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भारतीय रिज़र्व बैंक ने बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) पर प्रतिसूचना मांगी

23 सितंबर 2015

भारतीय रिज़र्व बैंक ने बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) पर प्रतिसूचना मांगी

भारतीय रिज़र्व बैंक ने बाह्य वाणिज्यिक उधारों (ईसीबी) के प्रारूप ढांचे पर राय/प्रतिसूचना प्राप्त करने के लिए इसे आज अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराया है। प्रारूप ढांचे पर राय/प्रतिसूचना ई-मेल या डाक से प्रधान मुख्य महाप्रबंधक, विदेशी मुद्रा विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय कार्यालय, 11वीं मंजिल, शहीद भगत सिंह मार्ग, मुंबई-400 001 को 11 अक्टूबर 2015 को या इससे पहले भेजी जा सकती हैं।

पृष्ठभूमि

वर्तमान बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) नीति का मूल उद्देश्य देश में पूंजीगत आस्तियों के सृजन के लिए घरेलू पूंजी की पूर्ति करना है। इसके लिए पूंजी खाता प्रबंधन को ध्यान में रखना है। इस उद्देश्य की दृष्टि से ईसीबी व्यवस्था को पिछले वर्षों में उत्तरोत्तर रूप से उदार बनाया गया जिसमें विभिन्न संस्थाओं को ईसीबी जुटाने की अनुमति दी गई है। पूंजी खाता उदारीकरण के लिए समायोजित (केलिब्रेटेड) दृष्टिकोण के अति महत्वपूर्ण रुख के अंदर अब ईसीबी नीति को एक अधिक तर्कसंगत तथा उदार ढांचे के साथ विस्थापित करने के लिए प्रयास किया गया है। इसके लिए उभरती घरेलू और वैश्विक समष्टि आर्थिक और वित्तीय स्थिति, बाह्य क्षेत्र के प्रबंध में सामना की जाने वाली चुनौतियों और ईसीबी नीति के संचालन में अब तक प्राप्त किए गए अनुभव को ध्यान में रखा गया है।

अल्पना किल्लावाला
प्रधान मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी : 2015-2016/740


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