प्रेस प्रकाशनी

विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य

4 अक्तूबर 2019

विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य

यह वक्तव्य विनियमन और पर्यवेक्षण को सुदृढ़ बनाने; वित्तीय बाजारों को व्यापक और मजबूत करने और भुगतान और निपटान प्रणाली में सुधार के लिए विभिन्न विकासात्मक और विनियामक नीति उपायों को निर्धारित करता है।

I. विनियमन और पर्यवेक्षण

1. गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी - सूक्ष्म वित्त संस्थान (एनबीएफसी-एमएफआई)

2010 में आंध्र प्रदेश सूक्ष्म वित्त संकट को देखते हुए, एमएफआई क्षेत्र में मुद्दों और समस्याओं का अध्ययन करने के लिए रिज़र्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड की एक उप-समिति (अध्यक्ष: श्री वाई.एच.मालेगाम) का गठन किया गया था । समिति की सिफारिशों के आधार पर, एनबीएफसी, अर्थात, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी- सूक्ष्म वित्त संस्थान (एनबीएफसी-एमएफआई) की एक अलग श्रेणी बनाने का निर्णय लिया गया और दिसंबर 2011 में एनबीएफसी-एमएफआई के लिए एक विस्तृत विनियामक ढांचा तैयार किया गया था। पात्र परिसंपत्ति के रूप में जोखिम को वर्गीकृत करने के लिए आय और ऋण सीमा को अंतिम बार 2015 में संशोधित किया गया था। गरीब तबके के लोगों तक ऋण पहुंचाने और उन्हें विकासशील अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका निर्धारित करने में सक्षम बनाने हेतु एमएफआई द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर विचार करते हुए इन मानदंडों को निम्नानुसार संशोधित करना प्रस्तावित है:

  1. एनबीएफसी-एमएफआई के उधारकर्ताओं के वर्तमान स्तर ग्रामीण क्षेत्रों में 1.00 लाख और शहरी / अर्ध शहरी क्षेत्रों के लिए 1.60 लाख को बढ़ाकर क्रमश: 1.25 लाख और 2.00 लाख किया जाए।

  2. पात्र उधारकर्ता के लिए ऋण सीमा को 1.00 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख की जाए।

इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश शीघ्र ही जारी किए जाएंगे।

II. वित्तीय बाजार

2. ऑफशोर रुपया बाजार

ऑफशोर रुपया बाजार पर कार्य बल (अध्यक्ष: श्रीमती उषा थोरात) ने 30 जुलाई 2019 को प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में गैर-निवासियों को ऑनशोर विदेशी मुद्रा बाजार तक पहुंच बनाने को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वपूर्ण उपायों की सिफारिश की। रिजर्व बैंक ने सिफारिशों की जांच की है और निम्नलिखित सिफारिशों को स्वीकार करना प्रस्तावित किया है:

  1. घरेलू बैंकों को स्वतंत्र रूप से किसी भी समय गैर-निवासियों को उनकी भारतीय बहियों के अलावा, घरेलू बिक्री टीम द्वारा या उनकी विदेशी शाखाओं के माध्यम से विदेशी मुद्रा कीमतों की पेशकश करने की अनुमति देना; तथा

  2. अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (आईएफएससी) में कारोबार करने के लिए रुपया डेरिवेटिव (विदेशी मुद्रा में निपटान के साथ) को अनुमति देना।

केंद्र सरकार और अन्य विनियामकों के परामर्श से उपर्युक्त दोनों सिफारिशों को लागू करने के निर्देश जारी किए जाएंगे। समिति की अन्य सिफारिशें विचाराधीन हैं और उन पर निर्णय की घोषणा यथासमय की जाएगी।

3. अनिवासी रुपया खाता - नीति की समीक्षा

भारतीय रिज़र्व बैंक विशेष रूप से बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी), व्यापार ऋण और निर्यात और आयात के संबंध में सीमा-पार लेन-देन को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रयास कर रहा है, जिससे भारत में रहने वाले व्यक्तियों के लिए विनिमय जोखिम कम हो जाता है। इन प्रयासों को जारी रखते हुए, भारत सरकार के परामर्श के पश्चात यह निर्णय किया गया है कि, ब्याज रहित वाले विशेष गैर-निवासी रुपये (एसएनआरआर) खाते के दायरे को बढ़ाने के लिए भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों को रुपया मूल्यवर्ग ईसीबी की सुविधा, व्यापार ऋण और व्यापार चालान के लिए ऐसे खातों को खोलने की अनुमति प्रदान की जाए। इसके अलावा, एसएनआरआर खाते की अवधि पर प्रतिबंध, जो कि वर्तमान में 7 वर्ष है, को भी उपरोक्त उद्देश्यों के लिए हटाने का प्रस्ताव है। इस संबंध में दिशानिर्देश एक महीने के भीतर जारी किए जाएंगे।

III. भुगतान एवं निपटान प्रणाली

4. प्रस्तावित 24x7 राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण (एनईएफ़टी) प्रणाली के लिए चलनिधि सहायता

7 अगस्त 2019 की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति में यह घोषणा की गई थी कि भारतीय रिज़र्व बैंक दिसंबर 2019 से जनता के लिए 24x7 आधार पर राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण की सुविधा उपलब्ध कराएगा। रिजर्व बैंक के पास रखे गए बैंकों के खातों में इन लेन-देन के सुचारू निपटान को सुकर बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि रिजर्व बैंक संपार्श्विक चलनिधि सहायता को चौबीस घंटों के लिए विस्तारित करेगा, जो वर्तमान में एनईएफटी पर प्रत्येक कार्य दिवस पर शाम 7.45 बजे तक उपलब्ध है। इससे बैंकों द्वारा निधियों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी।

5. बड़े गैर-बैंक प्रीपेड भुगतान लिखत (पीपीआई) जारीकर्ताओं द्वारा आंतरिक लोकपाल

ग्राहक शिकायतों के निवारण के लिए एक मजबूत व्यवस्था प्रदान करने के लिए रिज़र्व बैंक ने जनवरी 2019 में डिजिटल लेनदेन के लिए एक लोकपाल योजना की स्थापना की थी जैसा कि 5 दिसंबर 2018 की मौद्रिक नीति वक्तव्य में घोषित किया गया था। संस्थागत स्तर पर ही शिकायत निवारण तंत्र को और मजबूत करने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि बड़े गैर-बैंक पीपीआई जारीकर्ताओं (उन संस्थाओं के लिए जिनपर 10 मिलियन से अधिक प्री-पेड भुगतान लिखत बकाया है) वाली आंतरिक लोकपाल योजना को संस्थागत बनाया जाए। आंतरिक लोकपाल का उद्देश्य संस्था के भीतर एक तेज और किफ़ायती शिकायत निवारण तंत्र की सुविधा प्रदान करना और शिकायत निवारण के लिए एक अतिरिक्त स्तर प्रदान करना है। इस संबंध में निर्देश 15 अक्टूबर 2019 तक जारी किए जाएंगे।

6. भुगतान प्रणाली आंकडों का प्रसारण

रिज़र्व बैंक विभिन्न भुगतान और निपटान प्रणाली संकेतकों पर आंकडे (रिज़र्व बैंक बुलेटिन और आरबीआई वेबसाइट पर) प्रकाशित करता है। डिजिटल भुगतान की गहनता संबंधी समिति (अध्यक्ष: श्री नंदन नीलेकणी) की सिफारिश के अनुरूप और डिजिटल भुगतान अवसरों में तेजी से विकास को देखते हुए, रिज़र्व बैंक द्वारा प्राधिकृत भुगतान प्रणाली को शामिल करने वाले भुगतान के आंकडों संबंधी अधिक सूक्ष्म जानकारी प्रसारित करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ, भुगतान प्रणाली आंकडों का संपूर्ण विवरण बुलेटिन/ वेबसाइट में उपलब्ध होगा।

7. स्वीकृति विकास निधि (एडीएफ़)

देश में कार्ड जारी करने में तेजी से हो रही वृद्धि के साथ देश भर में विशेष रूप से टियर III से टीयर VI केंद्रों में स्वीकृति बुनियादी ढांचे के विकास को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है । इन क्षेत्रों में डिजिटलीकरण को बढ़ाने के लिए जैसाकि आरबीआई के भुगतान प्रणाली विज़न दस्तावेज़ 2021 में इंगित किया गया है और डिजिटल भुगतान की गहनता संबंधी समिति (अध्यक्ष: श्री नंदन नीलेकणी) द्वारा सिफारिश की गई है, हितधारकों के परामर्श से 'स्वीकृति विकास निधि' (एडीएफ़) बनाने का निर्णय लिया गया है । दिसंबर 2019 तक ढांचे का परिचालन किया जाएगा।

8. डिजिटल भुगतान तंत्र का विस्तार और गहनता

डिजिटल भुगतान तंत्र को विस्तृत और गहन करने की दृष्टि से, यह निर्णय लिया गया है कि राज्य / केन्द्रशासित प्रदेश स्तरीय बैंकरों की समितियां (एसएलबीसी / यूटीएलबीसी) बैंकों और हितधारकों के परामर्श से पायलट आधार पर अपने संबंधित राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में एक जिले की पहचान की जाएं। पहचान किए गए जिले को महत्वपूर्ण पदचिह्न वाले बैंक को आवंटित किया जा सकता है जो जिले को 100% डिजिटल रूप से सक्षम बनाने का प्रयास करेगा। यह जिले के प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित, सावधानीपूर्वक, त्वरित, सस्ती और सुविधाजनक तरीके से डिजिटल रूप से भुगतान करने /राशि प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा। इस संबंध में दिशानिर्देश जल्द ही जारी किए जाएंगे।

(योगेश दयाल) 
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी : 2019-2020/866


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