21 सितंबर 2023
इरादतन चूककर्ताओं और बड़े चूककर्ताओं के निरूपण संबंधी मास्टर निदेश का मसौदा
रिज़र्व बैंक ने इरादतन चूककर्ताओं से निपटने के लिए एक योजना शुरू की थी, जो 1 अप्रैल 1999 से प्रभावी थी। इसके पश्चात, इन दिशानिर्देशों को इरादतन चूककर्ताओं पर मास्टर परिपत्र में समेकित किया गया, जिसे अंतिम बार 1 जुलाई 2015 को अद्यतन किया गया था।
2. मौजूदा निदेशों की समीक्षा तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय और माननीय उच्च न्यायालयों के विभिन्न निर्णयों/ आदेशों पर विचार करने के साथ-साथ बैंकों और अन्य हितधारकों से प्राप्त अभ्यावेदन/ सुझावों के बाद इरादतन चूककर्ताओं से संबंधित अनुदेशों को संशोधित किया गया है। ‘मास्टर निदेश का मसौदा- इरादतन चूककर्ताओं और बड़े चूककर्ताओं का निरूपण' में शामिल संशोधित अनुदेश आज भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा हितधारकों और आम जनता की टिप्पणियों के लिए अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित किए गए हैं।
3. मास्टर निदेश का मसौदा, विनियमित संस्थाओं के कार्यक्षेत्र का विस्तार करता है जो उधारकर्ताओं को इरादतन चूककर्ताओं के रूप में वर्गीकृत कर सकता है, इरादतन चूक की परिभाषा को विस्तृत करता है, पहचान प्रक्रिया को परिष्कृत करता है और किसी खाते को गैर-निष्पादित आस्ति के रूप में वर्गीकृत किए जाने के छह महीने के भीतर इरादतन चूक संबंधी पहलुओं की समीक्षा कर अंतिम रूप देना अनिवार्य करता है। यह संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों को बेचे गए इरादतन चूक वाले ऋणों का निपटान और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता के अंतर्गत उनकी स्थिति का भी निपटान करता है।
4. विनियमित संस्थाओं और अन्य हितधारकों की टिप्पणियाँ/ फीडबैक 31 अक्तूबर 2023 तक ईमेल के माध्यम से विषय में 'मास्टर निदेश पर फीडबैक - इरादतन चूककर्ताओं और बड़े चूककर्ताओं का निरूपण' लिखकर प्रस्तुत की जा सकती है। रिज़र्व बैंक द्वारा अंतिम मास्टर निदेश, प्राप्त फीडबैक पर विचार करने के बाद जारी किया जाएगा।
(श्वेता शर्मा)
उप महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2023-2024/957
|