प्रेस प्रकाशनी

विकासात्‍मक एवं नियामक नीतियों के संबंध में विवरण भारतीय रिज़र्व बैंक

4 अक्टूबर 2016

विकासात्‍मक एवं नियामक नीतियों के संबंध में विवरण
भारतीय रिज़र्व बैंक

1. इस विवरण में, रिज़र्व बैंक द्वारा हाल के नीतिगत विवरणों में घोषित विभिन्‍न विकासात्‍मक एवं नियामक उपायों में हुई प्रगति की समीक्षा की गई है। साथ ही, इसमें भुगतान और निपटान प्रणालियों की क्षमता में इज़ाफा करने और मुद्राप्रबंध में सुधार करते हुए बैंकिंग संरचना को अधिक मजबूत बनाने, वित्‍तीय बाजारों को व्‍यापक एवं गहन बनाए जाने, सभी लोगों के लिए वित्‍तीय सेवाओं की उपलब्‍धता का विस्‍तार करने के लिए नए उपाय भी निर्दिष्‍ट किए गए हैं।

I. बैंकिंग संरचना

2. अखिल भारतीय वित्‍तीय संस्‍थानों (एआईएफआई) के लिए विवेकसम्‍मत विनियमों की समीक्षा – अखिल भारतीय वित्‍तीय संस्‍थानों के वर्तमान परिचालन बासेल I पूंजीगत ढांचे के अंतर्गत होते हैं। वर्षों के दौरान, अखिल भारतीय वित्‍तीय संस्‍थानों के परिचालनात्‍मक परिदृश्‍य एवं जोखिम पृष्‍ठभूमि (रिस्‍क प्रोफाइल) में काफी परिवर्तन हुआ है। बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बासेल समिति (बीसीबीएस) द्वार वैश्वक वित्‍तीय विनियामकीय सुधारों के हिस्‍से के रूप में बासेल III को प्रारंभ किए जाने के साथ ही पूरी दुनिया के बहुत से विकास वित्‍त संस्‍थानों ने या तो स्‍वेच्‍छा से या फिर विनियामकीय प्राधिकारियों की अपेक्षानुरूप बासेल III को अपना लिया है। वित्‍तीय संस्‍थानों की सुरक्षा एवं मजबूती सुनिश्चित करने के महत्‍व को व्‍यापक रूप से ध्‍यान में रखते हुए चार अखिल भारतीय वित्‍तीय संस्‍थानों, नामत: निर्यात-आयात (इक्जिम) बैंक, राष्‍ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी), नाबार्ड एवं सिडबी पर बासेल III के पूंजीगत ढांचे के सिद्धांतों को 1 अप्रैल 2018 से चयनात्‍मक ढंग से लागू किए जाने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान दिशानिर्देशों से संबंधित दिशानिर्देश/संशोधन अक्‍तूबर 2016 के अंत तक जारी किए जाएंगे।

3. विशाल एक्‍सपोजर ढांचा – भारतीय बैंकों के एक्‍सपोजर मानकों को बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बासेल समिति के मानकों के अनुरूप बनाने के उद्देश्‍य से, तथा विशाल एक्‍सपोजर ढांचे से संबंधित चर्चा-पत्र के संबंध में प्राप्‍त टिप्‍पणियों एवं फीडबैक के आधार पर 25 अगस्‍त 2016 को विशाल एक्‍सपोजर (एलई) ढांचे का मसौदा लोगों की प्रतिक्रिया के लिए जारी किया गया। मसौदे के प्रस्‍तावों पर हितधारकोंसे प्राप्‍त टिप्‍पणियों एवं फीडबैक की जांच की जाएगी और अंतिम दिशानिर्देश अक्‍तूबर 2016 के अंत तक जारी किए जाएंगे जिन्‍हें 31 मार्च 2019 से पूर्णत: लागू किया जाना होगा।

4. प्रतिपक्षी ऋण जोखिम एवं मध्‍यवर्ती प्रतिपक्षों के एक्‍सपोजर की लिए पूंजी की गणना के संबंध में अंतिम दिशानिर्देश - प्रतिपक्षी ऋण जोखिम एवं मध्‍यवर्ती प्रतिपक्षों के एक्‍सपोजर के लिए पूंजी की गणना के संबंध में बीसीबीएस के संशोधित ढांचे पर अधारित मसौदा दिशानिर्देश आम जनता के लिए जून 2016 में जारी किए गए थे। प्राप्‍त फीडबैक के आधार पर इन पहलुओं से संबंधित बैंकों के लिए अंतिम दिशा-निदेश अक्‍तूबर 2016 के अंत तक जारी किए जाएंगे।

5. बैंकिंग बही में ब्‍याज दर जोखिम संबंधी दिशानिर्देश - बैंकिंग बही में ब्‍याज दर जोखिम से संबंधित बीसीबीएस के संशोधित ढाँचे के आधार पर बैंकों के लिए ड्राफ़्ट दिशा-निर्देश नवंबर 2016 के अंत तक जारी किए जाएंगे।

6. दबावग्रस्‍त आस्तियों की संवहनीय संरचना करने संबंधी योजना – रिज़र्व बैंक ने वास्‍तविक कठिनाइयों का समाना कर रहे और वित्‍तीय पुन: संरचना करने का गहन समन्‍वय रखने वाले प्रतिष्‍ठानों की वित्‍तीय संरचना को संशोधित करने का एक मार्ग प्रदान हेतु 'दबावग्रस्‍त आस्तियों की संवहनीय संरचना करने संबंधी योजना' (एस4ए) लागू की है। यह योजना पुन: संरचना करने में रियायत प्रदान करती है, जिसमें एक विश्‍वसनीय ढाँचे के अंतर्गत भारी मात्रा में ऋणों को बट्टा खाते में डालने और/अथवा भारी मात्रा में प्रावधान करना शामिल है। जिन बैंकों ने एस4ए के तहत समाधान के लिए मामलों को लिया है, उन्‍होंने यह दर्शाया है कि एस4ए के तहत आस्तियों के वर्गीकरण से संबंधित मानदंडों की समीक्षा इस योजना को अधिक प्रभावी करने के लिए की जाए। तदनुसार, यह अनुमति देने का प्रस्‍ताव है कि संवहनीय माने जाने वाले ऋण के भाग को कतिपय शर्तों के अधीन सभी आस्ति वर्गों में एक मानक आस्ति के रूप में माना जाए। इस संबंध में विस्‍तृत दिशा-निर्देश अक्‍तूबर 2016 के अंत तक जारी किए जाएंगे।

7. लघु वित्‍त बैंक और भुगतान बैंकों के लिए परिचालनगत दिशानिर्देश – भुगतान बैंक स्‍थापित करने के लिए 11 आवेदनों और लघु वित्‍त बैंक स्‍थापित करने के लिए 10 आवेदनों को क्रमश: अगस्‍त 2015 और सितंबर 2015 में सैद्धांतिक मंजूरी देने के बाद बैंकिंग लाइसेंस तीन लघु वित्‍त बैंकों को कारोबार शुरू करने और एक बैंक को भुगतान बैंक परिचालन का कारोबार शुरू करने के लिए प्रदान किया गया था। तीन लघु वित्‍त बैंकों में से दो ने परिचालन शुरू कर दिया है। जिन आवेदकों को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की गई थी, उनके साथ मिलकर परिचालन संबंधी दिशानिर्देशों के ड्राफ़्ट पर चर्चा की गई। उनके द्वारा की टिप्‍पणियों के आधार पर परिचालनगत दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप दे दिया गया है और उन्‍हें इस सप्‍ताह के दौरान जारी कर दिए जाएंगे।

II. वित्तीय बाजार

8. विदेशी संविभाग निवेशकों (एफपीआई) के डेरिवेटिव लेनदेनों की निगरानी – एफपीआई के अभिरक्षक बैंक एफपीआई के सभी डेरिवेटिव लेनदेनों की निगरानी के लिए जिम्मेदार होंगे। तदनुसार, प्रत्येक एफपीआई किसी भी बाजार निर्माता (अपने स्वयं के अभिरक्षक बैंक को छोड़कर) के साथ किए जाने वालसे सभी डेरिवेटिव लेनदेनों की रिपोर्ट लेनदेन की तारीख को ही अपने अभिरक्षक बैंक से करेगा।

9. अनिवासी कंपनियों की भारतीय सहायक संस्थाओं के लिए केंद्रीकृत हेजिंग सुविधा – वर्तमान में अनिवासी भारतीयों को अनुमति दी गई है कि वे भारत से होने वाले निर्यात और भारत के आयात जिसका बीजक भारतीय रुपए (आईएनआर) में बनाया गया है, में शामिल असली व्यापार लेनदेनों से उत्पन्न करेंसी जोखिम की हेजिंग करें। यह भी निर्णय लिया गया है कि समुद्रपारीय मूल बैंक या इसकी केंद्रीय ट्रेजरी को भारतीय सहायक संस्था के असली चालू खाता एक्सपोजरों से उत्पन्न करेंसी जोखिम की हेजिंग करने की अनुमति प्रदान की जाए जिससे कि भारतीय सहायक संस्थाओं के करेंसी जोखिम को बेहतर ढ़ंग से संभाला जा सके।

10. ब्याज दर विकल्पों की शुरुआत – ब्याज दर विकल्पों की शुरुआत संबंधी कार्यसमूह की रिपोर्ट फरवरी 2016 में रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई तथा बाजार सहभागियों से अभिमत मांगे गए। फीडबैक को ध्यान में रखते हुए, ब्याज दर विकल्पों पर अंतिम दिशानिर्देश अक्टूबर 2016 के अंत तक जारी किए जाएंगे।

11. स्टार्ट-अप के लिए बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) – स्टार्ट-अप नवोन्मेष को बढ़ावा देकर और प्रतिस्पर्धा उत्पन्न करके आर्थिक वृद्धि और नौकरियों के सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखते हैं। स्टार्ट-अप के लिए समुद्रपारीय उपलब्ध निधियन चैनलों को ध्यान में रखते हुए रिज़र्व बैंक भारत सरकार के परामर्श से भारतीय रुपया या अन्य किसी परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा या दोनों में प्रतिवर्ष 3 मिलियन अमेरिकी डॉलर या इसके समकक्ष राशि तक ईसीबी जुटाने के लिए ऐसी संस्थाओं को अनुमति देगा। इस संबंध में दिशानिर्देश अक्टूबर 2016 के अंत तक जारी किए जाएंगे।

12. आयात आंकड़ा प्रोसेसिंग और निगरानी प्रणाली (आईडीपीएमएस) – आयात भुगतानों की निगरानी की प्रभावशीलता में सुधार करने की दृष्टि से आयात आंकड़ा प्रोसेसिंग और निगरानी प्रणाली (अध्यक्षः श्री ए. के. पांडे) का गठन किया गया और इसकी सिफारिशों के आधार पर, आयात आंकड़ा प्रोसेसिंग और निगरानी प्रणाली के रूप में एकल केंद्रीकृत प्रणाली कार्यान्वित किए जाने का प्रस्ताव किया गया है। आईडीपीएमएस पोतलदान से लेकर अंतिम भुगतान तक के आयात लेनदेनों की शुरू से अंत तक निगरानी उपलब्ध कराएगा और इस प्रकार वर्तमान में सीमाशुल्क प्राधिकारियों, प्राधिकृत व्यापारी बैंकों और रिज़र्व बैंक द्वारा स्टैंडअलोन आधार पर की जाने वाली चालू निगरानी में मौजूदा अंतरों को खत्म कर दिया जाएगा। आईडीपीएमएस 10 अक्टूबर 2016 से प्रभावी हो जाएगा।

III. भुगतान और निपटान

13. स्वीकृति विकास निधि – यह निर्णय लिया गया है कि एक स्वीकृति विकास निधि (एडीएफ) गठित की जाए जिससे कि इलेक्ट्रॉनिक भुगतानों को व्यापक रूप से अपनाने के लिए प्रोत्साहन दिया जा सके और देश में कार्ड स्वीकृति बुनियादी सुविधा के योजनाबद्ध विस्तार को सुनिश्चित किया जा सके। स्वीकृति विकास निधि जिसे भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के तत्वाधान में स्थापित और परिचालित किया जाएगा, निधि योगदान और उपयोग के नियम निर्धारित करेगी। इसके अतिरिक्त, यह देश में विभिन्न भौगोलिक और मर्चंट खंडों के बीच स्वीकृति उपकरणों की तैनाती की योजना बनाएगी। एडीएफ ढांचे के दिशानिर्देश 31 दिसंबर 2016 तक जारी किए जाएंगे।

14. पूर्वदत्त भुगतान लिखतों (पीपीआई) के दिशानिर्देशों की समीक्षा – लगभग 47 गैर-बैंक संस्थाएं और 45 बैंक वर्तमान में पूर्वदत्त भुगतान लिखतों (पीपीआई) के लिए भुगतान प्रणालियां परिचालित कर रहे हैं। नई तकनीकों, उत्पादों और निवेशकों का उपयोग करते हुए भुगतान के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की दृष्टि से यह निर्णय लिया गया है कि पीपीआई के निर्गम और परिचालन की व्यापक समीक्षा की जाए। संशोधित दिशानिर्देश 31 दिसंबर 2016 तक जारी किए जाएंगे। तदनुसार, नए आवेदनों की प्राप्ति और प्रोसेसिंग अस्थायी आधार पर रोक दी गई है।

IV. मुद्रा प्रबंध

15. मार्गस्थ खज़ाने की सुरक्षा की समीक्षा – मार्गस्थ खज़ाने की संपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के लिए अक्टूबर 2016 के अंत तक एक उच्च स्तरीय अंतर-एजेंसी समिति गठित की जाएगी जिससे कि करेंसी नोटों/सिक्कों के विप्रेषण की सुरक्षा मजबूत की जा सके।

अल्पना किल्लावाला
प्रधान परामर्शदाता

प्रेस प्रकाशनी : 2016-2017/848


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