अधिसूचनाएं

आनलाइन पेमेंट गेटवेज़ द्वारा निर्यात संबंधी प्राप्तियों की प्रोसेसिंग और भुगतान (निपटान) की सुविधा - लेनदेन की राशि के मूल्य में बढ़ोत्तरी

भारिबैं/2012-13/528
ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.109

11 जून 2013

सभी श्रेणी -। प्राधिकृत व्यापारी बैंक

महोदया/महोदय,

आनलाइन पेमेंट गेटवेज़ द्वारा निर्यात संबंधी प्राप्तियों की प्रोसेसिंग और
भुगतान (निपटान) की सुविधा - लेनदेन की राशि के मूल्य में बढ़ोत्तरी

प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी -। बैंकों का ध्यान 14 अक्तूबर 2011 के ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.35 की ओर आकृष्ट किया जाता है, जिसके अनुसार प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंकों को उक्त परिपत्र में विनिर्दिष्ट शर्तों के तहत, आनलाइन पेमेंट गेटवे सेवा प्रदाताओं के साथ स्थायी व्यवस्था (के करार) के तहत प्रति लेनदेन 3000 अमरीकी डालर से अनधिक राशि के मूल्य के माल और सेवाओं के निर्यात संबंधी विप्रेषणों के प्रत्यावर्तन की सुविधा का प्रस्ताव करने (देने) की अनुमति दी गयी है।

2. निर्यातकों द्वारा लेनदेन संबंधी 3000 अमरीकी डालर के मूल्य में उचित वृध्दि करने के प्राप्त अनुरोधों के संबंध में मौजूदा अनुदेशों की समीक्षा की गयी है। तदनुसार, अब यह निर्णय लिया गया है कि आनलाइन पेमेंट गेटवे सेवा प्रदाताओं के मार्फत प्राप्त निर्यात विप्रेषणों के प्रति लेनदेन के 3000 अमरीकी डालर के मूल्य को बढ़ाकर 10,000 अमरीकी डालर कर दिया जाए। संशोधित सीमा तत्काल प्रभाव से लागू होगी।

3. 16 नवंबर 2010 के ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.17 द्वारा जारी सभी अन्य शर्तें अपरिवर्तित बनी रहेंगी।

4. प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी । बैंक इस परिपत्र की विषयवस्तु से अपने संबंधित घटकों और ग्राहकों को अवगत कराने का कष्ट करें।

5. रिज़र्व बैंक ने अब 26 अप्रैल 2013 की अधिसूचना सं.फेमा.274/2013-आरबी के जरिये विनियमों में संशोधन किया है और 29 मई 2013 के जी.एस.आर.सं.343(ई) के जरिये अधिसूचित किया है।

6. इस परिपत्र में निहित निर्देश विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (फेमा),1999 (1999 का 42) की धारा 10(4) और धारा 11(1) के अंतर्गत और किसी अन्य कानून के अंतर्गत अपेक्षित अनुमति/अनुमोदन, यदि कोई हो, पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बगैर जारी किये गये हैं ।

भवदीय,

(सी.डी.श्रीनिवासन)
मुख्य महाप्रबंधक


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