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रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर सं. 05/2020: भारत में मूल मुद्रास्फीति उपाय – सीपीआई डेटा का उपयोग करके एक अनुभवजन्य मूल्यांकन

12 मई 2020

रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर सं. 05/2020:
भारत में मूल मुद्रास्फीति उपाय – सीपीआई डेटा का उपयोग करके एक अनुभवजन्य मूल्यांकन

भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज भारतीय रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर श्रृंखला* के तहत “भारत में मूल मुद्रास्फीति उपाय – सीपीआई डेटा का उपयोग करके एक अनुभवजन्य मूल्यांकन” शीर्षक से अपनी वेबसाइट पर वर्किंग पेपर रखा। इस पेपर के सह-लेखक हैं जनक राज, संगीता मिश्रा, आशीष थॉमस जॉर्ज और जॉइस जॉन।

इस पेपर में 2012 से 2019 की अवधि के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) (2012 = 100) के आधार पर भारत में मुख्य मुद्रास्फीति के उपायों के रूप में उनकी उपयुक्तता के लिए ग्यारह संभावित उम्मीदवारों का आकलन किया गया। इनमें छह बहिष्करण-आधारित उपाय शामिल हैं, जैसे (i) खाद्य और ईंधन को छोड़कर सीपीआई; (ii) खाद्य, पेट्रोल और डीजल को छोड़कर सीपीआई; (iii) खाद्य, ईंधन, पेट्रोल और डीजल को छोड़कर सीपीआई; (iv) खाद्य, पेट्रोल, डीजल, सोना और चाँदी को छोड़कर सीपीआई; (v) खाद्य, ईंधन, पेट्रोल, डीजल, सोना और चाँदी को छोड़कर सीपीआई; और (vi) खाद्य, ईंधन, पेट्रोल, डीजल, सोना, चाँदी और आवास तथा पाँच सांख्यिकी उपाय, जैसे (i) मध्य; (ii) 5 प्रतिशत ट्रीम्ड मध्य; (iii) 10 प्रतिशत ट्रीम्ड मध्य; (iv) 20 प्रतिशत ट्रीम्ड मध्य; और (v) ऐतिहासिक मानक विचलन को छोड़कर सीपीआई। इन सभी उम्मीदवारों का परीक्षण मूल मुद्रास्फीति के मानक गुणों, अर्थात, संचार में आसानी, साधन की समानता, निम्न अस्थिरता, निष्पक्षता, पुन: प्रयोज्य, सह-एकीकरण और आकर्षण स्थितियों के लिए किया गया था। ऐतिहासिक मानक विचलन-आधारित उपाय ने संचार में आसानी को छोड़कर मूल मुद्रास्फीति के सभी गुणों को संतुष्ट किया- सामान्य रूप से, सांख्यिकीय उपायों का उपयोग मौद्रिक नीति संचार के लिए विकट चुनौतियों का सामना करता है। सभी छह बहिष्करण आधारित उपायों ने सभी गुणों को संतुष्ट किया सिवाय पुनरावृत्ति के अर्थात् मध्यम अवधि में हेडलाइन मुद्रास्फीति, मूल मुद्रास्फीति की ओर पुनरावृत हो रही है। यह संभवतः जनवरी 2017 से अगस्त 2019 तक कम खाद्य मुद्रास्फीति प्रकरण के कारण था। इस अवधि के नियंत्रण के लिए, सभी बहिष्करण-आधारित मुद्रास्फीति उपायों, खाद्य, ईंधन, पेट्रोल, डीजल, सोना, चाँदी और आवास को छोड़कर सीपीआई के अलावा हेडलाइन मुद्रास्फीति की ओर पुनरावृत हो रही है जिससे वे मूल मुद्रास्फीति के सभी वांछनीय गुणों को संतुष्ट कर रहे हैं।

अजीत प्रसाद
निदेशक   

प्रेस प्रकाशनी: 2019-2020/2351


* रिज़र्व बैंक ने आरबीआई वर्किंग पेपर श्रृंखला की शुरुआत मार्च 2011 में की थी। ये पेपर रिज़र्व बैंक के स्टाफ सदस्यों द्वारा किए जा रहे अनुसंधान प्रस्तुत करते हैं और अभिमत प्राप्त करने और इस पर अधिक चर्चा के लिए इन्हें प्रसारित किया जाता है। इन पेपरों में व्यक्त विचार लेखकों के होते हैं, भारतीय रिज़र्व बैंक के नहीं होते हैं। अभिमत और टिप्पणियां कृपया लेखकों को भेजी जाएं। इन पेपरों के उद्धरण और उपयोग में इनके अनंतिम स्‍वरूप का ध्यान रखा जाए।


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