अनुसंधान और आंकड़े

रिज़र्व बैंक में बेहतर, नीति उन्मुखी आर्थिक शोध करने, आंकड़ों का संकलन करने और ज्ञान साझा करने की समृद्ध परंपरा है।

विहंगावलोकन

रिज़र्व बैंक का आर्थिक अनुसंधान संबंधी कार्य निम्‍नलिखित से संबंधित हैं:

  • नीति-निर्माण और निर्णय करने के लिए विश्‍वसनीय और सांख्यिकी आधारित सूचना देना
  • अकादमिक शोध के साथ-साथ सामान्‍य जन के लिए सटीक और समय पर आंकड़ों की आपूर्ति करना
  • शोध संस्‍थाओं/ विश्‍वविद्यालयों को सहयोग पूर्ण शोध के लिए सहायता प्रदान करना
  • सांख्यिकी आंकड़ों की सूचना प्रणाली का विकास करना और उसका रख-रखाव करना
  • मौद्रिक नीति के लिए भविष्‍योन्‍मुखी सर्वेक्षण करना
  • आबादी को शिक्षित करना
  • रिज़र्व बैंक का आर्थिक अनुसंधान घरेलू और अंतरराष्‍ट्रीय समष्टि-आर्थिक मुद्दों के संबंध में अध्‍ययन और उनका विश्‍लेषण करने पर मुख्‍य रूप से ध्‍यान केन्द्रित करता है। यह कार्य मुख्‍य रूप से आर्थिक और नी‍ति अनुसंधान विभाग एवं सांख्यिकी और सूचना प्रबंध विभाग द्वारा किया जाता है।
  • समय बीतने के साथ, रिज़र्व बैंक ने नीति-निर्माणोन्‍मुखी अनुसंधान और प्रभावी तंत्र वाली एक ठोस एवं अच्‍छी प्रथा विकसित की है ताकि आंकड़ों और सूचना का फैलाव किया जा सके। अन्‍य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की भांति ही, रिज़र्व बैंक ने भी अर्थव्‍यवस्‍था, वित्‍त और सांख्यिकी के क्षेत्र में अपनी खुद की अनुसंधान क्षमताएं विकसित की हैं, जो अर्थव्‍यवस्‍था की कार्यप्रणाली तथा नीति संचरण प्रणाली में होने वाले परिवर्तनों को बेहतर रूप से समझने में अपना योगदान देती हैं।

आंतरिक अनुसंधान

आंकड़े, अनुसंधान और संप्रेषण

भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था से संबंधित डाटाबेस


भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम के तहत रिज़र्व बैंक पर यह कानूनी बाध्‍यता है कि वह प्रत्‍येक वर्ष दो रिपोर्ट प्रकाशित करे: वार्षिक रिपोर्ट तथा भारत में बैंकिंग की प्रगति एवं प्रवृत्ति संबंधी रिपोर्ट। इनके अलावा और नियमित आवधिक अंतरालों पर यह विभिन्‍न समितियों की रिपोर्टें, जिनका गठन विशिष्‍ट विषयों के लिए किया जाता है, तथा इसके आंतरिक विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए चर्चा दस्‍तावेजों भी प्र‍काशित करता है। वास्‍तव में, पिछले कई वर्षों से रिज़र्व बैंक अपनी वेबसाइट का उपयोग प्रभावी रूप से दोनों ओर से संप्रेषण करने के लिए भी कर रहा है, जैसे कि नीति में किसी भी प्रकार के महत्‍वपूर्ण परिवर्तन को सबसे पहले अपनी वेबसाइट पर मसौदे के रूप में प्रकाशित करता है और सभी हितधारकों से फीडबैक प्राप्‍त होने के बाद इसे बैंकों को अंतिम दिशानिर्देश के रूप में जारी कर दिया जाता है।

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