भारिबैं/2021-22/106
विवि.सीएपी.आरईसी.सं.56/21.06.201/2021-22
04 अक्तूबर 2021
सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (आरआरबी को छोड़कर)
महोदय/महोदया,
बासल III पूंजी विनियमन – अतिरिक्त टियर 1 पूंजी में स्थायी कर्ज लिखत (पीडीआई)- विदेशी मुद्रा/ रुपये मूल्य में विदेशों में जारी बांड के लिए पात्रता सीमा
कृपया दिनांक 1 जुलाई, 2015 को संदर्भ.विवि.सं.बीपी.बीसी.1/21.06.201/2015-16 के माध्यम से 'बासल III पूंजी विनियमन' पर जारी मास्टर परिपत्र के अनुलग्नक 4 के पैराग्राफ 1.16 (अतिरिक्त टियर 1 पूंजी में स्थायी कर्ज लिखत (पीडीआई) को शामिल करने संबंधी मानदंड) और दिनांक 03 नवंबर, 2016 को संदर्भ संख्या 28/21.06.001/2016-17 के माध्यम से विदेशों में रुपये मूल्य वाले बांड विषय पर जारी परिपत्र का संदर्भ ग्रहण करें।
2. कई बैंकों ने विदेशों में जुटाई जा सकने वाली पूंजीगत निधियों की राशि को स्पष्ट करने के लिए हमसे संपर्क किया है । इस विषय की समीक्षा की गई और तदनुसार यह स्पष्ट किया जाता है कि 1 जुलाई, 2015 को जारी उपर्युक्त संदर्भित मास्टर परिपत्र के अनुलग्नक 4 के पैरा 1.16 (ii) के अनुसार विदेशी मुद्रा में पीडीआई जारी करने के उद्देश्य के लिए "पात्र राशि" का अर्थ निम्नलिखित में से उच्चतम से होगा:
(a) जोखिम भारित आस्तियों (आरडबल्यूए) का 1.5% और
(b) कुल अतिरिक्त टियर 1 पूंजी
पिछले वित्त वर्ष के 31 मार्च की स्थिति के अनुसार।
उपरोक्त में संदर्भित "पात्र राशि" के 49% से अधिक राशि को विदेशी मुद्रा में जारी नहीं कर सकते हैं और/या "पात्र राशि" के 49% से अधिक राशि के विदेशों में रुपये मूल्य वाले बांड जारी नहीं किए जा सकते हैं।
3. तदनुसार, 1 जुलाई, 2015 को जारी उपर्युक्त संदर्भित मास्टर परिपत्र के अनुलग्नक 4 के पैरा 1.16 के उप पैरा (ii) को इसके साथ संलग्न अनुलग्नक 1 में दर्शाए अनुसार संशोधित किया गया है। अधिक स्पष्टता के लिए अनुलग्नक 2 में एक उदाहरण संलग्न है।
4. 1 जुलाई, 2015 को बासल III पूंजी विनियमन विषय पर जारी और समय-समय पर यथासंशोधित मास्टर परिपत्र की अन्य सभी शर्तें अपरिवर्तित रहेंगी। ऊपर जारी निर्देश सभी लागू विवेकपूर्ण मानदंडों और फेमा दिशानिर्देशों के अधीन होंगे।
भवदीया
(उषा जानकीरमन)
मुख्य महाप्रबंधक
अनुलग्नक 1
'बासल III पूंजी विनियमन' पर दिनांक 1 जुलाई, 2015 को संदर्भ.विवि.सं.बीपी.बीसी.1/21.06.201/2015-16 के माध्यम से जारी मास्टर परिपत्र के अनुलग्नक 4 के पैराग्राफ 1.16 के उप पैरा (ii) में संशोधन
1.16 (ii) "पात्र राशि" के 49% से अधिक राशि को विदेशी मुद्रा* में जारी नहीं कर सकते हैं और/या "पात्र राशि" के 49% से अधिक राशि के विदेशों में रुपये मूल्य वाले बांड जारी नहीं किए जा सकते हैं।
इस संदर्भ में "पात्र राशि" का अर्थ निम्नलिखित में से उच्चतम से होगा :
(a) जोखिम भारित आस्तियों (आरडबल्यूए) का 1.5% और
(b) कुल अतिरिक्त टियर 1 पूंजी
पिछले वित्त वर्ष के 31 मार्च की स्थिति के अनुसार।
*विदेशी बैंकों की शाखाओं पर लागू नहीं
अनुलग्नक 2
'बासल III पूंजी विनियमन' पर 1 जुलाई, 2015 को संदर्भ.विवि.सं.बीपी.बीसी.1/21.06.201/2015-16 के माध्यम से जारी मास्टर परिपत्र के अनुलग्नक 4 के पैराग्राफ 1.16 (ii) के अनुसार जुटाई जा सकने वाली “पात्र राशि” के संबंध में उदाहरण।
हम मान लेते हैं कि पिछले वर्ष की 31 मार्च की स्थिति के अनुसार बैंक का आरडब्ल्यूए 1000 करोड़ रुपये हैं।
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स्थिति |
AT 1 बांड की अधिकतम राशि जिसे विदेशों में उठाया जा सकता है (विदेशी मुद्रा में और/या विदेशों में रुपये मूल्य वाले बांड जारी करके) |
| स्थिति I |
बैंक के पास पिछले वित्त वर्ष के 31 मार्च की स्थिति के अनुसार आरडब्ल्यूए के 1.5% से कम या बराबर की AT1 पूंजी थी।
उदाहरण स्वरूप, बैंक के पास पिछले वित्त वर्ष के 31 मार्च को कोई AT1 पूंजी नहीं थी। |
7.35 करोड़ रुपये (आरडब्ल्यूए के 1.5% का 49%) के बराबर है। |
| स्थिति II |
बैंक के पास पिछले वित्त वर्ष के 31 मार्च की स्थिति के अनुसार आरडब्ल्यूए की 1.5% से अधिक की AT1 पूंजी थी।
उदाहरण के लिए, बैंक के पास पिछले वित्त वर्ष के 31 मार्च को ₹ 50 करोड़ की AT1 पूंजी थी। |
₹50 करोड़ का 49% अर्थात ₹24.5 करोड़ (कुल AT1 पूंजी के 49% बराबर है क्योंकि यह आरडब्ल्यूए के 1.5% से अधिक है)। |
नोट: टियर 1 पूंजी में शामिल करने के लिए मान्यता प्राप्त एटी1 (अतिरिक्त टियर 1) पूंजी की राशि 1 जुलाई, 2015 को बासल III पर जारी मास्टर परिपत्र के पैरा 4.2.2 और इसी परिपत्र के अनुलग्नक 4 के पैरा 1.3 में उल्लिखित सीमाओं के अधीन होगी। |