मौद्रिक नीति

आर्थिक नीति के अंतिम उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए मौद्रिक नीति केंद्रीय बैंक के नियंत्रण में ब्याज दरों, मुद्रा आपूर्ति और ऋण की उपलब्धता जैसे परिमाणों को विनियमित करने के लिए मौद्रिक साधनों के उपयोग को सूचित करती।

विहंगावलोकन

  • अधिनियम में निर्दिष्ट लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मौद्रिक लिखतों के उपयोग के संबंध में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को दर्शाती है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को मौद्रिक नीति के संचालन की जिम्मेदारी निहित है। यह ज़िम्मेदारी भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत स्पष्ट रूप से अनिवार्य है।

मौद्रिक नीति के लक्ष्य

मौद्रिक नीति ढांचा

मौद्रिक नीति प्रक्रिया

मौद्रिक नीति की लिखतें

खुला और पारदर्शी मौद्रिक नीति निर्माण

विधिक ढांचा


मौद्रिक नीति प्रक्रिया

केंद्र सरकार द्वारा धारा 45ZB के तहत गठित मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) मुद्रास्फीति लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवश्यक पॉलिसी ब्याज दर निर्धारित करता है।

रिज़र्व बैंक का मौद्रिक नीति विभाग (एमपीडी) मौद्रिक नीति निर्माण में एमपीसी की सहायता करता है। अर्थव्यवस्था के सभी स्टेकधारकों के विचारों, और रिज़र्व बैंक के विश्लेषणात्मक कार्य से नीति रिपो दर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में योगदान करता है।

वित्तीय बाजार समिति (एफएमसी) चलनिधि की समीक्षा करने के लिए दैनिक आधार पर बैठक करता है ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि मौद्रिक नीति (भारित औसत ऋण दर) का परिचालन लक्ष्य नीति रिपो दर के करीब रखा जाता है।

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