29 दिसंबर 2025
भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति एवं प्रगति संबंधी रिपोर्ट 2024-25
आज, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 36 (2) के अनुपालन में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति एवं प्रगति संबंधी रिपोर्ट 2024-25 जारी की। यह रिपोर्ट वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान अब तक वाणिज्यिक बैंकों, सहकारी बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों सहित बैंकिंग क्षेत्र के प्रदर्शन को प्रस्तुत करती है।
प्रमुख बिंदु
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भारतीय वाणिज्यिक बैंकिंग क्षेत्र वर्ष 2024-25 के दौरान आघात-सहनीय बना रहा, जिसे दोहरे अंकों के तुलन-पत्र विस्तार का समर्थन मिला। अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) की जमाराशियों और ऋण में दोहरे अंकों में वृद्धि हुई; हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में इसमें कमी आई है।
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एससीबी का पूंजी-जोखिम भारित आस्ति अनुपात मार्च 2025 के अंत में 17.4 प्रतिशत और सितंबर 2025 के अंत में 17.2 प्रतिशत रहा।
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आस्ति की गुणवत्ता और बढ़ी, सकल अनर्जक आस्ति (जीएनपीए) अनुपात मार्च 2025 के अंत में 2.2 प्रतिशत और सितंबर 2025 के अंत में 2.1 प्रतिशत के बहु-दशकीय निचले स्तर तक गिर गया।
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वर्ष 2024-25 में आस्तियों पर प्रतिलाभ (आरओए) 1.4 प्रतिशत और इक्विटी पर प्रतिलाभ (आरओई) 13.5 प्रतिशत के साथ एससीबी की लाभप्रदता मजबूत रही। वर्ष 2025-26 की पहली छमाही के दौरान, एससीबी का आरओए और आरओई क्रमशः 1.3 प्रतिशत और 12.5 प्रतिशत रहा।
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शहरी सहकारी बैंकों के समेकित तुलन पत्र ने वर्ष 2024-25 में पिछले वर्ष की तुलना में अधिक वृद्धि दर्ज की। उनकी आस्ति गुणवत्ता में लगातार चौथे वर्ष सुधार हुआ, साथ ही उनकी पूंजी बफर और लाभप्रदता में मजबूती आई।
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गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों ने मजबूत पूंजी बफर के साथ दो अंकों की ऋण वृद्धि दर्ज करना जारी रखा। वर्ष के दौरान उनकी आस्ति गुणवत्ता में भी सुधार हुआ।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/1786 |