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इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को वित्‍त प्रदान करना – ‘इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर ऋण’ की परिभाषा

आरबीआई/2013-14/378
बैंपविवि. बीपी. बीसी. सं. 66/08.12.014/2013-14

25 नवंबर 2013

सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक
(क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) और
अखिल भारतीय मीयादी ऋण और पुनर्वित्‍त प्रदान करने वाली संस्‍थाएं
(एक्जिम बैंक, नाबार्ड, राष्‍ट्रीय आवास बैंक तथा सिडबी)

महोदय

इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को वित्‍त प्रदान करना – ‘इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर ऋण’ की परिभाषा

कृपया 'इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर ऋण की परिभाषा’ पर दिनांक 20 नवंबर 2012 का हमारा परिपत्र बैंपविवि. बीपी. बीसी. 58/08.12.014/2012-13 देखें, जिसके द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक की इन्फ्रास्‍ट्रक्‍चर ऋण की परिभाषा को भारत सरकार द्वारा 27 मार्च 2012 को अधिसूचित इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर उप-क्षेत्रों की मास्‍टर सूची के साथ समन्वित किया गया था तथा उसके बाद दिनांक 28 जून 2013 के हमारे परिपत्र बैंपविवि. बीपी. बीसी. सं. 106/08.12.014/2012-13 के द्वारा उसका अद्यतनीकरण किया गया था।

2. भारत सरकार ने दिनांक 07 अक्‍तूबर 2013 की राजपत्र अधिसूचना के द्वारा इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर उप-क्षेत्रों की समन्वित मास्‍टर सूची को और अद्यतन किया है और मास्‍टर सूची में निम्‍नलिखित नए उप-क्षेत्रों को जोड़ा गया हैः

  1. भारत में किसी भी स्‍थान पर किसी भी तारांकित रेटिंग वाले होटल, जिनकी प्रत्‍येक की परियोजना लागत 200 करोड़ रुपये से अधिक है।

  2. कन्‍वेंशन सेंटर, जिनकी प्रत्‍येक की लागत 300 करोड़ रुपये से अधिक है।

3. तदनुसार, बैंकों तथा चुनिंदा अखिल भारतीय मीयादी ऋण और पुनर्वित्‍त प्रदान करने वाली संस्‍थाओं द्वारा इन्फ्रास्‍ट्रक्‍चर ऋण के लिए उप-क्षेत्रों की अद्यतन सूची अनुबंध में दी जा रही है। बैंकों तथा चुनिंदा अखिल भारतीय मीयादी ऋण और पुनर्वित्‍त प्रदान करने वाली संस्‍थाओं द्वारा ऋण देने के प्रयोजन से नए उप-क्षेत्रों को इस परिपत्र की तारीख से 'इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर' के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा तथा वे उसमें उल्लिखित शर्तों के अधीन होंगे।

भवदीय

(चंदन सिन्‍हा)
प्रधान मुख्य महाप्रबंधक


अनुबंध
‘इन्फ्रास्‍ट्रक्‍चर ऋण’ के लिए उप-क्षेत्रों की सूची

ऋणदाताओं (अर्थात् बैंकों और चुनिंदा अखिल भारतीय मीयादी ऋण और पुनर्वित्‍त प्रदान करने वाली संस्‍थाओं) द्वारा किसी उधारकर्ता को इन्फ्रास्‍ट्रक्‍चर के निम्‍नलिखित उप-क्षेत्रों में एक्‍सपोजर के लिए प्रदान की जाने वाली ऋण सुविधा ‘इन्फ्रास्‍ट्रक्‍चर ऋण’ के रूप में मान्‍य होगीः

क्र. सं.

श्रेणी

‘इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर उप-क्षेत्र

1.

परिवहन

i. सड़क तथा पुल
ii. पत्‍तन1
iii. अंतरदेशीय जल मार्ग
iv. हवाई अड्डा
v. रेलवे ट्रैक, सुरंग, छोटे पुल, पुल2
vi. शहरी सार्वजनिक परिवहन (शहरी सड़क परिवहन के मामले में रोलिंग स्‍टाक को छोड़कर)

2.

ऊर्जा

i. बिजली उत्‍पादन
ii. विद्युत पारेषण
iii. बिजली वितरण
iv. तेल की पाइपलाइनें
v. तेल/गैस/तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) भंडारण सुविधा3
vi. गैस पाइपलाइनें4

3.

जल तथा सफाई व्‍यवस्‍था (सैनीटेशन)

i. ठोस अपशिष्‍ट प्रबंधन
ii. जल आपूर्ति पाइपलाइनें
iii. जलशोधन कारखाने
iv. सीवेज संग्रह, शोधन और निपटान प्रणाली
v. सिंचाई (बांध, नहर, तटबंधन इत्‍यादि)
vi. चक्रवात जलनिकासी प्रणाली
vii. स्‍लरी पाइपलाइनें

4.

दूर संचार

i. दूरसंचार (जड़ नेटवर्क)5
ii. दूरसंचार टॉवर
iii. दूरसंचार एवं टेलीकॉम सेवाएं

5.

सामाजिक तथा व्‍यावसायिक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर

i. शैक्षणिक संस्‍थाएं (पूंजी स्‍टॉक)
ii. अस्‍पताल (पूंजी स्‍टॉक)6
iii. तीन-सितारा या उच्‍च श्रेणी वर्गीकृत होटल जो 1 मिलियन या उससे अधिक आबादी वाले शहरों के बाहर स्थित हैंl
iv. औद्योगिक पार्क, एसईजेड, पर्यटन सुविधाएं तथा कृषि बाजार
v. उर्वरक (पूंजी निवेश)
vi. शीतागार सहित कृषि तथा बागवानी संबंधी उत्‍पादों के लिए फसल के बाद भंडारण इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर
vii. टर्मिनल बाजार
viii. मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं
ix. प्रशीतन श्रृंखला7
x. भारत में किसी भी स्‍थान पर और किसी भी तारांकित रेटिंग वाले होटल, जिनकी प्रत्‍येक की परियोजना लागत 200 करोड़ रुपये से अधिक है।
xi. कन्‍वेंशन सेंटर, जिनकी प्रत्‍येक की लागत 300 करोड़ रुपये से अधिक है।

1. कैपिटल ड्रेजिंग शामिल हैl
2. सहयोगी टर्मिनल इन्फ्रास्‍ट्रक्‍चर जैसे लदान/उतराई टर्मिनल, स्‍टेशन तथा भवन सम्मिलित हैंl
3. कच्‍चे तेल का सामरिक भंडारण सम्मिलित हैl
4. नगर गैस वितरण नेटवर्क सम्मिलित हैl
5. ब्राडबैंड/इंटरनेट उपलब्‍ध कराने वाले आप्टिक फाइबर/केबिल नेटवर्क सम्मिलित हैंl
6. आयुर्विज्ञान महाविद्यालय, पराचिकित्‍सा प्रशिक्षण संस्‍थान एवं चिकित्‍सा केंद्र सम्मिलित हैंl
7. कृषि तथा संबंधित उत्‍पादों, समुद्री उत्‍पादों एवं मांस के संरक्षण तथा भंडारण के लिए फार्म के स्‍तर पर प्री-कूलिंग के लिए शीत गृह सुविधा सम्मिलित हैl
8. इस परिपत्र की प्रत्‍याशित प्रभावी तारीख से लागू तथा पात्र परियोजनाओं के लिए तीन वर्ष की अवधि के लिए उपलब्‍ध; पात्र लागतों में भूमि और पट्टे (lease) की लागतें शामिल नहीं हैं, किंतु निर्माण के दौरान ब्‍याज शामिल है।


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