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विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य

8 दिसंबर 2021

विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य

यह वक्तव्य (i)विनियमन और पर्यवेक्षण; (ii) वित्तीय बाज़ार और; (iii) भुगतान और निपटान प्रणाली से संबंधित विभिन्न विकासात्मक और विनियामक नीति उपायों को निर्धारित करता है ।

I. विनियमन और पर्यवेक्षण

1. बैंकों की विदेशी शाखाओं और सहायक संस्थाओं में पूंजी लगाना और इन संस्थाओं द्वारा लाभ का प्रतिधारण/प्रत्यावर्तन/ अंतरण

भारत में निगमित बैंक, वर्तमान में अपनी विदेशी शाखाओं और सहायक संस्थाओं में पूंजी लगाने के साथ-साथ इन केंद्रों से लाभ के प्रतिधारण और प्रत्यावर्तन/अंतरण के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक से पूर्व अनुमोदन प्राप्त करते हैं। समीक्षा करने पर, और बैंकों को परिचालनात्मक लचीलापन प्रदान करने की दृष्टि से, यह निर्णय लिया गया है कि विनियामक पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने वाले बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन के बिना, कार्योत्तर रिपोर्टिंग के अधीन, अपने बोर्ड के अनुमोदन से, अपनी विदेशी शाखाओं और सहायक संस्थाओं में पूंजी डाल सकते हैं; इन केंद्रों में लाभ प्रतिधारित कर सकते हैं; और उससे होने वाले लाभों को प्रत्यावर्तित/अंतरित कर सकते हैं।

2. बैंकों के निवेश पोर्टफोलियो के लिए विवेकपूर्ण मानदंडों की समीक्षा पर चर्चा पत्र

अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा निवेश पोर्टफोलियो के वर्गीकरण और मूल्यांकन पर मौजूदा विनियामक निदेश अक्तूबर 2000 में शुरू किए गए ढांचे पर आधारित हैं, जो काफी हद तक तत्कालीन प्रचलित वैश्विक मानकों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर आधारित है। निवेश के वर्गीकरण, माप और मूल्यांकन पर वैश्विक मानकों में बाद के महत्वपूर्ण विकास के मद्देनजर, पूंजी पर्याप्तता ढांचे के साथ-साथ घरेलू वित्तीय बाजारों में प्रगति के साथ, इन मानदंडों की समीक्षा और अद्यतन करने की आवश्यकता है। इस दिशा में एक कदम के रूप में, सभी प्रासंगिक पहलुओं को शामिल करते हुए एक चर्चा पत्र शीघ्र ही भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर टिप्पणियों के लिए रखा जाएगा।

II. वित्तीय बाजार

3. बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी)/व्यापार ऋण (टीसी) - लिबोर से वैकल्पिक संदर्भ दर (एआरआर) में परिवर्तन

वर्तमान में, विदेशी मुद्रा (एफ़सीवाई) बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी)/व्यापार ऋण (टीसी) के लिए बेंचमार्क दर 6-महीने लिबोर दर या उधार की मुद्रा पर लागू किसी अन्य 6-महीने की अंतर बैंक ब्याज दर के रूप में निर्दिष्ट है। लिबोर के निकटस्थ बंद होने के मद्देनजर, उधार की मुद्रा पर लागू किसी भी व्यापक रूप से स्वीकृत अंतर-बैंक दर या वैकल्पिक संदर्भ दर (एआरआर) को, बंद होने के बाद, बेंचमार्क के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। नई विदेशी मुद्रा ईसीबी और टीसी के लिए लिबोर और एआरआर के बीच क्रेडिट जोखिम और मियादी प्रीमियम में अंतर को ध्यान में रखते हुए, समग्र लागत सीमा को एआरआर पर क्रमशः 450 बीपीएस से 500 बीपीएस और 250 बीपीएस से 300 बीपीएस तक संशोधित करने का प्रस्ताव है। लिबोर से जुड़े मौजूदा ईसीबी और टीसी के परिवर्तन को सक्षम करने के लिए, समग्र लागत सीमा को एआरआर पर क्रमशः 450 बीपीएस से 550 बीपीएस और 250 बीपीएस से 350 बीपीएस तक संशोधित करने का प्रस्ताव है।

III. भुगतान और निपटान प्रणाली

4. भुगतान प्रणाली में प्रभारों पर चर्चा पत्र

हाल के वर्षों में सभी हितधारकों के ठोस प्रयासों के माध्यम से डिजिटल भुगतान के लिए स्वीकृति बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की गई है। डिजिटल भुगतान सेवाएं प्रदान करने में शामिल संस्थाएं लागत वहन करती हैं, जो आम तौर पर व्यापारी या ग्राहक से वसूल की जाती हैं या एक या अधिक प्रतिभागियों द्वारा वहन की जाती हैं। जबकि इन प्रभारों को वहन करने वाले ग्राहकों के फायदे और नुकसान दोनों हैं, उन्हें यथोचित होना चाहिए और डिजिटल भुगतान को अपनाने में बाधक नहीं बनना चाहिए। शामिल मुद्दों पर एक व्यापक दृष्टिकोण लेने के लिए, एक चर्चा पत्र जारी करने का प्रस्ताव है जिसमें डिजिटल भुगतान के विभिन्न चैनलों जैसे क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, प्रीपेड भुगतान लिखतों (कार्ड और वॉलेट), यूपीआई, आदि में शामिल प्रभारों से संबंधित सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा। । यह चर्चा पत्र सुविधा शुल्क, अधिभार, आदि से संबंधित मुद्दों और उपयोगकर्ताओं के लिए डिजिटल लेनदेन को किफायती बनाने और प्रदाताओं के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी बनाने के लिए आवश्यक उपायों पर भी प्रतिक्रिया मांगेगा। चर्चा पत्र एक महीने के समय में जारी किया जाएगा।

5. फीचर फोन उपयोगकर्ता के लिए यूपीआई

भारत में लगभग 118 करोड़ मोबाइल उपयोगकर्ताओं (ट्राई, अक्तूबर 2021)1 का एक बड़ा मोबाइल फोन उपभोक्ता आधार है, जिसमें से लगभग 74 करोड़ (स्टेटिस्टा, जुलाई 2021) के पास स्मार्ट फोन हैं, जो दर्शाता है कि देश में फीचर फोन उपयोगकर्ताओं की एक बड़ी संख्या है2। फीचर फोन उपयोगकर्ताओं के पास अभिनव भुगतान उत्पादों तक सीमित पहुंच है। हालांकि फीचर फोन में *99# के लघु कोड का उपयोग करके मूल भुगतान सेवाओं का लाभ उठाने के विकल्प के रूप में एनयूयूपी (नेशनल यूनिफाइड यूएसएसडी प्लेटफॉर्म) है, लेकिन इसका उपयोग नहीं किया जाता है। वित्तीय पैठ को गहन बनाने के लिए, फीचर फोन उपयोगकर्ताओं को डिजिटल भुगतान की मुख्यधारा में लाना महत्वपूर्ण है। आरबीआई विनियामक सैंडबॉक्स के पहले कोहार्ट में, कुछ नवोन्मेषकों ने 'खुदरा भुगतान' की थीम के तहत फीचर फोन भुगतान के लिए अपने समाधानों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया था। अन्य कॉम्प्लिमेंट्री सॉल्यूशंस के साथ ये उत्पाद व्यापक डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए फीचर फोन पर यूपीआई-आधारित डिजिटल भुगतान समाधान की सुविधा प्रदान करेंगे। फीचर फोन यूजर्स के लिए यूपीआई-आधारित भुगतान उत्पाद लॉन्च करने का प्रस्ताव है। आगे के विवरण की घोषणा शीघ्र ही की जाएगी।

6. यूपीआई पर छोटे मूल्य के लेनदेन के लिए प्रक्रिया प्रवाह का सरलीकरण

लेन-देन की मात्रा (प्रति दिन 14 करोड़ लेनदेन, अक्तूबर 2021)3 के मामले में यूपीआई देश में सबसे बड़ी खुदरा भुगतान प्रणाली है। यूपीआई के शुरुआती उद्देश्यों में से एक कम मूल्य के लेनदेन के लिए नकदी की जगह लेना था। लेन-देन डेटा विश्लेषण से पता चलता है कि यूपीआई के माध्यम से किए गए 50 प्रतिशत लेनदेन ₹200 से कम वाले थे, जो इसकी सफलता को दर्शाता है। हालांकि, ये कम मूल्य के लेन-देन, महत्वपूर्ण प्रणाली क्षमता और संसाधनों का उपयोग करते हैं, जिससे कई बार कनेक्टिविटी से संबंधित मुद्दों के कारण लेनदेन की विफलता के कारण ग्राहकों को असुविधा होती है। अतः, यूपीआई ऐप में "ऑन-डिवाइस" वॉलेट के माध्यम से छोटे मूल्य के लेनदेन को सक्षम करके एक सरल प्रक्रिया प्रवाह की पेशकश करने का प्रस्ताव है जो उपयोगकर्ता के लेनदेन अनुभव में किसी भी बदलाव के बिना बैंकों के सिस्टम संसाधनों का संरक्षण करेगा।

7. निर्दिष्ट श्रेणियों के लिए यूपीआई लेनदेन की सीमा में वृद्धि

रिज़र्व बैंक वित्तीय बाजारों में खुदरा ग्राहकों की अधिक भागीदारी को सुगम बनाने के प्रयास कर रहा है, जैसे, खुदरा प्रत्यक्ष योजना के हालिया लॉन्च के माध्यम से जी-सेक खंड में निवेश, जहां यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग जैसे अन्य विकल्पों के अलावा, प्राथमिक और द्वितीयक दोनों बाजारों में भाग लेने के लिए भुगतान करने के लिए उपयोग किया जा सकता है। समय के साथ, यूपीआई भी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) के लिए 01 जनवरी 20194 से इसकी उपलब्धता के बाद से एक लोकप्रिय भुगतान विकल्प बन गया है। यह रिपोर्ट किया गया है कि ₹2 से ₹5 लाख के आईपीओ आवेदन, सदस्यता आवेदनों का लगभग 10 प्रतिशत है। यूपीआई प्रणाली में लेनदेन की सीमा मार्च 2020 में ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख कर दी गई थी। खुदरा निवेशकों द्वारा यूपीआई के उपयोग को और प्रोत्साहित करने के लिए, खुदरा प्रत्यक्ष योजना और आईपीओ आवेदनों के लिए यूपीआई के माध्यम से भुगतान हेतु लेनदेन की सीमा को ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख करने का प्रस्ताव है। एनपीसीआई को जल्द ही अलग से निर्देश जारी किए जाएंगे।

(योगेश दयाल) 
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2021-2022/1323


1 https://trai.gov.in/sites/default/files/PR_No.45of2021_0.pdf

2 https://www.statista.com/statistics/467163/forecast-of-smartphone-users-in-india/

3 https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/content/docs/PSDDP04062020.xlsx

4 https://www.sebi.gov.in/sebi_data/commondocs/mar-2019/useofunifiedpaymentinterfacefaq_p.pdf


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