प्रेस प्रकाशनी

विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य

09 अक्तूबर 2020

विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य

चूंकि COVID-19 का खतरा अभी भी कम नहीं हुआ है, लोगों की आवाजाही पर क्रमिक रुप से प्रतिबंध उठाकर और देश भर में व्यावसायिक प्रतिष्ठान खोलने से आर्थिक गतिविधियों की बहाली फिर से हो रही है। वापसी के इस चरण के दौरान वित्तीय क्षेत्र की भूमिका आर्थिक गतिविधियों के पूर्व-कोविड ​​स्तरों तक पहुंचने के लिए कारोबारों को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण बनी रहेगी। पिछले कुछ महीनों में रिज़र्व बैंक की विनियामक कार्रवाइयों का फोकस पहले ऋण लेने वालों को, स्थगन और अन्य उपायों के विस्तार के माध्यम से, COVID-19 के प्रभाव से तत्काल राहत प्रदान करना, और फिर COVID-19 से संबंधित दवाब के संकल्प ढ़ाचे के समाधान के माध्यम से प्रस्तावों को सुगम बनाना था। नतीजतन, ऋणदात्री संस्थाओं को गतिविधि को पुनर्जीवित करने और उनके ऋण की मूल गतिविधि पर ध्यान केंद्रित करना शुरू करना होगा। तदनुसार, इन उपायों का उद्देश्य (i) वित्तीय बाजारों के लिए चलनिधि समर्थन में वृद्धि करना ताकि अर्थव्यवस्था के लक्षित क्षेत्रों में गतिविधि को अन्य क्षेत्रों के जुड़ाव के साथ पुनर्जीवित किया जा सके; (ii) निर्यात को बढ़ावा देना; (iii) ऋण अनुशासन मानदंडों के दायरे के भीतर विशिष्ट क्षेत्रों के लिए ऋण के प्रवाह में सुधार के लिए विनियामक समर्थन; (iv) वित्तीय समावेशन को व्यापक बनाना; तथा (v) वृद्धि का समर्थन करते हुए, ग्राहक संतुष्टि को बेहतर बनाने के लिए भुगतान प्रणाली सेवाओं को उन्नत करके कारोबार को आसानी से करने की सुविधा प्रदान करना।

I. चलनिधि उपाय और वित्तीय बाजार

1. मांग पर टीएलटीआरओ

रिज़र्व बैंक द्वारा चलनिधि उपायों पर ध्यान केंद्रित करने में अब विशिष्ट क्षेत्रों में गतिविधि का पुनरुद्धार शामिल है, जिनका पिछले और आगे दोनों से जुड़ाव हैं, तथा वृद्धि पर बहुस्तरीय प्रभाव पड़ा है। तदनुसार, यह निर्णय किया गया है कि पॉलिसी रेपो दर से सहलग्न अस्थायी दर पर कुल 1,00,000 करोड़ तक की राशि के लिए तीन वर्षों तक के टीएलटीआरओ को मांग पर संचालित किया जाए। इस योजना को प्राप्त प्रतिक्रिया की समीक्षा करने के बाद राशि और अवधि बढ़ाने के संबंध में लचीलेपन के साथ यह योजना 31 मार्च 2021 तक उपलब्ध होगी। इस योजना के तहत बैंकों द्वारा प्राप्त चलनिधि को संस्था द्वारा विशिष्ट क्षेत्रों के लिए जारी कॉरपोरेट बॉन्ड, वाणिज्यिक पेपर और गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर में नियोजित किया जाना चाहिए जो 30 सितंबर 2020 को ऐसे लिखतों में अपने निवेश के बकाया स्तर के अलावा हो। इस योजना के तहत प्राप्त चलनिधि का उपयोग इन क्षेत्रों के बैंक ऋणों और अग्रिमों को बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है। इस सुविधा के तहत बैंकों द्वारा किए गए निवेश को परिपक्वता तक धारित (एचटीएम) के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा, यहां तक ​​कि कुल निवेश का 25 प्रतिशत से अधिक एचटीएम पोर्टफोलियो में शामिल करने की अनुमति है। इस सुविधा के तहत सभी एक्सपोज़र को बड़े एक्सपोज़र फ्रेमवर्क (एलईएफ) के तहत गणना से छूट दी जाएगी। इसके अलावा, जिन बैंकों ने लक्षित दीर्घकालिक रेपो परिचालन (टीएलटीआरओ और टीएलटीआरओ 2.0) के तहत पहले निधि का लाभ उठाया था, उनके पास परिपक्वता से पहले इन लेनदेन को रिवर्स करने का विकल्प है। 2020-21 की दूसरी छमाही में केंद्र और राज्यों की उधार आवश्यकताओं को देखते हुए और जैसे ही रिकवरी मजबूत होने की स्थिति में आने लगेगी ऋण की मांग में संभावित पिक-अप होगा, मांग पर टीएलटीआरओ का उद्देश्य चलनिधि के संघर्ष से रुकावट बिना बैंकों को अपने कार्यों को सुचारू और निर्बाध रूप से संचालित करने में सक्षम बनाना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रणाली में चलनिधि सुलभ बनी रहे। योजना का विवरण अलग से घोषित किया जाएगा।

2. परिपक्वता तक धारित (एचटीएम) श्रेणी में एसएलआर धारण

क्रमबद्ध बाजार की स्थिति को बढ़ाने और अनुकूल वित्तपोषण लागत सुनिश्चित करने के लिए, रिज़र्व बैंक ने 01 सितंबर 2020 से बैंकों को परिपक्वता तक धारित (एचटीएम) के तहत 1 सितंबर 2020 या उसके बाद अर्जित एसएलआर प्रतिभूतियों को 31 मार्च 2021 तक एनडीटीएल के 19.5 प्रतिशत से 22 प्रतिशत तक की कुल सीमा तक धारित करने में बढ़ोतरी की है। 31 मार्च 2021 के बाद एसएलआर प्रतिभूतियों में इन निवेशों की स्थिति के बारे में बाजारों को अधिक निश्चितता देने के लिए, यह निर्णय किया गया कि 1 सितंबर 2020 और 31 मार्च 2021 के बीच अर्जित प्रतिभूतियों के लिए 31 मार्च 2022 तक 22 प्रतिशत की बढ़ी हुई एचटीएम सीमा प्रदान की जाए। 30 जून 2022 को समाप्त तिमाही से एचटीएम की सीमा चरणबद्ध तरीके से 22 प्रतिशत से 19.5 प्रतिशत हो जाएगी। यह अपेक्षा की जाती है कि बैंक एचटीएम सीमाओं की बहाली के लिए स्पष्ट ग्लाइड पाथ के साथ एक सर्वोत्तम तरीके से एसएलआर प्रतिभूतियों में अपने निवेश की योजना बनाने में सक्षम होंगे।

3. राज्य विकास ऋण (एसडीएल) में खुला बाजार परिचालन (ओएमओ)

वर्तमान में, एसडीएल टी-बिल, दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियों और तेल बॉन्ड के साथ चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के लिए पात्र संपार्श्विक हैं। चलनिधि में सुधार और कुशल मूल्य निर्धारण की सुविधा के लिए, एसडीएल में चालू वित्त वर्ष के दौरान एक विशेष मामले के रूप में खुले बाजार संचालन (ओएमओ) आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। राज्यों द्वारा जारी की जाने वाली प्रतिभूतियों में एसडीएल के एक समूह का ओएमओ परिचालन किया जाएगा।

II. निर्यात को समर्थन

4. निर्यातकों को स्वचालित सतर्कता सूची में शामिल करना- समीक्षा

निर्यात डाटा प्रसंस्करण एवं निगरानी प्रणाली (ईडीपीएमएस) के स्वचालन के भाग के रूप में, 2016 में निर्यातकों को ’सतर्कता सूची में शामिल करने/ हटाने’ को स्वचालित किया गया था। तदनुसार, यदि ईडीपीएमएस में निर्यातकों के विरुद्ध कोई भी पोतलदान बिल 2 वर्ष से अधिक समय तक बकाया रहा और बकाया पोतलदान बिल के विरुद्ध निर्यात आय की वसूली के लिए कोई विस्तार नहीं दिया गया हो, तो निर्यातकों को स्वचालित सतर्कता सूची में शामिल किया जाता था। इसके अतिरिक्त, कुछ मामलों में 2 वर्ष की समाप्ति से पहले प्राधिकृत व्यापारी (एडी) बैंक की सिफारिशों के आधार पर सतर्कता सूची में शामिल करने की सामान्य प्रणाली जारी रही। प्रणाली को अधिक निर्यातक के अनुकूल और निष्पक्ष बनाने के लिए स्वचालित सतर्कता सूची में शामिल करने को बंद करने का निर्णय लिया गया है। रिज़र्व बैंक, एडी बैंक की मामला-विशिष्ट सिफारिशों के आधार पर सतर्कता सूची में शामिल करना जारी रखेगा। इस संबंध में संबंधित अनुदेश शीघ्र ही जारी किए जाएंगे।

III. विनियामक उपाय

5. विनियामक खुदरा पोर्टफोलियो - जोखिम भार के लिए संशोधित सीमा

भारतीय रिज़र्व बैंक के वर्तमान अनुदेशों के अनुसार, बैंकों के विनियामक खुदरा पोर्टफोलियो में शामिल एक्सपोज़र को 75 प्रतिशत का जोखिम भार सौंपा गया है। इस प्रयोजन के लिए, पात्र एक्सपोज़र को कुछ विशिष्ट मानदंडों को पूरा करने की आवश्यकता होती है, जिसमें व्यक्तिगत एक्सपोज़र का कम मूल्य शामिल है। एक्सपोज़र के मूल्य के संबंध में, यह निर्धारित किया गया है कि एक प्रतिपक्ष को अधिकतम एकत्रित खुदरा एक्सपोजर 5 करोड़ की पूर्ण उच्ततम सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए। इस खंड के लिए व्यक्तियों और छोटे कारोबारों (अर्थात 50 करोड़ तक के टर्नओवर वाले) के लिए ऋण की लागत को कम करने, और बासेल दिशानिर्देशों के साथ सामंजस्य बनाने के लिए, सभी नए और साथ ही वृद्धिशील पात्र एक्सपोज़र के संबंध में इस सीमा को बढ़ाकर 7.5 करोड़ करने का निर्णय लिया गया है। इस उपाय से छोटे कारोबार के खंड में बहुत जरूरी ऋण प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है।

6. व्यक्तिगत आवास ऋण - जोखिम भार को युक्तिसंगत बनाना

बैंकों द्वारा व्यक्तिगत आवास ऋण के क्रेडिट जोखिम के लिए पूंजी प्रभार पर मौजूदा नियमों के अनुसार, विभेदक जोखिम भार ऋण के आकार के साथ-साथ मूल्य अनुपात की तुलना में ऋण (एलटीवी) के आधार पर लागू होते हैं। आर्थिक सुधार में स्थावर संपदा क्षेत्र की महत्वपूर्णता को स्वीकार करते हुए, रोजगार सृजन में और अन्य उद्योगों के साथ अंतरसंबंधों में इसकी भूमिका को देखते हुए, यह निर्णय लिया गया है कि प्रतिचक्रीय उपायों के रूप में 31 मार्च 2022 तक मंजूर सभी नए आवास ऋणों के लिए उनको केवल एलटीवी अनुपातों से जोड़कर जोखिम भार को युक्तिसंगत बनाया जाए। ऐसे ऋण 35 प्रतिशत के जोखिम भार को, जहां एलटीवी 80 प्रतिशत से कम या इसके बराबर है, और 50 प्रतिशत के जोखिम भार जहां एलटीवी 80 प्रतिशत से अधिक है लेकिन 90 प्रतिशत से कम या इसके बराबर है, आकर्षित करेंगे। इस उपाय से स्थावर संपदा क्षेत्र को बैंक ऋण देने की संभावना है।

IV. वित्तीय समावेशन

7. सह-उत्पत्ति मॉडल की समीक्षा

रिज़र्व बैंक ने 2018 में, कुछ शर्तों के अधीन प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र को ऋण देने के लिए बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफ़सी) की एक श्रेणी के द्वारा ऋण की सह-उत्पत्ति के लिए एक रूपरेखा तैयार की थी। इस व्यवस्था ने दोनों ऋणदाताओं द्वारा संबंधित व्यावसायिक उद्देश्यों के उचित संरेखण सुनिश्चित करने के लिए जोखिम और रिवार्ड को साझा करने के साथ, सुविधा स्तर पर ऋण के संयुक्त योगदान को आवश्यक बना दिया। एक सहयोगी प्रयास से बैंकों और एनबीएफसी के संबंधित तुलनात्मक लाभों का बेहतर लाभ उठाने के लिए और अर्थव्यवस्था के सेवा रहित और अल्प सेवा प्राप्त क्षेत्र में ऋण के प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए, हितधारकों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर यह निर्णय लिया गया है कि इस योजना को सभी एनबीएफ़सी (एचएफ़सी सहित) के लिए लागू किया जाए ताकि योजना के लिए सभी प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण को पात्र बनाया जा सके तथा उधार देने वाले संस्थानों को अधिक परिचालन लचीलापन प्रदान किया जा सके और उनसे यह अपेक्षित होगा कि वे आउटसोर्सिंग, केवाईसी, आदि पर विनियामक दिशानिर्देशों का पालन करें। प्रस्तावित ढांचे को "सह-उधार मॉडल" कहा जाएगा। संशोधित दिशानिर्देश अक्टूबर 2020 के अंत तक जारी किए जाएंगे।

V. भुगतान एवं निपटान प्रणाली

8. तत्काल सकल निपटान प्रणाली (आरटीजीएस) की चौबीसों घंटे उपलब्धता

दिसंबर 2019 में, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि (एनईएफ़टी) प्रणाली 24x7x365 आधार पर उपलब्ध कराई गई थी और तब से यह प्रणाली सुचारू रूप से चल रही है। बड़े मूल्य वाले आरटीजीएस प्रणाली वर्तमान में सप्ताह के सभी कार्य दिवसों (महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छोड़कर) को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक ग्राहकों के लिए उपलब्ध है। भारतीय वित्तीय बाजारों के वैश्विक एकीकरण के उद्देश्य से चल रहे प्रयासों का समर्थन करने के लिए, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों को विकसित करने और घरेलू कॉर्पोरेट्स और संस्थानों को व्यापक भुगतान लचीलापन प्रदान करने के लिए भारत के प्रयासों को सुविधाजनक बनाने हेतु, हर रोज आरटीजीएस प्रणाली को चौबीस घंटे उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ, भारत 24x7x365 बड़े मूल्य के तत्काल भुगतान प्रणाली वाले विश्व स्तर पर बहुत कम देशों में से एक होगा। यह सुविधा दिसंबर 2020 से प्रभावी हो जाएगी।

9. भुगतान प्रणाली परिचालकों (पीएसओ) को जारी किए गए प्राधिकरण प्रमाणपत्र (सीओए) के लिए स्थायी वैधता

वर्तमान में रिज़र्व बैंक, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत प्रीपेड भुगतान लिखत (पीपीआई) जारी करने वाले गैर-बैंकों को, व्हाइट लेबल एटीएम (डब्ल्यूएएलएस) या ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंट सिस्टम (ट्रेड्स) को संचालित करने वालों या भारत बिल भुगतान परिचालन इकाइयों (बीबीपीओयूएस) के रूप में भाग लेने वालों को "मांग पर' प्राधिकरण जारी करता है। ऐसे पीएसओ का प्राधिकरण (प्राधिकरण के नवीनीकरण सहित) काफी हद तक पांच वर्षों के निर्दिष्ट अवधि के लिए है। जबकि भुगतान प्रणाली के विकास की प्रारंभिक अवधि में ऐसे सीमित अवधि के लाइसेंस की आवश्यकता थी, यह पीएसओ के लिए व्यावसायिक अनिश्चितता पैदा कर सकता है और इसमें नवीकरण की प्रक्रिया में विनियामक संसाधनों परिहार्य उपयोग शामिल है। इसके अलावा, रिज़र्व बैंक का निरीक्षण ढांचा धीरे-धीरे एक अधिक परिपक्व और व्यापक प्रणाली के रूप में विकसित हो गया है, जो स्पष्ट रूप से अपनी निरीक्षण उम्मीदों और पीएसओ के निरीक्षण के लिए अपनाई गई कार्यपद्धति को स्पष्ट करता है। लाइसेंस अनिश्चितताओं को कम करने और पीएसओ को अपने व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करने और दुर्लभ नियामक संसाधनों के इष्टतम उपयोग के लिए यह निर्णय लिया गया है कि कतिपय शर्तों के अधीन सभी पीएसओ (नए आवेदकों के साथ-साथ मौजूदा पीएसओ दोनों को) को स्थायी आधार पर प्राधिकरण प्रदान किया जाए। विस्तृत अनुदेश अलग से जारी किए जाएंगे।

(योगेश दयाल) 
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2020-2021/454


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