अधिसूचनाएं

परिसंपत्तियों का विप्रेषण – लेखापरीक्षक के प्रमाणपत्र का प्रस्तुतीकरण

भारिबैंक/2014-2015/332
ए.पी.(डीआईआर सीरीज़) परिपत्र सं.43

2 दिसंबर 2014

सभी श्रेणी-I प्राधिकृत व्यापारी बैंक

महोदया/महोदय,

परिसंपत्तियों का विप्रेषण – लेखापरीक्षक के प्रमाणपत्र का प्रस्तुतीकरण

प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंकों का ध्यान, समय समय पर यथासंशोधित, 3 मई 2000 की अधिसूचना फेमा. 13/2000-आरबी द्वारा अधिसूचित विदेशी मुद्रा प्रबंध (परिसंपत्तियों का विप्रेषण) विनियमावली, 2000 की ओर आकृष्ट किया जाता है जिसके अनुसार केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 9 अक्तूबर 2009 के परिपत्र सं.10/2002 में विनिर्दिष्ट फार्मेट में प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अपेक्षित है।

2. प्रमाणपत्रों के प्रस्तुतीणकरण के संबंध में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा जारी अनुदेशों में विगत वर्षों में काफी परिवर्तन हुए हैं। यह भी नोट करना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने 2 सितंबर 2013 की अपनी अधिसूचना में कर घोषणाओं और फार्म-15 सीए और 15-सीबी के प्रस्तुतीकरण से संबंधित अनुदेशों को पुनरीक्षित किया है।

3. तदनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक ने कर भुगतान के बाबत प्रस्तुत किए जाने वाले प्रमाणपत्रों के संबंध में 14 नवंबर 2014 के जीएसआर सं. 803 (ई) के जरिए 31 अक्तूबर 2014 की अधिसूचना सं. फेमा. 324/ 2014-आरबी के द्वारा अधिसूचित विदेशी मुद्रा प्रबंध (परिसंपत्तियों का विप्रेषण) (संशोधन) विनियमावली, 2014 के जरिये अब मूल विनियमावली में संशोधन कर दिया है।

4. इस संबंध में, प्राधिकृत व्यापारी बैंक 30 जून 2014 के ए.पी.(डीआईआर सीरीज़) परिपत्र सं.151 में अंतर्विष्ट अनुदेश देखें। विप्रेषण करते समय उसमें विनिर्दिष्ट शर्तों का अनुपालन किया जाए।

5. प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक इस परिपत्र की विषयवस्तु से अपने संबन्धित घटकों को अवगत कराएं।

6. इस परिपत्र में निहित दिशानिर्देश विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (फेमा), 1999 (1999 का 42) की धारा 10(4) एवं 11(1) के तहत एवं किसी अन्य कानून के तहत अपेक्षित अनुमति/अनुमोदन, यदि कोई हो, पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जारी किए गए हैं।

भवदीय,

(सी.डी.श्रीनिवासन)
मुख्य महाप्रबंधक


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