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गैर-बैंकिंग वित्‍तीय कंपनियां

यद्यपि यह भूमिका हमारी गतिविधियों का एक ऐसा पहलू है, जिसके संबंध में स्‍पष्‍ट रूप से कहीं उल्‍लेख तो नहीं है, किंतु अति महत्‍वपूर्ण गतिविधियों की श्रेणी में इसकी गिनती की जाती है। इसके अंतर्गत अर्थव्‍यवस्‍था के उत्‍पादक क्षेत्रों को ऋण उपलब्‍धता सुनिश्चित करना, देश की वित्‍तीय मूलभूत संरचना के निर्माण हेतु संस्‍थाओं की स्‍थापना करना, किफायती वित्‍तीय सेवाओं की सुलभता बढ़ाना तथा वित्‍तीय शिक्षण एवं साक्षरता को बढ़ावा देना आदि शामिल हैं।

प्रेस प्रकाशनी


भारतीय रिज़र्व बैंक ने मेसर्स राधाकृष्ण फाइनैंस प्रा. लिमिटेड पर मौद्रिक दंड लगाया

14 दिसंबर 2017

भारतीय रिज़र्व बैंक ने मेसर्स राधाकृष्ण फाइनैंस प्रा. लिमिटेड पर मौद्रिक दंड लगाया

भारतीय रिज़र्व बैंक ने भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी विभिन्न निदेशों/आदेशों के उल्लंघन करने पर भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 58बी की उप-धारा 5(एए) के साथ पठित धारा 58जी(1)(बी) के अंतर्गत मेसर्स राधाकृष्ण फाइनैंस प्रा. लिमिटेड (कंपनी) पर 1 लाख का मौद्रिक दंड लगाया है।

पृष्ठभूमि

31 मार्च 2016 की स्थिति के अनुसार कंपनी की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (आरबीआई एक्ट, 1934) की धारा 45एन के अंतर्गत 16 फरवरी 2017 को संवीक्षा की गई। संवीक्षा के दौरान, यह देखा गया कि बैंक की सहमति लिए बिना कंपनी द्वारा गौण ऋण की उन्मोचन प्रक्रिया में कंपनी द्वारा गौण ऋण पर निदेशों का उल्लंघन किया गया है जोकि डीएनबीआर के 1 जुलाई 2015 के परिपत्र डीएनबीआर. (पीडी).सीसी.सं. 044/03.10.119/2015-16 में निहित अनुदेशों के पैरा 2(1) (xxvi) और बैंक द्वारा 25 अगस्त 2016 को जारी पीडी स्वीकृति निदेश 2016 पर मास्टर परिपत्र के अध्याय II में पैरा 3 की मद (xvii) का उल्लंघन है। दंड लगाने के लिए कंपनी को 7 जून 2017 को कारण बताओ नोटिस (एससीएन) जारी किया गया। एससीएन पर कंपनी का जवाब संतोषप्रद पाया गया। इसके अतिरिक्त भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 58जी(2) के अंतर्गत आरबीआई द्वारा कंपनी की व्यक्तिगत सुनवाई की गई। मामले के तथ्यों और कंपनी के जवाब तथा सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत प्रस्तुति के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि उपर्युक्त उल्लंघन सिद्ध हो गए हैं और कंपनी पर दंड लगाया आवश्यक है। तदनुसार, कंपनी पर 1 लाख का मौद्रिक दंड लगाय गया है।

अजीत प्रसाद
सहायक परामर्शदाता

प्रेस प्रकाशनी : 2017-2018/1633

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