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गवर्नर का वक्तव्य

4 मई 2022

गवर्नर का वक्तव्य

8 अप्रैल 2022 के अपने वक्तव्य में मैंने यूरोप में युद्ध के कारण हुए विवर्तनिक परिवर्तनों का उल्लेख किया था, जिसने वैश्विक संवृद्धि और मौद्रिक नीति के परिचालन के लिए नई चुनौतियां उत्पन्न की थीं। जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ रहा है और प्रतिबंध और जवाबी कार्रवाई तेज हो रही है, कमोडिटी और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता, कमी, आपूर्ति अव्यवस्था और, सबसे चेतावनीपूर्वक, सतत और बढ़ रहे मुद्रास्फीति के दबाव हर गुजरते दिन के साथ और अधिक तीव्र होते जा रहे हैं। विकासशील देशों में पूंजी बहिर्वाह और मुद्रा मूल्यह्रास के बीच ऋण संकट बढ़ रहा है। हाल ही के जीडीपी आंकड़ों से पता चलता है कि वैश्विक आर्थिक बहाली गति खो रही है।

2. इन चुनौतियों के बीच, जिन्हें मैंने अपने अप्रैल के वक्तव्य में विशालकाय कहा था, भारतीय अर्थव्यवस्था ने आघात-सहनीयता दिखाई है, जो इसके अंतर्निहित मूल सिद्धांतों की अंतर्निहित मजबूती पर आधारित है और एक विवेकपूर्ण और अनुकूल नीति मिश्रण द्वारा समर्थित है। मौद्रिक नीति के परिचालन में, हमने किसी भी नियम पुस्तिका से बंधे न रहने और पारंपरिक और अपारंपरिक उपकरणों की पूरी शृंखला को निर्णायक रूप से नियोजित करने की हमारी तैयारी के अपने संकल्प को साबित किया है। निभावकारी रहते हुए, मौद्रिक नीति, संवृद्धि का समर्थन करने और भू-राजनीतिक संकट के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए अनुकूल वित्तीय स्थितियों को बढ़ावा देना जारी रखती है। परिणामस्वरूप, भारतीय अर्थव्यवस्था अब तक आघात का सामना करने में कामयाब रही है। आश्वस्त रूप से, हम कमोडिटी की कीमतों के समकालिक आघातों, आपूर्ति व्यवधानों और युद्ध से उत्पन्न उच्च मुद्रास्फीति के बावजूद, समष्टि-वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने में सक्षम रहे हैं। मुद्रास्फीति के भविष्य के प्रक्षेपवक्र को ऊपर की ओर शिफ्ट करने वाले उच्च मुद्रास्फीति दबावों का सामना करते हुए, हमने यह सुनिश्चित करने के लिए कि मुद्रास्फीति लक्ष्य के अनुरूप बनी रहे, निभाव को वापस लेने के अपने अपेक्षा की घोषणा की है। जैसा कि मैंने अप्रैल के मौद्रिक नीति वक्तव्य में कहा था, हमारे कार्यों को तेजी से विकसित हो रही स्थिति के अनुरूप बनाया जाएगा ताकि संवृद्धि के आवेगों को संरक्षित और मजबूत किया जा सके। हमारी यात्रा प्रसिद्ध यूनानी दार्शनिक एपिक्टेटस के शब्दों में सबसे अच्छी तरह से परिलक्षित होती है: “आपको जितनी भी परीक्षाएँ देनी पड़ेगी, वे आपको आपकी ताकत से परिचित कराएंगे। दृढ़ रहो… और एक दिन तुम कुछ ऐसा बना लोगे जो सदा बना रहे।”1

3. जैसे-जैसे हम इस कठिन दौर से गुजरते हैं, नई वास्तविकताओं के प्रति सुग्राही होने और उन्हें अपने विचारों में शामिल करना आवश्यक हो जाता है। अप्रैल 2022 के अपने विश्व आर्थिक परिदृश्य में, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है: "युद्ध के आर्थिक प्रभाव दूर-दूर तक फैल रहे हैं - जैसे भूकंपीय लहरें जो भूकंप के केंद्र से निकलती हैं - मुख्य रूप से कमोडिटी बाजारों, व्यापार और वित्तीय संबंधों के माध्यम से।”2 तथापि, यह स्वीकार करना महत्वपूर्ण है कि हमारी मजबूती और हमारे बफर के बावजूद, भारत वैश्विक स्तर पर जुड़ी इस दुनिया से अलग नहीं है। अप्रैल के नीतिगत वक्तव्य के अनुमान के अनुरूप, मार्च 2022 में हेडलाइन सीपीआई मुद्रास्फीति में वृद्धि हुई। अप्रैल के लिए प्रिंट में भी वृद्धि होने की उम्मीद है। संपार्श्विक जोखिम इस बात का है कि यदि मुद्रास्फीति बहुत लंबे समय तक इन स्तरों पर बनी रहती है, तो यह मुद्रास्फीति की प्रत्याशाओं को कम कर सकती है, जो परिणामस्वरूप, स्वयं -पूर्ति तथा संवृद्धि और वित्तीय स्थिरता के लिए अहितकर हो सकती है। अतः, हमें अर्थव्यवस्था की आघात-सहनीयता को बढ़ाते हुए समष्टि आर्थिक और वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए सभी नीतिगत उपायों का उपयोग करने के लिए तैयार रहना चाहिए। मैं दोहराता हूं कि स्थिति गतिशील है और तेजी से बदल रही है और हमें अपने कार्य उसी के अनुरूप करने होंगे।

मौद्रिक नीति समिति के निर्णय और विचार-विमर्श

4. इस पृष्ठभूमि पर, मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 2 और 4 मई 2022 को एक ऑफ-साइकिल बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया, ताकि मुद्रास्फीति-संवृद्धि की बढ़ती गतिशीलता और 6-8 अप्रैल 2022 की एमपीसी बैठक के बाद की गतिविधियों के प्रभाव का पुनर्मूल्यांकन किया जा सके। समष्टि आर्थिक स्थिति और संभावना के मूल्यांकन के आधार पर, एमपीसी ने सर्वसम्मति से तत्काल प्रभाव से नीतिगत रेपो दर को 40 आधार अंक बढ़ाकर 4.40 प्रतिशत करने हेतु मतदान किया। परिणामस्वरूप, स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ) दर को 4.15 प्रतिशत; तथा सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ़) दर और बैंक दर 4.65 प्रतिशत हो गया है। एमपीसी ने सर्वसम्मति से निभाव को वापस लेने पर ध्यान केंद्रित करते हुए निभावकारी बने रहने का भी निर्णय लिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मुद्रास्फीति, संवृद्धि का समर्थन करते हुए आगे लक्ष्य के भीतर बनी रहे।

5. अब मैं एमपीसी के निर्णय और रुख की पृष्ठभूमि का तर्क बताना चाहूंगा। विश्व स्तर पर, मुद्रास्फीति चेतावनीपूर्ण रूप से बढ़ रही है और तेजी से फैल रही है। भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में पिछले 3 से 4 दशकों में मुद्रास्फीति को अपने उच्चतम स्तर तक बढ़ा रहे हैं, जबकि बाहरी मांग को कम कर रहे हैं। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रही हैं और अस्थिर बनी हुई हैं। वैश्विक खाद्य कीमतों ने मार्च में एक नया रिकॉर्ड छुआ और तब से यह और भी बढ़ीं हैं। खाद्य तेल जैसे भारत के लिए प्रासंगिक मुद्रास्फीति संवेदी वस्तुएं, यूरोप में युद्ध और प्रमुख उत्पादकों द्वारा निर्यात प्रतिबंध के कारण कमी का सामना कर रहे हैं। उर्वरक की कीमतों में उछाल और अन्य निविष्टि लागतों का भारत में खाद्य कीमतों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, प्रमुख उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण में अब उल्लेखनीय रूप से गति प्राप्त होने की उम्मीद है – दोनों, दर में बढ़ोत्तरी और मात्रात्मक सहजता के खुलने के साथ-साथ मात्रात्मक सख्ती को रोल आउट करने के संदर्भ में। इन घटनाक्रमों का भारत सहित विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर हानिकारक प्रभाव पड़ेगा। इस बीच, कोविड-19 संक्रमण और प्रमुख वैश्विक उत्पादन केंद्रों में लॉकडाउन से संवृद्धि के कम होते हुए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं को बढ़ने की संभावना है। वास्तव में, इस कैलेंडर वर्ष के लिए वैश्विक संवृद्धि अनुमानों को 100 आधार अंकों तक अधोगामी संशोधित किया गया है। ये गतिशीलता अप्रैल 2022 के एमपीसी के संकल्प में निर्धारित भारत के मुद्रास्फीति प्रक्षेपवक्र के लिए ऊर्ध्वगामी जोखिम उत्पन्न करती है।

6. इसके अलावा, एमपीसी ने इस बात पर ध्यान दिया है कि घरेलू आर्थिक गतिविधि मोटे तौर पर अप्रैल में प्रत्याशित तर्ज पर आगे बढ़ रही है। रुकी हुई मांग से संपर्क-गहन सेवाओं को लाभ हो रहा है और निवेश गतिविधि में कर्षण बढ़ने के कुछ संकेत दिखाई दे रहे हैं। साथ ही, एमपीसी ने निर्णय लिया कि मुद्रास्फीति संभावना को दृढ़ और कैलिब्रेटेड कदमों के माध्यम से उचित और समय पर प्रतिक्रिया की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आपूर्ति पक्ष के दूसरे दौर के झटकों का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव सीमित रहें और दीर्घावधि की मुद्रास्फीति की प्रत्याशा मजबूती से स्थिर रहे। एमपीसी के विचार में, इस समय मौद्रिक नीति प्रतिक्रिया, वित्तीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता के बीच समष्टि-वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने में मदद करेगी। तदनुसार, एमपीसी ने आज अपनी बैठक में नीतिगत रेपो दर में 40 आधार अंकों की वृद्धि करने का निर्णय लिया; इसने निभाव के वापस लेने पर ध्यान केंद्रित करते हुए निभावकारी बने रहने का भी निर्णय लिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मुद्रास्फीति आगे संवृद्धि को समर्थन देते हुए लक्ष्य के भीतर बनी रहे।

संवृद्धि और मुद्रास्फीति के लिए संभावना

संवृद्धि

7. इस अत्यधिक तनाव वाले वैश्विक वातावरण में, घरेलू समष्टि आर्थिक और वित्तीय स्थितियों का जायजा लेना उपयोगी है। घरेलू आर्थिक गतिविधियों में वापसी, जो ओमिक्रोन लहर की कमी के साथ हुई थी, तेजी से वैविध्यपूर्ण हो रही है। संपर्क-गहन सेवाओं और बढ़ते विवेकाधीन खर्च के कारण निजी खपत फिर से बढ़ रही है। 2022 में लगातार चौथे वर्ष सामान्य दक्षिण-पश्चिम मानसून के पूर्वानुमान ने कृषि संभावनाओं के लिए शुभ संकेत दिया है और इसे ग्रामीण खपत का समर्थन करना चाहिए। निवेश चक्र में एक प्रारंभिक बहाली होने के भी संकेत हैं। यह, पूंजीगत वस्तुओं के आयात और उत्पादन; अनुकूल वित्तीय स्थितियों द्वारा समर्थित क्षमता उपयोग में वृद्धि; और मजबूत कॉर्पोरेट तुलन पत्र जैसे उच्च आवृत्ति संकेतकों में परिलक्षित होता है। निर्यात संवृद्धि में बढ़ोत्तरी बनी हुई है जबकि गैर-तेल गैर-स्वर्ण के आयात में लगातार उच्च वृद्धि घरेलू मांग में एक टिकाऊ बहाली को दर्शाती है।

8. भले ही घरेलू आर्थिक गतिविधि के चालक मजबूत हो रहे हैं, वे लंबे और तीव्र भू-राजनीतिक तनावों के रूप में वैश्विक स्पिलओवर; बढ़ी हुई कमोडिटी की कीमतें; कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में कोविड-19 संबंधित लॉकडाउन या प्रतिबंध; घटती बाह्य मांग; और उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण के कारण वैश्विक वित्तीय स्थितियों की सख्ती के कारण विपरीत परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। ये जोखिम अप्रैल 2022 के वक्तव्य में प्रत्याशित तर्ज पर विकसित हो रहे हैं और अभी भी बने हुए प्रतीत होते हैं।

मुद्रास्फीति

9. मार्च 2022 में हेडलाइन सीपीआई मुद्रास्फीति में 7 प्रतिशत की तेज वृद्धि, विशेष रूप से, अभूतपूर्व उच्च वैश्विक खाद्य कीमतों से होने वाले प्रतिकूल स्पिलओवर के प्रभाव के कारण खाद्य मुद्रास्फीति द्वारा प्रेरित थी। बारह में से नौ खाद्य उप-समूहों ने मार्च में मुद्रास्फीति में वृद्धि दर्ज की। अप्रैल के लिए उच्च आवृत्ति मूल्य संकेतक खाद्य कीमतों के दबाव में बने रहने का संकेत दे रहे हैं। साथ ही, पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू पंप कीमतों में वृद्धि का प्रत्यक्ष प्रभाव, जो मार्च के दूसरे पखवाड़े से आरंभ हुआ है, मूल मुद्रास्फीति के प्रिंटों में परिलक्षित हो रहा है और इसके अप्रैल में और बढ़ने की उम्मीद है।

10. आगे, खाद्य मुद्रास्फीति दबाव जारी रहने की संभावना है। खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व बैंक के खाद्य मूल्य सूचकांक ने मार्च में ऐतिहासिक ऊंचाई को छु ली और अभी भी उच्च बने हुए है। घरेलू आपूर्ति के सहज बने रहने के बावजूद वैश्विक स्तर पर गेहूं की कमी के कारण स्पीलओवर से घरेलू कीमतों पर असर पड़ रहा है। प्रमुख उत्पादक देशों द्वारा निर्यात प्रतिबंधों और युद्ध के कारण सूरजमुखी तेल उत्पादन में कमी के कारण खाद्य तेलों की कीमतों में और तेजी आ सकती है। खाद्य की लागत में बढ़ोत्तरी, पोल्ट्री, दूध और डेयरी उत्पाद की कीमतों में वृद्धि के रूप में परिलक्षित हो रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं और इससे घरेलू पंप की कीमतों में तेजी आ रही है।। प्रसंस्कृत खाद्य, गैर-खाद्य विनिर्मित उत्पादों और सेवाओं की कीमतों में बढ़ोत्तरी के एक और दौर में परिवर्तित होने वाले अभूतपूर्व निविष्टि लागत दबाव के जोखिम अब पहले की तुलना में अधिक मजबूत हैं। यदि मार्जिन बहुत ज्यादा कम हो जाता है तो यह कॉर्पोरेट मूल्य निर्धारण शक्ति को मजबूत कर सकता है । संक्षेप में, प्रतिकूल वैश्विक मूल्य आघातों की निरंतरता के साथ-साथ मुद्रास्फीति संबंधी आवेगों का सुदृढ़ीकरण अप्रैल के एमपीसी के संकल्प में प्रस्तुत मुद्रास्फीति प्रक्षेपवक्र के लिए ऊर्ध्वगामी जोखिम उत्पन्न करता है।

11. इन परिस्थितियों में, मौद्रिक नीति को निभाव को वापस लेने पर ध्यान देना आवश्यक है। यह विदित है कि महामारी के जवाब में, मौद्रिक नीति ने 27 मार्च 2020 को नीतिगत रेपो दर में 75 आधार अंकों की बड़ी कटौती के साथ, एक अति-समायोज्य मोड में गियर्स को शिफ्ट किया था, इसके बाद 22 मई 2020 को 40 आधार अंकों की एक और कटौती की गई थी। तदनुसार, एमपीसी के आज के नीतिगत रेपो दर को 40 आधार अंक बढ़ाकर 4.40 प्रतिशत करने के निर्णय को, अप्रैल 2022 में निर्धारित निभाव को वापस लेने के रुख की घोषणा को ध्यान में रखते हुए 22 मई 2020 की दर कार्रवाई के उलटाव के रूप में देखा जा सकता है।

चलनिधि और वित्तीय बाजार की स्थिति

12. अप्रैल में, मौद्रिक नीति रुख में बदलाव के साथ संरेखण में कई चलनिधि प्रबंधन उपाय किए गए, जिसमें नीतिगत रेपो दर के आसपास एक सममित एलएएफ कॉरिडोर की बहाली और स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ) की शुरूआत शामिल है। ये उपाय संवृद्धि के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए दी गई प्रधानता का संचालन करते हैं। मौद्रिक नीति को एक ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जिसमें मुद्रास्फीति की दृढ़ता टूट जाए और मुद्रास्फीति की उम्मीदें फिर से टिकी हों। जैसे-जैसे आर्थिक गतिविधि फिर से शुरू हो रही है और पूर्व-महामारी के स्तर से आगे निकल रही है, प्राथमिकताओं के इस पुन: क्रम के लिए हेडरूम, महामारी के घटने और संवृद्धि के स्थिर व्यापक आधार के साथ उपलब्ध होता जा रहा है।

13. शेष अर्थव्यवस्था में चलनिधि स्थितियों का पूर्ण और कुशल संचरण सुनिश्चित करने के लिए उनको नीतिगत कार्रवाई और रुख के अनुरूप संशोधित करने की आवश्यकता है। अप्रैल की नीति की घोषणा के बाद से, बैंकिंग प्रणाली की चलनिधि सहज बनी हुई है। बैंकिंग प्रणाली में औसत अधिशेष चलनिधि- एसडीएफ और परिवर्तनीय दर परिवर्ती रेपो (वीआरआरआर) नीलामियों के माध्यम से कुल अवशोषण में परिलक्षित- 8-29 अप्रैल 2022 के दौरान 7.5 लाख करोड़ की राशि थी। एसडीएफ के तहत रखी गई दैनिक अधिशेष निधि के रूप में बड़ी चलनिधि (8-29 अप्रैल 2022 के दौरान 2.0 लाख करोड़ का औसत) के परिणामस्वरूप भारित औसत मांग मुद्रा दर (डब्ल्यूएसीआर) - मौद्रिक नीति का परिचालन लक्ष्य - एसडीएफ दर से नीचे है। बैंकों की अनुकूल प्रतिक्रिया जो 14-दिवसीय और 28-दिवसीय वीआरआरआर नीलामियों के बोली-कवर अनुपातों के साथ-साथ 26 अप्रैल को आयोजित यूएसडी/आईएनआर की विक्रय-क्रय स्वैप नीलामी में विदित होती है, से यह भी पता चलता है कि प्रणाली -स्तरीय चलनिधि पर्याप्त बनी हुई है। अतः, निभाव को वापस लेने के रुख को ध्यान में रखते हुए और एकाधिक वर्षीय समय- सीमा में चलनिधि की क्रमिक निकासी की पूर्व घोषणा के अनुरूप, यह निर्णय लिया गया है कि आरक्षित नकदी निधि अनुपात (सीआरआर) को 50 आधार अंक बढ़ाकर निवल मांग और मीयादी देयताओं (एनडीटीएल) का 4.5 प्रतिशत कर दिया जाए, यह बदलाव 21 मई 2022 से शुरू होने वाले पखवाड़े से प्रभावी होगा। सीआरआर में इस बढ़ोत्तरी के माध्यम से चलनिधि की निकासी का क्रम 87,000 करोड़ होगा।

14. निरंतर उच्च मुद्रास्फीति अनिवार्य रूप से बचत, निवेश, प्रतिस्पर्धात्मकता और उत्पादन वृद्धि को नुकसान पहुंचाती है। इसने आबादी के गरीब तबके पर उनकी क्रय शक्ति को कम करके प्रतिकूल प्रभाव डाला है। इसलिए, मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि आज की हमारी मौद्रिक नीति कार्रवाई- जिसका उद्देश्य मुद्रास्फीति को कम करना और मुद्रास्फीति की उम्मीदों को स्थिर करना है - अर्थव्यवस्था की मध्यम अवधि की विकास संभावनाओं को मजबूत और समेकित करेगी। हम उत्पादन पर उच्च ब्याज दरों के संभावित निकट-अवधि के प्रभाव के प्रति सचेत हैं। इसलिए, हमारे कार्यों को अंशशोधित किया जाएगा। मैं इस बात पर और जोर देना चाहूंगा कि मौद्रिक नीति निभावकारी बनी रहे और हमारी पद्धति यह होगी कि मुद्रास्फीति-संवृद्धि की गतिशीलता को ध्यान में रखते हुए महामारी से संबंधित असाधारण निभाव के सावधानीपूर्वक और कैलिब्रेटेड रूप से वापस लेने पर ध्यान केंद्रित करना। यह दोहराया जाता है कि आरबीआई ऋण उठाव और विकास के समर्थन में अर्थव्यवस्था की उत्पादक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रणाली में पर्याप्त चलनिधि सुनिश्चित करेगा।

बाह्य क्षेत्र

15. विकट वैश्विक बाधाओं के बीच भारत का बाह्य क्षेत्र आघात सहनीय बना हुआ है। अनंतिम आंकड़ों से पता चलता है कि भारत का माल निर्यात अप्रैल 2022 में मजबूत बना रहा और मार्च 2022 में सेवाओं का निर्यात एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया। भू-राजनीतिक स्थितियों और हाल के व्यापार करारों के कारण संभावित बाजार के अवसर खुल गए हैं। प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों द्वारा मजबूत राजस्व संचालन भी 2022-23 में समग्र बाह्य क्षेत्र की संभावनाओं के लिए शुभ संकेत है। कॉमोडिटी की उच्च कीमतों के कारण व्यापार की शर्तों के बिगड़ने से 2022-23 में चालू खाते के घाटे पर असर पड़ सकता है, लेकिन इसके सहज रूप से वित्तपोषित होने की उम्मीद है। हाल ही में कुछ मंदी के बावजूद, निवल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश प्रवाह मजबूत बना हुआ है। बाह्य वाणिज्यिक उधार जैसे दीर्घकालिक प्रवाह भी स्थिर बने रहे। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार निवल वायदा आस्तियों के साथ काफी अधिक है जो एक मजबूत बैक-अप प्रदान करती है। जीडीपी अनुपात की तुलना में विदेशी कर्ज 20 प्रतिशत पर न्यून बना हुआ है।

समापन टिप्पणी

16. पिछले दो वर्ष, पहले महामारी और अब युद्ध से उत्पन्न हतोत्साहित करने वाले चुनौतियों के खिलाफ हमारी दृढ़ लड़ाई की गाथा है। हमने अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली को आघातों के बवंडर से बचाने के लिए इन चुनौतियों का सामना किया है। अब हम एक बार फिर एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं। हम, आरबीआई में, मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और संवृद्धि को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था को सतत और समावेशी संवृद्धि के पथ पर दृढ़ बनाए रखने के लिए मुद्रास्फीति को अवश्य नियंत्रित किया जाना चाहिए। समग्र समष्टि आर्थिक और वित्तीय स्थिरता के साथ-साथ सतत संवृद्धि में सबसे बड़ा योगदान मूल्य स्थिरता बनाए रखने के हमारे प्रयास से होगा।

17. चूंकि कई तूफान एक साथ आए हैं, आज के हमारे कार्य जहाज को स्थिर बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं। हम स्थिति और संभावनाओं का सतत पुनर्मूल्यांकन करने के लिए प्राप्त आंकड़ों और सूचनाओं के प्रति सतर्क रहते हैं। हम अपने पद्धति में सक्रिय और लचीले रहेंगे। चुनौतियों के बावजूद, यह जानकर सुकून मिलता है कि हमारी अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है और हम वैश्विक गतिविधियों से पैदा होने वाली स्थिति से निपटने के लिए अच्छी तरह से तैयार हैं। आईएमएफ ने भी हाल ही में यह भी कहा है कि भारत में महामारी के समष्टि आर्थिक प्रबंधन के परिणामस्वरूप एक मजबूत सुधार हुआ है और देश मौजूदा बाहरी आघातों का सामना करने के लिए एक अच्छी स्थिति में है।3 मैं फिर से वही दोहराना चाहूँगा, जो मैंने पहले कहा है - मैं एक शाश्वत आशावादी हूं। आरबीआई में मेरे सहयोगी और मुझे पूरा विश्वास है कि हमने जो रास्ता चुना है वह हमें एक बेहतर और उज्जवल कल की ओर ले जाएगा। जैसा कि महात्मा गांधी ने कहा है: "मैंने अत्यंत निराशाओं, घोर अंधकार का सामना किया है, .... लेकिन मैं यह कहने में समर्थ हूं कि मेरे विश्वास..... ने आखिरकार इन सभी कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर ली है।”4

धन्यवाद। सुरक्षित रहें। स्वस्थ्य रहें। नमस्कार।

(योगेश दयाल) 
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2022-2023/153


1 स्रोत: एपिक्टेटस, यूनानी दार्शनिक 55-135 ईस्वी [द आर्ट ऑफ लिविंग]

2 विश्व आर्थिक परिदृश्य, अप्रैल 2022, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष।

3 https://www.thehindu.com/news/national/india-in-much-better-place-to-face-ukrainian-crisis-imf-official/article65340653.ece

4 यंग इंडिया, 20-12-1928, p. 420


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