गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और मूल निवेश कंपनियों के लिए चलनिधि जोखिम प्रबंधन फ्रेमवर्क – जनता की राय के लिए दिशानिर्देश का प्रारूप

दिशानिर्देश का प्रारूप

मूल निवेश कंपनियों (सीआईसी) सहित सभी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी)

महोदया/महोदय

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और मूल निवेश कंपनियों के लिए चलनिधि जोखिम प्रबंधन फ्रेमवर्क – जनता की राय के लिए दिशानिर्देश का प्रारूप

कृपया 01 सितंबर 2016 को जारी मास्टर निदेश- गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी- प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण जमाराशि स्वीकार नहीं करने वाली तथा जमाराशि स्वीकार करने वाली कंपनी (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2016 और मास्टर निदेश- गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी- प्रणालीगत रूप से गैर-महत्वपूर्ण जमाराशि स्वीकार नहीं करने वाली कंपनी (रिज़र्व बैंक) निदेश 2016 के क्रमशः पैराग्राफ 107 और पैराग्राफ 94 का संदर्भ ग्रहण करें।

2. एनबीएफसी के लिए लागू आस्ति देयता प्रबंधन (एएलएम) फ्रेमवर्क के मानक को मजबूत करने और बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है कि एनबीफसी के लिए वर्तमान में लागू चलनिधि जोखिम प्रबंधन पर दिशानिर्देश को संशोधित किया जाए। 1 बिलियन रूपए अथवा इससे अधिक की आस्ति आकार वाली जमाराशि स्वीकार नहीं करने वाली सभी एनबीएफसी, प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण मूल निवेश कंपनियां और जमाराशि स्वीकार करने वाली किसी भी आस्ति-आकार वाली सभी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां नीचे प्रस्तुत चलनिधि जोखिम प्रबंधन दिशानिर्देशों के सेट का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे। प्रत्येक एनबीएफसी के बोर्ड का दायित्व होगा कि वह इन दिशानिर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करे। इन दिशानिर्देशों के अनुसार एनबीएफसी से अपेक्षित आंतरिक नियंत्रण, पर्यवेक्षी पुनरीक्षण के अधीन होंगे। इसके साथ ही, विवेकशीलता को ध्यान में रखते हुए, अन्य सभी एनबीएफसी को भी स्वैच्छिक आधार पर चलनिधि जोखिम प्रबंधन पर जारी इन दिशानिर्देशों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

3. एएलएम फ्रेमवर्क पर एनबीएफसी के लिए लागू वर्तमान विनियामकीय निर्देशों को नीचे जहां पुनर्निर्मित किया गया है, वहीं प्रकटीकरण मानकों सहित कुछ नए मानदंडों को जोड़ा गया है। जहां विस्तृत दिशानिर्देश को अनुलग्नक ए में दिया गया है, वहीं महत्त्वपूर्ण परिवर्तन निम्नानुसार हैं-

i) विस्तॄत परिपक्वता बकेट और सहन सीमाएं

संरचनात्मक चलनिधि विवरण में 1-30 दिन के समयावधि बकेट को विस्तार देकर 1-7 दिनों, 8-14 दिनों और 15-30 दिनों के सुक्ष्म बकेटों में बांट दिया गया है। 1-7 दिनों, 8-14 दिनों और 15-30 दिनों के परिपक्वता बकेट में निवल संचयी ऋणात्मक असंतुलन, तत्सम्बन्धी अवधि बकेट में संचयी नकदी प्रवाह के क्रमशः 10%, 10% और 20% से अधिक नहीं होना चाहिए। एनबीएफसी को तथापि, 1 वर्ष तक के सभी अन्य अवधि बकेट के संचयी असंतुलन (चालू कुल) पर निगरानी के लिए अपने बोर्ड के अनुमोदन से आंतरिक विवेकपूर्ण सीमाएं स्थापित करनी होगी। अवधि बकेट में उक्त सुक्ष्मता एनबीएफसी द्वारा प्रस्तुत किये जाने वाले अपेक्षित ब्याज दर संवेदनशीलता विवरण पर भी लागू होगी।

ii) चलनिधि जोखिम निगरानी के साधन

एनबीएफसी चलनिधि स्थिति में तनाव, यदि कोई हो, को मापने के लिए चलनिधि जोखिम निगरानी साधन/मेट्रिक्स को अपनाएंगे। ऐसे निगरानी साधनों में ए) प्रतिपक्षकार/ लिखत /मुद्रा द्वारा निधियन के संकेंद्रण, बी) भार-रहित आस्तियों की उपलब्धता जिसे निधि उपलब्ध कराने के लिए प्रतिभूति के रूप में प्रयोग किया जा सकता है; और, सी) बाजार मूल्य-और-बही मूल्य अनुपात, उठाये गए कर्ज पर कूपन दर, दंड एवं विनियामकीय चलनिधि अपेक्षाओं के उल्लंघन के लिए विनियामकीय दंड जैसे कुछ पूर्व चेतावनी बाजार-आधारित संकेतक शामिल किया जाना चाहिए। एनबीएफसी के बोर्ड को इस संबंध में आवश्यक आंतरिक निगरानी व्यवस्था करनी चाहिए।

iii) चलनिधि हेतु “स्टॉक” अप्रोच को अपनाना

संरचनात्मक और गतिमान चलनिधि के मापन के साथ-साथ एनबीएफसी को यह निर्देश दिया जाता है कि वे चलनिधि हेतु “स्टॉक” अप्रोच पर आधारित चलनिधि जोखिम के निगरानी को भी अपनाएं। यह निगरानी चलनिधि जोखिम से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण अनुपातों के लिए बोर्ड द्वारा तय पूर्वनिर्धारित आंतरिक सीमाओं द्वारा की जाएगी। परिचायक चलनिधि अनुपात के तौर पर, लघु-अवधि देयता और कुल आस्ति अनुपात; लघु-अवधि देयता और दीर्घावधि आस्तियों का अनुपात; वाणिज्यिक पत्र और कुल आस्ति अनुपात; अपरिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) (मूल परिपक्वता एक वर्ष से कम) और कुल आस्तियों का अनुपात; लघु-अवधि देयता और कुल देयता अनुपात; दीर्घावधि आस्ति और कुल आस्ति का अनुपात, इत्यादि हैं।

iv) चलनिधि जोखिम प्रबंधन सिद्धान्तों को अधिक विस्तृत करना

एएलएम फ्रेमवर्क के महत्त्वपूर्ण घटकों पर वर्तमान निर्देशों से संबंधित चलनिधि जोखिम प्रबंधन के साथ-साथ यह निर्णय लिया गया है कि चलनिधि जोखिम की निगरानी और उसके मापन के अन्य पहलुओं, यथा, तुलन पत्र से इतर और आकस्मिक देयताएं, तनाव-जांच, अंतरा-समूह निधि अंतरण, निधियन का विकेंद्रीकरण, प्रतिभूति स्थिति प्रबंधन और आकस्मिक निधियन योजना के लागू सुसंगत सिद्धांतों को भी विस्तृत (एक्सटेंड) किया जाए।

चलनिधि कवरेज अनुपात को लाना

4. 50 बिलियन रूपए अथवा उससे अधिक आस्ति आकार वाली जमाराशि स्वीकार नहीं करने वाली सभी एनबीएफसी और किसी भी आस्ति आकार वाली जमाराशि स्वीकार करने वाली सभी एनबीएफसी चलनिधि कवरेज अनुपात (एलसीआर) की शर्तों के अनुसार चलनिधि बफर बनाए रखेंगी, जो 30 दिनों के लिए किसी भी विकट चलनिधि दबाव की स्थिति में सुरक्षित रहने के लिए उनके पास पर्याप्त उच्च गुणवत्ता चलनिधि आस्ति(एचक्युएलए) की उपलब्धता सुनिश्चित करके संभाव्य चलनिधि संकट में आघात-सहनीयता को प्रोत्साहित करेगा। एनबीएफसी द्वारा बनाए रखे जाने वाले एचक्युएलए का स्टॉक अगले 30 कैलेंडर दिवस तक कुल निवल नकदी बहिर्गमन का कम से कम 100% होगा। यह एलसीआर आवश्यकता एनबीएफसी पर 01 अप्रैल 2020 से बाध्यकारी होगी, जोकि शुरुआत में एलसीआर के 60% होगी और नीचे दर्शाये समय-सीमा के अनुसार 01 अप्रैल 2024 तक 100% के अपेक्षित स्तर तक पहुंचेगी:

से 01 अप्रैल 2020 01 अप्रैल 2021 01 अप्रैल 2022 01 अप्रैल 2023 01 अप्रैल 2024
न्यूनतम एलसीआर 60% 70% 80% 90% 100%

प्रकटीकरण मानकों सहित एलसीआर पर विस्तृत दिशानिर्देशों का प्रारूप अनुलग्नक बी में दिया है।

5. उक्त दिशानिर्देश का प्रारूप एनबीएफसी, बाजार के प्रतिभागियों और अन्य हिस्सेदारों की राय जानने के लिए पब्लिक डोमेन में रखा गया है। इस संबंध में प्रतिपुष्टि ईमेल द्वारा 14 जून 2019 तक भेजा जा सकता है।

भवदीय

(मनोरंजन मिश्रा)
मुख्य महाप्रबंधक


अनुबंध-ए

चलनिधि जोखिम प्रबंधन1 रुपरेखा पर दिशानिर्देश.

जमा स्वीकार न करने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां जिनकी आस्ति 1 बिलियन ( 100 करोड़) और इससे अधिक की हो, प्रणालीगत रूप से महत्तवपूर्ण इकाई निवेश कंपनियां और जमा स्वीकार करने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां नीचे उल्लेख किए गए दिशानिर्देशों का अनिवार्य रूप से अनुपालन करेंगी। यह बोर्ड की जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि इन दिशानिर्देशों का अनुपालन किया जा रहा है। इन दिशानिर्देशों के अनुसार गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों द्वारा स्थापित किया जाने वाला आंतरिक नियंत्रण पर्यवेक्षी समीक्षा के अधिन होगा। इसके अतिरिक्त विवेक को ध्यान में रखते हुए अन्य गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को चलनिधि जोखिम प्रबंधन पर इन दिशानिर्देशों को ऐच्छिक आधार पर अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। यह दिशानिर्देश चलनिधि जोखिम प्रबंधन रुपरेखा की निम्नलिखित पहलुओं को संबोधित करता हैः

क) चलनिधि जोखिम प्रबंधन नीति, कार्यनीति और कार्य-प्रणालियां
ख) प्रबंधन सूचना तंत्र (एम.आई.एस)
ग) आंतरिक नियंत्रण
घ) परिपक्वता रूपरेखा
ङ) चलनिधि जोखिम प्रबंधन-स्टॉक दृष्टिकोण
च) करेंसी जोखिम
छ) ब्याज दर जोखिम का प्रबंधन
ज) चलनिधि जोखिम निगरानी के साधन

क. चलनिधि जोखिम प्रबंधन नीति, कार्यनीति और कार्य-प्रणालियां

स्वस्थ एवं सुदृढ़ चलनिधि जोखिम प्रबंधन प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के बोर्ड चलनिधि जोखिम प्रबंधन तंत्र तैयार करे जो यह सुनिश्चित करता हो कि संबंधित एनबीएफसी पर्याप्त चलनिधि2 बनाए रखती है तथा इसमें ऋण भार रहित, उच्च गुणवता वाली तरल आस्तियां की गुंजाइश है जिससे कि यह विभिन्न प्रकार की दबाव घटनाओं जिनमें जमानती और गैर जमानती वित्तपोषण स्रोतों की हानि या नुकसान भी शामिल है का सामना कर सके। यह संस्था के स्तर पर चलनिधि जोखिम सहनशीलता, वित्त पोषण की कार्यनीति, विवेकपूर्ण सीमाएं, चलनिधि की माप, आकलन, रिपोर्टिंग / समीक्षा करने की प्रणाली, दबाव जांच हेतु तंत्र, वैकल्पिक परिदृश्य / औपचारिक आकस्मिक निधि योजना, प्रबंधन रिपोर्टिंग की प्रकृति एवं आवृत्ति, चलनिधि प्रक्षेपण में इस्तेमाल किए गए धारणा की आवधिक समीक्षा इत्यादि की स्पष्ट व्याख्या करता हो।

चलनिधि जोखिम प्रबंधन तंत्र के मुख्य तत्व नीचे प्रस्तुत हैः-

i) चलनिधि जोखिम प्रबंधन का प्रशासनः

किसी भी जोखिम प्रबंधन प्रकिया के सफलतापूर्वक लागू करने का दायित्व एनबीएफसी के उच्च प्रबंधन का है तथा उसे आधारभूत परिचालन एवं कार्यनीति निर्णय प्रक्रिया को जोखिम प्रबंधन से एकीकृत करने के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता प्रदर्शित करनी होगी। चलनिधि जोखिम प्रबंधन के लिए वांछनीय संगठनात्मक ढाँचा निम्नानुसार होगा:

क) निदेशक बोर्डः चलनिधि जोखिम के प्रबंधन की सम्पूर्ण जिम्मेदारी निदेशक बोर्ड की होगी। बोर्ड अपने द्वारा निर्धारित चलनिधि जोखिम सहनशीलता/सीमाओं के अनुसार चलनिधि जोखिम के प्रबंधन हेतु एनबीएफसी की कार्यनीति, कार्ययोजना, कार्य-पद्धतियां तय करे।

ख) जोखिम प्रबंधन समितिः जोखिम प्रबंधन समिति बोर्ड को रिपोर्ट करती है तथा यह मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ)/प्रबंध निदेशक एवं विभिन्न जोखिम वर्टिकल के प्रमुखों से मिलकर बना होता है। यह समिति चलनिधि जोखिम सहित एनबीएफसी द्वारा सामना किए जाने वाले सम्पूर्ण जोखिम के मूल्यांकन के लिए जवाबदेह होगा।

ग) आस्ति-देयता प्रबंधन समिति (ए.एल.सी.ओ) - ए.एल.सी.ओ में एनबीएफसी के उच्च प्रबंधन तंत्र शामिल रहेंगे। ए.एल.सी.ओ की जिम्मेदारी होगी कि वह बोर्ड द्वारा निर्धारित जोखिम सहनशीलता/सीमा का अनुपालन सुनिश्चित करे तथा साथ ही एनबीएफसी की चलनिधि जोखिम प्रबंधन कार्यनीति को भी लागू करे। सीईओ/एम.डी या कार्यपालक निदेशक (ईडी) समिति के अध्यक्ष होंगे। निवेश, क्रेडिट, संसाधान प्रबंधन या आयोजना, निधि प्रबंधन/कोष (विदेशी विनिमय /घरेलू), इंटरनेशनल बैंकिंग एवं आर्थिक अनुसंधान के प्रमुख समिति के सदस्य होंगे। चलनिधि जोखिम के संदर्भ में ए.एल.सी.ओ की भूमिका में अन्य बातों के साथ-साथ वांछित परिपक्वता प्रोफाइल एवं वृद्धिशील संपत्ति एवं देयताओं के मिश्रण, वित्तपोषण के स्रोत के रूप में आस्ति की बिक्री, चलनिधि जोखिम प्रबंधन के लिए संरचना, उत्तरदायित्व एवं नियंत्रण पर निर्णय लेना और सभी शाखाओं की चलनिधि स्थिति पर नजर रखना भी शामिल रहेंगें।

घ) आस्ति देयता प्रबंधन (ए.एल.एम) सहयोग समूहः- ए.एल.एम सहयोग समूह में परिचालन स्टाफ होंगे तथा यह चलनिधि जोखिम प्रोफाइल के विश्लेषण, निगरानी और ए.एल.सी.ओ को रिपोर्टिंग के लिए उत्तरदायी होगा। ऐसी सहायता समूहों का गठन एनबीएफसी में चलनिधि जोखिम प्रबंधन के आकार एवं जटिलता पर निर्भर करेगा। एनबीएफसी द्वारा नियुक्त मुख्य जोखिम अधिकारी दिनांक 16.05.2019 को जारी हमारा परिपत्र DNBR(PD)CC.No.099/03.10.001/2018-19 का संदर्भ लेते हुए चलनिधि जोखिम की पहचान करने, आकलन करने एवं उसे कम करने की प्रक्रिया में शामिल रहेंगे।

ii) चलनिधि जोखिम सहनशीलता एनबीएफसी के पास चलनिधि जोखिम की पहचान करने, मापन करने, निगरानी करने एवं नियंत्रित करने के लिए सुदृढ़ प्रक्रिया होनी चाहिए। इसे स्पष्ट रूप से चलनिधि जोखिम सहनशीलता अपनानी चाहिए जो इसके व्यवसायिक कार्यनीति और वित्तीय प्रणाली में इसकी भूमिका के अनुसार उचित हो। वरिष्ठ प्रबंधन इस प्रकार के जोखिम सहनशीलता के अनुसार चलनिधि जोखिम के प्रबंधन के लिए कार्यनीति तैयार करे तथा एनबीएफसी द्वारा पर्याप्त चलनिधि बनाए रखना सुनिश्चित करे।

iii) चलनिधि लागत, लाभ एवं आंतरिक मूल्य निर्धारण में जोखिमः- एनबीएफसी द्वारा चलनिधि लागत एवं लाभ की मात्रा निर्धारित करने की प्रक्रिया विकसित करने का प्रयास किया जाना चाहिए ताकि इसे आंतरिक उत्पाद मूल्य निर्धारण, प्रदर्शन माप, सभी भौतिक बिजनेस लाइन, उत्पाद एवं गतिविधियों के लिए नव उत्पाद अनुमोदन प्रक्रिया में शामिल किया जा सके।

iv) तुलन पत्र से इतर ऋण जोखिम तथा आकस्मिक देयताएः चलनिधि जोखिम की पहचान करने, माप करने , निगरानी करने एवं नियंत्रित करने की प्रक्रिया में उचित समय सीमा के दौरान आस्तियों, देयताओं, एवं तुलन पत्र से इतर के मदों से उत्पन्न होने वाली नकदी प्रवाह को व्यापक रूप से प्रक्षेपित करने के लिए सुदृढ़ तंत्र को भी शामिल किया जाना चाहिए। दबाव के समय क्रियान्वित किये जाने के समय अनेक एनबीएफसी द्वारा चलनिधि जोखिमों की पहचान करने में होने वाली कठिनाईयों को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रयोजन माध्यम, वित्तीय व्युत्पन्नियाँ तथा गारंटी एवं प्रतिबद्धता के संबंध में कुछ विशेष प्रकार के तुलन पत्र से इतर चलनिधि जोखिमों के प्रबंधन पर विषेश रूप से महत्व देना।

v) वित्तपोषण कार्यनीतिः- विविध वित्तपोषण

एनबीएफसी को वित्तपोषण कार्यनीति स्थापित करना चाहिए जो वित्तपोषण के स्रोत और परिपक्वता काल में प्रभावी विविधिकरण प्रदान करती हो। वित्तपोषण स्रोत के प्रभावी विविधिकरण को बढ़ावा देने के लिए इसे अपने चयनित वित्तपोषण मार्केट में वर्तमान उपस्थिति और निधि प्रदाताओं से अपने मजबूत संबंध बनाए रखना चाहिए। एनबीएफसी को प्रत्येक स्रोत से शीघ्रता से निधि एकत्र करने की अपनी क्षमता का नियमित रूप से आकलन करते रहना चाहिए। वित्तपोषण के एकल स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता नहीं होनी चाहिए। वित्तपोषण कार्यनीति में विशिष्ट बाजार स्थितियों में जमा निकासी (जमा स्वीकार करने वाली कंपनियों के लिए) के केंद्रित व्यवहार का गुणात्मक आयाम और विशिष्ट व्यावसायिक मॉडल के कारण वित्तपोषण के अन्य स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता का भी ध्यान रखना चाहिए।

vi) संपार्श्विक स्थिति प्रबंधनः— एनबीएफसी द्वारा ऋणग्रस्त और गैर -ऋणग्रस्त संपत्तियों को पृथक करके अपनी सांपर्श्विक स्थिति का सक्रियता से प्रबंध करना चाहिए। इसे विधिक इकाई और भौतिक जगह जहां सांपर्श्विक रखा गया है कि निगरानी करनी चाहिए और इसे समयबद्ध तरीके से कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है पर विचार करना चाहिए। इसके अतिरिक्त एक एनबीएफसी के पास अपने अपेक्षित एवं अनपेक्षित ऋण आवश्यकताओं तथा विभिन्न समयावधि में मार्जिन आवश्यकताओं में संभावित वृद्धि को पूरा करने के लिए पर्याप्त संपार्श्विक होना चाहिए।

vii) दबाव परीक्षणः दबाव परीक्षण सम्पूर्ण शासन प्रणाली तथा चलनिधि जोखिम प्रबंधन संस्कृति का अभिन्न अंग होना चाहिए। एनबीएफसी द्वारा विविध प्रकार के अल्पावधि और प्रलंबित एनबीएफसी विनिर्दिष्ट और पूरे बाजार में दबाव परिदृश्य (अलग-अलग एवं संयुक्त रूप से) का नियमित आधार पर दबाबा जांच की जानी चाहिए। चलनिधि दबाव परिदृश्य की रूपरेखा तैयार करते समय, एनबीएफसी व्यवसाय, गतिविधियों एवं अरक्षितता पर भी विचार किया जाना चाहिए ताकि परिदृश्य में प्रमुख वित्तपोषण एवं बाजार चलनिधि जोखिम जिससे एनबीएफसी असुरक्षित हैं को भी शामिल किया जा सके।

viii) आकस्मिक वित्तपोषण योजनाः गंभीर व्यवधानों का सामना करने के लिए एनबीएफसी द्वारा आकस्मिक वित्तपोषण योजना तैयार की जानी चाहिए, जो एनबीएफसी की समयबद्ध तरीके और उचित लागत पर अपनी गतिविधियों में से कुछ या सभी के वित्तपोषण की उसकी क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं । आकस्मिक योजना में उपलब्ध /संभावित आकस्मिक वित्तपोषण स्रोतों और राशि/अनुमानित राशि जो इन स्रोतों से आहरित की जा सके, पूर्ण प्रसार/ प्राथमिकता प्रक्रियाओं जिनमें इनमें से प्रत्येक प्रक्रियाओं को कब और कैसे सक्रिय किया जा सकता है और सक्रिय किया जाना चाहिए का विवरण और प्रत्येक आकस्मिक स्रोत से अतिरिक्त निधि प्राप्त करने के लिए आवश्यक समय –सीमा का विस्तार से उल्लेख होना चाहिए।

ix) सार्वजनिक प्रकटिकरणः एनबीएफसी नियमित आधार से सूचनाओं का सावर्जनिक प्रकटिकरण करे (अनुलग्नक 1) ताकि बाजार प्रतिभागी एनबीएफसी के चलनिधि जोखिम प्रबंधन तंत्र और चलनिधि स्थिति की सुदृढ़ता के बारे में प्रमाणिक निर्णय ले सकें।

x) अंतःसमूह अंतरणः-

अंतः समूह लेन-देन और ऋण जोखिम (आईटीई) के कारण संभावित रूप से बढ़े हुए जोखिम की पहचान करने के उद्देश्य से समूह मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) से अपेक्षा की जाती है वह समूह की जटिलता, जोखिम प्रोफाइल और परिचालन अवसर के अनुरूप चलनिधि प्रबंधन प्रक्रिया और वित्तपोषण कार्यक्रम तैयार करे और उसे बनाए रखे। समूह चलनिधि जोखिम प्रबंधन प्रक्रिया और कार्यक्रमों से अपेक्षा की जाती है वे ऋण, निवेश एवं अन्य गतिविधियों का भी ध्यान रखें तथा यह सुनिश्चि करें कि शीर्ष और समूह के भीतर प्रत्येक घटक संस्था में पर्याप्त चलनिधि उपलब्ध रहे। इन प्रक्रियाओं और कार्यक्रम में वास्तविक और संभावित अवरोधों को शामिल किया जाना चाहिए, जिनमें इन इकाइयों के मध्य और इन इकाइयों और मुख्य इकाई के मध्य निधि अंतरण पर विधिक और नियामक बाधाओं को भी पूर्ण रूप से सम्मिलित किया जाना चाहिए।

ख) प्रबंधन सूचना प्रणाली (एम.आई.एस): एनबीएफसी के पास विश्वसनीय एम.आई.एस होना चाहिए जो सामान्य और दबाव दोनों ही स्थितियों में बोर्ड और ए.एल.सी.ओ को एनबीएफसी और समूह की चलनिधि स्थिति की समय पर और प्रगतिशील सूचना देने में सक्षम हो। इसमें आकस्मिक जोखिम और नई गतिविधियों के कारण प्रकट हो रहे जोखिम सहित चलनिधि जोखिम के समस्त स्रोत शामिल किए जाने चाहिए तथा इसमें दबाव के दौरान अधिक विस्तृत एवं समय-संवेदनशील सूचना प्रस्तुत करने की क्षमता होनी चाहिए।

ग) आंतरिक नियंत्रणः चलनिधि जोखिम नियमों और प्रक्रियाओं का अनुपलान सुनिश्चित करने के लिए एनबीएफसी के पास उचित आंतरिक नियंत्रण, प्रणाली और प्रक्रिया होनी चाहिए। प्रबंधन यह सुनिश्चित करे कि एक स्वतंत्र पार्टी एनबीएफसी के चलनिधि जोखिम प्रबंधन प्रक्रिया के विभिन्न भागों का नियमित रूप से समीक्षा और मूल्यांकन करे।

घ) परिपक्वता प्रोफाइलिंगः-

(क) निवल वित्तपोषण आवश्यकताओं की माप करने और इसका प्रबंध करने के लिए परिपक्वता सीढ़ी और किसी चयनित परिपक्वता तिथि को समेकित अधिशेष या अभाव की गणना एक मानक साधन के रूप में अपनाई जाती है। परिपक्वता प्रोफाइल का इस्तेमाल विभिन्न टाइम बकेट में एन.बी,एफ.सी के भविष्य में नकद प्रवाह मापने में किया जाना चाहिए। टाइम बकेट निम्नानुसार विभाजित किया जाना चाहिएः-

  1. 1 दिन से 7 दिन

  2. 8 दिन से 14 दिन

  3. 15 दिन से 30/31 दिन (1 माह)

  4. 1 माह से अधिक और 2 माह तक

  5. 2 माह से अधिक और 3 माह तक

  6. 3 माह से अधिक और 6 माह तक

  7. 6 माह से अधिक और 1 वर्ष तक

  8. 1 वर्ष से अधिक और 3 वर्ष तक

  9. 3 वर्ष से अधिक और 5 वर्ष तक

  10. 5 वर्ष से अधिक

(ख) एनबीएफसी अपने निवेश पोर्टफोलियों में प्रतिभूतियों को व्यापक रूप से आवश्यक प्रतिभूतियों (विधिक दायित्व के अधीन) या अन्य अनावश्यक प्रतिभूतियों के रूप में वर्गीकृत करे। यदि, एनबीएफसी सार्वजनिक जमा धारण नहीं कर रही है तो प्रतिभूतियों में सभी निवेश, सार्वजनिक जमा धारण कर रही एनबीएफसी है तो अधिशेष प्रतिभूति (आवश्यकता के अतिरिक्त धारण किया गया) अनावश्यक प्रतिभूतियों की श्रेणी में वर्गीकृत की जाएगी। वैकल्पिक रूप से एन.बी.एफ.सी, वर्तमान निर्देशों के अनुसार ट्रेडिंग बुक की अवधारणा का भी पालन किया जा सकता है।

(ग) प्रत्येक टाइम बकेट के अंदर नकदी के अन्तर्वाह एवं बहिर्प्रवाह के आधार पर असंतुलन हो सकता है। यद्यपि एक वर्ष तक का असंतुलन नियंत्रित करना उचित होगा क्योंकि यह आने वाले चलनिधि समस्या की प्रारम्भिक चेतावनी प्रदान करता है। मुख्य फोकस अल्पावधि असंतुलन यथा -1 से 30/31 दिनों के बकेट पर होना चाहिए। 1-07 दिन, 8-14 दिन एवं 15-30 दिन के परिपक्वता बकेट में संरचनात्मक चलनिधि विवरण में निवल संचयी नकरात्मक असंतुलन संबंधी टाइम बकेट में संचयी नकदी बहिप्रवाह 10%, 10% एवं 20% से अधिक नहीं होना चाहिए। तथापि, एनबीएफसी से यह अपेक्षित है कि वे बोर्ड की अनुमति से आंतरिक विवेकपूर्ण सीमाएं निर्धारित कर अन्य सभी टाइम बकेट में 1 वर्ष तक के संचयी असंतुलन (कुल क्रियाशील) की निगरानी करें। एनबीएफसी अपने संयुक्त परिचालन के लिए भी अपने संरचनात्मक चलनिधि विवरण के लिए उपरोक्त संचयी असंतुलन सीमा को अपनाएं।

(घ) संरचनात्मक चलनिधि का विवरण सभी नकदी अंतर्वाहों एवं बहिर्प्रवाहों को नकदी प्रवाह के अनुमानित समय के अनुसार परिपक्वता क्रम में रखकर तैयार किया जाए। अवधिपूर्ण देयता को नकदी बहिर्प्रवाह मानी जाए और अवधिपूर्ण आस्ति को नकदी अंतर्वाह मानी जाए।

(ङ) 1 दिन से 6 माह तक की समय सीमा पर गतिशील आधार पर अपने अल्पावधि चलनिधि की निगरानी करने में एनबीएफसी को सक्षम बनाने हेतु, एनबीएफसी अपने अल्पकालिक चलनिधि प्रोफाइल का आकलन व्यावसायिक प्रोजेक्शन और योजना उद्देश्य के लिए अन्य प्रतिबद्धताओं के आधार पर करें।

ङ. चलनिधि जोखिम प्रबंधन- स्टॉक एप्रोच

एनबीएफसी आंतरिक रूप से परिभाषित सीमा जैसा कि उनके बोर्ड द्वारा अनुमोदित किया गया है स्थापित कर चलनिधि जोखिम आंकलन एवं इस संबध में निश्चित महत्वपूर्ण अनुपात की निगरानी हेतु स्टॉक एप्रोच अपनाए। अनुपात एवं आंतरिक सीमा एनबीएफसी के चलनिधि जोखिम प्रबंधन क्षमताओं, अनुभव एवं प्रोफाइल पर आधारित होना चाहिए। निगरानी किए जाने योग्य निश्चित महत्वपूर्ण अनुपात की सूचनात्मक सूची में शामिल हैं कुल आस्तियों के लिए अलपावधि देयताएं, दीर्घकालिक आस्तियों के लिए अल्पावधि देयताएं, कुल आस्तियों के लिए वाणिज्यिक पत्र, कुल आस्तियों के लिए अपरिवर्तनीय ऋण- पत्र (Non-convertible debentures), (एक वर्ष से कम की मूल परिपक्वता), कुल देयताओं के लिए अल्पावधि देयताएं, कुल आस्तियों के लिए दीर्घावधि आस्तियां इत्यादि।

च. करेंसी जोखिमः ऐसी एनबीएफसी जिनके तुलन पत्र में विदेशी आस्तियां या देयताएं हैं, उनके जोखिम प्रोफाइल को विनिमय दर में उतार-चढ़ाव एक नया आयाम प्रदान करती है। एनबीएफसी के बोर्ड को ऐसे ऋण जोखिम से पैदा होने वाली चलनिधि जोखिम की पहचान करनी चाहिए तथा जोखिम के प्रबंधन के लिए उचित तत्परता विकसीत करनी चाहिए।

छ. ब्याजदर जोखिम प्रबंधन (आईआरआर) – एनबीएफसी वर्तमान नियामक निर्देशों के अनुसार ब्याज दर जोखिम का प्रबंध करेगी।

ज. चलनिधि जोखिम निगरानी टूलः संरचनात्मक चलनिधि विवरण वर्तमान में निर्धारित निगरानी टूल में से एक है। इसके अतिरिक्त चलनिधि आवश्यकताओं की आंतरिक निगरानी के लिए एनबीएफसी के बोर्ड द्वारा निम्न साधन अपनाए जाने चाहिएः-

क. वित्तपोषण का सकेन्द्रणः इस मेट्रिक का उद्देश्य वित्तपोषण के उन महत्वपूर्ण स्रोतों की पहचान करना है जिनके आहरण से चलनिधि समस्या पैदा हो सकती है। यह मेट्रिक वित्तपोषण स्रोतों के विविधिकरण और महत्वपूर्ण प्रतिपक्षकार में से प्रत्येक की निगरानी, महत्वपूर्ण उत्पाद/ प्रपत्र एवं महत्वपूर्ण मुद्रा की निगरानी को प्रोत्साहित करता है।

ख. उपलब्ध भार रहित आस्तियाः यह मेट्रिक, उपलब्ध भार रहित आस्तियों, जिन्हें द्वितीय बाजार से अतिरिक्त सुरक्षित वित्तपोषण एकत्र करने के लिए संपार्श्विक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है पर महत्वपूर्ण सूचना प्रदान करती है। यह मेट्रिक उपलब्ध भार रहित आस्तियों की राशि, प्रकार एवं स्थान, द्वितीय बाजार में सुरक्षित उधारी के लिए संपार्श्विक का काम करने वालों का विवरण प्रदान करेगा।

ग. बाजार संबंधित निगरानी का संधानः

1) इसमें उच्च तीव्रता (हाई फ्रिक्वेंसी) मार्केट डाटा शामिल है जिसे एनबीएफसी में संभावित चलनिधि बाधाओं की निगरानी में प्रारम्भिक चेतावनी संकेतक के रूप में प्रयोग में लाया जा सकता है।

2) इस उद्देश्य के लिए गठित बोर्ड/समिति अपने बुक इक्विटी अनुपात और कूपन जिसमें उनके द्वारा लिए गए दीर्घ एवं अल्पकालिक ऋणों में तबदीलियों की मासिक आधार पर निगरानी करें। इसमें नियामक चलनिधि आवश्यकताओं के संबंध उल्लंघन/दण्ड, यदि कोई हो कि सूचना भी शामिल है।


अनुलग्नक बी

चलनिधि कवरेज अनुपात (एलसीआर)

1) प्रयोज्यता

इन दिशानिर्देशों के अनुलग्नक ‘ए’ में दिये गए शर्तों के अतिरिक्त, 50 बिलियन रूपए से अधिक आस्ति आकार वाली जमाराशि स्वीकार नहीं करने वाली प्रणालीगत महत्त्वपूर्ण सभी एनबीएफसी और जमाराशि स्वीकार करने वाली सभी एनबीएफसी चलनिधि कवरेज अनुपात (एलसीआर) की गणना करते समय निम्नलिखित दिशानिर्देशों का भी पालन करेंगे।

2) परिभाषाएं

ए) इन निदेश के लिए, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, शर्तों का अर्थ निम्नलिखित अनुसार होगा –

i. “उच्च गुणवत्ता चल आस्तियां (एचक्युएलए)” का तात्पर्य ऐसे चल आस्तियों से है, जिसे तत्काल बेचा जा सकता है अथवा जिसे बहुत कम अथवा मूल्य कम किये बिना नकदी में परिणत किया जा सकता है अथवा दबाव की स्थिति में निधियां प्राप्त करने के लिए संपार्श्विक के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।

ii. चलनिधि कवरेज़ अनुपात (एलसीआर) को निम्नलिखित अनुपात के रूप में व्यक्त किया जाता हैः

iii. “भार-रहित” का तात्पर्य है, आस्तियों के परिसमापन, विक्री, हस्तांतरण अथवा प्रदान करने के संबंध में एनबीएफसी की क्षमता पर किसी विधिक, विनियामकीय, अनुबंधकीय अथवा अन्य कोई प्रतिबंध नहीं हो।

B) प्रयुक्त उन सभी उक्तियों के अर्थ, जिन्हें यहां परिभाषित नहीं किया गया है, वे भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की परिभाषा के अनुरूप, अथवा उस अधिनियम में उक्त संबंधित परिभाषा में आए हुए वैधानिक संशोधन के अनुरूप, अथवा वाणिज्यिक बोल-चाल के अनुरूप होंगे।

3) सामान्य दिशानिर्देश

ए) इन निदेशों के अनुरूप एनबीएफसी अपने पास पर्याप्त भाररहित उच्च गुणवत्ता आस्ति (एचक्युएलए) की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे जिससे 30 कैलेंडर दिवसों के लिए किसी भी विकट चलनिधि दबाव की स्थिति में चलनिधि की आवश्यकता को पूरा करने के लिए नकद में परिवर्तित किया जा सकता है।

बी) चलनिधि जोखिम की निगरानी और नियंत्रण के लिए एलसीआर कोनीचे(सी) में दिये अनुसार सतत रूप से बनाए रखना होगा|

सी) यह एलसीआर आवश्यकता एनबीएफसी पर 01 अप्रैल 2020 से बाध्यकारी होगी, जोकि शुरुआत में एलसीआर के 60% होगी और नीचे दर्शाये समय-सीमा के अनुसार 01 अप्रैल 2024 तक 100% के अपेक्षित स्तर तक पहुंचेगी:

से 01 अप्रैल 2020 01 अप्रैल 2021 01 अप्रैल 2022 01 अप्रैल 2023 01 अप्रैल 2024
न्यूनतम एलसीआर 60% 70% 80% 90% 100%

डी) यह एलसीआर 1 अप्रैल 2024 अर्थात फेज-इन अवधि के अंत से न्यूनतम 100% (अर्थात एचक्युएलए का स्टॉक कम से कम कुल नकद बहिर्गमन के समान होगा) बना रहेगा।

बशर्ते वित्तीय दबाव की अवधि के दौरान एनबीएफसी को अपने एचक्युएलए के स्टॉक का उपयोग करने की अनुमति है, जिससे उस दौरान उनका एलसीआर 100% से कम होगा।

बशर्ते इसके पश्चात एनबीएफसी वित्तीय दबाव की अवधि के दौरान एचक्युएलए के स्टॉक के इस प्रकार के उपयोग तथा इसके कारणों और इस स्थिति को ठीक करने के लिए किये जाने वाले सुधारात्मक कार्रवाई का ब्योरा, आरबीआई (गैर बैंकिंग विनियमन विभाग और गैर बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग) को रिपोर्ट करेगी।

ई) एलसीआर के लिए, दबाव वाली स्थिति के तौर पर, एक संयुक्‍त सनकपूर्ण और बाजार-व्‍याप्‍त आघात शामिल किया गया है, जिसके परिणाम के रूप में:

  1. जमाराशि का एक भाग निकल जाना (जमाराशि स्वीकार करने वाली कंपनियों के मामले में);

  2. गैर-जमानती थोक निधीयन क्षमता में आंशिक हानि;

  3. कुछ संपार्श्विक और प्रतिपक्षकारों के साथ जमानती अल्‍पकालीन निधीयन में आंशिक हानि;

  4. एनबीएफसी की सार्वजनिक क्रेडिट रेटिंग में गिरावट के कारण उत्‍पन्‍न अतिरिक्‍त संविदागत बहिर्प्रवाह, जैसे संपार्श्विक रक्कम बढ़ाने की अपेक्षा;

  5. बाजार के उतार-चढ़ावों में वृद्धि, जो संपार्श्विक या व्‍युत्‍पन्‍नी स्थितियों के संभाव्‍य भावी एक्‍सपोजर की गुणवत्‍ता को प्रभावित करेंगे और इसलिए अधिक बड़े संपार्श्विक हेअरकट या अतिरिक्‍त संपार्श्विक की आवश्‍यकता तैयार होना या अन्‍य चलनिधि आवश्‍यकता उत्पन्न होना;

  6. एनबीएफसी द्वारा अपने ग्राहकों को उपलब्‍ध कराई गई प्रतिबद्ध किंतु अप्रयुक्त ऋण और चलनिधि सुविधाओं का अनियत आहरण; तथा

  7. एनबीएफसी के लिए प्रतिष्‍ठा संबंधी जोखिम कम करने की दृष्टि से ऋण की वापसी खरीद या गैर-संविदागत दायित्‍वों को निभाने की संभाव्‍य आवश्‍यकता।

4) उच्‍च गुणवत्‍ता वाली चलआस्तियां

ए) चल आस्तियों में उच्‍च गुणवत्‍ता वाली आस्तियां समाविष्‍ट हैं, जिन्‍हें विभिन्‍न प्रकार के दबाव परिदृश्‍यों में निधियां प्राप्‍त करने के लिए आसानी से बेचा या संपार्श्विक के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। इन्‍हें भारमुक्‍त होना चाहिए। यदि आस्तियों को मूल्‍य की कम या बिल्‍कुल हानि के बिना आसानी से और तुरंत नकद में परिवर्तित किया जा सके, तो आस्तियों को उच्‍च गुणवत्‍ता वाली चलनिधि आस्तियां माना जाता है। किसी आस्ति की तरलता अंतर्निहित दबाव परिदृश्‍य, मुद्रीकरण की जाने वाली राशि तथा सुविचारित समयावधिपर निर्भर करेगी। फिर भी, ऐसी कुछ आस्तियां हैं, जिनके द्वारा दबाव के समय में फायर-सेल के कारण भारी छूट के बिना भी निधियां जुटाने की संभावना है।

बी) एचक्युएलए की मूलभूत विशेषताओं में कम ऋण या बाजार जोखिम; मूल्‍यांकन में आसानी और निश्चितता; जोखिमपूर्ण आस्तियों के साथ कम सहसंबंध तथा विकसित और मान्‍यता प्राप्‍त विनिमय बाजार में सूचीबद्ध होना अंतर्भूत है। एचक्युएलए की बाजार संबंधी विशेषताओं में सक्रिय और काफी बड़ा बाजार; प्रतिबद्ध बाजार निर्माताओं की उपस्थिति; कम बाजार संकेंद्रीकरण तथा गुणवत्‍ता की ओर उड़ान (प्रणालीगत संकट में इस प्रकार की आस्तियों की ओर रुझान) अंतर्भूत है।

C) एचक्यूएलए की गणना में जिन्हें शामिल किया जाना है वे ऐसी आस्तियां हैं, जिन्हें एनबीएफसी दबाव अवधि के पहले दिन का धारण किया हुआ है। आस्तियों की प्रकृति के अनुसार, उन्हें निम्नानुसार भिन्न-भिन्न हेयरकट प्रदान किया गया है; जिनका उपयोग एलसीआर की गणना करने के लिए एचक्यूएलए की गणना के समय किया जाना है। आस्तियां और हेयरकट निम्नानुसार हैं:

(I) बिना किसी हेयरकट के एचक्यूएलए के रूप में शामिल की जाने वाली आस्तियां:

i. नकदी

ii. सरकारी प्रतिभूतियां

iii. विदेशी सरकारों द्वारा जारी या प्रत्याभूत बाजारयोग्‍य प्रतिभूतियां, जो निम्‍नलिखित सभी शर्तों को पूरा करती हैं:

(ए) ऋण जोखिम के लिए मानकीकृत अप्रोच के तहत बैंकों द्वारा प्रदत जोखिम भार 0%;

(बी) कम संकेंद्रीकरण वाले बड़े, गहरे और सक्रिय रेपो अथवा नकद बाजारों में सौदा किया गया हो; तथा दबावपूर्ण बाजार परिस्थितियों के दौरान भी बाजार (रिपो अथवा बिक्रय) में चलनिधि के भरोसेमंद स्रोत के रूप में रिकॉर्ड सिद्ध हुआ हो।

(सी) किसी बैंक/वित्‍तीय संस्‍था/गैर-बैकिंग वित्‍तीय संस्‍था अथवा उसकी संबद्ध हस्तियों द्वारा जारी न किया गया हो।

(II) 15% न्यूनतम हेअरकट के साथ एचक्यूएलए के लिए योग्य आस्तियां:

i. सरकारों, सरकारी क्षेत्र की संस्‍थाओं (पीएसई) या बहुपक्षीय विकास बैंकों द्वारा गारंटीकृत दावे वाली बाजार योग्‍य प्रतिभूतियां, जिन पर मानकीकृत विधि के अंतर्गत ऋण जोखिम पर 20% जोखिम भार लगाया गया हो और इस शर्त पर कि उन्‍हें किसी बैंक/वित्‍तीय संस्‍था/एनबीएफसी अथवा इनकी किसी संबद्ध हस्तियों द्वारा जारी न किया गया हो।

ii. किसी बैंक/वित्‍तीय संस्‍था/एनबीएफसी अथवा इनकी किसी संबद्ध हस्तियों द्वारा जारी न किए गए कॉर्पोरेट बॉन्डड, जिन्‍हें पात्र क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा AA- या उससे ऊपर की रेटिंग दी गई है।

iii. किसी बैंक/वित्‍तीय संस्‍था अथवा इनकी किसी संबद्ध हस्तियों द्वारा जारी न किए गए कमर्शियल पेपर, जिन्‍हें पात्र क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा लघु-अवधि के लिए AA- या उससे ऊपर की रेटिंग दी गई है।

(III) 50% न्यूनतम हेअरकट के साथ एचक्यूएलए के लिए योग्य आस्तियां:

i. सरकारों पर या सरकारों द्वारा गारंटीकृत दावे वाली बाजारयोग्‍य प्रतिभूतियां, जिनका जोखिम भार 20% से अधिक किन्तु 50% से कम लगाया गया हो अर्थात जिन्‍हें भारत में बैंकों के लिए निर्धारित क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा BBB- से कम की रेटिंग नहीं दी गई हो।

ii. सामान्य इक्विटी शेअर जो निम्नलिखित सभी शर्तों को पूरा करते हों:

(a) किसी बैंक/वित्‍तीय संस्‍था/गैर-बैकिंग वित्‍तीय संस्‍था अथवा उसकी संबद्ध हस्तियों द्वारा जारी न किया गया हो;

(b) एनएसई सीएनएक्स निफ्टी सूचकांक और/अथवा एस&पी बीएसई सूचकांक इंडेक्स में शामिल किया गया हो।

iii. कॉरपोरेट कर्ज़ प्रतिभूतियां (वाणिज्यिक लिखत सहित) और एचक्यूएलए के लिए सामान्य मूलभूत और बाजार से जुड़ी सामान्य विषेशताओं से युक्त तथा निम्नलिखित शर्तों को पूरा करती हो:

(a) किसी बैंक, वित्‍तीय संस्‍था/, पीडी, गैर-बैकिंग वित्‍तीय संस्‍था अथवा उसकी संबद्ध हस्तियों द्वारा जारी न किया गया हो;

(b) किसी पात्र क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा दीर्घावधि के लिए A+ से BBB- के बीच और दीर्घावधि रेटिंग न होने की स्थिति में दीर्घावधि रेटिंग के समतुल्य लघु अवधि की रेटिंग हो;

(c) कम संकेंद्रीकरण वाले बड़े, गहरे और सक्रिय रेपो अथवा नकद बाजारों में सौदा किया गया हो; तथा

(d) दबावपूर्ण बाजार परिस्थितियों में बाजारमूल्य में अधिकतम गिरावट 20% से कम हो या विकट चलनिधि दबाव के दौरान 30 दिनों की अवधि में हेअरकट में 20 प्रतिशत पोईंट से कम वृद्धि हो, जिससे बाजार (रिपो अथवा बिक्रय) में चलनिधि के भरोसेमंद स्रोत के रूप में रिकॉर्ड सिद्ध हुआ हो।

D) जमाराशि स्वीकार करने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए एलसीआर की गणना के उद्देश्य से आरबीआई अधिनियम की धारा 45 आईबी के प्रावधानों के तहत बनाई रखी हुई आस्तियां अपेक्षित होल्डिंग के केवल 80% तक एचक्यूएलए प्रयोजनों के लिए उपलब्ध रहेंगी।

E) एनबीएफसी द्वारा चलनिधि आस्तियों के स्‍टॉक की सभी आस्तियों का प्रबंध उस समूह के एक भाग के रूप में किया जाना चाहिए तथा यह निम्‍नलिखित परिचालनगत अपेक्षाओं के अधीन होगा:

  1. नकद में परिवर्तन के लिए हर समय उपलब्‍ध होना चाहिए,

  2. भारमुक्‍त होना चाहिए,

  3. ट्रेडिंग पोजीशन में साथ नहीं मिलाये जाएँ /हेजेज के रूप में प्रयोग नहीं किए जाएँ; संरचित लेनदेनों में संपार्श्विक या ऋण में वृद्धि के लिए निर्दिष्‍ट नहीं किए जाएँ; या परिचालनगत लागत की पूर्ति के लिए निर्दिष्‍ट नहीं किए जाएँ,

  4. आकस्मिक निधियों के स्रोत के रूप में प्रयोग के एकमात्र उद्देश्‍य से प्रबंध किया जाना चाहिए, और

  5. बैंक की चलनिधि जोखिम प्रबंधन से प्रभारित किए हुए विनिर्दिष्‍ट कार्यों के नियंत्रणाधीन होना चाहिए, जैसे: अल्‍को।

F) एनबीएफसी को आवधिक रूप से रेपो अथवा तुरंत बिक्री द्वारा आस्तियों के समानुपाती भाग का मुद्रीकरण करना चाहिए, ताकि इन आस्तियों की बिक्री योग्‍यता की समय समय पर जांच हो सके तथा दबाव की अवधि के दौरान नकारात्‍मक संकेतों के जोखिम को कम किया जा सके। एनबीएफसी से यह भी अपेक्षित है कि वे अपनी चलनिधि आवश्‍यकताओं के वितरण के अनुरूप अपनी चलनिधि आस्तियों का नकद द्वारा रख-रखाव करें।

G) यदि पात्र चलनिधि आस्तियां अपात्र (अर्थात ग्रेड में गिरावट के कारण) होने की स्थिति में एनबीएफसी को अतिरिक्त 30 दिनों के लिए चलनिधि आस्तियों के अपने स्टॉक में रखने की अनुमति दी जाएगी ताकि उन्हें स्टॉक को समायोजित करने/आस्तियों को प्रतिस्थापित करने के लिए पर्याप्त समय प्राप्त हो सके।

5) कुल निवल नकद बहिर्वाहों की गणना

A) कुल निवल नकद बहिर्प्रवाह को अगले 30 कैलेंडर दिनों के लिए कुल अपेक्षित नकद बहिर्वाह में से कुल अपेक्षित नकद अंतर्वाह को घटाए जाने के रूप में परिभाषित किया गया है। एनबीएफसी के तुलन पत्र की विशिष्ट प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, दबावपूर्ण नकदी प्रवाहों की गणना सकल नकदी अंतर्वाहों और नकदी बहिर्वाहों को पूर्वपरिभाषित दबाव प्रतिशतता प्रदान करके की जाती है। कुल अपेक्षित नकद बहिर्वाहों (दबावपूर्ण बहिर्वाह) की गणना विभिन्‍न श्रेणियों के बकाया शेषों अथवा देयताओं तथा तुलन पत्र से इतर प्रतिबद्धताओं को 115% (15% वह दर है जिस दर से उनमें उछाल आना अपेक्षित है) से गुणा करके प्राप्त किया जाता है। कुल अपेक्षित नकद अंतर्वाहों (दबावपूर्ण अंतर्वाह) की गणना संविदागत प्राप्‍य राशियों की विभिन्‍न श्रेणियों के बकाया शेषों को 75%(25% वह दर है जिस दर से गिरावट आना अपेक्षित है) से गुणा करके की जाती है। तथापि, कुल नकदी अंतर्वाह कुल अपेक्षित नकदी बहिर्वाहों के 75% की अधिकतम सकल सीमा के अधीन होगी। दूसरे शब्‍दों में, अगले 30 दिन में कुल निवल नकद बहिर्वाह = दबावपूर्ण बहिर्वाह – न्‍यूनतम (दबावपूर्ण अंतर्वाह; दबावपूर्ण बहिर्वाह का 75%)।

नकदी अंतर्वाहों के मद नकदी बहिर्वाहों के मद
a. एचक्यूएलए द्वारा समर्थित परिपक्व हो रही सुरक्षित ऋण लेनदेन

b. अन्य सभी संपार्श्विक द्वारा समर्थित सीमांत ऋण

c. अन्य सभी आस्तियां

d. क्रेडिट लाइन्स –क्रेडिट अथवा चलनिधि सुविधाएं अथवा एनबीएफसी द्वारा अपने प्रयोजनों के लिए अन्य संस्थानों में रखी जाने वाली अन्य आकस्मिक निधियन सुविधाएं।

e. काउंटरपार्टी द्वारा अन्य अंतर्वाह

f. निवल व्युत्पन्नी नकदी अंतर्वाह

g. अन्य संविदागत नकदी अंतर्वाह (कृपया फुटनोट के रूप में विनिर्दिष्ट करें)
a. जमा

b. असुरक्षित थोक निधियन

c. सुरक्षित निधियन

d. अतिरिक्त अपेक्षाएं [(i)+(ii)+(iii)+(iv)+(v) +(vi)+(vii)+(viii)+(ix)+(x)]:

(i) निवल व्युत्पन्नी नकदी बहिर्वाह

(ii) 3 नॉच डॉउनग्रेड अथवा इतने तक ‘डॉउनग्रेड ट्रिगर’ होने की स्थिति में वित्तपोषण लेनदेन, व्युत्पन्नी तथा अन्य समझौतों से संबंधित चलनिधि आवश्यकताएं (जैसे संपार्श्विक रक्कम की मांग/क्रय)

(iii) लूक बॅकक अप्रोच पर आधारित व्युत्पन्नी लेनदेन (पिछले 24 महीनों के दौरान वसूल किये गए सबसे बड़े निरपेक्ष निवल 30 दिनों के संपार्श्विक प्रवाह) के बाजार-मूल्यों में परिवर्तन

(iv) संपार्श्विक सुरक्षक व्युत्पन्नियों के मूल्यों में परिवर्तन की संभावना से चलनिधि की बढ़ी हुई आवश्यकताएं

(v) प्रतिपक्षकार द्वारा संविदागत तरीके से किसी भी समय मांग किये जाने वाले, अलग नहीं किये गए अतिरिक्त संपार्श्विक से संबंधित चलनिधि की बढ़ी हुई आवश्यकताएं।

(vi) प्रतिपक्षकार द्वारा अभी तक मांग नहीं किये गए संपार्श्विक अपेक्षित लेनदेन से संबंधित चलनिधि की बढ़ी हुई आवश्यकताएं।

(vii) संपार्श्वक को गैर-एचक्यूएलए आस्तियों से प्रतिस्थापित करने की अनुमति देने वाले व्युत्पन्नी लेनदेन से संबंधित चलनिधि की बढ़ी हुई आवश्यकताएं।

(viii) वर्तमान में अनाहरित वचनबद्ध क्रेडिट और चलनिधि सुविधाएं

(ix) अन्य आकस्मिक निधियन देयताएं

(x) टेम्पलेट में अन्य किसी स्थान पर शामिल नहीं किये गए कोई अन्य संविदात्मक बहिर्वाह

निवल नकदी बहिर्प्रवाह की गणना

क्र. सं. 30 दिनों का निवल नकदी बहिर्प्रवाह राशि
A कुल नकदी बहिर्वाह  
B दबावपूर्ण नकदी बहिर्वाह (A*115%)  
C कुल नकदी अंतर्वाह  
D दबावपूर्ण नकदी अंतर्वाह (C*75%)  
E अगले 30 दिनों में कुल निवल नकदी बहिर्वाह=दबावपूर्ण बहिर्वाह (बी)- न्यूनतम (दबावपूर्ण अंतर्वाह (डी); दबावपूर्ण बहिर्वाह के 75% (बी)  

बी) एनबीएफसी को मदों के एक बार से अधिक गिनती की अनुमति नहीं होगी, अर्थात, यदि कोई संपत्ति "एचक्यूएलए के स्टॉक" (यानी, अंश) के भाग के रूप में शामिल है, तो उससे संबंधित नकदी अंतर्वाह को भी नकदी अंतर्वाह (यथा भाजक का अंश) के रूप में नहीं गिना जा सकता। जहां किसी मद के एक से अधिक बहिर्वाह श्रेणियों में गिने जाने की संभावना है (जैसे, 30 दिन की अवधि के अंदर परिपक्व हो रही ऋण को कवर करने के लिए दी गई प्रतिबद्ध नकदी सुविधाएं), वहाँ एनबीएफसी को उस उत्पाद के लिए केवल अधिकतम संविदात्मक बहिर्वाह को ही विचार में लेनाहोगा।

6) एलसीआर प्रकटीकरण मानक

ए) एनबीएफसी के लिए आवश्यक है कि वो 31 मार्च, 2020 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष, जिसके लिए एलसीआर संबंधी सूचना केवल 31 मार्च 2020 को समाप्त हो रही तिमाही के लिए प्रस्तुत करनी है, से अपने वित्तीय विवरणों के नोट्स के तहत अपने एल.सी.आर की सूचना का खुलासा करें । हालांकि, बाद के वार्षिक वित्तीय विवरणों में, प्रकटीकरण की आवश्यकता वित्तीय वर्ष के सभी चार तिमाहियों के लिए होंगी। प्रकटीकरण प्रारूप परिशिष्ट I में दिया गया है।

बी) डेटा को पिछली तिमाही के मासिक अवलोकन के सरल औसत के रूप में प्रस्तुत करना होगा (यानी, औसत की गणना 90 दिनों की अवधि में की जाती है)। हालांकि, 31 मार्च, 2022 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष से, साधारण औसत की गणना दैनिक अवलोकन पर की जानी चाहिए।

सी) परिशिष्ट I में दिए गए प्रारूप में आवश्यक प्रकटीकरण के अलावा, एनबीएफसी एलसीआर के आसपास पर्याप्त गुणात्मक चर्चा (अपने वार्षिक वित्तीय विवरणों में खातों के लिए नोट्स के तहत) उपलब्ध कराना चाहिए ताकि प्रदान किए गए परिणामों और आंकड़ों को समझने में सुविधा हो। उदाहरण के लिए, जहाँ एलसीआर के लिए महत्वपूर्ण है, एनबीएफसी चर्चा कर सकता है: (ए) उनके एलसीआर परिणामों के मुख्य कारण और समय के साथ एलसीआर की गणना में इनपुट के योगदान का विकास; (बी) समय के साथ परिवर्तन और साथ-साथ अंतर-अवधि में परिवर्तन; (सी) एचक्यूएलए की संरचना; (डी) वित्त पोषण के केन्द्रीकरण की स्थिति (ई) व्युत्पन्न जोखिम और संभावित संपार्श्विक मांग; (फ) एलसीआर में मुद्रा असंतुलन; (जी) एलसीआर गणना में अन्तर्वाह और बहिर्प्रवाह जो एलसीआर सामान्य टेम्पलेट में कैप्चर नहीं किए जाते हैं, लेकिन जिसे संस्थान अपनी चलनिधि प्रोफ़ाइल के लिए प्रासंगिक मानता है।


1 “चलनिधि जोखिम” का तात्पर्य एनबीएफसी की उस अक्षमता से है जो एनबीएफसी के किसी दायित्व को उसकी वित्तीय स्थिति को प्रतिकूल तरीके से प्रभावित किये बिना पूरा किया जा सके। प्रभावी चलनिधि जोखिम प्रबंधन आवश्यकता पड़ने पर एनबीएफसी के किसी दायित्व को निभाना सुनिश्चित करता है और प्रतिकूल स्थिति उत्त्पन्न होने की संभावना को कम करता है।

2 “चलनिधि” का तात्पर्य है आस्तियों की वृद्धि में निधि प्रदान करना और अपेक्षित तथा अनपेक्षित नकदी एवं द्विपक्षीय दायित्वों का निर्वहन उचित मूल्य पर तथा अस्वीकार्य हानि के बिना पूरा कर पाना।


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