आरबीआई/2025-26/193
विसविवि.केंका.एफ़एसडी.बीसी.सं.10/05.02.001/2025-26
13 जनवरी 2026
अध्यक्ष/प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यपालक अधिकारी
सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी क्षेत्र के बैंक और
लघु वित्त बैंक
महोदया/महोदय,
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से प्राप्त कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए अल्पावधि ऋणों हेतु संशोधित ब्याज सहायता योजना
कृपया दिनांक 06 अगस्त 2024 को जारी हमारे परिपत्र विसविवि.केंका.एफ़एसडी.बीसी.सं.8/05.02.001/2024-25 का संदर्भ लें, जिसमें वर्ष 2024-25 के लिए कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए अल्पावधि ऋणों हेतु संशोधित ब्याज सहायता योजना को जारी रखने के संबंध में भारत सरकार के निर्णय की जानकारी दी गई है।
2. इस संबंध में, यह सूचित किया जाता है कि भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए संशोधित ब्याज सहायता योजना (एमआईएसएस) को निम्नलिखित शर्तों के साथ जारी रखने का अनुमोदन दिया है:
(i) वर्ष 2025-26 के दौरान रियायती ब्याज दर पर केसीसी के माध्यम से किसानों को ₹3 लाख की समग्र सीमा तक अल्पावधि फसल ऋण और पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन आदि सहित संबद्ध गतिविधियों के लिए अल्पावधि ऋण प्रदान करने हेतु उधारदात्री संस्थाओं अर्थात सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) और निजी क्षेत्र के बैंकों (केवल उनकी ग्रामीण और अर्ध-शहरी शाखाओं द्वारा दिए गए ऋणों के संबंध में), लघु वित्त बैंकों (एसएफबी) और अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) के साथ जुड़े कम्प्यूटरीकृत प्राथमिक कृषि सहकारी सोसाइटी (पीएसीएस) को उनके स्वयं के संसाधनों के उपयोग पर ब्याज सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। इस ब्याज सहायता की गणना, ऋण राशि पर उसकी संवितरण/ आहरण/ नवीकरण की तारीख से किसान द्वारा ऋण की वास्तविक चुकौती की तारीख तक या बैंकों/ पीएसीएस द्वारा निर्धारित ऋण की अवधि/ देय तिथि / नवीकरण तक, जो भी पहले हो, एक वर्ष की अधिकतम अवधि के अधीन, की जाएगी। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए किसानों के लिए लागू उधार दर और ब्याज सहायता की दर इस प्रकार होगी:
| वित्तीय वर्ष |
किसानों के लिए उधार दर |
उधारदात्री संस्थाओं को ब्याज सहायता की दर |
| 2025-26 |
7% |
1.50% |
(ii) ऐसे किसान जो समय पर अर्थात ऋण/ऋणों के संवितरण/ आहरण/ नवीकरण की तारीख से भुगतान/ ऋण की अवधि/ देय तिथि की वास्तविक तारीख तक या बैंक द्वारा ऐसे ऋण/ऋणों की चुकौती के लिए निर्धारित नियत तारीख तक, इनमें से जो भी पहले हो, संवितरण की तारीख से अधिकतम एक वर्ष की अवधि के अधीन, अपने ऋण को चुकाते हैं उन्हें प्रति वर्ष 3% की अतिरिक्त ब्याज सहायता प्रदान की जाएगी। इसका तात्पर्य यह भी है कि उपरोक्त के अनुसार शीघ्र भुगतान करने वाले किसानों को वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 4% प्रति वर्ष की दर से अल्पावधि फसल ऋण और/या पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन आदि सहित संबद्ध गतिविधियों के लिए अल्पावधि ऋण मिलेगा। यह लाभ उन किसानों को नहीं मिलेगा, जो इस तरह के ऋणों का लाभ उठाने के एक वर्ष बाद अपने कृषि ऋण चुकाते हैं।
(iii) अल्पावधि फसल ऋण और संबद्ध गतिविधियों के लिए अल्पावधि ऋण पर ब्याज सहायता और त्वरित चुकौती प्रोत्साहन लाभ प्रति वर्ष ₹3 लाख की समग्र सीमा पर तथा केवल पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन आदि से संबंधित गतिविधियों में शामिल किसानों के संबंध में प्रति किसान ₹2 लाख की अधिकतम उप-सीमा के अधीन उपलब्ध होंगे। ब्याज सहायता और त्वरित चुकौती प्रोत्साहन लाभ के लिए फसल ऋण घटक की सीमा को प्राथमिकता होगी और शेष राशि को पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन आदि सहित संबद्ध गतिविधियों के लिए ऊपर उल्लिखित उच्चतम सीमा के अधीन माना जाएगा। (उदाहरण)
(iv) किसानों द्वारा मजबूरन बिक्री को हतोत्साहित करने और अपने उत्पाद गोदाम में रखने हेतु उन्हें प्रोत्साहित करने की दृष्टि से केसीसी के तहत ब्याज सबवेंशन का लाभ लघु और सीमांत किसानों को फसल की कटाई के बाद छह महीने तक की अवधि के लिए भण्डारण विकास और विनियामक प्राधिकरण (डब्ल्यूडीआरए) द्वारा अधिकृत गोदामों में अपने उत्पाद रखने पर परक्राम्य गोदाम रसीदों के बदले मिलेगा, और इसकी दर वही होगी जो गिरवी रखने की तारीख से फसल लोन पर लागू होती है।
(v) प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करने हेतु पुन:संरचित ऋण राशि पर पहले वर्ष के लिए बैंकों को उस वर्ष के लिए लागू दर से ब्याज सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। ऐसे पुन:संरचित ऋणों पर दूसरे वर्ष से सामान्य ब्याज दर लागू होगी।
(vi) हालांकि, गंभीर प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करने हेतु पुन: संरचित ऋण राशि पर पहले तीन वर्षों/संपूर्ण अवधि (अधिकतम पाँच वर्ष की अवधि के अधीन) बैंकों को उस वर्ष के लिए लागू दर से ब्याज सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, ऐसे सभी मामलों में, प्रभावित किसानों को प्रति वर्ष 3% की दर से त्वरित चुकौती प्रोत्साहन का लाभ भी प्रदान किया जाएगा। हालांकि, गंभीर प्राकृतिक आपदाओं के मामलों में, ऐसे लाभों की स्वीकृति अंतर-मंत्रालय केंद्रीय समूह (आईएमसीटी) और राष्ट्रीय कार्यपालक समिति की उप-समिति (एससी-एनईसी) की सिफ़ारिश के आधार पर उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) द्वारा तय की जाएगी।
3. इसके अलावा, बैंकों को सूचित किया जाता है कि वे निम्नलिखित शर्तों का पालन करें:
(i) अनिवार्य आधार प्रमाणीकरण: इस योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए आधार सीडिंग और प्रमाणीकरण अनिवार्य है। सभी ऋण देने वाली संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे प्रत्येक किसान के संबंध में ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी की गयी है, ताकि इस योजना के लाभ उन्हें सुचारु रूप से मिल सके।
(ii) लाभार्थियों के एकाधिक खातों का सत्यापन: किसान एक से अधिक किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से MISS का लाभ, सभी ऐसे खातों में कुल मिलाकर प्रति किसान ₹3 लाख की समग्र सीमा के अधीन, प्राप्त करने के लिए पात्र होगा।। तथापि, एक विशिष्ट भू-खंड के संबंध में एमआईएसएस के लाभ केवल एक किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) खाते के माध्यम से प्राप्त करने के लिए वह पात्र होगा/ होगी। जहां किसान ने एक ही भू-खंड के संबंध में एक से अधिक केसीसी खाते रखे हैं तो ऐसे मामलों में एमआईएसएस लाभ केवल उस खाते में प्रदान किए जाएंगे जिसमें सबसे अधिक ऋण की राशि मंज़ूर की गई है, और जो कि समग्र सीमा के अधीन है।
(iii) डिजिटल लेनदेनों को प्रोत्साहित करना: बैंक सभी उपलब्ध डिजिटल बैंकिंग माध्यमों, रुपे कार्ड सहित, का उपयोग करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करें ताकि खातों के निर्बाध संचालन और लेनदेनों को साकार किया जा सके।
(iv) आंकड़ों की रिपोर्टिंग: बैंकों को सूचित किया जाता है कि वे केआरपी पर इस योजना के तहत वैयक्तिक किसान लाभार्थियों के संबंध में अपेक्षित डेटा ब्योरे-वार प्राप्त करके रिपोर्ट करें, जिसमें उनकी सामाजिक श्रेणी भी शामिल है। साथ ही, यह सुनिश्चित करें कि बाद की अवधि में ऐसे डेटा को नहीं बदला गया है। वर्ष 2025-26 के लिए लेखापरीक्षित एमआईएसएस संबंधी दावों के निपटान को सुगम बनाने की दृष्टि से इस डेटा को सटीक रूप से रिपोर्ट किया जाना चाहिए।
(v) केआरपी पर सटीक फसल रिपोर्टिंग: क्षेत्रगत अधिकारियों को बोई गई फसलों से संबंधित आंकड़े केआरपी पर सटीक रिपोर्टिंग करने में समुचित सावधानी बरतनी चाहिए। यदि सटीक रिपोर्टिंग नहीं की गई तो उससे बाद में वैधीकरण संबंधी त्रुटियां पैदा हो सकती हैं।
(vi) केआरपी पर एमआईएसएस संबंधी दावे प्रस्तुत करना: सभी पात्र वित्तीय संस्थाएं परिचालन संबंधी अनुदेशों का कड़ाई से पालन करें। साथ ही, यह सुनिश्चित करें कि एमआईएसएस से संबंधित दावों के संबंध में अपने सांविधिक लेखापरीक्षकों से इस आशय का विधिवत प्रमाणन कराके कि वे ठीक और सही हैं, उक्त दावों को समय-समय पर अधिसूचित तारीख के अनुसार केआरपी पर निर्धारित समय पर अपलोड किया जाता है।
(vii) एससीबी के साथ जुड़े पीएसीएस द्वारा दावे प्रस्तुत करना: एससीबी के साथ जुड़े कम्प्यूटरीकृत पीएसीएस के संबंध में दावे संबंधित बैंकों द्वारा इस प्रमाणीकरण के साथ अलग से, केआरपी मॉड्यूल पर अपलोड किए जाएं कि ब्याज सहायता/ त्वरित चुकौती प्रोत्साहन का दावा उन ऋणों पर किया जा रहा है जिनके लिए नाबार्ड से कोई पुनर्वित्त नहीं लिया गया है और जिसे बैंकों के सांविधिक लेखा परीक्षकों द्वारा विधिवत प्रमाणित किया गया हो।
भवदीय,
(आर. गिरिधरन)
मुख्य महाप्रबंधक
उदाहरण
उदाहरण I
कुल केसीसी सीमा - ₹2.5 लाख
फसल ऋण के तहत सीमा - ₹1.5 लाख
पशुपालन और/या डेरी और/या मधुमक्खी पालन और/या मत्स्य पालन के तहत उप-सीमा – ₹1 लाख आईएस और पीआरआई का लाभ कुल मिलाकर ₹2.5 लाख पर उपलब्ध होगा, अर्थात
उदाहरण II
कुल केसीसी सीमा - ₹3 लाख
फसल ऋण के तहत सीमा - ₹0.5 लाख
पशुपालन और/या डेरी और/या मधुमक्खी पालन और/या मत्स्य पालन के तहत उप-सीमा – ₹2.5 लाख आईएस और पीआरआई का लाभ कुल मिलाकर ₹2.5 लाख पर उपलब्ध होगा, अर्थात
उदाहरण III
कुल केसीसी सीमा - ₹4 लाख
फसल ऋण के तहत सीमा - ₹1.75 लाख
पशुपालन और/या डेरी और/या मधुमक्खी पालन और/या मत्स्य पालन के तहत उप-सीमा- ₹2.25 लाख आईएस और पीआरआई का लाभ कुल मिलाकर ₹3 लाख पर उपलब्ध होगा, अर्थात
उदाहरण IV
कुल केसीसी सीमा - ₹4.5 लाख
फसल ऋण के तहत सीमा - ₹2 लाख
पशुपालन और/या डेरी और/या मधुमक्खी पालन और/या मत्स्य पालन के तहत उप-सीमा- ₹2.5 लाख आईएस और पीआरआई का लाभ कुल मिलाकर ₹3 लाख पर उपलब्ध होगा, अर्थात
उदाहरण V
कुल केसीसी सीमा - ₹4 लाख
फसल ऋण के तहत सीमा - ₹3.15 लाख
पशुपालन और/या डेरी और/या मधुमक्खी पालन और/या मत्स्य पालन के तहत उप-सीमा- ₹0.85 लाख आईएस और पीआरआई लाभ केवल फसल ऋण घटक के लिए कुल ₹3 लाख पर उपलब्ध होगा |