन्हें यथाशीघ्र बैंक की पूर्ण जानकारी में लाऊँगा/गी।

आवेदक का हस्ताक्षर और मुहर

स्थान :

तारीख :


फॉर्म बी

निजी क्षेत्र के बैंकों के सभी मौजूदा “प्रमुख शेयरधारकों” द्वारा बैंक
को प्रस्तुत किया जाने वाला वार्षिक (प्रति वर्ष 31 मार्च को) घोषणापत्र

बैंक का नाम:

1. प्रमुख शेयरधारक का नाम  
2. प्रमुख शेयरधारक का पता  
3. प्रमुख शेयरधारक का व्यवसाय (व्यक्ति के मामले में)  
4. प्रमुख शेयरधारक द्वारा बैंक में धारित शेयरों/अनिवार्यतः परिवर्तनीय डिबेंचर/ बॉन्ड/ मताधिकारों की सीमा की कुल संख्या  
5. पिछले 5 वर्षों में बैंक में शेयरधारिता / अनिवार्यतः परिवर्तनीय डिबेंचर / मताधिकार के अधिग्रहण की तारीख  
6. ऊपर फॉर्म ए के 9 और 31 के अनुसार प्रमुख शेयरधारकों और संस्थाओं के विरुद्ध पिछले 5 वर्ष के दौरान की गई विनियामक कार्रवाईयों का ब्योरा।  
7. ऊपर फॉर्म ए के 9 और 31 के अनुसार क्या प्रमुख शेयरधारकों और संस्थाओं के विरुद्ध पिछले 5 वर्ष के दौरान कोई आपराधिक कार्यवाही की गई है? यदि हाँ, तो उसका ब्योरा।  
8. ऊपर फॉर्म ए के 9 और 31 के अनुसार क्या प्रमुख शेयरधारकों और संस्थाओं के विरुद्ध पिछले 5 वर्ष के दौरान कोई दीवानी (सिविल) कार्यवाही की गई है।  
9. पिछले 5 वर्षों में प्रमुख शेयरधारकों के स्वामित्व में परिवर्तन (संस्थाओं के मामले में) यदि कोई हो।  

(प्रमुख शेयरधारक के हस्ताक्षर और तारीख)


फॉर्म सी

“प्रमुख शेयरधारिता” के लिए पूर्वानुमोदन लेने हेतु आवेदन पर विचार करते समय निजी
क्षेत्र के बैंक द्वारा आरबीआई को प्रस्तुत की जाने वाली जानकारी

1. बैंक का नाम  
2. बैंक की चुकता पूंजी  
3. बैंक के मौजूदा प्रमुख शेयरधारकों के नाम, जो बैंक की चुकता शेयर पूंजी के 5% या उससे अधिक धारण करते हैं / 5% या उससे अधिक मताधिकार धारण करते हैं।  
4. आवेदक की सत्यनिष्ठा और प्रतिष्ठा का पिछला रिकॉर्ड  
5. अधिग्रहण पर बैंक की रिपोर्ट (निदेशक मंडल द्वारा की गई समीक्षा के आधार पर)  
6. विदेशी/अनिवासी निवेशकों के मामले में फेमा 1999 के संबंधित प्रावधानों के अनुपालन के संबंध में बैंक की घोषणा  
7. क्या ऊपर फॉर्म ए के 9 तथा 31 के अनुसार आवेदक या संस्थाओं के विरुद्ध किसी गंभीर अनुशासनिक या आपराधिक स्वरूप की कार्यवाही की गई है  
8. यदि अधिग्रहण “प्रमुख शेयरधारिता” नहीं है, लेकिन यदि बोर्ड का यह मत है कि अधिग्रहण में प्रबंधन पर कब्जा करने या अस्थिर करने के प्रयत्न परिलक्षित होते हैं, तो पूरा विवरण रिपोर्ट किया जाए  
9. बैंक में केवल मताधिकार धारण करने वाले व्यक्तियों के नाम और प्रतिशतता  

संलग्नक :
1. बैंक की रिपोर्ट
2. बोर्ड के संकल्प की प्रति

(बैंक के प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और तारीख)


फॉर्म डी

मौजूदा “प्रमुख शेयरधारक” जिसका मूल्यांकन “उचित और उपयुक्त नहीं”
किया गया है, के संबंध में बैंक द्वारा आरबीआई को प्रस्तुत की जाने वाली जानकारी

बैंक का नाम

1. प्रमुख शेयरधारक का नाम  
2. प्रमुख शेयरधारक का पता  
3. प्रमुख शेयरधारक का व्यवसाय (व्यक्तियों के मामले में)  
4. बैंक के प्रमुख शेयरधारक द्वारा धारित शेयर/ अनिवार्यतः परिवर्तनीय डिबेंचर/ बॉन्ड/ मताधिकार की सीमा की कुल संख्या  
5. बैंक में शेयरधारिता / मताधिकारों के अधिग्रहण की तारीख  
6. पिछले 5 वर्ष के दौरान ऊपर फॉर्म ए के 9 और 31 के अनुसार प्रमुख शेयरधारकों और संस्थाओं के विरुद्ध भारत और विदेश के विनियामकों द्वारा की गई विनियामक कार्रवाईयों का ब्योरा।  
7. क्या ऊपर फॉर्म ए के 9 और 31 के अनुसार प्रमुख शेयरधारकों और संस्थाओं के विरुद्ध पिछले 5 वर्ष के दौरान कोई आपराधिक कार्यवाही की गई है? यदि हाँ, तो उसका ब्योरा।  
8. क्या ऊपर फॉर्म ए के 9 और 31 के अनुसार प्रमुख शेयरधारकों और संस्थाओं के विरुद्ध पिछले 5 वर्ष के दौरान कोई दीवानी (सिविल) कार्यवाही की गई है?  
9. पिछले 5 वर्षों में प्रमुख शेयरधारकों के स्वामित्व में परिवर्तन (संस्थाओं के मामले में) यदि कोई हो  
10. बैंक द्वारा की गई समुचित सावधानी प्रक्रिया का परिणाम (जहां भी लागू हो)  
11. अन्य कोई जानकारी, जो बैंक के ध्यान में आई हो, जिससे प्रमुख शेयरधारक की “उचित और उपयुक्त” स्थिति प्रभावित हो।  

(बैंक का प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और तारीख)


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